मालूम था कि चीनी निर्माण घटिया होता है, लेकिन इतना? (फ़ोटो माइक्रो पोस्ट)…… Poor Quality Chinese Products, bridges, buildings

कुछ माह पहले छत्तीसगढ़ में बाल्को कम्पनी की एक निर्माणाधीन चिमनी गिर गई थी, जिसमें कुछ मजदूर मारे गये थे। बाद में पता चला था कि उसका निर्माण चीन की एक कम्पनी कर रही थी। इन तस्वीरों को देखिये तब आप जान जायेंगे कि चीन का माल कितना घटिया होता है… भ्रष्टाचार में तो भारत चैम्पियन है, लेकिन चीन में भी यह इतना फ़ैला होगा कि कचरे, पोलीथीन और थर्माकोल से पुल बनने लगें, बड़ी-बड़ी इमारतों की नींव खोखले पाईपों के सहारे दलदली भूमि पर खड़ी हों… यकीन नहीं आता ना, आप खुद ही देखिये… चीन में ऐसा भी होता है… अब हमें राष्ट्रमण्डल खेलों की चिन्ता छोड़ देना चाहिये… जब चीन के ऐसे इंजीनियर बीजिंग ओलम्पिक आयोजित करवा सकते हैं तो हम इतने भी गये-गुज़रे नहीं हैं… 🙂

पुल टूटा तो अन्दर से ऐसा मलबा निकला

 
 
मकानों की हालत भी वैसी ही है, जैसी पुलों की, देखिये इसे

अब देखिये इस बिल्डिंग को जो ऐसे लेट गई है जैसे कभी खड़ी ही न थी, ऐसे ही बनाई हो… 🙂 
 

 
 
 
 
अब बताईये भला नींव ऐसे खोखले पाईपों से भरी होगी तो बिल्डिंग कैसे खड़ी रह सकेगी…

 
मजा आया हो तो पसन्द पर चटका लगाईये… और यदि आपका मोबाइल चीन का हो तो ठोक-बजाकर देख लीजिये कहीं उसमें से मिट्टी न टपक रही हो… 🙂
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30 Comments

  1. सुमो said,

    January 8, 2010 at 6:33 am

    हा, हा, हा, हाचीनी चमचों का क्या हाल होगा?चटका लगा दिया हमने, चटाक

  2. January 8, 2010 at 6:33 am

    🙂

  3. rohit said,

    January 8, 2010 at 6:40 am

    अच्छा है

  4. January 8, 2010 at 6:40 am

    हेहेहेहेमेरे पास एस एम् एस जोक आया थालड़का लड़की से : तुम चाइनीज़ क्यों दिखती हो?लड़की ; क्योंकि मरे पापा चाइनीज़ थे .लड़का : ओह! पर मैंने उन्हें देखा नहीं कभी !!लड़की : वो तो मेरे बचपन में ही चल बसे थे.लड़का : हाँ! सही है !!…. अब चाइना का माल आखिर कितने चलता !!!

  5. January 8, 2010 at 6:49 am

    nice post शुक्र है आप लोगों ने पाकिस्‍तान के अलावा बात तो की, लगता है चीन वाले अपनी दीवार से आगे नहीं सीख पाए, धन्‍यवाद

  6. January 8, 2010 at 6:54 am

    vaah kamaal ki khabar!! ;)))

  7. January 8, 2010 at 7:08 am

    :)माल भी चीनियों की ही तरह का है !

  8. January 8, 2010 at 7:10 am

    सही कहा…अब तो चीनी मोबाईल ना रे ना

  9. January 8, 2010 at 7:21 am

    सच मे कमाल की खबर है। धन्यवाद्

  10. January 8, 2010 at 7:51 am

    भाई हमें तो शीर्षक से लगा था आप शक्कर की बात कर रहे है , पर ये तो मामला चिंकी निकला !!!चीन पर पाकिस्तान भरपूर निर्भर है उसे देखना चाहिए की जो मिसाइल चीन ने उसे भेट की है कही उसमे तो मिटटी भर कर नहीं थमा दी है ???हमने पसंद का चटका चटाक से मारा है !

  11. January 8, 2010 at 8:33 am

    हाँ भैया हम भी भुगत रहे हैं चाइना मोबाइल लेकर, छः माह भी नहीं हुए हैं कि डबल सिम में से एक सिम का खाँचा खराब हो गया, दूसरा जब तक काम कर रहा है चलायेंगे फिर नया मोबाइल ले लेंगे।

  12. January 8, 2010 at 9:09 am

    "आप लोगों ने पाकिस्‍तान के अलावा बात तो की.."आप "लोगों" ने?कितने लोग इस चिट्ठे पर लिखते है, सुरेश भाई? 🙂

  13. January 8, 2010 at 9:28 am

    ये भी खूब रही!!

  14. the said,

    January 8, 2010 at 9:42 am

    अच्छी पोस्ट. हम मूर्खों को चेत जाना चहिए कि सस्ते के चक्कर में हम नकली, घटिया, ज़हरीला और खतरनाक सामान खरीद रहे हैं और अपने पैरों पर खुद कुल्हाडी मार रहे हैं. सस्ते चीनी मोबाइल से विकिरण का कितना ज़यादा खतरा है, इस पर भी रिचर्स होनी चहिए, वरना सस्ते माल के चक्कर में पीढियां तक बर्बाद हो जाएंगी.

  15. rohit said,

    January 8, 2010 at 9:47 am

    बंधू यह कोई हमारी अंजुमन नहीं है जो की बहुत सारे लोग चुरा चुरा के मटेरिअल को कॉपी पेस्ट करे . ये एक बुध्धिजीवी का ब्लॉग है यहाँ केबल सुरेश भाऊ के शोध के बाद का निचोड़ पोस्ट किया जाता है.

  16. January 8, 2010 at 10:36 am

    सुरेश भाऊ लगता है ये बेंगनी शर्ट वाला बेंगन खा-खा कर गिन्‍ती निनना भूल गया, हर पोस्‍ट के साथ पूंछ की तरह लगा हुआ आता है, फिर भी अपने को अलग मानता है, इसे गिन्‍ती गिननी है तो सर पर जूता मारके गिनने के तरीके से गिन ले पहले कमेंट वाले के सर पर पहला जूता फिर पता लग जाएगा आप लोग कितने हों, चीन की तरफ नजर डालने पर आपका धन्‍यवाद

  17. rohit said,

    January 8, 2010 at 10:53 am

    @ Mohammed Umar Kairanvi ऐसा है तो फिर तुझमे दोबार जूते मारने पड़ेंगे क्योंकि तुने दोवार टिपण्णी की है . लगता है तू जूते खाने का बहुत शोकिन है. रही बात इस ब्लॉग की तो ये ब्लॉग सुरेश भाऊ का है और बाकी लोग अपनी टिपण्णी दर्ज कर रहे है मात्र टिपण्णी करने से यह ब्लॉग सभी लोगो का नहीं हो जाता. जैसे कीघर में सभी आने वाले बाप नहीं होते( कैरानावी के बारे में नहीं मालूम की वोह क्या सोचता है ) उसी तरह हर टिपण्णी करने बाला ब्लॉग moderator नहीं होता

  18. January 8, 2010 at 10:55 am

    @ Mohammed Umar Kairanvi आप ने जो कहा है उसबात का सर पैर नहीं समझ आया बस इतना अनुमान है की संजय बैगाणी ने आप को कही मिर्चा घिसा है, और आप सकपका कर बडबडा रहे हो ! पाकिस्तान से आप का क्या लगाव है ये नहीं समझ आया,पकिस्तान में भी कोई अवध है क्या ? और चीन पर नज़र डालने के लिए आप धन्यवाद क्यों दे रहे हो क्या आप चीन के पर्यटन विभाग के पी आर ओ हो गए हो ???

  19. January 8, 2010 at 11:16 am

    सुरेश जी, एक फोटो देखकर लगा कि ब्रिज/मकान यूरिया से बना हुआ है. करप्शन सब जगह है. क्या भारत और क्या चीन. यहाँ हम यूरिया का इस्तेमाल दूध में करते हैं तो वे हमसे दो कदम आगे हैं और यूरिया से ब्रिज ही बना डालते हैं…..:-)

  20. January 8, 2010 at 12:33 pm

    अपने हिन्दुस्तान में चीन और पाकिस्तान की घुसपैठ.ऊपर के पोस्ट और टिप्पणियों को गौर से पढ़े…

  21. January 8, 2010 at 4:55 pm

    सुरेश जी की इस पोस्ट में देशभक्ति के जज्बें को पहचानिये। सुरेश जी की भावनाओं को नमन। मैं अक्सर आपको पढ़ता रहता हूं, मुझे लगता है आप जो लिखते है उसे जीते भी है।

  22. January 8, 2010 at 4:55 pm

    सुरेश जी की इस पोस्ट में देशभक्ति के जज्बें को पहचानिये। सुरेश जी की भावनाओं को नमन। मैं अक्सर आपको पढ़ता रहता हूं, मुझे लगता है आप जो लिखते है उसे जीते भी है।

  23. January 8, 2010 at 5:16 pm

    ऐसा भ्रष्टाचार तो तीसरी दुनिया के हर देश में है, अच्छा होगा की हम दूसरों की गलतियाँ गिनाना छोड़ खुद को थोडा सुधार लें. तारीफ करना होगी की चीनी इस घटिया माल के ही दम पर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात अर्थव्यवस्था बन बैठे हैं (सवा चौदह ख़राब डालर से अधिक), और हम कॉल सेंटर और सॉफ्टवेयर हब बनकर भी अपना निर्यात बमुश्किल पौने दो ख़राब डॉलर ही कर पाए हैं. चीन ने हमारे जैसे ही भ्रष्ट समाज और व्यवस्था के बावजूद ऐसी आर्थिक और सैन्य महाशक्ति बनकर दिखा दिया जिससे न सिर्फ उसके पडोसी बल्कि अमेरिका भी थर्राता है. पर हम कहाँ हैं विश्व पटल पर? अपने हथियार भी हम खुद नहीं बनाते, यहाँ तक की पढाई लिखाई और बाकी व्यापर और तकनीकी काम भी उधार ली हुई भाषा में करते हैं. फिर भी कहते हैं (पता नहीं क्यों) ईस्ट और वेस्ट इण्डिया इस द बेस्ट!!!

  24. January 8, 2010 at 5:42 pm

    खूब धोए हैं। बधाई।सच्ची बात है जी। चीन दुनिया को बेवकूफ़ बना रहा है।

  25. January 8, 2010 at 5:45 pm

    दिल को बहुत सुकून मिला ये सब देखकर कि कम से कम भारत में ही यह सब नहीं होता है, चीन इसमें भी भारत का बाप है 🙂

  26. Common Hindu said,

    January 8, 2010 at 5:52 pm

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  27. SHIVLOK said,

    January 9, 2010 at 2:04 pm

    Kairanavi is quite absurdHe has no understanding No need to publish his poor comment

  28. January 9, 2010 at 5:42 pm

    यार कोइ इस लेख की एक प्रति भारत का खानेवाले और चीन का गानेवाले कम्युनिस्टो को भी भेज दो. भाई संजय बेंगानी की प्रतिक्रया (दूसरी वाली)से १०१% सहमत हूँ.

  29. January 10, 2010 at 6:31 pm

    ये बात बिलकुल सही है चीन घटिया माल बना रहा है किन्तु केवल एशियन देशो के लिए और उसमें भी विशेषतः भारत. वह भारत में केवल रिजेक्टिड , एक्सपायर्ड और अपना घटिया माल ही भेजता है. किन्तु यु. एस., ब्रिटेन आदि देशों में उसके माल की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होती और उसका यहाँ काफी सारी चीजों में एकाधिकार है. चुकीं भारत की जनता गरीब है और सरकार अपना स्वाभिमान भी खो चुकी है तो विश्व का प्रत्येक देश भारत को बहुत हलके में ही लेता है. विदेशों में तो ये ही सोचते हैं कि भारतीय को एक थप्पड़ मारो तो दूसरा गाल आगे कर देगा और प्रत्यक्ष प्रत्येक बात में भारत उसका अनुसरण भी कर रहा है तो फिर कोई देश क्यों भारत को गंभीरता से लेगा.

  30. January 14, 2010 at 6:32 pm

    बिलकुल सही | पर Made in China से हम बच नहीं सकते | भारतीय कम्पनियां अब इलेक्ट्रोनिक्स, electricals… चीन मैं ही बनवाती है और भारत में packing करके Made in India का ठप्पा | मुझे भी विश्वास नहीं होता था – कम से २००६ में कम मैंने १० पंखे bajaj और अन्य कंपनियों के डीलर से ख़रीदे .. २००९ में ही लगभग सारे पंखों में कुछ ना कुछ खराबी आ गई | डीलर ने कहा पखों पे अब सिर्फ २ वर्ष की guarantee है | काफी खोज बिन के बाद पता चला की अन्दर का सामान made in china है |


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