एक "महान राष्ट्रसन्त" : सेमुअल राजशेखर रेड्डी… YSR Memorial Land Grab in AP and Anti-Hindu Activities

हाल ही में भारत ने अपने एक “राष्ट्र सन्त” को खोया है, जी हाँ, मैं बात कर रहा हूं वाय सेमुअल राजशेखर रेड्डी की… उनकी याद में, उनके गम में, उनकी जुदाई की वजह से आंध्रप्रदेश में 400 से भी अधिक गरीब किसानों ने टपाटप-टपाटप आत्महत्याएं की हैं (ऐसा तो MGR के समय भी नहीं हुआ न ही NTR के समय)… लेकिन सिर्फ़ इतने भर से यह महान राष्ट्रसन्त नहीं हो जाते, बल्कि अब आंध्रप्रदेश की राज्य सरकार ने कुरनूल जिले के नल्लामल्ला जंगलों में 1412 हेक्टेयर (जी हाँ, सही पढ़ा आपने… 1412 हेक्टेयर) के इलाके में “YSR स्मृति वनम” के नाम से उनका मेमोरियल बनाने की योजना को हरी झण्डी दे दी है। अब दिल्ली में स्थापित सारी समाधियाँ, सारे स्मारक, सारे मेमोरियल, सारे घाट, इस महाकाय स्मारक के आगे पानी भरते नज़र आयेंगे, और ऐसा तभी होता है जब कोई व्यक्ति “राष्ट्र सन्त” बने और गुज़र जाये… न सिर्फ़ गुज़र जाये, बल्कि ऐसा गुज़रे कि उसके लिये दो दिन तक सेना, वायुसेना, भारतीय सेटेलाईट, अमेरिकी उपग्रह, पुलिस, जंगल में रहने वाले आदिवासी ग्रामीण, खोजी कुत्ते… सब के सब भिड़े रहें, किसी भी खर्चे की परवाह किये बिना… क्योंकि राष्ट्र सन्त की खोज एक परम कर्तव्य था (छत्तीसगढ़ में भी एक बार एक हेलीकॉप्टर लापता हुआ था, उसे खोजने का प्रयास तक नहीं किया गया, क्योंकि उसमें दो-चार मामूली पुलिस अफ़सर बैठे थे, जबकि राष्ट्रसन्त सेमुअल तो वेटिकन के भी प्रिय हैं और इटली के भी)।

तो मित्रों, बात हो रही थी 1412 हेक्टेयर के विशाल वन क्षेत्र में फ़ैले इस प्रस्तावित मेमोरियल की। योजना के अनुसार आत्माकुर वन क्षेत्र में आने वाले नल्लामल्ला जंगल, जो कि लगभग 5 जिलों में फ़ैला है, में उस पहाड़ी पर वायएसआर स्तूप बनाया जायेगा, जहाँ उनका हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। जंगल और पहाड़ी की शुरुआत से अर्थात पवुरलागुट्टा गाँव से सैलानी लोग, सॉरी “दर्शनार्थी”… अरे फ़िर सॉरी “भक्तगण” उस पहाड़ी पर ट्रेकिंग करते हुए चढ़ेंगे, और पहाड़ी पर बने इस विशाल स्तूप तक पहुँचेंगे। कैबिनेट ने कहा है कि प्रकृति के सुरम्य वातावरण को बनाये रखा जायेगा, और वन क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा (अर्थात उस जंगल में रहने वाले जीव-जन्तुओं और पक्षियों को चिंता करने की कोई बात नहीं है, “जगन बाबू” उनसे आत्महत्या करने को नहीं कहने वाले है)। इस पूरे प्रोजेक्ट पर सिर्फ़ साढ़े तीन करोड़ का खर्च होगा और इसे सितम्बर 2010 तक बना लिया जायेगा। इस सम्बन्ध में पर्यावरणवादियों और प्रकृतिप्रेमियों की आपत्तियों को खारिज करते हुए राज्य की मंत्री गीता “रेड्डी” ने कहा, कि सरकार की उस वनक्षेत्र में किसी बड़े बदलाव की योजना नहीं है और उससे पर्यावरण अथवा जंगल को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। उन्होंने आगे कहा कि उस पहाड़ी पर किसी पेड़ को नहीं काटा जायेगा और कोई बड़ा निर्माण कार्य नहीं किया जायेगा (अब सरकार कह रही है तो मानना ही पड़ेगा), उन्होंने यह भी कहा कि कैबिनेट के अधिकतर मंत्रियों की राय यह भी है कि हैदराबाद में भी एक स्मारक बनाया जाये (यानी कि एक और बेशकीमती ज़मीन)। इस विशाल कार्य की देखरेख और उसे सुचारू रूप से चलाने के लिये 6 मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है। कैबिनेट में पास किये गये एक और प्रस्ताव के अनुसार कडप्पा जिले का नाम बदलकर राजशेखर रेड्डी जिला रखा जायेगा… अब आप खुद ही बताईये, क्या मैं उन्हें “राष्ट्रसन्त” की उपाधि देकर कुछ गलत कर रहा हूं?

चित्र – अपने जन्मदिन पर पुलिवेन्दुला में एक चर्च में बिशप को केक खिलाते हुए…

इस खबर को आप यहाँ पढ़ सकते हैं
http://timesofindia.indiatimes.com/news/city/hyderabad/1412-hectare-Nallamala-forest-land-for-YSR-memorial/articleshow/5053354.cms

http://andhralekha.com/news/11-19619-Govt%20gets%20forest%20land%20ready%20for%20YS%20memorial

देश के इस सबसे विशालतम समाधि स्थल के लिये अधिगृहीत की जाने वाली ज़मीन और फ़िर हैदराबाद में भी एक विशाल स्मारक बनाये जाने की योजना से इस बात को बल मिलता है कि इस “राष्ट्रसन्त” और उनके लायक पुत्र के मन में ज़मीन के प्रति कितना मोह है, कितना लगाव है, कितनी चाहत है… आखिर धरतीपुत्र जो ठहरे… आईये देखते हैं कि YSR ने पिछले 5 साल के अपने मुख्यमंत्रित्व काल में गरीबों के लिये जो थोड़ा-बहुत काम किया, वह क्या-क्या हैं… ताकि इस राष्ट्रसन्त को आप सच्ची श्रद्धांजलि दे सकें…

– हैदराबाद में रहेजा कॉर्पोरेशन को इंफ़्रास्ट्रक्चर के लिये 300 एकड़ ज़मीन दी, इसमें 50% की भागीदारी जगन रेड्डी की है।
– गंगावरम बंदरगाह बनाने के लिये 1000 एकड़ ज़मीन (इसमें भी जगन की हिस्सेदारी है)।
– ब्राहमनी स्टील्स कम्पनी में धरतीपुत्र के पुत्र की हिस्सेदारी है।
– सिक्किम में चल रहे 6000 करोड़ के एक हाईड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में जगन की आधी हिस्सेदारी है।
– जगन बाबू कुछ साल पहले तक बंगलोर में ही रहते थे, उनके पप्पा ने उन्हें हाल ही में सांसद बनवाया है, अतः बंगलोर के बाहरी इलाके में तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से कृषि भूमि खरीदकर फ़ार्म हाउस बनवाया है।
– बंगलोर के ही बन्नरघट्टा रोड पर एक विशाल शॉपिंग मॉल काम्पलेक्स भी जगन बाबू का ही बताया जाता है।
– हैदराबाद की कुक्कापल्ली हाउसिंग बोर्ड सोसायटी में 25 एकड़ का प्लाट
– प्रकासम जिले की मशहूर ग्रेनाइट खदानों में 150 एकड़ की खनन भूमि (एक बेनामी कम्पनी गिम्पेक्स के नाम से)
– अखबार “साक्षी” जिसके मालिक और चेयरमैन जगन रेड्डी हैं, उस अखबार ने पिछले 5 साल में कोलकाता, गुजरात, चेन्नई और बंगलोर में 600 करोड़ का निवेश किया है।
– साक्षी ग्रुप में दो मुख्य निवेशक हैं आर्टिलियन्स बायोइन्नोवेशंस तथा स्टॉकनेट इंटरनेशनल, जिन्हें विश्व के स्टॉक मार्केट में लिस्टेड किया गया है, इनकी शेयर प्राइस एक रुपये से कम है और प्रमोटर का हिस्सा 0.3 प्रतिशत है, लेकिन यह दोनों निवेशक कम्पनियाँ साक्षी की स्क्रिप पर 350 रुपये का प्रीमियम देती हैं।
– साक्षी और जगति पब्लिकेशन में निवेश करने वाली कम्पनियों को ही बड़े-बड़े सरकारी ठेके मिलते हैं, जैसे SEZ, बन्दरगाह निर्माण और ग्रेनाईट खदानों में खनन की अनुमति।
– जगति पब्लिकेशन के ऑडिटर हैं PWC, जी हाँ वही प्राइस वाटर कूपरहाउस, जिसने सत्यम के बही खातों की उम्दा जाँच करके बताया था कि “सब ठीक है”।
– इसी PWC ने साक्षी अखबार की “जाँच” करके सर्टिफ़िकेट दिया कि इसकी दैनिक खपत 12 लाख प्रतियाँ रोज़ाना की है, और साक्षी अखबार को सरकार की ओर से बड़े-बड़े विज्ञापन मिलने लगे।
– अरुणाचल प्रदेश में लगने वाले 3000 मेगावाट के प्रोजेक्ट में काम करने वाली कम्पनियों, एपी जेन्को तथा मेसर्स एथेना पावर एनर्जी की भी जगति पब्लिकेशन्स में हिस्सेदारी है।
– पुल्लिवेन्दुला में 5 एकड़ में निर्मित वायएसआर के बंगले की कीमत कम से कम 4 करोड़ रुपये है।

अब जबकि “धरतीपुत्र” को ही धरती इतनी प्रिय है तब उनके पीछे-पीछे लगे “भूमिपुत्रनुमा” रिश्तेदारों को क्यों न होगी, और वे क्यों पीछे रहें…

वायएस विवेकानन्द रेड्डी (राष्ट्रसन्त के भाई) –

– कडप्पा से सांसद विवेकानन्द रेड्डी के पास मधापुर की हाईटेक सिटी में 2000 वर्गमीटर की ज़मीन है, जो फ़िलहाल एक सॉफ़्टवेयर कम्पनी को किराये पर दी गई है (कीमत बताने का क्या फ़ायदा, सभी अन्दाज़ लगा ही लेंगे)

वायवी सुब्बा रेड्डी (राष्ट्रसन्त के एक और भाई) –

– तुंगभद्रा नदी पर बनने वाले एक हाईड्रो प्रोजेक्ट में हिस्सेदार।
– अपनी पत्नी स्वर्णलता रेड्डी के नाम पर 1000 वर्गफ़ीट का प्लाट जुबली एनक्लेव इलाके में।

सुधाकर रेड्डी (चचेरे दामाद)

– उत्तरी आंध्रप्रदेश के समुद्री तटों पर रेती की खुदाई और ढुलाई के ठेके, स्विट्ज़रलैण्ड की कम्पनी बोथलिट्रेड इंक के साथ भागीदारी में।

बी युवराज रेड्डी (राष्ट्रसन्त के भतीजे)

युवराज चिटफ़ण्ड कम्पनी बनाकर 2.60 करोड़ का घोटाला किया।

रबिन्द्रनाथ रेड्डी (YSR के साले)

– डेन्दुलुरु गाँव में फ़र्टिलाइज़र कम्पनी बनाने के नाम पर कई एकड़ भूमि हड़प की।
– गेमन इंडिया लिमिटेड (दिल्ली मेट्रो के काम में गड़बड़ी के लिये ब्लैक लिस्टेड कम्पनी) के साथ मिलकर सर्वारासागर-वामिकोण्डा नहर प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिये सम्बन्धों का उपयोग।

अन्य रिश्तेदार –
– मधुसूदन रेड्डी, वेणुगोपाल रेड्डी, प्रताप रेड्डी ने मिलकर कडप्पा नगर सुब्बा रेड्डी कॉलेज के पास की 15 करोड़ की ज़मीन गैरकानूनी रूप से दबाई हुई है (खसरा सर्वे क्रमांक 682/4, 684/4, 700/2).

– YSR के बड़े भाई की पत्नी भारती रेड्डी ने सितम्बर 2005 में कोल्लुरू में 35 लाख की ज़मीन (सर्वे क्रमांक 148) खरीदी, जो कि अचानक “रिंग रोड” के निर्माण की वजह से 13 करोड़ की हो गई।
– इसी रिंग रोड ने कई अन्य छोटे-मोटे रिश्तेदारों के भी वारे न्यारे करवा दिये, जैसे वायवी सुब्बा रेड्डी ने इसी रोड के पास सर्वे क्रमांक 117, 119, 121, 123, 124, 125, 126, 131, 132, 134, 136, 141 को 20 करोड़ में खरीदा, और “अचानक” वहाँ रिंग रोड बनाने की घोषणा हो गई, जिससे इस ज़मीन का भाव एक साल में ही 125 करोड़ पहुँच गया।
– YSR के नज़दीकी मित्र पार्थसारथी रेड्डी जो कि हेटेरो ड्रग्स नामक दवा कम्पनी के मालिक हैं, उन्हें SEZ बनाने के लिये कौड़ियों के दाम ज़मीन दी गई और कुछ ही दिन बाद उन्होंने जगति पब्लिकेशन में 13 करोड़ का निवेश कर दिया।

(इस लिस्ट में सत्यम और मेटास कम्पनी में हुआ महाघोटाला शामिल नहीं है)

यह तो हुई एक छोटी सी बानगी इस महान राष्ट्रसन्त के खुले कारनामों की (बाकी के जो भी घोटाले छिपे हुए हैं वह अलग हैं)। यदि आप पढ़ते-पढ़ते उकता गये हों तो आपको बता दूं कि ऐसा नहीं कि अपने मुख्यमंत्रित्व काल में इन्होंने सिर्फ़ अथाह पैसा ही कमाया हो, इन्होंने “धर्म” की भी सेवा की है, और जिस स्मारक या समाधि को बनाने में इतना पैसा खर्च किया जा रहा है, और हेलीकॉप्टर दुर्घटना होने पर इनकी खोज के लिये अमेरिका सहित सोनिया गाँधी भी चिंता में दुबली हुई जा रही थीं उसका कारण इनकी “धर्म” सेवा ही है, आईये यह ज्ञान भी प्राप्त कर ही लीजिये –

– 3 दिसम्बर 2007 को एक आदेश जारी करके “सेमुअल” ने प्रदेश के सभी 1,84,000 मन्दिरों, 181 मठों और विभिन्न धार्मिक ट्रस्टों को अधिगृहीत कर लिया ताकि उनकी करोड़ों की आय पर कब्जा किया जा सके। (डेक्कन क्रानिकल 3.12.2007)
– भद्राचलम : मन्दिर की 1289 एकड़ में से 884 एकड़ ज़मीन एक चर्च को दान कर दी।
– श्रीसेलम : प्रसिद्ध मल्लिकार्जुन मन्दिर की 1600 एकड़ भूमि को विभिन्न ईसाई-आदिवासी संगठनो में बाँट दिया।
– पुरानी मस्जिदों के लिये 2 करोड़, चर्चों की मरम्मत के लिये 7 करोड़ अनुदान दिया, भारत के इतिहास में पहली बार किसी ईसाई को बेथलेहम जाने के लिये सरकारी तौर पर अनुदान दिया। महाशिवरात्रि के अवसर पर बसों में अधिक भीड़ को देखते हुए हिन्दुओं की सुविधा(?) हेतु टिकट पर अतिरिक्त प्रभार लगाया। (डेक्कन क्रानिकल 23 अगस्त 2006, 18 दिसम्बर 2006, ईनाडु 16 फ़रवरी 2007)।
– प्रसिद्ध तिरुपति मन्दिर की 7 पहाड़ियों में से 5 पहाड़ियों पर चर्च निर्माण की अनुमति। अपने परिजन के नाम पर होने वाले हॉकी टूर्नामेंट के लिये तिरुपति मन्दिर की आय से पैसा खर्च किया (द हिन्दू 17 जुलाई 2006, डेक्कन क्रानिकल 8 मार्च 2007)।
– मन्तपम में गोल्फ़ कोर्स बनाने के लिये 10 मन्दिरों को तोड़ा गया, जबकि सेमुअल रेड्डी के बेटे जगन ने अनन्तपुर में एक मन्दिर तुड़वाया ( द हिन्दू 27 अगस्त 2004, डेक्कन क्रानिकल 8 मार्च 2007)।

(कम से कम अन्तिम संस्कार के मामले में YSR ईमानदार रहे और ईसाई पद्धति से ही उनका अन्तिम संस्कार किया गया, जबकि कुछ “परिवार” तो ऐसे ढोंगी हैं कि उन्हें पता है कि वे हिन्दू नहीं हैं फ़िर भी राजनीति और दिखावे की खातिर उन्हें हिन्दू धार्मिक पद्धति से अन्तिम संस्कार करवाना पड़ा… बेचारे)

(तात्पर्य यह कि जब उन्होंने “धरती” और धर्म की इतनी सेवा की है, तो उनके “लायक” पुत्र का हक बनता है कि वह इसे परम्परा को आगे बढ़ाये… इसीलिये तो आंध्रप्रदेश में इस राष्ट्रसंत के दुःख में लोगों ने टपाटप-टपाटप आत्महत्याएं कीं…)

मैं जानता हूं कि इस “राष्ट्रसन्त” के इन कारनामों और मेरी इस छोटी सी पोस्ट के मद्देनज़र आपकी आँखें श्रद्धा से छलछला उठी होंगी, अतः यहीं पर समाप्त करता हूं ताकि आप भी अपनी “विनम्र” श्रद्धांजलि उन्हें अर्पित कर सकें…

अन्य स्रोत –
1) Vijaya Karnataka, a kannada daily (20-6-06)
2) Eenadu Daily, A Telgu Daily
3) Deccan Chronicle, (15-06-2006)
4) Vikrama (28-05-2006)
5) Sudarshan TV (24-06-06)
6) Pungava news Magazine (1-06-06)
तथा http://www.outlookindia.com/article.aspx?229456

http://www.christianaggression.org/item_display.php?type=ARTICLES&id=1122662970

http://www.hindujagruti.org/news/index.php?print/id:1856,pdf:1

YSR, YS Rajshekhar Reddy Memorial, Land Grab and Forest Destruction in AP, Tirumala, Tirupati Devasthanam, Anti-Hindu Activities in Andhra Pradesh, Land Scams of Jagan Reddy and Reddy Family, Satyam and Maytas Scam, YSR in Satyam, वाईएसआर रेड्डी, राजशेखर रेड्डी मेमोरियल समाधि, विशाल भूमि अधिग्रहण और वनों का विनाश, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम, हिन्दू विरोधी गतिविधियाँ और राजशेखर रेड्डी, रेड्डी परिवार की आर्थिक घोटाले, सत्यम घोटाला और जगन रेड्डी, Blogging, Hindi Blogging, Hindi Blog and Hindi Typing, Hindi Blog History, Help for Hindi Blogging, Hindi Typing on Computers, Hindi Blog and Unicode

65 Comments

  1. October 5, 2009 at 6:18 am

    आला कमान के चहेते हैं जी.

  2. October 5, 2009 at 6:20 am

    चिपलूनकर साहब, मैं बहुत दिनों से इसका इन्तजार कर रहा था क्योंकि आपको यद् होगा कि आपने शोक सन्देश में ही हिंट दे दिया था ! बस यही कहूंगा कि वहाँ तो जो माताजी के चरणों में नतमस्तक हो जाए उसकी बल्ले-बल्ले है ! मै पहले अक्सर सोचा करता था कि आखिर माताजी इन जनाव पर इतनी प्रफुल्लित क्यों रहती है ? बाद में वास्तविकता पता चली कि ये जनाव सिर्फ नाम के रेड्डी है और है असल में "Already"

  3. October 5, 2009 at 6:31 am

    बहुत ज्यादा रिसर्च करके बनाया गया लेख है. बहुत सुन्दर.लोकसभा चुनाव से पहले किसी टीवी चैनल पर नेताओं के पूजा-पाठ पर एक शो आ रहा था, उसमें एक 'उल्लू-का-चूजा' पत्रकार YSR से पूछ रहा था, 'लोग बालाजी की परिक्रमा करके विजय के लिये प्रार्थना करते हैं, क्या आप ने ऐसे किया?'तो YSR बोला, "मैं इन सब पर विश्वास नहीं करता"अगर वो गर्दभराज ये पूछ लेता कि नेताजी तुमने चर्च में जीतने के लिये प्रार्थना की? या फिर तुम्हारे जीतने के लिये कितने चर्च के बिशप प्रार्थना करवा रहे हैं तो YSR से कहते नहीं बनता कि मैं विश्वास नहीं करता वरना इटली से लेकर दिल्ली से संदेशा आ जाता.ये तो इतने बड़े महान संत निकले की मरणोपरांत भी लीला जारी है. शत-शत नमन, इन्हें पोप से कहकर सैन्टहुड के फास्टट्रैक पर डलवाते हैं.चलाओ जगन पेटिशन कैम्पेन, हम तुम्हारे साथ हैं.

  4. October 5, 2009 at 6:32 am

    Nice PostI Like ThanksKeep it Up

  5. October 5, 2009 at 6:34 am

    पहली नज़र में तो यही लग रहा है कि आप संघी आँसू बहा रहे हैं |विस्तृत टिप्पणी थोडी देर बाद देता हूँ | 🙂 😦 😛 😀 :$ 😉

  6. October 5, 2009 at 6:34 am

    देश को चाटते इन दीमकों और इनकी बाम्बियों को ख़त्म करने के लिए हिन्दू जागेंगे या अभी "सेकुलरिस्म" की पिनक समाप्त नहीं हुई है.

  7. October 5, 2009 at 6:56 am

    श्रद्धा से नत मस्तक हूँ. महान संत का चले जाना अखर रहा है. आँखे भर आई, गला रूँध गया. हम भारतीय आँखों से देखते है, मगर अक्कल से अँधे हैं. धर्म प्रचार में राजाश्रय महत्त्वपूर्ण होता है. यह सभी धार्मिक मूखिया जानते है. अंग्र्जों के बाद ईसाईयों को राजाश्रय नहीं मिलता मगर धर्मांतरण कब काम आता? झारखण्ड से लेकर आंध्र तक धीमा जहर बहा है. बोलने वाले साम्प्रदायिक होते है.

  8. October 5, 2009 at 6:56 am

    मुझे तो ४०० लोगों का मरना भी तिल तो ताड़ बनाना लग रहा है| आंध्र में रोज कितने लोग मरते होंगे, सबको YSR के गम से चल बसना बताया गया, ताकि ये लगे कि YSR से महान आज तक कोई पैदा नहीं हुआ|

  9. October 5, 2009 at 6:57 am

    क्या भारत में सुप्रीम कोर्ट नहीं है?या सुप्रीम कोर्त का दायरा सिर्फ मायावती पर लागू होता है?इतनी बेईमानी!!!!

  10. psudo said,

    October 5, 2009 at 7:49 am

    Well written Suresh Ji

  11. October 5, 2009 at 8:09 am

    हम तो आज तक सिर्फ गांधी बाबा को ही सबसे बड़ा राष्ट्रीय संत समझते थे। ये तो उनसे भी आगे बढ़ गए।

  12. flare said,

    October 5, 2009 at 8:10 am

    मंदिरों के तोडे जाने की घटना बेहद दुःख भरी है ………. हे इश्वर आप से प्रार्थना है की इनसबको उचित दंड दे |किसी की संस्कृति का विनाश करना एक विवेकशील मनुष्य/ धर्म का कर्म तो नहीं हो सकता ? ये तो पशु प्रवृती है …….. !

  13. October 5, 2009 at 8:53 am

    बहुत सटीक जानकारी से भरा आलेख ! आभार !

  14. kash said,

    October 5, 2009 at 8:55 am

    कुछ लोग होते है जो पढनेके बाद सोचते हैं.यह जगा उनका नाम लेके लोगो का मूड मैं खराब नहीं करूंगाआपका लिखा पढनेके बाद यह पता चालता है की इसमे काफ़ि दिमाग लगाना पडता है और कफि सर्च करना पडता है इस तरह के आच्छे लेख के लिए बधाई स्वीकार करे थॅंक्स

  15. sajid khan said,

    October 5, 2009 at 9:02 am

    Shyad ek din sare hindu bhai apna dharam badal lenge.phir suresh bhayya ka kya hoga???dar lagta hai

  16. kash said,

    October 5, 2009 at 9:13 am

    @ sajid khan वाह क्या घातिया सोच है नाम पढनेके बाद लागही था पर आपने सिद्ध कर दिया थॅंक्स आपके घातिया सोच सबित करनेके लिए आपकी सोच देख के मुझे ऐसा लग रहा है की आपको पाकिस्तान में सारकारी जॉब आसानीसे मिलेगा

  17. mahashakti said,

    October 5, 2009 at 9:40 am

    काग्रेस की पैदाइस ही घोटले और रिश्‍वत वाली है, पहले अग्रेजो की गुलामी कि और फिर बुढौती का ढोल बजा कर विभाजन करवा दिया, आज के नेता आपनी जेब भरने में लगे हुये है।

  18. safat alam said,

    October 5, 2009 at 9:51 am

    ऐसे महान इनसान से सम्बन्धित लेख पेश करने बहुत बहुत बधाई सुरेश साहिब. भारत को ऐसे ही लोगों की आज आवश्यकता है जो जाति के लिए काम न करके देश के हित में काम करते हों।

  19. rohit said,

    October 5, 2009 at 10:20 am

    बंधु सुरेश जी आपने एक संत माफी चाहता हूँ राष्ट्र संत के बारे मे जो जानकारी देकर मेरे और मेरे जैसे बहुत से अज्ञानियो का ज्ञान वर्धन किया है उसके लिए बहुत बहुत साधुवाद . मैं ब्लॉग जगत के लिए तोड़ा नया हूँ और हिन्दी मे चाह के भी ज़्यादा टाइप नही कर पाता हूँ इसलिए कुछ कम ही टिप्पणिया करता हूँ. आपकी लेखनी बहुत ही प्रभावशाली है बहुत ही सुंदर तरीके से लिखते हैं सलीम जी माफी चाहूँगा मे कोई संघ का सेवक नही हूँ पर जो सही है सही ही बोला जाएगा .

  20. kash said,

    October 5, 2009 at 10:40 am

    कृपया कोई भी यहाँ ध्यान ना देना सुरेशजी मैं मेरी इमेज देखनेके लिए यह कॉम्मेंट कर राहा हूं कृपया इसे मत हटाइये मैं ब्लॉग की दुनियमे नया हूं समझो १५ घनते पहले ब्लोगिन्ग की दुनियमे मेरा जनम हुआ हैथॅंक्स

  21. October 5, 2009 at 10:57 am

    बहुत बढ़िया लेख |—————-@ Varun Kumarसंघी आंसू बहाने में क्या बुराई है, जब 'चर्ची' और 'इस्लामी' आंसू बहें तो ! ! !आज की दुनियादारी में यहाँ-वहाँ साधू संतों की टोली नहीं घूम रही | भाई साहब अकेले साधू होने पर सीधा कत्ल होता है, क्योंकि सामने वाला साधू नहीं है | नीति की बात नीतिवान से की जाती है उनसे क्या बात करोगे जो बहरे हैं और गंडासा लिए खड़े हैं |यदि आप ऐसे महापुरुष हैं कि शरीर का मोह नहीं तब तो मेरी बात पूरी तरह गलत है और मैं आपको नमन करता हूँ | लेकिन फिर भी सभी महापुरुष तो नहीं होते, आम आदमी भी होते हैं |लेन-देन दोनों तरफ से हो तो ही आजकल काम चलता है सिर्फ लेने-लेने से तो हिसाब गडबडा जायेगा | आप क्या हिन्दुओं से सिर्फ त्याग कि अपेक्षा रखते हैं, और बहार के लोगों के घर भरने देने चाहते हैं | हिन्दू भी आदमी हैं, उनके भी बाल बच्चे हैं, परिवार पलना है | लेकिन जिनकी आप आस देख रहे हैं, वो परिवार भी नहीं पालने देते | पाकिस्तान में गेर मुस्लिमों का दुखी जीवन टी. वी. पर देखना और सच में जीना, दोनों में जमीं आसमान का फर्क है | पकिस्तान में गैर-मुस्लिमों से जजिया मांगने पर हो सकता है की आपके खून जरा भी हलचल न हो, लेकिन जब किसी दिन खुद का कमाया हुआ पैसा आपसे कोई असल में छीन लेगा तो दिमाग में टन्न से बजेगी | दूसरो के तो मर जाने से भी दर्द नहीं होता लेकिन खुद के जुकाम भी हो जाये तो एक पल चैन नहीं पड़ता | इसलिए जितनी जल्दी सावधान हो जाओगे उतना कम कष्ट उठाना पड़ेगा, जो दूसरो के साथ हो रहा है वो आपके साथ भी हो सकता है | आप तो एक लेख लिखने पर ही आपत्ति कर रहे हैं, किसी दिन किसी ने जबरदस्ती हफ्ता वसूली कर दी ('जजिया कर') तब तो उसका खून ही कर दोगे | तब तो मैं आपको हत्यारा ही कहूँगा न | इसलिए सच्चाई को समझने की कोशिश कीजिये | ये एकतरफा अहिंसा, इमानदारी, सहृदयता का ही परिणाम है की कभी सबसे विकसित (सबसे अमीर, सबसे समृद्ध ) रहने वाला देश आज गरीबों की तरह विकसित देशों की लाल्ला-चोपडी कर रहा है | आप लाल्ला-चोपडी पसंद करेंगे या स्वाभिमान भरा जीवन |भाई साहब मैं तो महापुरुष नहीं हूँ, और जीवन से बहुत प्यार है | जितनी स्वतंत्रता से आज ये ब्लॉग पर टिपण्णी कर रहा हूँ, उतनी स्वतंत्रता से पकिस्तान में तो शायद नहीं कर पाता |चर्च क्या कम पड़ रहे हैं, पूरी दुनिया में, जो और जमीन पे जमीन चाहिए | अभी चर्च के लिए जमीन चाहिए | कल को ईसाई बढ़ जायेंगे तो दफ़नाने के लिए जमीन मांगेंगे, हिंदुस्तान की जनसँख्या के हिसाब से तो जमीन रहने और अनाज बोने के लिए ही कम पड़ जायेगी किसी दिन | इससे ठीक तो अग्निदाह का ही तरीका है जो जमीन तो नहीं मांगता ज्यादा, और विद्युत दाह नहीं तो उससे कुछ ज्यादा फर्क वाला भी नहीं है | और ये जो जमीन की बात बोल रहा हूँ, ये तो मोटी लोजिकल बात है जो समझ आनी ही चाहिए इसमें कोई धर्म वाली बात नहीं है जनसँख्या वृद्धि को देखते हुए तो अग्निदाह ज्यादा सही लगता है |————————-रही राजनेताओं की बात तो मुझे तो वर्तमान समय में कोई राजनेता देश का सेवक नज़र नहीं आता ये मैं उनकी समृद्धि के विरोध में नहीं कह रहा हूँ, अगर बात इतने तक ही होती तो ठीक थी | लेकिन वो देश को बेचने में लगे जिसका उन्हें हक़ नहीं है | मैं अपनी जमीन बेचूं तो आप को कोई तकलीफ नहीं होगी लेकिन क्या आप मुझे ऐसा करने देंगे की मैं जमीन भी आपकी बेच दूँ और पैसा भी खुद ही रख लूँ ?——————–बहुत से लोगों को, सुरेश जी ऐसी लेखों में संघी नज़र आते हैं | लेकिन जब वो उज्जैन, तिरुपति मंदिर घोटालों या हिन्दुओं के कांडों पर अंगुली उठाते हैं, उस समय इन लोगों को सुरेश जी विद्रोही नज़र नहीं आते |कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि नकली सेकुलरिस्ट ऐसे ही होते हैं |

  22. October 5, 2009 at 11:20 am

    @ kashआपका कमेन्ट बड़ा अजीब है |

  23. kash said,

    October 5, 2009 at 11:55 am

    @ shekhavatjiकोनसा कॉम्मेंट ? मेरे तो आज बहूत कॉम्मेंट है अजीब यानी उसमे अगर कोई गलति है तो माफी चाहता हूं

  24. October 5, 2009 at 12:02 pm

    @ KashJust above the my comment,in which you are testing your image viewing and requesting not to delete.

  25. Shyam Verma said,

    October 5, 2009 at 12:25 pm

    I was eagerly waiting for this post, The wonderful part of this post is that everything have reference to cross check the figures and validity.YSR को संत बताया जा रहा है क्यूंकि ये राजनीती है और सबको राज करना है| इनसे अच्छे तो बीजेपी वाले है, (सभी नहीं ) … नरेन्द्र मोदी ने अभी ऐसा काम किया हो तो बताओ … लेकिन वो तो 'आदमखोर' है …. तरस आता है उन वोटरों पे जो ये सब देखते हुए (६० वर्ष कम नहीं होते) फिर भी कांग्रेस पर भरोसा कर लेते है …भगवान् सद्बुद्धि दे इन कांग्रेस्सियो को जो पेड़ की उसी डाली को काट रहे है जिस पे बैठे है ||

  26. October 5, 2009 at 12:27 pm

    योगेन्द्र सिंह शेखावत जी, आपने वरुण कुमार जायसवाल की टिप्पणी को गलत समझ लिया. कृपया उनकी पुरानी पोस्ट पढ़ लें, आपका भ्रम दूर हो जायेगा.

  27. October 5, 2009 at 12:43 pm

    इस अनुसंधानात्मक आलेख के लिये आभार. इन बातों का विरोध होना जरूरी है. विरोध के लिये जनमानस को जगाना पडेगा जो इस आलेख द्वारा जरूर होगा.आज एक चिंगारी, कल एक आग, परसों यह परिवर्तन का दावानल बन जायागा. अत: लिखते रहें!!सस्नेह — शास्त्रीहिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती हैhttp://www.Sarathi.info

  28. October 5, 2009 at 12:59 pm

    @ निशाचरआपकी बात बिलकुल सही है, मुझे भी एकबारगी तो कुछ द्विअर्थी सी लगी उनकी पोस्ट अब वो व्यंग्य कर रहे या कुछ और ये तो वो विस्तार से कमेन्ट में लिखेंगे तब पता चलेगा |लेकिन मैंने अपनी कमेन्ट इस हिसाब से लिखी है, की उनके विरोध में नहीं है मेरा भी कमेन्ट व्यंग्यात्मक रूप से "आप" शब्द का इस्तेमाल कर रहा है | कह तो मैं उन सभी के लिए ही रहा हूँ जो सुरेश जी को वाकई संघी समझते हैं |——————;-) 😉 😉 😉 😉 😉 😉 ;-)आपको पता नहीं वरुण जी तो मेरे ब्लॉग के फोलोअर हैं | मैं अपने ब्लॉग के फोलोअर को नाराज़ करूँगा क्या | कस्टमर को नाराज़ करके दूकान कैसे चलाऊंगा |;-) 😉 😉 😉 😉 😉 😉 😉

  29. October 5, 2009 at 1:25 pm

    मेरी श्रधान्जली , बेचारे राजीव गाँधी सिर्फ ६७ करोड़ के बोफर्स में ऐसे उलझे आज तक न सुलझ पाए . और माननीय रेड्डी का परिवार की सम्पत्ति जो आपने बताई है उसमे ६७ करोड़ तो चिल्लर है

  30. October 5, 2009 at 1:49 pm

    वही तो कह रहा हूँ, कोई पहाड़ चित्र में देखने पर इतने सुकून का एहसास नहीं होता या कोई कवि कह रहा हो तब भी | लेकिन किसी दिन पहाड़ जाकर असल में बैठते हैं, तो जो छवि दिमाग में उतरती है वो 2-3 दिन तक नहीं उतरती आप 10 आदमियों को बताते नहीं थकते की कितना आनंद आया, लेकिन वो भी इंटेरेस्ट नहीं लेने वाले क्योंकि सिर्फ सुनने में वो आनंद कहाँ |मतलब कि ये तो सुरेश जी ने एक लेख में अलग-अलग रिकॉर्ड लिस्ट कर के YSR के बारे में बता दिया तो यहाँ कई लोग भोचक्के हो रहे हैं | वो सिर्फ हल्की-फुलकी न्यूज़ ही सुनते हैं, कि फलाँ नेता भ्रष्ट हैं, और दिमाग थोडी देर बाद में भूल जाता है | सच बात तो यही है कि YSR का नाम हटा के इस लेख को लगभग हर नेता के नाम से लिखा जा सकता है तो भी ज्यादा फर्क नहीं आने वाला है | किसी दिन सुरेश जी ने बारी-बारी से सभी नेताओं के रिकॉर्ड लिस्ट करने शुरू कर दिए तो शायद यहाँ बैठे कुछ लोगों को तो हार्ट अटैक ही आ जायेगा |————————-मैंने तो देखा है कि एक आदमी जो थोडा भी भ्रष्टाचार में टेलेंटेड हो तो नगर पालिका के चुनावों में वार्ड पार्षद बनकर भी कोठी खड़ी कर लेता है | अब आप सोचिये कि एक पार्षद या सरपंच ही इतना कुछ कर लेता है तो एक मंत्री लेवल का भ्रष्ट आदमी क्या करेगा | हमारे यहाँ तो सरपंचों के चुनावों में भी गोलियां चल जाती हैं और मुझे पूरा विश्वास बाकि भारत में भी इससे कम में काम नहीं चलता होगा |

  31. October 5, 2009 at 2:00 pm

    अभी-अभी फ़ोन पर एक स्नेही पाठक ने सूचना दी है कि कुरनूल जिले में वर्तमान बाढ़ की विभीषिका कम हो सकती थी, यदि श्रीसैलम बांध की ऊंचाई कम होती। असल में इस बाँध की ऊंचाई पहले तकनीकी टीम ने कम ही रखी थी, लेकिन चूंकि बेल्लारी में जगन बाबू का इस्पात प्लाण्ट है अतः पप्पा ने खुद इंटरेस्ट लेकर बाँध की उंचाई बढ़वाई ताकि बाँध का बैकवाटर उनकी फ़ैक्ट्री के पास पहुँच सके…। जय हो…

  32. October 5, 2009 at 2:10 pm

    बहुत बढ़िया | जय हो धरतीपुत्रों की |सुरेश जी ने अपने एक पुराने लेख में लिखा है की मदर टेरेसा को ईसाई परम्परा के खिलाफ 5 साल से पहले ही संत घोषित करने की कवायद शुरू हो गयी थी | तो हमारे स्वर्गवासी YSR साहब , Saint YSR कब बन रहे हैं ?माफ़ कीजियेगा सुरेश सर जी आज मेरी कमेन्ट कुछ ज्यादा ही हो गयी लगती है और आपके पेज का लोडिंग टाइम खामख्वाह बढ़ रहा है, पर क्या करूँ ऐसी खबरें पढने के बाद संयम कठिन हो जाता है | मुझे आपकी तरह लम्बा ही लिखने की आदत है, छोटे कमेन्ट में अपने विचार लिखना मुझे अभी ठीक से आया नहीं है |

  33. October 5, 2009 at 2:18 pm

    इसे कहते हैं तथ्यपरक लेखन, अब मनोहर कहानियाँ वाले समझें तब ना!! 🙂

  34. October 5, 2009 at 2:41 pm

    चलिए अब YSR की जरा कांग्रेसी समीक्षा पढ़ते हैं | १ . ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि एक राजनेता जनता पर चमत्कारिक असर डालकर इतनी लोकप्रियता हासिल कर ले और लोग उसके मुरीद बने रहे। राजशेखर रेड्डी ने कुछ ऐसा ही कमाल किया था। उन्होंने ऐसी योजनाएं लागू कीं जिनसे आम आदमी और गांव के लोगों का बेहद फायदा हुआ। इसका ऊपरी स्तर पर असर देखने को नहीं मिलता था, लेकिन आम लोगों ने इन योजनाओं और इन्हें लागू करने वाले नेता को सिर-माथे पर बिठाया। इसी का नतीजा था कि वह भारी बहुमत से दोबारा भी विजयी हुए, जबकि लोग समझते थे कि चंद्रबाबू नायडू वापस लौट आएंगे।२. जब राजशेखर रेड्डी मुख्यमंत्री बने तो उन्हे प्रशासनिक अनुभव बहुत कम था। केंद्र में वह हमेशा मंत्री पद के दावेदार रहे, लेकिन वह अवसर नहीं प्राप्त हो पाया। पीवी नरसिंह राव के जमाने में तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनकी बहुत मजबूत दावेदारी थी, मगर उन्हे अवसर नहीं मिल सका। मुझे याद है कि तिरुपति के कांग्रेस अधिवेशन में राजशेखर रेड्डी को एक असंतुष्ट की निगाह से देखा जा रहा था। बाद में आंध्र प्रदेश में उनके काम को देखते हुए सोनिया गांधी ने उन्हे प्रदेश अध्यक्ष बनाया। इसके बाद उनके आगे बढ़ने का सिलसिला नहीं थमा। कांग्रेस पार्टी भारी बहुमत से तेलगूदेशम को हराकर विजयी घोषित हुई। वह मुख्यमंत्री बने। उस समय लोगों का कहना था कि चंद्रबाबू नायडू जैसा प्रशासन वह नहीं दे पाएंगे, चंद्रबाबू जैसी मेहनत वह नहीं कर पाएंगे, उनके जैसा विकास का माडल वह नहीं ला पाएंगे। अपने पहले पांच साल में वह चुपचाप काम करते रहे। सुबह पांच बजे से लोगों से मिलना शुरू कर देते थे और आठ बजे तक प्रदेश के दौरे पर निकल जाते थे। उन्हे हेलीकाप्टर से ही चलने में मजा आता था, विमान से वह कम चलते थे। समय के बहुत पाबंद और अनुशासन के सख्त थे। दिल्ली आने से पहले जिससे मिलना होता था उससे हैदराबाद से ही एक हफ्ते पहले अपना समय निर्धारित करा लेते थे।३. चंद्रबाबू नायडू के बारे में यह कहा जाता था कि चुनावों में जीत हासिल करने की कला में उन्होंने महारथ हासिल कर रखी है और कैसा भी माहौल हो, वह चुनाव जीत लेते हैं। अलबत्ता विकास का जो माडल उन्होंने रखा था उसे आंध्र की जनता ने नकार दिया। उसकी जगह राजशेखर रड्डी का विकास माडल जनता ने स्वीकारा, जिसमें ज्यादातर काम शहरों के बजाय गांवों में हुआ था। गांव की जनता ने उनके पक्ष में जमकर वोट डाले। गांव का असर शहरों में भी रहा। जारी ……………………………………..

  35. October 5, 2009 at 2:42 pm

    अब जरा भाजपा का YSR के लिए मगरी स्नेह भी देख लें राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद जिस तरह की प्रतिक्रिया भाजपा नेताओं से आई है वह अपने आपमें उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है। भाजपा ने न केवल एक कांग्रेसी मुख्यमंत्री के लिए अपने दफ्तर के झंडे झुकाए, बल्कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह स्वयं प्रेस कांफ्रेंस कर संवेदना व्यक्त करने मुख्यालय पर आए। वेंकैया नायडू ने तो उनके व्यक्तित्व को बखूबी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजशेखर रेड्डी न केवल एक ऊर्जावान नेता थे, बल्कि पूरा आंध्र प्रदेश उनको हमेशा विकास परियोजनाओं के लिए याद करेगा। सिंचाई के लिए जितनी योजनाएं उन्होंने आंध्र प्रदेश को दीं उतनी आज तक कोई नहीं दे पाया। विपक्ष की सरकारों-पंजाब और बिहार ने उनके सम्मान में छुट्िटयां घोषित कीं। इस तरह का आदर बहुत कम मुख्यमंत्रियों को मिलता है। जारी……………………………..

  36. October 5, 2009 at 2:43 pm

    अब इस नाचीज़ की समीक्षा भी समझने की कोशिश करिए | बहुत आर्श्चय की बात नहीं इस देश ने महाकाव्य काल से लेकर आज तक की समस्त गौरवशाली उपलब्धियों को भुला दिया है | गुलामी के एक बहुत लम्बे दौर में हमने गुलामों की तरह न सिर्फ सोचना शुरू कर दिया बल्कि असली रंग ढंग भी एक गुलाम पहचान के पोषक बन गए हैं |मौर्य काल से लेकर आज तक हमें गुप्त राजाओं की ख्याति , चोलों की सैनिक क्षमता , महेंद्र्वर्मन और हर्ष की कला संस्कृति मराठों और सिख , राजपूतों की वीरता याद न रही …………….बल्कि हमने तो जी हुजूरी में हमलावरों की ऐशगाह पर ही तिरंगा फहराना सीखा है | अशोक और उसका स्मृति चिन्हः भी यदि गलती से लिया गया तो उसकी मजबूरी विभाजन के बाद भारत में किसी अन्य मुस्लिम लीग का न होना है | हमें तो सिर्फ सड़कें बनाकर और रोटी खिलाकर स्वाभिमान के सौदे करने वाले नरभक्षी भेड़िये चाहिए और हम उन्ही के महानता के गुण गाने लग जायेंगे चाहे वो शेरशाह शूरी ही क्यों न हो ? ऐसे में तो ब्रिटिश इंडिया ही बेहतर था कम से कम देश तो न बँटा होता और चीन की भी ब्रिटन को ऑंखें दिखलाने की हिम्मत न होती | जारी ………………………..

  37. October 5, 2009 at 2:44 pm

    खैर जाने दीजिये ……………ऐसा तो मैं मान नहीं सकता की भाजपा जैसी पार्टी को YSR के कुकर्मों के बारे में कुछ मालूम नहीं था | और यदि था तो ये ढोंग क्यों ? अगर यह शोक एक संवैधानिक व्यक्ति के लिए था तोफिर सौ खून माफ़ …………….\गूगल में कुछ समस्या थी तो कुछ लोंगों ने मुझे भी शर्मनिरपेक्ष समझ लिया | खैर थोडी देर के लिए मैंने भी सेकुलर होने का एहसास तो पाया | सन्दर्भ के लिए लिंक ……………|| " सत्यमेव जयते " || 🙂 😦 😛 😀 :$ 😉

  38. October 5, 2009 at 2:44 pm

    खैर जाने दीजिये ……………ऐसा तो मैं मान नहीं सकता की भाजपा जैसी पार्टी को YSR के कुकर्मों के बारे में कुछ मालूम नहीं था | और यदि था तो ये ढोंग क्यों ? अगर यह शोक एक संवैधानिक व्यक्ति के लिए था तोफिर सौ खून माफ़ …………….\गूगल में कुछ समस्या थी तो कुछ लोंगों ने मुझे भी शर्मनिरपेक्ष समझ लिया | खैर थोडी देर के लिए मैंने भी सेकुलर होने का एहसास तो पाया | सन्दर्भ के लिए लिंक ……………|| " सत्यमेव जयते " || 🙂 😦 😛 😀 :$ 😉

  39. October 5, 2009 at 2:49 pm

    जय पप्पा की. सब पप्पू की.

  40. October 5, 2009 at 2:57 pm

    waah Suresh ji ,Hamesha ki tarah jabardast lekh .Alfaaz bahut kum hai aaj aapki taareef ke liye. Magar mere paas itne hi hain."laajwaab aapka lekh aur jaihind"Apka ShubhekshuAnil Mistery

  41. October 5, 2009 at 3:27 pm

    मैडम के ज़िन्दगी का शायाद सबसे गहरा सदमा था … YSR बाबू आखिर उनके चहेते जो थे | और चहेते होंगे क्यों नहीं, क्रिश्चियन मिसनरी के लिए इतना काम तो किसी के बस की बात नहीं थी सिवाय YSR के |मुर्ख हिन्दुओं को देखिये वो अभी भी YSR को संत बना रहा है, वैसे भी हिन्दू तो अपने पैर मैं खुद कुल्हाडी मारने के लिए विख्यात है | YSR पे ऐसी श्रद्धा को कहते हैं "विकलांग श्रद्धा" |

  42. Common Hindu said,

    October 5, 2009 at 3:31 pm

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  43. October 5, 2009 at 3:34 pm

    @सिर्फ साजिद खान के लिए : जल्दी ही अमेरिका सारे तालिबानियों और मुस्लिम आतंकवादियों को मार डालेगा … साजिद खान भी तो मारा जाएगा … हु…हु… ये सोच के ही डर गया मैं तो ….

  44. Common Hindu said,

    October 5, 2009 at 3:52 pm

    जय हो…जय हो…जय हो…जय हो…By Suresh Chiplunkar "….. कुरनूल जिले में वर्तमान बाढ़ की विभीषिका कम हो सकती थी, यदि श्रीसैलम बांध की ऊंचाई कम होती। असल में इस बाँध की ऊंचाई पहले तकनीकी टीम ने कम ही रखी थी, लेकिन चूंकि बेल्लारी में जगन बाबू का इस्पात प्लाण्ट है अतः पप्पा ने खुद इंटरेस्ट लेकर बाँध की उंचाई बढ़वाई ताकि बाँध का बैकवाटर उनकी फ़ैक्ट्री के पास पहुँच सके…। जय हो…"जय हो…जय हो…जय हो…

  45. October 5, 2009 at 4:02 pm

    वाईएसआर के बारे में भाजपा नहीं जानती है तो वो कूप मंडुक है. कम से कम उसे आंध्रप्रदेश भाजपा और आरएसएस के तो इसके बारे में पूछना ही चाहिए, जिसने वाईएसआर की हिंदू विरोधी नीतियों के खिलाफ अदालत में दरवाजा खटखटाया. वाईएसआर के बारे में अंग्रेजी में-इगोटिस्टइगोसेंट्रिक और सबसे बढ़करईगोमेनिएक जैसे शब्द हैं. वाईएसआर ही वो संत था जिसने पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को विधानसभा में गालियां दी. वाईएसआर ही था जिसने मीडिया बैरॉन रामोजी राव को जेल में भेजवाने की हर संभव कोशिश की.वाईएसआर ने मुसलमानों को आरक्षण दिया. मुसलमानों की उच्चशिक्षा का खर्च उठाया.ईसाईयों को बेथलेहम भेजने के लिए धन दिया. ऐसे संत के बारे में भाजपा नहीं जानती है तो यह उसकी खूबी है और इसी खूबी के कारण उसकी हालत अच्छी है.शायद भाजपाई नेता ये भ्रम पालने की भूल कर रहे हैं कि हम वाईएसआर का गुणगान करेंगे तो हमारे नेताओं के निधन पर कांग्रेसी भी गुणगान करने आएंगे. तो करते रहिए. जय हो.

  46. October 5, 2009 at 4:03 pm

    बहुत अच्छी पोस्ट. काफी रिसर्च किया गया है. तथ्यों को पढ कर आश्चर्य हुआ. पर यह भी सच है कि हिन्दू एक ऐसी लुप्तप्राय प्रजाति है जो अपने पैर पर कुल्हाणी मारने के लिए युगों से विश्व विख्यात है. जय भारत जय सेक्युलर

  47. October 5, 2009 at 4:44 pm

    …सुरेश जी,बेहतरीन!बेहद मेहनत के साथ लिखा गय तथ्यपूर्ण आलेख…ईश्वर से यही प्रार्थना कि अब और ऐसे राष्ट्रसंत न भेजे मेरे देश में…हम नहीं हैं लायक उनके!

  48. October 5, 2009 at 4:52 pm

    ओहो एक और नया रिकार्ड, अब देखते हैं कि कौन नेता इस रिकार्ड को तोड़ता है।

  49. October 5, 2009 at 4:54 pm

    अरे ये तो प्रमोद महाजन के भी बाप लगते हैं . सुरेशजी बहुत ही अच्छी पोस्ट है बशर्ते की आपने हिन्दू बनाम ईसाई की दृष्टि से न उठा कर भ्रष्ट पूंजीवादी राजनीति को उद्घाटित करने की दृष्टि से उठाई हो

  50. October 5, 2009 at 5:30 pm

    देखिये सलीम खान और उमर की खाना पूर्ति करने उनके बड़े भाई वीरेन्द्र जैन आ गए अपना पता लेके | वीरेन्द्र जी दाल-भात मैं आप मूसलचंद कहा से ले आये? कम से कम विषय को तो देखकर टिप्पणी किया कीजिये | आपने एक शब्द नहीं कहा की YSR गलत थे … और आ गए स्पैम वाली टिप्पणी ले के ….

  51. cmpershad said,

    October 5, 2009 at 6:13 pm

    महान संत की जय हो!!!! यह सम्मान तो देश के उस इकलौते प्रधानमंत्री को भी नहीं मिला जो दक्षिण से चुना गया और सफ़लतापूर्वक एक अल्पमत सरकार को चलाया……. बेचारे पी.वी.नरसिम्हा राव:(

  52. October 5, 2009 at 6:21 pm

    जिस कुर्नूल में यह मेमोरीयल बनने जा रहा है, वहां १०००० करोड का नुकसान हो गया है, और कई लोग मारे गये हैं. मेरी बहन की बहु और पौत्र तीन दिन से तीसरी मंज़िल पर अटके थे. बाढ राहत कोष से कुछ पैसा इस राष्ट्र संत के मेमोरीयल में लगना ही चाहिये, तभी हमारे कर्तव्यों की पूर्ती होगी.

  53. KSP1857 said,

    October 5, 2009 at 7:52 pm

    अद्भुत लेख ! Thnx. good comment by RS ji & VKJ ji

  54. October 5, 2009 at 8:47 pm

    भाऊ जो हेलिकाप्टर लापता हुआ था उसे चालिस दिन तक़ नही ढूंढा जा सका था।उसमे सवार लोगो के रिश्तेदारों ने इन्ही राष्ट्र संत से भी मदद की गुहार लगाई थी मगर संत ने इंकार कर दिया था और आखिर हेलिकाप्टर मे ही निकल लिये।देखता है भगवान भी देखता है।अब हो सकता है किसी भाई को मेरा भगवान कहना बुरा लगा हो।तो वो उसके बदले जो चाहे मान ले।बम फ़ोड दिया भाऊ।ज़रूरी है।

  55. October 6, 2009 at 3:38 am

    I cant write in Hindi wilinglyanyway it was an awesome post.thanks

  56. October 6, 2009 at 4:50 am

    suresh ji aapne apne is lekh par kafi menat ki hai.sach ka samna ki tarah aap apne is lekh se bhi copy right ki shart ko hata den to bahut achchha hoga.mere blog par bhi aayen.satyarthved.blogspot.com hindi.hinu.hindustan

  57. October 6, 2009 at 5:16 am

    सोनिया अम्‍मा को यदि राष्‍ट्र संत नाम पसन्‍द आ गया तब फिर घोषणा होने में देर नहीं लगेगी, इसलिए सुरेश जी ऐसे नामकरण ना करे। आप तो यह मांग करें कि ऐसे महानायकों की समाधी बनाने से पूर्व उनकी सम्‍पत्ति को जनता को समर्पित कर दिया जाए।

  58. October 6, 2009 at 10:59 am

    यहाँ तो हर शाख पर उल्लू बैठे हैंअंज़ाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगात्राहि माम त्राहि माम त्राहि माम

  59. October 6, 2009 at 2:35 pm

    ऐसे महान युगपुरुषों को तो शाश्वत जयकारा प्राप्त है सत्ता द्वारा,सो उनकी क्या जय की जाय….आपकी जयजय कार करने को मन उत्कंठित हो गया है…..सचमुच सुरेश भाई आपके प्रति हम नतमस्तक हैं…और आज तो ब्लॉग माध्यम का भी जयकारा लगाने का जी कर रहा है,जिसकी वजह से यह सत्य सहज रूप में उद्घाटित हुआ है…नहीं तो आज के मिडिया को क्या पडी है जो इसके बारे में मुंह खोले,भले वह सबकुछ जानती हो…

  60. October 6, 2009 at 2:37 pm

    सुरेश भाई आप चिंता न करें उल जुलूल टिप्पणियों को हम नहीं पढ़ा करते,सो उन्हें यहीं भडास निकाल लेने दिया करें…कम से कम यहाँ उलझकर बाकी के विध्वंसक कामों से तो उनका ध्यान बँटा रहेगा न..

  61. सागर said,

    October 7, 2009 at 7:41 am

    पहली बार आपके ब्लॉग पर आया, थोडा अफ़सोस भी हुआ की पहले क्यों नहीं यह पता मिला… अभी पुण्य प्रसून वाजपयी से होता हुआ यहाँ आया हूँ… मुझे यह लेख बबुत पसंद आया… तरुण तेजपाल की बात याद आई की "२ रूपये कम खा कर आज आदमी खुद को इमानदार समझता है"शुक्रिया…

  62. October 7, 2009 at 5:02 pm

    भाई सुरेशजी, इयत्ता पर आपकी टिप्पणी के माध्यम से आपके ब्लॉग पर आना हुआ और अच्छा हुआ . संतजी पर आपका आवश्यक लेख पढा. राजनैतिक टिप्पणियां तो बहुत से लोगों ने की ,मैं क्या करूं? मूलतः व्यंग्य लिखने की बीमारी है . ऐसे ही किसी राजनैतिक छीछालेदर पर एक प्रबुद्ध पाठक ने कहा था कि राजनेता इतने चिम्मड हो गये हैं कि कुछ फरक ही नहीं पडता .परंतु मैं आपकी भाषा की तारीफ करूँगा . एक अच्छे व्यंग्य का स्वाद आया. हाँ , आपके उज्जैन कई बार आना हुआ है – महाकाल के दर्शन के लिये.मैं ये तो नहीं कहूँगा कि लूट नहीं है, पर उतना पाखंड नहीं जितना कि मैं दक्षिण में देखकर आया हूँ.

  63. October 7, 2009 at 5:36 pm

    सुरेश जी, बहुत उम्दा व्यंग्य के लिये बधाई, काफ़ी चटकदार अंदाज़ में लिखा है आपने ये लेख… ये लेख भी आपके हर लेख की तरह आपका (स्पेशल फ़्लेवर) लिये हुए था…बरहाल ये जो घोटालो और जो "सन्त जी" का "मिट्टी प्रेम" आपने काफ़ी रिसर्च और मेहनत करके सबके सामने रखा है—ऐसा "साफ़ और पाक चिट्ठा" हमारे देश के हर नेता का होगा..।

  64. kash said,

    October 8, 2009 at 6:36 am

    सुरेशजी प्लीज़ मुझे मदत करे ब्लॉग चालू किया है पर गूगलमे फाइंड करनेके बाद भी मेरा ब्लॉग नहि दिख रहा मैने कुछ वीडियोस अपलोड कीये है

  65. Sachin said,

    December 7, 2009 at 10:07 am

    Namaskar Suresh jee,Jyadah din nahi huye jab aapke blog ke baare mai pataa chalaa. tab se lagbhag aadhi posts padh chuka hoon. halanki saare din online rahataa hoon par jyadah time nahi miltaa.aapko tathayaa parakh jaankaari dene ke liye meri taraf se badhaai aur dhanyawaad bhi.Hindi mai kaise type karenge, woh abhi pataa nahihai. agli baar hindi mai hi comment doonga.shubham…


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