इस चुनावी पोस्टर के बारे में इटली की आंटी और "बुरका दत्त" कुछ कहेंगी? (एक अति माइक्रो पोस्ट)…

संभाजी नगर से राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवार कदीर मौलाना ने अपने चुनावी पोस्टर में मतदाताओं से अपील की है कि वे हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दें, तथा औरंग की ज़मीं पर चांद-सितारा फ़िर से लहरायें…। सोचा था कि दीपावली तक इस प्रकार की कोई भी पोस्ट नहीं लिखूंगा कि जिससे माहौल खराब हो, लेकिन “कांग्रेसी औलादें” देश को चैन से नहीं बैठने देंगी। इस पोस्टर को  देखिये, इसे ऑल इंडिया मस्जिद कमेटी ने जारी किया है (जिससे वे अब इंकार कर रहे हैं)… लेकिन सवाल ये उठता है कि शिवसेना के एक उम्मीदवार के पोस्टर में कृष्ण की गीता का उल्लेख और चित्र आता है तो चुनाव आयोग कार्रवाई करने पोस्टर भी हटवाता है और नोटिस भी देता है… क्या इस मामले में नवीन चावला अब तक सो रहे हैं? या अपने किसी “आका” के चरणों को चूम रहे हैं…। यह पोस्टर “बुरका दत्त” को अभी तक नहीं दिखाई दिया होगा… न ही अपने-आपको एसपी सिंह समझते, हाथ मलते हुए समाचार पढ़ने वाले पुण्य प्रसून वाजपेयी जी को…

ज्यादा क्या लिखूं, आप खुद ही पोस्टर देखिये, उसकी भाषा देखिये, उनके संस्कार देखिये, चुनाव आयोग के बारे में सोचिये, कांग्रेस की नीचता का विचार कीजिये, और हिन्दुओं को राजनैतिक रूप से इकठ्ठा क्यों होना चाहिये… सेकुलरों के मुँह पर इस पोस्ट को मारकर बताईये…

(स्रोत – शिवसेना सांसद संजय राउत द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर)

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66 Comments

  1. October 12, 2009 at 6:27 am

    इसका अर्थ तो है कि कांग्रेसी गुट शायद ये इलेक्शन हारने जा रहा है, बुरका दत्त कौन है? क्या संजय दत्त की कोई रिस्तेदार है?

  2. kash said,

    October 12, 2009 at 6:32 am

    क्या करे सेक्यूलर लोगो को ये कुछ दिखही नही सकता

  3. October 12, 2009 at 6:38 am

    बेहद घटिया काम. बेवकूफ, जाहिल, फिरकापरस्त आदमी का कारनामा.

  4. October 12, 2009 at 6:39 am

    "बन्दूक पूजा" में लीन हैं सब.

  5. October 12, 2009 at 6:47 am

    Same Same Congress and Foolish Secular Hindu

  6. October 12, 2009 at 6:51 am

    ऐसे लोगों को कांग्रेस चुनाव लड़ने के लिए टिकिट दे देती है इसी से कांग्रेस की मानसिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

  7. GATHAREE said,

    October 12, 2009 at 7:24 am

    in par karravaayi karenge to sekular kaise kahlayenge

  8. October 12, 2009 at 7:26 am

    समाजवादी कहते है, हिन्दु शब्द बोलना ही साम्प्रदायिकता है. "गंगा-जमुना" संस्कृति हमारे गले नहीं उतरती. ऐसे में अभी कुछ नहीं बोलेंगे. देखते हैं वे लोग ही इस धर्म निरपेक्षता पर क्या कहते हैं.

  9. October 12, 2009 at 7:47 am

    First of all lets hear the opinion of die hard advocates of 'Ganga-Jamnee' tehzeeb ! They are here in blog –land itself.

  10. October 12, 2009 at 8:04 am

    यह पार्टी अब अजमल कसाब को भी प्रत्याशी के तौर पर टिकट दे दे तो बिल्कुल आश्चर्य नही होगा।अब क्या सोचें और क्या विचार करें???????प्रणाम

  11. October 12, 2009 at 8:08 am

    कुर्सी के लिए राजनैतिक पार्टीयां कुछ भी कर सकती हैं। यह उनका जन्म सिद्ध अधिकार है:))

  12. October 12, 2009 at 8:09 am

    पता नहीं मेरे समझ में नहीं आता कि इस टाइप के तथाकथित मुसलमान क्या कहना चाहते हैं…. यह क्यूँ मुसलामानों के मन में हिदुओं के प्रति ज़बरदस्ती डर डालते हैं… जबकि कहीं कोई ऐसी बात नहीं है…. और यह कांग्रेस वाले .सही कहूँ तो असली द्वेष फैलाने वाले हैं. मेरा बस चले तो ऐसे मुसलामानों को बुलडोज़र से कुचलवा दूं….. दरअसल कदीर मौलाना टाइप के लोग कुछ नहीं हैं….!@#$%^&*……. बताइए…. मेरे जैसे शख्स के मुहँ से यह लोग गालियाँ निकलवा रहे हैं…. अरे ! कौन से गैर मुस्लिम मुसलमानों कि शान्ति में खलल डाल रहे हैं…. अब यह तो मुसलमानों को सोचना है? अब जब ऐसे पोस्टर छपेंगे तो द्वेष तो फैलेगा ही…… यह कांग्रेस क्यूँ नहीं सोचती है….. की ऐसे लोगों को टिकेट ही क्यूँ दिया जाये……? क्यूँ नहीं इनपे देशद्रोह का मुकदमा चलाती है? इस नेहरु को तो मरने के बाद भी फांसी पे चढाना चाहिए…. क्या कोई ऐसा इलाज नहीं है कि इन जैसे (कदीर मौलाना)मुसलमानों का हमेशा के लिए इलाज हो जाये? पता नहीं क्या ईमान है इनका?

  13. arun arora said,

    October 12, 2009 at 8:36 am

    दर-असल बात यह है भारत ही नहीं पुरे विश्व में साम्प्रदायिकता के सदस्यों ने जो इस्लाम और मुसलमान को बदनाम करने की जो शर्मनाक साजिश चल रही है उसका माध्यम यह मीडिया है. मीडिया के कई प्रकार है. आज के ज़माने में ब्लॉग भी इसका एक हिस्सा बन चुका है. जो आवाज़ इस्लाम के सपोर्ट में उठती है वह यह मीडिया दिखाता ही नहीं है और मुस्लिम समाज के गलत लोगों को इतना बाधा चढा कर पेश करता करता है कि एक इस्लाम ही है जो दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जबकि सच्चाई यह है कि एक इस्लाम की ही शिक्षाएं ही हैं जिसको अपना कर दुनिया को सभी खतरों से निजात पाई जा सकती हैं. ab aur kyaa kahe ji 🙂

  14. October 12, 2009 at 8:37 am

    @ महफूज़ भाई समस्या उतनी छोटी नहीं है जितनी दिख रही है इस तरह के मुसलमान भी समस्या की असली जड़ नहीं हैं | असली करामात तो सत्ता के खेल में रमे हुए लोग हैं जो की काग्रेस में भी हैं और भाजपा – सेना जैसी पार्टी में भी | इनसे निपटने के लिए विचारधारा के स्तर पर बड़ी तैयारी की ज़रूरत है , शैतान की ये औलादें किसी भी हद तक गिरकर सिर्फ सत्ता में बनी रहना चाहती हैं | चलाना है तो विचारधारा का बुलडोज़र चलाइए और इनको नेस्तनाबूत कर दीजिये | इस देश में अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दोनों को लड़ाने का और सत्ता में हमेशा बने रहने का जुगाड़ कांग्रेस ने कर लिया है अब इसे हम तोड़ सकें तो कोई बात बने वरना मरे हुए नेहरु जी को फांसी दे कर क्या फायदा ? इसको तोड़ने के लिए आज साम – दाम – दंड – भेद सभी का उपयोग करना ज़रूरी है ||| " सत्यमेव जयते " ||

  15. psudo said,

    October 12, 2009 at 8:54 am

    Suresh Ji, Congress ke raj me besharmi sabse bada gahana hai dekho hamare rastrapati ko? Dekho hamare pradnamantri ko? Dekho hamare elecletion commisnor ko? Yhan tak ki bade bade Judje be awwal darje ke besharam ho gaye hain.

  16. October 12, 2009 at 8:59 am

    तीस्ता,अरूंधति और उसकी गैंग को क्यों भूल गये भाऊ।ये लोग कुछ भी करे इन्हे सौ खून माफ़ है,कांग्रेस तो बेड़ा गर्क करके रहेगी इस देश का।

  17. October 12, 2009 at 9:03 am

    यह कांग्रेस पार्टी का दायित्व है कि वो कुछ गाईड लाइन जारी करे कि अपने पोस्टर में किस भाषा का इस्तेमाल करना है…या वह भी आँखें मूंदे बैठी है कि एन केन प्राकरेन वोट तो हासिल हों.ये राजनीतिज्ञ हर कोशिश करते हैं कि इन दो समुदायों में रिश्तों की दूरी सिर्फ बनी ही न रहें बल्कि गहरी खाई में बदल जाए और वो अपना फायदा उठाएं

  18. sajid khan said,

    October 12, 2009 at 9:07 am

    Baap re bada khatarnak hai ye toh.

  19. October 12, 2009 at 9:25 am

    और ये चाहते हैं की हम हिजडों की तरह चुप बैठें रहे. हमारे देश में रहकर हमें ही मिटायेंगे और 'वो' हमें गंगा-जमुनी तहजीब पढ़ा रहे हैं. आप देखिएगा ये जीतेगा भी. एक महफूज़ अली को छोड़कर किसी ने विरोध किया? और वो तो इन्हें मुस्लमान भी नहीं मानते होंगे. यह है कांग्रेसी धर्मनिरपेक्षता. ऐसे में भाजपा के पक्ष में खड़े होने को हमें कौन मजबूर कर रहा है?? और ये अरुण अरोरा साहब यहाँ गोबर छितराने के लिए मौजूद हैं. स्वच्छता वाले नाम हिन्दू रखलो चाहे मुसलमानी लेकिन फैलाओगे तुम गन्दगी ही.

  20. mahashakti said,

    October 12, 2009 at 10:19 am

    कांग्रेस हारने की ओर जा रही है यह तो तय लग रहा है।

  21. October 12, 2009 at 10:34 am

    dear suresh jiPlease correct you. you are wrong. As per our prime minister it is their right to eliminate to us. because it is their right on every resources of india.we hope you will update us in future also regarding these Deeds of muslims (Brother ? )regardshttp://parshuram27.blogspot.com/

  22. RAJENDRA said,

    October 12, 2009 at 11:00 am

    kya ab bhi kuch bakee hai jo in secular logon kee ankhen ko khol sake. tumhare munh par yah seedha tamacha nahin hai kya. Kahan gayee ncp kee himayati aunti ? khair burka datt to burke main se dekh bhi nahin patee hogi

  23. October 12, 2009 at 11:29 am

    काग्रेस ने अब तक हमे आपस मै लडवाने के सिवाय किया ही क्या है, अब इस के अंतिम दिन आ गये गये है, ओर मुस्लमान भी पागल नही, वो समझने लग गये है कि इस काग्रेस ने ६२ सालो मै इन का कोन सा भला किया, अच्छा है सब आपिस मै मिल कर इस काग्रेस ओर इस के नेताओ को ही साफ़ करे अगर सब ने भर पेट खाना है तोयह तो सरेआम बदमाशी है ,ऎसे पोस्ट्र लगा कर आम जनता को भडकाना…. ओर भडकाने वाले भी इन्ही के चम्चे होते है, अब चुनाव आयोग कहा है???

  24. Common Hindu said,

    October 12, 2009 at 11:32 am

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  25. October 12, 2009 at 12:03 pm

    पुरानी उक्ति है…विनाश काले विपरीत बुद्धिनई उक्ति है …जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की ओर भागता है………..____दोनों फिट बैठ रहीं है इन पर शायदक्योंकि चींटी के पर भी निकल आए हैं और दिये की लौ भी तेज़ हो गई है..अब अन्त तो सुनिश्चित है…………..

  26. October 12, 2009 at 12:51 pm

    संघ परिवार कि ओर से आपने काम कर दिय और आप अपनी शैतानी में सफल रहे . पोस्टर गलत है पर यह ऐसा भी हो सकता है जैसाकि मालेगावं में मरे गये हिन्दू आतंकवादियों के यहां से मुसलमानों की पोशाकें और नकली दाडियां आदि मिलने से सिद्ध होता है. क्योंकि आप ही कह रहे हैं कि उन्होने इंकार किया है एक संवैधानिक पद के चुनाव आयुक्त पर बिना आधार के चरन चूमने जैसी भाषा का प्रयोग निन्दनीय है

  27. October 12, 2009 at 1:10 pm

    वीरेन्द्र जैन साहब, हर काम में संघियों की शैतानी देखना छोड़ दीजिये… जब पोस्टर उजागर हो गया और हल्ला मचा तब जाकर संस्था ने अपना पल्ला झाड़ना शुरु किया। संजय गाँधी के जमाने से नवीन चावला का "चमकदार इतिहास" आप नहीं जानते हों, ऐसा मुझे तो नहीं लगता…। चुनाव आयोग द्वारा भेदभाव के कम से कम सौ उदाहरण आपको भेजे जा सकते हैं… चावला संवैधानिक पद पर बैठ गये तो क्या भगवान हो गये? उस पद पर कैसे और क्यों पहुँचे, क्या ये आपको नहीं पता? जबकि आप तो पत्रकार हैं…

  28. arun arora said,

    October 12, 2009 at 1:28 pm

    nishachar bhai khurshid karanavi jahil khan jaise ullu ke patthe aaj kuran ko lekar rangeela ratan padhane gaye hai so hamane unaki tippani yah chipakai thi bas taki aap sab ko suar ke bacce yad rahe . samjhe kya ? 🙂

  29. October 12, 2009 at 1:31 pm

    ise hi kahte hain DHARM NIRPEKSHATA. unka khoon khoon, hamara khoon pani, ham karen to paap we karen to nadani. desh kuchh isi tarah chal rahaa hai. Is baar Mumbai jaana huaa, pahli baar. wahan SHIVSENA ka asli rang dekha, lagaa ki Maharashtra ko desh men shamil rakhne ke liye aisii shaktiyon ka hona aawashyak hai.

  30. sanjay said,

    October 12, 2009 at 1:46 pm

    kya Sureshji, baithe thaale pareshaan hote ho saath doosron ko bhi karte ho. Kabootar ki tarah aankhen meech lo, jabaan see lo nahin to sabhi tathakathit dharm-nirpeksh, human rights & intellectuals ka mood kharaab ho jayega. Desh ko vikas ki taraf le jaane ka mahaan kaam kar rahe ye log bhi to kabhi-kabhi hi aankhen kholte hain tabhi to inki tooti bolti hai aur aap ho ki taklon ke shahar men kanghi bechne nikale ho. Dekhen shayad koi secular candle lekar aa raha hoga hamaare-aap jaise pathbhrashton ko roshni dikhane ke liye.

  31. BHARATBHAKTI said,

    October 12, 2009 at 1:56 pm

    Virendra jain Saheb….Suresh ji Sangh parivar ke nahai…Satya parivar ke hain …mana.Par jara aap bhee to apane parivar ke bare men bataiye ?

  32. October 12, 2009 at 2:43 pm

    विरेन्द्र जैन जी कितने पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। मुसलमानों की कोई भी गलती उजगर करे इन्हे उस में संघ ही दिखता है। कोइ बात नहीं इस बहाने संघ के वजूद का तो पता चल जाता है। ओर वीरेनद्र जैन जैसों की रोजी रोटी। जय हो……. संघ शक्ति युगे-युगे।

  33. October 12, 2009 at 3:07 pm

    अरे कांग्रेस की नीव मैं ही इतना कूड़ा – करकट है | लोग समझते हैं कांग्रेस की गन्दगी, पर चुनाव के समय अपना झूठा स्वार्थ ही साधने मैं लगा रह जाता है | अब हर चुनाव से पहले कांग्रेस — मुसलमान भाईयों मैं भाजपा और संघ का डर दिखा कर वोट की लामबंदी कर जाते हैं | कलावती जैसे को मैदान से कैसे हटाया, ३० लाख रुपया देकर … ये है कांग्रेस का खेल | मेरा मानना है की कदीर मौलाना का चुनावी पोस्टर कदीर मौलाना ने नहीं बल्कि कांग्रेस ने ही बनवाया है | चुनाव आयोग नाम बदल कर अब सोनिया या कांग्रेस आयोग कर देना चाहिए |

  34. October 12, 2009 at 3:08 pm

    सुरेश जी ये वीरेन्द्र जैन वही है जो खुले तौर पे कहते हैं की इन्होने भाजापा के खिलाफ ३०० आलेख लिखे हैं, मैंने पूछा कांग्रेस के खिलाफ कितने लिखे हैं तो कन्नी काट गए| वीरेन्द्र जैन is another congressi whose loyalty is towards madam's party not to the country. इनकी पूरी टिप्पणी कोई भी देखकर ये कह देगा की वे पत्राकारिता का ढोंग भर करते हैं, असल मैं वे कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं |

  35. October 12, 2009 at 3:15 pm

    बताना भूल गया था की वीरेन्द्र जैन का कहना है की सलीम खान भी RSS का आदमी है | मैंने जैन साहब से कह दिया की आप तो पत्राकार हैं पता लगा कर सबों को बताईये की सलीम खान भी RSS का आदमी है | ये सब कहते ही भाग खड़े होते हैं … अब यहाँ पर भी देखिये …. दुम दबा के भाग गए हैं …. ओह मैं तो भूल गया शायद मैडम जी की जी हजूरी मैं गए होंगे ….

  36. October 12, 2009 at 3:16 pm

    @ virendra jain, isme virendra jain ki kya galati hai, unki roji-roti to sangh parivar aur "hindu aantakvaad" jaise muddo ko jhutha uthane se hi chal rahi hai. virendra jain jaise aur bhi patrakaaro ki….

  37. October 12, 2009 at 3:20 pm

    It's disgusting, Now what to say for a poster or event like this.Full of anger, I am unable to say anything.Suersh Sir, this is an impotent country nothing will happen.

  38. October 12, 2009 at 3:22 pm

    वीरेंदर जैन जी, हिंदुस्तान में रहते हैं इसीलिए अभी तक दुकान चल रही है कहीं किसी मुस्लिम देश में होते तो आपकी जुबान पर पर ताले पड़ गए होते. "सेकुलरिस्म" की रोटी क्या आँखों की रौशनी भी मंद कर देती है? आपको यहीं बैठे-बैठे यह संघियों की शरारत लगने लगी. अगर शंका है तो कृपया तस्दीक़ कर लें. आप तो पत्रकार हैं आपको सूत्रों की कमी नहीं होगी. लेकिन दूसरे टीले पर बैठे हुए सूरज के उगने और ढलने में भी आपको संघियों की शरारत ही नजर आये तो फिर लगे रहिये…….अरुण जी, प्रोफाइल चेक किये बगैर आपके नाम का उल्लेख करते हुए टिप्पणी कर दी इसके लिए क्षमा चाहता हूँ.

  39. October 12, 2009 at 3:47 pm

    कांग्रेस के लिए अश्रुपूरित भावभीनी मंगलकामनाएँ.

  40. Shiv Ratan said,

    October 12, 2009 at 4:22 pm

    Veerandra Jain nindniya hai. Iski ninda ki jani chahiye. Isko jisne paida kiya hai unki bhi ninda ki jani chahiye. Nishchit hi kisi ghatiya khandan ka jeev nahi kujeev hai. Nalayak hai.

  41. October 12, 2009 at 4:31 pm

    यत्दाय इश्क है रोता है क्या आगे आगे देखिये होता है क्या

  42. SP Dubey said,

    October 12, 2009 at 5:30 pm

    विरेन्द्र जैन क्या कोइ मानवप्राणी है या कुछ और क्रिपया खोज बीन (जांच पड्ताल करिये)और सुचित करे ब्लोग पर जिससे पता लगे यह कौन सा जन्तु मानव प्रणी के नाम से पत्रकारिता कर रहा है इसके जैसे जो और है उन्के लियै भी यह कमैन्ट है

  43. Meenu Khare said,

    October 12, 2009 at 5:43 pm

    लोकतंत्र के लिए शर्मनाक.

  44. October 12, 2009 at 6:17 pm

    हनते तो हानिये, पाप दोष ना गिनीए !

  45. October 12, 2009 at 6:50 pm

    कांग्रेस को क्या कहें। अरे क्या जहाँ ये पोस्टर लगायी गयी थी वहाँ एक भी हिन्दू नहीं था । अगर वहाँ हिन्दू होगा और तब भी कुछ नहीं हुआ होगा तो आपका प्रयास असफल रहा, । अरे तो कोई तो होगा इस आतकंवादी का सर कलम कर चौराहे पर लटकाने वाला।

  46. October 13, 2009 at 4:14 am

    सुरेश जी, एक बेहतरीन (अति माइक्रो) पोस्ट के लिये बधाई!इस तरह की साम्प्रादायिक बात करने वाले इन्सान के साथ सिर्फ़ एक काम करना चाहिये वो ये कि इसकी ज़मानत ज़ब्त करके इसको चुनाव ही नही लडने दिया जाये..अगर ऐसा ना हो तो इसको इतनी बुरी तरह हराओं तो इसकी ज़मानत ज़ब्त हो जाये…….कोई इसको वोट ना दो….अगली बार ऐसी बात करने से पहले सौ बार सोचेगा….लेकिन जहां तक मैने भारतीय मानसिकता को समझा है ये जीत जायेगा बिल्कुल "वरुण गांधी" की तरह..!!!ये हमारी सबसे बडी कमज़ोरी है नेता हमारी भावनाओं को भडकाते है और हम अपनी भावनाओं कभी काबु नही कर पाते है…..तो जो उनको चाहिये होता है वो उनको मिल जाता है….."गद्दी"कोई भी उनको जवाब नही देता है हम लोग बस अपना दिमाग इस्तेमाल ही नही करते है…. इस तरह के भारतवासियो के लिये मैं अकसर कहता हूं "कि हम लोग भेडचाल चलते है एक के पीछे एक चलते रहते है ये मतलब नही चाहे आगे कुंआ हो या खाई…

  47. October 13, 2009 at 4:17 am

    इस देश में आते हुए संकट को भी कोई देख नहीं पा रहा, बस सब की नजर राजनैतिक हो रही है। मैं सत्ता में कैसे भी आ जाऊँ, इसके लिए मुझे किसी से भी समझौता करना पडे, तो कर लो। देश चाहे फिर से गुलाम हो जाए, इसकी चिन्‍ता नहीं है। लोग यह समझ रहे हैं कि यदि अकबर का जमाना आया तो क्‍या जजिया कर दे देंगे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, तब तो यह देश भी अफगानिस्‍तान बनेगा। इसे समझना चाहिए। केवल हम ही रहें, यह जुनून किसी भी सम्‍प्रदाय का हो, अच्‍छा नहीं है।

  48. October 13, 2009 at 4:30 am

    हिन्दू है ही इसी लायक, मौलाना ने कुछ गलत नहीं कहा इन जैचंदो के लिए !

  49. October 13, 2009 at 4:32 am

    Aadarniya Suresh ji…. saadar namaskar…………maine ek OK shabd par lekh likha hai……. apne blog par……… plz dekhiyega……. aapka email id nahi tha isliye yahan kaha aapse….. Dhanyawaadsaadarchota bhaiMahfooz.

  50. October 13, 2009 at 4:36 am

    Dr. Smt. Ajit Gupta ji आपने कहा "इस देश में आते हुए संकट को भी कोई देख नहीं पा रहा, बस सब की नजर राजनैतिक हो रही है।"मैं कहूँगा कि सब देख रहे है, मगर खून में स्वार्थ है, घटियापन, गुलामियत है, लालच है इस लिए देखा हुआ भी अनदेखा कर रहे है ! ऐसा न होता तो ये इतनी लम्बी गुलामी झेलते ही क्यों ?

  51. K. D. Kash said,

    October 13, 2009 at 5:09 am

    @ वीरेन्द्र जैन "पोस्टर गलत है पर यह ऐसा भी हो सकता है" यह आपका वाक्य है इसका मतलब ये है ऐसा नही होता ! और आपकी बात सिद्ध नही होती !आप एक सवाल का जवाब इमनदारी से दे की आपने वरुण गांधी के बारे मे कभी "ऐसा भी हो सकता है" कहकर उसकी बाजूसे कभी मत प्रदर्शन किया ता क्या?जवाब हां या ना मे मिले !

  52. October 13, 2009 at 6:08 am

    प्रिय मित्रोमें आपकी भावनाओं का आदर करता हुं. हम सब लोगों के मित्र और ब्लोगेर संजय ग्रोवर ने अपने एक व्यंग्य में लिखा है कि प्रेम अन्धा होता है और राष्ट्र प्रेम और भी व्यापक होता है . असल में इसी भावनात्मक ज्वार में स्वार्थ अपना खेल खेलता है . आप में से सारे ही लोगों ने मेरी पोस्ट में से वह वाक्य नहीं पढ पाया जिसमें कहा गया है कि "पोस्टर गलत है" और ना ही आपका ध्यान सुरेश जी की उस बात पर केन्द्रित हुआ कि "उन्होंने इसके जारी करने से इंकार किया है". आप में से किसी ने भी मेरे मालेगांव के सबूत पर भी कोइ ध्यान नहीं दिया. टिप्पणीकारों ने यह भी नहीं देखा कि मेंने तो अपना पूरा परिचय दिया हुआ है पर मेरे खिलाफ टिप्पणीकरों में से अधिकांश का प्रोफाइल ही उपलब्ध नहीं है इटली की आंटी के नाम से तीर चलाने वाले ये भी भूल गये कि कथित आरोपी कांग्रेस का नहीं राष्ट्र्वादी कांग्रेस का उम्मीदवार है जो पार्टी इटली की आंटी के खिलाफ ही अस्तित्व में आयी थी पर अपने अवसरवादी रुख के कारण उन्हीं इटली की आंटी की शरणागत है. फिर चुनाव आयुक्त के फैसले की प्रतीक्षा करने से पहले ही उनके खिलाफ राजनीतिक भाषा में फ़ैसला क्यों सुना दिया गया व इसके लिये चुनाव हो जाने का इंतज़ार क्यों नहीं किया गया . अगर आरोप गलत निकला तो क्या ये पोस्ट सम्बन्धित उम्मीदवार को नुकसान नहीं पहुंचा चुकी होगी. में फिर दुहरा हुं कि पोस्टर गलत है व कोई नितांत मूर्ख ही चुनाव के दौरान ऐसा पोस्टर निकालेगा तो फिर मेरे सन्देह पर गालियां बकने लगना और बहस को खत्म करने की कोशिश करना क्या फासिस्ट तरीका नहीं है जिसके लिये संघ जाना जाता है.

  53. October 13, 2009 at 6:36 am

    विरेन्द्र साहब इस देश में हिन्दु ही सदा जिम्मेदार रहा है. जैसे गोदरा में जल मरना. कुछ साथी इसे भी आरएसएस की शैतानी बताते है. कम से कम मरे हुए लोगो के प्रति तो सहानुभूति दर्शाई ही जा सकती है. ऐसा भी अल्पसंख्यकों के प्रति कैसा प्यार जो जमीर ही मार दे. हर गलत काम के लिए आरएसएस को जिम्मेदार बता कर अपराधियों का पक्ष लेना क्या अपराध के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करना नहीं है? भाजपा सरकार में नहीं केन्द्र में आरएसएस विरोधी सरकार है, तमाम साधन उसके पास है. तो इस संगठन का पर्दाफास कर प्रतिबन्धित क्यों नहीं करते?

  54. October 13, 2009 at 6:41 am

    प्रिय वीरेन्द्र जी, क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस इटली की आंटी की कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ रही? यह सही है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस अवसरवादी ठीक उत्तनी जितनी कांग्रेस कम्युनिष्ट पार्टी अवसरवादी है.आपके पास कौन से मालेगांव के सबूत हैं? किस अदालत ने इन्हें माना है/ मालेगांव की अदालत ने तो प्रज्ञा ठाकुर पर लगाये मकोका को भी अमान्य कर दिया है? आप इन पोस्टर लगाने वालों को नितांत मूर्ख बता रहे हैं. दिल्ली में बाटला हाउस के आस पास इलेक्शन के दौरान चारा चोर लालू के उम्मीदवार के भी एसे ही पोस्टर लगे थे.आपके वही तरीके हैं जिनके लिये कम्युनिष्ट जाने जाते हैं. आप कहते हैं कि 62 में चीन पर हिन्दुस्तान ने हमला किया. पिछले दिनों चीन ने हिन्दुस्तान की सरहद के अन्दर चीनी भाषा में जो लिखा वह भी आपको संघ का कारनामा लगता है. आपकी निगाह में चीन तो एकदम निकम्मा है.:)आप अपने बचपन में चिरगांव में दद्दा मैथली शरण गुप्त के आस पास रहे. कुछ और नहीं कम से कम उनसे थोड़ा देश प्रेम ही सीख लेते…

  55. October 13, 2009 at 6:45 am

    विरेद्र जैन जी, लगे रहिए उनकी जी हजुरी में वो आपको काबा में जैन मन्दिर बनाने के लिऎ जगह जरुर दे देंगे, फिर वहाँ संघ वाले तो क्या उनके पिता जी भी नहीं पहुंच सकते। फ़िर आप होंगे और वो होंगे पुरी मस्ती कूटना दोनों मिलकर

  56. October 13, 2009 at 7:15 am

    वैसे यह कोई नई बात नहीं है, मुस्लिम बहुत आबादी के इलाकों में ऐसे पोस्टर लगे ही रहते हैं. ऐसा नहीं है कि rss को फासिस्ट कहने वालों को इसकी खबर नहीं है. इन्हें सब पता है कि कौन कितने पानी में है लेकिन इनके दिलों में बेईमानी है इसलिये इनसे कोई आशा मत कीजिये. इन्हें समझाना बेकार है.

  57. ek aam aadmi said,

    October 13, 2009 at 7:24 am

    मैं फिर वही दोहराऊंगा, गलती पूरी हिन्दुओं की है जो सब कुछ देखकर आंखे मूंद लेते हैं. बेवकूफ हैं हिन्दू. गुलामी का मजा इन्हें लूटना है. वीरेन्द्र जी तो मुझे …….. की पैदावार लगते हैं इसलिये इनकी बातों का क्या बुरा मानना. जिस व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ा हो उसे तो सही कराया जा सकता है लेकिन जो दिखावा कर रहा हो उसके पिछवाड़े पर ………लगाना ही उचित होगा.

  58. October 13, 2009 at 7:29 am

    कभी ऐसे वरुण गाँधी के बारे में भी लिख दिया करो, जो खुलेआम एक वर्ग के लोग को काटने की बात करता है, उसको तो संघ वाले हीरो बना रहे हैं. एक का समर्थन और दुसरे का विरोध, क्या ये पक्षपात और सांप्रदायिक सोच नहीं है. वैसे उन्होंने सारे शिवसैनिक हिन्दुओं को राजनीतिक रूप से मिटाने की बात की है न की हिन्दुओं का नरसंहार करने की. राजनीतिक रूप से मिटाने की बात को आपने बड़ी खूबसीरती से दूसरी तरफ मोड़ दिया. अगर इतने बड़ी बात कोई चुनाव के समय कह दे तो उसको चुनाव आयोग या अदालत का सामना तो करना ही पड़ेगा. चुनाव आयोग या अदालत का सामना न भी करना पड़े तो क्या बालासाहब या उनका पला पोसा सांप चुप रहेगा.वैसे बात को समझे

  59. October 13, 2009 at 8:10 am

    ऐसी पोस्‍ट पर बुर्का दत्‍त को याद करने का क्‍या मतलब? बुरका दत्‍त ना कांग्रेस की तरफ है ना तुम्‍हारी तरफ, वह बुरके की तरफ है जिसे बुलेट प्रूफ जाकिट का नाम दिया जा सकता है, नारी जो नहीं दिखाना चाहती वह ना दिखे, बुर्के वाली के हम तुम हर कहीं नजर नहीं डाल सकते, बल्कि कहीं भी नहीं डाल सकते, जबकि सानिया तो जानती ही नहीं‍ कि हम बोल देख रहे हैं कि बल्‍ला, उसे कहते हैं बंद मुटठी लाख की खुल जाये तो खाक की,अवधिया चाचा नाम में क्‍या रखा है फूल तो फूल है किसी भी नाम से पुकारो

  60. October 13, 2009 at 8:11 am

    @ एक आम आदमी – आपसे और बाकी सभी टिप्पणीकारों से निवेदन है कि कृपया संयमित भाषा में टिप्पणी करें… मैं अमूमन टिप्पणी हटाने के पक्ष में नहीं होता, इसलिये मजबूर न करें… @ वीरेन्द्र जैन साहब – आप अपना पता भेजें, इस पोस्टर की प्रति आपको औरंगाबाद से मंगवाकर भिजवाता हूं, ताकि आप खुद इसकी सत्यता की जाँच कर सकें…। इस्लामी और ईसाई आतंकवाद को भले ही आप कोई गम्भीर समस्या मानने को तैयार न हों, लेकिन मैं रेत में सिर गड़ाये हुए बैठा शतुर्मुर्ग नहीं बन सकता, जो सच्चाई कल देश के सामने आना है, उसकी एक झलक मात्र मैं अपने चिठ्ठे में दिखाने की कोशिश कर रहा हूं… आप मानें या ना मानें उससे हकीकत बदलने वाली नहीं है… @ खुर्शीद अहमद – मेरा नाम लिखकर की गई तेरी गंदगी भरी पोस्ट के बाद, तेरा हक और तेरी औकात ही नहीं बची कि तेरी किसी भी बात का जवाब दिया जाये…। चूंकि तूने यहाँ गालियाँ और थर्ड क्लास प्रचार लिंक नहीं दी है सिर्फ़ इसलिये तेरी यह टिप्पणी मैं नहीं हटाऊंगा… यही हमारे बीच के "संस्कारों" का अन्तर है…। समझदार तो तू है नहीं, इसलिये इसे नहीं समझेगा…

  61. October 13, 2009 at 12:02 pm

    प्यारे दोस्त आपका सम्बोधन हास्यास्पद है वैसे मेरा पता तो मेरे सभी ब्लोग्स पर है और इंटर्नेट की सभी साहित्यिक पत्रिकाओं से ज़ारी 200 से अधिक आलेखों में है, पर जो पोस्टर आप अपने ब्लोग में ज़ारी कर चुके हैं उसे मुझे भेज कर क्या करेंगे लोग ये और कहेंगे कि आपके लोगों के पास और भी सरप्लस में बच गये थे क्या? यार अगर आप ब्लोग को सोचा समझा प्रचार मंच के स्थान पर विचार मंच बनाना चाहते हैन तो अपने इन बेनामी चम्पुओं की गालियों से अपना ही नुकसान कर रहे हैं जो भ्रई लोग तर्क और विचार को भटकाना चाहते हैं वे ही ये हथकन्डा अपनाते हैं. अगर ये सच्मुच आपके लोग नहीं हैं तो फिर मोडेरेशन लागू करने में कोई बुराई नहीं है . आप कभी कभी तो सचमुच बुद्धिजीवी लगते हो और कभी कभी हथकंडेकबाज़ अगर बुद्धिजीवी हैं तो किसी न किसी दिन आपकी समझ में सच्चाई आ ही जायेगी. संघ परिवार में मेरे अनेक आत्मीय मित्र हैं और जब वे अपने औज़ारों के बारे में बताते हैं तो वे आपके तरीके से मेल खाते हैं

  62. RDS said,

    October 14, 2009 at 1:11 am

    @ श्री वीरेन्द्र जैन सा0 अनेक व्यक्ति भ्रांतियों और पूर्वाग्रहों में अपना समस्त जीवन बिता देते हैं पूर्वाग्रहों के चलते सत्यता की यथार्थ परक जांच नही कर सकते क्योंकि यह ओछा लगता है । कम्यूनिस्ट सोच से ओत प्रोत तथाकथित बुद्धिजीवियों की मनोदशा भी कमोबेश ऐसी ही है । यदि आपने संघियों को भूकम्प, बाढ, भोपाल गैस रिसन जैसी त्रासदियों में बिना किसी भेदभाव के (जी हां , धर्म के भेद से भी परे )रात दिन एक करते हुए काम करते देखा होता तो यह न कहते कि ये लोग हथकंडेबाज़ हैं । मेरे विचार से अब समय आ गया है कि हम बैंक कर्मी कम्यूनिष्ट दूषण से मुक्त हों और स्वतंत्र सोचें । सादर

  63. Ashok Sharma said,

    October 14, 2009 at 1:41 am

    Jai Ram KiBhai SahabAapke Lekh Se Main Bahut Prabhabit Hun Meri Aapse Request Hai Ki Aap Ishi Tarah Likhte Rahe———————- Aapka Anuj

  64. Indra said,

    October 14, 2009 at 7:39 am

    सुरेशजी, मुझे एक बात समझ नहीं आती कि BJP, शिवसेना, RSS, VHP और बजरंग दल क्यों सो रहे हैं? ये लोग किस बात का हिन्दू वोट मांगते हैं? ये सब वाकई ही जैचंद कि औलाद हैं और शिवसेना वैसे तो वानखेडे stadium की pitch खोदती है उतर भारतियों को मारती है और अपने ही महाराष्ट्र में पोस्टर देख कर खामोश है? क्यों नहीं सड़कों पर उतरी? अगर ऐसा होता तो बुरका दत्त क भी मजबूरी होती इसको कवर करना

  65. October 14, 2009 at 6:04 pm

    इस तरह का पोस्टर जारी करना तो किसी भी लिहाज से देशद्रोह से कम नहीं है | वीरेन्द्र जैन जी कभी कांग्रेसी चश्मा उतार कर भी देख लीजिए |

  66. yateendra said,

    October 17, 2009 at 7:30 pm

    its very hard to say that the above poster is not a reality. i m in mid 20's but i know its a fact of india that anyone free to do anything.my single question is have any blogger having that amount of guts to stop these type of acts: or our law or political system or beurocracy or press give such protection to an indian( truly indian)that can fearlessly stop these type of incidences on his/ her own. answer is too simple-no. u will be hanged on crossing publicly.n before next election maulana ji became shaheed for the same crossing. indian voter is like baans ke phool jo khilte hain aur phir poora ped hi mar jaata hai.difference is bamboo blossomes every 20th or 40 th yr. but we every 5th year. sabhi se nivedan hai kripya apna khoon na jalayen aur jahan bhi jitna bhi mauka lage dheere dheere chulate chalein. aap sabka chota se chota sahyog true india ke nirmaan me count karega. akhir gillu ne jab pathar raam setu me dala to ramayan me aaya na? so dont be sad; dont worry; and dont fear.all religions are for india except religion of terror. kripya matlab na lagyein sab spasht to likha hai. gillu ka exple is liye diya kuoonki wahi yad aya tha. i think its not religious.do u?


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