क्या “वन्देमातरम” के बाद अब “जन-गण-मन” भी साम्प्रदायिक बनने जा रहा है? (एक माइक्रो पोस्ट)

यह एक सामान्य सा लेकिन जरूरी सरकारी प्रोटोकॉल है कि उस प्रत्येक शासकीय कार्यक्रम में जिसमें प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल अध्यक्षता कर रहे हों उस कार्यक्रम में “जन-गण-मन” गाया भले न जाये लेकिन उसकी धुन बजाना आवश्यक है। हाल ही में केरल के त्रिवेन्द्रम में 3 जनवरी को 97 वीं भारतीय साइंस कांग्रेस का उदघाटन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था। इस साइंस कांग्रेस के उदघाटन समारोह में देश-विदेश के बड़े-बड़े भारतीय वैज्ञानिकों ने शिरकत की थी। केरल दौरे पर प्रधानमंत्री ने केरल प्रदेश कांग्रेस के दो अन्य कार्यक्रमों में भी उपस्थिति दर्ज करवाई थी।

लेकिन अत्यन्त खेद के साथ सूचित किया जाता है कि तीनों ही कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत नहीं बजाया गया, बाद वाले दोनों कार्यक्रम भले ही पार्टी स्तर के हों (लेकिन यह पार्टी भी तो अपनी 125 वीं सालगिरह मना रही है, और जन-गण-मन तथा वन्देमातरम की ही रोटी खा रही है अब तक), लेकिन पहला कार्यक्रम एक शासकीय, अन्तर्राष्ट्रीय और बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम था।

मीडिया के सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम आयोजकों को प्रधानमंत्री ऑफ़िस से यह निर्देश मिले थे कि इस कार्यक्रम में जन-गण-मन नहीं बजाया जाये, क्योंकि कई कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत को जो पर्याप्त सम्मान मिलना चाहिये वह नहीं मिल पाता। चकरा गये ना??? यानी कि भारतीय साइंस कांग्रेस के कार्यक्रम को प्रधानमंत्री ऑफ़िस ने एक सिनेमाघर में उपस्थित टपोरी दर्शकों के स्तर के बराबर समझ लिया, जहां राष्ट्रगीत को सम्मान नहीं मिलने वाला? अर्थात जिस अन्तर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के बड़े-बड़े राष्ट्रीय नेता, वरिष्ठ नागरिक, सम्माननीय वैज्ञानिक तथा केरल के उच्च प्रशासनिक अधिकारी मौजूद हों, वहाँ राष्ट्रगीत को उचित सम्मान नहीं मिलता??? कैसी अजीब सोच है…

इससे कई सवाल अवश्य उठ खड़े होते हैं, जैसे –

1) इस घटना के लिये किसे जिम्मेदार माना जाये, प्रधानमंत्री कार्यालय को या कार्यक्रम आयोजकों को?

2) क्या इस मामले में राष्ट्रगीत के अपमान का केस दायर किया जा सकता है? यदि हाँ तो किस पर?

3) समाचार पत्र, ब्लॉग में प्रकाशित इस समाचार पर क्या कोई न्यायालय स्वयं संज्ञान लेकर सम्बन्धितों को नोटिस दे सकता है?

4) वन्देमातरम के बाद अब जन-गण-मन को किसके इशारे पर निशाना बनाया जा रहा है?

यदि इसमें कोई साजिश नहीं है तब क्यों इस गलत और आपत्तिजनक निर्णय के लिये अब तक किसी अधिकारी, जूनियर मंत्री, आयोजकों आदि में से किसी को सजा नहीं मिली? राहुल महाजन जैसे छिछोरे और दारुकुट्टे का स्वयंवर दिखाते सबसे तेज चैनल देश के अपमान की इस खबर को क्यों दबा गये?

वन्देमातरम तो “साम्प्रदायिक”(?) बना ही दिया गया है, क्या गोरे साहबों की वन्दना करने वाला यह गीत भी जल्दी ही “साम्प्रदायिक” बनने जा रहा है? सरस्वती वन्दना साम्प्रदायिक है, वन्देमातरम साम्प्रदायिक है, दूरदर्शन का लोगो “सत्यं शिवं सुन्दरम्” भी साम्प्रदायिक है, पाठ्यपुस्तकों में “ग” से गणेश भी साम्प्रदायिक है (उसकी जगह गधा कर दिया गया है), रेल्वे में ई अहमद ने नई ट्रेनों की पूजा पर रोक लगा दी है, इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णय कि “गीता” को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाये, भी साम्प्रदायिक है। क्या एक दिन ऐसा भी आयेगा कि जब “जय हिन्द” और तिरंगा भी साम्प्रदायिक हो जायेगा?

http://www.organiser.org/dynamic/modules.php?name=Content&pa=showpage&pid=327&page=4

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31 Comments

  1. January 15, 2010 at 12:22 pm

    शीघ्र ही !

  2. January 15, 2010 at 12:45 pm

    आगे -आगे देखिये जैसे आजकल सरकार की तरफ से मटर की दाल खाने के विज्ञापन निकल रहे है, उसी तर्ज पर अगर यह विज्ञापन भी निकल जाए कि दिन में ५ बार पश्चिम दिशा की तरफ मुख करके उठ-बैठक करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए इन हमारे सेक्युलरो को 🙂

  3. January 15, 2010 at 1:15 pm

    विचारणीय सटीक पोस्ट. …. कुछ भी संभव है …

  4. January 15, 2010 at 1:37 pm

    शायद कुछ दिन बाद अपने बाप क नाम लिखना भी इन सेक्यूलर को हडेगा . क्योकी इनके बाप कौन है यह तो इनकी मा को भी नही पता

  5. रचना said,

    January 15, 2010 at 1:46 pm

    aap ki laekhni aur research ki taarif karti hun har post padh kar यदि इसमें कोई साजिश नहीं है तब क्यों इस गलत और आपत्तिजनक निर्णय के लिये अब तक किसी अधिकारी, जूनियर मंत्री, आयोजकों आदि में से किसी को सजा नहीं मिली? राहुल महाजन जैसे छिछोरे और दारुकुट्टे का स्वयंवर दिखाते सबसे तेज चैनल देश के अपमान की इस खबर को क्यों दबा गये?kyuki rahul mahajan kaa swayambar sponserd haen aur national anthem sponserd nahin hot haen naa !!!!

  6. January 15, 2010 at 1:56 pm

    ये मामला हिन्दू से जुड़ा कम देश से जुड़ा ज्यादा है, ये एक दुसरे पाकिस्तान की मांग बनाने का रास्ता है और साथ ही देश में देशद्रोही की फसल उगाने का यूरिया उत्पादन का प्रयास है! सेकुलरों ने भारत भूमि को मूरख भूमि बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लगता है हम हिन्दुओ को षड्यंत्रकारियों से पहले सेकुलर जयचंदों से लोहा लेना पड़ेगा ये साले ज्यादा बड़ी मुसीबत है !

  7. January 15, 2010 at 2:24 pm

    देश को इस्लामी राष्ट्र बनाने का प्रयास है जो हिन्दुओं को नहीं दिखाई देता.

  8. January 15, 2010 at 2:49 pm

    बढ़िया पोस्ट. एक चीज बस सुधार लें जन गण मन को राष्ट्रगीत की बजाए राष्ट्रगान कर लें. वन्दे मातरम हमारा राष्ट्रगीत है(National Song), जन गण मन राष्ट्रगान(National Anthem).

  9. January 15, 2010 at 2:53 pm

    पहले मेरे मन में भी राष्ट्रगान और राष्ट्र ध्वज के लिए सम्मान था. पर हमारा राष्ट्रगान एक विदेशी अधिनायक की स्तुति में लिखा गया गया स्वागत गीत मात्र है, जिसके हिंदी अनुवाद को जाहिल कांग्रेसियों ने राष्ट्रगान का दर्जा दे डाला. भारत का राष्ट्रध्वज तो मुस्लिम, इसाई तुष्टिकरण की, और हिन्दू (पढ़ें गाँधीवादी) कायरता की जीती जगती मिसाल है. मैं राष्ट्रवादी भारतीय होने के नाते इन दोनों को नकारता हूँ. पर जैसे मैं कभी जबरजस्ती नमाज़ की मुद्रा में झुकना , या मांसाहार करने पर मजबूर किया जाना पसंद नहीं करूँगा. वैसे ही अपनी मर्ज़ी के खिलाफ राष्ट्रगान को सम्मान देने मजबूर किया जाना भी मुझे गलत लगता है. और मैं कोई टपोरी नहीं हूँ, न कोई छद्म सेक्युलर, पर हर चीज़ का समय होता है. कम से कम सिनेमाहाल में मुझे मजबूर न किया जाए. सिनेमाहाल में खड़े हो जाने से ही क्या कोई देशभक्त साबित हो जाएगा? मैं जानबूझकर पूरे राष्ट्र गान के दौरान अस्थिर रहता हूँ, कांग्रेसी अधिनायकवादी राष्ट्रगान के विरोध में और जबरन खड़े किये जाने के विरोध में. अगर मज़बूरी में सम्मान देना ही देशभक्ति और भारतीय होने का तकाजा है तो मैं राष्ट्रवादी नहीं हूँ. समय आ गया है की हम 'मार मार मुसलमान बनाने' की मानसिकता से निकलें और देश की असली समस्याओं जैसे पैसा खाओ संस्कृति, हर तरफ गंदगी और कचरा, बिजली पानी और यातायात के साधनों की कमी, राजा रानी वाद, वंशवाद, जनसँख्या, अशिक्षा, पिछड़ेपन, बेरोजगारी, दलाल नेताओं का कुछ करें.

  10. January 15, 2010 at 2:59 pm

    "पर हमारा राष्ट्रगान एक विदेशी अधिनायक की स्तुति में लिखा गया गया स्वागत गीत मात्र है, जिसके हिंदी अनुवाद को जाहिल कांग्रेसियों ने राष्ट्रगान का दर्जा दे डाला." लेकिन वो विदेशी अधिनायक कौन है? व्यक्ति विशेष या पूरा ब्रिटिश साम्राज्य?

  11. January 15, 2010 at 3:01 pm

    भारत का राष्ट्रध्वज तो मुस्लिम, इसाई तुष्टिकरण की, और हिन्दू (पढ़ें गाँधीवादी) कायरता की जीती जगती मिसाल है.भारत का राष्ट्रध्वज किस प्रकार से तुष्टीकरण की मिसाल है? जरा विस्तार से बताएंगे.

  12. January 15, 2010 at 3:14 pm

    अंकुर भाई, है तो विदेशी अधिनायक की स्तुति में ही, अब भले ही यह सुनने में बुरा लगे… मुख्य मुद्दा ये है कि इसे देश का अपमान माना जाये अथवा नहीं? यदि हां तो सजा किसे मिलनी चाहिये यदि नहीं, तो क्यों नहीं?और PM Office से ऐसे निर्देश किसने जारी किये? इस पर बहस फ़ोकस हो तो ज्यादा अच्छा…

  13. harendra said,

    January 15, 2010 at 5:03 pm

    ye gan bachpan se lekar ajtak mujhe kabhi pasand to nahi aya aur na hi rastragan ke layak hi laga par ye kisi videshi ke stuti me hai aisa iske arth se to nahi lagta hai.kripya iske bare me jankari den.ar rahi bat desh ki to desh ka koi kuch nahi bigad sakta.jitna bigadna tha so bigad liya.ab in cecullar ar congressiyon ke din pure ho gaye hain.ab yahan ke yuva desh ki bagdor apne hathon me leke ek bilkul naye bharat ke nirman me lag chuke hain.jald hi apne Bharat ka naya chehra duniya dekhegi..

  14. January 15, 2010 at 5:16 pm

    …आदरणीय सुरेश जी,Ab inconvenienti ने राष्ट्रगान की अनिवार्यता के बारे में वह सब कह दिया जो मैं कहना चाहता था,हमारा राष्ट्रगान एक विदेशी अधिनायक की स्तुति में लिखा गया गया स्वागत गीत मात्र है। १००% सहमत…यह अधिनायक शायद वही ब्रिटिश सम्राट था जिसके आगमन पर गेटवे ऑफ इंडिया और इंडिया गेट बनाये गये थे…और कवि अंग्रेजों का प्रिय व कृपापात्र महापुरुष थे।परन्तु राष्ट्रध्वज के बारे में Ab inconvenientiगलत धारणा रखते हैं, शायद अज्ञानवश…उनको सलाह कि हमारे ध्वज का इतिहास पढ़ें…

  15. January 15, 2010 at 6:04 pm

    आगे आगे देखिये होता है क्या, ये सब तमाशा देख परेशान होने से क्या?इसी से अब हमने कहना शुरू कर दिया जय भीम जय भारत, कोऊ हमाओ का उखारत?जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

  16. January 15, 2010 at 7:34 pm

    क्या बताऊं भाऊ इतना गुस्सा आता है कि……………… … ………………… ।वैसे गोदियाल जी की भी बात सही लगती है।

  17. January 16, 2010 at 12:30 am

    अत्यंत क्षोभनीय है….और क्या क्या होगा तुष्टिकरण के चलते

  18. January 16, 2010 at 3:21 am

    "जन गण मन …" के राष्ट्रगान बन जाने को मैं भी गांधीवादी कांग्रेसियों की मूर्खता, मूर्खता क्या षड़यन्त्र समझता हूँ। किन्तु जब तक यह राष्ट्रगान है तब तक तो उसको सम्मान देना ही होगा। वह सम्मान "जन गण मन …" का नहीं बल्कि राष्ट्रगान का है। जरूरत है तो सर्वसम्मति से राष्ट्रगान के वास्तविक अधिकारी को राष्ट्रगान बनाने की।एक प्रश्न यह भी उठता है कि आखिर क्यों राष्ट्रगान को पर्याप्त सम्मान नहीं मिलता? राष्ट्रगान के प्रति सम्मान की भावना क्यों खत्म हो रही है लोगों के मन से? राष्ट्रगान के प्रति सम्मान की भावना जागृत करने के बदले राष्ट्रगान को ही न बजवाना क्या उचित है?

  19. January 16, 2010 at 5:20 am

    जहाँ तक मुझे ज्ञात है राष्ट्रगीत जन-गण-मन है और जिसे राष्ट्रगीत होना चाहिए था, हिन्दुओं की कायरता के कारण जो राष्ट्रगान है वह है, वन्दे-मातरम. और भाईश्री किसने कहा "जय-हिन्द" साम्प्रदायिक नहीं है? दो-चार साल की बात है, आप भी मान जाओगे.

  20. January 16, 2010 at 5:29 am

    जब तक हमारे यहाँ तुच्ची और गुलाम सरकार चलती रहेगी ऐसा कुछ भी होता रहेगा । हमारे यहाँ जो सरकार अभी चल रही है वह तो गुलामो की बनायी गयी है और गुलामो के ही इशारे पर नाचती है । आप ने इस तथ्य को सामने रखकर संभलने को मौका दिया है , आभार आपका ।

  21. January 16, 2010 at 6:19 am

    कॉमन वेल्‍थ गेम्‍स के लिए अधिनायक जय हो बजेगा। खूब जोर से बजेगा। चिन्‍ता न करें।

  22. January 16, 2010 at 6:30 am

    bharat ko kuch ho ya na ho in sab se sarkar ko kuch nahi hoga soniya ko gariya do dekho sarkar ki bhi sulag jayegi

  23. Jyoti Verma said,

    January 16, 2010 at 6:55 am

    वन्देमातरम तो “साम्प्रदायिक”(?) बना ही दिया गया है, क्या गोरे साहबों की वन्दना करने वाला यह गीत भी जल्दी ही “साम्प्रदायिक” बनने जा रहा है? सरस्वती वन्दना साम्प्रदायिक है, वन्देमातरम साम्प्रदायिक है, दूरदर्शन का लोगो “सत्यं शिवं सुन्दरम्” भी साम्प्रदायिक है, पाठ्यपुस्तकों में “ग” से गणेश भी साम्प्रदायिक है (उसकी जगह गधा कर दिया गया है), रेल्वे में ई अहमद ने नई ट्रेनों की पूजा पर रोक लगा दी है, इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णय कि “गीता” को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाये, भी साम्प्रदायिक है। क्या एक दिन ऐसा भी आयेगा कि जब “जय हिन्द” और तिरंगा भी साम्प्रदायिक हो जायेगा? ek din ye sab bhi hoga!! no wonder hum aap kuch nhi kar payenge kyoki ab kisi ko kuch fark nhi padta. media se kuch bhi ummid nhi hai .

  24. January 16, 2010 at 7:01 am

    जबतक जन-गण-मन हमारे देश का राष्ट्रगान है तबतक हमें उसका आदर करना चाहिए। राष्ट्र व्यक्तिगत पसन्द और नापसन्द से ऊपर की अवधारणा है। मनमोहन सिंह जो भी कर रहे हैं उसमें १० जनपथ का हाथ होना स्वाभाविक है। विदेशी नागरिकता वाली मैडम की राष्ट्रगान के प्रति जितनी श्रद्धा हो सकती है, उसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है।

  25. January 16, 2010 at 7:49 am

    कभी राष्ट्र भाषा का अपमान करने वाले के विरुद्ध भी कुछ लिख दिया करो मेरे कथित राष्ट्रवादी.

  26. January 16, 2010 at 7:54 am

    मान लीजिये भारत में दो तरह के व्यक्ति हैं.१. एक वो जो वन्दे मातरम गाता है और देश के सविंधान को नहीं मानता, भ्रष्टाचार करता है और देश के दुश्मनों से उसके सम्बन्ध भी हैं.२. दूसरा वो जो अपनी धार्मिक आस्था की वजह से वन्दे मातरम् नहीं गाता मगर देश के सविंधान को मानता है, भ्रष्टाचार नहीं करता और देश से इतना प्रेम करता है की उसके लिए जाना भी दे सकता है. तो दोनों में देशभक्त कौन हुआ

  27. SANJAY KUMAR said,

    January 16, 2010 at 8:20 am

    Khursheed Ahmed,What about a person involved in ursury (money lending), consumes liquors, recites poems in praise of that divine drine, eats pork, loves photography, have interest in painting that too of a living creatures, sings vocal songs, does not refrain from consuming electricity by illegal connections (BIJLI KI CHORI : CHORI a grave offence in islam)HOWEVER, HIS RELIGIOUS SENTIMENTS COMES ONLY IN A WAY OF SINGINING VANDE MATARAM"

  28. January 16, 2010 at 11:12 am

    The activities you described are bigger crime in Islaam and there is a hard punishment for it. But worshipping other than a single god are biggest crime in Islam.

  29. January 16, 2010 at 11:17 am

    @ खुर्शीद.संजय कुमार की टिप्पणी का जवाब आपको देना है. आपकी टिप्पणी का जवाब मैं देता हूँ..एक वो जो वन्दे मातरम गाता है और देश के सविंधान को नहीं मानता, भ्रष्टाचार करता है और देश के दुश्मनों से उसके सम्बन्ध भी हैं.वह देशद्रोही है. २. दूसरा वो जो अपनी धार्मिक आस्था की वजह से वन्दे मातरम् नहीं गाता…. वह देशद्रोही है.

  30. January 16, 2010 at 12:52 pm

    aur wo jo apni chetriya aastha ki wajah se hindi ka apman karta hai.usko kya kahenge.

  31. January 17, 2010 at 7:45 am

    apni chetriya aastha ki wajah se hindi ka apman karta hai.usko kya kahenge.उसको अच्छी सी भाषा में क्या कहते है, उसके लिए मेरे ब्लॉग पर सम्बन्धित पोस्ट देख लें. हम दो-गले नहीं है.


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