कतर में प्रसिद्ध इस्लामिक वेबसाईट पर अंकुश और सरकारी दखल… यानी MF हुसैन एकदम सही जगह पहुँचे हैं… Islamic Country, MF Hussain, Freedom of Expression

कतर की सरकार (जहाँ तथाकथित महान पेण्टर हुसैन गर्क हुए हैं) ने एक विश्वप्रसिद्ध इस्लामिक वेबसाईट पर अपरोक्ष दबाव बना लिया है और अब इसे “पूरी तरह” इस्लामिक बनाने का बीड़ा उठा लिया है। प्राप्त समाचार के अनुसार, शेख यूसुफ़ अल-करादवी नामक शख्स, “इस्लाम ऑनलाइन” नामक वेबसाईट चलाने वाली कम्पनी अल-बलाघ के प्रमुख थे (उनकी इस्लामिक बुद्धिजीवियों में काफ़ी इज़्ज़त की जाती है), उन्हें कतर सरकार ने तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। http://www.islamonline.net/English/index.shtml

अल-करादवी ने इस कम्पनी के साथ काफ़ी लम्बे समय तक काम किया और “इस्लाम ऑनलाइन” पर आने वाले सवालों को आधुनिक युग के अनुसार ढालने तथा युवाओं के प्रश्नों के उत्तर आधुनिक तौर-तरीकों से समझाने में सफ़ल रहे। अल-करादवी हमेशा से “सुन्नी विद्वानों”(?) के निशाने पर रहे, क्योंकि उन्होंने लड़के-लड़कियों की सह-शिक्षा पर जोर दिया, पश्चिमी मुस्लिमों से लोकतन्त्र में भाग लेने और उसे मजबूत करने की अपील की तथा सबसे बड़ी बात कि 9/11 के हमले की भी अपनी वेबसाईट पर निन्दा की। इस वेबसाईट पर इस्लाम से सम्बन्धित पूरा साहित्य उपलब्ध है तथा इसे लोकप्रिय बनाने में करादवी का खासा योगदान रहा, आज की तारीख में इसे 3,50,000 हिट्स रोज़ाना मिलते हैं। इस वेबसाईट पर एक “फ़तवा” कॉलम भी है, जिसमें विश्व के किसी भी कोने से विभिन्न धार्मिक (इस्लामिक) विषयों पर फ़तवों से सम्बन्धित राय ली जा सकती है, एवं वेबसाईट कला, स्वास्थ्य और विज्ञान सम्बन्धी पेज भी उपलब्ध करवाती है। इस वेबसाईट को सहयोग और दान देने वाले अधिकतर उदारवादी मुस्लिम अमेरिका और यूरोप के हैं तथा इसके काहिरा ब्रांच में कुछ गैर-मुस्लिम कर्मचारी भी हैं। (लेकिन उदारवाद को बर्दाश्त करने के लिये “संस्कारों” की भी तो आवश्यकता होती है…)

करादवी के सचिव का कहना है कि विगत कुछ वर्षों से उन पर इस वेबसाईट के Content को शासकों के मन-मुताबिक बदलने को लेकर दबाव था। हाल ही में हमारे संवाददाता को दोहा में हुए फ़िल्म फ़ेस्टिवल को कवर करने की इजाजत नहीं दी गई (क्योंकि यह गैर-इस्लामिक है), तथा मैनेजमेंट पर महिलाओं के स्वास्थ्य, फ़िल्मों तथा समलैंगिकता आधारित सवालों को न लेने अथवा दबा दिये जाने हेतु दबाव डाला जा रहा था। दोहा स्थित इसके मालिक इस वेबसाईट में “वांछित बदलाव” चाहते थे, जब इसका विरोध करते हुए 350 से अधिक कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने की धमकी दी, तो दोहा से उन सभी कर्मचारियों का साईट पर लॉग-इन प्रतिबन्धित कर दिया गया। फ़िलहाल बोर्ड के नये डायरेक्टर इब्राहीम अल-अंसारी ने कहा कि करादवी को “तनाव” की वजह से कार्यमुक्त कर दिया गया है।
(यहाँ पढ़ें… http://www.technologyreview.com/wire/24877/?a=f )

जी हाँ, कतर ही वह इस्लामिक “स्वर्ग” है जिसे MF हुसैन ने 95 साल तक भारत की रोटी खाने के बाद अपनाया है। अब इस बात का इन्तज़ार है कि “सेकुलर” हुसैन, कतर के शासकों की बहू-बेटियों के चित्र बनायें। मेरा प्रस्ताव है कि क्यों न भारत के कुछ प्रसिद्ध सेकुलरों को भी “हवा-पानी” बदलने के लिए कतर भेजा जाये? वहाँ जाकर शायद इन लोगों को “अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता” के मायने भी समझ में आ जायें।

वैसे अपुष्ट सूत्रों की मानें, तो हुसैन भारत से मुकदमों के डर की वजह से नहीं भागे हैं, बल्कि महंगी पेंटिंगों की बिक्री(?) की वजह से आयकर विभाग तथा प्रवर्तन निदेशालय उन पर शिकंजा कसने की तैयारी में थे। उच्च प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि “घोड़ों की घटिया सी पेंटिंग” करोड़ों रुपये में खरीदने के पीछे “ब्लैक एण्ड व्हाईट” मनी का खेल तथा हवाला कारोबारियों का भी हाथ है… कुछ ऐसा ही भण्डाफ़ोड़ जल्द ही IPL में भी होने वाला है क्योंकि जिस तरह से पैसे के इस घिनौने खेल में थरूर-केरल-कश्मीर-कोलकाता नाइटराइडर्स-शाहरुख खान-दुबई आदि कि चेन बनती चली जायेगी, वैसे-वैसे कुछ न कुछ नया सामने आयेगा।

बहरहाल, आईये हम हुसैन को “अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के स्वर्ग” में गर्क होने की शुभकामनाएं दें और दुआ करें कि कहीं सेकुलरों में उन्हें वापस बुलाने का मिर्गी दौरा दोबारा न पड़े…
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चलते-चलते : मेरे एक मित्र एक इस्लामिक खाड़ी देश में कार्यरत हैं (पार्टटाइम ब्लॉगर और कवि-लेखक भी हैं) (सुरक्षा कारणों से नाम नहीं बताऊँगा)। कुछ दिनों पहले उस इस्लामिक देश में एक कार्यक्रम में उन्होंने “हिन्दी” (हिन्दू नहीं) के प्रचार-प्रसार एवं कविता-साहित्य विमर्श सम्बन्धी अपनी गतिविधियों का ब्यौरा दिया। उस कार्यक्रम में उस “इस्लामिक देश के शिक्षा मंत्री”(?) भी मौजूद थे। कार्यक्रम समाप्ति के तुरन्त बाद मेरे मित्र की वेबसाईट और ब्लॉग को “सजा के तौर पर” 8 दिनों के लिये बन्द कर दिया गया, फ़िर शायद “शिक्षामंत्री” का गुस्सा ठण्डा हुआ होगा और अनुनय-विनय (तथा विस्तृत जाँच ???) के बाद उसे दोबारा चालू किया गया।

(अब भी यदि कोई “कट्टर” शब्द की परिभाषा जानना चाहता हो, तो इन उदाहरणों से सीख सकता है, जल्दी ही ऐसे दो और उदाहरण दूंगा… ताकि सेकुलर्स जान सकें कि हिन्दू बहुल देश में रहना कितना सुखकारी होता है)। एक बात तो माननी पड़ेगी, कि “जूते लगाने” के मामले में हिन्दू बड़े संकोची स्वभाव के हैं, इसीलिये भारत में सेकुलरों को खुलेआम हिन्दुत्व पर जोरदार तरीके से चौतरफ़ा गन्दगी फ़ेंकने की सहूलियत हासिल है…

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44 Comments

  1. April 15, 2010 at 9:31 am

    यह एक ऑपन सिक्रेट जैसा था कि टेक्स बचाने के लिए हुसैन भाग खड़ा हुआ. मगर इस मुद्दे पर चिल्लापौ की सम्भावना थी तो सेक्युलर फौज ने अपने हथियारों को धार देने का काम कर लिया. आइपीएल में पैसा किसका लगा है? कैसे होती है असली कमाई? कोई नहीं जानता. पैसा वाया मोरिशस आता है, उससे आगे का स्त्रोत अज्ञात रहता है.

  2. April 15, 2010 at 9:37 am

    कौन सा हिंदुत्व सुरेश जी और कैसा हिंदुत्व? आप किस हिंदुत्व की बात कर रहने हैं, उसी की जिसे चंद दिनों पहले लाल कृष्ण आडवानी ने कहा है कि उनसे और उन लोगों से (कच्छा-डंडा वालों से) हिंदुत्व की ग़लत परिभाषा बता डाली…. उन्हें जो दंभ भरते है राष्ट्रवाद का, उन्हें जो दंभ भरते हैं हिन्दू-हिंदुत्व का वे उनका ही एक बड़ा नेता, कार्यकर्ता कहता है कि जनता को हिंदुत्व की ग़लत परिभाषा बता डाली…अरे जब हिन्दू शब्द ही मुसलमानों की देन है तो फ़िर हिंदुत्व को क्या ख़ाक समझ पाएंगे कथित राष्ट्रवादी और जनसंघी~!!!!!!!!!

  3. April 15, 2010 at 9:42 am

    अगर सावरकर जी का पुनर्जन्म अफ़गानिस्तान में तालिबान समर्थक में हुआ तो इस बात की गारंटी कौन लेगा कि भारत के ख़िलाफ़ किसी भी आतंकी घटना में वे लिप्त नहीं होंगे??? और अगर ऐसा हुआ तो उस राष्ट्रवाद का क्या होगा जिसे वीर सावरकर अपने कथित खून पसीने से सींचा था !!!??

  4. April 15, 2010 at 9:58 am

    वैसे अपुष्ट सूत्रों की मानें, तो हुसैन भारत से मुकदमों के डर की वजह से नहीं भागे हैं, बल्कि महंगी पेंटिंगों की बिक्री(?) की वजह से आयकर विभाग तथा प्रवर्तन निदेशालय उन पर शिकंजा कसने की तैयारी में थे। उच्च प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि “घोड़ों की घटिया सी पेंटिंग” करोड़ों रुपये में खरीदने के पीछे “ब्लैक एण्ड व्हाईट” मनी का खेल तथा हवाला कारोबारियों का भी हाथ है… कुछ ऐसा ही भण्डाफ़ोड़ जल्द ही IPL में भी होने वाला है क्योंकि जिस तरह से पैसे के इस घिनौने खेल में थरूर-केरल-कश्मीर-कोलकाता नाइटराइडर्स-शाहरुख खान-दुबई आदि कि चेन बनती चली जायेगी, वैसे-वैसे कुछ न कुछ नया सामने आयेगा।satya kaha aapne .हुसैन को “अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के स्वर्ग” में गर्क होने की शुभकामनाएं

  5. April 15, 2010 at 10:01 am

    CBI ko chaihye ki saleem khan ki har gati vidhi par nazar rakhi jay.Rahi bat M/F ki to wo to tha hi bhagoda musalman bhag gaya.

  6. nikhil said,

    April 15, 2010 at 10:21 am

    jis kisi desh me shaasan padhati dharm ke naam par chalai jati hai wahan par kisi bhi kism ki azadi ki kalpana karna bemani hai,rahi baat hindu bahul desh me sukh se rahane ki to iski wajah me humare dharmnirpeksh samvidhaan aur loktantrik dhang se chuni gayi sarkar ko manta hun hindu bahulta ko nahi aur isi loktantra ko golvalkar aur godse ki aulade pani pi pi kar kosti hai,aur bharat ko qatar jaisa fundamentalist desh banane ki koshish me jee jaan se jut hai,aap bhi shayad yahi chahate hain.

  7. aarya said,

    April 15, 2010 at 1:40 pm

    सादर वन्दे !ये कुछ बीमार किस्म के लोग सच्चाई का आईना देखकर भड़क जाते हैं, अपनी फटी सिल नहीं पाते और जिनको नहीं जानते उनको भी कोस देते हैं, ये सलीम नाम की बीमारी जिनको कच्छा डंडा वाला कह रहा है वो राष्ट्र की बात करते हैं, और ये दोगली बात करने वाले देश को बाटने की बात करते हैं, खुद की सही पहचान ही नहीं है और हमारे पहचान की बात करते हैं.अरे मियां अपने घर को साफ करो दूसरों के लिए कुछ बोलने का समय ही नहीं बचेगा.रत्नेश त्रिपाठी

  8. April 15, 2010 at 1:47 pm

    @nikhil, kairanvi, anwar and saleem khan – आप सब भले मानुष कतर जाकर वहां भी इस उदारवादी विचारधारा को क्यों नहीं फैलाते… हिन्दुओं की समझ में तो कुछ आता ही नहीं… कम से कम आप लोग इन देशों में अपने बिरादरान को ही समझाकर धर्मनिरपेक्ष बना दें….

  9. April 15, 2010 at 2:42 pm

    नाराज़ होने की बात नहीं है भाईयों… सलीम की टिप्पणी उसके स्वभाव, शिक्षा और संस्कारों के मुताबिक ही है… पोस्ट के मुख्य मुद्दे से हटकर ऊटपटांग कमेंट लिखा गया है… मूल प्रश्न को दरकिनार करते हुए। यह इन लोगों की आदत है, क्योंकि इनके पास तथ्यों-तर्को-प्रमाणों-रिपोर्टों का बेहद अभाव है…। और अभाव तो होना ही है… आखिर सब कुछ "एक ही पुस्तक" में तो नहीं मिल सकता ना… 🙂

  10. April 15, 2010 at 2:53 pm

    अब आया समझ मे मक्बूल फ़िदा हुसैन का भारत से गुजर जाना . अल्लाह उन्हे सलामत रखे कयामत तक

  11. Dhananjay said,

    April 15, 2010 at 2:59 pm

    भारत के सारे सेकुलरों को ६ महीने क़तर जैसी जगहों में बिताने चाहिए. तब ही उन्हें 'अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता' और 'कट्टर' जैसी चीज़ों का असली मतलब पता चलेगा.और हाँ – हुसैन को “अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के स्वर्ग” में गर्क होने की बहुत बहुत शुभकामनाएं और साथ ही दुआ कि भारत के सारे सेकुलर भी वहीँ पर गर्क हों.

  12. ANAND said,

    April 15, 2010 at 3:54 pm

    आप सदैव मुस्लिमों के बारे में लिखकर कहीं उनकी Publicity तो नहीं कर रहे है ? चाहे Negative ही सही, लेकिन Publicity तो है ही….

  13. sleem said,

    April 15, 2010 at 4:09 pm

    sir seccularo ki gan…me bakaree doo rahe ho…dhaar bandha ke…chalane dijiye dhaar ko…

  14. impact said,

    April 15, 2010 at 6:03 pm

    कुछ ऐसा ही भण्डाफ़ोड़ जल्द ही IPL में भी होने वाला है क्योंकि जिस तरह से पैसे के इस घिनौने खेल में थरूर-केरल-कश्मीर-कोलकाता नाइटराइडर्स-शाहरुख खान-दुबई आदि कि चेन बनती चली जायेगी, वैसे-वैसे कुछ न कुछ नया सामने आयेगा।यह भंडाफोड़ चिप्लूकर साहब करने वाले हैं, उनकी अगली पोस्ट से इस चेन से सारे नाम गायब हो जायेंगे. रह जाएगा बस 'माई नेम इज खान.'

  15. Dhananjay said,

    April 15, 2010 at 6:19 pm

    @सलीम @आर्यसही है. एके-४७ और आर डी एक्स वालों के लिए स्वयंसेवक तो कच्छा-डंडे वाले ही हैं.

  16. April 16, 2010 at 1:35 am

    NICE POST.आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी की गई है-http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_6838.html

  17. April 16, 2010 at 1:55 am

    Agar aap suresh jee par ungali utha rahein hain..to ek baat dhyan rakhiye..YAHAN … BAKCHO** ke liye jagah nahi hai..kuchh bhi bolne se pahle socho, kitab (wahin apni kitab) kholo… khanghalo..kuchh mil jaye..to hamein bhi batao…JO SACH HAI WAH SACH HAI BHAI..kisi ki sulagati hai to apna kya karein..

  18. April 16, 2010 at 4:00 am

    बात हो रही थी क़तर और भारत में उदारता की तुलना की, कि कैसे क़तर और उसीके जैसे खाड़ी के देशों में सामाजिक कट्टरता पूरी तरह से हावी है । सच तो यह भी है कि भारत में भी कुछ कट्टर लोग हैं, पर यह भी सच है कि यह तथाकथित हिन्दू कट्टरवादिता दरअसल सरकार की वर्षो से चली आ रही अल्पसंख्यक तुष्टिकरण नीति का ही फल है । इसमें सलीम खान जैसे लोग "कच्छा डंडा वालों" की हिन्दू धर्म की परिभाषा और सावरकर का पुनर्जन्म की बात कहकर असल मुद्दे को भरमाने की कोशिश कर रहे हैं । यह तो खैर होना ही है । जब जब ऊँगली उनकी और उठेगी, तब तब वो बात को गोलमाल करने की कोशिश करेंगे, ताकि असली मुद्दा सामने न आ पाए और, लोगों को असलियत का पता न चले । यही उनकी नीति रही है सदियों से और यही सरकार की भी नीति रही है । जनता को भरमा के रखो और सत्ता पे कायम रहो ।

  19. April 16, 2010 at 5:29 am

    ताकि सेकुलर्स जान सकें कि हिन्दू बहुल देश में रहना कितना सुखकारी होता है….यहीं पर भारत और राष्ट्रीयता मार खा जाती है, और देश के दुश्मन अपना काम बना निकल लेते हैं.

  20. April 16, 2010 at 5:40 am

    टिप्पणिया देख एक बात कहना पड़ रहा है –सलीम या उन जैसे जोशीले नौजवान से हमदर्दी है, उनकी ऊर्जा (देश समाज हित में काम करने की भावना ) का उपयोग बदकिस्मती से सही दिशा में नहीं हो पा रहा है. उनको जब साइंस ब्लोगर्स मंच पर पढता हूँ तो प्रतीत होता है कितना हुनर है काम को मन से करने की लगन है…. अफ़सोस, धर्म के कुछ ठेकेदारों ने उसे गुमराह कर दिया, उसे हिन्दू नेताओं से नफरत करना सिखा दिया. कुछ भी कहने/लिखने से पहले सत्य का तुलनात्मक अध्ययन करना और तथ्यों की पड़ताल करना बहुत जरुरी है. सुरेश जी के पोस्ट को पढ़ा जाये तो बात साफ़ साफ़ घटनाओं के बाबत कही गयी है. दिक्कत यही है की लोग लेखक के बारे में ज्यादा सोचने लगते हैं.

  21. April 16, 2010 at 7:52 am

    पोस्ट से हट कर जो साथी टिप्पणियाँ दे रहे है क्रपया सुनले ''' कच्छा डन्डा वाले जिस दिन अपने कच्छे से बाहर आ गये तो डन्डा कर देगे इस लिये समझा रहा हूँ मान जाओ शहिष्णुता का अनादर मत करो और भूल से कायर न समझो, अगर 10 गोधरा करोगे तो 100 गुजरात झेलने को तैयार रहो ! साधवी के फ़ुस्स बमो भर से तुमहारी पोटी रुक गई है सोचो आर डी एक्स से जवाब मिलने लगे तो तुमहारा क्या होगा ??? अभी तो कसाब को हिन्दू कहते हो तब मुहम्म्द को भी खुशी खुशी हिन्दू मान लोगे!!!

  22. April 16, 2010 at 9:35 am

    muslim is not any religion its a concept (souch)so they always hawkish to impose their foolish ideas of 2000 year back on others.parshuram27.blogspot.com/

  23. impact said,

    April 16, 2010 at 9:39 am

    उम्दा सोच के कबूतर, गोधरा तो इसलिए हुआ की कारसेवक अपनी संख्या के घमंड में वेंडर्स से सामान लूट रहे थे. सो वेंडरों ने मिलकर उन्हें नरक का रास्ता दिखा दिया. तुम लोगों ने अयोध्या में मंदिर बनाने के लिए मोदी की आरती उतारी, अयोध्या का मंदिर तो आज तक नहीं बना और जिसकी आरती उतारी उसी ने राज्य के विकास के नाम पर पचासों मंदिर रातों रात तुडवा दिए.

  24. April 16, 2010 at 10:06 am

    बेटा impact सही कहा "कबूतर" हम अभी कबूतर ही है जो अमन चैन शान्ती का वास्ता दे रहे है जो बाज़ बन गये अकल ठिकाने आ जायेगी!रही बात बाकी सारी बातो की तो जितनी अकल और नीयत पुर्खो ने सिखाये तुमको तुमहारी बोल उतने ही न फ़ूटेन्गे! तुम लोगो को ज़िन्दा जलाये जाने की वकालत कर रहो हो और तुम्हे शर्म भी नही आ रही??? किस तरह के इम्पैक्ट से पैदा हुए हो तुम ???

  25. impact said,

    April 16, 2010 at 10:20 am

    वेंडरों ने जलाया था तो वेंडरों की गर्दने उड़ाते, मुसलमानों ने क्या बिगाड़ा था जो उनकी औरतों के पेट चीरकर बच्चे शहीद कर दिए? अब जो बच गए वो इम्पैक्ट नहीं तो क्या कबूतर बनेंगे? ये कौन सी उम्दा सोच है जो तलवारों से बेगुनाहों का पेट चीरने को सही कह रही है?

  26. April 16, 2010 at 11:15 am

    इम्पैक्ट अच्छा तो अब आग लगाने वाला तुम्हे वेन्डर दिखने लगा और उसकी बकरे वाली दाढी और नमाजी टीका भी वेन्डरी वाल दिखने लगा होगा तुमहे और तुम कहोगे उसका कुरान भी मुहम्म्द वेन्डर वाला है!!! तो मिया ऐसे तो गुजरात मे कोई मुसलमान ही नही मरा, जो मरा वो सब्जी वाला था,कोई दूधवाला ,कोई दल्ला ,कोई कसाई, कोई चोर, कोई राहजन , कोई गिरह्कट, कोई पन्चड जोडने वाला मरा और तुम कहते हो मुसलमान को मरवाया मोदी ने!!! जैसे वेन्डर का धन्धा होता है ज़रा मुझे भी बताओ मुसलमान का धन्धा क्या है??? तुम लोगो पर दया आती है पढेलिखे होने पर भी तुम्हे गुमराह कितनी आसानी से किया जाता है !!! कभी कोई समय क्या आयेगा जब तुम्हे सद्बुद्धी से बात समझ मे आयेगी ??? दुनिया भर मे साबित हो चुका है पेट फ़ाडने वाली बात तीस्ता नाम की धन्धेवाली का धन्धा था ये न की हकीकत पर तुम्हारी आँख मे पता नही किस जान्वर का बाल डाल दिया गया है सच को सच की नज़र से देख ही नही पाते हो !

  27. nitin tyagi said,

    April 16, 2010 at 11:15 am

    “जूते लगाने” के मामले में हिन्दू बड़े संकोची स्वभाव के हैं, इसीलिये भारत में सेकुलरों को खुलेआम हिन्दुत्व पर जोरदार तरीके से चौतरफ़ा गन्दगी फ़ेंकने की सहूलियत हासिल है|this is same for indian muslims kya baat hai suresh ji

  28. April 16, 2010 at 1:09 pm

    सही बात है यहां के शर्मनिरपेक्षों को सपरिवार कतर, सऊदी अरब जैसे कठमुल्लों के देश में कुछ वर्षों के प्रवास पर भेज देना चाहिए। और इतनी दूर नहीं भेजना है तो पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे असभ्य, बर्बर, अशिक्षित व मध्यकालीन सोच से परिपूर्ण लोगों के देश में भेज देना चाहिए। इनकी अक्ल का तंबू नहीं फट गया तो कहिएगा। इम्पैक्ट, सलीम जैसे लादेनी मानसिकता वाले कुतर्कियों के बारे में कुछ कहने की जरुरत ही नहीं है। संस्कृत की एक उक्ति है- "येषां न विद्या…..मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति॥" अर्थात्‌ अल्लाह मियां जब इन जैसों को बुद्धि बांट रहे थे, तो ये सब लादेन से आतंकवाद का प्रशिक्षण ले रहे थे.@ निखिल मियां, जे.एन.यू. नई दिल्ली के तथाकथित वामपंथियों के पास भी RSS को गरियाने के लिए एवं नए छात्रों को बरगलाने के लिए जब कोई उपाय नहीं होता ना तो वे यही कहते हैं कि मुझसे अच्छा RSS बारे में कोई नहीं जानता। और ये भी कि मैं बचपन में संघ की शाखा में जाता था। काहे को झूठ बोलते हो…मियां…. । तुम्हारे लिए एक नेक सलाह, पहले बुर्के से अपना चेहरा निकालो, फिर कोई बात करो। यदि ऐसे ही ढंके-छुपे रहोगे तो तुम्हारे में और एक किन्नर यानि कि नपुंसक में कोई अंतर तो नहीं रह जाएगा….समझे???

  29. nikhil said,

    April 16, 2010 at 5:40 pm

    diwakar mani-jnu ke vaampanthi kaya aur kaise karte hain mujhe tumse jyada pata hai,mujhe yeh bhi pata hai ki ki akhil bharatiya vanar parishad ki jnu ke leader kya kya kaam karte hain,waise jnu me vanar parishad ne shakha lagane ki koshish kari thi tum kitne dino tak gaye the wahan??

  30. April 16, 2010 at 8:15 pm

    बहुत जानकारी वाला लेख है. चार-पांच दिन पहले अंगरेजी अखबार डीएनए में आई आई एम् बंगलूर के प्रोफ़ेसर जी. वैद्यनाथन का लेख छपा था . जो अभिनेत्री खुशबू उर्फ़ ??? खान और फ़िदा हुसैन दोनों की तुलना पर लिखा था. एक तरफ खुशबू ने कानूनी मामलो का सामना किया और दूसरी तरफ हुसैन देश छोड़ कर भाग गया. इस लेख की मूल बात भी यही थी हुसैन किसी अभिव्यक्ति की आजादी के लिए नहीं बल्कि आर्थिक-वित्तीय जैसे कारणों से क़तर में सेटल हुआ है. जो खुद उसने अपने एक इंटरव्यू में कहा था. मजे की बात है की एक भगोड़ा होने और करोडो का टेक्स चोरी करनेवाले हुसैन के खिलाफ अभी तक किसी सरकारी विभाग ने कार्रवाई नहीं की है. बल्कि सरकार समेत तमाम राग-दरबारी सेकुलर मातम मना रहे हैं.

  31. April 17, 2010 at 11:34 am

    @ निखिल मियां, पहले बुर्के/हिजाब से तो चेहरा बाहर निकालो. तुमसे तो अच्छे सलीम और कैरानवी हैं, जो भले ही बिना सिर-पैर के तर्क दें लेकिन उनकी Identity तो है. हां, अवश्य ही तुमको पता होगा कि कैसे सफाई(SFI) वाले कम्युनिस्ट गुंडे लड़कियों के बाथरूम में तांका-झाकी करते हैं. और AISA, DSU, PSU के गांजा-पियक्कड़ "ग्रुप-सेक्स" को अंजाम देते हैं. लाइब्रेरी से किताबें चुराना, अपनी ही पार्टी से जुड़े लड़कियों का शारीरिक शोषण, मार-पीट करना भी छुपा नहीं है।बाकी मेरे बारे में विशेष जानना हो तो पहले पर्दे से बाहर आ जाओ.

  32. nikhil said,

    April 17, 2010 at 11:41 am

    diwakar mani mujhe tumse ache-bure ka certificate nahi lena..baki tumne sweekar kar hi liya hai ki vanar parishad wale kis tareeke se jnu me naye chatro ko bargalate hain..rahi ganje ki to kabhi AISA, DSU, PSU ke saath aur jyada jordaar dum lagate hain abvp wale.waise kitne vote aa rahe hain vanar parishad ko yfe formation ke baad se???tum khud to parishad se picha chudakar bhag gaye…ab yahan blog par bhonk rahe hao(2004 me jo padi thi bhool gaye kya?)

  33. impact said,

    April 17, 2010 at 11:46 am

    उम्दा सोच वालों के लिए :गोधरा की हकीकत http://www.soundvision.com/info/india/godhra.asp

  34. April 17, 2010 at 12:39 pm

    @ पर्दानशीं निखिल, तुम्हारी तुरंत पूर्व की टिप्पणी में किए गए वैयक्तिक आक्षेप से ही तुम्हारी ओछी मानसिकता का पता चलता है। अगर मेरा लिखना "भौंकना" है तो शायद अपने लिखे को "नाली के कीड़े का बजबजाना" ही कहोगे। नपुंसकी खाल ओढ़ के बोलना आसान है. अपने बिल से बाहर निकल के बात करो।

  35. nikhil said,

    April 17, 2010 at 4:32 pm

    diwakar mani-thanks for your compliments

  36. April 18, 2010 at 10:50 am

    श्रीमान चिपलूनकर जी आपसे अनुरोध (नहीं) है कमेंटस moderation लगालो फिर झूठ ही कह सकोगे मुझे ध‍मकियां दी जा रही हैं, ऐसे खुली कमेंटस में सच कहने की आवश्‍यकता ही नहीं रहती अपने आप दूसरों को दिखायी देती हैं ध‍मकियांदोस्‍तो आओ हिम्‍मत टूटने न दें, हम असामाजिक तत्वों का बहिष्कार करने में मदद करेंब्लॉगवाणी से अनुरोध : असामाजिक तत्वों का बहिष्कार करे…

  37. April 18, 2010 at 1:30 pm

    Kya Hindu shabd musalmano ki den hai?Islam sanatan Dharm ki den hai

  38. April 19, 2010 at 6:54 am

    Impact तुम सभी को मानसिक चिकित्सा की सक्त्त ज़रूरत है पागलो के डाक्टर से तुरन्त सम्पर्क करो !

  39. impact said,

    April 20, 2010 at 5:03 am

    @ उम्दा सोचएक पागल को खुद को छोड़कर सारी दुनिया पागल दिखाई देती है.अब तुम गहराई से सोचो की मुसलमान कारसेवकों से भरी ट्रेन को जलाने की हिम्मत कैसे करेगा. या तो कोई ऐसी ही बात रही होगी जिसपर ट्रेन जलाने वालों (अगर ट्रेन दुर्घटनावश नहीं जली.) ने अपनी जान की भी परवाह नहीं की.

  40. April 20, 2010 at 7:45 am

    @ Impact ए ओसामा बिन लादेन,सद्दाम हुसैन के भाई तुम्हारा पागलपन पूरी दुनिया देख रहा है, बिना मतलब ही अमेरिका ने अफ़्गानिस्तान मे और इराक मे तुम्हे घुस घुस के लताड लताड के नही पीटा!तुम्हारी बात पर गौर करते हुए मै ये सोच रहा हूँ कि मुसलमानो ने ट्विन टावर, पेन्टागन पर हमले की हिम्मत कैसे की??? जान की परवाह की बात करते हो जेहाद का पागलपन जब भर जाता है तो वो इन्सान रह जाता है क्या ??? कयामत के दिन की चिन्ता मे आज को हराम करना पागलपन नही होगा तुमहारे लिये पर इन्सानो के लिये ये पागलपन ही है(तुम इन्सान तो हो नही)!!!इम्पैक्ट बाबू "हमको मालू्म है मुहम्मद और उसके जन्नत की हकीकत लेकिन दिल के बहलाने को तुम्हारा ये खयाल अच्छा है !"भेड चराने वाले के अनुयाई की अकल कितनी हो सकती है पूरा ब्लागवुड देख रहा है !!!

  41. impact said,

    April 20, 2010 at 9:15 am

    उम्दा सोच, ठीक कहते हो, पूरी दुनिया में सिर्फ मुसलमान ही पागल हैं. क्योंकि, हिरोशिमा नागासाकी पर बम 'मुसलमानों' ने ही गिराया.लाखों यहूदियों को एक झटके में 'मुसलमानों' ने ही मारा.प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध 'मुसलमानों' ने ही छेड़ा.केमिकल हथियार का बहाना लेकर एक देश को 'मुसलमानों' ने ही बर्बाद किया. लेकिन किधर गए वो हथियार?पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग 'मुसलमानों' ही के कारण हो रही है.ए.के. सैंतालिस और आर.डी.एक्स का आविष्कार 'मुसलमानों' ने ही किया.अफगानिस्तान के मुजाहिदीन को हथियारों की सप्लाई 'मुसलमानों' के द्वारा ही हुई.भारत के बड़े बड़े लीडरों की हत्या 'मुसलमानों' ने ही कीलाल चौक जैसे बड़े बड़े कत्लेआम 'मुसलमानों' ने ही किये.छात्तेसगढ़ के जंगलों में हत्याएं 'मुसलमानों' ने ही कीं.पूरी दुनिया में सिर्फ मुसलमान ही पागल हैं.

  42. April 20, 2010 at 9:20 am

    @ impact – ये जितने भी काम तुमने गिनाये हैं, वह करने वालों में हिन्दू भी तो नहीं हैं…

  43. April 20, 2010 at 10:27 am

    @ Impactहम कब कहते है वो पागल नही है? इससे तुम्हारा दोष कम नही होता है ! इतिहास बताता है तुम दोनो ही दमनकारी आक्रान्ता हो!पागल पागल आपस मे निपटो न! हम सहिश्णु हिन्दुओ ने तुम्हारा क्या बिगाडा है??? देश मे सबसे ज़्यादा ए के 47/56 और आर डी एक्स मुसलमानो से और मदरसो से क्यु बरामद होते रहे है??

  44. April 20, 2010 at 10:38 am

    IMPACT said….उम्दा सोच, ठीक कहते हो, पूरी दुनिया में सिर्फ मुसलमान ही पागल हैं. क्योंकि, हिरोशिमा नागासाकी पर बम 'मुसलमानों' ने ही गिराया.लाखों यहूदियों को एक झटके में 'मुसलमानों' ने ही मारा.प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध 'मुसलमानों' ने ही छेड़ा.केमिकल हथियार का बहाना लेकर एक देश को 'मुसलमानों' ने ही बर्बाद किया. लेकिन किधर गए वो हथियार?पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग 'मुसलमानों' ही के कारण हो रही है.ए.के. सैंतालिस और आर.डी.एक्स का आविष्कार 'मुसलमानों' ने ही किया.अफगानिस्तान के मुजाहिदीन को हथियारों की सप्लाई 'मुसलमानों' के द्वारा ही हुई.भारत के बड़े बड़े लीडरों की हत्या 'मुसलमानों' ने ही कीलाल चौक जैसे बड़े बड़े कत्लेआम 'मुसलमानों' ने ही किये.छात्तेसगढ़ के जंगलों में हत्याएं 'मुसलमानों' ने ही कीं."पूरी दुनिया में सिर्फ मुसलमान ही पागल हैं."UMDASOCH Says..@ IMPACT चलो तुमने माना तो सही कि पूरी दुनिया के पागलो मे से मुसलमान "भी" पागल दमनकारी आक्रान्ता है !!!NOTE- अबतक मुझे महसूस होता था की बेसरपैर की हुज्जत सिर्फ़ उमर कैरान्वी ही कर सकता है! अफ़्सोस मै गलत था ये IMPACT भी जोडीदार है !


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