कहीं मनमोहन का नोबेल, शाहरुख का निशान-ए-पाक और करण का ऑस्कर खतरे में न पड़ जाये… … Nobel Prize, Nishan-E-Pakistan, Oscar

लीजिये साहब, आतंकवादियों को भी यही दिन मिला था पुणे में बम विस्फ़ोट करने के लिये? अभी तो इस्लाम के नये प्रवर्तक महागुरु (घंटाल) शाहरुख खान अपनी मार्केटिंग करके जरा सुस्ताने ही बैठे थे कि ये क्या हो गया…। आतंकवादियों को जरा भी अकल नहीं है, यदि 13 तारीख से इतना ही मोह था, तो 13 मार्च को कर लेते, होली भी उसी महीने पड़ रही है, एक होली खून की भी पड़ लेती तो क्या फ़र्क पड़ता? लेकिन नहीं, एक तरफ़ तो “हुसैन” ओबामा ने कान पकड़कर बातचीत की टेबल पर बैठा दिया है और इधर ये लोग बम फ़ोड़े जा रहे हैं, माना कि जनता कुछ नहीं बोलती, बस वोट देती ही जाती है, लेकिन इन हिन्दूवादियों का क्या करें? बड़ी मुश्किल से तो सारे चैनलों को सेट किया था कि भैया, चाहे प्रलय ही क्यों न आ जाये शाहरुख खान से अधिक महत्वपूर्ण कोई खबर नहीं बनना चाहिये 3-4 दिन तक, वैसा उन्होंने किया भी। सदी की इस सबसे बड़ी घटना अर्थात “फ़िल्म के रिलीज होने” के बाद “पेड-रिव्यू” (शुद्ध हिन्दी में इसे हड्डी-बोटी चबाकर या माल अंटी करके, लिखना कहते हैं) भी दनादन चेपे जाने लगे हैं। पत्रकारों और चैनल चलाने वालों को पहले ही बता दिया गया था कि “ऐसी फ़िल्म न पहले कभी बनी है, न आगे कभी बनेगी… शाहरुख खान ने इसमें बेन किंग्सले और ओमपुरी की भी छुट्टी कर दी है एक्टिंग में… और करण जौहर के सामने, रिचर्ड एटनबरो और श्याम बेनेगल की कोई औकात नहीं रह गई है”। अब ये क्या बात हुई कि दुबई से लौट रहे “खान भाई” को मुम्बई में लाल कालीन स्वागत मिले और उधर पुणे में भी सड़कें लाल कर दी जायें…

करण जौहर को “ऑस्कर”, शाहरुख खान को “निशान-ए-पाकिस्तान” और मनमोहन सिंह को “शान्ति का नोबल पुरस्कार” दिलवाने की पूरी मार्केटिंग, रणनीति, जोड़-तोड़, जुगाड़, व्यवस्था आदि तैयार कर ली गई थी (वैसे तो मनमोहन को नोबल मिल भी जाये तब भी वे उसे शाहरुख को दे देंगे, क्योंकि महानता की बाढ़ में बहते हुए वे पहले ही कह चुके हैं कि “देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है” और शाहरुख की ताज़ा फ़िल्म भी इसी पुरस्कार को ध्यान में रखकर बनाई गई है)… लेकिन इस लश्कर-ए-तोइबा का क्या किया जाये, हमारा ही खाते हैं और हमारे ही यहाँ बम विस्फ़ोट कर देते हैं। इनके भाईयों, कसाब और अफ़ज़ल को इतना संभालकर रखा है, फ़िर भी जरा सा अहसान नहीं मानते… कुछ दिन बाद फ़ोड़ देते। बड़ी मुश्किल से तो राहुल बाबा और शाहरुख खान का माहौल बनाया था। शाहरुख ने शाहिद अफ़रीदी को वेलेन्टाइन का “दोस्ताना” न्यौता दिया था (छी छी छी, गन्दी बात मन में न लायें), जवाब में पाकिस्तान ने भी पुणे में ओशो आश्रम के नज़दीक वेलेन्टाइन मनवा दिया।

खैर चलो जो हुआ सो हुआ… अब अगले कुछ दिनों तक बरसों पुराने आजमाए हुए इन मंत्रों का उच्चार करना है, ताकि बला फ़िलहाल टले –

1) सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है (2-4 दिन के लिये)

2) आतंकवादियों को पकड़ने के लिये विशेष अभियान छेड़ा जायेगा (ताकि उन्हें चिकन-बिरयानी खिलाई जा सके)

3) हम इस आतंक का मुँहतोड़ जवाब देंगे (फ़िल्म रिलीज़ करने के राष्ट्रीय कर्तव्य से फ़ुर्सत मिलेगी, उसके बाद)

4) राष्ट्र मजबूत है और ((पुणे, जयपुर, वाराणसी, अहमदाबाद, कोयम्बटूर)) के निवासी इस कायराना हमले से नहीं घबरायेंगे (कोष्ठक में अगले बम विस्फ़ोट के समय उस शहर का नाम डाल लीजियेगा)

5) पाकिस्तान के साथ हमें अच्छे सम्बन्ध बनाना है (क्योंकि नोबल शांति पुरस्कार की जरूरत है)

6) आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता (ये भी नोबल जुगाड़ वाला वाक्य है)

तो कहने का मतलब ये, कि इस प्रकार के विभिन्न “सुरक्षा मंत्रों” का लगातार 108 बार जाप करने से बाधाएं निकट नहीं आतीं, इस मंत्र की शक्ति से पुरस्कार मिलने, आम जनता को %&#॰*^;% बनाने में प्रभावकारी मदद मिलती है…। आप भी जाप करें और खुश रहें…। राहुल बाबा कुछ दिनों बाद आजमगढ़ जायेंगे, क्योंकि इस देश में जातिवादी, मुस्लिमपरस्त, चर्चप्रायोजित सभी प्रकार की राजनीति की जा सकती है… सिर्फ़ “हिन्दू”, शब्द भड़काऊ और वर्जित है…। खैर आप भी कहाँ चक्कर में पड़े हैं, इन तीनों महान व्यक्तियों को तीनों पुरस्कार मिलें और देश की “शर्मनिरपेक्षता” बरकरार रहे, इसलिये मंत्र जाप जारी रखें…
===================

(मैं जानता हूं कि मुझे व्यंग्य लिखना नहीं आता, फ़िर भी कुछ “खालिस देशज शब्दों” को प्रयुक्त करने से बचने की कोशिश करते हुए जैसा ऊबड़-खाबड़ लिख सकता था, लिख दिया… जब इतनी सारी कांग्रेसी सरकारें झेल सकते हैं तो इस लेख को भी आप झेल ही जाईये)

विशेष नोट – “म”, “भ”, “ग” आदि अक्षरों से शुरु होने वाले देसी शब्द टिप्पणियों से हटाये जायेंगे

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17 Comments

  1. February 16, 2010 at 8:27 am

    कितना द्वैष भरा है आप में! नफरत फैलाने वाले हैं आप. जब ठाकरे ये वो करता है तब आप कहाँ जाते है? गुजरात में कत्लेआम हुआ था. याद रखें अमन से बड़ी कोई चीज नहीं, कोशिश करते रहना है. आप क्या समझेंगे MNIK को. पड़ोसी से प्रेम करने को. सरकार कोई भी हो धमाके तो होते ही रहे है. धमाके का फिल्म से क्या सम्बन्ध? अरे कभी तो प्रेम, अमन के लिए लिखो…आपके सारे लेख नफरत से भरे हुए हैं. यह लिख कर मैने बहुत से लोगो की टिप्पणी लिखने में लगने वाली मेहनत बचा ली. चाहें तो कॉपी पेस्ट कर सकते है. या do भी लिख सकते है. 🙂

  2. February 16, 2010 at 8:37 am

    Arindam Bandyopadhyay is simply brilliant in his:Open letter to Mr. Shahrukh Khan. !!!!!!!!!!!!!!!!Wonder what the Khan and his sycophants have to say.???Dear Mr. SRKYour name is a household phenomenon in Indian and even beyond her borders.Your fame has put you in the Newsweek "most powerful people list" recently.However, as you may recall from your recent experience in New JerseyAirport, real life is a little different – it does not always follow thepath predicted by a scriptwriter or director.Of late, we have been reading about your opinions and statements on mattersbeyond the celluloid world. Nothing is wrong in it. You live in a free,democratic country and are entirely entitled to your opinion. But as acommon man, also from the same soil, I think I have the right too to raise afew points that may not conform to your views of the real world.I hope you will read it out.पूरा ख़त इस लिंक पर पढ़े :http://www.blogs.ivarta.com/Open-letter-Mr-Shahrukh-Khan-SRK/blog-348.htm

  3. SHASHI SINGH said,

    February 16, 2010 at 8:54 am

    संजय भाई की सलाह मानते हुये मैंने सिर्फ Ctrl C और Ctrl V वाली मेहनत ही की है। इसे नकल न माना जाय क्योंकि मेरे भी यही विचार हैं। "कितना द्वैष भरा है आप में! नफरत फैलाने वाले हैं आप. जब ठाकरे ये वो करता है तब आप कहाँ जाते है? गुजरात में कत्लेआम हुआ था. याद रखें अमन से बड़ी कोई चीज नहीं, कोशिश करते रहना है. आप क्या समझेंगे MNIK को. पड़ोसी से प्रेम करने को. सरकार कोई भी हो धमाके तो होते ही रहे है. धमाके का फिल्म से क्या सम्बन्ध? अरे कभी तो प्रेम, अमन के लिए लिखो…आपके सारे लेख नफरत से भरे हुए हैं."

  4. February 16, 2010 at 9:02 am

    अरे छोड़िए ना, कहां पड़े हैं व्यंग्य के चक्कर में. जो लिखा है, वो साहित्य की किसी विधा में आए या ना आए…लेकिन है तो सोलहो आने सच ही !!जय हो…. एक-दूसरे के साथ "दोस्ताना" रखने वाले करण और शाहरुख की, और "संसाधनों पर पहला हक वालों" के दिलरुबा मियां मनमोहन की…… अंत में, इन तीनों के लिए कोटिशः @#^%^(*&&(*&^*%^%$^&%*&&(^%$&&(^%#^%%(^&$^%%*&(&*(&^&$&^%^(*&*(*&*#$@%$&&((*((*)

  5. February 16, 2010 at 1:16 pm

    समझ गए, हम बोलेंगे तो बोलेगा की बोलता है.इसलिए चुपचाप बम गोला खाते रहिये, नोबेल शान्ति तो एक दिन मिल ही जायेगा. वैसे भी ओबामा ने तो रास्ता बना ही दिया है. लेकिन असली खुशी तब होगी जब श्री श्री १०८ SRK को निशाने-इम्तियाज से नवाजा जायेगा.वैसे बांगला देश का सर्वोच्च सम्मान का कोई नाम बताये जरा, मैं भी पहल करूँ थोडा.

  6. February 16, 2010 at 2:26 pm

    मुर्दों के सामने गीता का ज्ञान बांटने से क्या फायदा.हमारे जैसे सारे हिन्दू मुर्दा और नपुंसक हैं.

  7. February 16, 2010 at 2:39 pm

    जैसे-जैसे पाकिस्तान द्वारा भारत सरकार के सिर पर मारे गये जूते का जख्म भरने लगता है वैसे-वैसे ही भारत को पाकिस्तान से बात शुरु करने की सुध आने लगती है, पाकिस्तान को भारत की ये चूतिया गिरी ठीक नही लगती। इस लिये वह लोहे की तली लगा जूता फिर से मार देता है। फिर जैसे जख्म भरता है, भारत को बात-चीत शुरु करने की सुध आती तो फिर वही जूता। 63 वर्षों से ये ही सिलसिला चलता आ रहा है। पता नही कब इनका जमीर जागेगा। शाहरुख खान की फिल्म के लिये मीडिया ने जो रागालाप किया उससे अंदाजा लगाना कोई मुश्किल नही कि कितना पैसा मीडिया को दिया गया होगा। एक चैनल ने तो अपने पूरे स्टाफ का ही साक्षातकार फिल्म की स्तुति के दिखा दिया। बिकने की भी कोइ हद होती है। अब तो लगता है कि लोकतंत्र का चोथा खम्बा खोखला हो गया है।

  8. February 16, 2010 at 3:51 pm

    आपने एक साधारण नागरिक जो सोचता है उसे व्यक्त कर दिया है.चाहे वह तथाकथित धर्मनिरपेक्षता या पैसे ले प्रचार करने वाला मिडिया या थूक कर चाटने वाले शाहरुख के संदर्भ मे हो.बाकी बचे लोग भी कुछ सोचते हैं इसमें संदेह है. है न?

  9. February 16, 2010 at 4:25 pm

    सब सेक्यूलरिस्ट रहनुमा बने हुए हैं…. सब वोट बैंक का खेल है….

  10. February 16, 2010 at 5:25 pm

    सेकुलर धतूरे के मद में चूर देशवासियों को खेल समझ आते आते लुटिया भी लुट चुकी होगी, उनसे पूछो धमाके में मरे लोगो का ज़िम्मेदार कौन है ???कह दो जेहादी बेचारे भोले भाले बच्चे है दीपावली टाइप पटाखे फोड़ने का मन उन बेचारों का भी करता है सो एक आधे लोग मरने से जनसँख्या थोड़े ही कम हो जायेगी !!!

  11. Harish Bist said,

    February 16, 2010 at 5:36 pm

    पूणे मे हुऎ हमले की असली व नॆतिक जिम्मेवारी केन्द्र ऒर राज्य सरकारो की हॆ।पाकिस्तान से बातचीत ऒर आतंकवादियो की घर वापसी जॆसी नॊटंकी करके भारतसरकार क्या हासिल करना चाहती हॆ। यह हम जॆसे भारतियो की समझ से बाहर कीबात हॆ।

  12. February 16, 2010 at 5:41 pm

    क्या आपको याद है कि फिरोज खान के साथ पाकिस्तान में कैसा व्यवहार किया गया था, फिरोज खान के सच बोलने पर. सेक्युलर और जम्हूरियत का आइना दिखाने पर फिरोज खान को पाकिस्तान से तुरंत वापस आना पड़ा था.

  13. February 17, 2010 at 12:57 pm

    खबरों (वक्तव्यों) की सही खबर ली है जी आपनेप्रणाम स्वीकार करें

  14. SANJAY KUMAR said,

    February 17, 2010 at 1:52 pm

    In this bargain, why do you forget to recommend galantry awards for "MAHARASTRA POLICE" .After all it is their great effort the movie "MY NAME IS KNAN" could be released peacefully.Do not you know that they killed a dreaded terrorist "RAHUL RAJ" last year in extermely difficult circumstances with police force numbering 45.In MIRAJ, it is entirely due to their valor Pakistan Flag could be hoasted. They amply supported by providing their vehicle to hold the flag high.

  15. Chinmay said,

    February 17, 2010 at 4:04 pm

    सच्चाई छुप नही सकती दिखावटी प्रोमोज़ सेऔर कोई फिल्म हिट हो नही सकती हकलाते हीरो के होने सेपुणे ब्लास्ट्स का ब्योरा मैने अपने ब्लॉग पर लिखा है कृपया पढ़ कर अपना अभिप्राय दीजिएगा , और हाँ मेरे 'ख़ान की खालिस नौटंकी' वाले लेख के हिस्सों को आप नि: संकोच हो कर अपने ब्लॉग पर डाल सकते हैं , यूँ भी असल बात जाहिर होने से ख़ान की नौटंकी पिट गयी है

  16. S B Tamare said,

    February 18, 2010 at 7:15 am

    मेरे प्यारे दोस्त !बेहतरीन टिपण्णी के लिए मै आपका तहे दिल से शुक्रिया बोलता हूँ , यदि किसी भी किस्म की ठेस मेरे किसी बयान से आपको हुई तो मै शर्मसार हूँ और आयन्दा के लिए भरोसा दिलाता हूँ की तकलीफ नहीं होने दूंगा, बस इतनी सी कृपा और रखे की मेरे ब्लॉग पर टिप्पणियों के रूप में वर्षा जरूर करते रहे /आपकी स्नेह वर्षा से मुतमुइन …आपका अपनाशशि भूषण तामड़े

  17. February 18, 2010 at 1:04 pm

    क्या भाई कभी तो कुछ ऐसा लिखो जो पढते हुए मीठा मीठा लगे….येक्या मिर्ची वाला लिखते हो हमेशा…..गंग जामुनी संस्कृति….धर्म निरपेक्षता….सैक्यूलरिज्म….ये बम के धमाके तो होते रहते हैं……


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