>जामिया में होली खेलने पर छात्रों के परिचयपत्र छीने गये

>कल की सबसे आश्चर्यजनक और तानाशाही वाली एक खबर है जामिया मिल्लिया इस्लामिया से जहाँ हिंदी विभाग के छात्रों को परिसर में होली खेलने के कारण प्रोक्टर ने तलब किया है . छात्र -छात्राएं होली के पहले आखिरी क्लास के बाद आपस में रंग-गुलाल लगा रहे थे . इसी बात से नाराज सुरक्षाकर्मियों ने उनके परिचय-पत्र छीन लिए और प्रोक्टर ऑफिस आकर ले जाने की बात कही . छात्र  स्तब्ध रह गये कि आखिर उन्होंने क्या जुर्म किया है ? क्या होली खेलना गुनाह है ? एक छात्र ने दुखी मन से कहा , घर-परिवार ,दोस्तों से दूर सहपाठी हीं तो हमारे सबकुछ हैं . अब उनके साथ होली नहीं खेल सकते , तो परिसर में नहीं खेल सकते जबकि इसी परिसर में हमलोग बैठकर इफ्तार करते हैं . क्या यह भेद-भाव नहीं है हमारे साथ ?

बात सही है . यदि कोई बाहर का छात्र होता तो बात अलग थी हो सकता है जामिया का सांप्रदायिक सद्भाव नष्ट हो सकता था लेकिन जो छात्र सालों भर वहीँ पढ़ते हैं उनसे क्या खतरा था . उनके होली खेलने  से कौन सी आफत आने वाली थी ? और यदि ऐसा था तो क्यों नहीं पहले हर जगह नोटिस लगाई गयी ? यदि उन बच्चों ने रंग -गुलाल लगया तो बदले में उनके साथ ऐसा सलूक किया जायेगा ? क्या यह विश्वविद्यालय प्रशासन का भेदभाव और तानाशाही का रवैया  नहीं है ?

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