>हमने तो ब्लोगर मीट का विरोध नहीं किया है

>लगता होली में सभी बौरा गये हैं ! संगठन बनाने के विरोध में एक पोस्ट हमने भी लिखी थी . लेकिन उसमें फायदे नुकसान और विकल्प भी सुझाये गये थे . एक बार फ़िर कह रहा हूँ ब्लॉगजगत अपने आप में एक संगठन है और ब्लोगर मीट उसका औजार ( हमने तो ब्लोगर मीट का विरोध नहीं किया है ) . ब्लॉगजगत को किसी अन्य संगठन की जरुरत नहीं है दिल्ली को छोडिये अन्य जगहों पर भी ब्लोगर लोग बगैर किसी खास संगठन के ब्लॉगजगत को हीं संगठन मान कर आपस में मिलते हैं और तमाम मुद्दों पर चर्चा करते हैं . दिल्ली का आलम तो यह है की एकाध सम्मलेन हुआ नहीं की संगठन बनाने की कोशिश में जुट गये . आप पत्रकारों संघ की बात करते हैं , तो कभी प्रेस क्लब , दिल्ली पत्रकार संघ आदि में जाकर देखिये क्या हश्र है ! और यहाँ जो लोग आये हैं ब्लोगिंग में वो उसी से छुटकारा पाने यह सोच कर आये हैं की यहाँ किसी तरह की मठाधीशी करने वाला कोई नहीं है . लोग कहते हैं हम कोई मठाधीश नहीं , अरे साहब , मठाधीशी हीं तो है महज कुछ लोगों के मिलन को दिल्ली ब्लोगर मीट कहना जबकि उसमें से कई लोग आयात किये गये हों . अगर किसी को अनुमान हो तो जरा पता लगायें कि दिल्ली में रहने वाले हिंदी ब्लोगरों की संख्या ? फ़िर , अपनी मठाधीशी को कोसें !

चलिए लौटते हैं संगठन के बात पर तो हम अकेले नहीं हैं . अधिकांश लोग यह मानते हैं की संगठन बनेगा तो एकलौता नहीं होगा और भांति-भांति के संगठन रियल्टी शो की तरह उभरेंगे और तब जो काचं-कच मचेगा उसका अनुमान शायद लगाना हीं नहीं चाहते ! ब्लॉगजगत का भला-बुरा सोचने वाले लोग पहले यह मान लीजिये की ब्लॉगजगत आपस में एक संगठन है जो हम सबको  आपस में जोड़ने के लिए काफी है .हिंदी ब्लॉगजगत को हीं एक संगठन मानिये और ब्लोगर मीट को इसकी संसद अब इसके बारे में सोचिये कैसे चलाएंगे ? इतने बड़े मंच को क्यों बांटना चाहते हैं ?

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