ईसाई संगठन का यह न्यूज़लेटर साम्प्रदायिक है या मनगढ़न्त? KCBC Newsletter Kerala Love Jihad

केरल में कोचीन स्थित केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (KCBC) के तहत काम करने वाले संगठन कमीशन फ़ॉर सोशल हारमोनी एण्ड विजिलेंस द्वारा जारी ताज़ा न्यूज़लेटर में केरल में चल रहे “लव जेहाद” और इसके धार्मिक दुष्प्रभावों के बारे में ईसाई समाज को जानकारी दी गई है।

अपने अनुयायियों में बाँटे गये इस न्यूज़लेटर के अनुसार पालकों को निर्देशित किया गया है कि केरल और कर्नाटक में “लव जेहाद” जारी है, जिसमें भोलीभाली लड़कियों को मुस्लिम लड़कों द्वारा फ़ाँसकर उन्हें शादी का भ्रमजाल दिखाकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। बिशप काउंसिल ने आग्रह किया है कि पालक अपनी लड़कियों पर नज़र रखें, यदि लड़कियाँ मोबाइल उपयोग करती हैं तो उनके माता-पिता को उनकी इनकमिंग और आऊटगोइंग कॉल्स पर नज़र रखना चाहिये, यदि घर पर कम्प्यूटर हो तो वह “सार्वजनिक कमरे” में होना चाहिये, न कि बच्चों के कमरे में। पालकों को अपनी लड़कियों को ऐसे लड़कों के जाल में फ़ँसने से बचाव के बारे में पूरी जानकारी देना चाहिये। यदि कोई लड़की गुमसुम, उदास अथवा सभी से कटी-कटी दिखाई देने लगे तब तुरन्त उसकी गतिविधियों पर बारीक नज़र रखना चाहिये।
(यदि ऐसे दिशानिर्देश किसी हिन्दूवादी संगठन ने जारी किये होते, तो पता नहीं अब तक नारी संगठनों और न्यूज़ चैनलों ने कितनी बार आकाश-पाताल एक कर दिये होते)।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने एक ताज़ा आदेश में “लव जेहाद” के बारे में पूरी तथ्यात्मक जानकारी जुटाने के निर्देश दिये हैं (शायद हाईकोर्ट भी साम्प्रदायिक हो??)। एक अपुष्ट सूचना के अनुसार सन् 2005 से अब तक 4000 ईसाई लड़कियों द्वारा धर्म परिवर्तन किया जा चुका है, उनमें से कुछ गायब भी हो गईं। इस न्यूज़लेटर में आगे कहा गया है कि चूंकि वे लड़कियाँ 18 वर्ष से उपर की हैं इसलिये वे कानूनन इस बारे में कुछ कर भी नहीं सकते, लेकिन ईसाई लड़कियों की मुस्लिम लड़कों से बढ़ती दोस्ती निश्चित ही चिन्ता का विषय है।

इस कमीशन के सचिव फ़ादर जॉनी कोचुपराम्बिल कहते हैं कि “फ़िलहाल” यह मामला धार्मिक लड़ाई का नहीं लगता बल्कि यह एक सामाजिक समस्या लगती है…। यह लड़कियाँ अपने कथित प्यार की खातिर सब कुछ छोड़कर चली जाती हैं, लेकिन जल्दी ही उनके साथ यौन दुराचार शुरु हो जाता है तथा उनकी जिन्दगी नर्क बन जाती है, जहाँ उन्हें कोई आज़ादी नहीं मिलती (यह भी एक साम्प्रदायिक बयान लगता है…??)। जिस परिवार पर यह गुज़रती है, वह सामाजिक प्रतिष्ठा की वजह से कई बार पुलिस में भी नहीं जाता, जिसका फ़ायदा लव जेहादियों को मिलता है। न्यूज़लेटर में सन् 2006 से 2009 के बीच, विभिन्न जिलावार 2868 ईसाई लड़कियों के नाम-पते हैं जो मुस्लिम लड़कों के प्रेमजाल में फ़ँसीं, जिसमें से अकेले कासरगौड़ जिले की 586 लड़कियाँ शामिल हैं। फ़ादर कहते हैं कि “हमें यह मसला गम्भीरता से लेना होगा…”।

इन लव जेहादियों को शुरुआत में बाइक, मोबाइल तथा फ़ैशनेबल कपड़ों के पैसे दिये जाते हैं और “काम” सम्पन्न होने के बाद प्रति धर्मान्तरित लड़की एक लाख रुपये दिये जाते हैं। कॉलेजों में एडमिशन लेते समय इन्हें ऐसी ईसाई-हिन्दू लड़कियों की लिस्ट थमाई जाती है, जिन्हें आसानी से फ़ुसलाया जा सकता हो। इस काम में मुख्यतः खाड़ी देशों से पैसा आता है और सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि गायब हो चुकी लड़कियाँ वहीं पहुँचाई जा चुकी हैं।

सेकुलरों के साथ सबसे बड़ी समस्या यही है कि जब हिन्दुत्ववादी संगठन कुछ भी कहते हैं तो वे इसे दुष्प्रचार, साम्प्रदायिक झूठ आदि की संज्ञा दे देते हैं, समस्या को समस्या मानते ही नहीं, रेत में सिर दबाये शतुरमुर्ग की तरह पिछवाड़ा करके खड़े हो जाते हैं। लव जेहाद के बारे में सबसे पहले हिन्दुत्ववादी संगठनों ने ही आवाज़ उठाई थी, लेकिन हमेशा की तरह उसे या तो हँसी में टाला गया या फ़िर उपेक्षा की गई। अब आज जबकि कर्नाटक और केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश खुद इसकी जाँच के आदेश दे रहे हैं तब इनकी बोलती बन्द है। ईसाई संगठनों को भी इस लव जेहाद के अंगारे महसूस होने लगे तभी माना गया कि यह एक समस्या है, वरना हिन्दू संगठन कितना भी कहें कोई मानने वाला नहीं, सेकुलरों का यही रवैया उन्हें देशद्रोही की श्रेणी में रखता है। क्या आज से 50 साल पहले कश्मीर की स्थिति के बारे में किसी ने सोचा था कि वहाँ से हिन्दुओं का नामोनिशान मिट जायेगा? आज जब हिन्दूवादी संगठन असम, पश्चिम बंगाल और केरल के बदलते जनसंख्या आँकड़ों और राजनैतिक परिस्थितियों का हवाला देते हैं तब सेकुलर और कांग्रेसी इसे गम्भीरता से नहीं लेते, लेकिन कुछ वर्षों बाद ही वे इसे समस्या मानेंगे, जब स्थिति हाथ से निकल चुकी होगी… लानत है ऐसी सेकुलर नीतियों पर। हाल ही में “नक्सलवादियों की चैम्पियन बुद्धिजीवी”(?) अरुंधती रॉय ने बयान दिया कि “जब राज्य सत्ता किसी व्यक्ति की सुन ही नही रही हो, और उस पर अन्याय और अत्याचार जारी रहे तो उसका बन्दूक उठाना जायज़ है…”, फ़िर तो इस हिसाब से कश्मीर के विस्थापित हिन्दुओं को सबसे पहले हथियार उठा लेना चाहिये था, क्या तब बुकर पुरस्कार विजेता उनका साथ देंगी? जी नहीं, बिलकुल नहीं, क्योंकि यदि हिन्दू “प्रतिकार” करे तो वह घोर साम्प्रदायिकता की श्रेणी में आता है, ऐसी गिरी हुई मानसिकता है इन सेकुलर लुच्चों-टुच्चों की। हिन्दुओं के साथ कोई अन्याय हो तो वह कानून-व्यवस्था का मामला है, हिन्दू लड़कियों के साथ लव जेहाद हो तो वह साम्प्रदायिक दुष्प्रचार है, और यदि मामला मुस्लिमों और ईसाई लड़कियों से जुड़ा हो तब वह या तो सेकुलर होता है अथवा हिन्दूवादी संगठनों का अत्याचार…

पिछली पोस्ट में मैंने भारत में ईसाई मुस्लिम संघर्ष की शुरुआत केरल से होगी इस बारे में कुछ बताया था, जिस पर आदरणीय शास्त्री जी अपना जवाब जारी रखे हुए हैं। इस जवाब की पहली किस्त में शास्त्री जी ने केरल की विशिष्ट परम्परा और धार्मिक समूहों के बीच भावनात्मक सम्बन्धों का सुन्दर चित्रण प्रस्तुत किया है, मुझे उम्मीद है कि शास्त्री जी केरल के तेजी से बदलते राजनैतिक और सामाजिक वातावरण पर भी लिखेंगे। शास्त्री जी सज्जन व्यक्ति हैं इसलिये हो सकता है कि शायद उन्होंने मेरी पोस्ट में उल्लिखित केरल के राजनैतिक वातावरण को नज़र-अंदाज़ कर दिया हो, लेकिन मुझे आशा है कि शास्त्री जी, केरल में अब्दुल नासेर मदनी के बढ़ते प्रभाव, उम्मीदवार चयन में “चर्च के दखल” और कन्नूर तथा अन्य जगहों पर संघ कार्यकर्ताओं की नृशंस हत्याओं तथा इन सारी घटनाओं के दूरगामी प्रभाव के सम्बन्ध में भी कुछ अवश्य लिखेंगे, जो कि मेरा मूल आशय था। फ़िलहाल शास्त्री जी पहले अपना लेख पूरा कर लें, फ़िर मैं बाद में कुछ कहूंगा, तब तक के लिये केरल के हालात पर यह एक छोटी सी पोस्ट है। मैं शास्त्री जी जितना सज्जन नहीं हूं, इसलिये मुझे प्रत्येक राजनैतिक घटना को थोड़ा “टेढ़ा” देखने की आदत है, साथ ही किसी बुरी नीयत से किये गये “तथाकथित अच्छे काम” को भाँपने की भी… बहरहाल केरल के राजनैतिक हालातों पर एक अन्य विस्तृत पोस्ट शास्त्री जी के लेख समाप्त होने के बाद लिखूंगा…

फ़िलहाल केरल और ईसाई धर्मान्तरण से सम्बन्धित मेरे कुछ अन्य लेखों की लिंक्स नीचे दी जा रही है, पढ़ें और बतायें कि इसमें से आपको कितना काल्पनिक लगता है और कितना तथ्यहीन… 🙂

http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2009/04/talibanization-kerala-congress-and_13.html


http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2009/04/talibanization-kerala-congress-and.html


http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2008/11/kerala-and-malwa-becoming-nursery-of.html


http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2008/10/alliance-between-church-and-naxalites_10.html


http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2008/09/pope-conversion-in-india.html

इस खबर की स्रोत साइटें…

http://expressbuzz.com/edition/story.aspx?Title=Watch+your+children+well:+KCBC+panel&artid=ApAxX8jXX54=&SectionID=1ZkF/jmWuSA=&MainSectionID=1ZkF/jmWuSA=&SEO=KCBC,+Fr+Johny+Kochuparambil,+jehadis,+Christian&SectionName=X7s7i%7CxOZ5Y=

http://in.christiantoday.com/articles/church-warns-of-love-jihad-in-kerala/4623.htm

http://mangalorean.com/news.php?newstype=broadcast&broadcastid=152084

चित्र साभार – द टेलीग्राफ़

Love Jihad, Love Jehad, Kerala, Christianity, Conversion, Islamic Terrorism, Secularism, Vote Bank Politics in India, KCBC Newsletter, Abdul Naser Madani, लव जेहाद, केरल की राजनैतिक स्थितियाँ, ईसाई धर्मान्तरण और केरल, मुस्लिम-ईसाई संघर्ष, सेकुलरिज़्म, केसीबीसी न्यूज़लेटर, Blogging, Hindi Blogging, Hindi Blog and Hindi Typing, Hindi Blog History, Help for Hindi Blogging, Hindi Typing on Computers, Hindi Blog and Unicode

Advertisements

41 Comments

  1. October 30, 2009 at 8:21 am

    पता नहीं ये तथाकथित सेक्युलरिज्म देश को कहाँ ले जायेगा?

  2. SHIVLOK said,

    October 30, 2009 at 8:32 am

    Dear Suresh Chiplunkar, You are really doing work hard, I appreciate your writting , indeed it is being more than enough. But it is bad luck of our innocent country that the all ruling powers are not in the hands of rightious. I would like to say strongly that BJP is not right. BUT some new brilliant group of high decorum with a high moral values is desired now. A collective work with right attitude and by right approach is todays utmost desire. Thanks a lot for your POST. JAI HIND.

  3. October 30, 2009 at 8:48 am

    आपने तस्वीर जहाँ से ली है और जिन साइटों की कड़ियाँ दी है वे अमूमन इस तरह की खबर तभी छापते हैं जब बात कोई ईसाई संगठन उठाए. ये मीडिया हिन्दू संगठनों का तब तक नाम नहीं लेते जब तक कुछ उपद्रवी तत्व दंगा नहीं करते. जहाँ तक बात अरूंधती राय जैसे "बुद्धिजीवियों" की है, ये लोग अपनी सीमित मानसिकता का परिचय ना जाने कितनी बार दे चुके हैं. ये जो संस्थाएँ होती हैं मानवाधिकार वाली उनका मूल उद्देश्य कुछ और ही होता है. केरल में जो हो रहा है वह चिंताजनक तो है ही. "लव जिहाद" को गम्भीरता से लेना चाहिए. शाष्त्रीजी जैसे लोग भी केरल में रहते हैं. उन्हें इसके विरूद्ध लिखना चाहिए और आवाज़ उठानी चाहिए [यदि उन्हें इस खबर पर यकीन हो]. आपने सही विषय और सही उदाहरण दिया है.

  4. October 30, 2009 at 8:50 am

    लव जैहाद कभी कल्पना नहीं लगी. यहाँ भी मुस्लिम लड़के हिन्दु लड़कियों से दोस्ती गाठते हैं, आगे जो होता है उसे जाने दें. कई बार शुरूआत खुद को हिन्दु बता कर भी होती है. मुस्लिम लड़कियों को उतनी आजादी है नहीं इसलिए वे चपेट में नहीं आती. मुझे कोई जो चाहे कह ले मगर यह मामला अपनी को ताले में रखो दुसरों वाली से मजे करो जैसा होता है.केरल में लव-जेहाद वाली बात अब साम्प्रदायिक नहीं रही. ईसाईयों द्वारा सत्यापित हो गई है. देखें सेक्युलर टूच्चे अब क्या कहते है.

  5. October 30, 2009 at 8:57 am

    ……….मुझे प्रत्येक राजनैतिक घटना को थोड़ा "टेढ़ा" देखने की आदत है, साथ ही किसी बुरी नीयत से किये गये "तथाकथित अच्छे काम" को भाँपने की भी… मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ. हिन्दुओं की सज्जनता और सरलता का लाभ इसी प्रकार की कुटिलता का प्रयोग कर उठाया जाता है. वे जानते हैं कि संख्याबल में कम होने के कारण वे अभी हिन्दुओं से पार नहीं पा सकते लेकिन जड़ों को खोखला करते रहने का षडयंत्र तो जारी रखा ही जा सकता है……..और फिर जब संख्याबल एक निश्चित अनुपात पर पहुँच जायेगा तो हिंसा के सहारे अपने मकसद को पूरा करने में कोई रुकावट नहीं आएगी. इस कार्यप्रणाली को हम भारत ही नहीं वरन दुनिया के अनेक भागों में देख चुके हैं लेकिन "सेकुलरिस्म" नामक जिस अफीम की खुराक आज से साठ साल पहले हमारी पीढियों को देना शुरू किया गया था उसकी पिनक इतनी गहरी हो चुकी है कि इससे जागने में लोगों को अभी वक्त लगेगा…..परन्तु आशंका है कि तब तक देर हो चुकी होगी.

  6. October 30, 2009 at 9:00 am

    …"यदि हिन्दू "प्रतिकार" करे तो वह घोर साम्प्रदायिकता की श्रेणी में आता है, ऐसी गिरी हुई मानसिकता है इन सेकुलर लुच्चों-टुच्चों की।"निचोड़ !

  7. October 30, 2009 at 10:14 am

    प्रिय सुरेश, लव-जिहाद एक सच्चाई है.दर असल केरल में जो धार्मिक सहिष्णुता है उसका फायदा उठा कर मुस्लिम प्रचारक लोग वाकई में ईसाई और हिन्दू लडकियों को जम कर फुसला रहे हैं. ऐसी कई घटनाओं की जानकारी मुझे है. मेरे कम से कम दो ईसाई मित्रों की सुंदर, सुशील, एवं परिवार-स्नेही लडकियों को वे लोग छल से ले जा चुके हैं.इसका कारण है धार्मिक सहिष्णुता जिसकी ओर मैं इशारा कर चुका हूँ. ऐसी सहिष्णुता अच्छी है या बुरी कि आपका पडोसी आप के परिवार में सेंध लगाता रहे और आप चुप रहें, इस पर मैं ने अभी तक कुछ नहीं कहा है. मौन को अनुमोदन न समझा जाये!!अभी काफी कुछ लिखना बाकी है जो समयाभाव के कारण नहीं हो पाया है. लिखते रहो सुरेश, लिखते रहो. इसके द्वारा जागृति जरूर आयगी.सस्नेह — शास्त्रीहिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती हैhttp://www.Sarathi.info

  8. October 30, 2009 at 11:15 am

    सुरेश जी, आपके दिये लिंक्स में से सिर्फ़ पोप वाला एक लिन्क काम कर रहा है बाकी में page does not exists आ रहा है!आपकी बात में काफ़ी सच्चाई है..! काफ़ी धर्मों की लड्कियां धर्म परिवर्तन करने के बाद मुस्लिम बन रही है लेकिन ये "लव जिहाद" है इस बात से मैं सहमत नही हुं….मेरे शहर में काफ़ी लड्कियां धर्म परिवर्तन करने के बाद मुस्लिम हो गयीं है..उनमें से एक तो मेरे पडोसी के बेटे के साथ शादी करके आयी है…और उसे उनके पुरे खानदान ने बडी खुशी से कुबुल किया है और वो भी बहुत खुश है…..लेकिन जितने के बारे में मैं जानता हूं उनमें से किसी के साथ भी "यौन शोषण" या और किसी प्रकार का कोई "शौषण" नही हुआ। ये "यौन शोषण" अफ़वाह के अलावा कुछ भी नही है!नाई की मण्डी श्रेत्र के रहने वाले एकलौते तीन ईसाई परिवार की लड्कियों ने पिछले दो साल में हिन्दु धर्म कुबुल किया हिन्दु लड्कों से शादी करने के लिये…तो इसे आप क्या कहेंगे?????? RSS या B.J.P. की साजिश..जहां तक मैं जानता हूं ये कुछ नही है सिवाय प्यार के…जब मौहब्बत बेपनाह हो जाती है और जुदाई बर्दाश्त नही होती है तब लोग ऐसा कदम उठाते है…..अभी पिछले साल मेरे सबसे करीबी दोस्त का पांच साल पुराना रिश्ता खत्म हुआ है..लड्की पंजाबी थी और मेरे दोस्त ने उससे कह दिया की मुझसे शादी कर लो और अपने धर्म का पालन करते रहो…उसके मां-बाप लडकी के घर रिश्ता लेकर भी गये थे लेकिन उन लोगो ने मना कर दिया…!!!!!!लड्की मां-बाप की मर्ज़ी के खिलाफ़ शादी करने के लिये राज़ी नही हुई तो रिश्ता खत्म हो गया…..उस लडकी की अभी १५ नवम्बर की शादी है……उसने मुझे भी बुलाया है और मैं वहां जाऊंगा…

  9. October 30, 2009 at 11:18 am

    Shahstreeji ne kahaa :"इसका कारण है धार्मिक सहिष्णुता जिसकी ओर मैं इशारा कर चुका हूँ. ऐसी सहिष्णुता अच्छी है या बुरी कि आपका पडोसी आप के परिवार में सेंध लगाता रहे और आप चुप रहें, इस पर मैं ने अभी तक कुछ नहीं कहा है. मौन को अनुमोदन न समझा जाये!!"यह पडोशी सदा से ही इस बात का नाजायज फायदा उठाता रहा है, लेकिन किसी ने इसका इलाज नहीं किया !

  10. October 30, 2009 at 11:30 am

    अभी इसी साल मई के महीने मैनें अपना आठ साल पुराना रिश्ता खत्म किया है सिर्फ़ अपने और उसके मां-बाप की खुशी के लिये…दोनों ने अपनी सहमती से ये कदम ऊठाया है….बहुत तकलीफ़ होती है महीनों नींद नही आती है लेकिन कभी-कभी ऐसा बलिदान करना पडता है….मेरे रिश्ते में दोनो लोग मुस्लिम थे लेकिन दोनो की जाति अलग थी… मेरे मां-बाप को लडकी पसंद नही थी और उनके मां-बाप को मेरी ज़ात से परेशानी थी।जिन लोगो के अन्दर इस तकलीफ़ को बर्दाश्त करने की ताकत नही होती है वो ऐसा कदम उठाते है…..हमारे देश में प्रेम विवाह को कभी भी कुबुल नही किया गया है….आज की सदी में भी लोग जाति के बाहर विवाह की बात करने पर ही खुन बहा देते है तो उस देश में धर्म के बाहर विवाह करने पर क्या प्रतिकिर्या होगी इसका अंदाज़ा लगाना बहुत आसान है

  11. mehta said,

    October 30, 2009 at 11:34 am

    desh me videshi pasa to badh rha hai parantu desh andruni tor par kamjor ho rha haikeral ho ya orrisa sabhi jagah hindu mukhyamantri rhefir bhi hinduo ko ghtane ka hi kam jari rha ye bat samjh se bahar hai lekin kuch kuch samjh me ati haikis parkar se ye log apne kam ko tezi se anjam dete rehte haipaso ke lobh me jameen ko girvi rakha ja rha haimedia jo ki church or videshi paso se chal rha hai 65% bhartiya use samman ki drishty se dekhte hai bhole bhale bhartiyo ko ye nhi pta media bhusankhyko se bhed bhav kar rha hai

  12. Common Hindu said,

    October 30, 2009 at 11:42 am

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  13. October 30, 2009 at 11:49 am

    मेरी राय में सब लोग अपने घर के बच्चों का ख्याल रखें और घर में दोस्ताना माहौल बनायें ताकि बच्चे अपनी दिल की बात आपसे खुलकर कह सकें….प्रेम विवाह करने में कोई बुराई नही है… लोग प्रेम विवाह में हज़ारों कमियां निकालते है लेकिन "प्रेम विवाह" की एक सबसे बडी खुबी है जो किसी और तरीके से किये गये विवाह में नही है और ना कभी पैदा हो सकती है…"चाहे दोनो का रिश्ता टुटने की कगार पर आ चुका हो और तलाक होने वाला हो तब भी ये रिश्ता बच जाता है अगर दोनो में कोई एक प्यार से माफ़ी मांग ले चाहे उसकी गलती हो या नहीं.."तो बेहतर यही है सब लोग अपने घर का ख्याल रखें चाहे लडका हो या लडकी….हिन्दु से प्यार करता हो, ईसाई से या मुस्लिम से… उसके प्यार को समझे, उसकी भावनाओं को समझें, सामने वाले को परखें और फ़िर वो फ़ैसला लें जिसमें आपके बच्चे की भलाई हो..मुझे सिर्फ़ इतना ही कहना था….

  14. October 30, 2009 at 11:51 am

    आप भी ना भाऊ,इसमे हिंदू कंहा है?ज़रा हिंदू को फ़ंसन दो और देखो अरू से लेकर अबू तक़ की फ़ौज़ भीड़ जायेगी।क्या किया जा सकता है इस दोगले सेक्यूलरिज़्म का।

  15. October 30, 2009 at 12:08 pm

    यह समस्‍या सारे देश की है। संख्‍या बल के द्वारा राष्‍ट्र हडपना एक उद्देश्‍य बन गया है। राजस्‍थान में भी यह समस्‍या गहरे तक जा पहुँची है। पता नहीं लड़कियां कैसे बहकावे में आ जाती हैं।

  16. ek aam aadmi said,

    October 30, 2009 at 12:32 pm

    @ धर्मनिरपेक्षियों और काशिफ – अभी एक लड़की जो पहले मुस्लिम थी और जिसने हिन्दू से शादी कर ली और जम्मू में जिसके पति को उस लड़की के बाप ने मार दिया, क्या कहोगे!

  17. October 30, 2009 at 12:59 pm

    @ek aam aadmee उस बात का किसे के पास भी कोई मुकम्मल जबाब नहीं, हां अगर कलकता के रिजवान की बात करते तो यहाँ पूरे के पूरे लेख छप जाते !

  18. October 30, 2009 at 1:08 pm

    अब दिलो से भी खेलेगे यह धर्म के ठेकेदार, आधी जमीन को मासुंम लोगो के खुन से रंग कर… वाह वाहधन्यवाद सुरेश जी, हम सबकी आंखे खोलने के लिये

  19. October 30, 2009 at 2:07 pm

    प्रिय मित्रो सुरेश जी का अभियान ज़ारी है ताकि साम्प्रदायिक संगठनों के पक्ष में सेक़ुलरिस्म को बदनाम कर सकेंयदि कोइ सही बात करेगा तो उसको अपने पालतु बेनामी बेप्रोफाइल् चम्पुओं से अश्लील भाषा में गालियां दिलाने लगेंगे ताकि भले और सही लोग सामने नहीं आयें. सवाल हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई साम्प्रदायिकता में भेद करने का नहीं है वे सब एक जैसी हैं और जो जहां बहुसंख्यक है उसकी साम्प्रदायिकता ज्यादा खतरनाक हो सकती है. साम्प्रदायिक दंगों का इतिहास भी बताता है कि पूर्व में ऐसा ही हुआ है . मुस्लिम साम्प्रदायिकता को यदि हिन्दू नाम से जाने पहचाने जाने वाले लोग गलत ठहराते हैं तो उससे भी साम्प्रदायिकता की बू आ सकती है इसलिये सेक़ुलर पहचान के लोग आगे आते हैं और वे हर तरह की साम्प्रदायिकता की निन्दा करते हैं शाहबानो का प्रकरण जान भूझ कर भुला दिया जाता है जो जहां अल्पसंख्यक होता है वह वहां जल्दी एकजुट हो जाता है जैसा कि अभी आस्ट्रेलिया में हुआ जहां हर धर्म के भारतीय एक जुट हो गये पंजाब के आतंक के दौर में वहां हिन्दू मुस्लिम एक हो गये थे मुम्बई में राज ठाकरे के गुंडों से सुरक्छा में यू पी के हिन्दू मुसलमान एक हो गये. प्रेम में जाति धर्म ठूंसने की सारी ही बदमाशियां वे ही लोग करते हैं जो वेलेंटाइन डे पर हिन्दुओं के लडके लड्कियों पर भी हमले करते हैं.हिन्दुओं मुसलमानों के बीच प्रेम की "जनगणना" नहीं हुयी और साम्प्रदायिक केवल एकपक्षीय बात करते हैं. में साहित्य से जुडा हुं इसलिये अगर साहित्य संस्कृति की ही बात करुं तो सुनील दत्त नर्गिस इरफाना शरद जोशी नासिरा वी शर्मा आदि अनगिनित नाम हैं जिनका भी हर तरह के साम्प्रदायिकों ने विरोध किया था . एक वालिग के जो अधिकार हैं उनकी रक्छा की जाना चाहिये तथा हर तरह के साम्प्रदायिकों का विरोध उनके द्वारा होना चहिये जो खुद साम्प्रदायिक नहीं हैं

  20. mahashakti said,

    October 30, 2009 at 2:10 pm

    विभिन्‍न आराजक तत्‍व देश तोड़ने में लगे है, समय में नही आ रहा है कि यह किस दिशा मे जायेगा जिहाद शब्‍द ने तो देश की रेड़ मार कर रख दी है।

  21. October 30, 2009 at 2:25 pm

    @ काशिफ़ आरिफ़ भाई – आपका व्यक्तिगत अनुभव जो आपने बयान किया है, उसी के मद्देनज़र कहता हूं कि ऐसे कई प्रेम-प्रसंग देश में आये दिन होते हैं लेकिन अधिकतर बार इनका अन्त दुखद ही होता है। केरल का मामला अलग इसलिये है कि सिर्फ़ 3 साल में 2800 से अधिक लड़कियाँ गायब हुईं, या धर्म परिवर्तन किया, या मुस्लिम लड़कों के प्रेमजाल में फ़ँसीं… क्या यह आँकड़ा चौंकाने वाला नहीं है? खुद शास्त्री जी भी मान रहे हैं कि केरल में लव जेहाद एक हकीकत बन चुकी है… सरकारें (कम्युनिस्ट भी), हाईकोर्ट सभी चिन्तित हैं… लड़कियों (हिन्दू और ईसाई) की स्वतन्त्रता पर अंकुश भी नहीं लगाया जा सकता… @ वीरेन्द्र जैन साहब – "पालतु बेनामी बेप्रोफाइल् चम्पुओं से अश्लील भाषा में गालियां दिलाने लगेंगे…"? मेरे इतने बुरे दिन अभी नहीं आये, मैं खुद अपना जवाब देने में सक्षम हूं… "…जो जहां बहुसंख्यक है उसकी साम्प्रदायिकता ज्यादा खतरनाक हो सकती है.…" यानी कि अल्पसंख्यकों को पूरी छूट दे देना चाहिये? कि वे जो चाहे करें? न तो वीरेन्द्र जैन साहब ने "…क्या आज से 50 साल पहले कश्मीर की स्थिति के बारे में किसी ने सोचा था कि वहाँ से हिन्दुओं का नामोनिशान मिट जायेगा?…" इस बात का कोई जवाब दिया… न ही अरुंधती रॉय वाली बात पर मैंने उठाये हुए सवाल का कोई जवाब दिया… फ़िर सुनील दत्त-नरगिस जैसी रुमानी-किताबी बातें करके वे क्या साबित करना चाहते हैं…

  22. October 30, 2009 at 2:50 pm

    लव जेहाद के बारे में हिन्दु बहुल क्षेत्रों मे हम तो काफी पहले से सुनते, देखते आये हैं धर्म के ठेकेदार समाज सुधारकों व इलेक्ट्रोनिक मीडिया की चेतना तुरन्त जाग्रित हो जाती है यदि कोइ हिन्दु परिवार अपनी बेटी को किसी मुस्लिम से बचाने की प्रयास करता है। बडी-बडी बहस स्पेसल रिपोर्ट प्रसारित की जाती हैं। बहस में उन्ही लोगों को ही बुलाया जाता है जिन्होने धर्मनिर्पेक्षता का फटा लबादा ओढ रखा होता है। वो लोग हिन्दू संस्कृति व परम्पराओ की इस प्रकार मजाक उडाते हैं जैसे भारत की सनातन परम्परायें कोइ जंगली व्यवस्था रही हो और इन बहसियों ने अपनी बहन बेटियों को बजार या चोराहों पर छोड रखी हों कि ये किसी के भी साथ चली जायें या इन्हें कोइ भी ले जाये। नैतिकता का भद्दा मजाक उडा कर पता नहीं ये अपने आपको क्या बताना चाहते हैं। दुख व क्षौब तो ये देखकर होता है इनमें से ज्यादातर कहते हैं कि हम भी हिन्दू हैं ओर हिन्दू संस्कृति की समझ रखते हैं रिजवानुल का मामले में भोंक-भोक कर मीडिया को सर पे उठा लेते है, जम्मू के मामले में पूंछ टागों के बीच में फसां लेते हैं जब सोनिया जी की बहनों पर बात आयी तो अखबार पुतने लगे।

  23. October 30, 2009 at 3:48 pm

    हमलोग अरुंधती रॉय का कहा ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं, वास्तव मैं उनके कहने का अर्थ है की सिर्फ वामपंथियों और सेकुलरों का ही बन्दूक उठाना जायज है | कश्मीर के विस्थापित हिन्दु यदि हथियार उठा ले उसे फ़ौरन आतंकवादी करार देकर भुन डालो …

  24. October 30, 2009 at 3:55 pm

    कुछ ऐसा ही घटित हो रहा है औरंगाबाद में, जहां एक सोची समझी हुई रणनीति है, कुछ लोगों की. पूरी डिटेल मिल जायेगी अगर पूछेंगे तो.

  25. October 30, 2009 at 3:57 pm

    @सुरेश जी आप नाहक ही वीरेन्द्र जैन को seriously ले रहे हैं | मुझे ये कहते बुरा लग रहा है पर … उसकी इधर उधर की सारी टिप्पणियाँ देखने के बाद इसी निष्कर्ष पे पहुंचा हूँ की वो हगने मैं विश्वास करते हैं … जिधर जाते हैं उधर ही हग के आते हैं … आज तक उनको सही टिप्पणी करते मैंने नहीं देखा है | और एक बार टिप्पणी कर के दुम दबा के भाग जाते हैं | आपको तो याद ही होगा की ये वही सक्स हैं जिन्होंने भाजपा के विरुद्ध ३०० आलेख लिखे हैं और शायद ३०० कांग्रेस की जी हजूरी मैं … ऐसे लोगों के क्या मुह लगने … |

  26. बवाल said,

    October 30, 2009 at 5:45 pm

    अरे लव तो ख़ुद ही अपने आप में एक जिहाद है सुरेश जी, अब उससे बढ़कर और क्या जिहाद हो सकता है ? भला बतलाइए तो। हा हा।

  27. October 30, 2009 at 6:15 pm

    "समस्या को समस्या मानते ही नहीं, रेत में सिर दबाये शतुरमुर्ग की तरह पिछवाड़ा करके खड़े हो जाते हैं। " satya vachan !

  28. October 31, 2009 at 4:50 am

    @सुरेश जी आप नाहक ही वीरेन्द्र जैन को seriously ले रहे हैं | मुझे ये कहते बुरा लग रहा है पर … उसकी इधर उधर की सारी टिप्पणियाँ देखने के बाद इसी निष्कर्ष पे पहुंचा हूँ की वो हगने मैं विश्वास करते हैं … जिधर जाते हैं उधर ही हग के आते हैं … आज तक उनको सही टिप्पणी करते मैंने नहीं देखा है |राकेश जी की बात से पूर्ण सहमत ! फालतू के लोगो को घास डालने की जरुरत नहीं !

  29. October 31, 2009 at 4:52 am

    पहले इस्लाम के लिए कहा जाता रहा है कि यह तलवार से फैला है ,अब नया शगूफा है-लव जेहाद यानी यह प्यार के जरिए फैलाया जा रहा है। इस्लाम को बदनाम करने के लिए हर हथियार काम में लिया जा रहा है। मेरी समझ में नहीं आता कि क्या आस्था,विश्वास,यकीन,भरोसा आदि तलवार और बहला फुसलाकर बनाया जा सकता है? क्या यह तरीका कारगर है? कितने लोग और कितनी पीढियां तलवार के दम पर धर्म बदलने के बाद इस पर टिकी रह सकती हैं? कितनी गृहस्थियां फुसलाने के बाद शादी करके खुश रह सकती है? इन मामलों में थोड़ा दिल और दिमाग से सोचेंगे तो समझ आ जाएगा कि आस्था और समर्पण का मामला ना तो तलवार के बल पर हो सकता है और ना ही बहला- फुसलाकर। मैं इस बात से इन्कार नहीं कर रहा हूं कि ऐसा एक भी मामला केरल में नहीं हुआ होगा लेकिन दुख तब होता है जब ऐसे मामलों को इस्लाम से जोड़कर ,जेहाद नाम देकर यूं पेश किया जाता है मानो इस्लाम में ऐसे घिनौने कामों की इजाजत हो। होना तो यह चाहिए कि ऐसे मामलों की गहराई से पड़ताल करके सच्चाई सामने लाई जाए।

  30. October 31, 2009 at 5:17 am

    @ इस्लामिक वेबदुनिया आप लिफाफे को देखकर जवाब दे रहे हैं या फिर जानबूझ कर अनजान बन रहे हैं? मसला प्यार- मोहब्बत में शादी कर घर बसाने का नहीं है, मसला है प्यार के नाम पर झांसा देकर लड़कियों को घर से भगाने का और फिर उनके शारीरिक शोषण और आतंकवादी गतिविधियों में मोहरा बनाने का. इसमें प्यार- मोहब्बत का तत्त्व है ही नहीं. केवल एक मकसद के लिए लड़कियां फुसलाकर अगवा की जाती हैं. मत भूलिए कि जब ये लड़किया मानव बम बनकर किसी भरे बाजार में बम विस्फोट करेंगी या हथियारों के कैरियर के रूप में तबाही का सामान आतंकवादियों तक पहुचायेंगी तो उससे मरने वाले हिन्दू भी होंगे और आपके भाई बन्धु भी. हो सकता है आपका कोई करीबी इस तरह के हमले में मारा जाये तो आप उसे जेहाद के रास्ते में शहीद हुआ मानकर संतोष कर लें लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते और इस मुद्दे को उठाने का उद्देश्य भी यही है.

  31. October 31, 2009 at 5:37 am

    Aadarniya Suresh ji….. aapka keen observation bahut achcha hai….. aapka yeh lekh padh kar achcha laga….

  32. cmpershad said,

    October 31, 2009 at 6:51 am

    "(यदि ऐसे दिशानिर्देश किसी हिन्दूवादी संगठन ने जारी किये होते, तो पता नहीं अब तक नारी संगठनों और न्यूज़ चैनलों ने कितनी बार आकाश-पाताल एक कर दिये होते)। ":)

  33. October 31, 2009 at 1:10 pm

    @ सुरेश जी,मैने भी यही कहा है..मैने अपनी टिप्पणी में आपकी बात से सहमती जताई है..लेकिन इसको "लव जेहाद" कहना गलत है… इसको आप "लव किड्नेपर्स" भी तो कह सकते है….इसमें काम में अगर मुस्लिम लडके लगे हुये है तो इसे आप "जेहाद" कहेंगे???इसका मतलब तो यही हुआ की अगर कोई मुस्लिम ऐसा कोई काम करता है जिससे समाज को नुकसान होता है तो आप उस काम के आगे "जेहाद" जोड देंगे..!!!!!तो फ़िर मुस्लिम चोंरो को "जेहादी चोर""जेहादी स्मगलर""जेहादी मड्रर्र""जेहादी लुटेरे" कहना शुरु कर दीजिये…आप हमेशा अपने दिमाग का बहुत अच्छा इस्तेमाल करते हो……लेकिन शायद कभी-कभी इस्तेमाल करना भुल जाते हो

  34. October 31, 2009 at 1:23 pm

    @ सुरेश जी,आज से कुछ दिन पहले मैंने आपको मेल किया था आपके लेख "काबा एक शिव मन्दिर है" के बारे मे…. लेकिन आपने उस मेल का कोई जवाब नही दिया…मै आज उस मेल को दोबारा से भेज रहा हूं क्रप्या करके उस मेल का जवाब दें…

  35. October 31, 2009 at 2:00 pm

    काशिफ़ भाई, "लव जेहाद" नाम मेरा दिया हुआ नहीं है… यह टर्म आपके लाड़ले मीडिया ने ही दी है… यदि मैंने अपने दिमाग का और अच्छा इस्तेमाल किया होता तो इसे ऐसा कुछ नाम दिया होता कि कई लोग पढ़ नहीं पाते… 🙂 🙂

  36. November 1, 2009 at 7:20 am

    आपकी पोस्ट या आपके द्वारा कहीं भी की गई टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा ब्लाग पर हमारे द्वारा उल्लेखित किया गया है या भविष्य मे किया जा सकता है।हमारे ब्लाग टिप्पणी चर्चा का उद्देष्य टिप्पणीयों के महत्व को उजागर करना है। और आपको शामिल करना हमारे लिये गौरव का विषय है।अगर आपकी पोस्ट या आपकी टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा मे शामिल किया जाना आपको किसी भी वजह से पसंद नही है तो कृपया टिप्पणी के जरिये सूचित करें जिससे भविष्य मे आपकी पोस्ट और आपके द्वारा की गई टिप्पणियो को आपकी भावनानुसार शामिल नही किया जायेगा।शुभेच्छूचच्चा टिप्पू सिंह

  37. November 2, 2009 at 9:29 pm

    @वीरेंद्र जैन & काशिफ भाई, क्या आप बताएँगे की धर्म से बाहर यह 'तथाकथित बेपनाह मुहब्बत' ९०% मामलों में मुस्लिम लडके और हिन्दू लड़की के बीच ही क्यों होती है? कभी हिन्दू लड़के और मुस्लिम लड़की के बीच क्यों नहीं? और अगर कोइ हिन्दू लड़का किसी मुस्लिम लड़की से शादी करने की हिम्मत करता है तो उसका कत्ल क्यों कर दिया जाता है (जैसा कि जम्मू में रजनीश नामक युवा को मुस्लिम लड़की से शादी करने के कारण मुस्लिमो ने बेरहमी से मार दिया). और ऐसे मामलों में आप लोगो सहित सेकुलर मीडिया और संगठनों को सांप क्यों सूंघ जाता है. जबकी रिजवानुर जैसे मामलों में आप काफी हल्ला मचाते हैं?

  38. SHIVLOK said,

    November 3, 2009 at 1:18 am

    JEET BHARGAV JI,APNE TO BADA KATHIN SAWAAL PUCHHA LIYA,ITNE KATHIN SAWAAL KA JAWAB TO VEERENDRJI AUR KASIFJI KA SARA KUTUMBKABILA AUR KAII PEEDHIYAN MIL KAR BHIINAHIN DE SAKTI ,IN BECHARON PAR THODI DAYA KARO JEETJITHODA SARAL SA SAWAL POOCHHA KARO YAR .

  39. November 5, 2009 at 2:50 pm

    जीत भार्ग्व जी,मौहब्बत में प्रेमिंयों का कत्ल होना आम बात है मैनें इस विषय पर ऐतराज़ हमेंशा प्रेमिंयों की जान लेने पर उठाया है.. मैने कभी धर्म या जात को लेकर ऐतराज़ नही लिया है…सिर्फ़ हिन्दुओं के कत्ल नही होते मुस्लिमों के भी होते है और उस कत्ल पर जो लोग ज़्यादा शोर मचाते है वो सिर्फ़ राजनीति करते है इसके अलावा कुछ और नही करते है ना उन्हे किसी की जान से कोई लेना देना होता है और ना ही किसी के प्यार से लेना देना होता है….जीत भाई इस लेख में सुरेश जी ने एक चर्च के पादरी के लेख का ज़िक्र किया है की ईसाई लडकीयों पर "तथाकथित लव जेहाद" का हमला हो रहा है… तो इसके बारे में आप क्या कहेंगें??????रही बात मुस्लिम लडके और हिन्दु लडकी की तो इसके बारे में आप ही ज़ोर लगायें और पता करे की हिन्दु लडकीयों को ही मुस्लिम लडकों से मुह्ब्बत क्यौं होती है????जवाब मुझे पता है लेकिन पहले आप ज़रा ज़ोर लगा ले फ़िर मुझसे संम्पर्क कीजियेगा तो मैं आपको बता दुंगा

  40. November 5, 2009 at 2:57 pm

    सुरेश जी, मेरा मिडिया से कोई लेना-देना नही है… और ना ही मुझे इस मिडिया से कोई मौह्ब्बत है तो बराय मेहरबानी मुझे इस मिडिया से ना जोडें…मैं आपको एक मेल दो बार कर चुका हुं लेकिन मुझे कोई जवाब नही मिला…… आज फ़िर कर रहा हूं मुझे आप उसका जवाब भेज दे तो मेहरबानी होगी

  41. October 20, 2010 at 4:58 pm

    >sabse pahle to hame apni ladkiyo ko batana hoga ke kuch sadak cchap gurge apne aap ko hindu batakar hamari ladkiyo ko bahla fushlakar aur unki ijjat se khelte hai aur badme unhe blakmeail karte hai……… sayad unho ne apni MAA BAHAN ki ijjat karna kabhi nahi sikha hoga


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: