मुआवज़े में भेदभाव – देने वाला सेकुलर, विरोध करने वाला साम्प्रदायिक (एक माइक्रो पोस्ट)

1) 17 अक्टूबर 2009 को कासरगौड़ जिले की ईरुथुंकादवु नदी में डुब जाने से चार बच्चों की मौत हो गई, जिनके नाम थे अजीत(12), अजीश(15), रतन कुमार(15) और अभिलाष(17), जो कि नीरचल के माहजन स्कूल के छात्र थे।

2) 3 नवम्बर 2009 को त्रिवेन्द्रम के अम्बूरी स्थित नेय्यर नदी में एक छात्र की डूब जाने की वजह से मौत हुई, जिसका नाम था साजो थॉमस(10)।

3) 4 नवम्बर 2009 को मलप्पुरम के अरीकोड में चेलियार नदी में आठ बच्चों की डूबने से मौत हुई, नाम हैं सिराजुद्दीन, तौफ़ीक, शमीम, सुहैल, शहाबुद्दीन, मोहम्मद मुश्ताक, तोइबा और शाहिद

केरल में एक माह के अन्तराल में 13 बच्चों की मौत एक जैसी वजह से हुई, ज़ाहिर सी बात है कि राज्य सरकार द्वारा मुआवज़े की घोषणा की गई, लेकिन त्रिवेन्द्रम और मलप्पुरम के हादसे में मारे गये बच्चों के परिजनों को 5-5 लाख का मुआवज़ा दिया गया, जबकि कासरगौड़ जिले के बच्चों के परिजनों को 1-1 लाख का…

एक “साम्प्रदायिक” सवाल – ऐसा क्यों? (सही जवाब पर कोई इनाम घोषित नहीं है)

जब मरने वाले सभी बच्चे हैं, प्रत्येक परिवार ने अपने घर के चिराग को खोया है, सभी बच्चे एक जैसी दुर्घटनाओं में मारे गये हैं, तब मुआवज़े में यह भेदभाव कैसा?

मरे हुए लोगों, दंगों और शवों में भी बाकायदा चीन्ह-चीन्ह कर सेकुलरिज़्म की नौटंकी करने वालों पर हज़ार बार लानत है… नरेन्द्र मोदी का कथित भेदभाव तुरन्त दिखाई दे जाता है, लेकिन गाँधी द्वारा शुरु किये गये और 60 साल से जारी इस भेदभाव पर चुप्पी??? (दिल्ली में बैठी वामपंथी रुदालियाँ सुन रही हैं क्या?)

इससे पहले भी पिछले साल एक पोस्ट में ऐसी ही ओछी राजनीति पर एक माइक्रो पोस्ट लिखी थी
(http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2007/12/congrats-secularist-communists.html)

जिसमें बताया गया था कि समझौता एक्सप्रेस बम विस्फ़ोट में मारे गये प्रत्येक पाकिस्तानी नागरिक को दस-दस लाख रुपये दिये गये (सम्मानित पड़ोसी हैं, इसलिये), मालेगाँव बम विस्फ़ोट में मारे गये प्रत्येक मुसलमान को पाँच-पाँच लाख रुपये दिये गये, और अमरावती के दंगों में लगभग 75 करोड़ के नुकसान के लिये 137 हिन्दुओं को दिये गये कुल 20 लाख। धर्मनिरपेक्षता ऐसी ही होती है भैया…
=================

(नोट – मेरे ब्लॉग का विरोध और नापसन्द करने वाले सभी “सज्जनों” से एक बार फ़िर गुज़ारिश है कि इस ब्लॉग का उद्देश्य कांग्रेस और कमीनिस्टों की ऐसी नीच मानसिकता को उजागर करना है, फ़िर भी यदि यह पोस्ट उन्हें “साम्प्रदायिक”(?) लगती हो, तो मैं कुछ नहीं कर सकता…)

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27 Comments

  1. November 16, 2009 at 8:13 am

    सुरेश भाई, आप क्यों अपना खून जलाने के साथ ही साथ हम सभी का भी खून जलाते हैं?कांग्रेस और गाँधी की तुष्टिकरण नीति को ब्रह्मा भी शायद ही बदल सकें क्योंकि वे (नपुंसक) हिन्दुओं का देवता है, हाँ, खुदा या गॉड शायद बदल सकें तो बदल सकें पर उन्हें क्या पड़ी है बदलने की!

  2. November 16, 2009 at 8:23 am

    (दिल्ली में बैठी वामपंथी रुदालियाँ सुन रही हैं क्या?)ऐसे केस में तो बहरे है सबके सब, ठीक ही कहा आपने कि नीच सोच वाले है ! ये जब कारागारों में सड रहे कैदियों का भी मुद्दा उठाते है तो इस तरह नहीं उठाएंगे कि— गरीब और लाचार कैदी … ये इस तरह उठाएंगे कि मुस्लिम युवा कैदियों की कारागारों में दुर्दशा…… खैर, पुराने लोगो ने ठीक ही कहा है कि जाकी होय भावना जैसी….. उन्हें फल भी वैसा ही मिलता है…. देर सबेर ही सही !

  3. November 16, 2009 at 8:45 am

    13 बार पढा गया जब में आया 13 बच्‍चों का जिकर, फिर हम कैसे चुप रह जायें, ऐ महान फसाद के अभिलाषी, मराठी समर्थक ना इधर वालों को कुछ मिला होगा ना उधर वालों को केवल ऐलान होते हैं, तुम दिल्‍ली से दूर हो इसलिये एलानों बारे में अधिक नहीं जानते, हमने देखे है,सुने हैं और बहुतों से अधिक जानते है ऐलान ऐलान ऐलान बस ऐलान होते हैं, और ऐलानों के बारे में जो बात करे वह मूर्ख होते हैं

  4. November 16, 2009 at 8:59 am

    सुरेश जी हमारे साथ आज से नही बहुत पहले से होता आया है। इसलिए हमें चाहिए की हम इसका मुहँतोड़ जवाब दें और इसके लिए हमेँ एकजुट होना पड़ेगा, ।

  5. November 16, 2009 at 9:04 am

    @ कैरानवी – पैसा मिलना न मिलना तो बाद की बात है… लेकिन अमाउंट का ऐलान करने की "नीयत" भी तो देखो…। टिप्पणी करने से पहले थोड़ा दिमाग लगाया करो… (यदि हो तो)

  6. November 16, 2009 at 9:49 am

    suresh tum hindu samaj ke dwara lagaye ja rhe nimntam star ke roop ke bhininmtam starpar likhte ho. kyun? dimag kewal tumhare paas hai. abhi shant hoon ek BADA MAQSAD hal ho jane tak fir lautunga tab naye awtar ke saath…. abhi ek saal bhi nahi hua tum sabko pani pila diya maine…sabse bade to tum ho jo mobile karke bloggers ko mana karte ho ki mere blog par na jaye. mail krke mana karte ho ki mere blog par na jaye. aur jo sambhav ho sakta hai karte ho . kyun? kyunki tumhari dukaan band ho jayegi. abhi ek musalmaan hindi ka samarthan kar raha hai to sab chup hai aur virodh ek hindu kar raha hai (vidambana dekhiye) kal ek musalmaan hindi ki ya vande matram kii mukhalfat karta hai to waha hindu jag jta hai…lanat hai aise hindutv par jo sirf aur sirf musalmaan ke virodh ki neev par khada hai.

  7. November 16, 2009 at 9:50 am

    suresh tum hindu samaj ke dwara lagaye ja rhe nimntam star ke roop ke bhininmtam starpar likhte ho. kyun? dimag kewal tumhare paas hai. abhi shant hoon ek BADA MAQSAD hal ho jane tak fir lautunga tab naye awtar ke saath…. abhi ek saal bhi nahi hua tum sabko pani pila diya maine…sabse bade to tum ho jo mobile karke bloggers ko mana karte ho ki mere blog par na jaye. mail krke mana karte ho ki mere blog par na jaye. aur jo sambhav ho sakta hai karte ho .kyun?kyunki tumhari dukaan band ho jayegi. abhi ek musalmaan hindi ka samarthan kar raha hai to sab chup hai aur virodh ek hindu kar raha hai (vidambana dekhiye)kal ek musalmaan hindi ki ya vande matram kii mukhalfat karta hai to waha hindu jag jta hai…lanat hai aise hindutv par jo sirf aur sirf musalmaan ke virodh ki neev par khada hai.

  8. November 16, 2009 at 10:12 am

    ऐसी घटना गुजरात में होती फिर देखते चिल्लापौ…

  9. November 16, 2009 at 10:20 am

    सलीम मियाँ कल तक तो चीख चीख कर सबको ये बताने पर तुले हुए थे कि "हाँ मैं सलीम खान हिन्दू हूँ" …अब इतनी जल्दी हिन्दूत्व पर लानत भेजने लगे । लगता है शायद हिन्दूत्व का रंग उतर चुका है 🙂

  10. November 16, 2009 at 10:43 am

    कुछेक के भौंकने से कुछ नहीं होगा। सुरेश जी आप लगे रहिए इनकी बखिया उधे़डने में।

  11. ek aam aadmi said,

    November 16, 2009 at 10:59 am

    गंजों के शहर में कंघी बेचने निकले हैं, हो सकता है कि कुछ गंजों के पास विग हों. और कहा जाये तो नामर्दों के लिये वायग्रा की सलाह दे रहे हैं. कुछ नहीं हो सकता व्यापारियों के देश में.

  12. November 16, 2009 at 10:59 am

    @ कैरानवी,सलीम खान मुझे नहीं समझ में आ रहा है इस पोस्ट पर आप को मिर्ची क्यों लग रही है ??? सुरेश भाई ने कब ये कहा है अपने पोस्ट में की मरे मुसलमानों को हिंदुवों वाला मुआफ्ज़ा दो वे तो सामान मुआफ्ज़े की बात कर रहे है!जिन्हों ने अपने बच्चो को खोया है उन्हें थोड़ा अच्छा मुआवजा मिल जाए तो आप के या आप के किसी फत्वादार के जेब का क्या नुक्सान हो जाएगा ???अरे हरकत नहीं तो कमसे कम अपनी सोच में थोड़ी इंसानियत लाओ भाइयो कैरानवी,सलीम….

  13. November 16, 2009 at 11:40 am

    Jo log yeh kahte hain ki aapki post saampradaayik hoti hai….to laanat hai aise logon par….. aapne sach ujaagar kiya hai….. hamein yeh false / pseudo-secularism se azaad hona hi hai….. is desh mein sab baraabar hain….. yeh congression ne desh ko barbaad kar rakha hai…. ab dekhiye kab tak aur barbaad karte hain……..जब मरने वाले सभी बच्चे हैं, प्रत्येक परिवार ने अपने घर के चिराग को खोया है, सभी बच्चे एक जैसी दुर्घटनाओं में मारे गये हैं, तब मुआवज़े में यह भेदभाव कैसा? bilkul sahi kaha aapne…. phir bhedbhaav kaisa?

  14. November 16, 2009 at 1:11 pm

    अगर यह भेद साम्प्रदायिक आधार पर है तो गलत है . किंतु जो लोग घोषित रूप से धर्म निरपेक्ष हैं वे ऐसा काम जान बूझ कर नहीं कर सकते क्योंकि उनके पक्ष में तो हिन्दू ही नहीं मुस्लिम और ईसाई साम्प्रदायिकता वाले भी नहीं हैं और बाम पंथियों की तुलना कांग्रेस की वोट तुष्टीकरण नीति से नहीं की जा सकती. दूसरी ओर जो लोग घोषित रूप से साम्प्रदायिक हैं और गोधरा तथा शेष गुजरात के मृतकों के मुआवजे में खुला और जान बूझ कर भेद भाव करते हैं ताकि वोटों का ध्रुवीकरण बढे उनसे भी नहीं की जा सकती. रही मुआवजे की राशि में अंतर का सवाल तो उसके हज़ारों उदाहरण मिल सकते हैं पर उनमें साम्प्रदायिक भेदभाव देखने से पहले वहां की सरकार का चरित्र देखना पढेगा

  15. mahashakti said,

    November 16, 2009 at 1:26 pm

    जन्‍म से भीखमंगी कौम है इस्‍लाम, लूटेरे है पूरे भारत को लूटा अब अपने वोट के बल पर सरकारी पार्टी को भी लूट रहे है। भेद भाव तो करेगे‍ ही, क्‍योकि इसी पर तो इनकी राजनीति चलती है।

  16. November 16, 2009 at 3:07 pm

    भारत की राजनीति ऐसी ही घटिया सोच के कैंसर से ग्रस्त हो चुकी है। क्या किया जाय, इसपर विचार करना चाहिए।

  17. SHIVLOK said,

    November 16, 2009 at 3:59 pm

    KAIRANVIISALIIM KHANVEERENDRA JAINTum log kuchh SIIKHOKab tak moorkh bane rahogeMAHFOOJ ALI KHAN Sahab se tuition karo.Mahfooj bhaiya bahut santulit aur vidwan vyaktii hain, unse siikho, isse tumhara hii bhala hoga,.

  18. November 16, 2009 at 4:13 pm

    सुरेश जी सेकुलर आपको भले सांप्रदायिक कहें पर आपकी पत्राकारिता/रिपोर्टिंग और खबरों को सीधे सीधे बिना लाग लपेट के लोगों तक पहुचाने की क्षमता सैंकड़ों-हजारों पाठक को आपके ब्लॉग पे खिंच ले आता है | आज जब की चारों तरफ गन्दी-घिनौनी सेकुलर राजनीति का बोल-बाला है, आपका ब्लॉग निश्चित तौर पे सेकुलर राजनीति की गन्दी सोच के खिलाफ अकेले क्रांति की बिगुल बजाता हुआ प्रतीत होता है | ऐसे लोगों की कमी नहीं जो आपके आलेख को पढ़ कर आपके अथक परिश्रम और बेहतरीन पत्राकारिता/रिपोर्टिंग का हौसला अफजाई के बजाये आपको हतोत्साहित करेंगे ….. क्योंकि ऐसे सुतुर्मुर्गी रवैये वाले लोग सत्य को जानकार संघर्ष करना चाहते ही नहीं …. वो तो बस मनोहर कहानियां कहने सुनाने में ही व्यस्त हैं | ये याद रखिये की आप धारा के विपरीत कार्य कर रहे हैं … इसलिए आपको अन्य की अपेक्षा ज्यादा मिहनत, ऊर्जा और धैर्य की जरुरत है…. आप लगे रहिये इतिहास उसे ही वीर कहता है जो विपरीत परिस्थितियों मैं खडा रहता है …. जय हिंद …

  19. November 16, 2009 at 5:07 pm

    सच्चाई को साम्प्रदायिक अथवा राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. आपके उठाये मुद्दे इतने संवेदनशील हो जाते है कि उन पर हुई बहस पर स्तरहीन भाषा का प्रयोग होने लगता है .कुतर्क तभी प्रयुक्त होते हैं जब तर्क समाप्त हो जाते हैं.

  20. Common Hindu said,

    November 16, 2009 at 5:18 pm

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  21. November 16, 2009 at 5:48 pm

    …आदरणीय सुरेश जी,"जब मरने वाले सभी बच्चे हैं, प्रत्येक परिवार ने अपने घर के चिराग को खोया है, सभी बच्चे एक जैसी दुर्घटनाओं में मारे गये हैं, तब मुआवज़े में यह भेदभाव कैसा?"अगर ऐसा भेदभाव सचमुच हुआ है तो मैं पूरी तरह से आपके साथ हूँ। लगता है वामपंथी भी अब नकल करने लगे हैं…(आप जानते ही हैं…:) की)

  22. cmpershad said,

    November 16, 2009 at 7:09 pm

    मुरदे का कोई धर्म नहीं होता। मुर्दों से भेद भाव कैसा !

  23. November 16, 2009 at 8:12 pm

    sureshji !bahut vednaa hoti haibadi peeda hoti hai bada dukh hotaa hai ye jan kar ki vyavasthaa kitnaa ghinouna aur doglaa charitra jee rahi hai lekin agar jaagriti aayi hai to badlaav bhi avashyambhaavi hai abhinandan is post ka !

  24. vinod said,

    November 17, 2009 at 6:21 am

    suresh ji main aap ka blog hmesha padhta hun par malum nahi hindi me kashe likhu but kya aap jante hai ki kal ek bhalu J&K me ghyal tha elaj ke bager tadap kar mar gya why ? aap achi tarha jante hai. Thanks tell me please how can I type in HINDI (IF ANYBODY FIND THIS IS WRONG COMMENT THAN I AM VERY SORRY THIS MY FRIST COMMENT)

  25. November 17, 2009 at 6:37 am

    "इस ब्लॉग का उद्देश्य कांग्रेस और कमीनिस्टों की ऐसी नीच मानसिकता को उजागर करना है"आप लगे रहियेइनकी मानसिकता तो बदली नही जा सकती, जनता ही इन्हें बदल सकती हैप्रणाम स्वीकार करें

  26. SANJAY KUMAR said,

    November 17, 2009 at 8:36 am

    Among the devisive foces of our country, the line extends beyond Congress, Secular and Communists, now it it ending upto Thakreys.I would have been the last person to support an ally of terrorist, anti-national, mafia, communalist, fanatic person like Abu Azmi.There are thousands of reason that Abu Azmi should be thrased or virtually wiped out, but he was not thrased for those reasons rather he was assulted for speaking in a language, which is my mother tongue and it is revered as mother by crores of Indian.(I fail to understand, if my writing in english does not belittle my respect for mother tongue Hindi, how does speaking in Hindi is an assult to Marathi lanugage)The above reason forces me to support Abu Azmi, not only me, now the recent incidents forces Mohan Bhagwat (RSS) and Narendra Modi to share the platform with Abu Azmi.Till psuedo champions of Hinduism like Thakreys remain in country the person like Abu Azmi shall always flourish.

  27. vishnu said,

    November 20, 2009 at 2:49 pm

    SURESH AAP BAHUT THIK HO ,AAP LIKHATE RAHIYE ,JO DESH KE GADDAR HAI KEWAL UNHE HI MIRCH LAGEGI BAKI KO NAHI…


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