>सही कौन

>देश में महिलाओ के साथ भेदभाव होता रहा है ऐसा आरोप कई बार लग चुका है ,बुद्धिजीवियों ,सहायता समूहों ,और कई और भी समूहों के द्वारा बार बार मांग उठती रही है की महिलाओ को भी पुरुषोके बराबर अधिकार दो लेकिन होता हर बार एक ही चीज़ है वो ये की जब तक प्रदर्शन होता है मामला गर्म रहता है और थोड़े दिनों के बाद ठंडे बसते में दाल दिया जाता है कुछ बातें सही भी होती है लेकिन इनको लगता है की भेदभाव ही हो रहा है इसका ताज़ा उद्धरण है ,अगर इस मुद्दे को लेकर हाल की बात करे तो एयर फोर्सके आधिकारी पी .सी .बारबोरा द्वारा महिलाओ को एयरफोर्स और सेना लड़ाकू विमान उड़ाने नहीं देने सम्बन्धी बात को लेकर है ,बारबोरा का कहना है की एक लड़ाकू वायुयान चालक को तैयार करने में सेना को तक़रीबन १२ करोड़ रूपये का खर्च सेना और भारत सरकार पर आता है और ये कुछ दिनों बाद यानि शादी के बाद जॉब छोड़ देती है येः अगर सही तरीके से देखे तो सही भी है ,लेकिन महीला आन्दोलन कारियोंको येः बात भी सही नहीं लगी .एक बात तो जो साफ़ है वो येः क्या की सही में सरकार के पैसे को सही चीज़ में खर्च करना चाहए ये आम लोगो का ही तो पैसा है अगर इन चालको को नौकरी छोडनी है तो कम से कम इस बात को पहले ही स्वीकार कर ले ताकि देश का पैसा बेकार न चले जाए .मैं अगर कहूँ इन मुद्दे को अगर ठंडे बसते में डाला भी जाए तो ठीक ही है ये तो देश के पैसे का सवाल है .इतनी जनता भूख से बेहाल है और वहां क्या हो रहा है ?आप भी इस पर जरूर कुछ कहे क्या वो आन्दोलनकारी सही है ,महिलाओ के आभिकारो को लेकर लड़ने वाले सही है या फिर एयरफोर्स के अधिकारी बारबोरा ?

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