नित्यानन्द स्वामी के बहाने नरेन्द्र मोदी पर हमला :- NDTV की चालबाजियाँ और "मिशनरी" की भूमिका… … Nityanand Swami, Narendra Modi, Anti-Hindu Media Bias

दक्षिण भारत में फ़िलहाल एक हंगामा मचा हुआ है, नित्यानन्द स्वामी को चेन्नई पुलिस ने एक सीडी और शिकायत के आधार पर गिरफ़्तार किया है। ऐसा आरोप हैं कि नित्यानन्द स्वामी के कई महिलाओं से सम्बन्ध रहे हैं और एक तमिल अभिनेत्री के साथ उनकी अश्लील सीडी उन्हीं के आश्रम में उनके शिष्य रह चुके एक व्यक्ति ने बनाई है। यह तो हुआ मूलरूप से बना हुआ केस, लेकिन जैसा कि हमेशा होता आया है, भारतीय मीडिया ने इस कहानी में प्रारम्भ से ही “हिन्दुत्व विरोधी रंग” भरना शुरु कर दिया था।

प्रणव “जेम्स” रॉय के चैनल NDTV ने सबसे पहले नित्यानन्द स्वामी के साथ नरेन्द्र मोदी की तस्वीरें दिखाईं और चिल्ला-चिल्लाकर नरेन्द्र मोदी को इस मामले में लपेटने की कोशिश की (गुजरात के दो-दो चुनावों में बुरी तरह से जूते खाने के बाद NDTV और चमचों के पास अब यही एक रास्ता रह गया है मोदी को पछाड़ने के लिये)। लेकिन जैसे ही अगले दिन से “ट्विटर” पर स्वामी नित्यानन्द की तस्वीरें गाँधी परिवार के चहेते एसएम कृष्णा और एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी दिखाई दीं, तुरन्त NDTV का मोदी विरोधी सुर धीमा पड़ गया (हालांकि ढेर सारे “हिन्दू विरोधी पत्रकार” अभी भी लगे हुए हैं इसे चबाने में)। नित्यानन्द के स्टिंग ऑपरेशन मामले को सही ठहराने के लिये NDTV ने नारायणदत्त तिवारी वाले मामले का सहारा लिया और दोनों को एक ही पलड़े पर रखने की कोशिश की। जबकि तिवारी एक संवैधानिक पद पर थे, उन्होंने राजभवन और अपने पद का दुरुपयोग किया और तो और होली के दिन भी वह लड़कियों से घिरे नृत्य कर रहे थे। नित्यानन्द जो भी कर रहे थे अपने आश्रम के बेडरूम में कर रहे थे, बगैर किसी प्रलोभन या दबाव के, इसलिये इन दोनों मामलों की तुलना तो हो ही नहीं सकती। नित्यानन्द अगर दोषी है तो सजा मिलनी ही चाहिये…  (हालांकि जैसे-जैसे धागे सुलझ रहे हैं मामला संदिग्ध होता जा रहा है, क्योंकि पता चला है कि पुलिस को सीडी देकर आरोप लगाने वाला व्यक्ति “कुरुप्पन लेनिन” एक धर्म-परिवर्तित ईसाई है और यह व्यक्ति पहले एक फ़िल्म स्टूडियो में काम कर चुका है तथा “वीडियो मॉर्फ़िंग” में एक्सपर्ट है)।

अब आते हैं मुख्य मामले पर, 6M (मार्क्स, मुल्ला, मिशनरी, मैकाले, माइनो और मार्केट) के हाथों बिके हुए भारतीय मीडिया ने स्वामी नित्यानन्द को सीडी सामने आते ही तड़ से अपराधी घोषित कर दिया है, ठीक उसी तरह जिस तरह कभी संजय जोशी को किया था (हालांकि बाद में सीडी फ़र्जी पाई गई), या जिस तरह से  कांची के वयोवृद्ध शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को तमिलनाडु की DMK सरकार ने गिरफ़्तार करके सरेआम बेइज्जत किया था। जब भी कोई हिन्दू “आईकॉन” किसी भी सच्चे-झूठे मामले में फ़ँसे तो मीडिया उन्हें “अपराधी” घोषित करने में देर नहीं करता… और इस समय किसी मानवाधिकारवादी के आगे-पीछे कहीं से भी “कानून अपना काम करेगा…” वाला सुर नहीं निकलता। जैसे ही मीडिया में आया कि मालेगाँव धमाके में पाई गई मोटरसाईकिल साध्वी प्रज्ञा की थी (जो काफ़ी पहले उन्होंने बेच दी थी), कि तड़ से “हिन्दू आतंकवाद” नामक शब्द गढ़कर हिन्दुओं पर हमले शुरु…। फ़िर चाहे जेल में कसाब और अफ़ज़ल ऐश कर रहे हों, लेकिन साध्वी प्रज्ञा को अण्डे खिलाने की कोशिश या गन्दी-गन्दी गालियाँ देना हो… महिला आयोग, नारीवादी संगठन सब कहीं दुबक कर बैठ जाते हैं, क्योंकि मीडिया ने तो पहले ही उन्हें अपराधी घोषित कर दिया है। भारत के कितने अखबारों और चैनलों ने वेटिकन और अन्य पश्चिमी देशों में चर्च की आड़ में चल रहे देह शोषण के मामलों को उजागर किया है? चलिये वेटिकन को छोड़िये, केरल में ही सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं कितने लोगों को पता है… और वेटिकन तो अब इस तरफ़ काफ़ी आगे बढ़ चुका है, उधर सिर्फ़ महिलाओं के ही साथ यौन शोषण नहीं होता बल्कि पुरुषों के साथ भी “गे-सेक्स” के मामले सामने आ रहे हैं… द गार्जियन की खबर पढ़िये…

http://www.guardian.co.uk/world/2010/mar/04/vatican-gay-sex-scandal

बेंगलूरु के मठ वाले नित्यानन्द दोषी हैं या नहीं यह बाद में पता चलेगा, लेकिन उनके बहाने नरेन्द्र मोदी पर हमला करने का सुख(?) प्राप्त कर लिया गया, और यदि नित्यानन्द वाकई दोषी है तो उसे फ़ाँसी की सजा मिलनी चाहिये, यह माँग करने वालों की भीड़ भी जुट गई है, परन्तु इस बात पर कोई ध्यान नहीं देना चाहता कि जिस प्रकार कांची के शंकराचार्य और उड़ीसा के स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती धर्म परिवर्तन और ईसाई एवेंजेलिस्टों के खिलाफ़ मुहिम चलाये हुए थे, ठीक वैसे ही नित्यानन्द भी धर्म परिवर्तन की राह में रोड़ा बने हुए हैं, ऊपर से वह पिछड़ी जाति से भी आते हैं, ऐसे में भला करुणानिधि कैसे उन्हें सहन कर सकते थे। अरे भाई जब करुणानिधि हिन्दुओं के प्रतिष्ठित गुरु शंकराचार्य से नहीं डरे तो नित्यानन्द किस खेत की मूली हैं? जब मीडिया मेहरबान तो गधा पहलवान। अब रही बात सीडी की, तो कम्प्यूटर तकनीक के इस आधुनिक युग में कुछ भी सम्भव है… क्योंकि ऐसी भी खबर है कि जिस समय नित्यानन्द की यह सीडी बनाई गई उन्हें खाने में कोई ड्रग दिया गया था, परन्तु हिन्दुओं पर हमले करते समय चैनल/अखबार किसी बात का तटस्थ या तथ्यपूर्ण विचार नहीं करते, सिर्फ़ अपने “6M आकाओं” के आदेश का पालन करते हैं।

लेकिन किसी ऐसे पादरी की खबर “जेम्स” रॉय का चैनल नहीं दिखायेगा, जिसने एक अल्पवयस्क लड़की के साथ ज्यादती की और उसकी हत्या करवा दी (जबकि नित्यानन्द ने रंजीता के साथ उसकी मर्जी से सम्बन्ध बनाया होगा, उसकी हत्या नहीं की)। खबरों के अनुसार कोझीकोड के नीलाम्बर स्थित एक क्रिश्चियन होस्टल की स्कूली छात्रा अनु का शव पाया गया था जिस सम्बन्ध में पथनापुरम माउंट टबोर के फ़ादर(?) केजे जोसफ़ की गिरफ़्तारी हुई है। होस्टल की सहेली के बयानों के मुताबिक अनु के साथ बलात्कार और यौन शोषण की पुष्टि हो चुकी है, उसकी मौत चूहामार दवा खाने से हुई, लेकिन पुलिस को शक है कि यह विष उसे जबरदस्ती खिलाया गया है।

http://www.keralanext.com/news/2010/03/05/article104.asp

अनु की बहन ने दो पादरियों पर उसके यौन शोषण का आरोप लगाया है, इस पर पुलिस ने कहा है कि मामले में और भी गिरफ़्तारियाँ हो सकती हैं।

अरे रे रे रे रे, क्या कहा, आपको केरल के सिस्टर अभया हत्याकाण्ड की याद आ गई? स्वाभाविक बात है। उस केस में भी तो ऐसा ही कुछ हुआ था… 1992 में सिस्टर अभया की हत्या हुई थी, उसका भी यौन शोषण हुआ था, चर्च की ताकत द्वारा मामले को दबाने और उलझाने की वजह से 18 साल बाद भी अभया के परिजनों को न्याय नहीं मिल पाया है, ज्यादा जानना चाहते हैं तो इसे पढ़िये… (क्योंकि ऐसी खबरें “जेम्स” रॉय का NDTV आपको नहीं देगा…)

http://en.wikipedia.org/wiki/Sister_Abhaya_murder_case

और इसे पढ़िये…

http://www.rediff.com/news/2008/nov/19sister-abhaya-case-kerala-two-priests-held.htm

दिल्ली की जामा मस्जिद का अतिक्रमण हटाने के हाईकोर्ट के निर्णय की धज्जियाँ देखी हैं कभी किसी चैनल पर?

http://www.encyclopedia.com/doc/1P3-1134197141.html

प्रारम्भिक सदमे के बाद नित्यानन्द स्वामी के भक्तों ने भी मोर्चा संभाल लिया है और सन टीवी के कर्ताधर्ताओं से पूछा है कि क्या सन टीवी ने यह वीडियो टेप प्रदर्शन से पहले जाँच लिया था कि यह सही है या नहीं? क्या सन टीवी ने इस टेप को लेकर पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज की? क्या चैनल ने कभी इस बात की पुष्टि करने की कोशिश की है कि आश्रम की जिस ज़मीन को लेकर वह हंगामा खड़ा कर रहा है, वह ज़मीन स्वामी के बंगलुरू स्थित एक भक्त ने दान में दी है? क्या चैनल ने स्वामी अथवा आश्रम के नाम पर ज़मीन के आधिकारिक रिकॉर्ड देखे हैं? वह वीडियो जिस कमरे में शूट किया गया है, वैसा कोई कमरा आश्रम में है ही नहीं, फ़िर इसकी शूटिंग कहाँ हुई? क्या वीडियो में दिखाया गया व्यक्ति स्वामी नित्यानन्द ही है? चैनलों ने सबसे पहले दिन अभिनेत्री रंजीता का चेहरा छिपा क्यों दिया था? यदि यह सब प्रायोजित नहीं था तो चैनल पर इस खबर के प्रसारित होने के 5 मिनट के अन्दर ही आक्रोशित लोगों(?) की भीड़ ने आश्रम पर हमला कैसे कर दिया? भीड़ ने हमले के दौरान आश्रम में रह रहे हिन्दू भक्तों और महिलाओं से बदतमीजी क्यों की? उल्लेखनीय है कि चैनल सन टीवी और नक्कीरन अखबार में हेडलाइन यही थी कि फ़र्जी स्वामी नित्यानन्द सेक्स स्कैण्डल में फ़ँसे, यानी इन्होंने बगैर किसी जाँच या मुकदमे के स्वामी को तुरन्त दोषी ठहरा दिया और हल्ला मचा दिया… असल में यह चाल काउण्टर बैलेंसिंग कही जाती है। पिछले एक वर्ष में अमेरिका में चर्च ने ननों के शारीरिक और मानसिक शोषण और बच्चों के साथ पादरियों के यौन मामलों में लगभग 6 करोड़ डालर का मुआवज़ा चुकाया है तथा पोप सतत देश-दर-देश उनके द्वारा नियुक्त पादरियों के कुकर्मों की माफ़ी माँगते घूम रहे हैं। इसलिये भारत में हिन्दू धर्मगुरुओं को खासकर निशाना बनाया जा रहा है ताकि बैलेंस बना रहे, लेकिन भारत का मीडिया चर्च के कुकर्मों को सामने लाने में हमेशा पीछे ही रहा है।

इस बात को काफ़ी पहले ही साबित किया जा चुका है कि जहाँ एक ओर भारत में इस्लाम का प्रसार जेहाद, जोर-जबरदस्ती और आतंक के जरिये किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चर्च का प्रसार, चालबाजियों, दुष्प्रचार, पैसों के लालच पर धर्म-परिवर्तन और मीडिया के उपयोग द्वारा किया जा रहा है, ऐसे खतरनाक हालातों में सभी हिन्दू धर्मगुरुओं और खासकर बाबा रामदेव को अत्यधिक सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि वे तो लुटेरी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का भी भारी नुकसान कर चुके हैं और उनके निशाने पर हैं… सो आने वाले दिनों में हमें हिन्दू धर्म के अन्य प्रतीकों और धर्माचार्यों के किस्से-कहानियाँ-स्कैण्डल सुनने को मिलें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिये…

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक भारत में मिशनरी संस्थाओं का सबसे अधिक ज़मीन पर कब्जा है कभी मीडिया ने हल्ला मचाया? माओवादियों और नक्सलवादियों के कैम्पों में महिला कैडर के साथ यौन शोषण और कण्डोम मिलने की खबरें कितने चैनल दिखाते हैं? लेकिन चूंकि हिन्दू धर्मगुरु के आश्रम में हादसा हुआ है तो मीडिया ऐसे सवालों को सुविधानुसार भुला देता है, और कोशिश की जाती है कि येन-केन-प्रकारेण नरेन्द्र मोदी या संघ या भाजपा का नाम इसमें जोड़ दिया जाये, या और कुछ नहीं मिले तो हिन्दू संस्कृति-परम्पराओं को ही गरिया दिया जाये। मीडिया और सेकुलरों के लगातार जारी इस दुष्प्रचार और दोगलेपन को समय-समय पर प्रकाशित और प्रचारित किया ही जाना चाहिये, जनता को बताना होगा कि ये लोग किस तरह से पक्षपाती हैं, पक्के हिन्दू-विरोधी हैं। इस काम के लिये बड़ी मात्रा में विदेशों से हवाला और NGOs के जरिये पैसा आता है (एक हम हैं जो अपने ब्लॉग पर “डोनेट” का बटन लगाये बैठे हैं फ़िर भी कोई पैसा ही नहीं देता)।

लेख का सार यह है कि नित्यानन्द जो भी है, जैसा भी है अगर दोषी पाया गया तो (कानून के मुताबिक) सजा मिलनी ही चाहिये (उसी कानून? के मुताबिक जिसने सिस्टर अभया के हत्यारों को 18 साल बचाये रखा, उसी कानून? के मुताबिक, जिसने अफ़ज़ल की फ़ाँसी अब तक रोक रखी है), लेकिन इस बहाने हिन्दुओं और सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश का मुँहतोड़ जवाब दिया जायेगा। मीडिया की एकतरफ़ा चालबाजियों का एक उदाहरण हाल में देखा जा चुका है जब चैनलों के बीच कृपालु महाराज को दोषी और भगोड़ा ठहराने की होड़ सी लगी थी, कृपालु महाराज चाहे जैसे भी हों अपने किये की सजा भुगतेंगे ही। लेकिन किसी चैनल ने यह पूछने की ज़हमत नहीं उठाई कि कांग्रेस द्वारा 55 साल तक राज करने के बाद, उत्तरप्रदेश से अधिकतम प्रधानमंत्री होने के बावजूद, दलितों की मसीहा मायावती और विप्र सिंह के अवतरित होने के बावजूद, वहाँ के दलित इतने गरीब क्यों हैं कि सिर्फ़ एक थाली, लड्डू और कुछ रुपयों के लिये हजारों की संख्या में जमा हो जाते हैं?

“दीवार” फ़िल्म का एक डायलॉग याद आता है, इंस्पेक्टर रवि कहता है “दूसरों के पाप गिनाने से तुम्हारे अपने पाप कम नहीं हो सकते, दूसरों के जुर्म बताने से ये सच्चाई नहीं बदल जाती कि तुम भी एक मुजरिम हो…”। जी हाँ, बिलकुल सही बात है…… लेकिन जब एक ही पक्ष (हिन्दू) के जुर्म बार-बार बताये जायेंगे, एक ही पक्ष (हिन्दू धर्म) को बार-बार प्रताड़ित किया जायेगा, हिन्दू प्रतीकों-त्योहारों-संस्कारों-संतों को बार-बार अपमानित किया जायेगा, सिर्फ़ इसलिये कि तुम्हारे पास “चैनल” और “अखबार” की ताकत है, तब हम जैसे आम आदमी ब्लॉग ही तो लिखेंगे ना… (भले ही आलोक मेहता और मृणाल पाण्डे जैसे तथाकथित बड़े पत्रकार ब्लॉग को कचरा लेखन मानते हों)… क्योंकि अभी हमारे दिमागों में ऐसे संस्कार नहीं आ पाये हैं कि “धर्म खतरे में है…” कहते ही हम पत्थर और तलवारें लेकर सड़कों पर निकल पड़ें…। हाँ, एक बात तो तय है कि मीडिया लगातार ऐसी ही हिन्दू विरोधी खबरें दिखाता रहे तो कभी न कभी ऐसे “संस्कार” भी आ आयेंगे, और फ़िर उस दिन क्या होगा, कहना मुश्किल है…

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33 Comments

  1. vedvyathit said,

    March 17, 2010 at 8:29 am

    bhai sahb n d t v mrks vadiyo ke svr me nhi hookega to fir us ka kya kam rh jayega use ye ek hthiyar ki trh istemal kr rhe hai desh droh ka is se achchha aur kya upyog ho skta hai nrendr modi hi nhi inhe to hindoo dhrm se hi nfrt hai inke pass n to isaiyon ke karname hain n hi muslmano ke aaj tk to un ke vishy me kuchh kha nhi hai aur n hi aage bhi khenge hindoo vichark vhan jana pta nhi kyon bnd nhi krte aakhir kuchh to krna hi pdega duryodhn yoon hi kb tk aage bdhta rhega yh poore smaj ka dayitv hai ki vh is bare me soche pr hindoo smaj pta nhi kb jagega aap is or pryas rt hai aap ko sadhuvad dr.ved vyathit

  2. March 17, 2010 at 8:45 am

    सुरेश भाई, भारत देश तो सदियों से ही भाषा, प्रान्त, जात पांत में बंटा हुआ था. फिर लोकत्रंत्र की मेहरबानी से अब दोगली निति, दोगला कानून, प्रतिभा का दोगला सम्मान (आरक्षण) बस सब मुद्दों पर सब धर्मो के लिए कानून अलग अलग है और फिर हम गर्व से कहते है कि हमारा देश एक है. जिसको फ़साना है उसके लिए कानून द्रुत गति से काम करता है अन्यथा कानून अपनी रफ़्तार चलता है. सही लिखा आपने, ये सचमुच मंथन करने वाली बात है की पांच करोड़ की माला पहनने वाली दलितों की मल्लिका के राज्य में "आज दलित इतने गरीब क्यों हैं कि सिर्फ़ एक थाली, लड्डू और कुछ रुपयों के लिये हजारों की संख्या में जमा हो जाते हैं". बांटो और राज करो की नीति अंग्रेजो से ली गई है. जब तक देश में एक कानून नहीं होगा ये यूँ ही बटा रहेगा और इन टुच्चे नेताओ की दुकानदारी चलती रहेगी. लोग अगर गरीब नहीं रहे तो ये उज्जड, फूहड़ नेता किस के नाम पर वोट मांगेगे.

  3. March 17, 2010 at 8:46 am

    इस देश में मौजूद जेम्सो ने भी मौकापरस्ती सीख ली है कि कैसे मालामाल हुआ जा सकता है ! इन्हें देश-धर्म से कुछ भी नहीं लेना देना ! अभी कुछ दिन पहले एक जूनियर जेम्स का लेख भी लोगो ने पढ़ा होगा क्या जरदस्त हेडिंग लगाईं थी अगले ने !

  4. March 17, 2010 at 9:05 am

    हमाम में सब नंगे है. मगर नंगाई हिन्दु संतों की सुर्खियां बन रही है क्योंकि यह भी आस्था बदलवाने का ही रास्ता है. एक बार आस्था टूटती है तो परिवर्तित करवाना आसान हो जाता है. बेशक यह एक षड्यंत्र है वहीं पांखड़ी बाबा हिन्दुओं के लिए खतरा बन गए है.

  5. 1122 said,

    March 17, 2010 at 9:55 am

    सुरेश जी हो सकता है की नित्यानंद स्वामी निर्दोष हों लेकिन अगर इन मताधीशो और कथित स्वामियों तथा पादारीओं पर आरोप लगते हैं तो कुछ तो सत्यता ज़रूर होगी इसका सीधा कारण यह है इन्हे मात्र १० वर्ष की आयु मे ही दीक्षा देकर सन्यासी बना दिया जाता है जैसे जैसे ये युवावस्था की ओर बढ़ते है सेक्स की चाहत बलवती होती जाती है जिसकी पूर्ति ये छिपे चोरी मासूम लड़कियो को अपना शिकार बना कर करते है आप इनके काम भावना को कब तक दबाएँगे मे तो कहता हूँइन कामाचरी बाबाओ को सन्यास छोड़कर गृहस्त हो जाना चाहिए लेकिन क्या करें साहब हुँने भी तो इन्हे इतना आराम दे रखा है जैसे बिने कुछ किए महगी कारो मे घूमना आलीशान महल इत्यादि आख़िर कौन अपनी सुविधाएँ बंद करनाचाहेगा

  6. nikhil said,

    March 17, 2010 at 10:40 am

    bahut hi hansi aur taras aa raha hai aapki budhi par yeh lelh padh kar

  7. kunwarji's said,

    March 17, 2010 at 11:01 am

    '1122' bhaisahaab ya bahan ji ya jo kuchh bhi ho aap,hum dhanya huye aap se ye tatv-gyaan le kar!kunwar ji,

  8. March 17, 2010 at 11:18 am

    sadma !!!!!!!

  9. March 17, 2010 at 12:33 pm

    धर्म, अर्थ, काम से गुज़रे बिना मोक्ष नहीं मिलता. बाबाओं को क्या देखना.. पोथी-पुराणों में कई स्कैंडल है हमारे मुनियों के.. मुस्लिम महापुरुषों और अन्य धर्मों में भी ऐसे ही कई उद्धरण भरे पड़े हैं.. ऐसे में कथित प्राचीन पुरुषों की शुचिता के मोहपाश से निकलकर वर्तमान देखना अवश्यमभावी है. नैतिकता लादने की चीज़ नही है. वर्तमान संदर्भ में 1122 का कहना सही प्रतीत हो रहा है. जब मुफ्त में कई बालाएं भोगने मिल जाती हों तो शादी कर कौन झंझट पाले. फिर क्या पता लोग गृहस्थ बाबा के लिए वैसी श्रद्धा रखे भी या नहीं.

  10. March 17, 2010 at 12:49 pm

    @ 1122 – यहाँ बहस इस बात पर है ही नहीं कि कौन सा साधु-सन्त भ्रष्ट या कामातुर है या नहीं… पोस्ट का मूल भाव यह है कि NGOs के जरिये भारी मात्रा में पैसा आ रहा है जिसे "हिन्दू विरोधी गतिविधियों" में लगाया जा रहा है और मीडिया इसमें सक्रिय रूप से शामिल है, तथा पूरी तरह से पक्षपाती है… @ निखिल – यदि आपको हँसी आ रही है तब जरूर हँसिये, हँसना स्वास्थ्य के लिये लाभकारी होता है, खून बढ़ता है, और मेरी पोस्ट से आपका 5 ग्राम खून भी बढ़े तो यह मेरे लिये और आपके लिये अच्छी बात है… आगे भी ऐसी पोस्ट लिखने की कोशिश करूंगा ताकि आप ताज़िन्दगी हँसते रहें… @ नीरज भाई – मेरा भी यही कहना है कि सभी धर्मों में ऐसे कुसंस्कारी बाबा-पादरी-मौलाना मिल जायेंगे, लेकिन जिस तरह से पिछले 10 साल में मीडिया ने एकतरफ़ा तरीके से हिन्दुत्व के खिलाफ़ मुहिम चला रखी है, उसका विरोध होना ही चाहिये…

  11. March 17, 2010 at 1:11 pm

    मैं साधारणतया टिपण्णी तो करता नहीं हूँ, पर आज का आपका लेख वाकई किसी ब्रह्मोस से कम मारक नहीं है.

  12. psudo said,

    March 17, 2010 at 1:54 pm

    Suresh Ji, I think final aim of all this exercise BABA Ramdev only. Now they know they can not directly attach and harm him. So they are using a classic technique used in marketing. called Association. Lets say you like Sachin Tendulkar. Now its very likely that you would also like things “ associated” with him. Tell me if you think about Modi , its very hard not to remember 2002 Riots. Even when most probably he is innocent. Why is that? As media in all its power showed Modi and 2002 riots , again and again. together So now these guys are working on word “BABA”. That’s the reason you hear word BABA again and again in all news channels.

  13. March 17, 2010 at 2:10 pm

    धूर्त राजनीतिबाजों को सबसे अधिक खतरा बाबा रामदेव से है, इसलिये वह धीरे-धीरे उन्हें निशाना बनाने के लिये सीढ़ियां बना रहे हैं. अभी अभी तेज पर बताया जा रहा था कि डेनिश कार्टूनिस्ट ने "मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचायी थी". यह है धर्मनिरपेक्षता मीडिया की…

  14. nitin tyagi said,

    March 17, 2010 at 2:11 pm

    हम अभी स्वतंत्र नहीं हुए हैं |हम अभी भी दास ही हैं |अंग्रजों के बाद काले अंग्रज़ शासन कर रहें हैं |हिंदुओं को एक करने वाले ये संत ही हो सकते हैं इसलिए अब ये निशाने पर हैं |

  15. March 17, 2010 at 2:19 pm

    @ Pseudo जी – आपने कम शब्दों में मेरे लेख का सार सामने रख दिया है, आपका बहुत धन्यवाद। मेरा भी यही कहना है कि अब सबसे अधिक खतरा बाबा रामदेव की छवि को ही है, ऊपर से उन्होंने राजनीति में कूदने का मन भी बना लिया है तब ये खतरा दोगुना हो जाता है। मीडिया के द्वारा लगातार दिमाग पर प्रहार करके नकारात्मक माहौल बनाया जा रहा है ताकि कान्वेंट में पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी के मन में "बाबा-संत" नाम सुनते ही एक विलेननुमा चित्र उभरे। जैसा कि बेंगाणी जी ने कहा, "एक बार आस्था को डिगा दो, बस फ़िर धर्म परिवर्तन करना आसान होता है…" और किसी भी नेतृत्व या साधु की हत्या करना अधिक प्रभावशाली नहीं होता, चरित्र-हत्या करने से वह व्यक्ति जल्दी खत्म हो जाता है। और 6M के हाथों बिका हुआ मीडिया फ़िलहाल यही कर रहा है…

  16. uthojago said,

    March 17, 2010 at 2:45 pm

    truth is truth

  17. March 17, 2010 at 3:01 pm

    सशक्त आलेख! लिखते रहें, लोगों में चेतना जरूर आयगी."जब मीडिया मेहरबान तो गधा पहलवान"मान गये!सस्नेह — शास्त्रीहिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती हैhttp://www.IndianCoins.Org

  18. the said,

    March 17, 2010 at 4:37 pm

    आपका कहना ठीक है, लेकिन आस्था की आड में भक्तों का मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण करने वाले ढोंगी बाबाओं से सावधान रहने की भी ज़रूरत है. नित्यानंद तो बडे स्वामी हैं, छोटे-मोटे और कम चर्चित बाबओं की कारस्तानियां तो आए दिन सुर्खियां बनती रहती हैं. हां, रामदेव जी इसके अपवाद हैं. सचमुच, रामदेव जी, श्रीश्री रविशंकर महाराज जसे संतों को अब षड्यंत्रों से अतिरिक्त सचेत रहना चाहिए.- लेकिन आप इस बात पर भी गौर करें कि विदेशों में भ्रष्ट पादरियों को कोई छूट नहीं मिली है, वहीं का मीडिया इन लोगों की कारस्तानियां सामने लाता है. यह एक प्रगतिशील समाज का लक्षण है, जो आंख मूंद्कर किसी पर भरोसा नहीं करता. हमें भी ऐसी नज़र विकसित करनी पडेगी, ताकि कोई बाबा-संत धर्म की छवि खराब न कर पाए. -Vicky G

  19. March 17, 2010 at 7:04 pm

    …आदरणीय सुरेश जी,यहाँ पर असहमति जताऊंगा आपसे, मैंने भी वीडियो देखा है नेट पर, खुद स्वामी नित्यान्द इस वीडियो को झूठा नहीं बता रहे… कह रहे हैं कि जब यह खींचा गया उस वक्त वह TRANCE में थे, बाकी जो भी मतलब आप निकालें, निकाल सकते हैं… नित्यानंद हों, भीमानंद या कृपालु महाराज इनको डिफेंड नहीं किया जा सकता है । अगर इस प्रकार की बातें खुल रही हैं/खोली जा रही हैं तो इस से हिन्दू धर्म का ही फायदा हो रहा है… कूड़े करकट के हाशिये में डलने से।सोचिये, क्या समय नहीं आ गया है जब ये बाबा लोग कुछ साहस दिखायें।

  20. March 17, 2010 at 7:22 pm

    मूल बात तो यही है….."एक बार आस्था को डिगा दो, बस फ़िर धर्म परिवर्तन करना आसान होता है…"बाकी मिडिया तो इन शक्तियों की सहभागी है….

  21. March 17, 2010 at 7:23 pm

    मूल बात तो यही है….."एक बार आस्था को डिगा दो, बस फ़िर धर्म परिवर्तन करना आसान होता है…"बाकी मिडिया तो इन शक्तियों की सहभागी है….

  22. March 18, 2010 at 4:00 am

    इस बहाने अगर अंधश्रद्धा, धर्म के नाम पर दुकान खोले दलाल और ब्राहमणवाद कुछ कम होता है तो इसमें हिन्दुओं का ही फायदा है. वैसे भी भारत को आज तथाकथित बाबाओं की नहीं बल्कि कर्मयोगियों की ज़रूरत है. हिन्दू समाज से कूड़ा कर्कट साफ़ होना ही चाहिए.

  23. March 18, 2010 at 4:32 am

    NDTV, CNN-IBN और 6M निर्देशित अखबारों – न्यूज़ चेनलों से निष्पक्ष की आशा करना ही मुर्खता है | सबसे पहले तो 6M निर्देशित अखबारों – न्यूज़ चेनलों का खुलेआम बहिस्कार किया जाए … आरम्भ अपने से ही करना है .. मैंने तो कब का NDTV, CNN-IBN देखना छोड़ दिया है |एक्का-दुक्का ( http://www.dailypioneer.com , statesman ..) को छोड़ कर बाकी सभी को बस सेकुलर बने रहेने की चिंता है … सत्य से इनका कोई लेना देना नहीं है |आपका प्रयास सराहनीय है, इसी तरह लगे रहिये … सत्य की विजय निश्चित है |

  24. March 18, 2010 at 4:33 am

    बाकी रंजना जी ने मूल बात कह दी है |

  25. March 18, 2010 at 5:01 am

    सहमत हूं आपसे जितना अभियान हिंदू धर्माचार्यों के खिलाफ़ चल रहा है वैसा या उसका अंशमात्र भी अन्य धर्माचार्यों के खिलाफ़ कभी देखने मे नही आया या यूं कहे तो उन पर मीडिया की कभी नज़र ही नही पडती।

  26. March 18, 2010 at 7:34 am

    राकेश जी कृपया इन चैनलों को देखना न छोड़ें, बल्कि इन पर दिखाये जा रहे कुप्रचार को खोलने का काम करें. यदि आप इन्हें देखेंगे नहीं तो इन पर क्या चल रहा है पता भी नहीं चलेगा.

  27. March 18, 2010 at 7:37 am

    सभी दक्षिण पूर्वी राष्ट्रों और अफ्रीका के धर्म तहेस नहस करके पिछले १२०० वर्षो से हिन्दुओ को ख़तम किया जा रहा है. और जो हिजड़े हिन्दू यह ही समझते है की यूनान मिश्र रोमा मिट गए जहं से हस्ती मिट ती नहीं हमारी जहं से वो नंगे और भिखमंगे है. जिस तरह से तुमे टट्टू बनाया हुआ है की बिना खरग बिना ढाल के आजादी मिलगई उसी प्रकार तुम हिन्दुस्तान से लतिया ते और धिक्यते भागादिये जओय्गे. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश, मलेशिया, इंडोनेसिया, कम्बोडिया, थाईलैंड, श्रीलंका, नेपाल, भूटान ये नए राष्ट्र तो तुम्हारे ही बाप के थे. तुम इनको छोड़ कर भी मानते हो इस दिल्ली के चारो तरफ सिमटने को हिंदुत्व की विजय. तुम्हारी अंतड़िया का पानी भी सुखा दिया इन टीवी और विदेशी सत्ता ने राम मंदिर बनाने के लिया और क्या बना लिया. देखा नहीं एक आराध्य राम और एक लुटेरा और जीता कौन. इस लिए भूतनी (क्षमा करे इस शब्द के लिया क्योंकि और चारा नहीं) के कई ब्लोगर हिन्दुओ के छाती पर चड़कर राम और सीता की बाकायदा फोटो भी लगा कर हमे उपदेश दे रहे है.हिन्दू खतरे माँ नहीं बल्कि मर चूका. अब तुम नंगे हो और सिर्फ और सिर्फ कपडे पेहेनेने का अभिनीय मात्र कर रहे हो.एन डी टीवी और सभी तो भडवे है. और भड्वो ने बाकायदा सुपारी ले रखीhttp://parshuram27.blogspot.com/

  28. March 18, 2010 at 10:20 am

    हम अपनी छाती का खून निकाल कर इनके खिलाफ मोर्चा खोले, खून बहाए. अगर इनके हाथ खून से नहीं रंगे तो इनके पैर जरूर खून में सने होंगे.हम विरोध करें खुलकर करें, अपना खून बहाकर करें.

  29. March 18, 2010 at 2:00 pm

    @त्यागी-त्यागी जी की बात बहुत ध्यान से पढ़ने योग्य है. हिन्दुओं के लिये यही घुट्टी पिलाई जा रही है कि तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता और धीरे-धीरे सफाया किया जा रहा है..

  30. ePandit said,

    March 20, 2010 at 12:57 pm

    पाखण्डी बाबाओं पर कार्यवाही होनी ही चाहिये। लेकिन ये बात भी ध्यान देने योग्य है कि ऐसे बाबाओं के मामले सामने आने की संख्या अचानक बढ़ क्यों गयी है?मैडम सोनिया और चर्च के इशारे पर मीडिया खोज-खोजकर हिन्दू बाबाओं के मामले सामने ला रहा है ताकि लोगों का सभी हिन्दू धर्मगुरुओं से विश्वास उठ जाय।यही मीडिया इस तरह की हरकत करने वाले मौलवी-पादरियों के बारे में क्यों नहीं लिखता/दिखाता।

  31. avenesh said,

    March 21, 2010 at 12:04 pm

    kyo nahi aap jaise rastravaadi log mill kar apna chainal suru karte….aaz nahi to kal saphalta mill hi jayegi…iske liye blog se baher nikal kar muhim chalaiye….rahi baat paise ki to is sandarbh me.. malviya g se prarda ligiye…hindu univercity k liye kish tarah unhone pryas kiya…. aap log v kuch is tarah kariye…kavel bpog per 6m ko dhikkarne se kuch nahi hone vala hai. suresh g..

  32. March 22, 2010 at 7:42 pm

    बेंगानीजी, रंजना जी और त्यागी जी की बात से सहमत. अवनीश जी की चैनल वाली सलाह भी प्रासंगिक है.मेरे लिए हमेशा ही एक प्रश्न रहस्य बना हुआ है. अगर कोई साथी इसका निराकरण करे तो आभारी रहूंगा…-वीपी सिंह के समय न्यू दिल्ली टेलीविजन महज दो एंकरों के सहारे चलता था. प्रणव जेम्स रॉय और विनोद दुआ हुआ करते थे.-ठीक १० साल बाद यह स्टार न्यूज का कंटेंट सप्लायर हुआ करता था. उस दौरान हिन्दुओं को कोसकर राजदीप सरदेसाई ने अच्छी दूकान चलाई.-गुजरात दंगो के ठीक बाद एन डी टी वी न्यूज चैनल लौंच हुआ. यानी करीब आठ साल पहले. इसके बाद एनडीटीवी २४ x ७, एन डी टी वी प्रोफिट, इमेजिन, ट्रावेल और लाइफ स्टाइल जैसे आधे दर्जन से अधिक चैनल ८ साल में ही शुरू होगये…!!अब सवाल ये है कि एक चैनल शुरू करने में ही करोडो रुपये लग जाते हैं. तो अचानक इतने कम समय में इतने सारे चैनल शुरू करने के लिए एन डी टी वी के पास धन कहाँ से आया?? और किसी टाटा, बिड़ला और अम्बानी ने तो इसमे पैसा नहीं लगाया है. अब कौनसे 'एम्' ने निवेश किया है…माइनो, मिशनरी, मैकाले, मुल्ला, मार्क्स …ने??यह शोध और जिज्ञासा का विषय है.

  33. Amit Sharma said,

    March 23, 2010 at 2:13 am

    मिडिया थोड़े ही है यह रंडीखाना बन गया है,जहां मिडियाकर्मी रूपी वेश्याये पैसे के इशारों पे नंगा नाच दिखा रहे है


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