>दिवाली कैसे

>आ गई दिवाली दीपों का पर्व .खुशी को लिए .ये साड़ी बात हम दिवाली को लेकर करते है करना ही चाहिए साल में एक बार तो आती ही है .जगमग कर देती है संसार को पर वो तो सिर्फ़ उनके ही संसार को जिनके पास माल है .गरीबो के लिए तो ये एक आम दिन की तरह ही होता है वही दिन भर मजदूरी और रात में थका हारा फिर सोना और सुबह उठ कर काम .हम सोचते है अरे भाई दिवाली है खूब पठाके चलाओ खूब मिठाई खाओ ,खूब जुआ खेलो और पैसो को उडाओ ,कभी नही सोचते तो हम ये है की अगर कुछ बचाकर गरीबो की मदद कर दी जाए तो उनकी भी दिवाली हो जायेगी ,वो भी हर उस तरह के अनुभव को उठा सकेंगे जिसके बारे में वो सिर्फ़ सोचते है .मैं सायद बकवास कर रहा हु ऐसा बहुत से लोग कहेंगे पर मैं अपने सोच को इसलिए कह रहा हु की मैंने देखा है की गरीब लोग किस तरह से आंहे भरते है .कुछ अगर हम उनके लिए भी कर सके तो उनकी भी हर दिन होली और हर रात दिवाली हो जायेगी ,उनको तो बस अगर दशमलव भी दे दिया जाए तो वो खुश रहते है .खैर जो भी हो ये तो है अगर हम ऐसा सोच भी ले तो आधा तो हम उसी समय कर देते है यही काफी है.

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