>लठैती मत करें " हल्ला -गुल्ला लाइव " वाले , लिखने से पूर्व सौ बार सोचें

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आज ही संयोगवश अपने पुराने आलेख को मिली प्रतिक्रियाओं को पढ़ते हुए  ” हल्ला -गुल्ला लाइव ” नाम की एक वेबपोर्टल तक पहुंचा . हल्ला-गुल्ला लाइव के एक कलमतोड़ एक्टिविस्ट दिलीप मंडल नामक सज्जन की पोस्ट < “गूगल गणराज्य” में प्रभाष जोशी के नायकत्व का अंत >  को देखा उक्त पोस्ट में लिखा गया कि प्रभाष जोशी खोज करने पर गूगल बाबा द्वारा बताये गये प्रथम 12 उत्तर में जोशी के ब्राह्मणवाद और सती प्रथा के समर्थन में किए गए लेखन और उसपर आई प्रतिक्रिया से जुड़े हैं।

बात तो सही है पर पहला रिजल्ट तो पढो भाई देखो जनोक्ति के ब्लॉग ” सच बोलना मना है ” पर क्या छापा है ? इसमें प्रभाष जी को नायक ही बनाया गया है जिसके वो लायक हैं , परन्तु आप जैसे महान पत्रकार यहाँ हल्ला लाइव पर बगैर पढ़े लिखे चिल्लाते हैं और  दो महानुभाव पाठक भी बगैर पढ़े सुर में ताल दे रहे हैं . शर्म आनी चाहिए आपको ऐसी पतितकारिता  करते हुए !

तो  पाठक  लोगों आप भी पढ़िये उस लिंक को और तय कीजिये कि क्या उससे प्रभाष जोशी की छवि नकारात्मक बनती है ? क्या इस तरह बगैर पढ़े कुछ भी लिख डालना गलत नहीं है ?
उसी पोस्ट में एक पाठक संतोष ने कहा है : – ” मंडल जी, गुगल ही दुनिया नहीं है। अपने आस-पास नजर दौड़ाइए, दुनिया बहुत बड़ी है। और हम आप इस दुनिया की मात्र इकाई भर हैं।
भाई साहब, विचार सिर्फ रखे नहीं जाते उसपर बहस होती है दादागिरी नहीं।  लेकिन आपत्ति है तो सिर्फ इस लाइन पर जिसमें उन्होंने ये कहा है
“आप कह सकते हैं कि इस विवाद के नेट पर आने के साथ ही सर्वमान्य महानायक प्रभाष जोशी की सर्वमान्यता और महानायकत्व का अंत हो गया है।”
बहस या विचार कभी अपने नहीं होते, बल्कि सामाजिक मुद्दे से सरोकार होता है उसका और अपने से ही बहस शुरू करके अपने शब्दों में ही उसका अंत कर देना, कुछ आंकड़े परोस देना मात्र भर नहीं है। बहस कीजिए,तो सार्थक कीजिए।  लेकिन प्रभाष जोशी या किसी ऐसे व्यक्ति जो नेट से सरोकार नहीं रखता हो, आपके बहस में भाग नहीं ले रहा हो,को अपने शब्दों के मायाजाल से छिछालेदार करना कोई बड़प्पन नहीं है। पत्रकारिता में हैं अगर बहुत बहस ही करना है और बहुत बड़ा मुद्दा ही पकड़ना है तो वीओआई बंद हो गया उसपर बहस शुरू कीजिए न। कौन रोकता है आपको।
650 लोग सड़क पर आ गए। सरकार या तथाकथित मीडिया के मठाधीशों की आंखों में एक रत्ती भर भी पत्रकार बिरादरी की चिंता नहीं। इस मुद्दे पर आगे आईए ना, हम सब आपके साथ होंगे। क्यों नहीं मायावती को घेरते हैं दीलीप मंडल भाई। बहस करिए लेकिन मुद्दों पर। लठैती मत करिए जनाब ! “
                                                    तो भाई मंडल जी लिखने से पूर्व सौ बार सोचें और हाँ इस तरह बड़े नाम से जुड़ कर विवाद के जरिये लोकप्रियता तो मिलती है परन्तु क्षणिक ! अब आप खुश मत होना आप इतने बड़े नाम भी नहीं हैं कि आपके ऊपर लिखकर नाम कमाया जाए .शायद आपसे कुछ कहना व्यर्थ तो नहीं होगा ! क्योंकि आप जिस मंच पर लिख रहे हैं उसके मालिक तो खुद को बलात्कार के आरोप में फंसा कर भी टीआरपी बटोरना जानते हैं !

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