जावेद अख्तर और मणिशंकर अय्यर को राज्यसभा सीट – संयोग है, बेशर्मी है, या साजिश है?…… Javed Akhtar, Manishankar Aiyyar, Modi Bashing Reward

हाल ही में देश की “अब तक की सबसे मजबूत और होनहार राष्ट्रपति” श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने राज्यसभा के लिये पाँच सदस्यों का नामांकन किया है। जिसमें से दो प्रमुख व्यक्ति हैं मणिशंकर अय्यर और गीतकार जावेद अख्तर…। यह राष्ट्रपति का विवेकाधिकार(??) और विशेषाधिकार है कि वह अपने कोटे से किन पाँच ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों को राज्यसभा के लिये नामांकित करे। बाकी के तीन नाम तो ध्यान आकर्षित नहीं करते क्योंकि वे जायज़ हैं उनकी उपलब्धियाँ भी चमकदार हैं, लेकिन इन दोनों महानुभावों के नाम चौंकाने वाले और निंदनीय हैं। हालांकि अब पद्म पुरस्कारों अथवा राज्यसभा सीट की न तो कोई इज्जत रह गई है, न ही कोई प्रतिष्ठा, यहाँ पर “अंधा बाँटे रेवड़ी” वाली मिसाल भी लागू नहीं की जा सकती, क्योंकि रेवड़ी बाँटने वाले अंधे-बहरे नहीं हैं, बल्कि बेहद शातिर हैं।

पहले बात करेंगे अय्यर साहब की…, जैसा कि सभी जानते हैं अय्यर साहब खुलेआम वीर सावरकर को गरिया चुके हैं… वैसे तो ये साहब बड़े विद्वान कहलाते हैं, लेकिन अंडमान निकोबार की सेल्यूलर जेल में भी इन्हें सावरकर की उपस्थिति सहन नहीं होती। ये सज्जन भी पिछले लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में अपनी सीट पर बुरी तरह लतियाये गये और चुनाव हारे। चलो हार गये तो कोई बात नहीं, अर्जुन सिंह भी तो तीन-तीन चुनाव हारने के बावजूद सत्ता के गलियारे में अतिक्रमण किये बैठे ही रहे, अय्यर साहब भी उसी तरह राज्यसभा में घुस जाते। लेकिन मणिशंकर अय्यर साहब के इस ताज़ा मामले में पेंच यह है कि इन्हें राष्ट्रपति ने “मनोनीत” किया है। असल में राष्ट्रपति अपने विशेषाधिकार के तहत पाँच ऐसे लोगों को मनोनीत कर सकता है जिन्होंने समाज, कला, खेल, संगीत आदि क्षेत्रों में विशेष उल्लेखनीय योगदान दिया हो, जावेद अख्तर साहब को तो गीतकार होने के नाते जगह मिल गई, बाकी के तीन लोग भी अपने-अपने क्षेत्र के जाने-माने लोग हैं, लेकिन जिस रास्ते से लता मंगेशकर, दिलीप कुमार, जावेद अख्तर, या अन्य कोई कलाकार राज्यसभा में प्रवेश करते हैं, उस मनोनीत हस्तियों वाले कोटे में घुसपैठ करने के लिये अय्यर साहब की “क्वालिफ़िकेशन” क्या है? जी हाँ सही समझे आप, वह क्वालिफ़िकेशन है, हिन्दुत्व को जमकर गरियाना, सावरकर को भला-बुरा कहना और इतालवी मम्मी की चमचागिरी करना…। यहाँ देखें

लेख की सबसे पहली लाइन में मैंने श्रीमति प्रतिभा पाटिल की शान में कसीदे काढ़े हैं, उन्हीं “विशिष्ट गुणों” का पालन करते हुए जो लिस्ट उन्हें सोनिया मैडम ने थमाई थी, वही पाँच नाम उन्होंने नामांकित कर दिये, एक बार भी पलटकर नहीं पूछा कि “जब मणिशंकर अय्यर को उनके मतदाता नकार चुके हैं और तमिलनाडु में द्रमुक ने कांग्रेस को अपने हिस्से की एक राज्यसभा सीट देने का वादा भी किया है, तब कलाकारों, खिलाड़ियों, समाजसेवकों, संगीतज्ञों के लिये आरक्षित इन 5 सीटों में घुसपैठ करने की क्या जरूरत आन पड़ी थी?” लेकिन मैडम से कौन सवाल-जवाब कर सकता है (अपने आप को देश के बड़े-बड़े पत्रकारों में शुमार करवाने वाले स्टार पत्रकारों, सबसे तेज़ चैनल चलाने वालों आदि में से किसी की भी औकात नहीं है कि मैडम का एक “सही ढंग का” इंटरव्यू ले सकें), तो इस तरह अय्यर साहब को सरकार ने बड़ी बेशर्मी से “पुनर्वास पैकेज” दे दिया।

अब हम आते हैं “संयोगों की लम्बी सीरीज” पर… जावेद अख्तर साहब एक बेहतरीन गीतकार हैं और सलीम-जावेद की जोड़ी ने कई हिट फ़िल्में भी दी हैं, लेकिन जिस दिन से जावेद साहब ने गुजरात सरकार के खिलाफ़ सोहराबुद्दीन और इशरत जहाँ समेत बाकी के सभी एनकाउंटरों की जाँच की माँग को लेकर 2007 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, उसी वर्ष उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिये पद्मभूषण मिला, और अब इन्हें राज्यसभा की सीट से भी नवाज़ा गया है। “सेकुलर्स” कहेंगे कि यह तो संयोग है, लेकिन जावेद अख्तर जैसा मामला कोई अकेला मामला नहीं है। जिस वर्ष जावेद अख्तर को पद्मभूषण दिया गया उसी साल तीस्ता जावेद सीतलवाड को भी “न्याय हेतु संघर्ष” के लिये पद्मश्री बाँटा गया। तीस्ता के NGO “सिटीज़न्स फ़ॉर पीस” का गठन 2002 के गुजरात दंगों के बाद किया गया था (और इस संस्था ने सिर्फ़ 5 साल में ही इतना बड़ा काम कर दिखाया कि तीस्ता को पद्मश्री दी जाये)… यह और बात है कि विशेष अदालत ने यह पाया कि तीस्ता जावेद ने जो शपथ-पत्र (Affidavit) लगाये थे वह फ़र्जी थे, और एक जैसी भाषा में, एक ही जगह बैठकर, एक ही व्यक्ति द्वारा भरे गये थे, लेकिन पद्मश्री फ़िर भी मिली, क्योंकि तीस्ता ने “अपना काम” बखूबी निभाया था। क्या यह भी संयोग है?

ऐसी ही एक और हस्ती हैं प्रसिद्ध नृत्यांगना मल्लिका साराभाई, जो कि अपने नृत्यकला के साथ-साथ नरेन्द्र मोदी विरोध के लिये भी जानी जाती हैं, इन मोहतरमा को भी पद्मभूषण “बाँटा” गया, सन् 2009 में इससे उत्साहित होकर और मुगालता पालकर इन्होंने लोकसभा में आडवाणी के खिलाफ़ चुनाव लड़ा, बुरी तरह हारीं, नरेन्द्र मोदी दोबारा चुनाव जीते, लेकिन इनकी ऐंठ अब तक नहीं गई। मल्लिका मैडम को पहले नृत्यकला के लिये पद्मश्री मिल चुका था, लेकिन अब मोदी-भाजपा विरोध के लिये पद्मभूषण भी मिल गया। क्या यह भी संयोग है?

एक और सज्जन हैं न्यायमूर्ति वीएन खरे, यह साहब भारत के उच्चतम न्यायालय के भूतपूर्व न्यायाधीश हैं, और गोधरा काण्ड के बाद हुए दंगों को लेकर माननीय जज साहब ने कहा था कि “गुजरात सरकार राजधर्म निभाने में पूरी तरह नाकाम रही है”, अपने रिटायरमेण्ट के बाद एक इंटरव्यू में खरे साहब ने कहा कि “गुजरात में स्टेट मशीनरी पूरी तरह विफ़ल है”, इसी के बाद तीस्ता जावेद सीतलवाड ने कई याचिकाएं दायर करवाईं। खरे साहब के कार्यकाल में ही बेस्ट बेकरी काण्ड के 21 अभियुक्तों के खिलाफ़ दोबारा केस खोला गया… अन्ततः जस्टिस वीएन खरे साहब को सामाजिक क्षेत्र में विशेष योगदान(?) के लिये 2006 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान “पद्मविभूषण” मिल गया…(इसके बाद सिर्फ़ भारत रत्न बचा है)। शायद ये भी संयोग ही होगा…

(कुछ ऐसा ही भीषण संयोग हाल ही में केरल में देखने में आया था, इस लिंक पर देखें)
http://blog.sureshchiplunkar.com/2010/02/blog-post_21.html

कृपया अभी से नोट कर लें, अगले साल के पद्म पुरस्कारों की लिस्ट में “स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT)” के प्रमुख श्री राघवन साहब का नाम शामिल होगा। ऐसे “विशिष्ट संयोग” यूपीए सरकार के कार्यकाल में जब-तब होते ही रहे हैं… जैसे राजदीप सरदेसाई, बुर्का दत्त… सॉरी बरखा दत्त, तहलका के तरुण तेजपाल… लिस्ट लम्बी है… लेकिन जिस-जिस ने नरेन्द्र मोदी-भाजपा-संघ-हिन्दुत्व को गरियाया, परेशान किया, झूठ बोल-बोलकर, गला फ़ाड़-फ़ाड़कर अपने-अपने चैनलों, अखबारों, संस्थाओं, फ़र्जी NGOs आदि के द्वारा यह “पावन-पुनीत” कार्य किया, उसे मैडम ने कुछ न कुछ “ईनाम-इकराम” अवश्य दिया। जब से यूपीए सत्ता में आया है, तभी से यह परम्परा स्थापित करने की कोशिश की जा रही है कि नरेन्द्र मोदी और हिन्दुत्व पर कीचड़ उछालने में जो लोग सबसे अगुआ रहेंगे, उन्हें सरकार की ओर से या तो किसी पद्म पुरस्कार से नवाज़ा जायेगा, या फ़िर राज्यसभा सीट देकर पुरस्कृत किया जायेगा, यदि कोई फ़र्जी NGOs चलाते हों तो भारी अनुदान, चैनल चलाते हों तो विज्ञापन, अखबार चलाते हों तो फ़ोकट की ज़मीन और कागज़ का कोटा इत्यादि दिया जायेगा… और यह भी संयोगवश ही होगा।

हाल ही में एक और नया शिगूफ़ा आया है… “प्रशान्त” नामक NGO चलाने वाले फ़ादर फ़्रेडेरिक प्रकाश (एक और ईसाई) ने दावा किया है कि गुजरात दंगों में नरेन्द्र मोदी के शामिल होने के पक्के सबूत के रूप में वह जल्दी ही कुछ चुनिंदा “वीडियो क्लिपिंग” जारी करेंगे, इन वीडियो टेप की शूटिंग “तहलका” ने की है…।

अब कोई मूर्ख या नकली सेकुलर ही होगा, जो कि एक ईसाई फ़ादर, NGO, वीडियो टेपों के इतिहास (नित्यानन्द स्वामी, संजय जोशी जैसे) तथा तहलका, के नापाक गठजोड़ को समझ ना सके… (खबर इधर है)
http://news.rediff.com/report/2010/mar/22/ngo-claims-its-godhra-footage-proves-modis-role.htm

जिस तरह से इलेक्ट्रानिक मीडिया ने 21 मार्च को SIT के सामने मोदी के पेश होने की झूठी कहानी गढ़ी और नरेन्द्र मोदी द्वारा पत्र लिखकर दिये गये स्पष्टीकरण तक को प्रमुखता नहीं दी, इससे इनका चेहरा पिछली कई बार की तरह इस बार भी बेनकाब हो गया है। पिछले 8-10 दिनों से लगातार लगभग सभी चैनलों-अखबारों के कुछ “भाण्डनुमा”, जबकि कुछ “बोदे और भोंदू किस्म” के पत्रकारों द्वारा नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ लगातार विषवमन किया गया है, लेकिन बरेली के दंगों के बारे में आपको किसी चैनल या अखबार में कवरेज नहीं मिलेगा। नेहरु डायनेस्टी टीवी जब तक दिन में एक बार गुजरात और मोदी को जी भरकर कोस न ले, वहाँ काम करने वालों का खाना नहीं पचता, लेकिन जीटीवी, आज तक, NDTV या कोई अन्य चैनल हो, किसी ने बरेली जाना तो दूर, उसका कवरेज देना-दिखाना भी उचित नहीं समझा, मौलाना तौकीर रज़ा खान का नाम लेना तो बहुत दूर की बात है।

तो भाईयों-बहनों, आईपीएल की तरह एक बड़ा “ऑफ़र” खुला हुआ है – नरेन्द्र मोदी-भाजपा-संघ (या हिन्दुत्व) को गरियाओ तथा पद्म-पुरस्कार या राज्यसभा सीट पाओ…। जो लोग इस ऑफ़र में “इंटरेस्टेड” नहीं हैं, वे यह सोचें कि भारत के “बीमार”, चाटुकार और भ्रष्ट मीडिया का क्या और कैसा इलाज किया जाये? तथा कांग्रेस नामक “कैंसर” की दवा क्या हो?

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26 Comments

  1. March 25, 2010 at 8:43 am

    मुखिया द्वारा विदेश से शादीकर गोरी मेम लाने का चाटुकार चमचो को सबसे बड़ा फ़ायदा यही तो होता है ! 🙂

  2. March 25, 2010 at 8:48 am

    इंडिया टुडे के अनुसार महामहिम प्रतिभा पाटिल जी की राष्ट्रपति चुनाव के समय सबस बङी योग्यता यही मानी गई थी कि वे नेहरू परिवार की विश्वसनीय हैं….किसी समय इस परिवार की रसोई पर इन्हीं का कब्जा था….ऐसे राष्ट्रपति से औऱ क्या अपेक्षा रखते हैं…..

  3. March 25, 2010 at 8:51 am

    क्योंकि तीस्ता ने “अपना काम” बखूबी निभाया था…सा'ब निभाया नहीं था..निभा रही है. यहीं डेरा जमा रखा है. एक नाम और है. एक न्यायाधिश अपने कार्यकाल के एक दिन पहले मोदी को लपेटा और तुरंत मेडम ने नवाजा. नाम व काम अगली टिप्पणी में बताएंगे. फिलहाल तो कल ही एक पत्रकार के साथ गप्पबाजी चल रही थी तब बातें निकली कि किस तरह मोदी के राजनीतिक केरियर की हत्या में पादरी, मेडम, कॉग्रेस, एनजीओ, चैनल मिल कर काम कर रहे है. लेकिन वे गलती कर रहे है, मोदी गया तो उसका बाप आएगा. गुजरात भाजपा में मोदी भरे पड़े है. आखिर इसी धरती ने दयानन्द, श्याम कृष्ण, सरदार पटेल दिये है.

  4. March 25, 2010 at 8:54 am

    चिंताजनक……..तो है ही………………………यह पोस्ट केवल सफल ब्लॉगर ही पढ़ें…नए ब्लॉगर को यह धरोहर बाद में काम आएगा…http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_25.htmlलड्डू बोलता है ….इंजीनियर के दिल से….

  5. March 25, 2010 at 9:26 am

    दंगों में हिन्दु व मुस्लिम मरे थे, फिर फादर को मुसलमानों के लिए इतना दर्द क्यों? मैं बताता हूँ. यहाँ के आदिवासी क्षेत्रों में हिन्दु संगठन शानदार काम करते है, "मिश्नरी फोर कंवर्जन" का काम संकट में है. हाल में ईसाईयों के पूनः हिन्दु बनने की घटनाएं सामने आयी है. अब फादर ला दर्द समझ में आ रहा है? हे भगवान उन मोदी विरोधी हिन्दुओं के ज्ञान चक्षु अब तो खोलो…. वे अनजाने में दुष्टों का साथ दे रहे हैं.

  6. March 25, 2010 at 9:27 am

    यहाँ देशद्रोही hi मंत्री व sansad……..बनते है. सप्रग की पिछली सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे मणिशंकर अय्यर । इस सरकार में भी नेताजी मैडम के दूत बनकर जगह जगह सोनिया गान करते घूम रहे है। मणिशंकर का चरित्र एक ऐसे राष्ट्रद्रोही का रहा है,जिसको कभी छमा नही किया जा सकता। १९६२ में जिस समय चीन ने भारत पर आक्रमण किया था,उस समय ये नेता लन्दन में पढ़ाई कर रहा था। पूरा का पूरा देश इस आक्रमण से शोकग्रस्त था। गाँव गाँव व नगर नगर से भारतीय सैनिको के लिए धन एकत्र किया जा रहा था। परंतु लन्दन में ये देशद्रोही कुछ और ही खेल खेल रहा था। अय्यर व इसके साथी भी सैनिको के लिए चंदा एकत्र कर रहे थे किंतु वो जो धन एकत्र कर रहा था,वो भारतीय सैनिको के लिए नही बल्कि चीनी सेना के लिए धन एकत्र कर रहा था। उसकी इस बात का नेहरू को भी पता था।क्यो कि जिस समय अय्यर का चयन इंडियन फ़ौरन सर्विस में हुआ था, तो देश की सबसे बड़ी जासूसी संस्था आई बी ने प्रधानमंत्री कारालय को एक पत्र लिखा,तथा उपरोक्त बात का हवाला देते हुए उसके चयन पर रोक लगाने को कहा। परन्तु देश के इस महान? नेता ने भी अय्यर का पक्ष लेते हुए उसके चयन को मान्यता दे दी। यदि यही कार्य किसी और देश का व्यक्ति करता तो निश्चय ही उस देश का क़ानून उसे कड़ी से कड़ी सजा देता। परंतु एक देशद्रोही भारत में ही मंत्री व sansad……………………………… बन सकता है।

  7. March 25, 2010 at 9:28 am

    "मिश्नरीज फोर कंवर्जन" यह शब्द भी मैने घड़ा व बहुत बार उपयोग में लिया है. [आपकी पिछली पोस्ट से इसका सम्बन्ध है, सुची में जोड़ लें]

  8. March 25, 2010 at 12:01 pm

    सुरेश जी अपनी शब्दों की लिस्ट में एक नारा और जोड़ ले ,"सोनिया जिसकी मम्मी है,वो सरकार निकम्मी है."

  9. March 25, 2010 at 12:18 pm

    @तो भाईयों-बहनों, आईपीएल की तरह एक बड़ा “ऑफ़र” खुला हुआ है – नरेन्द्र मोदी-भाजपा-संघ (या हिन्दुत्व) को गरियाओ तथा पद्म-पुरस्कार या राज्यसभा सीट पाओ…। जो लोग इस ऑफ़र में “इंटरेस्टेड” नहीं हैं, वे यह सोचें कि भारत के “बीमार”, चाटुकार और भ्रष्ट मीडिया का क्या और कैसा इलाज किया जाये? तथा कांग्रेस नामक “कैंसर” की दवा क्या हो? यह षड्यंत्र तो कांग्रेस के अस्त्तित्व से ही चालू है, कांग्रेस एक ऐसा कैंसर है जो भारत की धमनियों में लगातार अपनी जड़ें मजबूती से फ़ैला रहा है और देश को दिन-प्रतिदिन बीमार करता जा रहा है, इस कैंसर का इलाज यदि जल्दी नहीं हुआ तो भारत एक कैंसर रोगी की तरह ही एक भयानक दर्दनाक मौत से मरेगा.

  10. March 25, 2010 at 12:50 pm

    मुल्ला, मिनशनरी, मैकाले की संतान, माओवादी, देश को तोड़ने की अपनी कोशिश में कामयाब होते दिख रहे हैं. दुनिया में एक ही तो हीं हिंदु बहुल देश बचा है. उसे भी ये अजगर निगल लेना चाहते हैं. यहीं वजह है कि पॉप का पैसा अबाध रूप से देश में आ रहा है. देश को तोड़ने में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. सत्ता पर कुंडली जमाये लोगों का इन पर मौन समर्थन है, उन्हीं का कृपा प्रासाद से ये सत्ता सुख भोग रहे हैं.ऐसे में हमारी क्या भूमिका हो सकती है, इस पर फिर से विचार करना होगा.

  11. March 25, 2010 at 12:51 pm

    होनहार राष्‍ट्रपति, सामर्थ्‍यवान प्रधानमंत्री और विदुषी माताश्री के राज में ऐसे ही कीर्तिपुरुषों को राज्‍यसभा की सदस्‍यता और पद्म पुरस्‍कार मिलते हैं। हम लोगों में आपके द्वारा आवेदित योग्‍यता नहीं है तो हम स्‍वयं को अपने नामांकन से निरस्‍त करते हैं।

  12. Dhananjay said,

    March 25, 2010 at 1:24 pm

    आज ही सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश में ४% मुस्लिम कोटे पर अपनी मुहर लगा दी है. जल्द ही ये बीमारी सारे राज्यों में फैलने वाली है.

  13. March 25, 2010 at 1:32 pm

    श्री सुरेश जी दिक्कत यह है की इतना होने के बाद हिन्दू को लतियाने गिरयाने बेहताशा महंगाई बढ़ने के बाद भी न कही आन्दोलन न कही कोई समस्या. सिर्फ आप जैसे लोग ही इन फालतू की बात को उठा कर क्यों चिरनिंद्रा में सोये कार्टून टाइप के सफ़ेद खून को लाल करने की गुस्ताखी कर रहे हो.हिन्दुओ का पुराना इतिहास है सब लुट ने के बाद जगता है और फिर बावले कुत्ते की तरहे भोंकता है क्योंकि यह ही कलयुग है.सभी बुरी चीजे अच्छी है.सोनिया आज कोई नेता नहीं रही एक जीती जगती देवी है.और बाकी उसके भगत. कौन टेनशन ले.जब सब कुछ पैसा ही है तो फिर राणा सांघा जैसे घास की रोटी खाए तो क्या. कुछ नहीं.इन बावले हिन्दुओ के सामने ४% आरक्षण मुसलमानों को देदिया, कल ४० भी होजायेगा. हिन्दू कुत्ते के तरह हिंदुस्तान से भगा दिया भी जायेंगे परन्तु.अब चीर काल तक सोनिया एक देवी ही बनी रहेगी.और एक बात इसकी कोई गारेंटी नहीं की तीसिरी बार कांग्रेस नहीं आयेगी.कांग्रेस ने कम से कम अगले २० साल का जुगाड़ कर लिया है. अब आपकी या मेरे नाम की सुपारी भी दी जा सकती है. क्योंकि इन भडवो सेक्लूरो को पुरुस्कार देने के बाद होंसला इतना आ चूका हिन्दुओ और उनके हितेषियो को अब ठिकाने लगाना शुरू किया जायेगा. मोदी आज नेता नहीं एक आइकोन है उसको निशाना बना कर हिन्दुओ के अंतड़ियो का पानी सुखाया जा रहा है.अब तो अमिताभ भी निशाने पर अगया. http://parshuram27.blogspot.com/

  14. March 25, 2010 at 3:53 pm

    हिन्दू ही अपना अहित करने पर तुले हैं. वोटर इसे रोक सकते हैं लेकिन आपसे में लड़ने से मौका मिले तब न. एक जयचन्द, एक मीरजाफर और एक विभीषण ने क्या कर दिया अब तो करोड़ों में हैं.

  15. March 25, 2010 at 6:37 pm

    सुरेश जी हर एक ब्लॉगर ने आपकी बात का समर्थन खुले दिल से किया है। मुझे डरहै कहीं इस ब्लॉग.कॉम पर सरकार रोक न लगा दे। आपकी बेबाकी का मैं कायल हूँ। सच्चे दिल से।

  16. PD said,

    March 25, 2010 at 10:27 pm

    क्या आइडिया आया है अभी.. मैं चला मैडम को मेल लिखने इस ब्लॉग के खिलाफ, अपना पुरस्कार(छोटा-मोटा ही सही) पक्का कराना है.. (-:

  17. March 26, 2010 at 4:33 am

    लोगों के दिलों कोई महत्त्व या सम्मान रह गया पद्म पुरस्कारों का? इस तरह के जुगाड़ से प्राप्त रेवड़ियों से बस थोड़ी सरकारी रियायतें मिल जाती हैं, इज्ज़त नहीं.

  18. kunwarji's said,

    March 26, 2010 at 5:30 am

    pd bhai sahaab,mere hastaakshar bhi karwaate jaana….kunwar ji,

  19. March 26, 2010 at 6:21 am

    वैसे तो मम्मी की पोल किसी से छुपी नहीं है, फिर भी बिगड़े और पथ्भ्रस्त माँ के लाडले उर्फ़ चमचे उर्फ़ काग्रेसी इम्पोर्टेड मम्मी और उस भोंदू बेटे को सर पर हगाने का कोई मौका छोरते नहीं है. कई भी बात हो तो इन दोनों गाय बछरे की तारीफ़ के कसीदे पढ़ने में कोई भी चमचा खुद को हारता हुआ बर्दास्त नहीं कर सकता. अतः में आप के ब्लॉग के माध्यम से में उन बिगड़े और पथ्भ्रस्त माँ के लाडले उर्फ़ चमचे उर्फ़ काग्रेसी लोगो से पूंछना चाहता हूँ की बे कृपा कर जवाब दे की -१ सुरेश चिपलूनकर ने अपने इन लेखों मैं क्या क्या गलत लिखा है? * नेहरू-गाँधी राजवंश(?) * सोनिया गाँधी को आप कितना जानते हैं? (भाग-1) * सोनिया गाँधी को आप कितना जानते हैं? (भाग-2) * सोनिया गाँधी को आप कितना जानते हैं? (भाग-3) * सोनिया गाँधी को आप कितना जानते हैं? (भाग-4) * सोनिया जी ऐसी भी क्या दुश्मनी है?2. इम्पोर्टेड मम्मी और उस भोंदू बेटे में उन के nehru pariwear के sadasya hone के alawa kyaa yogytaa है?3. 150 saal puraanee kaangres में क्या इन दो अयोग्य लोगो से अधिक योग्य व् अनुभवी कोई काग्रेसी नहीं है. अगर नहीं तो वे अपने और अपनी पार्टी के बारे में स्वयं अताम्विवेचना करे की वे खुद कहाँ जा रहे हैं और देश को कहाँ ले जा रहे हैं४. ३५-४० साल बाद जब उन के अविवाहित राजकुमार रिटायर हो जाय गे तब बे किसे प्रधान मंत्री के रूप में प्रस्तुत करेगे? तब नेहरु गाँधी परिवार तो कोई बचेगा नहीं? बैसे मेरी राय है की नेहरु गाँधी के बाद सल्तनत – इ – हिंद का तखत वडेरा परिवार को सोंप दिया जाय तो कैसा रहे गा? वैसे इस के अलावा कोई चारा भी नहीं है

  20. March 26, 2010 at 6:58 am

    @Dikshit Ajay Kप्रश्न न. २. आपका गलत है क्योंकि राहुल गाँधी, नेहरु परिवार का है ही नहीं वो तो नवाब खान के परिवार का है, उस भोंदू के दादा कौन थे फिरोज खान और उसके भी बाप का नाम था नवाब खानजबकि उसका नाना इटली में है तो नेहरु से तो उसका कोई वास्ता ही नहीं है सिवाय इसके उसकी दादी का बाप है. मुझे भारत में या पूरे विश्व में एक आदमी भी ऐसा दिखादो जो अपने आप को दादी के बाप का वंशज बताता हो. यहाँ तक अधिकांश बहुत लोगो को अपने दादी के बाप का नाम पता भी नहीं होगा जैसे मुझे भी नहीं पता और शायद आपको भी नहीं पता होगा और जितने कांग्रेसी हैं वो भी जरा सोच कर बताये क्या उन्हें अपनी दादी के बाप का नाम पता है. अधिक से अधिक आदमी दादा से न सही नाना से अपने आप को जोड़ेगा जैसा कि मैंने अभी लिखा ही है और सब जानते भी हैं नाना उसके इटली में है तो किसी भी angle से वो नेहरु परिवार से नहीं आता.लकिन अब देखना मुर्ख और कांग्रेसी चमचे प्रियंका के लड़के को नेहरु परिवार का बताना शुरू कर देंगे बल्कि कर भी दिया है जैसा कि उन्होंने पूर्व में उसके पैदा होने पर मिठाइयाँ बांटी थी कि कांग्रेस का नया युवराज पैदा हुआ है. ये मूर्खता की पराकाष्ठा का उदाहरण है किन्तु फिर भी ये कांग्रेसी चमचे अपनी हरकतों से बाज नहीं आयेंगे और जवाब में बड़-बड़ ही करेंगे और इससे ज्यादा कुछ नहीं.और चलो एक बार को ये यदि नेहरु परिवार का होता भी तो भी ये कोई योग्यता का पैमाना ही नहीं है. एक बार को नेहरु के कामों को देखते हुए अयोग्यता का तो कहा जा सकता है योग्यता का तो बिलकुल भी नहीं.वैसे मैं आपकी बातों से सहमत हूँ.

  21. March 26, 2010 at 7:09 am

    नेहरु डायनेस्टी शुरू से ही विदेशी ताकतों और उनके मेहमान नवाजी का हिस्सा रहा है.इस परिवार का तो लालची विदेशियों(जो भारतीय सम्पदा को लुटने के उपक्रम करते रहते हैं) से रोटी-बेटी का सम्बन्ध है. उन्हें भला यहाँ के बहुसंख्यक का दर्द कैसे महसूस हो.रही बात पुरस्कार की वो तो पहले ही कह चूका हूँ – बेशर्मी की हद है.

  22. psudo said,

    March 26, 2010 at 7:41 am

    Well said suresh ji. But now what can you do about it? I suggest support ramdevji, he is only hope against this corrupt system.

  23. March 27, 2010 at 9:21 am

    हमने पहले कहा था कि एक नाम और है. एक न्यायाधिश अपने कार्यकाल के एक दिन पहले मोदी को लपेटा और तुरंत मेडम ने नवाजा. नाम व काम अगली टिप्पणी में बताएंगे. तो यह रहा नाम व काम अंग्रेजी में क्योंकि यह सेक्युलरों कि भाषा है: Justice Pasayat had ordered Modi's SIT investigation a day before his retirement.He was made Chairman of CAT on 6th day

  24. March 27, 2010 at 6:26 pm

    मल्लिका साराभाई का नाचने का धंधा है. किसके इशारे पे नाचती है वो तो खुदा जाने. हाँ उन्होंने अपनी दर्पण एकेडेमी बनाकर बाकी प्रतिभावान नृत्य अकादमियों को पछाड़कर दूरदर्शन में उसके लिए भारी स्लोट पाने का और मोटी कमाई का जुगाड़ जरूर बना लिया है.दूसरी शबनम हाशमी हैं. जिनके पति सफ़दर हाशमी को कोंग्रेस के गुंडों ने सरे आम मार दिया था. लेकिन आजकल कोंग्रेस की खैरात पर पल रही हैं. अनहद नाम से एक जेबी एनजीओ भी बना लिया है. पिचले गुजरात चुनाव में शबनम ने करीब एक साल तक गुजरात के आदिवासी इलाको में अपना डेरा जमाया था और आदिवासियों को शेष हिन्दू समाज के खिलाफ भड़काने जैसी सेवाएं दी थी. अगली बार राज्यसभा में इनका राज्याभिषेक होने की संभावना है.जों दयाल नामक एक मिशनरी समाज सेवा के धंधे की आड़ में अपनी दूकान चलाता है और एक और समाज सेवी ईसाई मेकवान भी है. जो हमेशा तथाकथित दलितों-आदिवासियों को शेष हिन्दू समाज के खिलाफ भड़काकर देश और समाज की सेवा कर रहे हैं. एनडीटीवी को तो माफिया डोन सोराबुद्दीन को मार देने पर उतना दुःख हुआ मानो शहीद भगत सिंह हो. लेकिन उसी एन्काउंतर में उदयपुर का एक हिन्दू तुलसीराम भी मारा गया था. जिसकी खबर कोई नहीं दिखाता. शायद वह हिन्दू (जानवर) था. और सोराबुद्दीन की तरह उसके कोई मानवाधिकार नहीं थे. आखिर चैनल भी जिसका खाते हैं उसका बजाते हैं…!यदि हिन्दू समाज अपने विरोधियो के प्रति इतना ही लापरवाह रहा तो वह दिन भी दूर नहीं कि अफजल गुरु और अजमल कसाब को भी हिन्दू-हिन्दुस्तान के कत्ले आम के लिए भारत-रत्न से नवाजा जाए.. वोट बैंक का सवाल है भाई.

  25. Dhananjay said,

    March 28, 2010 at 5:12 pm

    @जीत भार्गवसही उचारा है. अफजल गुरु साहेब भी जल्द ही राज्यसभा में बतौर सांसद नज़र आएंगे. और क्या पता कसाब भी…कांग्रेस के राज़ में कुछ भी मुमकिन है.मोदी का राजनीतिक खात्मा करने के लिए तो ये कमर कसे ही हुए हैं. देखें रामदेव का मब नंबर आता है….क्योंकि हम सिवाय देखने और इधर उधर टिप्पणी करने के शायद ही कुछ कर सकते हैं.

  26. ADITYA said,

    April 4, 2010 at 4:01 pm

    i am agree with all those comment


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