>स्मृति गीत: तुम जाकर भी / गयी नहीं हो… संजीव ‘सलिल’

>स्मृति गीत:

पूज्य मातुश्री स्व. शांतिदेवी की प्रथम बरसी पर-

संजीव ‘सलिल’

तुम जाकर भी

गयी नहीं हो…

*
बरस हो गया

तुम्हें न देखा.

मिति न किंचित

स्मृति रेखा.

प्रतिदिन लगता

टेर रही हो.

देर हुई, पथ

हेर रही हो.

गोदी ले

मुझको दुलरातीं.

मैया मेरी

बसी यहीं हो.

तुम जाकर भी

गयी नहीं हो…

*

सच घुटने में

पीर बहुत थी.

लेकिन तुममें

धीर बहुत थी.

डगर-मगर उस

भोर नहाया.

प्रभु को जी भर

भोग लगाया.

खाई न औषधि

धरे कहीं हो.

तुम जाकर भी

गयी नहीं हो…

*

गिरी, कँपा

सारा भू मंडल.

युग सम बीता

पखवाडा-पल.

आँख बोलती

जिव्हा चुप्प थी.

जीवन आशा

हुई गुप्प थी.

नहीं रहीं पर

यहीं हो

जाकर भी

गयी नहीं हो…

*

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