क्या इन्हीं पाकिस्तानियों के लिये मरे जा रहे हैं शाहरुख खान…?? Paki Players, IPL, Shahrukh Khan, Aman ki Asha, year after 26/11

18 Comments

  1. February 8, 2010 at 7:18 am

    सुरेश जी, यह सर्वविदित है, चाटुकारों को भी और चट्वाकारों को भी कि महज यह धंधे की बात है देश हित की नहीं ! लेकिन बस एक बात आपकी प्रसंशा में कहूंगा कि मुझे आपके शुरुआती शब्द बहुत पसंद आये, बिरले ही हिम्मत वाले ऐंसी खरी भाषा इस्तेमाल कर पाते है !

  2. February 8, 2010 at 7:34 am

    हम हर बात में पाक से कोसों आगे हैं, फ़िर उसके सामने यह गिड़गिड़ाना और बेशर्मी भरा तथाकथित गाँधीवाद किसलिये? यह तो है ही. साथ ही ध्यान दें, जब एक कुत्ता काटने को आता है तब गाँधीवाद भूल पत्थर उठा लेते हैं, यहाँ तो कुत्तों की पूरी फौज काटने को तैयार है और गाँधीवाद(?!!!) को रो रहे हैं!

  3. kunwarji's said,

    February 8, 2010 at 9:23 am

    मुझे विश्वाश नहीं हो रहा है के आप इतने सच्चे तथ्यों को इतना स्पष्ट कर के लिख रहे हो और वो भी ३ साल से,आज तक आप पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगवाया इन अमन-पसंद,(पता नहीं कैसे )धर्मनिरपेक्षो ने?आपको किसी विशेष सम्पर्दाय(वोट-बैंक) के विरूद्ध बोलने का अधिकार सरकारी सव्न्विधान ने नहीं दिया है!मै उम्मीद करता हूँ कि आप 'प्रतिबंध' लगने तक यूँ ही लिखते रहेंगे….कुंवर जी,

  4. February 8, 2010 at 9:48 am

    फिर भी तो हिन्दुओं की आंखे नहीं खुलतीं. अफसोस और अफसोस.

  5. February 8, 2010 at 10:19 am

    बढ़िया लेख | अच्छी जानकारी |परन्तु इन सब के लिए जिम्मेदार दोनों देशों के मूर्ख नागरिक और उसके बाद बाहरी दुनियावी ताकतें भी हैं | मसलन क्या कोई एशियाई देश यूरोप के किन्ही दो देशों के बीच फूट डालकर राज कर सकता है | कदापि नहीं इस मामले में पश्चिमी देश काफी समझदार हैं | पश्चिमी सवर्ण एशियाई शूद्रों पर राज करने में पिछली सदियों में कामयाब रहे हैं, अगर आगे बढ़ना है तो शूद्रों के गुणों को त्यागना होगा | लेकिन हम अपने आप को ज्यादा होशियार समझते हैं | जगत गुरु हैं भाई | किसकी हिम्मत है हमें सिखाये | अब कुछ नहीं सीखना, कुछ नहीं जानना | हम कुत्तों की तरह ही लड़ते रहेंगे |खुद के घर की गन्दगी के लिए हमेशा पूरी तरह से दूसरों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता |जैसा की आप बार-बार कहते ही हैं हमारे राजनेता, हमारा मीडिया, हमारे अफसर | मतलब हमारे अपने जो हम ही में से हैं | मतलब हम ही हैं | किसी न किसी लालच के लिए तो ऐसा करते ही हैं, शायद मुख्यतः पैसों के लिए ही | हमारे अपने दूसरों का साथ दे सकते हैं हमें डुबाने के लिए | इस तरह के ईर्ष्यालु व्यवहार को त्यागना ही होगा और कोई चारा नहीं |राह चलते या कहीं भी कितने लोग dustbin में ही कूड़ा डालते हैं, कहीं और ढूँढना तो दूर की बात है सामने पड़ा हो तो भी डालने का तकलुफ्फ़ नहीं उठाते | कहने को ये भी छोटी-छोटी बातें ही हैं लेकिन इनके अर्थ भी गहरे होते हैं, एक-एक आदमी जोड़ के पूरा देश बन जाता है | जो घर में सफाई नहीं कर सकता उससे बाहर की सफाई की कितनी आशा कर सकते हैं |मैं इस लेख से सहमत तो हूँ, लेकिन फासला ज्यादा नहीं हैं, अगर वो स्केल पर 20 हैं तो हम 17 हैं न की 5 पर नम्बर एक पर तो निश्चित ही नहीं |

  6. February 8, 2010 at 11:25 am

    आपके लेख इतने सच्चे होते हैं कि…. तन बदन में एक तूफ़ान ला देते हैं…. बिलकुल सच्चाई को बयाँ करती एक सच्ची और सार्थक पोस्ट….

  7. February 8, 2010 at 2:09 pm

    हमें पाकिस्तान से खेलों सहित सभी प्रकार के संबंध तोड़ लेने चाहिये. किंतु हमारी ओर से शांति-वार्ता की पहल की जा रही है. यथार्थतः यह शांति राग नपुंसक विलाप है. पता नहीं हमारे कर्णधार गांधी जी के युग से इस युग में कब आयेंगे? कब जागेंगे?

  8. February 8, 2010 at 3:48 pm

    पता नहीं कब हम हिन्दुस्तानियों की आँख खुलेगी ओह माफ़ कीजियेगा हम भारतियों की..

  9. PD said,

    February 8, 2010 at 6:47 pm

    ओ भाई साब!! क्या घुमा कर पिछवाड़े पर, आई मीन सिक्सर दिए हैं..

  10. February 8, 2010 at 8:09 pm

    भाई आज ही यह लेख सभी दोस्तों को फॉरवर्ड कर रहा हूँ. ताकि खुद को इस्लामी का दूत कहने वाले शाहरुख और कोंग्रेस की करतूत सब के सामने आये. बाकी क्या कहूं, दोस्तों सब कुछ कह दिया है. सार्थक तो तब होगा जब हम जो जाग चुके हैं वह औरों को भी जगाएं.

  11. February 8, 2010 at 9:35 pm

    " जागो सोनेवालों …और, पाकिस्तान के टीवीवालों की झूठी बातों का, जवाब दो " कैसे ? सोचो ..द्रढ़ता से आगे बढ़ो और हीम्मत और सोच समझ कर कदम बढाओ – लावण्या

  12. February 9, 2010 at 6:11 am

    ये राहुल बाबा को भिजवा दिया जाय लाल चौक पर झण्डा फहराने के लिये।मुम्बई की लोकल मे सफ़र को हाईलाईट करने वाले भोंपूओं को भी साथ भेज देने चाहिये लाईव कव्हरेज के लिये।

  13. February 9, 2010 at 7:42 am

    सुरेश भाई जब भी भारत पाकिस्तान संबंधों पर कुछ पढता देखता और सुनता था तो हमेशा ही एक बात घूमती थी कि शायद ये सिर्फ़ सियासतदानों की ही करतूत और सोच का नतीजा है कि आज भी हम वहीं खडे पाते हैं खुद को जहां बरसों पहले थे , और शायद एक आम आदमी को इससे कोई सरोकार नहीं है । मगर धीरे धीरे जब बातें सामने आने लगी, इस तरह की घटनाओं को सामने पाया तो यही लगा कि आज तो हालात पहले से ज्यादा खराब है , और समस्या बुनियादी ही है सिर्फ़ सियासी नहीं , और फ़िर कब तक इन सबको ऐसे ही लादे लादे फ़िरते रहेंगे । ठीक किया बिल्कुल , और ऐसे ही नकाब हटाते रहिए , हम जैसे आम लोग भी बहुत कुछ समझने लगे हैं अब तो अजय कुमार झा

  14. February 9, 2010 at 4:49 pm

    सुरेशजी इस देश में पाकिस्तान-परस्ती को सेकुलरिज्म कहते हैं. आमिर खान से लेकर शाहरुख खान और दिलीप कुमार के गुणगान सेकुलर बिरादरी और मीडिया इसलिए करती है, कि वह काफी हद तक पाकिस्तान परस्त हैं. करीब दो-तीन साल पहले की बात है. पाकिस्तान में किसी आयोजन के दौरान वहा के मीडियाकर्मियों और कलाकारों ने भारत के खिलाफ अनर्गल प्रलाप किया था. और यह साबित करने की कोशिश की थी भारतीय मुस्लिमो पर हिन्दू प्रजा जुल्मो-सितम ढहाती है. इस दौरान वहा मौजूदा महेश भट्ट समेत कई सेकुलर खामोश रहे लेकिन राष्ट्रवादी मुस्लिम फिरोज खान (अब दिवंगत) ने पाकिस्तानियों को जमकर लताड़ा. बाद में इस बात को लेकर महेश भट्ट समेत तमाम सेकुलर मीडिया ने फिरोज खान को काफी बदनाम किया. जाहिर फिरोज खान का एक ही दोष था कि वह राष्ट्र भक्त मुसलमान थे और अपने देश के बारे में गलत नहीं सुन सकते थे. जब मीडिया ही पाकिस्तान-परस्त मुस्लिमो और सेकुलरो का जय गान करेगा तो कौन देशभक्त मुस्लिम हिम्मत के साथ भारत की जय बोलेगा.

  15. Shyam Verma said,

    February 9, 2010 at 5:57 pm

    Jeet Bhargav is talking about this topic : http://www.expressindia.com/news/fullstory.php?newsid=68157By the way, really good post for those who still dont want to listen against congress drama.

  16. February 9, 2010 at 6:58 pm

    शाहरुख, सलमान या कोई और खान पाकिस्तान प्रेम में मैं कुछ भी बोल दे, उनके दर्शकों को अच्छा ही लगता है | भेड़ियाधसान तो अपने देश की परम्परा रही है … शाहरुख ने पाकिस्तान प्रेम दिखया तो मीडिया भी अपने गदर्भ राग में पाकिस्तान प्रेम चिल्लाने लगा | और हमेशा की तरह आम जन अपने में ही व्यस्त-मस्त !!!!!मुझे तो लगता है की देश की हालत बहादुर साह जफ़र के जमाने जैसी ही होती जा रही है जब लखनऊ के दो नवाब शतरंज के प्यादे के लिए तलवार निकाल एक दुसरे का सर कलम करने पे उतारू हो जाते हैं पर देश अंग्रेजों के हाथ जा रहा था… इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं … | देखिये आज कोई हमारे भगवान् की नंगी पेटिंग छापता है, कोई सत्य का गला घोंट रहा है …. और हम चुप-चाप अपने में ही व्यस्त-मस्त …. हाँ हमें या अपने बच्चे को कोई भला बुरा कह दे तो तुरंत मार-पीट पे उतारू हो जाते हैं .. देश को कोई भला बुरा कहे हमें उससे क्या लेना देना ? देशभक्ति की बात करने वालों को अपने देश मैं मुर्ख समझा जाता है …….@योगेन्द्र सिंह शेखावत जी आपसे सहमत हूँ … आपने बिलकुल सही और खरी बात कही है |

  17. satyendra said,

    February 10, 2010 at 5:31 am

    प्रिय सुरेश जी,आपका लेख पढ़कर अच्हा लगा. मैं आपका लेखपिछले ८ महीनो से नियमित पढता हूँ. परन्तु आज का लेख पढ़ के निराशा हुई! अगर शाहरुख़ का कथन सही नही तो शिव सेना अथवा विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा किया जा रहा कार्य भी सर्वथा उचित नहीं है ! शिव सेना के कृत्य से हमारे देश का सर शर्म से पूरे विश्व के सामने झुक रहा है ! मैं अमेरिका में हूँ और लोग अब मुझसे पूछते है की क्या सच में भारत लोकतान्त्रिक देश है या यह एक कमुनिस्ट देश की और जा रहा है! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का ही परिणाम है अन्यथा आप और मैं अपने विचारो को व्यक्त न कर पाते! मैंने स्वयं शाहरुख़ की अभिव्यक्ति पढ़ी है जिसमे इस तरह का कोई भी जिक्र नही की जिससे उन्हें देश का "गद्दार" घोषित किया जा सके! आपके लेख आगे आने वाली पीढ़ी को जागरूक बनाते है , आशा करता हूँ आप लेख लिखने से पहले स्वयं यह सुनिश्चित करे की सचाई में दोषी कौन है शिव सेना या शाहरुख़. यह वही शिवसेना है जिसने छेत्रवाद के जरिये देश को विभाजित करने की कोशिश की है , मेरे नज़र में ब्रिटिश और शिव सेना दोनों सामान है!शिवसेना यह भूल रही है की उसके इस कृत्य से मुंबई तथा अन्य नगरो की सुरक्षा कम हो गयी है , मेरे नज़र में यह दोष ज्यादा बड़ा है क्योंकि हम पिछले साल ही एक बहुत बड़े आतंकवादी हमले को झेल चुके है ! भारत के बाहर लोग पूछते है कि क्या भारत सच में सुरक्षित है ? विश्व में आगे बढ़ने के लिए हमें साथ आने कि ज्यादा जरुरत है !आपसे उम्र में छोटा हूँ परन्तु आशा करता हूँ आपका मार्गदर्शन आपके लेखो से मिलता रहेगाआपका अपना ,सत्येन्द्र ठाकुर"V" कम्पनी- भारत का भविष्य"हिंदी का उपयोग करे, यह हमारी मातृभाषा है !"

  18. February 12, 2010 at 5:06 pm

    ग़जब! क्या संकलन है!!जो लोग पाकिस्तानी अवाम और हुक़्मरान में फर्क करते हैं उनकी आँखें अब भी न खुलें तो लानत है उन पर।पाकिस्तान की नींव भारत से घृणा है। कभी नहीं सुधरेगा। अपने देश के आस्तीन के साँप ऐसी घटनाओं से पहचान में आते हैं। पाकिस्तान से एक ही तरीके से निपटना चाहिए – 'विशुद्ध कूटनीति'। प्यार दुलार के पुचकार पर वह दुलारते मुँह को नोचने और फिर मूतने से बाज नहीं आता।


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