"दक्षिण का मोदी" पीठ में छुरा खायेगा… Karnataka, Yeddiyurappa, Reddy Brothers Political Cricis

दक्षिण में पहली बार भाजपा-हिन्दुत्व का खिला हुआ कमल, दो भाईयों के लालच, और सत्ता की प्यास की वजह से खतरे में पड़ गया है। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में चल रही राजनैतिक उठापटक में “दक्षिण के मोदी” कहे जा रहे बीएस येद्दियुरप्पा की कुर्सी डांवाडोल हो रही है। इस कुर्सी को हिलाने के पीछे हैं “बेल्लारी के बेताज बादशाह” कहे जाने वाले रेड्डी बन्धु। करुणाकरण रेड्डी सरकार में राजस्व मंत्री हैं, उनके छोटे भाई जनार्दन रेड्डी पर्यटन मंत्री हैं जबकि तीसरे भाई सोमशेखर रेड्डी भी विधायक हैं। कर्नाटक में चल रहे राजनैतिक घटनाक्रम में फ़िलहाल केन्द्रीय नेतृत्व ने भले ही मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा को अपना समर्थन दे दिया हो, लेकिन दोनों रेड्डी बन्धु कभी भी “येद्दि” की पीठ में छुरा घोंप सकते हैं…।

रेड्डी बन्धुओं की तरक्की का ग्राफ़ भी बेहद आश्चर्यचकित करने वाला है। 1999 तक उनकी कोई बड़ी औकात नहीं थी, तीनों भाई बेल्लारी में स्थानीय स्तर की राजनीति करते थे। उनकी किस्मत में पलटा खाया और सोनिया गाँधी ने इस सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया, सोनिया के विरोध में भाजपा ने सुषमा स्वराज को खड़ा किया और तभी से ये तीनो भाई सुषमा स्वराज के अनुकम्पा प्राप्त खासुलखास हो गये। उस लोकसभा चुनाव में इन्होंने सुषमा की तन-मन-धन सभी तरह से सेवा की, हालांकि सुषमा चुनाव हार गईं, लेकिन कांग्रेस की परम्परागत बेल्लारी सीट पर उन्होंने सोनिया को पसीना ला दिया था। रेड्डी बन्धुओं की पहुँच भाजपा के दिल्ली दरबार में हो गई, इन्होंने बेल्लारी में लौह अयस्क की खदान खरीदना और लीज़ पर लेना शुरु किया, एक बार फ़िर किस्मत ने इनका साथ दिया और चीन में ओलम्पिक की वजह से इस्पात और लौह अयस्क की माँग चीन में बढ़ गई और सन 2002-03 में लौह अयस्क के भाव 100 रुपये से 2000 रुपये पहुँच गये, रेड्डी बन्धुओं ने जमकर पैसा कूटा, तमाम वैध-अवैध उत्खनन करवाये और बेल्लारी में अपनी राजनैतिक पैठ बना ली। चूंकि सोनिया ने यह सीट छोड़कर अमेठी की सीट रख ली तो स्थानीय मतदाता नाराज़ हो गया, साथ ही इन्होंने सुषमा स्वराज को लगातार क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों में बुलाये रखा, पूजाएं करवाईं और उदघाटन करवाये, जनता को यह पसन्द आया। 2004 के लोकसभा चुनाव में सुषमा को तो इधर से लड़ना ही नहीं था, इसलिये स्वाभाविक रूप से बड़े रेड्डी को यहाँ से टिकट मिला और 1952 के बाद पहली बार कांग्रेस यहाँ से हारी। आंध्रप्रदेश की सीमा से लगे बेल्लारी में इन बन्धुओं ने जमकर लूटना शुरु किया। 2002 में ही बेल्लारी नगरनिगम के चुनाव में भी कांग्रेस हारी और इनके चचेरे भाई वहाँ से मेयर बने… उसी समय लग गया था कि कर्नाटक में कांग्रेस का पराभव निश्चित हो गया है।

उधर राज्य के शक्तिशाली लिंगायत समुदाय के नेता येद्दियुरप्पा अपनी साफ़ छवि, कठोर निर्णय क्षमता और संघ के समर्थन के सहारे अपनी राजनैतिक ज़मीन पकड़ते जा रहे थे, अन्ततः कांग्रेस को हराकर भाजपा का कमल पहली बार राज्य में खिला। लेकिन सत्ता के मद में चूर खुद को किंगमेकर समझने का मुगालता पाले रेड्डी बन्धुओं की नज़र मुख्यमंत्री पद पर शुरु से रही। हालांकि येदियुरप्पा ने इन्हें महत्वपूर्ण विभाग सौंपे हैं, लेकिन लालच कभी खत्म हुआ है क्या? सो अब इन्होंने अपने पैसों के बल पर 67 विधायकों को खरीदकर भाजपा नेतृत्व को आँखे दिखाना शुरु कर दिया है। यह बात भी सही है कि जद-यू, कुमारस्वामी और देवगौड़ा जैसों से पार पाने के लिये रेड्डी बन्धुओं की आर्थिक ताकत ही काम आई थी और इन्हीं के पैसों से 17 विधायक खरीदे गये थे, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर दावा, साफ़ छवि और राज्य के सबसे शक्तिशाली लिंगायत समुदाय का होने की वजह से येदियुरप्पा का ही बनता था। यह कांटा इन भाईयों के दिल में हमेशा चुभा रहा, भले ही इन्होंने बीते एक साल में महत्वपूर्ण मंत्रालयों से भरपूर मलाई काटी है। कहने का मतलब ये कि येदियुरप्पा द्वारा सारी सुविधायें, अच्छे मंत्रालय और माल कमाने का अवसर दिये जाने के बावजूद ये सरकार गिराने पर तुले हुए हैं, इन्हें जगदीश शेट्टर को मुख्यमंत्री बनवाना है ताकि वह उनकी मुठ्ठी में रहे।

बताया जाता है कि रेड्डी बन्धुओं की नाराज़गी के बढ़ने की वजह येदियुरप्पा का वह निर्णय भी रहा जिसमें लौह अयस्क से भरे प्रत्येक ट्रक पर 1000 रुपये की टोल टैक्स लगाने की योजना को उनके विरोध के बावजूद कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। यह निर्णय हाल की बाढ़ से निपटने और राहत कार्यों के लिये धन एकत्रित करने के लिये किया गया था, जबकि रेड्डी बन्धु अपनी खदानों के लिये और अधिक कर छूट और रियायतें चाहते थे। साथ ही येदियुरप्पा ने बेल्लारी के कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक का तबादला इन बन्धुओं से पूछे बगैर कर दिया, जिस कारण इलाके में इनकी “साख” को धक्का पहुँचा। येदियुरप्पा ने बाढ़ पीड़ितों की सहायतार्थ धन एकत्रित करने के लिये पदयात्रा का ऐलान किया तो ये बन्धु उसमें भी टाँग अड़ाने पहुँच गये और घोषणा कर दी कि वे अपने खर्चे पर गरीबों को 500 करोड़ के मकान बनवाकर देंगे। सुषमा स्वराज को इनके पक्ष में खड़ा होना ही पड़ेगा क्योंकि वे इनके “अहसानों” तले दबी हैं, उधर अनंतकुमार भी अपनी गोटियाँ फ़िट करने की जुगाड़ में लग गये हैं।

ये दोनों रेड्डी बन्धु आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वायएस राजशेखर रेड्डी के गहरे मित्र हैं, इसलिये नहीं कि दोनों रेड्डी हैं, बल्कि इसलिये कि दोनों ही खदान माफ़िया हैं। राजशेखर रेड्डी ने इन दोनों भाईयों को 17,000 एकड़ की ज़मीन लगभग मुफ़्त में दी है ताकि वे इस पर इस्पात का कारखाना लगा सकें जिसमें उनका बेटा जगनमोहन भी भागीदार है।

पहली बार दक्षिण में भाजपा का कमल खिला है, इसलिये लाखों कार्यकर्ताओं ने भारी मेहनत की है, लेकिन लगता है कि पद, पैसे और प्रतिष्ठा की खातिर अनाप-शनाप धन रखने वाले कुछ “विभीषण” हिन्दुत्व को चोट पहुँचा कर ही रहेंगे। पहले ही राज ठाकरे नामक जयचन्द ने महाराष्ट्र में हिन्दुत्व को अच्छा-खासा नुकसान पहुँचाया है और छठ-पूजा जैसे विशुद्ध भारतीय और हिन्दू त्योहार का विरोध किया, अब कर्नाटक में ये तीनों भाई बनी-बनाई सरकार के नीचे से कुर्सी हिलाने की फ़िराक में हैं। हिन्दुओं की यही शोकांतिका रही है कि इसमें जयचन्दों की भरमार रही है, जो कभी शंकरसिंह वाघेला का रूप लेकर आते हैं, कभी राज ठाकरे का, कभी रेड्डी बन्धुओं का और कभी “सेकुलरों” का।

फ़िलहाल दिल्ली में रस्साकशी चल रही है, अधिकतर कार्यकर्ता येदियुरप्पा को बनाये रखने के पक्ष में हैं, क्योंकि उनकी छवि साफ़ है, काम करने की ललक है, और ज़मीनी राजनीति की पकड़ है, लेकिन भाजपा में कार्यकर्ताओं की सुनने की परम्परा धीरे-धीरे खत्म हो रही है, इसलिये कुछ कहा नहीं जा सकता कि “दक्षिण का यह मोदी” कब और किसके हाथों पीठ में छुरा खा जाये…

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25 Comments

  1. November 2, 2009 at 2:41 pm

    दुखद है लेकिन कड़वा सच कि, भाजपा की लगभग सभी (हरेक!!!) राज्य सरकारों को कभी ना कभी किसी ना किसी जयचन्द का सामना करना ही पड़ा, ये अलग बात है कुछ की (एक दो राज्यों में)चली नहीं।

  2. flare said,

    November 2, 2009 at 3:37 pm

    Rightly said, I am in Bangalore from last three years and the kind of development that Yeradurappa has done in Bangalore in 6 months in incomparable.

  3. November 2, 2009 at 3:44 pm

    लगभग सटीक विश्लेषण |कर्णाटक मैं सिर्फ राजनीति ही नहीं और अन्य क्षेत्रों जैसे real state मैं भी रेड्डीयों का ही बोल बाला है | कई बार तो ऐसा होता है की इन रेड्डीयों के दबंगपन, पैसा के करान स्थानीय दबंग लोग भी इनसे डरते हैं | आज कर्णाटक सरकार का संकट इसलिए ज्यादा है क्योंकि भाजपा सत्ता मैं है | यहीं कांग्रेस रहती तो रेड्डी बंधुओं को कब का कांग्रेस आलाकमान का बुलावा आ जाता और ये रेड्डी भी मैडम के सामने नतमस्तक हो जाते | अब अच्छी और इमानदार राजनीति का समय जाता रहा है | देखते हैं क्या होता है …

  4. mahashakti said,

    November 2, 2009 at 4:23 pm

    आपने बहुत अच्‍छे तरीके से बात कही है, इन्‍ही भेदियो के कारण भाजपा का यह हश्र हुआ है। राम ही बचाये भाजपा को।

  5. November 2, 2009 at 6:18 pm

    sureshjeeआपकी पोस्ट में जो विसंगतियां हैं वे ही परेशानी का कारण हैं. एक ओर आप लिख रहे हैं कि पहली बार दक्षिण में भाजपा का कमल खिला वहीं आप यह भी बता रहे हैं कि वह कैसी कैसी खरीद फरोख्त और अनैतिकताओं के आधार पर खिला है जब सब कुछ अनैतिकताओं पर ही आधारित है तो ये नैतिकताओं के मगरमच्छी आंसू काहे के लिये? दरअसल भाजपा की जो दुर्गति हो रही है और जिसके भविष्य में और बढने की पूरी सम्भावना है उसका कारण ही उसके चरित्र का दुहरा पन है. शत्रुघन सिन्हा, सिद्धू, धर्मेन्द्र,विनोद खन्ना, दारा सिंन्ह (हनुमान) अरविन्द त्रिवेदी(रावण) दीपिका चिखलिया(सीता) स्म्रिति ईरानी, चेतन चौहान,जैसे सैकड़ों किसी भी आधार पर लोकप्रिय व्यक्तियों भ्रष्ट अधिकारियों, सेना व पुलिस के अधिकारियों नेताओं के रिश्त्तेदारों, बेईमान पूंजीपतियों पूर्व राजा रानियों, साधु साध्वियों के भेष में रहनेवाले बहुरूपियों की दम पर कुछ सीटों को हथियाने व अवैध पैसे की दम पर दलबदल करा के सत्ता की लूट मचाने को अगर किसी विचार की जीत हार समझ रहे हों तो फिर गलत निष्कर्ष ही निकाल कर स्यापा करना ही पढेगा. अधिक से अधिक यह कह सकते हैं कि जो चोरी चल जाती ठीक वह पकड़ी जाने लगी है. न जीत सैद्धांतिक रही और ना हार सैद्धांतिक है

  6. anil yadav said,

    November 2, 2009 at 6:45 pm

    भाजपा जब तक सुषमा स्वराज, अरुण जेटली औ वेंकैया नायडू जैसे ड्राइंग रूम छाम नेताओं के कब्जे से मुक्त नहीं होगी उसका यही हाल होगा…..जमीन से जुडे कार्यकर्ताओं का भाजपा से मोहभंग लगातार बढ़ता जा रहा है……..

  7. November 2, 2009 at 9:04 pm

    @ वीरेंद्र जैन साहब, आपके इन महान सेकुलर नेताओं के बारे में आपकी क्या राय है बताना: सुखराम (टेलीकोम घोटाला), नरसिंह राव (शेयर घोटाला), छगन भुजबल (स्टांप घोटाला), शरद पंवार (गेहूं घोटाला), लालू यादव (चारा घोटाला), मुलायम (आय से अधिक संपत्ति घोटाला), मायावती (ताजा कोरिडोर घोटाला), राजीव गांधी-क्वाकोत्री (बोफोर्स घोटाला), अर्जुन सिंह (चुरहट घोटाला), अमरसिंह (समाजवादी), और ताजा तरीन मधु कोडा की अनाप-शनाप आया की गिनती जारी है.. दूसरी और किरण बेदी से लेकर एपीजे कलाम और टी एन शेषण से लेकर बलबीर साहा (ओएनजीसी) जैसे इमानदार लोगों को आपकी सेकुलर कांग्रेस ने किस कदर अपमानित किया है, यह भी आपको पता होगा ? हमें पता हैं आप और आपका सेकुलर मीडिया उनके बारे में कुछ नहीं कहेगा क्योंकि सिर्फ सेकुलर हो जाने से इस देश को लूटने का लायसेंस मिल जाता है. भाजपा चाहे कितनी ही ईमानदार रहे उसकी आप तारीफ़ नहीं कर सकते. कम से कम सुरेश जी ने कोई बात इमानदारी से तो राखी है, आप तो यह हिम्मत भी नहीं कर सकते. खैर जारी रहिये, एक दिन मदम मेहरबान हो जाए तो कोइ तमगा मिल जाए.

  8. SHIVLOK said,

    November 3, 2009 at 12:26 am

    Comment of JEET BHARGAV is also my comment. Jeet Bhargav has written with all totality.(Samagra tippani ki Jeet ji)

  9. SHIVLOK said,

    November 3, 2009 at 12:41 am

    Are yar kuchh bhii kaho BUT ek musibat to ye hai ki,"HINDUON MEN JAICHAND BAHUT PAYE JATE HAIN, JAB TAB, MAT PUCHHO,KAB KAB ,JAICHAND HI JAICHAND"Yar is samasya par kabhii shodh karna padega, sabhii try karo.

  10. SHIVLOK said,

    November 3, 2009 at 12:57 am

    PRIYA SURESH JI, YAHAN-WAHAN, JAHAN-TAHAN, MAT PUCHHO, KAHAN KAHAN, JAB TAB MAT PUCHHO KAB KAB, JAI CHAND HII JAI CHAND , PEETH PAR CHHURA, PEETH PAR CHHURA, SAMNE SE DIRECT KABHHI NA, BUT JAICHANDON PAR SHODHH JAROORI HAI. MY INNOCENT BLOG IS ALSO HERE, http://shivlok.blogspot.com Thanks for your writtings, Your's SHIV RATAN GUPTA

  11. November 3, 2009 at 2:59 am

    …आदरणीय सुरेश जी,कुछ जिज्ञासायें मेरी भी हैं:-१- यदि रेड्डी बन्धु सचमुच ऐसे हैं तो फिर एक पार्टी विथ अ डिफ्रेन्स ने उन्हें टिकट ही क्यों दिया।२- लोकतंत्र नंबर गेम है यदि उनके पास संख्या है तो कौन उन्हें अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करने से रोक लेगा।३- इंदौर में रहते हुऐ आप कभी महाराष्ट्र में राज ठाकरे द्वारा भाजपा-शिवसेना को होने वाले नुकसान को लेकर चिंतित होते हैं कभी आपको कर्नाटक के येदियुरप्पा की चिंता हो जाती है जबकि ये सब अपना ख्याल रखने में समर्थ हैं। आपके जैसे प्रखर राष्ट्रवादी को क्या मुद्दों की कमी है जो यह क्षुद्र राजनीतिक उठापटक पर पोस्ट लिखनी पड़ रही है?४- तमाम संकेतों के बावजूद यदि कोई पार्टी लगातार ऐसे निर्णय ले रही है व ऐसे लोगों को प्रोजेक्ट कर रही है जो उसी की जड़ों को काट रहे हैं तो क्या 'विनाश काले विपरीतबुद्धि' की तर्ज पर हम यह न मानें कि एक संभावनापूर्ण विकल्प की शायद यही नियति है।धन्यवाद!

  12. ePandit said,

    November 3, 2009 at 5:53 am

    ऊपर जीत भार्गव जी की टिप्पणी से सहमत हूँ।जनसंघ और भाजपा के पुराने नेताओं ने शुचिता की जो परंपरा कायम की थी वो नए नेताओं ने धूल में मिला दी है।

  13. November 3, 2009 at 5:59 am

    मोदी तभी तक मोदी है जब तक जनता साथ है. अतः टिकना है तो जनता को साथ रखो, कोई माँ का लाल बाल बाँका नहीं कर सकता.अवैध खनन व टैक्स कर्णाट्क संकट के पीछे है. यैदूरप्पा को यहाँ बात जनता तक पहूँचानी होगी, रेड्डी या टेड्डी तभी सीधे हो सकते है. या फिर खाओ और खाने दो, जै हो करते रहो. सत्ता तुम्हारे बाप की है.

  14. November 3, 2009 at 6:17 am

    @ वीरेन्द्र जैन – आप तो ये देखिये कि किस पार्टी में बहुमत कैसे लोगों का है, उस आधार पर पार्टी का आकलन कीजिये… रेड्डी बन्धुओं को लेना एक मजबूरी थी, ठीक वैसी ही जैसे लालू जैसे चारा चोरों का साथ लेना कांग्रेस की। लेकिन जैसे कांग्रेस ने कभी लालू को एक सीमा से आगे नहीं बढ़ने दिया वैसे ही भाजपा को रेड्डी बन्धुओं को भी रोकना होगा। कम से कम भाजपा में लोकतन्त्र तो है किसी महारानी या ऊपर से मीडिया प्रचार के द्वारा थोपे गये राजकुमार की चरण वन्दना तो नहीं है…। यदि रेड्डी बन्धुओं को भाजपा न लेती, तो कांग्रेस तो हाथोंहाथ लेती क्योंकि उसका तो इतिहास, फ़ितरत और नीयत तीनों ही खराब है। देश की सारी समस्याओं की जननी और राजनीति में सारी बुराईयों की जड़, देश की सबसे पुरानी पार्टी ही है, यह बात समझाने में लगे हैं हम, और ये बुराईयाँ भाजपा में भी आ गई हैं

  15. psudo said,

    November 3, 2009 at 6:40 am

    Suresh Ji, Again a good analysis of problem. But is not "CORRUPTION" also BJPs one of the biggest problem. See how Swami Ramdev ji has started his fight against CORRUPTION through BHARAT SWABHIMAN AANDOLAN. That’s the solution which would solve problems like Reddy brother and not some accommodative politics Which BJP has tried for past 10 years now.

  16. November 3, 2009 at 7:38 am

    भाजपा को रेड्डी बंधुओं के आगे झुकने की बजाय उन्हें निकाल बाहर करना चाहिए. येद्दुरप्पा को जनता के बीच जाकर उन्हें बताना चाहिए कि रेड्डी बंधु क्या गलत कर रहे हैं. हिम्मत दिखानी पड़ेगी. मोदी ने भी दिखाई थी, तभी मोदी मोदी है.

  17. November 3, 2009 at 8:31 am

    सच सुरेश जी, भाजपा को मोदी जैसा फैसला लेना ही होगा. और रेड्डी बंधुओं को सबक सिखाना ही होगा. जब तक येदि रेड्डी भाइयों को सबक नहीं सिखाएंगे तब तक एसे भगोड़े भाजपा में सिर उठाते ही रहेंगे.

  18. cmpershad said,

    November 3, 2009 at 8:53 am

    इस घर को आग लगी घर के चिराग से:)

  19. November 3, 2009 at 9:21 am

    मित्रोआप लोगों दे साथ दिक्कत यह है कि आपको सब कुछ भाजपा-कांग्रेस,हिन्दू-मुसलमान, हिन्दू ईसाई के रूप में ही दिखाई देता है. क्या आप और आपके स्थायी चापलूस\प्रशंशक जो आपकी पोस्ट आने से भी पहले जय जय कार के लिये तैयार बैठे रहते हैं, ने मेरी टिप्पणियों में कांग्रेस की प्रशंशा देखी है? किंतु फिर भी अपने गिरेवां में सही तरीके से झांकने की जगह मुझे कांग्रेसी बनाये रहते हैं. कांग्रेस के बारे मेरे क्या विचार हैं उन्हें इंटेर्नेट पर तलाशिये. आपकी पोस्ट पर टिप्पणी करते समय में अपनी सफाई क्यों दूं? आपने जिस विषय पर पोस्ट लिखी है उस पर ही बात होनी चहिये. सम्भव हो तो 2 नवम्बर 2009 के जनसत्ता में राज किशोर का लेख् पढें

  20. November 3, 2009 at 9:25 am

    पुनश्चःअगर पार्टी में अच्छे लोगों के बहुमत को आप देखते होते तो सीपीएम के बारे में भी लिखते और भाजपा पर थूकते भी नहीं

  21. mehta said,

    November 3, 2009 at 11:57 am

    virendr jain cpm hai kya

  22. November 3, 2009 at 12:23 pm

    वीरेंदर जैन जी, CPM के बारे में लिखने के लिए आप स्वतंत्र हैं आपको किसी ने रोका हैं क्या??? भाजपा पर कृपया आप थूके भी नहीं क्योंकि हम सीपीएम पर थूकने भी नहीं जाते. अगर आपको यह दर्द है कि आपको कोई नहीं पढता तो समस्या पाठक में नहीं आप में है. कभी कुछ सकारात्मक लिखें लोग पढने के लिए ही यहाँ आते हैं.

  23. Mansoor Ali said,

    November 3, 2009 at 3:28 pm

    अब दल का खुला है फाटक,''कर'' लो जो भी हो ''नाटक''.'येदू' जो कभी ''रब्बा'' थे,अब क्यों लगते है जातक.http://mansooralihashmi.blogspot.com

  24. November 3, 2009 at 5:07 pm

    @ वीरेन्द्रजी, मान गए उस्ताद, आप स्वयं तमीज, सभ्य और संसदीय भाषा की आशा रखते हैं लेकिन खुद अपनी बात रखते समय मामूली तमीज भी भूल जाते हैं! इसी लिए अगर कोइ सुरेश चिपलूनकर के लेख की (सुरेशजी की नहीं) तारीफ़ कर दे तो उसमे आपको फालतू प्रशंसक और चापलूस नजर आते हैं. वाकई में आपने साबित कर दिया की आप एक असली कोंग्रेसी या कम्युनिस्ट यानी सेकुलर हैं…! आपको बता दें कि हमें ना तो सुरेश जी जैसे मुफलिस लेखक से कोई पगार मिलता है और ना ही वह हम राज्यसभा की टिकट दिलानेवाले हैं. दरअसल आजकल आपकी तरह लिखने वाले मशरूम हर गली मोहल्ले में मिल जाते हैं लेकिन राष्ट्ररंग से सरोबार सचाई बहुत कम लोग ही लिखते हैं. उसमे से एक हरावल है सुरेश चिपलूनकर. बस इसी वजह से हम उनकी लेखनी के कायल हैं. आप भी अगर वाम और वंश के जयकारों से मुक्त होकर सही लिखे तो हम आपकी भी तारीफ़ करेंगे. हमारा क्या हम तो मां भारती के सच्चे सपूतों के चापलूस/भाट/पालतू हैं. किसी मार्क्स, माओ, मेडम या युवराज के नहीं. तो फिर अगर आप जब भी गैरत और दिल से देशहित में लिखें, हमें जरूर बताइयेगा. फिर देखना, हम सब भारत माता के चापलूस, सुरेशजी से ज्यादा तारीफ़ आपकी करेंगे. कोशिश करके देखो. अब तो आप शायद 'साठ' वसंत पार कर चुके हो…एकाद बार सचाई भी लिख डालो. रही बात सुरेशजी के विषय पर कि वह हिन्दू-मुस्लिम, हिन्दू-सिख, भाजपा-कोंग्रेस जैसे मुद्दों पर लिखते हैं. तो किस विषय पर लिखा जाए इसके लिए भी किसी नामवर सिंह या सोनिया गांधी से पूछना पडेगा? और आपके सेकुलर पत्रकार और मीडिया भी तो यही सीखाता है. हिन्दू युवक की मौत को दबा दो, लक्षमनानद की मौत की खबर दबा दो, हिन्दू संगठनो और संतो को बदनाम करो. मिशनरियो, मेडम और देश-विरोधियों का गुणगान करो. ऐसे में सुरेश चिपलूनकर की कलम से वही निकलेगा ना? सेकुलर झूठ के इस विषाक्त माहौल में एक नहीं हजारों सुरेश पैदा होंगे. आप भी अगर वीर+इन्द्र हैं तो आ जाओ हमारे साथ!

  25. RAJENDRA said,

    November 4, 2009 at 3:52 am

    Gaaliyon ke bare main hindi badi majboot bhasha hai – man ho raha hai kuch uttam seva vireendra jain ki kee jaye par cmp congres secular sab ke sab maha besharam hain inhe apne chashme ke bina kuch dikhta hee nahin- mera kahna ye hai ki tum apne lekh ka star to is layak karo ke suresh chiplunkar to padhne wale tumare lekh bhi padhen


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