क्या "नेस्ले" कम्पनी, भारत के बच्चों को "गिनीपिग" समझती है? Nestle Foods GM Content and Consumer Protection

जैसा कि सभी जानते हैं, “नेस्ले” एक खाद्य पदार्थ बनाने वाली महाकाय बहुराष्ट्रीय कम्पनी है। बच्चों के दूध पावडर से लेकर, कॉफ़ी, नूडल्स और चॉकलेट तक इस कम्पनी के खाद्य पदार्थों की रेंज इतनी बड़ी है कि, भारत के लाखों बच्चे और बड़े नेस्ले कम्पनी द्वारा बनाये गये किसी न किसी खाद्य पदार्थ को कभी न कभी अवश्य चख चुके होंगे। कई परिवारों में नेस्ले की कॉफ़ी, नूडल्स, बिस्किट तथा बेबी फ़ूड नियमित रूप से उपयोग किये जाते हैं।

हाल ही में नेस्ले कम्पनी ने घोषणा की है कि वह भारत में जारी किए जाने वाले अपने उत्पादों में “जेनेटिकली इंजीनियर्ड” (GE) उप-पदार्थ और मिश्रण (Ingredients) मिलाये जाने के पक्ष में है। उल्लेखनीय है कि गत कई वर्षों से समूची दुनिया में GE या GM (जेनेटिकली मेन्यूफ़ैक्चर्ड) पदार्थों के खिलाफ़ जोरदार मुहिम चलाई जा रही है। जिन लोगों को जानकारी नहीं है उन्हें बताया जाये कि GE फ़ूड क्या होता है। सीधे-सादे शब्दों में कहा जाये तो किसी भी पदार्थ के मूल गुणधर्मों और गुणसूत्रों (Genes) में वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से छेड़छाड़ अथवा फ़ेरबदल करके बनाये गये “नये पदार्थ” को ज़ेनेटिकली इंजीनियर्ड कहा जाता है। थोड़े में इसे समझें तो उस पदार्थ के ऑर्गेनिज़्म को जेनेटिक इंजीनियरी द्वारा बदलाव करके उसके गुण बदल दिये जाते हैं, एक तरह से इसे डीएनए में छेड़छाड़ भी कहा जा सकता है (उदाहरण के तौर पर घोड़े और गधी के संगम से बना हुआ “खच्चर”)। इस पद्धति से पदार्थ के मूल स्वभाव में परिवर्तन हो जाता है।

ग्रीनपीस तथा अन्य पर्यावरण और स्वास्थ्य सम्बन्धी संगठनों की माँग है कि चूंकि इन पदार्थों के बारे में अब तक कोई ठोस परीक्षण नहीं हुए हैं और इन “अप्राकृतिक” पदार्थों की वजह से मानव जीवन और धरती के पर्यावरण को खतरा है।  कई देशों ने उनके यहाँ “जीएम” खाद्य पदार्थों को प्रतिबंधित किया हुआ है। दिक्कत यह है कि “नेस्ले” जैसी कम्पनी जो कि यूरोप में तो सभी मानकों का पालन करती है और खाद्य पदार्थों की पैकिंग पर सभी कुछ स्पष्ट लिखती है, वह भारत में कानून की आड़ लेकर खुले तौर पर कुछ भी बताने को तैयार नहीं है, यह हठधर्मिता है। एक बार पहले भी कोक और पेप्सी को ज़मीन से अत्यधिक पानी का दोहन करने की वजह से केरल में कोर्ट की फ़टकार सुननी पड़ी है, लेकिन इन कम्पनियों का अभियान और अधिक जोर पकड़ता जा रहा है। विश्व की सबसे बड़ी बीज कम्पनी मोन्सेन्टो और कारगिल ने दुनिया के कई देशों में ज़मीनें खरीदकर उस पर “जीएम” बीजों का गुपचुप परीक्षण करना शुरु कर दिया है। भारत में भी बीटी बैंगन और बीटी कपास के बीजों को खुल्लमखुल्ला बेचा गया तथा मध्यप्रदेश में निमाड़ क्षेत्र के किसान आज भी इन बीटी कपास की वजह से परेशान हैं और कर्ज़ में डूब चुके हैं।

नेस्ले कम्पनी के विपणन प्रबन्धक (एशिया प्रशांत) मिस्टर वास्ज़िक को लिखे अपने पत्र में ग्रीनपीस इंडिया ने कहा है कि चूंकि नेस्ले कम्पनी के करोड़ों ग्राहक भारत में भी रहते हैं, जिसमें बड़ी संख्या मासूम बच्चों की भी है जो आये दिन चॉकलेट और नूडल्स खाते रहते हैं, इसलिये हमें यह जानने का हक है कि क्या नेस्ले कम्पनी भारत में बेचे जाने वाले उत्पादों में जेनेटिकली मोडीफ़ाइड पदार्थ मिलाती है? यदि मिलाती है तो कितने प्रतिशत? और यदि ऐसे पदार्थ नेस्ले उपयोग कर रही है तो क्या पैकेटों पर इस बारे में जानकारी दी जा रही है? एक उपभोक्ता होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति को यह अधिकार है कि उसे पता हो कि जो वस्तु वह खा रहा है, उसमें क्या-क्या मिला हुआ है। उल्लेखनीय है कि कई वैज्ञानिक शोधों से यह ज्ञात हुआ है कि जीएम खाद्य पदार्थों के कारण मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल असर होता है। अब जबकि नेस्ले कम्पनी यूरोपियन यूनियन देशों में हर खाद्य वस्तु में “जीई-फ़्री” की नीति पर चलती है, तब भारत में वह क्यों छिपा रही है? यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है, क्या भारत के बच्चे, वैज्ञानिक प्रयोगों में उपयोग किये जाने वाले चूहे अथवा “गिनीपिग” हैं? (गिनीपिग वह प्राणी है, जिस पर वैज्ञानिक प्रयोग किये जाते हैं) जब कई बड़ी और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि उनके खाद्य पदार्थों में “जीएम” का मिश्रण नहीं किया जाता, तब नेस्ले को ऐसा घोषित करने में क्या आपत्ति है? जानवरों पर किये गये जीई फ़ूड के प्रयोगों ने सिद्ध किया है कि इसके कारण विभिन्न एलर्जी, किडनी के रोग तथा नपुंसकता में वृद्धि आदि बीमारियाँ होती हैं।

इस सम्बन्ध में ग्रीनपीस इंडिया ने एक “सेफ़ फ़ूड” (सुरक्षित खाद्य पदार्थ) की गाइड जारी की है, जिसमें 16 जाने माने ब्राण्ड्स का समावेश है। इस गाइड में “लाल सूची” और “हरी सूची” है, लाल सूची में शामिल कम्पनियाँ अपने उत्पादों में या तो जीई मिश्रण मिलाती हैं या फ़िर वे यह घोषणा करने में हिचकिचाहट दिखा रही हैं, जबकि हरी सूची में शामिल कम्पनियाँ ईमानदारी से घोषणा कर चुकी हैं कि उनके उत्पादों में किसी प्रकार का “जीएम” मिश्रण शामिल नहीं है। इस सेफ़ फ़ूड गाईड में केन्द्र सरकार द्वारा “जीएम” मिश्रण को आधिकारिक रूप से मिलाने के बारे में अनुमति के बारे में भी बताया गया है। बीटी-बैंगन की तरह ही “जीई” चावल, टमाटर, सरसों और आलू भी केन्द्र सरकार की अनुमति के इन्तज़ार में हैं।

लाल सूची में शामिल हैं, नेस्ले, कैडबरी, केल्लॉग्स, ब्रिटानिया, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एग्रोटेक फ़ूड्स लिमिटेड, फ़ील्डफ़्रेश (भारती ग्रुप), बेम्बिनो एग्रो इंडस्ट्रीज़, सफ़ल आदि, जबकि हरी सूची (सुरक्षित) में एमटीआर, डाबर, हल्दीराम, आईटीसी, पेप्सिको इंडिया, रुचि सोया आदि शामिल हैं। इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी सैयद महबूब (syed.mehaboob@greenpeace.org, 09731301983) से ली जा सकती है।

नेस्ले कम्पनी का पिछला रिकॉर्ड भी बहुत साफ़-सुथरा नहीं रहा है, कई बार यह कम्पनी विवादों में फ़ँस चुकी है और 1977 में एक बार तो पूरे अमेरिका की जनता ने इसके सभी उत्पादों का बहिष्कार कर दिया था, बड़ी मुश्किल से इसने वापस अपनी छवि बनाई। नेस्ले का सबसे अधिक विवादास्पद प्रचार अभियान वह था, जिसमें इसने अपने डिब्बाबंद दूध पावडर को माँ के दूध से बेहतर और उसका विकल्प बताया था। इस विज्ञापन की आँधी के प्रभाव में आकर कई पश्चिमी देशों में नवप्रसूताओं ने अपने बच्चों को दूध पावडर देना शुरु कर दिया था, जबकि चिकित्सकीय और वैज्ञानिक दृष्टि से माँ का दूध ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है। एक बार स्विट्ज़रलैण्ड में भी इसकी कॉफ़ी के बीज विवादों में फ़ँस चुके हैं, तब माफ़ी माँगकर इसने अपना पीछा छुड़ाया था। हाल ही में नेस्ले कम्पनी ने यूरोपियन यूनियन में कॉफ़ी के जीएम बीजों पर पेटेंट हासिल किया है (http://www.organicconsumers.org/ge/coffee060417.cfm) जिसका ब्राजील के कॉफ़ी उत्पादकों ने कड़ा विरोध किया है, भारत में भी केरल के कॉफ़ी उत्पादकों पर भविष्य में इसका असर पड़ सकता है।

यदि आप भी जागरूक उपभोक्ता हैं तो नेस्ले कम्पनी के भारत स्थित दफ़्तर में फ़ोन लगाकर इसके उत्पादों में जीएम मिश्रण के बारे में पूछताछ कर सकते हैं, कॉल कीजिये 0124-2389300 को। अब तक 10,000 से अधिक लोग इस बारे में पूछताछ कर चुके हैं, शायद इस प्रकार ही सही, नेस्ले कम्पनी भारत वालों के प्रति अधिक जवाबदेह बने। नेस्ले के एक उपभोक्ता ने फ़ोन पर मैगी के टू मिनट नूडल्स के विज्ञापन को लेकर आपत्ति जताई, और खुला चैलेंज दिया कि कम्पनी दो मिनट में नूडल्स बनाकर दिखाये, ताकि भारत भर में हजारों रुपये के ईंधन की बचत हो सके। एक अन्य ग्राहक ने यह अपील की, कि मैगी के पैकेट पर यह बताया जाये कि दो मिनट में नूडल्स पकाने के लिये फ़्राइंग पैन की लम्बाई-चौड़ाई और गैस की लौ कितनी बड़ी होनी चाहिये, कम से कम इस बारे में ही लिख दें… लेकिन न तो कोई जवाब आना था, न आया…।

बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ धड़ल्ले से भारत की ज़मीन से पानी उलीच रही हैं, कोक और पेप्सी शकर के सबसे बड़े ग्राहक हैं (शकर की कीमतें बढ़ने के पीछे एक कारण यह भी है), चीन से आने वाले दूध पावडर में “मैलामाइन” (एक जहरीला कैंसरकारक पदार्थ) होना साबित हो चुका है, सॉफ़्ट ड्रिंक्स में पेस्टीसाइड भी साबित हो चुका है, एक बार “कुरकुरे” को गरम तवे पर रखकर देखिये, अन्त में प्लास्टिक की गंध और दाग मिलेगा, मतलब ये कि इनके लिये कोई कायदा-कानून नहीं है।

कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसी कोई भी कम्पनी तब तक नहीं सुधरती जब तक कि जनता इसके उत्पादों का बहिष्कार न करने लगे, जब धंधे पर चोट पड़ती है तब ये सारे कानून-कायदे मानने लगती हैं। समस्या यह है कि भारत का उपभोक्ता संगठित होना तो दूर, जागरूक भी नहीं है, और सरकारों को व्यापार के लिये अपनी सभी सीमाएं बगैर सोचे-समझे खोलने से ही फ़ुर्सत नहीं है। इन बड़ी-बड़ी कम्पनियों का तब तक कुछ नहीं बिगड़ेगा, जब तक देश में “बिकाऊ नेता” और “भ्रष्ट अफ़सरशाही” मौजूद है, सिर्फ़ प्रचार पर लाखों डालर खर्च करने वाली कम्पनी, देश के हर नेता को खरीदने की औकात रखती हैं। रही मीडिया की बात, तो उनमें भी अधिकतर बिकाऊ हैं, कुछ जानकर भी अंजान बने रहते हैं, जबकि कुछ के लिये क्रिकेट, फ़िल्मों, सलमान, धोनी, और छिछोरेपन के अलावा कोई खबर ही नहीं है…। जनता ही जागरूक बनकर ऐसे उत्पादों का बहिष्कार करे तो शायद कुछ बात बने…

ग्रीनपीस द्वारा जारी “सेफ़ फ़ूड” गाईड की छोटी कॉपी यहाँ से डाउनलोड करें…
http://www.greenpeace.org/india/assets/binaries/pocket-guide.pdf

ग्रीनपीस द्वारा जारी “सेफ़ फ़ूड” गाईड की पूरी कॉपी यहाँ से डाउनलोड करें…
http://www.greenpeace.org/india/assets/binaries/pocket-guide.pdf

(लेख और चित्र सामग्री स्रोत – ग्रीनपीस इंडिया)

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68 Comments

  1. September 22, 2009 at 7:27 am

    कुछ लोग बजारवाद तो कुछ बहुराष्ट्रिय कम्पनियों को कोस कर छुट्टी पा लेंगे. मगर जरूरत है जागरूखता की. क्या देसी क्या विदेशी सभी निर्माता बेईमान हो सकते है. गलत विज्ञापन दिखा कर मोटी कमाई कर रहे हैं. जो समझदार है वे ऐसे उत्पादों से दूर रहते है. मगर विज्ञापन की मार ऐसी होती है कि लपेटे में ले ही लेती है. हाल में एक पेय का विज्ञापन देखें….किसी संस्था में साबित हुआ है कि इसे पीने वाले बच्चे तेजी से बढ़ते है….अब ऐसी संस्था है ही कहाँ?

  2. September 22, 2009 at 7:37 am

    यह पोस्ट अबतक की मेरी नजर में सबसे अच्‍छी पोस्ट है, जिसके लिये मैं पूरी तरह आपके साथ हूं, वाकई जनता ही जागरूक बनकर ऐसे उत्‍पादों का बहिस्‍कार करे, जनता जब करेगी तब करेगी फिलहाल तो हम ब्लागर इस लेख को पसंद का चटका लगा देते हैं, मैं लगा चुका,कैरानवी का चटका भी आपको मुबारक हो

  3. September 22, 2009 at 7:41 am

    एक उत्तम बिषय वस्तु चुनी अपने सुरेश जी ! जहां तक मैं समझता हूँ कि एक सीमित मात्रा में यदा-कदा जैनैतिकलि इंजीनियर्ड फूड को लेने के कोई ख़ास नुकशान नही है, लेकिन जिस तरह आज हर मध्यमवर्गीय परिवारों में यह एक चलन सा ( कुछ-कुछ मजबूरी भी ) बन गया है इस तरह के आनुवंशिक इंजीनियर खाने के सेवन का, वह निश्चित तौर पर घातक है! यह दुनिया में आज भी एक बड़े विवाद का विषय बना हुआ है कि क्या ये GE अथवा GM किस्म के भोजन कितने सुरक्षित है? इन भोजन को तैयार करते वक्त इनकी प्रोपर टेस्टिंग(उचित जांच) की व्यवस्था नहीं है, और अगर है भी तो की नहीं जाती है ! प्रकृति के नियमो से भिन्न इसके मापदंड है, लम्बे अन्तराल के बाद इसके क्या प्रभाव है, अभी तक यह शोध का ही विषय बना हुआ है! कुल मिला कर इसके नुकशान अधिक है फायदे कम जैव विविधता की इस चकाचौन्द में विकासशील देशों की दुर्दशा का फायदा उठाने के लिए ये कंपनिया किसी भी हद तक जा सकती है ! सरकार भी इन विदेशी कम्पनियों के आगे घुटने टेके है ! जरुरत आज यही है कि आम जनता को इसके गुण-दोष के बारे में जागरूक किया जाए !

  4. September 22, 2009 at 7:56 am

    जब तक इनके धंधे पर या फिर इनके पिछवाडे पर चोट न पड़े ये नहीं सुधरने वाले. मैं तो बाज़ार की बनी कोई भी चीज खाने से परहेज करता हूँ. मैगी, पेप्सी, कोक वगैरह स्कूल, कालेज के ज़माने में खाए पिए थे, अब पूरी तरह त्याग दिए हैं.

  5. September 22, 2009 at 8:06 am

    हमारे देश के बच्चे तो क्या हर व्यक्ति गिनीपिग ही तो हैं। क्या फर्क पड़ेगा यदि इतनी बड़ी आबादी के कुछ लोग मर जाएँ, अपंग हो जाएँ या बीमार रहने लगें? हमारा देश तो एक प्रयोगशाला है जहाँ पर विदेशी उन प्रयोगों को करते हैं जिन्हे वे अपने देश में नहीं कर सकते। और हमारा कानून तो इतना लचीला है जिसे जैसा चाहो तोड़ मरोड़ लो। हमारे कानून में तो दम ही नहीं है इन्हें रोक लेने का।जो बाते इस लेख में हैं वो बातें हमारे देश के खाद्य विभाग को नजर नहीं आतीं, आयेंगी भी कैसे? आँखों पर पट्टी बांध कर रखने की कीमत जो मिल चुकी होती है। हमारे नेता तो बिके हुए ही हैं, हमारे लोग भी बिकाऊ हैं। रुपयों के लिए कुछ भी करने को तैयार हो सकते हैं। यदि कोई नेस्ले कंपनी पर दावा दायर कर देगा तो उसके बचाव के लिए भारत का ही वकील आगे आयेगा।

  6. September 22, 2009 at 8:12 am

    वैचारिक रूप से पूर्णतया विपरीत होने के बावजूद इस मुद्दे में आपके साथ. पश्चिम की जो घृणित मुहीम है वह हमें, हम नहीं रहने देगी. इसके लिए है. गाँधी जी की तरह ही एक असहयोग आन्दोलन चलने की जिसके तहत हम इन उत्पादों का बहिस्कार करें….हिम्मत अगर साथ दे रही तो बहिष्कार कर दें…स्वच्छ सन्देश की तरफ से इस पोस्ट पूर्णतया सहमती और बधाई…चटका मैंने भी लगा दिया. एक बात और समलैंगिकता के मुद्दे पर और इस मुद्दे पर (और भी कई मुद्दे हैं जहाँ हम साथ है, को लेकर आगे बढ़ना चाहिए)तो फ़िरआओ उस बात की तरफ जो हममें और तुममें यकसां (समान) हों.

  7. September 22, 2009 at 8:52 am

    जागरूक करती अच्छी पोस्ट

  8. September 22, 2009 at 8:55 am

    सुरेश भाई,बहुत बढ़िया आलेख लिखा है आपने !सच में भारतीय उपभोगता ज़रा सा भी जागरूक नहीं है, अगर हम लोग थोडा सा भी सवाल पूछने की आदत डाल ले तो यह कंपनियां हमे धोखे में नहीं रख सकती ! बस जर्रूरत है अपने आप को जागरूक बनाने की !

  9. September 22, 2009 at 9:09 am

    सुरेश जी आप ने लेख बहुत अच्छा लिखा, ओर इस के जबाब मै मै जी.के. अवधिया जी की टिपण्णी से सहमत हुं, ्मेने अकसर देखा है, भारत मै लोगो को महंगी से महंगी चीजे खरीदने का शोक है, लेकिन उस की पहचान, उस मै क्या है कोई नही देखता, तो यह कम्पनिया क्यो ना लुटे.ओर वो ही चीजे हमारे यहां उस से अच्छी ओर उच्च दर्जे की भारत से आधे दाम पर मिल जाती है, यानि जब तक हम जागरु नही होते हम ऎसे ही छले जायेगे

  10. September 22, 2009 at 9:47 am

    बहुत ही सुन्दर आँखें खोलने वाली पोस्ट. क्या नेस्ले के विरुद्ध हम सब भी लाम बद्ध नहीं हो सकते.

  11. September 22, 2009 at 10:18 am

    बहुत बढ़िया आलेख लिखा है आपने !सच में भारतीय उपभोगता ज़रा सा भी जागरूक नहीं है, अगर हम लोग थोडा सा भी सवाल पूछने की आदत डाल ले तो यह कंपनियां हमे धोखे में नहीं रख सकती ! बस जर्रूरत है अपने आप को जागरूक बनाने की !प्रणाम स्वीकार करें

  12. September 22, 2009 at 10:18 am

    वन्‍दे ईश्‍वरम टीम की ओर से अच्छी पोस्ट पर बधाई

  13. September 22, 2009 at 10:49 am

    hamen jagruk hona padega,,anaytha bhot der ho jayegi.

  14. September 22, 2009 at 10:57 am

    अरे वह common hindu कहां है जो लिखते थे your excellent post has been back-linket in hinduonline.blogspot.com वह नहीं आते तब भी हम लिखेंगे (विचार और अनुमति के पश्‍चात)your excellent post has been back-linket in hamarianjuman.blogspot.com

  15. September 22, 2009 at 11:11 am

    आज ही ऐसे सारे प्राडक्‍टस घर से निकाल बाहर करूंगा, अपने बच्‍चों में यह विष नहीं जाने दूंगा, और प्रण करता हूं कि पूरी जिन्‍दगी ऐसे प्राडकस की मुखालफत करता रहूंगा,

  16. Ghalib said,

    September 22, 2009 at 11:24 am

    भाया ब्लागिंग मे पहली बार देखने को मिल रहा हे के कटटर हिन्‍दु-मुस्लिम एक होगये हों, मेरा भारत महान

  17. September 22, 2009 at 11:55 am

    इस शोधात्मक आलेख के द्वारा जनजागरण करने के लिये मेरा अनुमोदन स्वीकार करें.पश्विमी कंपनियों के करमों पर नजर/नियंत्रण रखना जरूरी है.सस्नेह — शास्त्रीहिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती हैhttp://www.Sarathi.info

  18. September 22, 2009 at 12:03 pm

    मेरी समझ में कडे कानूनी प्रावधानों का न होना इस तरह की घटनाओं का प्रमुख कारण है।( Treasurer-S. T. )

  19. September 22, 2009 at 1:13 pm

    सुरेश जी इस पोस्ट के लिए बधाई! देश और जनता के असली शत्रु यही बहुराष्ट्रीय निगम हैं। इन पिशाचों की कारगुजारियाँ चुपके चुपके चल रही हैं। हम उलझे रहें आंतकवाद, साम्प्रदायिकता, सेकुलरिज्म और ये इस बीच हमारा खून खींच कर हमें रक्तहीन कर दें।

  20. September 22, 2009 at 1:24 pm

    कुरकुरे के जबरदस्त झटके से मैं स्वयं ही दो चार हो चुकी हूँ…..आठ साल पहले एक दिन खाली पेट में इसे नाश्ते की तरह खा लिया था और वह स्थिति हो गयी थी कि लगा जान ही चली जायेगी.चौबीस घंटे तक बेहोश रही थी….वर्षों से किसी भी तरह के आइसक्रीम,चाकलेट,चिप्स कुरकुरे या कोल्ड ड्रिंक से पूरा परहेज रखती हूँ और जहाँ तक हो सके इसके नुक्सान से दूसरों को भी अवगत कराती हूँ…आपका कोटिशः आभार इस सत्य को सबके सामने लाने के लिए…इन सबके विरोध में हमें एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी ही होगी.

  21. haal-ahwaal said,

    September 22, 2009 at 2:14 pm

    upbhoktavad ne munafakhori ki pravrrtti betahasha badhayee hai. aaj har koi jaldi se jaldi ameer hona chah-ta hai. baazaar me maujood har sukh-suvidha ki cheez apne ghar me dekhna chah-ta hai. iske liye bhale hi usey galat taur-tarike se paisa kamana pade, usey gurez nahi.bahurashtriya companies ke gorakh dhandhe par kalam chalakar apne bahut hi saartha kaam kiya hai. sadhuvad ke paatra hain aap.aksar jab bazar ki rajneeti ki baat hoti hai to national bourgeoisie aur international bourgeoisie ke beech sangharsh ki baat aati hai. munafakhori dono ki pravritti hoti hai, lekin national bourgeoisie ke paksha me ye daleel di jaati hai ki wo kam se kam deshhit ka to dhyan rakhta hi hai. halanki reliance aur tata ke udaharan ne is baat ko galat saabit kar diya hai.aaj halat ye hai ki bahurashtriya ke saath-saath rashtriya companies bhi grahko (ke roop me desh ki janta ko) lootne me koi kor-kasar baaki nahi rakh rahi. aap agar branded cheez nahi khareed-te to bahut mumkin hai ki apko kisi local company ka nakli saamaan pakda diya jaye. nakli dudh, nakli mawa, nakli ghee, nakli davaye, nakli khoon, har cheez me nakli ki sambhavna…milavat ki sambhavna….shayad hi koi cheez bachi ho jisme naki ki gunzaish na bachi ho…MNC's ke liye to kayee jagah ye nakli product bachav ke kaam aate hain. koi shikayat mili to nakli ki daleel dekar chhutkara pa lete hain.sureshji, iss desh ko jitna baahar walo se hai, us se kahi jyada khat-ra bheetarwalo se hai. ye milavatkhor bhi MNC ki tarah iss desh ke aam aadmi ko, uski sehat ko betarah nuksaan pahuncha rahe hain. isliye kanoon MNC ke khilaf hi nahi, in rakshaso ke khilaf bhi sakht hona chahiye.

  22. September 22, 2009 at 2:58 pm

    सुरेश जी अवधिया जी ने कहा है – "हमारा देश तो एक प्रयोगशाला है जहाँ पर विदेशी उन प्रयोगों को करते हैं जिन्हे वे अपने देश में नहीं कर सकते।"अब जब अपनी पब्लिक ही डिब्बा बंद चीजों पे मरी जा रही है तो क्या किया जाए ? अब हमलोग गन्ने का जूस या नारियल का पानी भी packed ही पसंद करने लगे हैं | तो भाई बात साफ़ है जनता ने पसंद किया और मुल्तिनाशन और अपनी देशी कंपनी ने आपको उचे दामों पे product उपलब्ध करवा दिया | अब कंपनी तो भाई सुधरने से रही और अपने देश का कानून तो सब जानते ही हैं …. ! अपने देश की जनता तक ये खबर पहुँचेगी भी नहीं … जैसे तैसे पहुँच भी गई तो जनता हमारे आपके बोले पे भरोषा कम और कंपनी के विज्ञापन पे अगाध समर्पण प्रर्दशित करेंगे … कंपनी को कोई असर नहीं होने वाला |

  23. September 22, 2009 at 3:33 pm

    मुंबई में महिला के साथ गैंगरेप कर जिंदा जलाया, क्या आर एस एस के लोग इसके विरोध में मुंबई बंद करेंगे?कोई देगा इस सवाल का जवाब?

  24. September 22, 2009 at 3:49 pm

    बहुत अच्छी और उपयोगी पोस्ट,मेरा मानना है पूंजीवादी चाहे नेस्ले हो या कोई भारतीय कम्पनी हम सबको गिनी पिग ही समझते है…उनकी जेबे भरनी चाहिए.भारतीय सस्तामाल भी हजारों किसानो की जमीं पर कारखानों का जहरीला पानी छोड़ कर तैयार किया जाता है….आपके अगले अंको में इन विषयों पर आपकी तेज धार कलम की फरमाइश कर रहा हूँ…आशा करता हूँ निराश नहीं करेंगे.

  25. rajitsinha said,

    September 22, 2009 at 4:30 pm

    आप की इस पोस्ट् को तो CCD, BARISTA और MAC-D के बाहर बडे बडे अक्षरो मे लिख कर लगा देना चाहिये.

  26. Common Hindu said,

    September 22, 2009 at 5:22 pm

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  27. September 22, 2009 at 5:53 pm

    …सुरेश जी, सर्व प्रथम तो धन्यवाद आपको यह मुद्दा उठाने के लिये क्योंकि इस संबंध में जानकारी के अभाव में यह मुद्दा हमारे किसानों व अन्य संगठनो् के लिये भावनात्मक मुद्दा बन सकता है।आइये सिलसिले वार चर्चा करते हैं:-१-जी एम फूड क्या है?Q1. What are genetically modified (GM) organisms and GM foods?उत्तर:- Genetically modified organisms (GMOs) can be defined as organisms in which the genetic material (DNA) has been altered in a way that does not occur naturally. The technology is often called “modern biotechnology” or “gene technology”, sometimes also “recombinant DNA technology” or “genetic engineering”. It allows selected individual genes to be transferred from one organism into another, also between non-related species.Such methods are used to create GM plants – which are then used to grow GM food crops.२-जी एम खाद्य की जरूरत क्यों है?Q2. Why are GM foods produced?उत्तर:-GM foods are developed – and marketed – because there is some perceived advantage either to the producer or consumer of these foods. This is meant to translate into a product with a lower price, greater benefit (in terms of durability or nutritional value) or both. Initially GM seed developers wanted their products to be accepted by producers so have concentrated on innovations that farmers (and the food industry more generally) would appreciate.The initial objective for developing plants based on GM organisms was to improve crop protection. The GM crops currently on the market are mainly aimed at an increased level of crop protection through the introduction of resistance against plant diseases caused by insects or viruses or through increased tolerance towards herbicides.Insect resistance is achieved by incorporating into the food plant the gene for toxin production from the bacterium Bacillus thuringiensis (BT). This toxin is currently used as a conventional insecticide in agriculture and is safe for human consumption. GM crops that permanently produce this toxin have been shown to require lower quantities of insecticides in specific situations, e.g. where pest pressure is high.Virus resistance is achieved through the introduction of a gene from certain viruses which cause disease in plants. Virus resistance makes plants less susceptible to diseases caused by such viruses, resulting in higher crop yields.Herbicide tolerance is achieved through the introduction of a gene from a bacterium conveying resistance to some herbicides. In situations where weed pressure is high, the use of such crops has resulted in a reduction in the quantity of the herbicides used.(जारी है)

  28. September 22, 2009 at 5:56 pm

    ३-क्या जी एम खाद्य सुरक्षित हैं?Q३. Are GM foods safe?उत्तर:-Different GM organisms include different genes inserted in different ways. This means that individual GM foods and their safety should be assessed on a case-by-case basis and that it is not possible to make general statements on the safety of all GM foods.GM foods currently available on the international market have passed risk assessments and are not likely to present risks for human health. In addition, no effects on human health have been shown as a result of the consumption of such foods by the general population in the countries where they have been approved. Continuous use of risk assessments based on the Codex principles and, where appropriate, including post market monitoring, should form the basis for evaluating the safety of GM foods.उपरोक्त तीनों प्रश्न-उत्तर WHO की साइट से साभार४-अब देखिये दुनिया में कहां कहां जी एम खाद्य उगाये जाते हैं?उत्तर:- देखिये यह लिंक http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/0/07/Gm_accept_map.png ५- चिकित्सक लोग क्या कहते हैं जी एम खाद्यों के बारे में?उत्तर:-Present knowledge on GM food safety:-A 2008 review published by the Royal Society of Medicine noted that GM foods have been eaten by millions of people worldwide for over 15 years, with no reports of ill effects.[5] Similarly a 2004 report from the US National Academies of Sciences stated: "To date, no adverse health effects attributed to genetic engineering have been documented in the human population."[1] A 2004 review of feeding trials in the Italian Journal of Animal Science found no differences among animals eating genetically modified plants.[6] A 2005 review in Archives of Animal Nutrition concluded that first-generation genetically modified foods had been found to be similar in nutrition and safety to non-GM foods, but noted that second-generation foods with "significant changes in constituents" would be more difficult to test, and would require further animal studies.[2] However, a 2009 review in Nutrition Reviews found that although most studies concluded that GM foods do not differ in nutrition or cause any detectable toxic effects in animals, some studies did report adverse changes at a cellular level caused by some GM foods, concluding that "More scientific effort and investigation is needed to ensure that consumption of GM foods is not likely to provoke any form of health problem".[7]Worldwide, there are a range of perspectives within non-governmental organizations on the safety of GM foods. For example, the US pro-GM pressure group AgBioWorld has argued that GM foods have been proven safe,[8] while other pressure groups and consumer rights groups, such as the Organic Consumers Association,[9] and Greenpeace[10] claim the long term health risks which GM could pose, or the environmental risks associated with GM, have not yet been adequately investigated. They also claim that truly independent research in these areas is systematically blocked by the GM corporations which own the GM seeds and reference materials.स्रोत:- विकिपिडिया (अभी और है)

  29. September 22, 2009 at 5:59 pm

    ग्रीन पीस इन्डिया की रेड लिस्ट में शामिल हैं:-AgroTech FoodsSundrop Sunflower Oil, Crystal, Rath Vanaspati, Sudham (Mustard Oil), Act II Popcorn,Healthy World (Dried Green Peas), Pudding Mix, Swiss Mix (Cocoa Mix)Bambino Agro IndustriesVermicelli, Ada-Ada/Rice Ada, Soups, Namkeens, Sweets, Bambino Pasta, InstantMixes, Blended SpicesBharti EnterprisesFieldFresh Vegetables, FieldFresh Fruits, FieldFresh Pre-cuts, Vegetable Noodle Mix,Pizza Mix, Sambhar Mix, Green Chutney MixBritannia IndustriesTiger, Milkman, Good day, Daily Fresh Breads and Rusks, Cookies, Cakes, Butter, DahiCadbury IndiaDairy Milk, Five Star, Perk, Éclairs, Gems, Bournville, Celebrations, Cadbury Bytes,Bournvita, Halls, GumsGodrej FoodsNutrine; Jumpin, Xs, Sofit (Soymilk), SmartCook Tomato Puree; Godrej Cooklite,Godrej Oil and Godrej Vanaspati and Godrej TeaKellogg IndiaKelloggs Corn FlakesHindustan UnileverBrooke Bond, Lipton, Brooke Bond Bru, Kissan, Annapurna, Knorr; Kwality WallsNestlé IndiaNestlé Everyday Whitener, Nestlé Slim Milk, Nestlé Dahi; Nescafe Classic, Milo,Nestea, Maggi Noodles, Maggi Sauces, Maggi Pichkoo, Maggi Magic Cubes, NestléKit Kat, Nestlé Munch, Nestlé Bar-One, Polo, Nestlé Éclairs, Baby Foods: Cerelac,Nestum, Lactogen.SafalFresh Fruits; Fresh Vegetables; IQF Vegetables, Pickles, Jams, Tomato foods,Squash, Fruit Drinksपूछने की गुस्ताखी कर सकता हूँ कि आपने केवल नेस्ले को ही टारगेट क्यों किया है?अब मेरा निष्कर्ष:जेनेटिक इंजीनियरिंग से दवाइयां और वैक्सीन तथा हारमोन तो काफी समय से बनते हैं और कामयाब भी हैं रही बात खाद्यों की, हमें मानव जाति की सामूहिक समझ और ज्ञान पर विश्वास करते हुऐ इसे हौव्वा नहीं बनाना चाहिये,लगातार बड़ रहे खाद्य संकट का हल खोजने की सामर्थ्य है इस तकनीक में… धन्यवाद!

  30. September 22, 2009 at 6:34 pm

    @ parveen shah- jis post ko kairanvi ka samarthan parapt ho us post par sochke aaya karo,,,, ,,,,mujhe lagta he tumhen ziyada nahin batana padega waqif ho kairanvi se aur uske saleeqe se…. kisi bhi mukhalif ko pagal karne men mujhe teen hafte nahin lagte,, .aajkal koi naya shikar nahin mere pass fursat hi fursat he..soch lo… ..

  31. September 22, 2009 at 6:37 pm

    bhai chiplunkar sahb,,,janhit men deshhit men aapko support kiya aur aap khamosh ho..kiyon?

  32. September 22, 2009 at 6:39 pm

    janab woh islam dushman kahan hen,,jo aapke hamesha sath rehte the unka aapko samarthan na karna sabit karta he bas woh aag lagane men aapke sath hen,,,,jab desh hit jan hit men baat karoge…gayab…kiya men ghalat keh raha hoon?

  33. September 22, 2009 at 6:49 pm

    woh al bal sal,,aur,,,woh mard jo aurton ka naam rakh ke aapke sath hote hen,,,,,, agar woh kal tak yahan apna samarthan dene yahan nahin aaye to kal men jaoonga unke blogs men unhen yaad dilane…. chetawniab men computer se uth raha hoon ke ab yeh post 35 comments se chitthajagat aur 16 vote se blogvani par top par aagayi he, mujhe kiya kiya karna pada yeh to men janoon ya khuda jane.

  34. September 22, 2009 at 7:17 pm

    Sir…….apka yeh lekh kaafi achcha laga…… mere paas aapko support karne ke infinite kaaran hai…… hats off to you…… A+++++see my blog also….the latest post……

  35. September 22, 2009 at 7:27 pm

    बहुत ही बेहतरीन जानकारी। उमदा विमर्श। इस संबंध में हम जो कर सकते हैं, करेंगे। गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है इस मुद्दे को। ऐसा कोई तरीका बताएं कि सभी ब्लॉगर्स एक आवाज उठा सकें, ऐसे उत्पादों के खिलाफ। एक निवेदन और करना चाहंूगा, ऐसे ही उत्पादों की वजह से चीन में इसी साल की पहली तिमाही में हजारों बच्चे मारे गए, लाखों कि किडनियों में प्लास्टिक के जाले जैसी पथरी बन गई। इसी वजह से चीन सहित कई ऐसे देशों में पाउडर वाला दूध तक बैन कर दिया गया। जहां तक मुझे ध्यान आ रहा है थाईलैंड और कंबोडिया सरकार ने भी चीन की सरकार की तरह कड़ा कदम उठाया है। मामले की तह तक जाएं और विस्तार से खुलासा करें। हम आपके साथ हैं।हां, मैंने भी चटका लगा दिया है और मेरे पास बदले में एक ई-मेल भी आ गया है। मैं भी इस मामले का और विस्तार से अध्ययन करना पसंद करूंगा। शुक्रिया उम्दा मुद्दा उठाने के लिए।

  36. September 22, 2009 at 8:25 pm

    कहत कबीरा…सुन भई साधो आप थोडा हमारे भी सवाल का जवाब दीजिये : मुंबई में महिला के साथ गैंगरेप कर जिंदा जलाया, क्या कांग्रेस पार्टी या सोनिया-राहुल गाँधी, मुलायम-लालू, कम्युनिस्ट या मुस्लिम लीग या अन्य कोई संगठन इसके विरोध में मुंबई बंद करेंगे???

  37. September 23, 2009 at 2:07 am

    अत्यंत सार्थक विषय. सम्पूर्ण राष्ट्र में जन-जागरण और सरकारी नीतियों से ही इस समस्या का उचित समाधान मिलना संभव हैं किन्तु जितना यह शाब्दिक रूप से लिखना सहज हैं उतना ही इसका क्रियान्वन दुष्कर ….

  38. September 23, 2009 at 3:46 am

    बहुत ही अच्छा आलेख, पर ग्रीनपीस को सभी रेडलिस्टेड कंपनियों के खिलाफ़ मुहीम चलाना चाहिये, अभी १-२ दिन पहले ही एक ईमेल आया था इसी संदर्भ में तो हमने भी ग्रीनपीस में वोट किया था नेस्ले के खिलाफ़। पर प्रवीण शाह जी की टिप्पणी में तो ऐसे कई प्रोडक्टस दिखे जिसे हम धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। लगता है कि २-३ दिन बैठकर एक लिस्ट बनाना पड़ेगी कि क्या खाना चाहिये और क्या नहीं।

  39. September 23, 2009 at 3:51 am

    …"ab men computer se uth raha hoon ke ab yeh post 35 comments se chitthajagat aur 16 vote se blogvani par top par aagayi he, mujhe kiya kiya karna pada yeh to men janoon ya khuda jane22 September, 2009 11:49 PM"आदरणीय सुरेश जी,मैं जानता हूं कि पोस्ट लिख देने के बाद आप हम जैसे नाचीजों की टिप्पणियों या सवालों का जवाब नहीं देते पर ऊपर जो कैरानवी भाई का लिखा quote किया है उस पर आपके चुप रहने से गलत संदेश जायेगा।

  40. September 23, 2009 at 4:10 am

    अजी! कम्पनियाँ भारतीय बच्चों को "गिनीपिग" नहीं "पिग" मानती हैं.जनजागृति के इस अभियान में हम सुरेश जी के साथ हैं.

  41. September 23, 2009 at 4:13 am

    …@विवेक रस्तोगी,धन्यवाद आपको कि आपने मेरी टिप्पणी की ओर भी ध्यान दिया…यह जांच जरूरी है कि NESTLE को ही क्यों SINGLE OUT किया जा रहा है…कोई स्वदेशी तो नहीं उतर रहा INFANT FEED के बाजार में ???मेरी राय में तो ऐसी कोई लिस्ट बनाने की आवश्यकता नहीं है आपको,१५ साल से हम प्रयोग कर रहे हैं जी एम खाद्य पदार्थों को, वैसे मैं बतला दूं के आज विश्व का अधिकांश मक्का और कपास जी एम है और हमारे खाद्य तेलों (रिफाइन्ड) के दो प्रमुख स्रोत हैं corn oil और cotton seed oil.

  42. September 23, 2009 at 5:42 am

    वाह भाऊ,कमाल का लिखा है।लेकिन सवाल ये है ईस्ट इंडिया कंपनी के राज के बाद से विदेशियों की गुलामी की लत मे गिरफ़्तार लोगो से भरे पड़े इस देश को बचायेगा कौन? अब इस्ट,वेस्ट सभी कंपनियों ने बस एक बाज़ार मान लिया है और हर आदमी गिनीपिग हो गया है?ऐसे मे आपका ये प्रयास सार्थक़ पहल है और मै इसका स्वागत करता हूं।

  43. September 23, 2009 at 5:45 am

    "पश्विमी कंपनियों के करमों पर नजर/नियंत्रण रखना जरूरी है."गलत.हर गलत काम करने वाली कम्पनी पर नजर रखनी चाहिए. क्या रासायणिक दूध बनाने वालों को इसलिए माफ किया जा सकता है कि वे भारतीय हैं?

  44. September 23, 2009 at 6:36 am

    @ प्रवीण शाह – अगर हम पाकिस्‍तान पर बम डालें तो तुम कहोगे चीन पर क्‍यूं नहीं डाला, अरे भाई जो नमाज पढता है हम उसे यह नहीं कहते कि तू रोजे क्‍यूं नहीं रखता है, जो एक काम अच्‍छा करता है उसकी हौसला अफजाई करेंगे तो वह दूसरा तीसरा भी अच्‍छा कर सकता है, तुम देशहित या जनहित में कुछ लाओ, मैं उसमें हर तरह से समर्थन करूंगा, कैरानवी केवल दो लाइन कम कमेंटस लिखने तक ही समर्थन नहीं करता है, मैंने दिल से इस पोस्ट को समर्थन किया है, पहला दिन देख लिया कल टाप पर इसको छोडा था आज की मेरे पास बहुत सी प्‍लानिंग हैं, तुम तो किया अच्‍छे काम में मेरे आगे सारा ब्लागजगत भी आजाये तो भी….

  45. September 23, 2009 at 6:38 am

    @ कैरानवी – आपका शुक्रिया जो इस महत्वपूर्ण मसले पर आप साथ आये, असल में देशहित के कुछ मुद्दों पर हमारी-आपकी सहमति बन सकती है, बशर्ते बीच में "धर्म प्रचार" न आ जाये। कई अन्य लोग भी समर्थन में आये, जिन पर आपने व्यंग्य कसा…। इसलिये आपसे पुनः एक बात अर्ज़ करना चाहता हूं हर बात पर "चैलेंज" देना जरूरी नहीं होता, तर्क में भी बात रखी जा सकती है, जैसे कि प्रवीण शाह ने रखी। आप और सलीम अभी भी इस बात को समझने को तैयार नहीं हैं कि हिन्दी ब्लॉग जगत में भी सब पढ़े-लिखे लोग हैं जो आपकी "प्रचार" लिंक देख-देखकर आपके बारे में "विशेष राय" बना चुके हैं, मैं तो कभी कोई टिप्पणी डिलीट नहीं करता, लेकिन कुछ ब्लॉगरों ने आपकी टिप्पणियों को भी डिलीट करना शुरु कर दिया है। यदि मेरी इस पोस्ट की तरह सलीम, रिलायंस के खिलाफ़ कोई लेख लेकर आयें तो मेरा पूरा समर्थन उन्हें होगा, लेकिन अफ़सोस कि वे भी "एक ही विशेष राग" बजाते रहते हैं… @ प्रवीण शाह – नेस्ले तो सिर्फ़ एक उदाहरण है, भारतीय कम्पनियाँ भी कम नालायक नहीं हैं, और यदि नेस्ले की जगह वाकई में उसकी टक्कर की कोई स्वदेशी कम्पनी आती है तो क्या बुराई है? और स्वदेशी में चाहे लाख बुराईयाँ सही, कम से कम दोषी साबित होने पर किसी का गला तो पकड़ा जा सकता है, वारेन एंडरसन (यूनियन कार्बाईड) जैसे तो नहीं कि भोपाल में हजारों हत्याएं करवाने के बावजूद हम उसे छू भी नहीं पा रहे। ग्रीनपीस एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था है, उनके पास वैज्ञानिकों की एक पूरी टीम है, यदि वे इसे संदिग्ध बता रहे हैं तो हमें मानना ही पड़ेगा, हमारे पास तो ऐसा कोई सिस्टम नहीं है कि हम सही-गलत साबित कर सकें…। हाँ यदि ग्रीनपीस का भी नेस्ले को टारगेट करने में कोई "हित-अहित" जुड़ा हो तो फ़िर हम क्या कर सकते हैं?

  46. September 23, 2009 at 6:52 am

    @- Rakesh Singh – कहत कैरानवी सुनो, तुम विदेश में ऐसे प्राडक्‍स खाकर ही ज़हरीले हो रहे हो, हम अपनी नस्‍ल को बचाना चाहते हैं, तो तुम यहां दंगा फसाद लेके घुस गये, तुम जो मुंबई बंद करवाने को भडका रहे हो वह नहीं बंद कराते, जिनके तुमने नाम नहीं लिखे ठाकुरे, मोदी भाजपा, परिषद समितियां वह बंद कराते हैं, उनसे दरखास्‍त करो, तब भी तुम्‍हें किया हासिल होगा, तुम तो मजे से विदेश में टीवी पर हमारा जलता देश देखते रहोगे,केवल अपने टाइमपास के लिये देश को जलवाओगे?

  47. September 23, 2009 at 10:38 am

    चिपलूनकर साहब, ब्लागवाणी पर परवीन साहब के चित्र वाले ब्लाग पर आपका लेख आ रहा है उसे चटका लगा दें उसका ट्रेफिक इधर ही आयेगा,http://veer-sawarkar.blogspot.com/2009/09/sureshchiplunkarblogspotcom.htmlजो भी करो दिल से करो सफलता तम्‍हारे कदम चूमेगी

  48. September 23, 2009 at 10:39 am

    No side -tracking please! Gaddi is going okay . Praveen Shah may be having Nestle agency. Don't worry . Majority supports this post .

  49. September 23, 2009 at 5:19 pm

    jankari wal lekh. dhanybad.main kal phone lagta hoon

  50. khursheed said,

    September 24, 2009 at 7:08 am

    ईद की मुबारकवाद (देर से ही सही) क्यूंकि मैं व्यस्त था. सुरेश जी की लेखनी ने इस बार कुछ ऐसा कह दिया जिसे केवल एक ही चीज़ की ज़रुरत है वह है प्रशंषा और समर्थन.भारत में विविधताएँ है और इसी का फायेदा यह पश्चिम के देश उठा रहें हैं. वे हमारी विविधताओं को ही आग देते हैं, लेकिन हमें चाहिए (जैसा की सलीम भाई हमेशा कहते हैं) "आओ उस बात की तरफ, जो आपस में सामान हों"

  51. khursheed said,

    September 24, 2009 at 7:08 am

    ***समान

  52. September 24, 2009 at 7:49 am

    सुरेश चिपलूनकर जी, मैंने धान के देशवाले dhankedeshme ब्‍लोगर को कहा था कि तुम्‍हारे चश्‍मे के नीचे एक आँख है उसने आजतक साबित नहीं किया कि नहीं दो हैं, आजकी उसकी पोसट साबित करती है कि शायद एक भी ठीक नहीं, वह लिखता है आपने मेरा पहला कमेंट आपने डिलिट किया है उसे removed by the author लिखा नहीं दिख रहा, आपको वहां जाके जवाब देना चाहिये, या सेंसर हटवादो तो मैं स्‍वयं देख लूंमैंने उसे यह भी कहा था कि 3 हफते लगते हैं किसी कुप्रचारी को पागल करने में उसे आठ दिन भी नहीं लगे थे,कल और आज देख लो ब्लागवाणी पर सावरकर के ब्लाग को टाप पर रखा है, दिल से समर्थन किया है, आज हमारी अन्‍जुमन पर पब्लिश करने का इरादा है,खुर्शीद भाई का धन्‍यवादकाशिफ साहब से फोन पर बात हुयी थी लगता है उनकी सारी बिजली ताजमहल में खर्च कर दी जाती है, देर सवेर आयेंगे वह भी,कुछ शक हो तो बोलो ना हो तो बोलो

  53. September 24, 2009 at 8:46 am

    यहां का पहला कमेंटस मैने स्‍वयं delete किया था, लेकिन जूं का त्‍यूं आपकी पिछली बिजली से संबंन्धित पोस्ट पर हाथ के हाथ पब्लिश भी कर दिया था, अब उस धान के देश वाले से जवाब लाओ,आप खामोश क्‍यूं है और इशारों में बात ना किजिये, आज की जाखड जी की पोस्ट पर पहुचिये, वहां मेरा कमेंट जरूर पढियेगा, कल वह आपके ब्लाग पर आये थे आज वहां आप धन्‍यवाद को पहुचियेhttp://praveenjakhar.blogspot.com/2009/09/blog-post_23.html संगीता पुरी जी : ज्ञान और तर्क का प्रदर्शन अपेक्षित है!डायरेक्‍ट लिंक

  54. September 24, 2009 at 9:05 am

    नेस्ले को धन्यवाद, कट्टर विरोधी भी सुर में सुर मिलाने आताल-पाताल एक किए हुए हैं. 🙂 ==नेस्ले की करनी की पोल खोलने के लिए धन्यवाद. आपकी लेखनी तो हमेशा रोचक और ज्ञानवर्धक होती ही है, इसलिए उस पर तो क्या लिखुँ.बाकी एक आग्रह है कि उन देसी विक्रेताओं की भी पोल खोलें जो थोड़े से लालच के लिए लाखों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

  55. September 24, 2009 at 9:27 am

    अरे अब भी अग्रेजो के गुलाम ही बने रहो गे… असली मुद्दे को छोड कर फ़िर से आपिस मै लड रहे हो, एक दुसरे पर किचड उछाल रहे हो… पहले एक भारतीय बनो , फ़िर मिल जुल कर रहना सीखो फ़िर मुद्दे की बात करो, बच्चो की तरह हर वक्त लडना शोभा नही देता

  56. September 24, 2009 at 11:55 am

    @ राज भाटिया जी, प्‍यारी सी झिडकी, डपटने के लिये धन्यावाद, ब्लागजगत में आंखें तरस गयी ऐसा स्‍नेह देखने को,

  57. September 24, 2009 at 2:34 pm

    नस्ले का बहुत-बहुत धन्यवाद कि वो अपनी हरकतों से हिन्दु और मुस्लिम…सबको एक करने का काम कर रही है बढिया दमदार आलेख

  58. ek aam aadmi said,

    September 25, 2009 at 6:34 am

    praveen shah is a "SUDDHA SECULAR"

  59. September 25, 2009 at 2:37 pm

    बहुत बहुत धन्यवाद इस आंख खोल देने वाली पोस्ट के लिये

  60. September 25, 2009 at 5:57 pm

    सबसे अपील है। इस मुद्दे को तरीके से सभी ब्लॉगर्स अपने-अपने ब्लॉग पर उठाएं। जितने भी एग्रीगेटर्स हैं, उनसे सामूहिक अपील हो कि इस मुद्दे को प्रमुखता दी जाए। क्योंकि यह मामला हर घर का है। हर घर के बच्चों और आने वाली पीढ़ी से जुड़ा हुआ है। अब नहीं एकजुट हुए, तो बड़ा खामियाजा कल को हमारे ही परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भुगतना पड़ेगा। सुरेश जी मेरी निजी राय है आपके लिए, आप हम सब ब्लॉगर्स को सुझाएं कि इस मामले को ज्यादा से ज्यादा उठाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है। क्योंकि यह बहुत ही खतरनाक स्थितियां पैदा कर देगा। मैंने पहली टिप्पणी में जिस चीनी मामले की चर्चा की थी उसे तलाशिए और खुलासे करिए। मैं वाकई इस मामले को लेकर बेहद चिंतित हंू।

  61. September 27, 2009 at 3:47 pm

    suresh ji saadar namaskar…………..maine ek sawaal poocha tha ki hum itihaas kyun padhte hain….? uska jawaab maine blog pe apne de diya hai…… plz blog dekhiyega….. aur apna view dijiyega……….dhanyawaadapka chota bhai….mahfoozwww.lekhnee.blogspot.com

  62. September 27, 2009 at 6:40 pm

    @ जाखड जी आज आपका कमेंटस पढकर मेरा आपमें मेरा विश्‍वास दोगुना होगया,चिपलूनकर साहब को तो वक्‍ती सपोर्ट दिया है,सच का साथी होने के कारण आपको तो सदैव के लिये सपोर्ट है, धन्‍यवाद

  63. September 27, 2009 at 6:50 pm

    चिपलूनकर जी मेंने जाखड जी तरफ से भी टरेफिक इधर भेजा अब तो वह स्‍वयं इधर आगये,जो अकेला सवा लाख जैसा है,अनुवाद सिंह तो बार बार मिर्ची लगाने पर भी नहीं आरहे,ध्‍वज जी से आज इमेल से बातें हुई ना है उनकी, उनकी अंग्रेजों से माफी मंगवाने वाली पोस्‍ट पर मेरा समर्थक कमेंट देख लो,काशिफ साहब को तो मोबाइल से किया खर्च भी बेकार गया, जाखड जी की तरह मैं भी यही पूछता हूं कि आपके पास कुछ मशवरा हो बताओ मेरी तरफ से कमी हो ता बताओ, इधर उधर जो शक किया जा रहा उससे अन्‍जुमन वाले मुझ से नाराज हैं, आपके रेगुलर कमंटस करने वालों को बुलाने का कोई उपाय हो तो बतायें, इस मामले में मेरी तो मिर्ची भी हजम कर जा रहे हैं, वह चश्‍मे वाला जरूर अपनी अक्‍लबंदी से हमारा भला कर रहा है, बस एक कमी है कि बूढा सांकल लगा के बकता है,

  64. September 27, 2009 at 7:00 pm

    आपकी एक और सराहनीय पोस्ट ………….बाकी बातों के लिए जोर से हंसी आ रही है लेकिन मैं मन ही मन मुस्करा रहा हूँ ||| " सत्यमेव जयते " || 🙂 😦 😛 😀 :$ 😉

  65. September 28, 2009 at 7:59 pm

    चिपलूनर साहब जेस्‍वाल जी इस लिये हंस रहे हैं कि इन्‍ाके सर पर जो मेरा कमेंटस हे उसमें इनका नाम ध्‍वज लिखा है, जबकि इन दोनों का अंदाज एक जैसा है ध्‍वज लिखो कि जेस्‍वाल किसी को हंसना नहीं चाहिये, यह इमेल से आने से मना कर चुके थे फिर भी आये क्‍यूंकि हंसी बरदास्‍त ना कर सके, देखलो मैं जब बुलाने पर आया तो इनको अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चे से बुला लिया, आपको तो ब्लागवाणी के गम में इन्‍हें धन्‍यवाद कहने की फुरसत नहीं इस लिये मैं कह देता हूं, धन्‍यवाद

  66. September 29, 2009 at 4:19 am

    ' सहमत ' ( समझने वाले समझ गए हैं जो न समझे वो अनाड़ी है )|| " सत्यमेव जयते " ||

  67. rkg said,

    September 29, 2009 at 12:07 pm

    Dear Sanjay Ji,Please read this.The safety and quality of its products is non – negotiable for Nestlé Inbox X Reply Services,Consumer,GURGAON,CC to meshow details 4:22 PM (41 minutes ago)Dear Mr. Gupta, Thank you for your e-mail. The safety of our products and the integrity of the ingredients from which they are manufactured are paramount to Nestlé. All raw materials used by Nestlé comply with strict regulatory and safety evaluations. Our products sold in India are non-Genetically Modified (GM). The Indian authorities do not authorize the commercial cultivation of crops used for food which are GM. The local supplies used by Nestlé are from conventional crops and it imports only raw materials which are non-GM. This is duly supported by supplier’s declarations. We follow an internal monitoring procedure for verification. As a global food manufacturer Nestlé takes into consideration local needs, cultural differences and consumer preferences as well as attitudes concerning the use of ingredients derived from genetically modified crops. Nestlé Group recognizes the potential that gene technology has in the long term to improve the quality, availability, sustainability and nutritional value of the food. In particular, gene technology has the potential to meet the world population’s growing demand for food. We reassure you of our constant endeavor to provide high quality products to our valued consumers. With Warm RegardsAna A. SinhaSenior Manager – Consumer Services and Corporate Wellness. From: rkguptamail@gmail.com [mailto:rkguptamail@gmail.com] Sent: Tuesday, September 22, 2009 1:21 PMTo: INDIA,Communication,GURGAON,CCSubject: Nestlé : Contact Reason – General EnquiriesThe following person recently submitted customer inquiry form on http://www.nestle.inName:R.K.GuptaFamily Name:GuptaEmail Address:rkguptamail@gmail.comAddress:*******************************************************************TelePhone Number:**********Contact Reason:General EnquiriesRemarks:Dear Sir, My entire family are using your products, I am having two kids and they are regular consumer of your products. I want to know about your products that they are GE FREE or NOT.

  68. October 4, 2009 at 6:28 pm

    मुझसे इस पोस्ट पर आने की गुज़ारिश उमर जी ने की थी लेकिन मेरे नेट कनेक्शन नही चल रहा था इसलिये टिप्पणी नही कर सका…आपने बहुत अच्छा लिखा है और आपसे उम्मीद है की आप ठीक इसी तरह और कम्पनियों के काम के खिलाफ़ भी आवाज़ उठायेंगे…..इस मुहिम मैं पुरी तरह आपके साथ हुं अगर मैं कोई योगदान कर सकता हूं तो वो भी बतायें


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