ओबामा को समर्पित एक प्रोडक्ट (यह पोस्ट सिर्फ़ पुरुष पाठक पढ़ें)…

अमेरिकी राष्ट्रपति का एक चौथाई कार्यकाल बीतने को है, अब तक वे कुछ खास काम नहीं कर पाये हैं। उनकी लोकप्रियता दिनोंदिन गिरती जा रही है –

1) वे इराक और अफ़गानिस्तान में फ़ेल हो गये…

2) पाकिस्तान को अरबों डालर की सहायता भी बहाल कर दी…

3) बराक “हुसैन” ओबामा ने चीन को खुश करने के लिये वहाँ भी दण्डवत कर दिया…

4) जापान के नरेश के सामने कोई अमेरिकी राष्ट्रपति कभी भी इतना नहीं झुका होगा कि उसके पिछवाड़े पर एक लात जमाने का लोभ न पैदा हो… (देखें चित्र)

5) इज़राइल के साथ भी उनके सम्बन्ध उतने सहज नहीं हैं जितने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों के होते थे…

6) पश्चिम एशिया के लिये अभी तक वे कुछ ठोस योजना लेकर नहीं आये हैं…

7) खुद अमेरिका में ही अर्थव्यवस्था में सुधार करने के लिये उनके प्रयास बेकार साबित हुए हैं…

ऐसे में भारत के मालवा प्रदेश (इन्दौर-उज्जैन) से एक ऐसा “धांसू प्रोडक्ट” आया है, जो उनके लिये मददगार साबित हो सकता है… हालांकि यह प्रोडक्ट भारतीय नेताओं के लिये अधिक उपयोगी है, क्योंकि 26/11 की बरसी नज़दीक है (कसाब एसी और अखबार के मजे लूट रहा है) तथा अफ़ज़ल गुरु भी चिकन उड़ा रहा है… ऐसे में यदि भारतीय नेता इस प्रोडक्ट का उपयोग करें तो अच्छा होगा… लेकिन चूंकि यह प्रोडक्ट ओबामा से जुड़ा हुआ है, इसलिये वे भी इसका उपयोग कर सकते हैं, शायद उन्हें कोई कामयाबी मिल ही जाये…

(इस प्रोडक्ट को देखने के बाद मालवा के लोगों की दूरदर्शिता के आप कायल हो जायेंगे, क्योंकि ओबामा के प्रेसिडेण्ट बनने से पहले ही यह प्रोडक्ट बाज़ार में आ गया था, यानी इसके निर्माताओं को पूरा भरोसा था कि बराक हुसैन ओबामा को इसकी जरूरत पड़ेगी)… मनमोहन सिंह जल्दी ही अमेरिका यात्रा पर जा रहे हैं, उनसे अनुरोध है कि इस प्रोडक्ट का एक सैम्पल साथ ले जायें… बराक ओबामा खुश हो जायेंगे और कभी भी भारत-विरोधी नीतियाँ नहीं अपनायेंगे…

अब सस्पेंस लम्बा खींचने की कोई तुक नहीं है… पेश है मालवा का धांसू प्रोडक्ट…

ढेण टणेण टारा डारा डारा डारा
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ढेण टणेण टारा डारा डारा डारा
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ढेण टणेण
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चलते-चलते एक और “शरारत” झेल ही जाईये…

नीचे दिया हुआ चित्र देखकर निम्न में से एक विकल्प का चुनाव कीजिये…
1) क्या यह कण्डोम का विज्ञापन है?
2) क्या यह गर्भनिरोधक गोली का विज्ञापन है?
3) क्या यह मुल्ला देशों की “शुद्ध अंग्रेजी” का विज्ञापन है?
4) Condemn को Condom लिखने पर “ऑक्सफ़ोर्ड” द्वारा AIDS के लिये कोई फ़ण्ड मिलता है?
 सही जवाब पर “ओबामा गोल्ड ऑइल” की एक शीशी इनाम में…

कहीं मेरे पाठक यह मुगालता न पाल लें कि मैं सिर्फ़ गम्भीर, हिन्दुत्व-राष्ट्रवाद वाले लम्बे-लम्बे लेख ही लिख सकता हूं, इसलिये यह एक “छवि-तोड़क” पोस्ट है… 🙂

लम्बे लेख लिखने के लिये सर्च करते समय नेट पर सर्च करते समय, ऐसा भी बहुत कुछ मिल जाता है… तो सोचा कि माहौल को हल्का-फ़ुल्का बनाने के लिये आपके साथ शेयर करता चलूं…) हालांकि यह एक राजनैतिक हास्य-व्यंग्य है, लेकिन यदि किसी को यह पोस्ट अश्लील लगा हो तो क्षमाप्रार्थी हूं…

(नोट – गम्भीर लेखन करते-करते, कभीकभार शरारत का मूड हो जाता है, अतः इस पोस्ट को सिर्फ़  एक मजाक के तौर पर लिया जाये…)

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39 Comments

  1. eSwami said,

    November 20, 2009 at 6:26 am

    हा हा! ये लेख सचमुच मजेदार है. :)अब ये बतईये की लेख मे प्राडक्ट प्लेसमेंट की कितनी कमिशन मिल रही है?[मज़ाक ही कर रहा हूं भई]

  2. November 20, 2009 at 6:29 am

    हा हा हा, धन्यवाद स्वामी जी, जिस दिन प्रोडक्ट प्रमोशन का कमीशन मिलने लगेगा, आपको पार्टी दूंगा… शायद ब्लॉग से यही कमाई हो जाये… 🙂

  3. November 20, 2009 at 6:44 am

    ha..ha.. lajwaab achchaa comment kiyaa hai!!!

  4. November 20, 2009 at 6:46 am

    ऐ महान फसाद के अभिलाषी, मराठी समर्थक लगता है तेल आजमा लिया यह लिख देते किना लाभ हुआ, हम अवध तो कभी नहीं गये लेकिन यह तेल अगर अवध में मिल सका तेरे भाई बंदों तक पहुचा देंगे, हम तो तीसमारखां तो नहीं 7मारखां हैं अभी भी इसलिए इस तेल से परिचित नहीं थे, भगवान से प्रार्थना है कि वह तुझ साधुवाद का अर्थ समझाए,अवधिया चाचाजो कभी अवध ना गया

  5. November 20, 2009 at 6:49 am

    अवधिया "चाचा", तेरे नाम में ही चाचा जुड़ा हुआ है, इसलिये इस तेल की आवश्यकता सबसे अधिक तुझे ही है…। मुझे पता है कि तुझे असली मिर्ची सबसे अन्तिम फ़ोटो देखकर लगी है… इसीलिये कहता हूं जहाँ मिर्ची लगी है, वहीं ये तेल लगा ले, उमर के लिहाज से ठीक रहेगा… 🙂

  6. November 20, 2009 at 6:50 am

    ओबामा तेल!!!! अब तक जापानी, जर्मन, मद्रासी जैसे नामों से ही विज्ञापन देखे थे 🙂 जो दिमाग में होता है वही लिख भी देते है, कंडोम लिखने के पीछे यही विज्ञान रहा हो सकता है. 🙂

  7. November 20, 2009 at 7:11 am

    वैसे इस तेल की जरुरत काग्रेंस में भी बहुत लोगो को है । अवधिया चाचा को इस तेल की भला क्या जरुरत ?????? hahahahahaha

  8. November 20, 2009 at 7:22 am

    बहुत बढ़िया जल्दी ही एक शीशी मनमोहन सिंह को भिजवाइए !

  9. November 20, 2009 at 7:31 am

    आपके काफी सारे आलेखों के पढ़ने के उपरांत इस आलेख को पढ़ने पर बस मुंह से एक ही शब्द बार-बार निकल रहा है- "हा हा हा हा हा…………….."बाइ द वे, ये अवधिया चाचा, मुझे तो कोई सनकी लगते हैं, जिनका दिमाग सलीम और कैरानवी से भी निम्न स्तर पर है.और हां, आपके चारों ही विकल्प मुझे तो सही लग रहे हैं, लेकिन तीसरा सबसे ज्यादा सही है। अगर मेरा जवाब सही हो तो कृपा करके मेरे नाम के "ओबामा आइल" पुरस्कार को कैरानवी, सलीम और अवधिया चाचा को अवश्य दे दीजिएगा। चलते-चलते, आप से यही गुजारिश है…मेरी यह विनती सुरेश जी, अवश्य मान लीजिएगा…

  10. November 20, 2009 at 7:46 am

    हाहाहा मजेदार है .आपका हल्का -फुल्का भी बहुत भारी होता है सुरेश जी !!!

  11. November 20, 2009 at 7:58 am

    जापान के नरेश के सामने कोई अमेरिकी राष्ट्रपति कभी भी इतना नहीं झुका होगा कि उसके पिछवाड़े पर एक लात जमाने का लोभ न पैदा हो… (देखें चित्र)आपने मेरे दिल की बात कह दी जब दो दिन पहले यह फोटो मैंने अखबार में देखी थी तो मेरे दिमाग का पहला रिएक्सन बिलकुल यही था !

  12. November 20, 2009 at 7:59 am

    Bahut badhiya rahi yeh post….bechare mullon ko RAPIDEX English zaroor padhni chahiye….ab kaun sa vikalp doon samajh nahi aa raha hai…. ab agar sahi vikalp doonga to badi beizzati ho jayegi…. aap mujhe OBAMA gold oil bhijwa denge… jabki main abhi ekdum fit hoon… dimaagh se bhi aur shareer se bhi… ek ek purza sahi kaam karta hai…. iski zaroorat to waaqai mein hamare desh ke netaon ko hai… unke kai purze dheele hain…. waise obama aur manmohan singh ko iski sakhtbadi zaroorat hai…waise poore congress ko Obama Oil ki zaroorat hai…

  13. November 20, 2009 at 8:57 am

    छवितोडक पोस्ट बहुत अच्छी लगीप्रणाम स्वीकार करें

  14. November 20, 2009 at 9:12 am

    बहुत खूब सुरेश जी, हा हा हा मीरा जी से कह कर सारे संसदो में बटवाने का प्रस्‍ताव रखता हूँ, मुगलता न हो तो मुस्लिमो के लिये आरक्षण की भी बात रख दूँ ?

  15. KSP1857 said,

    November 20, 2009 at 11:16 am

    लाजवाब…!!! चाचा को सुरेश जी का जवाब…..

  16. Riyaz said,

    November 20, 2009 at 11:44 am

    अवधिया "चाचा", तेरे नाम में ही चाचा जुड़ा हुआ है, इसलिये इस तेल की आवश्यकता सबसे अधिक तुझे ही है…। मुझे पता है कि तुझे असली मिर्ची सबसे अन्तिम फ़ोटो देखकर लगी है… इसीलिये कहता हूं जहाँ मिर्ची लगी है, वहीं ये तेल लगा ले, उमर के लिहाज से ठीक रहेगा… 🙂

  17. RAJENDRA said,

    November 20, 2009 at 12:12 pm

    hamare hisab to laat jadne ka kaam vaishakh nandan umda karata hai – amrica main kami nahin hai koi na koi tayaar ho raha hoga obama ke liye

  18. November 20, 2009 at 12:33 pm

    सुरेश जी इस लेख से आपने अपनी छवि ऐसी तोड़ी है जैसे कोई " शीशी भरी गुलाब की पत्थर पे तोड़ता है'……."हमने ब्लॉग जगत में एक से एक धाँसू पोस्ट पढ़ीं हैं दो साल जो हो गए जुड़े इस से लेकिन आपने जैसे छवि अपने इस लेख से तोड़ी है वैसी कोई और न तोड़ पाया…यूँ समझिये की आप राम हुए और आपकी छवि शिव का धनुष…बहुत जोर लिखे हैं आप…दुर्भाग्य है की ओबामा को हिंदी पढना नहीं आता…उसे पता नहीं की उसने क्या मिस कर दिया है…नीरज

  19. gg1234 said,

    November 20, 2009 at 1:06 pm

    Mere khayal se hamare desh ke netaaon ki is ki katai zaroorat nahi hai…kyon ki woh log desh ke saath jo kar rahe hain usse dekh ke to yeh lagta hai ki ya to woh puri tarah tandoorust hain ya unke paas yeh dawai pehle hi se hai…

  20. November 20, 2009 at 2:40 pm

    यह पोस्ट एक बेहद गम्भीर पोस्ट है जो बताती है कि चीन के आगे अमेरिका का रुतबा आज क्या रह गया है.क्योंकि उसी के नाम का प्रोडक्ट उसे ही भेंट करने की सलाह दी जा रही है। असल में अमेरिका की नीतियों से पूरी दुनिया जिस मन्दी की चपेट में आयी और चीन उससे अछूता रहा उससे वाह सारी दुनिया में श्रेष्ठ अर्थव्यवस्था का प्रतीक बन गया है और संस्कृत में कहा गया है कि-यस्यान वित्तम सः नरः कुलीनःस च विद्वान श्रुतिवान गुणिज्ञःस एव पंडित सुदर्शनीयःसर्वे गुणः कांचनम आसवंते( कुछ स्पेलिंग भूल हो सकती है)भारत में की गयी इस खोज के भी कुछ निहितार्थ होंगे और जिन लोगों की निगाह ऐसी चीजों पर रहती है वे भी अपनी पहचान के हक़दार हैं। हँसना के अवसर पा लेना और दूसरों को देना अच्छा है हँस वही सकता है जो किसी कुटिलता से दूर हो क्योंकि दोनों काम एक साथ नहीं किये जा सकते{ मेरे लेखन का एक बड़ा भाग व्यंग्य का है

  21. November 20, 2009 at 3:03 pm

    इन दिनों ओबामा चीन से लौटे हैं इसलिये मेनें चीन केन्द्रित टिप्पणी लिख दी जो सही तो है पर इस पोस्ट से सीधे नहीं जुड़ रही । इन साले चीनियों और जापानियों की शक्लें इतनी मिलती जुलती हैं कि धोखा हो जाता है।

  22. November 20, 2009 at 3:24 pm

    गंभीर पोस्ट से कहीं ज्यादा असरदार।.

  23. November 20, 2009 at 3:43 pm

    मजेदार लगी … सुरेश भाई एक सीसी करुणानिधी को जरुर भिजवाईयेगा…. उन्हें इसकी जरुरत है …

  24. November 20, 2009 at 4:16 pm

    कन्डोम तो गैर इस्लामिक शब्द है .

  25. aarya said,

    November 20, 2009 at 5:11 pm

    सुरेश जीसादर वन्दे!ये मजाक ही सही लेकिन वर्त्तमान कि सही तस्वीर पेश कर दी आपने,ओबामा न सही माननीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी तो हिंदी जानते होंगे कम से कम वही इसे पढ़कर अपने दामाद स्वरूप ओबामा को बता दें,

  26. November 20, 2009 at 6:15 pm

    यह छवि तोडक लेख अच्छा था…एक बात बतायें ये "ओबामा आयल वालों से कुछ पैसा मिला है क्या जो इनका एडवरटाइज़ कर रहे है…..

  27. Chinmay said,

    November 20, 2009 at 6:29 pm

    मज़ा आ गया सुरेश जी. वैसे बेंगलूर के मुरुगेश पलाया भाग में आई टी प्रोफेशनल्स के लिए सर्विस अपार्टमेंट एक सज्जन चलाते हैं मज़े की बात यह की वह सर्विस अपार्टमेंट जिस गली में स्थित है उस गली का नाम 'ओबामा' लेन है. 'ओबामा' नाम की धूम दुनिया भर में जो मची है वह इज़्ज़त न लिंकन को मिली न क्लिंटन को !!

  28. November 20, 2009 at 9:48 pm

    भाई एक शीशी मुम्बई भी भेज देना. यहाँ शरद पवार के भरोसे हिन्दुस्तानी किसान आत्महत्या कर रहे हैं और पाकिस्तानी कसाब बिरयानी के मजे लूट रहे है. पूरी राज्य सरकार और यहाँ के कोंग्रेस -एनसीपी के नेताओं को भी इसकी सख्त जरूरत है. क्योंकि इन्ही नपुंसकों के कारण देश भर में २६/११ की बरसी मनाई जा रही है. इसकी एक शीशी उन 'मोमबत्ती जलाऊ' जनता को भी भेजी जाए जो वोट देते समय अकल पिछवाड़े रखकर अफजल-कसाब के ससुरों को वोट दे आती है.

  29. November 21, 2009 at 1:57 am

    आपने इस पोस्ट को ठेलकर साबित कर दिया है कि आप थोड़े मजाकिया भी हो, नहीं तो सब आपको बहुत ही धीर गंभीर समझती रही होगी। अच्छा है वो व्यंग्य जो सबको हँसाये।एक बेहतरीन पोस्ट…ये तेल वेल से कुछ नहीं होता जो करना होता है अपने को ही करना होता है… :)(कमेंट को अश्लील न माना जाये)

  30. keralafarmer said,

    November 21, 2009 at 2:15 am

    गुगिल नॆ ऐसॆ बदल दिया |Obama dedicated to one product (male readers just read this post) …Was read 215 timesOver a quarter of the U.S. President's term, until now they could not do much work. Their popularity is declining day by day –1) They have failed in Iraq and Afghanistan were …2) assistance to Pakistan billions of dollars restored …3) Barack "Hussein" Obama to appease China has Dndwat there …4) King of Japan before a U.S. President ever so inclined would not kick his ass at times, not born of greed … (see picture)5) their relationship with Israel is not as easy as previous presidents were in …6) for West Asia, they still have not come with some concrete plan …7) To improve the economy in the U.S. own their efforts have proved futile …So India's Malwa Pradesh (Indore – Ujjain) and a "fi product" has come, which may prove helpful for them … though this product is more useful for the leaders because the anniversary is near 26/11 ( interesting is loot and newspaper Ksab AC) and is making chicken Afjhl Thurs … So even if the Indian leader, use this product will be good … but since this product is linked to Obama, so they can use it , perhaps they might find some success …(This product after seeing a vision of the people of Malwa, you will be convinced, because of Obama even before becoming President was in the product market, which means that Barack Hussein Obama was confident that manufacturers will need it to) … Manmohan Singh soon are going to visit, they request that a sample of this product will be happy to collect it … Barack Obama and ever India – not anti Apnaienge Policies …Now is no point in suspense long pull … Here fi product of Malwa …Den Tnen Tara Dara Dara Dara…Den Tnen Tara Dara Dara Dara…Den Tnen…Walking – walking one and "naughty" bear the go …Was one of the following options below to see pictures please choose …1) What is this condom ad?2) whether it is an ad contraceptive pill?3) states that Mullah "pure English" is an ad?4) Condemn Condom writing on the "Oxford" for AIDS by a Fnd get? But the right answer "Obama Gold Oil" reward a bottle …Take me somewhere that I only serious reader funded or PAL, Hinduism – the long-nationalism – can write a long article, so an "image – Todk" is posted …:)Search for the article while writing a long search on the net while, it gets too much … so that the light environment – would share with you to create Fulka Clun …) Although a political comedy – satire, but If anybody thought it pornographic post then I apologize …(Note – do serious writing – do get occasional naughty mood, so this post was just a joke as a matter …)

  31. रचना said,

    November 21, 2009 at 4:13 am

    सुरेश आप एक ब्लॉगर हैं इस लिये आप नए जो हेअडिंग दी हैं इस पोस्ट की उस पर मुझे बहुत आश्चर्य हैं । आप अगर निर्लिप्त लेखन करते हैं तो जेंडर बायस से ऊपर उठ कर लेखन करे । आप को भी मजाक का अधिकार हैं लेकिन जब मजाक मे भी हम "असमानता " की बात करते हैं तो कहीं न कहीं वो चुभती हैं । हिन्दी ब्लोगिंग मे क्या आप को महिला इतनी अपरिपक्प लगती हैं ? बात अगर शालीनता की होती तो भी हेअडिंग नहीं दिस्क्लैमेर होता अंत मे । हेअडिंग मे ये देने का अर्थ केवल और केवल दोहरा अर्थ दे कर ज्यादा लोगो मे पढवाना होता हैं । मै आप को निरंतर पढ़ती हूँ और इसलिये पढ़ती हूँ क्युकी सीना ठोक कर अपने को हिंदू कहने वाले कम होते हैं । मै आप को इसलिये भी पढ़ती हूँ क्युकी समाज मै जो घटित होता हैं उस पर आप लिखते हैं औररिसर्च कर के लिखते हैं । आप भी अगर नर – नारी के भेद भाव मे पड़ कर लिखेगे टी आर पी के लिये जान कर अफ़सोस हुआ ।जापान आप कभी जायगे तो आप देखेगे वहाँ हर कोई इतना ही झुक कर अभिवादन करता हैं एक दूसरे का । ओबामा मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता पर इस अभिवादन मे मुझे कोई बुराई नहीं दिखी क्युकी ये पारम्परिक तरीका हैं जापान का

  32. cmpershad said,

    November 21, 2009 at 7:37 am

    ऐसे तेल के साथ तो कंडॊम फ़्री होना चाहिए 🙂

  33. November 21, 2009 at 8:53 am

    कहां कहां से छांट छांट कर एसी उम्दा फोटो लाते हैं आप !

  34. November 21, 2009 at 2:01 pm

    जापान आप कभी जायगे तो आप देखेगे वहाँ हर कोई इतना ही झुक कर अभिवादन करता हैं एक दूसरे का । ओबामा मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता पर इस अभिवादन मे मुझे कोई बुराई नहीं दिखी क्युकी ये पारम्परिक तरीका हैं जापान का@रचनाजापानी औपचारिक अभिवादन में पैंतीस अंश के आसपास झुकना होता है. नब्बे अंश झुकने को…… क्षमा मांगने, गलती स्वीकारने या याचना की मुद्रा है.

  35. November 22, 2009 at 3:23 pm

    Is tarah ke Chavhi Tokak Lekh likh kar aap bande ke pet par laat marne ka bhi apradh kar rahe hein. Is tarah ke lekhon ki jimmedari meri hai, aap mere kaam mein taang zabardusti ada rahe hein. Filhal, Apka Lekh Dhansoo hai. Isi tarah ke acche prayaas karte rahenge to ek din meri dukaan bund karwa denge.

  36. रचना said,

    November 23, 2009 at 11:05 am

    ab esa nahin haen japan mae log bahut jhook kar jaesae obama kar rahey haen issi prakaar sae kartey haen

  37. ePandit said,

    March 6, 2010 at 12:17 am

    हा हा हा, ओबामा को क्या खबर उनके लिये कितनी मेहनत की उज्जैन वालों ने। कुरियर वगैरा करके एक शीशी भिजवाओ भाई उन्हें। बाकी हमारे नेताओं को तो इस पर डिस्काउंट मिलना मांगता है। इसके अलावा मनमोहन जी को इस तेल का ब्राण्ड ऍम्बैसेडर बनाया जा सकता है। बहुत स्कोप है इस तेल का भारत में।


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