>क्या यह कांग्रेसियों का स्वांग नहीं है ?

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राजनीति में श्रेय का बड़ा महत्व है . किसी भी काम का श्रेय  छीनने की होड़ में कभी-कभी कुछ अच्छा काम भी हो जाया करता है . दो दशकों से भी अधिक समय तक मुंबई में ठाकरे की घिनौनी राजनीति ने कहर मचा रखी है . बड़े ठाकरे के बाद अब छोटे ठाकरे अपनी अलग पार्टी बना कर उछल-कूद कर रहे हैं . पहले लुंगी वालों की पुंगी बजाई अब भाइयों की बारी आई . गैर मराठियों को जम कर मारा पीटा गया . राज्य से लेकर केंद्र तक कांग्रेस और राष्ट्रवादी कोंग्रेस चुप रही . आज अचानक क्या हो गया जो गृहमंत्री देश की एकता -अखंडता को लेकर चिंतित हो गये . मीडिया में उनका ब्यान आने लगा कि भारतीय संविधान किसी भी भारतीय को कहीं भी बसने और काम करने की स्वतंत्रता देता है और केंद्र सरकार इसे सुनिश्चित करेगी . आखिर क्या वजह है ? साफा है कि संघ का इस मुद्दे पर आया ब्यान सरकार में खलबली मचा गया है . सोनिया ब्रिगेड घबरा गयी कि कहीं इसका श्रेय संघ के पास ना चला जाए …………. यहाँ तक तो ठीक है पर जनता कैसे पचा पाएगी गृहमंत्री के बयान को जब हाल हीं में अशोक चाहवान सरकार ने भाषावाद से ओत-प्रोत होकर मुंबई में टेक्सी परमिट का नया कानून लागू किया है . क्या गृह मंत्री और महारष्ट्र के मुख्यमंत्री का कृत्य आपस में विरोधाभाषी नहीं है ? क्या यह कांग्रेसियों का स्वांग नहीं है ? 
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