>उगवला चंद्र पुनवेचा: मराठी नाट्य संगीत का एक दुर्लभ गीत

>बहुत दिनों के बाद ही सही पर जो कुछ आप सुनेंगे, आनंदित हुए बिना नहीं रह पायेंगे। यह एक मराठी नाट्य संगीत का गीत है। इसे गाया है बकुल पण्डित ने। और १९४६ में प्रदर्शित हुए नाटक पाणिग्रहम में गाया जाता था। आप भाषा भले ही ना समझ पायें लेकिन आपको इस गीत को सुनने के बाद एक अलग तरह का सुकून मिलेगा।

गीत: उगवला चंद्र पुनवेचा
संगीत: श्रीनिवास काले
नाटक: पाणिग्रहम
गायिका: बकुल पण्डित

http://www.divshare.com/flash/playlist?myId=9946548-ec0

उगवला चंद्र पुनवेचा
मम हृदयीदरिया
उसळला प्रीतिचा

दाहि दिशा कशा खुळल्या
वनविनी कुमुदनि फुळल्या
नववधु अधिर मनी जाहळ्या
प्रणयरस हा चहुकड़े
वितळला स्वर्गिचा

डाउनलोड कड़ी

अक और सुन्दर मराठी गीत सुनने के लिए तैयार रहिए। वह आज की पोस्ट के गीत से भी ज्यादा मधुर होगा।
🙂

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7 Comments

  1. December 28, 2009 at 8:01 pm

    >बहुत सुंदर ओर मधुर आवाज,ऎसे भजन रुपी गीत हम बचपने मै रेडियो पर सुबह सुबह सुनते थे. धन्यवाद

  2. December 28, 2009 at 9:25 pm

    >आपके समस्त परिवार को , नव – वर्ष की मेरी हार्दिक शुभ कामनाएंआप सदा मधुर गीत चुन चुन कर सुनवाते हैं आभार ..स्नेह सहीत, – लावण्या

  3. December 29, 2009 at 6:23 am

    >सागर भाई, ऐसे गीत सुनवाकर आप लूट लेते हैं… 🙂

  4. Anonymous said,

    December 29, 2009 at 7:19 am

    >indu puri goswamiji ki tippani… मराठी गीत थाशब्द समझ में नही आये किन्तु गीत की मधुरता को महसूस कर रही थीउसकी कर्णप्रियता ने भाषा के बन्धनों से परे एक सुखद अनुभूति दीसंगीत किसी भाषा का मोहताज नहीशायद इसीलिए इसे ईश्वर के समकक्ष माना गया हैएक खूबसूरत गीत सुनने का अवसर दिया ,रिअली थेंक्सआपके ब्लॉग पर मेसेज नही हो पा रहा है .क्यों? नही मालूम .

  5. VINTAGE ERA said,

    December 29, 2009 at 11:44 am

    >Sagar bhai,Jai Ram ji ki !! Abhi abhi aapka post padha aur bahut achha laga. Marathi geet toh apun ko samajh nahi aaya , lekin sunkar bahut achha laga. Main bahut dino se online nahi aa paaya lekin aaj mere Gmail inbox mein aapka article dekhkar bahut khush hua. Aapko Aur Aapke Parivaar Ke Sabhi Sadasyon Ko Naye Varsh 2010 Ki Haardik Shubh Kaamnaaye !! – P A V A N

  6. Anonymous said,

    December 29, 2009 at 2:56 pm

    >really nice bhajan…dont understand the language but can feel the music.I am looking for one song for ages by mukesh ji.'Do roz mein wo pyar ka aalam guzar gaya, barbaad karne aaya tha barbaad kar gaya….'i would be greatful if you could post that please. I am sure other people would like it too. thankshimani kocharA very happy new year to you

  7. December 29, 2009 at 3:02 pm

    >धन्यवाद अनाम मित्रआपका पसंदीदा गीत मेरे संग्रह में है, परन्तु आपका मेल पता मेरे पास नहीं है। सो आप अगर यह टिप्पणी पढ़ रहे हों तो आपका मेल पता अगली टिप्प्णी में लिख दें; ताकि मुकेश जी वाला गीत आपको भेज दूं।बाद में मैं उस टिप्प्णी को मिटा दूंगा।


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