YSR की पुत्री शर्मिला के पति अनिल कुमार उर्फ़ एवेंजेलिस्ट “बेंजामिन” और ईसाई धर्मान्तरण… YSR Family, Evangelism, Church in Andhra

जैसा कि अब लोग धीरे-धीरे जान चुके हैं कि आंध्र के दिवंगत मुख्यमंत्री “सेमुअल” राजशेखर रेड्डी एक “नकली रेड्डी” और असली पक्के एवेंजेलिस्ट ईसाई थे, फ़िलहाल उनका बेटा जगनमोहन तो फ़िलहाल केन्द्र में सोनिया की नाक में दम किये हुए है, उनके दामाद “बेंजामिन” अनिल कुमार भी एक एवेंजेलिस्ट ईसाई (कट्टर धर्म प्रचारक) हैं। दुःख की बात यह है कि शादी से पहले अनिल कुमार एक ब्राह्मण थे।

इस पोस्ट में प्रस्तुत वीडियो में अनिल कुमार बड़ी बेशर्मी से उनके ब्राह्मण से ईसाई बनने के बारे में बता रहे हैं, इस वीडियो की शूटिंग दक्षिण के किसी मन्दिर में की गई है और इसमें दिखाया गया है कि वे बचपन में मन्दिर में सोते थे और वहाँ की सेवा किया करते थे। अनिल कुमार बताते हैं कि उन्होंने बचपन में अपने माता-पिता से भगवान, पुनर्जन्म और संस्कृति के बारे में पूछा था, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक(?) जवाब नहीं मिला, जबकि जब वे जवान होकर चर्च में जाने और बाइबल पढ़ने लगे तभी उनके “ज्ञानचक्षु” अचानक खुल गये। हालांकि इस वीडियो की शूटिंग में मन्दिर दिखाने की कतई आवश्यकता नहीं थी, लेकिन फ़िर YSR परिवार की हिन्दू धर्म के प्रति घृणा कैसे प्रदर्शित होती? हिन्दुओं को नीचा दिखाना, उनके धर्म-परम्पराओं-संस्कृति की आलोचना करना और मजाक उड़ाना, यही तो “सेकुलरिज़्म” की पहली शर्त है।

YSR की बेटी शर्मिला, रिश्ते में अपने “मामा” अनिल कुमार नामक ब्राह्मण युवक पर तभी से फ़िदा थी जब वह उसे अमेरिका में मिली थी, भारत आकर उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई और YSR के प्रकोप से बचने के लिये दोनों ने भागकर शादी कर ली और वारंगल जिले में जाकर छिप गये। YSR इतने बड़े “सेकुलर” थे कि उन्हें ब्राह्मण जमाई चलने वाला नहीं था, इसलिये हैरान-परेशान शर्मिला ने भोले-भाले अनिल कुमार पर ऐसा जादू चलाया कि वे ईसाई बन बैठे।

 जब कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है तो उस नये धर्म के प्रति प्रतिबद्धता ज़ाहिर करने के लिये अत्यधिक धार्मिक बनने का प्रयास करता है, यही कुछ अनिल कुमार के साथ हुआ। “बेंजामिन” अनिल कुमार बनने के बाद जल्दी ही वे पक्के धर्म प्रचारक बन गये। वे जमकर “चंगाई सभाएं”(?) आयोजित करते हैं और सरकारी मदद पर आंध्र-तेलंगाना के गरीबों को फ़ुसलाकर ईसाई बनाने के काम में लगे हुए हैं। वीडियो के अन्त में आप देखेंगे किस तरह अनिल कुमार सिर पर हाथ रखकर जादूगरनुमा मंत्र आदि फ़ेरते हैं, किस तरह सभाओं में “बाहरी हवा से बाधित”(?) गरीबों पर “पवित्र जल” छिड़ककर उन्हें ठीक(?) किया जाता है आदि-आदि, लेकिन यही “कर्मकाण्ड” हिन्दू धर्मगुरु करें तो वह पिछड़ेपन और दकियानूस की श्रेणी में आ जाता है अर्थात यदि हिन्दू करे तो वह अंधविश्वास और जड़ता, लेकिन अनिल कुमार और YSR करे तो चंगाई और गरीबों का भला, “वारी जाऊं बलिहारी जाऊं ऐसे सेकुलरिज़्म पर…”।

वीडियो की सीधी लिंक यह है, http://www.youtube.com/watch?v=oF_Gz2WHorw

विश्व प्रसिद्ध तिरुपति-तिरुमाला मन्दिर जो कि विश्व का सबसे अधिक धनी मन्दिर है, वहाँ भक्तों-दर्शनार्थियों की लम्बी-लम्बी कतारें लगती हैं। अमूमन उन कतारों के बीच एक-दो महिलाएं “टाइम-पास” के नाम पर ईसाई साहित्य मुफ़्त बाँटते हुए दिखाई देती हैं, उत्सुकतावश उनके बारे में जानकारी लेने पर पता चलता है कि वे इसी तिरुपति मन्दिर की कर्मचारी हैं। अर्थात जो महिला तिरुमाला देवस्थानम की कर्मचारी है, जिसकी दाल-रोटी इस संस्थान के रुपये से चलती है, वह औरत उसी मन्दिर में भक्तों के बीच ईसाई धर्म के पेम्फ़लेट बाँट रही है… इससे बढ़िया बात मिशनरियों के लिये क्या हो सकती है। यही तो सेमुअल राजशेखर रेड्डी (जो कि “सेवन्थ डे एडवेन्टिस्ट क्रिस्चियन थे) की कलाकारी है। सेमुअल रेड्डी जैसे कई “सेकुलर” हैं जो हिन्दू मन्दिरों की सम्पत्ति पर अप्रत्यक्ष कब्जा जमाये बैठे हैं, आप सोचते हैं कि आपने मन्दिर में दान दिया है, जबकि असल में वह दान आंध्रप्रदेश सरकार के खाते में जाता है, और उस पैसे से मस्जिदों को अनुदान और ईसाईयों को यरुशलम जाने के लिये सब्सिडी दी जाती है…। एक बात बताईये, आप में से कितने लोग जानते हैं कि तिरुपति-तिरुमाला देवस्थानम में काम करने वाले 60 प्रतिशत कर्मचारी ईसाई हैं? मेरा दावा है कि अधिकांश लोग नहीं जानते होंगे… यही तो “सेकुलरिज़्म” है…



आंध्र-तेलंगाना में दशकों के निज़ाम के शासनकाल में भी जितने हिन्दू धर्म परिवर्तित करके मुस्लिम नहीं बने थे, उससे अधिक तो 10 साल में इस एक YSR परिवार ने हिन्दू से ईसाई बना दिये हैं, अब आपको समझ में आया होगा कि उनके शव को ढूंढने के लिये हेलीकॉप्टर, विमान, रॉकेट, उपग्रह, सोनिया-अमेरिका यूं ही नहीं बेचैन हो रहे थे। यही तो दिल्ली की “मैडम” का जलवा है, जिनके गीत गाने में हमारा “भाण्ड-गवैया मीडिया” दिन-रात लगा रहता है, कोरस में साथ देने के लिये सेकुलर पत्रकार और सेकुलर ब्लॉगर तो हैं ही…

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नोट – मैंने एक बार http://www.Scribd.com पर धर्म परिवर्तन विषय पर अमेरिका में प्रदान की गई एक Ph.D. देखी थी, लेकिन उसका लिंक मुझे कहीं मिल नहीं रहा। उस Ph.D. थेसिस के Content (विषय सूची) में “धर्म परिवर्तन कैसे करवाया जाता है…”, “धर्म परिवर्तन हेतु आसान लक्ष्य कैसे ढूंढे जायें…”, “भारत तथा अन्य विकासशील देशों में धर्म परिवर्तन का क्या स्कोप है…” आदि बिन्दु दिये हुए हैं। इस थीसिस को मैं “सेव” करना भूल गया, यदि किसी सज्जन को वह Ph.D. दिखे या मिले तो उसकी लिंक भी अपनी टिप्पणी में चेप दें, ताकि सभी को पता चले कि उधर धर्म परिवर्तन पर डॉक्टरेट भी मिलती है जबकि “मूर्ख हिन्दू” अभी भी सोये हुए हैं… क्योंकि उनके घर में “सेकुलर” गद्दार भरे पड़े हैं। कभी भी कोई कहे कि मैं “सेकुलर” हूं, तब तड़ से जान जाईये कि वह असल में कहना चाहता है कि “मैं हिन्दू विरोधी हूं…”।

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23 Comments

  1. January 11, 2010 at 8:18 am

    "मन्दिर में दान दिया है, जबकि असल में वह दान आंध्रप्रदेश सरकार के खाते में जाता है, और उस पैसे से मस्जिदों को अनुदान और ईसाईयों को यरुशलम जाने के लिये सब्सिडी दी जाती है…। "यह बात भोले हिन्दुओं को हजम नहीं होगी, मगर यह सत्य है. आंध्र में ईसाईकरण अद्भूत गति से बढ़ा है. क्षोभ है. दुख है.

  2. January 11, 2010 at 8:34 am

    भोले भाले हिन्दू बेचारे कब जागेंगे और सेकुलर के फर्जी आडम्बर से बहार हो कर अपनी अस्मिता की रक्षा करेंगे ? क्या अधोवस्त्र तक छिन जाने के बाद ???

  3. January 11, 2010 at 9:22 am

    nice post

  4. anna said,

    January 11, 2010 at 10:28 am

    Q: You are stuck in an elevator with a tiger, a lion and a proki. You have a gun with just two bullets in it. What do you do?A: Shoot the proki twice to make sure he''s dead

  5. January 11, 2010 at 11:46 am

    अन्ना जी हमारे हिन्दू भाई तो और भोले है, वे पहले तो एक फायर कर के चेक करेंगे की बन्दूक चल भी रही है की नहीं और दूसरा "हवाई फायर" सचेत करने के लिए करेंगे!

  6. January 11, 2010 at 12:25 pm

    Kya kaha jaay…….Bahut bahut aabhaar aapka tathy ko prakaash me laane ke liye…….

  7. January 11, 2010 at 12:38 pm

    अब यह देख कर जीसस के प्रति श्रद्धा न खत्म हो जाये! 😦 जीसस महान व्यक्ति थे पर उनका ऑर्गेनाइज्ड धर्म उन्हे बौना बना देता है!

  8. January 11, 2010 at 12:41 pm

    जो है सो है लेकिन तिरुपति-तिरुमाला देवस्थानम में काम करने वाले 60 प्रतिशत कर्मचारी ईसाई हैं चौकाने वाला तथ्य है . खाओ हमरा गाओ हैलुलुय्या कहां तक सच है लोग कहते भारत मे जितने मुसलमान है अगर उतने ईसाई हो जाये तो हिन्दु खतम हो जायेन्गे

  9. January 11, 2010 at 1:10 pm

    धीरु भाई, आप एकदम सही कह रहे हैं…। मेरे ब्लाग को पढ़कर चुपचाप पतली गली से कलटी मारने वाले सेकुलर ब्लागरों के सामने एक चैलेंज फ़ेंकता हूं कि – ईसाई बहुल मिजोरम अथवा नागालैण्ड में किसी हिन्दू को मुख्यमंत्री बनवाकर दिखाओ… या फ़िर मुस्लिम बहुल कश्मीर में हिन्दू मुख्यमंत्री बनवाकर दिखाओ… भले न बनवाओ ऐसी मांग ही करके दिखाओ…। हम तो हिन्दू बहुल महाराष्ट्र में अन्तुले को तथा हिन्दू बहुल केरल में एके एंटोनी को झेल चुके हैं… यदि वाकई असली सेकुलर हो और जिगर-गुर्दे में दम है तो मिजोरम और कश्मीर में हिन्दू मुख्यमंत्री बनवाकर दिखा दो… मान जायेंगे कि वाकई सेकुलरिज़्म जिन्दा है इस देश में… लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि जो भी "सेकुलरिज़्म" नाम का गोबर भारत में भरा पड़ा है, वह नकली और घृणित है…

  10. January 11, 2010 at 1:11 pm

    भारत मे जितने मुसलमान है अगर उतने ईसाई हो जाये तो हिन्दु खतम हो जायेन्गे….कुए में गिरो या खाई में…मरना तो है ही.

  11. January 11, 2010 at 1:44 pm

    ब्लॉग आलेखक व उपरोक्‍त सभी टिप्पणियों से शत-प्रतिशत सहमत. इन सब बातों को सुन-पढ-जानकर क्षोभ व कुंठाग्रस्त हो जाता है मन ! क्या होगा इस देश का? आखिर हम हिंदू अर्थात्‌ भारतीय अपने अतीत से कुछ सीखते क्यों नहीं? सामाजिकता-राष्ट्रीयता की बात करने वाले हम लोग इन मुद्दों पर इतने वैयक्‍तिक क्यों हो गये हैं? केवल इसलिए तो हम इतने ज्यादा निर्वीर्य नहीं हो गए हैं कि हमारा वर्तमान इन सब मुद्दों से ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहा?? एक समय आएगा जब हमारा भविष्य, हमें अर्थात्‌ अपने पुरखों को गाली देगा कि हमनें क्यों, उनको, उन्हीके देश में फिर दोयम दर्जे का बना दिया !! सोनिया और उस जैसों की छिपी हुई मानसिकता (हालांकि बुद्धिजीवियों के बीच यह बात गुप्त नहीं है कि मैडम का एकमेव पुनीत कार्य- "इस सहस्राब्दि में एशिया को इसाई बनाना है-पोप जॉन पॉल के दीवाली के दिन भारत में दिया गया वक्तव्य", भारत को इसाईमय बनाना है) को हम भारतीय समझ कर भी क्यों नहीं समझ पा रहे हैं??

  12. January 11, 2010 at 4:36 pm

    सटीक आलेखआठवीं पसंद अपुन की है गुरु

  13. January 11, 2010 at 5:59 pm

    …आदरणीय सुरेश जी,मुझे गर्व है कि मैं हिन्दू हूँ, मेरा हिन्दू होना ही मेरी सोच को इतनी व्यापकता देता है कि मैं आप द्वारा कभी भी कोई कहे कि मैं "सेकुलर" हूं, तब तड़ से जान जाईये कि वह असल में कहना चाहता है कि "मैं हिन्दू विरोधी हूं…"। कह कर दुत्कारे जाने के बावजूद भी स्वयं को सेकुलर मानने और कहलाने में भी मुझे अपार हर्ष अनुभव होता है।हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन पर आपकी चिंता वाजिब है। पर बताइये…विश्व प्रसिद्ध तिरुपति-तिरुमाला मन्दिर जो कि विश्व का सबसे अधिक धनी मन्दिर है, वहाँ भक्तों-दर्शनार्थियों की लम्बी-लम्बी कतारें लगती हैं। अमूमन उन कतारों के बीच एक-दो महिलाएं "टाइम-पास" के नाम पर ईसाई साहित्य मुफ़्त बाँटते हुए दिखाई देती हैं, उत्सुकतावश उनके बारे में जानकारी लेने पर पता चलता है कि वे इसी तिरुपति मन्दिर की कर्मचारी हैं। अर्थात जो महिला तिरुमाला देवस्थानम की कर्मचारी है, जिसकी दाल-रोटी इस संस्थान के रुपये से चलती है, वह औरत उसी मन्दिर में भक्तों के बीच ईसाई धर्म के पेम्फ़लेट बाँट रही है…अगर यह सच है तो हजारों पुजारी और भक्त चुप क्यों रहते हैं? मैं तो इसे उनकी कायरता ही मानूंगा, यदि मैं मंदिर की कतार में खड़ा हूं और मुझे कोई ऐसा लिटरेचर दे तो निश्चित मानिये बबाल हो कर रहेगा।आप द्वारा मांगा गया scribd.com की थिसिस का लिंक यह रहा । बधाई का हकदार तो बनता हूँ मैं ?इस लिंक को ढूंढते समय एक और लेख (जिसे सभी को पढ़ना चाहिये) पर नजर पड़ी, यह षड़यंत्र काफी गहरा है… सावधान रहने की जरूरत है।

  14. flare said,

    January 12, 2010 at 3:54 am

    I think Christians better enjoy Hinduism than real Hindus, just have a look (watch & listen closely: they are doing kirtan):1) http://www.youtube.com/watch?v=XuMiBUK0Vyk2) http://www.youtube.com/watch?v=f5iWy9m7wjQ&feature=related

  15. January 12, 2010 at 6:21 am

    प्रवीण भाई, 1) कई मुद्दों पर मेरे और आपके विचार काफ़ी मिलते हैं यह पहले भी साबित हो चुका है, सिर्फ़ इस एक मुद्दे को छोड़कर, और इसमें कुछ भी गलत नहीं है, यह तो होता रहता है। यदि कोई "सच्चा" सेकुलर है तो उसे दुत्कारे जाने का सवाल ही नहीं है, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसे लोगों की बेहद कमी है…। लेख में उन विशिष्ट सेकुलरों को दुत्कारा गया है जो "जयचन्द" प्रवृत्ति वाले हैं। 2) इस थीसिस की लिंक उपलब्ध करवाने के लिये आप निश्चित ही धन्यवाद के पात्र हैं… वैसे जो थीसिस मैंने देखी थी वह ये नहीं है लेकिन विषयवस्तु में इसी से मिलती जुलती है। 3) सुन्दरम साहब के जिस लेख को आप सभी को पढ़वाकर सावधान करने की कोशिश कर रहे हैं हम भी उसी प्रयास में ब्लॉग के माध्यम से लगे हैं, बस दिक्कत ये है कि "सेकुलर" लोग हिन्दुओं को सावधान होने ही नहीं देना चाहते… 🙂 न खुद कुछ करते हैं, न ही करने वाले को प्रोत्साहन देते हैं… यही देश का दुर्भाग्य है, जो हम सबको ले डूबेगा, पर तब बहुत देर हो चुकी होगी…। आपके कमेण्ट और लिंक्स का धन्यवाद… फ़िलहाल मैं "बुद्धिजीवी" ब्लागरों (मैं बुद्धिजीवी नहीं हूं) से अपने मिजोरम और कश्मीर के हिन्दू मुख्यमंत्री सम्बन्धी सवाल के जवाब का भी इन्तज़ार कर रहा हूं…

  16. January 12, 2010 at 11:53 am

    hinduon ke khatm hone ke bAd kya karenge ye secular.

  17. January 12, 2010 at 3:03 pm

    वहाँ भक्तों-दर्शनार्थियों की लम्बी-लम्बी कतारें लगती हैं। अमूमन उन कतारों के बीच एक-दो महिलाएं "टाइम-पास" के नाम पर ईसाई साहित्य मुफ़्त बाँटते हुए दिखाई देती हैं, उत्सुकतावश उनके बारे में जानकारी लेने पर पता चलता है कि वे इसी तिरुपति मन्दिर की कर्मचारी हैं। हिन्दू दर्शनार्थी क्यों चुप रहते हैं? क्या कोई वेटिकन देखने आए लोगों में किसी और धर्म का साहित्य बांटे और पर्यटक उसे बिना विरोध चुपचाप नज़रंदाज़ कर दें, क्या ऐसा संभव है?

  18. January 12, 2010 at 6:09 pm

    बिल्कुल खरी बात है। शुक्रिया।

  19. January 13, 2010 at 6:54 am

    टिप्पणी में जो लिंले दी गई है, उसकी सामग्री अंग्रेजी में है. भारत की भोली जनता कैसे समझेगी जी? ऐसी सामग्री भारतीय भाषाओं में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होनी चाहिए. प्रयास करने होंगे. आओ हाथ मिलाएं.

  20. January 13, 2010 at 7:39 am

    हमारा असली हिन्दू होना ही हमारे लिये ही घातक रहा है, सब चलता है की सोच ने ही हमरा सबसे अधिक अहित किया है। यदि कोई एक मारे तो हमें दो मरना चाहिये का पाठ हमारी संस्कृति हमें पढाना शुरु कर दे तो एक पीढी ही काफ़ी है, इन सेकुलरों को सबक सीखाने के लिये। कोई भी हिन्दू परम्परा चाहे कितनी भी लोकोपयोगी क्यों न हो भगवाकरण की श्रेणी में आती है। पाठ्यक्रम में उर्दू को सम्मलित करना जो आज कि दूसरे देश की राष्टृ भाषा है जिसका वोट बैंक बनाने के सिवा हमारे देश मे या विश्व मे कोई लाभ नही है सम्प्रदायिकता की श्रेणी में नही आता। क्या है ये? जब तक हम एक हाथ में माला के साथ दूसरे में भाला नही उठायेंगे तब तक कुछ नही होने वाला

  21. January 13, 2010 at 7:51 am

    एक हाथ में माला एक हाथ में भाला – सही कहा !

  22. January 14, 2010 at 9:54 am

    to call hindu innocent is hight of stupidity.who is willingly drinking poison is not be innocent.who made sonia a queen just by the hindus like laloo and mulayam now they are no more apple of her eyes.likewise we hindu made YSR CM so we are reaping the harvest and will reap more.

  23. January 14, 2010 at 6:42 pm

    क्रिस्चन मिसनरी जैसे दुश्मन तो जो कर रहे हैं सो कर रहे हैं, पर सेकुलर हिन्दुओं को क्या कहा जाए? ऐसे हिन्दुओं की कमी नहीं है जो इस पोस्ट को पढ़कर सीधा जवाब देगा – "ये सब बकवास और झूठ है" | पता नहीं कब हिन्दुओं की आँखें खुलेगी ? समय रहते आँखें खुले तो कुछ बात बन सकती है वरना तो … तब पछताए हॉट क्या जब चिड़िया चुग गई खेत !


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