वर्षप्रतिपदा ( 16 मार्च 2010 ) विक्रम संवृत् 2067

नूतन वर्षाभिनन्दन

मिलकर वैभव के शिखर चढ़े , सब सीमाओं के पार बढ़े ।
मानव चिर सुख के पाठ पढ़े , ॠषि चरणों मे शरणागत हो
नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो , नव वर्ष तुम्हारा स्वागत हो ।

  • विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवम विज्ञानसम्मत काल गणना के आरम्भ का यह पवित्र दिन हमारे ह्र्दय मे हिन्दू होने का गोरवमयी भाव जाग्रत करे ।
  • माँ वसुधा का यह जन्मदिन हमारे ह्र्दय मे “ वसुधेव कुटुम्बकम ” एवम “ पुत्रो अहम प्रथिव्या ” की भावना का संचार करे ।
  • नवरात्रि का आरम्भ ओर शकारि विक्रमादित्या विजय महोत्सव का यह पुनीत दिवस हमारे ह्र्दय मे शौर्य एवम पराक्रम का भाव जाग्रत करे ।
  • मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम के राज्याभिषेक का यह पावन दिन राष्ट्र मे राम राज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करे ।
  • संत झूलेलाल एवम सरदार अंगद देव जी का जन्मदिन तथा आर्य समाज की स्थापना का यह मंगलमय दिवस हमारे जीवन मे सात्विक भावों को जाग्रत करे ।

भेद भाव अंधकार मिटाकर

सहयोगी हम सब के हो ।

असत तज सत्य पर चले ,

नव जीवन ज्योतिर्मय हो ॥
दीन दुखी गिरिजन ,

वनवासी सबको गले लगाये ।

राष्ट्र भक्ति , समरसता का भाव बढ़े ,

संकल्पों का एसा दीप जलाये हम ॥

इन्हीं आकांक्षाओं के साथ नव संवतसर मंगलमय हो

‘जय भारत वन्दे मातरम्

आपका शुभेच्छु
विवेक साखँला
http://viveksankhala.blogspot.com

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