एमएफ़ हुसैन की “रेप ऑफ़ इंडिया” पेंटिंग… मानसिक विकृति के साथ देशद्रोह भी…… MF Hussain, Rape of India Painting, Secularism

भारत से भगोड़े और तथाकथित सेकुलर कलाकार एमएफ़ हुसैन द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के बने चित्रों पर बात करने से सभी पक्षों का दिल दुखता है (हिन्दूवादियों का भी और खासकर सेकुलरों का)। अतः हुसैन की देश की समस्याओं पर बनी पेण्टिंग पर बात की जाये, यहाँ सन्दर्भ है मुम्बई बम ब्लास्ट के बाद हुसैन द्वारा बनाई गई पेण्टिंग का, जो कि लन्दन आर्ट गैलरी में प्रदर्शित की गई है। हुसैन ने 26/11 के हमले पर बनाई कलाकृति को “रेप ऑफ़ इंडिया” (भारत का बलात्कार) नाम दिया है। हुसैन पहले भी “भारत माता की नग्न तस्वीर बना चुके हैं, और अब प्रकारान्तर से “भारत माता का बलात्कार” नाम भी दे चुके। (चित्र देखिये)

यदि असली-नकली सेकुलरिज़्म को एक तरफ़ रख भी दिया जाये तो क्या हुसैन की ऐसी पेंटिंग्स देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आतीं? “रेप ऑफ़ इंडिया” पेंटिंग में हुसैन ने जानबूझकर एक औरत को ही दिखाया है (भारतवासी परम्परानुसार अपनी धरती को माँ की तरह पूजते हैं इसलिये इसलिये इस पावन धरा का नाम “भारत माता” मान लिया गया है… और जब हुसैन “रेप ऑफ़ इंडिया” लिखते हैं तो उनके दिमाग में एक औरत ही आती है)। क्या विदेशों में प्रदर्शित उस पेंटिंग में भारत को एक “बलात्कृता स्त्री” के रूप में पेश करना देशद्रोह नहीं है? भारत का अपमान नहीं है? याद नहीं आता कि जब अमेरिका पर 9/11 का हमला हुआ तो अमेरिका के किसी मुस्लिम पेण्टर ने “रेप ऑफ़ अमेरिका” के नाम से चित्र बनाया? अथवा रोज़ाना थोक के भाव में पाकिस्तान में हो रहे बम विस्फ़ोटों के बाद पाकिस्तान में रहने वाले किसी हिन्दू ने “गैंगरेप ऑफ़ पाकिस्तान” नामक फ़िल्म बनाई? फ़िर हुसैन मानसिक रूप से इतने गिरे हुए क्यों हैं? यदि भविष्य में (और हुसैन तब तक जीवित रहे) इज़राइल, कभी कतर पर हमला कर दे तो क्या हुसैन “रेप ऑफ़ कतर” नामक पेंटिंग बनायेंगे?

बहरहाल, “रेप ऑफ़ इंडिया” पेंटिंग में दो-तीन बातें ध्यान खींचने वाली हैं। इस पेंटिंग को कैनवास के दो टुकड़ों में बनाया गया है। क्या हुसैन यह दर्शाना चाहते हैं कि ऐसे हमलों से भारत टुकड़े-टुकड़े हो जायेगा? (या यह उनकी दिली इच्छा है?) तस्वीर के दोनों तरफ़ से टपकता हुआ खून “हरे” रंग का है, और दोनो बैलों का रंग भी हरा है… ऐसा क्यों? आखिर इशारों-इशारों में क्या साबित करना चाहते हैं हुसैन? ऐसे भीषण हमले और मृतकों के परिवारों के मिले दर्द के बाद, हिम्मत और हौसला बढ़ाने वाली तस्वीर पेण्ट करना चाहिये या “रेप” कहकर खिल्ली उड़ाने वाली? वे कैसे बुद्धिजीवी हैं जो इस प्रकार की पेंटिंग में भी “कलाकार” की स्वतन्त्रता ढूंढते हैं? जब डेनमार्क का कार्टूनिस्ट अथवा कोई अन्य ईसाई कलाकार मोहम्मद के कार्टून अथवा काल्पनिक ग्राफ़िक्स बनाता है तो क्या वह आर्ट नहीं है? कार्टून, लोगो और ग्राफ़िक्स “कला” नहीं हैं लेकिन हुसैन की पेंटिंग “कला” है, यह दोहरा मानदण्ड क्यों?

हुसैन ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह हिटलर से घृणा करते हैं, और इसीलिये अपनी पेण्टिंग में उसे नंगा चित्रित किया है (देखें चित्र)। इस पेंटिंग में आइंस्टीन, महात्मा गाँधी और माओ-त्से-तुंग को पूरे कपड़े पहने दिखाया है (ठीक वैसे ही जैसे हुसैन ने फ़ातिमा और मदर टेरेसा को पूरे कपड़ों में दिखाया है), लेकिन हिटलर को नंगा चित्रित किया है (हिटलर कम से कम देशद्रोही तो नहीं था)। इसका अर्थ यह होता है कि जिससे हुसैन घृणा करते हैं उसे “नीचा दिखाने के लिये”(?) नग्न चित्र बनाते हैं। ज़ाहिर सी बात है कि सरस्वती, दुर्गा, सीता और भारत माता को नंगा चित्रित करने के पीछे यही मानसिकता है। साफ़ है कि हुसैन हिन्दू देवियों, भारत देश और यहाँ की हिन्दू संस्कृति से नफ़रत करते हैं और उसे नंगा चित्रित करने पर उन्हें “मानसिक सुख” मिलता है। शायद इसीलिये भारत में रहकर मुकदमों का सामना करने की बजाय एक इस्लामी देश की नागरिकता स्वीकार करने में भी उन्हें शर्म नहीं आई। यह साफ़-साफ़ देशद्रोह है… यदि हुसैन इतने ही गैरतमन्द हैं तो क्यों नहीं पासपोर्ट के साथ-साथ सारे सम्मान भी लौटा देते?

सवाल उठते हैं कि आखिर हुसैन कैसे व्यक्ति हैं? एमएफ़ हुसैन क्या चाहते हैं? ऐसा आभास होता है कि हुसैन यौन विकृति और “इरोटिक पीड़ा” से ग्रस्त मनोवैज्ञानिक केस है। ऐसा क्यों है कि हुसैन की अधिकतर पेंटिंग्स में जानवरों और इन्सानों का “अंतरंग सम्बन्ध” दर्शाया जाता है? क्या अब कतर में उन्हें किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना चाहिये? तरस तो आता है हमारे तथाकथित सेकुलर और कलाप्रेमी मूर्खों पर जो लाखों रुपये में इनकी पेंटिंग खरीदकर अपने ड्राइंगरूमों में सजाकर रखते हैं ताकि लोग इन्हें प्रगतिशील समझें… लानत भेजिये ऐसी प्रगतिशीलता पर…और शुक्र मनाईये कि उनकी कब्र (उनके अनुसार) “रेप” हो चुकी, और हमारे अनुसार इस पावन धरती पर नहीं बनेगी… बशर्ते कि सेकुलरों, मानवाधिकारवादियों, वामपंथियों और प्रगतिशीलों को “अब भी” हुसैन को भारत वापस लाने का दौरा न पड़ जाये…

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41 Comments

  1. March 10, 2010 at 9:44 am

    neech tha,neech hai aur neech rahegaa.bhau use maaf kar do vo nahi jaantaa vo kyaa kar raha.

  2. कुश said,

    March 10, 2010 at 9:50 am

    क़तर में कोई मनोचिकित्सक तो होगा ही.. साहब को उन्हें दिखा ही देना चाहिए..

  3. March 10, 2010 at 9:52 am

    इन्साल्हा, आपको भी कला की समझ नहीं है ! महान चित्रकार ( माय फूट ) एम् ऍफ़ ( नाम ही एम् ऍफ़ है ) का "रेप ऑफ़ इंडिया" से मीनिंग था, इंडिया की रेप्युटेशन ! आपने सही ढंग से नहीं समझा, क्या करे , साम्प्रदायिक नजर जो है आपकी ! 🙂 ९५ साल तक इस देश का नमक खा चुका था, फिर नमकहरामी कब करता ? बात पूरी समझते नहीं और लिख देते है, इस देश में पैदा हुई ऐसी ऐसी महान हस्तियों के बारे में अनाप-शनाप !

  4. March 10, 2010 at 9:52 am

    आपने सही कहा ये एक मनोवैज्ञानिक रोगी से बढ़ कर कुछ नहीं है जो सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए नित नए विवादों को जन्म देता है. लानत है ऐसे व्यक्ति और उससे नाता रखने वालो पर. अपने तौर पर विरोध दर्ज करने के लिए मैं इस व्यक्ति से सम्बंधित समाचार नहीं पढता हूँ. इसके जैसे खुद के पूजनीय भगवान या अल्लाह है वैसे ही ये दुसरो के समझ कर उकेरता है. हमारे भगवान इस विकृत रोगी के कुंची के मोहताज नहीं है और न ही वो इसके द्वारा बनाये गए बेहुदे चित्रों जैसे आड़े टेड़े है.

  5. Dr.Rakesh said,

    March 10, 2010 at 10:01 am

    कोई वामपंथी, या प्रगतिशील में हिम्मत है तो किसी ऐसे धर्म के देवता का अपमान करके देखे जिसके अनुयायी के क्रोध और नफ़रत की आग सिर्फ़ खून से बुझती है…हिंदू धर्म का दुश्मन खुद हिंदु ही है..बंटे हुए और क्षुद्रस्वार्थी…

  6. March 10, 2010 at 10:02 am

    हुसैन को भारत वापस लाने का दौरा न पड़ जाये… दौरा तो पड़ रहा है, मगर हुसैन आने वाला नहीं.

  7. kunwarji's said,

    March 10, 2010 at 10:03 am

    #@$%&$#@*)#@$my foot(m.f) ke liye

  8. March 10, 2010 at 12:27 pm

    एक लात मेरी भी

  9. 1122 said,

    March 10, 2010 at 12:49 pm

    उसकी मानसिकता देखकर ऐसा प्रतीत होता है उसने मा के स्तनपान का भी अपमान किया होगा कितनी अभागी होगी वो मा ??????

  10. March 10, 2010 at 1:18 pm

    ये कलाकार नहीं कलंकार है

  11. HINDU TIGERS said,

    March 10, 2010 at 1:33 pm

    गद्दारी,नफरत और धोखा हुसैन जैसे लोगों व इनके समर्थकों की रग-रग में है कतलोगारद और आतंकवाद इस्लाम का प्रायवाची ऐसे ही गद्दारों की बजह से बना है सही वो गद्दार हैं जो आज बारत की आत्मा को लहुलुहान किए हुए हैं ।

  12. March 10, 2010 at 2:10 pm

    जो देशद्रोह करता है उस से नफ़रत है मुझे। जो किसी धर्म के देव-देवी को अपनी विक्रुत मनोद्रष्टि से चित्र में बनाता है उसे नफ़रत है मुझे। ऐसे गद्दारों को ज़रूर सजा मिलनी चाहिये।

  13. March 10, 2010 at 2:18 pm

    जिस दिन मकबूल फ़िदा हुसैन ने ऐसा कोई चित्र अपने मजहब से प्रेरित होकर बनाने की हिम्मत दिखा दी …कसम पैदा करने वाले कि ….हम खुद ही …मगर तब तक मियां मकबूल ही महफ़ूज़ न रह पाएंगे ….ये सहनशीलता भी एक कोढ बनी हुई भारत के लिए …अच्छा है कि मियां जी कतर प्रवास पर निकल लिए ..अब लेते रहें अभिव्यक्ति की पूरी आजादी ….इन्हें तो सालों पहले इनकी कला समेत बाहर फ़ेंक देना चाहिए था … अजय कुमार झा

  14. March 10, 2010 at 2:26 pm

    बिल्कुल ठीक लिखा है. खामखाह कुछ लोग अपने अन्दर प्रगतिशील होने का ढ़ोंग पाल लेते हैं और जब कभी सच्चाई से सामना होता है तो सारा मुलम्मा उतर जाता है..रजिया ने सही बात कही है..,

  15. March 10, 2010 at 4:09 pm

    देखिये , Titiyan नाम का एक इतालवी पेंटर हुआ हुआ है जिसकी मशहूर कृति है ' रेप ऑफ़ युरोपा ' . हुसैन ने महज़ उसे भुनाने की कोशिश की है . इस यूरोपियन पुनर्जागरण काल की कृति में जुपिटर को बलात्कारी-सांड के तौर पे दिखलाया गया है . ऐसे ही कई और उसकी कृतियाँ पुरानी यूरोपीय कृतियों की अनुकृति हैं जिनमें पैगन देवी-देवताओं का अश्लील चित्रण है . लेकिन यूनान के पुराने पैगन धर्म को ईसाइयत दबा कर ख़त्म कर चुकी सो वहां उसका कोई विरोध नहीं हुआ , मगर एम. एफ . हुसैन को ये हराम्जद्दगी करने से पहले सोचना चाहिए था जो उसने महज़ पैसे के लालच में नहीं सोचा .

  16. March 10, 2010 at 4:20 pm

    कौन है ये आदमी कलाओं में जब कुछ नहीं बचा तो निकली आधुनिक कला जिसका न सर होता है न पैर . ये सिर्फ कुछ गिने चुने मुट्ठी भर टट्टू लोगों का शगल होता है . जिसे ये खेलते रहते हैं और आम आदमी परेशान.यहाँ है क्या कोई इनका खरीदार हाँ सुल्तान ही खरीद सकते हैं क्योंकि उनके शौक भी नवाबी होते हैं .

  17. March 10, 2010 at 4:30 pm

    आम तौर पे लोग ये क़यास लगा रहे हैं कि उसने शायद हिन्दू देवी-देवताओं या भारत माता का मज़ाक उड़ाने की गरज से ये सब किया . ऐसा क़तई नहीं है ! महज़ पैसे का पीर होने के नाते उसने ये सब किया जिसमें भी सिर्फ़ हनुमान -सीता और रावण-सीता की पेंटिंग को सौ फीसदी अश्लील कहा जा सकता है और ये वजह काफी है के उसे यहाँ दो गज़ ज़मीन भी नसीब न हो . read 'TITIAN' in my previous comment for google search.

  18. March 10, 2010 at 4:45 pm

    मेरा काम चल रहा है दोहा एयरपोर्ट पर, कतर जाने का मौका मिलेगा. कतर देश खाडी के बाकी मुस्लिम देशों जैसा ही है.वहां रह कर इब बाबुजी का करेंगे? एक तरफ़ तो कहते हैं कि नग्नता में उन्हे प्युरिटी दिखती है. दूसरी तरफ़ होटलर को नग्न दिखाते हैं घृणा की अभिव्यक्ति के तौर पर. अपने पुत्री और हज़रत साहब की पत्नी की तसवीर पूरे कपडे में, और भारतमाता , सीता, और सरस्वती मां की तसवीर नंगी?मैं भी कलाकार हूं. मैं ये मानता हूं कि कलाकार को अभिव्यक्ति की स्वातंत्रता होनी चाहिये. हुसैन का विरोध करने का तरीका भी गलत है. संस्कारहीन को भी संस्कार में रह कर विरोध करना सभ्यता का तकाज़ा है.मगर क्या मैं कल अपने पडोसी की मां या बहन की नग्न तसवीर बना सकता हूं. कृपया मुझे किसी सेक्युलर बुद्धिजीवी के परिवार की तसवीर भेजदें ,जिसे हुसैन (साहब नही कह पाऊंगा) से हमदर्दी है. मैं किसी मित्र आर्टिस्ट से (या खुद) ऐसा ही कुछ कर दूं तो जनाब क्या कहेंगे? सीता,सरस्वती आदि मेरी मां है , मेरे जैसे हज़ारों उपासकॊ की भी जो हिंदु हैं.

  19. March 10, 2010 at 4:46 pm

    बुढ़ऊ बुढ़ापे में और भी ज्यादा सठिया गया है ।

  20. March 10, 2010 at 5:06 pm

    हाय हुसैन अब हम है तब भी तुम्हारे लिये कुछ ना कर सके . कह कर छाती पीटने वालो से सहानुभुति

  21. Bhaskar said,

    March 10, 2010 at 8:01 pm

    महाजाल का सबसे सही उपयोग किया आपने साथ ही आपकी लेखनी भी सशक्त है हार्दिक आभार ,आशा है की आपकी इस कोशिश से कुछ तो हलचल होगी

  22. ePandit said,

    March 11, 2010 at 12:02 am

    हुसैन झूठा, मक्कार, देशद्रोही, गद्दार, पाखण्डी, हुसैन एक आम चित्रकार है, लाइमलाइट में आने के लिये उसने इस तरह के हथकण्डों का सहारा लिया। कभी देवियों के नग्न चित्र बनाकर तो कभी माधुरी के दीवानेपन का ढोल पीटकर प्रसिद्धि हासिल की, वरना उससे पहले उसे कौन जानता था। एक तो दूसरों की भावनाओं को आहत किया ऊपर से धौंस जमाता है कि अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है, इस तरह के नग्न चित्रों को कला बताता है। अरे यदि नग्न चित्र बनाकर ही कला दिखानी थी तो हिन्दू देवी-देवता ही क्यों, क्या इसलिये कि हिन्दू समाज सहिष्णु है। सहिष्णु है तो चाहे जैसे उसका अपमान कर दो। नंगे चित्र बनाकर कला दिखानी थी तो अपने धर्म के आराध्यों के चित्र बनाकर क्यों न दिखायी? तब तो डर रहा होगा कि मुल्ला उसकी मुण्डी काटने का फतवा जारी कर देंगे।अब मुकदमें के डर से कतर भाग गया है। हुसैन झूठा और मक्कार है, भारत ने उसको इज्जत दी पैसा दिया और कहता है कि भारत ने उसे खारिज किया। अरे उसने भारत को खारिज किया, माता समान भारत माता का नग्न चित्र बनाया, उसकी अपनी माता अब जीवित नहीं वरना शायद उसका भी नग्न चित्र बनाकर उसे कला बता देता। अपनी मातृभूमि का अपमान किया और कथित बुद्धिजीवी (जिनमें एक आने की भी बुद्धि नहीं लगती) उसके लिये रोये जा रहे हैं।

  23. March 11, 2010 at 1:17 am

    फिर भी भारत माता इतनी स्नेह वत्सला हैं की इस मातृ-द्रोही को दो गज जमीन दे देगीं अपनी गोद में मगर यह नामकूल बुजदिल भाग गया यहाँ से -कहाँ बहादुर शाह जफ़र जिन्हें दो गज जमीन कुए यार में नसीब न हो पायी बिचारे आखिरी साँसों तक तरसते रहे और कहाँ यह पाजी!

  24. SHIVLOK said,

    March 11, 2010 at 1:33 am

    hey bhagvan is sirfire sexy kutte kii kahaan jaroorat hai is duniya men. Suresh ji aapke prayas ka abhinandan.Desh men faili hatashaa ko door karne ke liye kuchh yojana baddh bada kadam uthaana padega.Suresh ji chhota sa poudhaa hii badaa ped banta hai. Aap jaise logon ka sansad men pahunchna behad jaroori hai. meri is bat ka majak udaya ja sakta hai, ya ise mungeri lal ka sapna kaha ja sakta hai.Ho sakta hai main sapna dekhne men atirek kar rahaa houn, but ek baat pakki hai yadi,yadi,yadi,SURESH CHIPLUKAR & MAHFOOJ DONO MIL KAR EK HO JAYEN TO YE BHAARAT HII NAHIN PURE VISHVA KE LIYE GUNKARII POUDHAA HO SAKTA HAI, JO KII BADA PED BAN KAR VISHVA MEN FAILE JAHAR KE LIYE AUSHADHI KAA KAARya KAR SAKTAA HAI.SAB LOG MERA MAJAAK UDANE KE LIYE SWATATRA HAIN. LEKIN MERI JANKAARII KE ANUSAAR ITIHAAS AISE HII SAPNON SE BANTA HAI.SHIV RATAN GUPTA9414783323

  25. March 11, 2010 at 5:46 am

    यह एक हीन भावना भी है इन लोगो में जो एक विकृत मानसिकता में बदल जाती है.अपने को महान ओरों को नीचा दिखाने की. इनका मत भी इसमें बहुत बड़ा कारण है जो सेक्स & वोइलैंस पर ही टिका है. अब कुछ लोग कहेंगे कि इनमें काफी अच्छे भी तो लोग हैं तो उसका कारण है उन्होंने अपने ग्रन्थ पढ़े नहीं हैं या यदि पढ़े हैं तो वो वास्तव में बुद्धिजीवी हैं और जो गलत है उसका विरोध करते हैं चाहे वो उनके मत में ही क्यूँ ना लिखा हो. कुछ लोग इनमें बनावटी अच्छेपन का दिखावा भी करते हैं और अंदर ही अंदर एक द्वेष भाव पाले रखते हैं और कुछ लोग इसी सेक्स और वोइलेंस को श्रेष्ठ मान कर के उसी में लिप्त हो जाते हैं अधिकतर संख्या इन्ही लोगो की होती है और इन्हीमें से कुछ लोग गलत बातों पर सभ्यता और अच्छेपन का लबादा चढाते- ढकते रहते हैं. इस लबादे को चढ़ाने और भी सारे क्रिया-कलापों में आज के कथित सेकुलर इनकी सबसे अधिक सहायता करते हैं.कुल मिलकर बात ये है इन सारी मुसीबतों की जड़ ये आज के भेड़ की खाल में भेड़ीये सेकुलर हिंदू(केवल नाम के) ही हैं जब तक ये हैं हजारों हुसैन रहेंगे और आगे भी बनते रहेंगे.

  26. March 11, 2010 at 6:20 am

    हुसैन को माफ़ कर दो वो तो क़तर के शरण में जा चूका है… देशद्रोह तो वे हैं जो इनकी पेंटिंग्स यहाँ खरीदते हैं…नहीं नहीं वे देशद्रोह नहीं वे नवाब हैं उन्हें महंगे और विलासिता से सजे पेंटिंग्स की जरुरत होती है…. आम आदमी की भावना भाड़ में जाए…. जब राष्ट्राभिमान की कद्र नहीं तो आम जनता से कैसा सरोकार… लानत है.

  27. March 11, 2010 at 6:23 am

    छद्म सेकुलरों और कलंक कला के पुजारियों के लिए…जब सजा देना था एक गद्दार कोसड़कों पर नारे लगाते कुछ गद्दार चले.

  28. vedvyathit said,

    March 11, 2010 at 7:42 am

    us ne sach me desh droh kiya hai us pr desh droh ka mukddma chlna hi chahiye is ke sath 2 jo us ka smrthn kr rhe hain ya us in kamon ke smrthk hain un pr bhi desh droh ka mukddma chlna hi chahiye yh mang jor dar trike se uthai jani chaiye isi trh ek aur kio blog vani pr ved aur kuran ko le kr anrgl bkvas kiye ja rha hai jo nirntr jhoothe tathy prstut kr rha hai us ka bhi jbaj josdar dhng se diya jana chahiye dr. ved vyathit

  29. gg1234 said,

    March 11, 2010 at 8:48 am

    Mera khayal hai ki woh painting sach darsha rahi hai…hare bail jo hain woh pakistan aur faschist/islamic aatankwaadi hain aur woh Bharat Mata ka balatkar kar rahe hain. Asatya to kuch bhi nahi hai agar is nazariye se dekha jaaye to. Dada aap mob mentality ka rasta mat pakadiye, aapki is post se mujhe mob-mentality ki boo aa rahi hai. Main koi mfh ka pakshadhar nahi hoon aur mere vichar se ek aisa aadmi agar yahan se gaya to isse behatar koi baat nahi hai.

  30. March 11, 2010 at 2:54 pm

    ला(न)त…..ला(न)त…..ला(न)त…..

  31. avenesh said,

    March 11, 2010 at 3:38 pm

    bharat maa hum sarminda hai..m.f husain zinda hai….

  32. Dhananjay said,

    March 11, 2010 at 4:48 pm

    अरे भई माय फुट हुसैन को देने के लिए मेरे पास सिर्फ ये ही है. कृपया पास ऑन कर दें:%^($&*(#*(&*#&#&#*&$#*(&$*$@^@^@#%$%#$#%*$(%$%*$)(%&$*%#*$^#*$&#*$^#*$#*($^$%@#%$#%$%#%#%!&^!!@#@$@!%$##$%^&*^^%@#!@$$………..अभी खत्म नहीं हुई है……

  33. nitin tyagi said,

    March 12, 2010 at 7:36 am

    aaj kal sahi news blogs par hi milti hain saare news papers aur elecrronic media bekar ho chuke hain

  34. March 12, 2010 at 3:32 pm

    राजनैतिक शह और तमाम तरह के लटकेझटकों के कारण हुसैन इतने "बडे" कलाकार बन गये कि उनकी पेंटिगें एक एक करोड में बिकती हैं. लेकिन यदि उस व्यक्ति ने चित्रकला में जिस नजरिये का परिचय दिया है वह देशस्नेही कतई नहीं है. आजादी के नाम पर ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करना एक तरह का देशद्रोह है.सस्नेह — शास्त्रीहिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती हैhttp://www.IndianCoins.Org

  35. March 14, 2010 at 7:49 am

    भाई सुरेश जी एक बड़ी दिक्कत आ रही है और समझ नहीं आता क्या करू. मित्र जब भी मैं अपना ब्लॉग टिप्पणी के लिया क्लिक करता हु तो यह साईट खुल जाती है http://www2.searchresultsdirect.com/parking.php4?domain=wizom.net&registrar=273212&keyword=business+blogs&eq=b9099e3dcf27913db7c387c4f7cb40d7&ac300=1. क्या यह कोई वाइरस है और इसका इलाज क्या है. मैं बड़ा परेशां हूँ और आप से समाधान की उमीद करता हूँ.http://parshuram27.blogspot.com/

  36. Indra said,

    March 14, 2010 at 5:55 pm

    हिन्दोस्तान में अभी भी हुसैन की पैरवी करने वाले बहुत मिल जायेंगे, वो ज्यादा खतरनाक हैं बजाये हुसैन के. क्योंकि इन्ही की शह पर कोई दूसरा हुसैन भी तैयार हो रहा होगा .

  37. March 17, 2010 at 9:49 pm

    सूअर को हमेशा गन्दी चीजें ही पसंद आती हैं, उसकी आदत जो ठहरी | तमाम अंग्रेजी मीडिया और तथाकथित बुद्धिजीवी लोगों (जो हुसैन कि पेंटिंग में महान कला देखता है) सूअर जैसे ही हैं जिन्हें गन्दी चीजें ही भाती हैं |हुसैन निश्चित तौर पे मानसिक बिमारी का शिकार है |

  38. March 21, 2010 at 5:09 pm

    Lets ask him, if he can paint his sister or mother or wife naked and term it as art….

  39. awyaleek said,

    April 5, 2010 at 7:23 am

    उसने अपनी माँ के स्तनपान का सिर्फ़ अपमान ही नही किया होगा बल्कि निश्चित रूप से उसने अपनी माँ को लेकर अश्लील हरकतें सोचकर मजा लिया होगा.रही बात भारत माँ के अपमान की तो उस हुसैन जैसे एक पागल क्या ळाखों मिलकर भी कुछ बिगाड़ नही सकते.जैसे अकाश में थूकने से थूक उसी के मुँह मे आकर गिरती है वैसे ही येलोग भारत माँ का कुछ बिगाड़ने के बजाय अपनी ही हानि करेंगे.हिन्दु लोग चुप इसलिये बैठे हैं कि वो महान हैं और उनके पुज्यनीय देवी-देवता भी..उन्हें पता है कि चित्र बना देने से उनका कुछ नही बिगड़ने वाला..ये इनलोगों की तुच्छ मनसिकता है जो वो ऐसा समझ रहे हैं और इस तरह की नादानी कर रहे हैं..गंगा में लाख गन्दगी बहा लो वो अभी भी निर्मल ही है.वो तो साक्षात इस पृथ्वी पर हैं फ़िर भी उनका कुछ नहीं बिगड़ा तो जो दिखाई भी नहीं पड़ रहे उनका क्या बिगड़ जायेगा……

  40. rohit said,

    April 9, 2010 at 8:56 am

    MUJHE YE SOCH KR BURA LG RHA KI HMARE BHARAT MAI KUCH AISE LOG B HAI JO AISE LOGO KI PAINTING KARIDTE HAI.USKE SATH SATH WO LOG B GADDAR HAI JO USE PROTSHAN DE RHE HAI OR USME ITNI HIMMAT PADA KR RHE HAI. AGAR KOI USKI PAINTING NHI KHARIDE GA TO EK DIN WO KHUD B KHUD BANANA BND KR DEGA.HM AAPKE SATH HAI…. YUR SWEET FRIEND………

  41. Rakesh said,

    June 10, 2011 at 8:43 am


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