ब्लॉग मित्रों और पाठकों, मैं फ़ॉर्म में आने की कोशिश कर रहा हूं…

मित्रों 10 दिसम्बर को अफ़ज़ल गुरु वाली पोस्ट लिखी थी, उसके बाद विभिन्न वैवाहिक समारोहों तथा पारिवारिक व्यस्तताओं की वजह से आज दस दिन में भी एक पोस्ट न लिख सका, इसका मुझे खेद है। एक विवाह समारोह में कानपुर जाना हुआ था, जहाँ दो ब्लॉगरों से मुलाकात होते-होते रह गई, पहले प्रमेन्द्र भाई, जिन्हें इलाहाबाद से आना था परन्तु काम में व्यस्त होने की वजह से वे नहीं आ सके, जबकि दूसरे महफ़ूज़ भाई, जिन्हें मैंने ही संकोचवश नहीं मिलने बुलाया। संकोच ऐसा, कि सिर्फ़ एक शनिवार का दिन ही मैं कानपुर में थोड़ा फ़्री था, और मैंने सोचा कि मैं महफ़ूज़ भाई को फ़ोन करूंगा और वे अपना काम-धाम छोड़कर लखनऊ से मुझसे मिलने आ पहुँचेंगे (मैंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि कानपुर से लखनऊ सिर्फ़ एक घण्टा दूरी पर है और यह भी नहीं पता था कि महफ़ूज़ भाई शनिवार को छुट्टी मना सकते हैं, फ़िर मैं नहीं चाहता था कि वे अपना काम छोड़कर सिर्फ़ मुझसे मिलने इतनी दूर आयें, हाँ यदि कानपुर में ही होते तो मैं अवश्य उन्हें बुलाता या खुद मिलने चला जाता, इस प्रकार संकोचवश महफ़ूज़ भाई से मिलना नहीं हो सका), जबकि प्रमेन्द्र भाई इलाहाबाद रहते हैं जो कि कानपुर से 3-4 घंटे की दूरी पर है, तो उन्हें भी मिलने बुलाना मुझे बड़ा ही अजीब लग रहा था। बहरहाल, दोनों से ही मुलाकात न हो सकी, जिसका अफ़सोस हमेशा रहेगा।

फ़िर कानपुर से लौटकर व्यवसाय के अन्य कामों में व्यस्त हो गया साथ ही मौसम सम्बन्धी बदलावों और यात्राओं की वजह से तबियत थोड़ी नासाज़ हो गई है, इस वजह से फ़िलहाल चैटिंग, ब्लॉगिंग आदि से दूर हूं। इस बीच खुद का सायबर कैफ़े होने के बावजूद बाहर नेट पर जाकर बीच में एकाध टिप्पणी दे मारी थी, इसके गवाह पाबला जी हैं (आखिर मुझे ब्लॉगिंग की बीमारी जो ठहरी)। लेकिन अब जल्दी ही वापस आने की कोशिश कर रहा हूं…… बहुत से मुद्दे हैं जिन पर लिखना बाकी है खासकर रंगनाथ मिश्र आयोग की “समाजतोड़ू साम्प्रदायिक रिपोर्ट” पर, केरल के आतंकवादी पनाहगाहों पर और तेलंगाना पर…। परन्तु जैसा कि कई बार होता है मैं कई मुद्दों पर लिखने की इच्छा रखने के बावजूद नहीं लिख पाता, कारण सिर्फ़ एक ही होता है अपना मुख्य काम-धंधा, जो कि निश्चित रूप से ब्लॉगिंग से अधिक जरूरी है…। शायद यह पहली या दूसरी बार होगा जब मैंने 10-11 दिनों में कोई पोस्ट नहीं लिखी। जिस प्रकार कई दिनों तक मैदान में न उतरने पर खिलाड़ी “आउट ऑफ़ फ़ॉर्म” हो जाता है शायद मैं भी हो गया दस ही दिन में, लेकिन अब मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही है और मैं जल्दी ही फ़ॉर्म में आऊंगा… स्नेह बनाये रखें।

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31 Comments

  1. December 20, 2009 at 8:36 am

    आपका इंतजार है। उसीदिन से हम भी अपनी तबियत खराब कर बैठे है। कोशिश रहेगी कि जल्‍द मिले 🙂

  2. December 20, 2009 at 8:37 am

    आप जल्‍दी फार्म आऐं साथ में टिप्‍पणि के नियम भी लेके आये, फिर हम आपका स्‍वागत भी करेंगे, कौन कहता है? लगातार पोस्‍ट से ही फार्म में रहा जा सकता है, हम महीने में एक दो बार ही पोस्‍ट लाते हैं फिर भी फार्म में कोई कमी नहीं होती, जैसे दुनिया जाने हम कभी अवध गये नहीं और फिर भी अवधिया चाचा कहलावें, अब तो दो ही इच्‍छा हैं एक आपको फार्म में देखने की दूसरे कोई अवध में मुर्गि फारम हो तो उसे देखने की, अवधिया चाचाजो कभी अवध न गया

  3. vikas mehta said,

    December 20, 2009 at 8:59 am

    आपका इंतजार है। उसीदिन से हम भी अपनी तबियत खराब कर बैठे है। कोशिश रहेगी कि जल्‍द मिले 🙂

  4. December 20, 2009 at 9:24 am

    ऐसा प्रतीत होता है कि कार्य की अधिकता की वजह से आपने मेरी पोस्ट अफ़ज़ल गुरु को फ़ांसी — नही देखी होगी.यह पोस्ट आपकी पोस्ट से ही प्रेरित हो कर लिखी थी.उसपर आपके विचार जानना चाहूंगा.www.amoghkawathekar.blogspot.com

  5. December 20, 2009 at 9:33 am

    पारिवारिक और सामाजिक जीवन तथा स्वास्थ्य को प्राथमिकता तो देना ही पड़ता है सुरेश जी! लेखन तो चलता ही रहेगा।अब आपके अगले पोस्ट की प्रतीक्षा है।

  6. aarya said,

    December 20, 2009 at 9:56 am

    सुरेश जीसादर वन्दे!विचार जीवन कि वह रागनी है जो इस शरीर के साथ ही जाती है, इसके लिए फार्म कि नहीं प्लेट फार्म की जरुरत होती है, जो आपके पास है और आप उसे अच्छी तरह उपयोग में भीलाते हैं… बाकी आपके अगली पोस्ट मेंरत्नेश त्रिपाठी

  7. December 20, 2009 at 9:57 am

    स्‍वास्‍थ्‍य लाभ लीजिए सुरेश भाई. और आपने मेरे पिछले पोस्‍ट में कमेंट कैफे से की, खुशी हुई. इसके लिए धन्‍यवाद. अगले पोस्‍टों के इंतजार में.

  8. December 20, 2009 at 10:12 am

    …आदरणीय सुरेश जी,जल्दी लौटिये फॉर्म में… बेसब्री से इंतजार है आपका…आभार!

  9. December 20, 2009 at 11:11 am

    आपकी प्रतीक्षा रहेगी।

  10. December 20, 2009 at 11:31 am

    गवाही क्या? आप तो रंगे टिप्पणी पकड़े गए थे :-)वैसे यह सच है कि कई मुद्दों पर लिखने की इच्छा रखने के बावजूद नहीं लिखा जाता, कई कारण होते हैं जिनमें से एक है अपनी आजीविका, जो कि निश्चित रूप से ब्लॉगिंग से अधिक जरूरी हैफॉर्म में आईए। प्रतीक्षा रहेगी। बी एस पाबला

  11. December 20, 2009 at 12:50 pm

    सुरेशजी, आपकी लेखनी को पढ़कर तो हम जैसे 'सुस्त' लोग भी 'फॉर्म' में आ जाते हैं. इसलिए अपने लिए ना सही हमारे लिए जल्दी से फॉर्म में आ जाइए. ईश्वर आपको हमेशा आरोग्यमय रखें. और समाज व देश के लिए चिंतन-मनन-लेखन करने के लिए भरपूर ऊर्जा तथा संसाधन प्रदान करे.

  12. December 20, 2009 at 12:51 pm

    आपके फॉर्म में आने की प्रतीक्षा है ।

  13. December 20, 2009 at 1:42 pm

    फ़ार्म मे लौट्ते ही शतक की उम्मीद

  14. anitakumar said,

    December 20, 2009 at 2:56 pm

    आपके फॉर्म में आने की प्रतीक्षा है ।

  15. December 20, 2009 at 4:22 pm

    कानपुर में रहने की खबर तो करते जनाब, हम तो 11 तारीख से 15 तारीख तक कानपुर में ही रहे. बहरहाल अब आप आ गए हैं तो धमाका ही करेंगे. इंतज़ाररहेगा.

  16. मनुज said,

    December 20, 2009 at 4:25 pm

    शतक नहीं जी दोहरा शतक मारीये, और जल्दी से फॉर्म में आईये. इश्वर आपको जल्दी स्वस्थ करे. गेट वेल सून.

  17. December 20, 2009 at 6:43 pm

    kahan bhaag ke jaoge,is blogging ka kaata yahin per paani peene aata hai…Likhne nahin to padhne hee…Jaise ki hum…aglee post ka intzaar rahega…

  18. December 20, 2009 at 7:26 pm

    'prabhu' jab form me nahi hote tab hi jyada acche se hit kartein hai form me aane k bad sahi khyal hai na 'sunil' ka?

  19. December 21, 2009 at 2:45 am

    पढ़ा। अच्छा लगा।

  20. December 21, 2009 at 4:06 am

    आपकी रिपोर्ट का इन्तजार तो रहता ही है …जल्दी फॉर्म में लौटे और ब्लॉगजगत में हलचल मचाये …वैसे तो बहुत हलचल है…मगर दूसरी किस्म की …!!

  21. December 21, 2009 at 4:26 am

    स्वास्थ्य लाभ ज़रूरी है सुरेश जी ईश्वर आपको सदा स्वास्थ्य रखे फ़ार्म में तो आप सदा ही होते हैं

  22. December 21, 2009 at 4:46 am

    ब्लोग मित्र और पाठक ,….यानि की हम ….,एक दम तैयार बैठे हैं सुरेश भाई आऊट औफ़ फ़ौर्म होने के लिए …जब आप आएंगे फ़ौर्म में तो बांकियों का तो आऊट औफ़ फ़ौर्म होना स्वाभाविक ही है । जल्दी आईये ..ब्लोग्गिंग से जरूरी वाले कामों को निपटाने के बाद

  23. December 21, 2009 at 5:36 am

    आप फार्म से बाहर गए कब थे ? 🙂

  24. December 21, 2009 at 5:48 am

    भैया …आप फॉर्म में तो हैं ही….. और सच में आपसे मिलना नहीं हो पाया …इसका बहुत अफ़सोस है…..

  25. rohit said,

    December 21, 2009 at 7:00 am

    Dada i was realy missing u. daily i used to open to somthing new in ur post.

  26. December 21, 2009 at 7:42 am

    मैं असहमत हूं कि आप फार्म में लौटेंगे क्योंकि आप तो हमेशा फार्म में रहते हैं । बस आपके वापसी का इंतजार था।

  27. December 21, 2009 at 8:51 am

    और अधिक प्रखरता से आयें.

  28. cmpershad said,

    December 21, 2009 at 9:46 am

    अलाहाबाद और लखनऊ के अलावा कानपुर में भी शायद कुछ ब्लागर रहते हैं 🙂

  29. December 21, 2009 at 11:54 am

    हम भी जरा दिल्ली हो आए. साथ ही कुछ साथियों से मेल-मिलाप भी होगया. स्वास्थय संभालें.

  30. vishnu said,

    December 22, 2009 at 1:40 pm

    suresh jee aap lage rahiye…ye janab jo bhi hai main inka nam bhi nahi jaanna chahta ,kuch ese swarthi log hai jo desh ko kabhi ajaz dekhana nahi chahate..ye congress ke kutte hai jo congress ki dale hue tukado par hi palte hai .inhe roti bhi isiliye milti hai ki hinduo ka jo samrthan kare usaka virodh karna hai.agar virodh nahi karenge to roti jo milna band ho jayegi.isliye aapse nivedan hai ki aap ese logo ki baaton par dhyan na de.are yaar jab hathi chalta hai to bahut saare kutte bhokate hai par isaka matlab ye nahi ki hathi unhe marna shuru kar de…aapka samarthan hum kar rahe hai naa……aap chalu rahiye


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