फ़ाइव स्टार होटल की नौकरी छोड़कर, मदुरै की सड़कों पर मनोरोगियों, पागलों और विक्षिप्तों को भोजन कराता एक महात्मा… A Social Worker Madurai

हम सभी ने अपने-अपने शहरों में सड़कों, गलियों और बस-स्टैण्ड, रेल्वे स्टेशनों आदि कई जगह अनाथ, लेकिन पागल और अर्धविक्षिप्त लोगों को हमेशा देखा है। कभी-कभार दया दिखाये हुए हम उनको कुछ खाने को दे देते हैं, लेकिन मनुष्य के शरीर को भूख तो जीवन भर ही लगती है, सुबह-शाम लगती है, चाहे वह अमीर हो या गरीब, बुद्धिमान हो या अर्धविक्षिप्त। हम कभी भी इस बात पर विचार नहीं करते कि आखिर शहर भर में फ़ैले ऐसे भिखारियों (जो कि हट्टे-कट्टे और भले-चंगे नहीं, बल्कि जिनका मानसिक सन्तुलन खोया हुआ है) को रोज खाना कैसे मिलता होगा? सुबह-शाम वे क्या खाते होंगे? जो “प्रोफ़ेशनल भिखारी” (जी हाँ, प्रोफ़ेशनल) हैं, वे तो घूम-घूम कर माँगकर शाम तक आराम से इतना पैसा एकत्रित कर लेते हैं कि खाने के अलावा दारू भी पी सकें, लेकिन ऐसे अर्ध अथवा पूर्ण विक्षिप्त बेसहारा लोगों के बारे में क्या, जो ठीक से बोल भी नहीं पाते, अथवा एक जगह से दूसरी जगह चलकर जाने में उन्हें बेहद तकलीफ़ होती है, उनका गुज़ारा कैसे होता होगा?

यही सारे प्रश्न मदुराई के एक युवक एन कृष्णन के दिमाग में उठते थे, लेकिन उसने वह कर दिखाया जो कई लोग या तो सोच ही नहीं पाते, अथवा सिर्फ़ सोचकर रह जाते हैं। मदुराई का यह कर्मठ महात्मा, पिछले सात साल से रोज़ाना दिन में तीन बार शहर में घूम-घूमकर ऐसे रोगियों, विक्षिप्तों और बेसहारा लोगों को खाना खिलाता है। मात्र 30 वर्ष की उम्र में “अक्षयपात्र” नामक ट्रस्ट के जरिये वे यह सेवाकार्य चलाते हैं।

अक्षयपात्र ट्रस्ट की रसोई में झांककर जब हम देखते हैं, तो पाते हैं कि चमचमाते हुए करीने से रखे बर्तन, शुद्ध दाल, चावल, सब्जियाँ और मसाले… ऐसा लगता है कि हम किसी 5 सितारा होटल के किचन में हैं, और हो भी क्यों ना, आखिर एन कृष्णन बंगलोर के एक 5 सितारा होटल के “शेफ़” रह चुके हैं (इतने बड़े होटल के शेफ़ की तनख्वाह जानकर क्या करेंगे)। कृष्णन बताते हैं कि आज सुबह उन्होंने दही चावल तथा घर के बने अचार का मेनू तय किया है, जबकि शाम को वे इडली-सांभर बनाने वाले हैं… हम लोग भी तो एक जैसा भोजन नहीं खा सकते, उकता जाते हैं, ऐसे में क्या उन लोगों को भी अलग-अलग और ताज़ा खाना मिलने का हक नहीं है?”। कृष्णन की मदद के लिये दो रसोईये हैं, तीनों मिलकर नाश्ता तथा दोपहर और रात का खाना बनाते हैं, और अपनी गाड़ी लेकर भोजन बाँटते हैं, न सिर्फ़ बाँटते हैं बल्कि कई मनोरोगियों और विकलांगों को अपने हाथ से खिलाते भी हैं।

कृष्णन कहते हैं कि “मैं साधारण भिखारियों, जो कि अपना खयाल रख सकते हैं उन्हें भोजन नहीं करवाता, लेकिन ऐसे बेसहारा जो कि विक्षिप्त अथवा मानसिक रोगी हैं यह हमसे पैसा भी नहीं मांगते, और न ही उन्हें खुद की भूख-प्यास के बारे में कुछ पता होता है, ऐसे लोगों के लिये मैं रोज़ाना भोजन ले जाता हूं”। चौराहों, पार्कों और शहर के विभिन्न ठिकानों पर उनकी मारुति वैन रुकती है तो जो उन्हें नहीं जानते ऐसे लोग उन्हें हैरत से देखते हैं। लेकिन “पेट की भूख और कृष्णन द्वारा दिये गये मानवीय संवेदना के स्पर्श” ने अब मानसिक रोगियों में भी इतनी जागृति ला दी है कि वे सफ़ेद मारुति देखकर समझ जाते हैं कि अब उन्हें खाना मिलने वाला है। कहीं-कहीं किसी व्यक्ति की हालत इतनी खराब होती है कि वह खुद ठीक से नहीं खा सकता, तब कृष्णन उसे अपने हाथों से खिलाते हैं। कृष्णन बताते हैं कि उन्होंने ऐसे कई बेसहारा मानसिक रोगी भी सड़कों पर देखे हैं, जिन्होंने 3-4 दिन से पानी ही नहीं पिया था, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था पानी कहाँ मिलेगा, और पीने का पानी किससे और कैसे माँगा जाये।

इतना पुण्य का काम करने के बावजूद भोजन करने वाला व्यक्ति, कृष्णन को धन्यवाद तक नहीं देता, क्योंकि उसे पता ही नहीं होता कि कृष्णन उनके लिये क्या कर रहे हैं। सात वर्ष पूर्व की वह घटना आज भी उन्हें याद है जब कृष्णन अपने किसी काम से मदुराई नगर निगम आये थे और बाहर एक पागल व्यक्ति बैठा अपना ही मल खा रहा था, कृष्णन तुरन्त दौड़कर पास की दुकान से दो इडली लेकर आये और उसे दीं… जब उस पागल ने उसे खाया अचानक उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आई… कृष्णन कहते हैं कि “उसी दिन मैंने निश्चय कर लिया कि अब ऐसे लोगों के लिये भोजन की व्यवस्था मुझे ही करना है, उस भूखे पागल के चेहरे पर आई हुई मुस्कुराहट ही मेरा धन्यवाद है, मेरा मेहनताना है…”।

इस सारी प्रक्रिया में कृष्णन को 12,000 रुपये प्रतिदिन का खर्च आता है (भोजन, सब्जियाँ, रसोईयों की तनख्वाह, मारुति वैन का खर्च आदि)। वे कहते हैं कि अभी मेरे पास 22 दिनों के लिये दानदाता मौजूद हैं जो प्रतिमाह किसी एक तारीख के भोजन के लिये 12,000 रुपये रोज भेजते हैं, कुछ रुपया मेरे पास सेविंग है, जिसके ब्याज आदि से किसी तरह मेरा काम 7 साल से लगातार चल रहा है। इन्फ़ोसिस और TVS कम्पनी ने उन्हें 3 एकड़ की ज़मीन दी है, जिस पर वे ऐसे अनाथ लोगों के लिये एक विश्रामगृह बनवाना चाहते हैं। सात साल पहले का एक बिल दिखाते हुए कृष्णन कहते हैं कि “किराने का यह पहला बिल मेरे लिये भावनात्मक महत्व रखता है, आज भी मैं खुद ही सारा अकाउंट्स देखता हूं और दानदाताओं को बिना माँगे ही एक-एक पैसे का हिसाब भेजता हूं। आर्थिक मंदी की वजह से दानदाताओं ने हाथ खींचना शुरु कर दिया है, लेकिन मुझे बाकी के आठ दिनों के लिये भी दानदाता मिल ही जायेंगे, ऐसा विश्वास है”। इलेक्ट्रानिक मीडिया में जबसे उन्हें कवरेज मिला और कुछ पुरस्कार और सम्मान आदि मिले तब से उनकी लोकप्रियता बढ़ गई, और उन्हें अपने काम के लिये रुपये पैसे की व्यवस्था, दान आदि मिलने में आसानी होने लगी है।

ऐसा नहीं कि कृष्णन का एक यही काम है, मदुरै में पुलिस द्वारा जब्त की गई लावारिस लाशों का अन्तिम संस्कार भी वे करते हैं। नगर निगम, सरकारी अस्पताल और पुलिस उन्हें सूचित करते हैं और वे उन लावारिस मुर्दों को बाकायदा नहला-धुलाकर उनका अन्तिम संस्कार करते हैं।

कृष्णन अभी तक अविवाहित हैं, और उनकी यह शर्त है कि जिसे भी मुझसे शादी करना हो, उसे मेरा यह जीवन स्वीकार करना होगा, चाहे किसी भी तरह की समस्याएं आयें। कृष्णन मुस्कराते हुए कहते हैं कि “…भला ऐसी लड़की आसानी से कहाँ मिलेगी, जो देखे कि उसका पति दिन भर दूसरों के लिये खाना बनाता रहे और घूम-घूमकर बाँटता रहे…”। प्रारम्भ में उनके माता-पिता ने भी उनकी इस सेवा योजना का विरोध किया था, लेकिन कृष्णन दृढ़ रहे, और अब वे दोनों इस काम में उनका हाथ बँटाते हैं, इनकी माँ रोज का मेनू तैयार करती है, तथा पिताजी बाकी के छोटे-मोटे काम देखते हैं। पिछले 7 साल में गर्मी-ठण्ड-बारिश कुछ भी हो, आज तक एक दिन भी उन्होंने इस काम में रुकावट नहीं आने दी है। जून 2002 से लेकर अक्टूबर 2008 तक वे आठ लाख लोगों को भोजन करवा चुके थे।

रिश्तेदार, मित्र और जान-पहचान वाले आज भी हैरान हैं कि फ़ाइव स्टार के शेफ़ जैसी आलीशान नौकरी छोड़कर उन्होंने ऐसा क्यों किया, कृष्णन का जवाब होता है… “बस ऐसे ही, एक दिन अन्दर से आवाज़ आई इसलिये…”।

कृष्णन जैसे लोग ही असली महात्मा हैं, जिनके काम को भरपूर प्रचार दिया जाना चाहिये, ताकि “समाज की इन अगरबत्तियों” की सुगन्ध दूर-दूर तक फ़ैले, मानवता में लोगों का विश्वास जागे, तथा यह भावना मजबूत हो कि दुनिया चाहे कितनी भी बुरी बन चुकी हो, अभी भी ऐसा कुछ बाकी है कि जिससे हमें संबल मिलता है।

अधिक जानकारी के लिये log on to: http://www.akshayatrust.org/

समाज के ऐसे ही कुछ अन्य लोगों के बारे मे मेरे निम्न लेख भी पढ़ सकते हैं…

http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2009/10/dedicated-doctor-koelhe-at-gadhchiroli.html



http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2008/07/social-service-medical-equipments.html


http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2009/06/unnoticed-unsung-heroes-of-india.html

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46 Comments

  1. October 28, 2009 at 7:30 am

    सलाम

  2. October 28, 2009 at 7:42 am

    वाह!! ये हैं सच्चे साधू !! बाकी सब स्वादु हैं !भगवा वस्त्र नहीं मन भगवा हैं !! सच्ची सेवा इसे ही कहते हैं ! पर हम सिर्फ यहाँ टिपण्णी कर सकते हैं ऐसा कोई कार्य करने की हमारी क्षमता नहीं है !! उस महापुरुष को कौटि कौटि सलाम !!! आपने बताया आपका आभार !!

  3. October 28, 2009 at 7:51 am

    सच में महात्मा है. ईसा ने कहा था "अपने पडोसी से अपने समान स्नेह करो". इस आज्ञा का पालन इस महात्मा से अधिक कोई नहीं कर सकता!सस्नेह — शास्त्रीहिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती हैhttp://www.Sarathi.info

  4. October 28, 2009 at 8:03 am

    तभी तो कहा जाता है कि भी भी थोड़ी-बहुत मानवता बची हुई है, इन जैसे लोगो के कारण ! कुछ लोग यह तर्क देने लगेंगे कि उसने बहुत कमा लिया होगा इसलिए अब चला है, पुण्य कमाने, लेकिन ऐसे लोगो से मेरा एक ही सवाल रहेगा कि कमा तो बहुत यहाँ हर किसी में लिया है, अपने अफसर साहो और नेतावो की सम्पति देख लो, मगर इस काम के लिए कितने लोग आगे आते है ?

  5. October 28, 2009 at 8:03 am

    lekh man ko choo gaya.

  6. October 28, 2009 at 8:51 am

    कृष्णन का सेवाकार्य देख आँखें नम हो गयीं. उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है….अक्सर इन मनोरोगियों को देख, सोचती हूँ…इतने मनोचिकित्सक हैं, हमारे देश में अगर अलग अलग शहरों में वो एक कैम्प लगाएं और थोडी मेहनत कर इनका इलाज करें, तो कितने ही लोगों की ज़िन्दगी सुधर जाए…ये अक्सर भरे पूरे परिवार वाले शिक्षित लोग होते हैं…इनका परिवार भी इन्हें उतनी ही व्याकुलता से ढूंढता रहता है…लेकिन सबके ह्रदय में कृष्णन जैसा दिल तो नहीं होता.

  7. vineeta said,

    October 28, 2009 at 9:11 am

    bahut accha laga. i salute to that man….he is a ideal for us…..

  8. October 28, 2009 at 9:24 am

    कृष्णन की महान मानवीय भावनाओं तथा सेवाकार्य को नमन्!

  9. October 28, 2009 at 9:27 am

    हमने इनके बारे में पूर्व में भी पढ़ा है. इसे ब्लॉग जगत में प्रचारित करने के लिए आपका आभार. हम उनके सामने नतमस्तक हैं.

  10. October 28, 2009 at 9:49 am

    ऐसे लोग भी हैं दुनिया में …आश्चर्य …!!ऐसे सेवाभावी अद्भुत व्यक्तित्व से परिचय करने का बहुत आभार ..!!

  11. aditya said,

    October 28, 2009 at 9:51 am

    A Very nice article, Krishnan is really a great sant.Thanks for posting it.

  12. GITESH UPPAL said,

    October 28, 2009 at 9:51 am

    True hero's of india,no caste ,no religion only the humanity,i salute them,saayad hamare ander se bhi awaz aayegi,

  13. October 28, 2009 at 10:18 am

    एक तरफ़ कृष्णन जेसे लोग है दुसरी तरफ़ वो लोग जो बच्चो के स्कुल मै गंदा खाना दे कर बाकी पेसा अपनी जेब के हवाले करते है, यह नेता जो इन्ही गरीबो के नाम से वोट ले कर इन्ही लोगो के नाम का वास्ता दे कर वोट मांगते है, ओर जीत कर इन्हे ही लुटते है…कृष्णन का सेवाकार्य के लिये मेरा प्रणाम कृष्णन कॊ, इसे कहते है सच्ची सेवा.आप का धन्यवाद

  14. October 28, 2009 at 10:34 am

    ये ईश्वर के साक्षात् रूप ही तो हैं….धर्मध्वज इन्होने ही तो थाम रखी है…

  15. Common Hindu said,

    October 28, 2009 at 11:29 am

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  16. Pratik Jain said,

    October 28, 2009 at 11:36 am

    कृष्‍णन जैसे महात्‍माओं को शत-2 प्रणाम।और इस शानदार पोस्‍ट के लिये सुरेशजी को भी प्रणाम।देश को ऐसे ही लोगों की आवश्‍यकता है।

  17. Paresh said,

    October 28, 2009 at 12:10 pm

    mera man aaj bhar aya , thodi sharm bhi ayyi apne upar , lekin sach kahoon .. apne bahut acha kiya ye bata kar our niskarsh ye nikla ki abhi duniya khatam nahi hogi .. kuch yese logon ki vajah se

  18. RDS said,

    October 28, 2009 at 1:22 pm

    सुरेश जी, ऐसे बहुतेरे होंगे जिन्हें हम इसलिए नहीं जानते हैं क्योंकि परमार्थ कभी प्रशंसा या प्रचार की अपेक्षा नहीं रखता | स्वार्थ की इस आबोहवा में ऐसे व्यक्ति प्राण वायु की शीतल बयार की तरह हैं | नमन ! सलाम आपको भी जिन गोविन्द दियो बताय ! – RDS

  19. safat alam said,

    October 28, 2009 at 2:10 pm

    सुरेश जी ! यह है मानवता की सेवा, बड़ा अच्छा लेख प्रस्तुत किया आपने,बहुत बहुत धन्यवाद

  20. October 28, 2009 at 2:17 pm

    Krishan ji vastav me hi sachche dharm ka nirvah kar rahe hain. Yahi vyakti ishwar kripa prapt karte hai. Yahi sachcha dharm hai. Dan dena ek seva hai. par ann dan sabse achchha hai. par ek lachaar aadmi ko khud apne hath se khana khilana , itni badi seva maine kabhi kisi shastr me nahi padhi. Suresh ji ko khoob khoob sadhuwad . Kam se kam "secular" logo ko is bar to suresh ji ka dhanyawad dena chahiye. likhte rahiye suresh ji . ishwar kare ki aap bhi apne dharm ka khoob nirvah karen.!! ram !! !! hari om !!

  21. October 28, 2009 at 2:54 pm

    निशब्द हूँ इस समय ,सच में महात्मा है यह कृष्णन जी .

  22. October 28, 2009 at 2:54 pm

    manavta ki seva karne wale bhi kuch log is duniya mai hain. padhkar achcha laga. dhanyavad

  23. October 28, 2009 at 3:12 pm

    suresh ji, ye lekh padh kar aankhen nam ho gayi hai… in jaise logo ki vajah se duniya chal rahi hai varna kabki khatam ho jati…accha hua aapne unki website ka pata de diya aage inshaallah kabhi kaam aayega…17 oct se ghar se bahar hoon isliye blogging par sakariye nahi hoon abhi is waqt BANGLORE me hoon 3-4 NOV ko agra pahuchna hoga

  24. October 28, 2009 at 3:21 pm

    परमार्थ/निःस्वार्थ सेवा सनातन धर्म मैं सर्वोच्च माना गया है | कृष्णन जी को नमन है |

  25. October 28, 2009 at 3:38 pm

    Aise sachche mahatma ko mera shat shat naman, aapko bahut dhanyawad…

  26. October 28, 2009 at 3:41 pm

    ऐसे महान सेवाकर्मी को सलाम!!

  27. October 28, 2009 at 4:34 pm

    कृष्णन जी वह काम कर रहे हैं जो समाज और राज्य कर रहा है। अन्याय पूर्ण राज्य और समाज ही ऐसे अवसर पैदा करता है।

  28. SHIVLOK said,

    October 28, 2009 at 5:09 pm

    Great. THE GREATI love you Mr Krishanan.I salute you. I salute your mother.I salute your father.I salute the place of your birth.I salute your devotion.I salute your emotion.ALSO I salute Mr Suresh for introducing you. Really Great.

  29. October 28, 2009 at 5:47 pm

    सच मे एक सच्चा महात्मा है …..प्रेरक लेख है।आभार।

  30. anil yadav said,

    October 28, 2009 at 7:13 pm

    इस सच्चे संत को सलाम

  31. October 29, 2009 at 4:42 am

    आपसे सहमत हूँ, इस महात्मा का परिचय करने के लिए धन्यवाद चिपलूनकर जी !

  32. October 29, 2009 at 5:05 am

    नमन करता हूं ऐसे महात्मा को।शायद ऐसे ही लोगो के पुण्य प्रताप से दुनिया बची है।आभार आपका इस जानकारी के लिये।

  33. October 29, 2009 at 5:42 am

    परोपकाराय पुण्याय पापाय पड़पीड़नमआत्मवत सर्वभुतेषु य: पश्चति स पंडित: ——वेद व्यासपरहित सरिस धरम नहीं भाई परपीड़ा सम नहीं अधमाई.. —-गोस्वामी तुलसीदासमनुष्य वही है जो मनुष्य के लिए मरेपशु प्रवृति है वहीं जो आप ही चरे —महाकवि निरालाइन युगपुरूषों के मुताबिक कृष्णन जी पंडित, धर्मवीर और मानव कहलाने लायक हैं. पैमाना तय है, खुद सोचे हम किस श्रेणी में हैं.

  34. October 29, 2009 at 7:05 am

    इस महान संत को सलाम. मैंने आपके ब्लाग के इस पेज के लिंक को कई लोगों को अग्रेषित कर दिया है.

  35. Shyam Verma said,

    October 29, 2009 at 8:02 am

    Thanks for sharing such a heart touching information.And Salute to Krishnan, I wish I will help him with few of my pennies.ThanksShyam

  36. RAJENDRA said,

    October 29, 2009 at 9:39 am

    sureshji -Krishnanji ke manavtavadi jajbe and unke karya ko bahut bahut sadhuvad

  37. vivek said,

    October 29, 2009 at 9:39 am

    मानवता की सेवा is like worship of God. aese virale Mahapurush ko shat shat Naman. Bastav mein aise kitne hi log sewa karya mein lage hue hain, avashyakta hai unko samaj ke samne lane ki. Yeh Suresh ji bakhubi nibha rahe hain. बहुत बहुत धन्यवादSuresh ji bahut bahut dhanyabad, sadhuwad .Bharat Mata ki Jay !!!!!Prof. Vivek Kumar

  38. RAJENDRA said,

    October 29, 2009 at 9:42 am

    sureshji bahut bahut sadhuvad krishnanji pryas dil ko choo gayaunse smapark ka pata bhi dene ki kripa karen

  39. October 29, 2009 at 12:45 pm

    कुछ आर्थिक सहायता मैं भी करना चाहता हूँ. किस पते पर चैक या मनीऑर्डर भेजें ये भी बताते तो अच्छा रहता. काफी दिनों बाद सुरेश जी का ब्लॉग पढ़ रहा हूँ,बहुत अच्छा लग रहा है.

  40. cmpershad said,

    October 29, 2009 at 3:25 pm

    कृष्णन जी की सेवा को नमन॥ ईश्वर उनके हाथ में और बल दे॥

  41. November 2, 2009 at 8:48 am

    बहुत खूब, ऐसे महान लोग कम हो होते हैं। मेरा साधुवाद।

  42. jesmeen said,

    November 2, 2009 at 10:38 am

    i salute to krishnan.desh ko krishnan jese logo ki bahut jarurat hai…..

  43. November 2, 2009 at 3:12 pm

    'वसुदेव कुटुम्बकम'

  44. November 2, 2009 at 9:42 pm

    इनके बारे में नेट पर पढ़ा था। सच्ची सेवा है यह। मानवता को जहां पहुंचना चाहिए, वे ठिकाने हैं यह। इस किस्म की जानकारियां लगातार आप सब तक प्रसारित करने का काम कर रहे हो बंधु…बहुत बहुत आभार…प्रभावित हूं…

  45. Arihant said,

    November 19, 2009 at 7:38 am

    salam

  46. November 11, 2010 at 1:21 pm

    >इस महान सेबक को हमारा प्रणाम आपने हमारे तक जानकारी पहुंचाई आपका धन्यावाद


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