>जामिया में परीक्षाफल के पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान ख़त्म

>जामिया मिल्लिया इस्लामिया  के नये कुलपति नजीब जंग साहब शैक्षणिक परिसर में तानाशाही का नया इतिहास लिख रहे हैं . कहने को तो दीक्षांत समारोह में उन्होंने खूब कहा कि कोई छात्र उनसे बेझिझक मिल सकता है लेकिन इस जन्नत की हकीकत भी कुछ और हीं है . जंग साहब सीधे मुंह किसी से मिलते नहीं है . हमारे कुछ सहपाठी उनसे मिलने गये थे लेकिन परिणाम निराशाजनक ही रहा . सलमान खुर्शीद की विशेष मांग पर लाये गये कुलपति को मीडिया में छाये रहना भी खूब आता है . जामिया को बड़ा मदरसा बता कर अच्छी खासी सुर्खियाँ बटोरने वाले जंग साहब अभी-अभी दिलों को जोड़ने वाली सायकिल रैली करवाकर निश्चिन्त हुए हैं . बाहरी तौर पर इन कामों के सहारे दरअसल अन्दर से हो रही तानाशाही को छुपाया जा रहा है . छात्र हितों से साथ खिलवाड़ तो आम बात हो गयी है . सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि छात्रसंघ नहीं है और ना हीं परिसर में किसी प्रकार के एक्टिविजम की अनुमति है . अभी दो तीन दिन पहले हीं कुलपति ने  परीक्षाफल के पुनर्मूल्यांकन / री-एवेल्युशन का प्रावधान ख़त्म कर दिया है .कुलपति का यह फैसला गैरलोकतांत्रिक हीं नहीं छात्र हितों के विरुद्ध है .लेकिन जामिया का महल ऐसा बना हुआ है कि वहां से बड़े स्तर पर कुलपति के इस फैसले के खिलाफ आवाज उठने की आशा नहीं दिखाई देती है .  आप सबों से अनुरोध है कुलपति के इस फैसले का विरोध करें . परीक्षाफल  का पुनर्मूल्यांकन छात्रों का अधिकार है .

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