अरे?!!!… मोदी के गुजरात में ऐसा भी होता है? …… Gujrat Riots, Relief Camp and NGOs in India

न कोई टीवी देखेगा, न कोई संगीत सुनेगा… और दाढ़ी-टोपी रखना अनिवार्य है। जी नहीं… ये सारे नियम लीबिया अथवा पाकिस्तान के किसी कबीले के नहीं हैं, बल्कि गुजरात के भरुच जिले के गाँव देतराल में चल रहे एक मुस्लिम राहत शिविर के हैं। जी हाँ, ये बिलकुल सच है और इंडियन एक्सप्रेस के संवाददाता ने इस शिविर का दौरा भी किया है। हालांकि खबर कुछ पुरानी है, लेकिन सोचा कि आपको बताता चलूं…

गुजरात के दंगों के बाद विभिन्न क्षेत्रों में दंगा पीड़ितों के लिये राहत शिविर चलाये जा रहे हैं। ऐसा ही एक शिविर गुजरात के भरुच जिले में चल रहा है, जिसे लन्दन के एक मुस्लिम व्यवसायी की चैरिटी संस्था ने प्रायोजित किया हुआ है। इस पुनर्वास केन्द्र में सख्ती से शरीयत कानून का पालन करवाया जाता है, और इस सख्ती की वजह से शिविर में से कुछ मुस्लिम युवक भाग खड़े हुए हैं।

भरुच के देतराल में इस शिविर में 46 मकान बनाये गये हैं, जिसमें गुजरात के दंगा पीड़ितों के परिवारों को रखा गया है। इन मकानों के निवासियों को सख्ती से शरीयत के मुताबिक “शैतानी” ताकतों, खासकर टीवी और संगीत, से दूर रखा गया है, जो लोग इस नियम का पालन नहीं करते उन्हें यहाँ से बेदखल कर दिया जाता है। इस पुनर्वास केन्द्र को चला रहे NGO(?) ने इन निवासियों को गाँव की मस्जिद में जाने से भी मना कर रखा है, और इन लोगों के लिये अलग से खास “शरीयत कानून के अनुसार” बनाये गये नमाज स्थल पर ही सिजदा करवाया जाता है। इंडियन एक्सप्रेस के रविवारीय विशेष संवाददाता के हाथ एक नोटिस लगा है, जिसके अनुसार इस कैम्प के निवासियों से अपील (या धमकी?) की गई है… “इस्लामिक शरीयत कानून के मुताबिक यदि इस कैम्प में रह रहे किसी भी व्यक्ति के पास से टीवी अथवा कोई अन्य “शैतानी” वस्तु पाई जायेगी तो उस परिवार को ज़कात, फ़ितर, सदका तथा अन्य इमदाद से वंचित कर दिया जायेगा। पिछले सप्ताह जब उनकी कमेटी के मुख्य ट्रस्टी लन्दन से आये तो कुछ मकानों पर टीवी एंटीना देखकर बेहद नाराज़ हुए थे, और उन्होंने निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर सारे टीवी हटा लिये जायें…”। एक निवासी बशीर दाऊद बताते हैं कि, “चूंकि यह सारे मकान एक अन्य ट्रस्टी के भाई द्वारा दान में दी गई ज़मीन पर बने हैं और ज़कात के पैसों से यह ट्रस्ट चलता है, इसलिये सभी को “धार्मिक नियम”(?) पालन करने ही होंगे…”।

सूत्रों के अनुसार, ऐसी सख्ती की वजह से कुछ परिवार यह पुनर्वास केन्द्र छोड़कर पलायन कर चुके हैं, तथा कुछ और भी इसी तैयारी में हैं। इस शिविर में प्रत्येक परिवार को 50,000 रुपये की राहत दी गई है, जिसमें नया मकान बनाना सम्भव नहीं है। जब एक्सप्रेस संवाददाता ने लन्दन स्थित इस संस्था के ऑफ़िस में सम्पर्क करके यह जानना चाहा कि क्या वे लोग लन्दन में भी टीवी नहीं देखते? जवाब मिला – देखते हैं, लेकिन तभी जब बेहद जरूरी हो…। वडोदरा की तबलीगी जमात का कहना है कि वे इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। एक अन्य पीड़ित मोहम्मद शाह दीवान ने कहा कि इस शिविर में आकर वे काफ़ी राहत महसूस करते थे, लेकिन इस तरह की बंदिशों से अब मन खट्टा होने लगा है, हमसे कहा जाता है कि यदि हमने उनके नियमों का पालन नहीं किया तो हम काफ़िर कहलायेंगे…। यही कहानी इदरीस शेख की है, दंगों में अपना सब कुछ गंवा चुके वेजलपुर गोधरा के निवासी, पेशे से टेलर शेख कहते हैं, “हमारे ही लोग हमसे जानवरों जैसा बर्ताव करते हैं, एक दिन इन लोगों ने मेरे कमरे पर ताला जड़ दिया और मुझसे कहा है कि मैं अपने ग्राहकों को इस शिविर में न घुसने दूं… इनकी बात मानना मेरी मजबूरी है…”।

शिविर छोड़कर पंचमहाल के हलोल में रहने गये इकबाल भाई कहते हैं, “शुरु-शुरु में सब ठीक था, लेकिन फ़िर उन्होंने मेरे पिता और मुझ पर सफ़ेद टोपी लगाने और दाढ़ी बढ़ाने हेतु दबाव बनाना शुरु कर दिया… हम लोग इस प्रकार की “लाइफ़स्टाइल” पसन्द नहीं करते, और रोजाना शिविर के कर्ताधर्ताओं से “ये करो, ये न करो” सुन-सुनकर हमने शिविर छोड़ना ही उचित समझा”।

खबर यहाँ पढ़ें… http://www.indianexpress.com/news/no-tv-no-music-beards-a-must-new-rules-in/541620/

तात्पर्य यह है कि, मैं खुद यह रिपोर्ट पढ़कर हैरान हो गया था…। कुछ माह पहले ही आणन्द जिले के एक गाँव में कई दिनों तक पाकिस्तान का झण्डा फ़हराने की खबर भी सचित्र टीवी पर देखी थी…।

भाईयों… मैंने तो सुना था कि नरेन्द्रभाई मोदी, गुजरात में मुसलमानों पर बहुत ज़ुल्म ढाते हैं, “सेकुलर गैंग” हमें यह बताते नहीं थकती कि मोदी के गुजरात में मुस्लिम असुरक्षित हैं, डरे हुए हैं…। यह दोनों घटनाएं पढ़कर ऐसा लगता तो नहीं… उलटे यह जरूर लगता है कि देशद्रोही NGOs की इस देश में आवाजाही और मनमर्जी बहुत ही हल्के तौर पर ली जा रही है। NGOs क्या करते हैं, किनके बीच में, कैसे काम करते हैं, रिलीफ़ फ़ण्ड और चैरिटी के नाम पर विदेशों से आ रहे अरबों रुपये का कहाँ सदुपयोग-दुरुपयोग हो रहा है, यह जाँचने की हमारे पास कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। जरा सोचिये, जब गुजरात में नरेन्द्र मोदी की नाक के नीचे हफ़्तों तक पाकिस्तानी झण्डे फ़हराये जा रहे हों, तथा लन्दन की कोई संस्था अपने राहत शिविर में दाढ़ी बढ़ाने-टोपी लगाने के फ़रमान सुना रही हो… तो भारत के बाकी हिस्सों में क्या होता होगा, कितना होता होगा और उसका असर कितना भयानक होता होगा…। उधर तीस्ता सीतलवाड आंटी और महेश भट्ट अंकल जाने कैसे-कैसे किस्से दुनिया को सुनाते रहते हैं, हम भले ही भरोसा न करें, सुप्रीम कोर्ट भले ही तीस्ता आंटी को “झूठी” कह दे, लेकिन फ़िर भी लाखों लोग तो उनके झाँसे में आ ही जाते हैं… खासकर “चन्दा” देने वाले विदेशी…। ऐसे ही झाँसेबाज मिशनरी में भी हैं जो कंधमाल की झूठी खबरें गढ़-गढ़कर विदेशों में दिखाते हैं, जिससे चन्दा लेने में आसानी रहे, जबकि ऐसा ही चन्दा हथियाने के लिये सेकुलरों का प्रिय विषय “फ़िलीस्तीन” है…।

तो भाईयों-बहनों, NGOs में से 90% NGO, “दुकानदारी” के अलावा और कुछ नहीं है… बस “अत्याचारों” की मार्केटिंग सही तरीके से करना आना चाहिये… सच्चाई क्या है, यह तो इसी बात से स्पष्ट है कि समूचे देश के मुकाबले, गुजरात में मुसलमानों की आर्थिक खुशहाली में बढ़ोतरी आई है…

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54 Comments

  1. Amit Sharma said,

    May 6, 2010 at 8:14 am

    हिन्दुस्थान में रहकर इंसानी जिन्दगी जीने को मजबूर है, यह अरबी सड़ांध से पैदा हुए कुछ ख़ास मच्छर

  2. May 6, 2010 at 8:14 am

    वैसे भरूच के कुछ गाँव मुस्लिम बहुल है लेकिन इस तरह का फरमान तो वाकई चौकाने वाली बात है. इतना ही कहूँगा कि इस देश में सब कुछ मुमकिन है….

  3. May 6, 2010 at 8:29 am

    "अरबी सड़ांध से पैदा हुए कुछ ख़ास मच्छर"@ amit Sharma बहुत खूब !

  4. Amit said,

    May 6, 2010 at 8:35 am

    ये सारे धार्मिक फरमान कूड़े घर के लायक हैं और वहीं जायेंगे

  5. May 6, 2010 at 8:51 am

    @पी.सी.गोदियाल "अरबी सड़ांध से पैदा हुए कुछ ख़ास मच्छर"@ amit Sharmaबहुत खूब !

  6. May 6, 2010 at 8:55 am

    खोजी जानकारी आधारित ब्लॉग पोस्ट के लिए हम आपके आभारी हैं ,हम तो चाहते हैं की हर ब्लोगर ऐसा ही करे / रही बात इन शिविरों की, तो मानवीय अधिकारों का हनन चाहे शिविरों में हो या किसी अन्यत्र जगह पे ,ऐसा करने या इन्हें प्रायोजित करने वालों पे सख्त कार्यवाही होनी चाहिए /

  7. May 6, 2010 at 8:59 am

    "जब एक्सप्रेस संवाददाता ने लन्दन स्थित इस संस्था के ऑफ़िस में सम्पर्क करके यह जानना चाहा कि क्या वे लोग लन्दन में भी टीवी नहीं देखते? जवाब मिला – देखते हैं!"इससे साबित होता है इस्लाम और मुसल्मान दोगलई पर आधारित है!

  8. May 6, 2010 at 9:09 am

    यकीनन लेखन अच्छा, मगर कुतर्कों से भरा पड़ा… खैर जाने दीजिये आप लोगों ने मेरे एक सवाल का जवाब तो दिया ही नहीं कि :::अगर सावरकर जी का पुनर्जन्म अफ़गानिस्तान में तालिबान समर्थक में हुआ तो इस बात की गारंटी कौन लेगा कि भारत के ख़िलाफ़ किसी भी आतंकी घटना में वे लिप्त नहीं होंगे??? और अगर ऐसा हुआ तो उस राष्ट्रवाद का क्या होगा जिसे वीर सावरकर अपने कथित खून पसीने से सींचा था !!!???

  9. May 6, 2010 at 9:12 am

    सौदी अरब का इस्लामिक डेवेलपमेंट बैंक जो कि कई वर्षों में दिल्ली की एक NGO के द्वारा संचालित हो रहा है ने हाल ही में इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली की अवधारणा अनुसार भारत में भी ब्याज मुक्त क़र्ज़ देना शुरू कर दिया है अभी तक हजारों छात्र इससे लाभान्वित भी हो चुके हैं…

  10. May 6, 2010 at 9:23 am

    जो व्यक्ति टी.वी रख सकता है, उसे शिविर में रहने की और सदका खाने की ज़रुरत है क्या?

  11. May 6, 2010 at 9:26 am

    शरीयत में बदलाव किसी कीमत पर न करने की कसम ने इस्लाम और मुसलमान के आगे ढेरो संकट खड़े कर दिए हैं……. हिन्दुस्तानी मुसलमान (जो की विश्व में सर्वश्रेष्ठ संस्कृति के वाहक हो सकते हैं) के आगे समस्या है की वे कैसे खुद को रूढ़ अरबियन छवि से मुक्त रख एक प्रगतिशील समाज की स्थापना करे.इनके लिए धर्म इतना संवेदनशील मामला है की सेकुलर देश की प्रगति में खुलकर हाथ नहीं बंटा सकते. वक़्त की मांग है की भारतीय मुसलमान अपने आचरण से पुरानी/विदेशी/रूढ़ हो चुके परंपराओं को खारिज करे.

  12. May 6, 2010 at 9:30 am

    शरीयत में बदलाव किसी कीमत पर न करने की कसम ने इस्लाम और मुसलमान के आगे ढेरो संकट खड़े कर दिए हैं……. हिन्दुस्तानी मुसलमान (जो की विश्व में सर्वश्रेष्ठ संस्कृति के वाहक हो सकते हैं) के आगे समस्या है की वे कैसे खुद को रूढ़ अरबियन छवि से मुक्त रख एक प्रगतिशील समाज की स्थापना करे.इनके लिए धर्म इतना संवेदनशील मामला है की सेकुलर देश की प्रगति में खुलकर हाथ नहीं बंटा सकते. वक़्त की मांग है की भारतीय मुसलमान अपने आचरण से पुरानी/विदेशी/रूढ़ हो चुके परंपराओं को खारिज करे.

  13. May 6, 2010 at 9:32 am

    बहुत पहले बीबीसी की हिन्दी सेवा पर "इस्लाम और राष्ट्र" को लेकर एक परिचर्चा सुनी थी, जिसमें एक कंबोडियाई मुस्लिम के साक्षात्कार का कुछ अंश भी सुनाया गया था कि "पहले मैं मुस्लिम हूं, उसके बाद ही कंबोडियाई हूं". विश्व के मुस्लिम जनसंख्या का अधिकांश (चाहे वो अनपढ़ मुस्लिम हो, चाहे गंवार, चाहे जाहिल, चाहे मध्यकालीन सोच वाला हो, चाहे आतंकवादी हो या चाहे पढ़ा-लिखा ही क्यों ना हो) इसी विचार को मानते हैं। मुस्लिमों का एक बहुत ही छोटा तबका (जिसमें कलाम जैसे महापुरुष, भाई महफूज, एजाज भाई, फिरदौस बहन जैसे लोग आते हैं) इन दकियानूसी विचारों से ऊपर उठकर सोचता है।————–देश को एक सशक्त सरकार और समाज की आवश्यकता है, जो मुस्लिम वोटबैंक के बारे में सोचे बिना इन देशविरोधी ताकतों/विचारों को नेस्तनाबूद कर सके, और भारत जैसे देश में पाकिस्तानी झंडा फहराने वाले, थाली में छेद करने वाले इन नरक के कीड़ों को इनकी असली जगह पर पहुंचा सके।—————-चलते-चलते: अभी अभी इंटरनेट भैया की कृपा से ज्ञात हुआ कि न्यायाधीश महोदय ने बर्बर व म्लेच्छ समूह के नाजायज औलाद कसाब को फाँसी की सजा सुनाई है। लेकिन मित्रों, ज्यादा खुश होने की बात नहीं है, इसे भी अफजल की तरह ही सरकारी दामाद बना कर रखा जाएगा। और एक दिन विमान से इनके मुल्क में सुरक्षित पहुंचा दिया जाएगा।"जय इटली वाली सोनिया माइनो, उनके भोंदू युवराज व चमचा कांग्रेस पार्टी की"

  14. man said,

    May 6, 2010 at 9:42 am

    सालो की लंदन में रह कर भी ऐसी सोच तो अफगानिस्तान में क्या होता होगा? .सर एक बार फिर से आपको धन्यवाद छूपी हुई मूलावादी खबर को बाहर लाने पर|गुजरात के लोग टी.वी भी ना देखे ,गाने भी नहीं सुने ,गुनगुनाये भी नहीं ,लडकिया स्कूल भी न जाये, रंगीन कपड़ा भी नहीं पहने ,मोबाइल भी नहीं रखे पास में ,और क्या क्या ?

  15. May 6, 2010 at 9:42 am

    एक व्यक्ति ने पूछा यह क्या है?जवाब दिया कि टमाटर है.फिर उसने पूछा यह क्या है?टमाटरयह क्या है?टमाटर.पूछने वाला बच्चा नहीं है इसलिए समझ में आ गया कि यह मानसिक रूप से अस्वस्थ है. बिना किसी सन्दर्भ में बार बार एक ही सवाल वही कर सकता है. ***अब आपकी पोस्ट पर.एनजीओ एक मुनाफे का धन्धा बन गया है. सरकार को भी इसके सहारे निचोड़ा जा सकता है. भले ही फिर झूठ-फरेब का सहारा लेना पड़े. अतः सावधान. अच्छा है, यह शरियत-वरियत लागू हो तो मुसलमानों को भी पता चले भारत में उन्हे क्या मिला हुआ है जिसकी कद्र नहीं की.

  16. impact said,

    May 6, 2010 at 9:55 am

    अरे! विश्व हिन्दू परिषद् की वो सोने की ईंटें कहाँ गईं?

  17. May 6, 2010 at 10:07 am

    अर्थात गुजरात मुस्लिम तुष्कीरण में भी सबसे आगे है!

  18. May 6, 2010 at 11:53 am

    "यह क्या है"यही तीन शब्द सीखे, चौथा शब्द सीखने से पहले ही वह आदमी अंधा बहरा हो गया। अब आप कैसे बताओगे – यह क्या है?प्रणाम

  19. man said,

    May 6, 2010 at 12:46 pm

    गुजरात में नरेन्द्र भाई के राज में मुस्लीम खुशहाल हुवे हे ,जो की एक खुली सोच रख्ते he जिनमे नए विचारो और ,उद्यमता का मादा हे ,महानत करना जानते हो ,में खुद मिला हूँ ऐसे उधमियो से ,से जिनके फैक्ट्री चल रही हे ,अंगूरों के बगीचे हे ,बढ़िया खेती बाड़ी कर रहे हे …ऐसे लोग जुड़ाव धरती माँ से होताहे वो जनम भूमी को ही अपनी कर्म भूमि मानते हे .उसकी उन्नती में योगदान करते हे |लकिन ऐसे लोग १५%ही हे बाकी ८५% अरबी घोड़े बनने के लिए हिन् हिना रह्हे हे ,भले चुटी यंही की खा रहे हे …इन्हें इस धरती से कोई मतलब नहीं |मेने कहते सुना पाया हे की ये मोबाइल सउदिया ये लाया हूँ ,,बहुत बढ़िया चीज हे हिंदुस्तान में नहीं मिलेगी,,ये घडी पाकिस्तान से मंगवाई हे ,ये फलाना चीज अमीरात की हे ,इनका दिली लगाव आसानी से देखा जा सकता हे .हमारे पास एक गाँव हे ,जिसके सारे तूर्क पाकिस्तान के सीमा के पास के गाँव के हे ,पाकिस्तान के क्रिकेट मेच जीतने पर पठाखे फोड़ते हे ,हे आस्तीन के सांप ?नवाबो की नगरी के भाई को नवाबो वाला शोक तो नहीं लग गया हे ? male jender थोडा दूर ही रहे

  20. May 6, 2010 at 1:20 pm

    अपने सिर्फ झांकी भर दिखाई है भाई…………सच इस से बहुत बड़ा है…………जान लोगे तो कई भ्रम टूट जायेंगे……………अच्छा है भ्रम बना रहे मोदी का भी ..गुजरात का भी……….

  21. May 6, 2010 at 1:56 pm

    जो जहां है वहीं से इस जिहाद में भरसक योगदान दे रहा है। इन दिनों अनवर अल अवलाकी की पुस्तक 44 ways of Jihad भी काफी पढ़ी जा रही है। अवलाकी की तकरीरें दिमाग़ी खुराक़ का काम करते हैं। ऐसे शिविरों को दान इसलिए ही तो मिल रहा है कि वे रूढ़िवादी इस्लाम को फ़ॉलो करें। भयंकर ख़तरनाक परिदृश्य बन पड़ा है। @सलीम ख़ान, वीर सावरकर पुराने ज़माने की बात हो गए हैं। आज के दौर में हमें किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व अथवा तथ्य की ज़रूरत नहीं है। वो होंगे सही या ग़लत। आज जो दिख रहा है उतना काफ़ी है। ये भयावह परिदृश्य है और सर्वविदित सत्य यह है कि अन्य धर्मों की अपेक्षा इस्लाम एक ज्यादा असहिष्णु, असामयिक धर्म है। इस्लाम सह-अस्तित्व की अवधारणा को सिरे से खारिज करता है। इस्लाम एक मज़हब से ऊपर उठकर राजनीतिक आंदोलन बन गया है। जिसके पाकिस्तानजनित कट्टरपंथी संस्करण का नाश तो अवश्यमभावी है। विजय उस संकल्पना की होगी जिसमें धर्म और मज़हब नही बल्कि राष्ट्र और उसकी समन्वित संस्कृतियां और उनकी आज़ादी सर्वोपरी है।latest news http://www.indianexpress.com/news/Pak-producing-10-000-jihadists-a-year–Report/615366

  22. May 6, 2010 at 2:37 pm

    अरे भाइयो आप लोग ये बताओ आप की सामप्रदायिक सोच कब खत्म होगी और आप लोग सच्चाई से इतना डरते क्यो हो इस्लाम हमेशा से सच्चाई है और रहेगा अनवर जमाल जब कुरितीयो की निंदा करते है तब आप की साम्प्रदायिक सोच उजागर होती है तब आपकी प्रगतिशीलता कहाँ चली जाती है ?सत्य की तलाश करते हुए सच्चाई को महत्व को समझे और स्वीकार करे

  23. nikhil said,

    May 6, 2010 at 2:45 pm

    purani aur basi khabar hai….teepna chodo aur kuch apna bhi likho

  24. May 6, 2010 at 2:57 pm

    @ निखिल फ़र्जी – मैंने कब कहा कि यह नई खबर है? मैं तो सिर्फ़ "सच्ची" खबरों के माध्यम से "झूठी और गन्दी" मानसिकता उजागर करने का प्रयास कर रहा हूं… 🙂 🙂 तुम भी टीप कर लिख मारो भाई, तुम्हें किसने रोका है? 🙂

  25. man said,

    May 6, 2010 at 3:52 pm

    इनका नमूना देखिये ,सायंस और टेक्नोलोगी की बड़ी बड़ी सिकशाये इन्होने दुसरे देशो में में रहते हुवे ली (वेसे इ सभी चीजे फोकात की मिलती हे इन्हें केवल पेट्रोल से )लकिन कितने %ऊनका सही उपयोग किया …कितने इनके लोग नोबेल लायक बने ?कितना इन्होने संसार का भला किया ?(केवल जन्नत पहुचने के आलावा )टेक्नोलोजी केवल हेकिंग और बोम्ब ब्लास्ट के आलावा कंही काम में नहीं आयी हे?शुरू से ले कर अब तक संसार को दुखो तकलीफ के आलावा कुछ नहीं दिया ? कोलकाताके वायु शेत्र में बुर्के वालियों को क्यों रोकागाया ?????????डर कंही ने कंही यही से शुरू होता हे ?संसार इनको ले कर दो भागो में विभाजित हो चूका हे ?अमेरिकाक टाइम neyork स्कुरे में पाकिस्तानी की भूमिका मिली?पाकिस्तान से एवेरी इयर dus hajar फिदयिनी तैयार हो रहे हे ..कुते की मोंत मरेंगे भे???????????के ल??????????????????

  26. May 6, 2010 at 4:03 pm

    भाषा भी संस्कृति की वाहक होती है और उस भाषा के शब्द से जो अर्थ निकलते हैं वो आवश्यक नहीं है कि दूसरी भाषा में उसका पर्यावाची हो जैसे उदाहरण के तौर पर पश्चिम में एक लड़की या लड़का एक के बाद एक १० के साथ लव करके हमबिस्तर भी हो जाती है और ११ वां व्यक्ति भी उसका लव होता है, उस जैसे लव को हम हिंदी में व्यभिचार बोलते हैं न की प्यार क्योंकि प्यार की परिभाषा कुछ और होती है जिसका शायद इंग्लिश में शब्द नहीं या ज्यादा से ज्यादा उसको कई शब्दों को मिलाकर के व्यखित कर सकते हैं. इसी प्रकार आप इन महान मानव-विरोधी गतिविधियों को धर्म से न पुकारके उन्ही की भाषा में उसको मजहब या मजहबी क्रियाकलाप आदि कहा करें. क्योंकि धर्म शब्द का बहुत व्यापक अर्थ है जिसका इनकी भाषा में कोई पर्यावाची नहीं है. इसीलिए आपसे विनती है और आशा भी है कि इस्लाम मजहब, मत, सम्प्रदाय, रिलीजन या पंथ आदि ही लिखे उसको धर्म बिलकुल ना लिखे क्योंकि वो धर्म की परिभाषा के अंतर्गत आता ही नहीं है.

  27. May 6, 2010 at 4:15 pm

    ये वास्तव में आश्चर्य की बात है नरेन्द्र मोदी की नाक के नीचे ये अरबी कूड़े या सडांध से पैदा हुए मच्छर ये सब कर रहे हैं.

  28. May 6, 2010 at 5:10 pm

    लगे रहो सरेश जी !!!हराम की औलादें अयाज, सलीम और यहाँ भी आ गए अपनी अरबी सड़ांध फैलाने

  29. May 6, 2010 at 5:11 pm

    सलीम की बीवी ———-पे लात मार के भाग गयी अपनी खुन्नस यहाँ-वहाँ उतारता फिर रहा है__________ कहीं का

  30. Mahak said,

    May 7, 2010 at 12:55 am

    अच्छा है, यह शरियत-वरियत लागू हो तो मुसलमानों को भी पता चले भारत में उन्हे क्या मिला हुआ है जिसकी कद्र नहीं की.आज जो दिख रहा है उतना काफ़ी है। ये भयावह परिदृश्य है और सर्वविदित सत्य यह है कि अन्य धर्मों की अपेक्षा इस्लाम एक ज्यादा असहिष्णु, असामयिक धर्म है।विजय उस संकल्पना की होगी जिसमें धर्म और मज़हब नही बल्कि राष्ट्र और उसकी समन्वित संस्कृतियां और उनकी आज़ादी सर्वोपरी है।

  31. May 7, 2010 at 1:55 am

    मैं तो भारत में मुसलमानों के लिए शरियत कानून लागु करने के पक्ष में हूँ |आखिर भारत के लोकतंत्र की खुली हवा के झोंकों का मजा लेने वालों को शरीयती कानून का स्वाद भी तो पता चलना चाहिए | क्योंकि अभी तक इन्होने इसका स्वाद चखा नहीं है सिर्फ किताबों में ही पढ़ा है जिस दिन चख लेंगे तब पता चलेगा !!

  32. May 7, 2010 at 3:01 am

    बढ़िया लगी आपकी जानकारी भरी ये पोस्ट ।

  33. nikhil said,

    May 7, 2010 at 5:32 am

    6m chaap media ka link bhi diya hai aapne???ye baat kuch jami nahi

  34. May 7, 2010 at 7:03 am

    अब हिजड़े ही "इस्लाम" का प्रचार कर रहे हैं

  35. Shah Nawaz said,

    May 7, 2010 at 7:07 am

    चिपलूनकर साहब, संगीत इस्लाम में हराम है और अगर इस्लामिक शरियत के हिसाब से इकट्ठे लोगो के खून पसीने से कमाए हुए पैसे से किसी की मदद की जाती है तो क्या उस पैसे का प्रयोग ग़ैर-इस्लामी तरीके से हो सकता है? मैं स्वयं भी ज़कात देता हूँ, लेकिन कभी भी ऐसी जगह ज़कात नहीं दे सकता हूँ जहाँ ग़ैर-इस्लामी कार्य होते हों. वैसे मैं तो हमेशा शिक्षण संस्थानों में ही अपनी ज़कात देता हूँ. हाँ ज़बरदस्ती टोपी पहनना या दाढ़ी रखवाने बिलकुल ही गलत कार्य है, इसकी निंदा अवश्य ही होनी चाहिए. क्योंकि ऐसे कार्य मनुष्य और प्रभु के प्रेम पर आधारित होते हैं, इस तरह के कार्यों पर ज़बरदस्ती की इजाज़त शरियत कानून में भी नहीं होती है. ऐसा कानून शरियत का नहीं अपितु तालिबान का ही हो सकता है. और रही शरियत कानून की बात तो मुसलमान शरियत के तहत ही अपनी ज़िन्दगी बसर करते हैं. बार-बार क्यों यह बात लिख कर कि इन पर शरियत कानून लागु कर दो, आप लोग शरियत कानून का हौव्वा खड़ा करते हैं??????? हमने तो स्वयं अपने ऊपर शरियत कानून लागु कर रखा है. क्या आपको पता भी है कि शरियत कानून क्या है?????? या सिर्फ तालिबानी कानूनों को शरियत कानून मान कर बैठे हैं?????

  36. May 7, 2010 at 8:45 am

    आज से कमेन्ट देना बंद…. अब से सबको "Very good" कहूँगा…. अगर कोई मर भी गया होगा तो यही कहूँगा …. Very good…. कोई मुझे समझ नहीं पाता….

  37. May 7, 2010 at 8:45 am

    Very good

  38. May 7, 2010 at 8:50 am

    @ शाहनवाज़ – आपने कहा कि 1) "संगीत इस्लाम में हराम है" इसे साबित करने के लिये हदीस या कुरान का कोई पैराग्राफ़ बतायें, कि इस्लाम में संगीत क्यों हराम है?, कैसे हराम है? इन बातों की डीटेल्स, मोहम्मद रफ़ी, नौशाद से लेकर एआर रहमान तक सभी मुस्लिम संगीतकारों-गायकों को ध्यान में रखकर दीजिये… या तो यहाँ टिप्पणी करके मेरा (सबका) ज्ञान बढ़ाईये या आपकी अंजुमन पर एक विस्तृत पोस्ट लिखिये…। 2) आपने कहा कि – "रही शरियत कानून की बात तो मुसलमान शरियत के तहत ही अपनी ज़िन्दगी बसर करते हैं" क्या दाऊद इब्राहीम, अबू सलेम, अब्दुल करीम तेलगी, अजमल कसाब और अफ़ज़ल गुरु भी शरीयत के अनुसार जीवन-यापन करते हैं? यदि हां तो कैसे और यदि नहीं, तो इन लोगों पर शरीयत के अनुसार सजा मुकर्रर की जाये, क्या आप सहमत हैं? मेरे उपरोक्त दोनो "नादान" सवालों के जवाब अवश्य दीजियेगा, आपको न पता हों तो अपने "गुरुजी" से पूछकर ही दीजियेगा, लेकिन पूरे विस्तार से दीजियेगा, ताकि हमें भी तो पता चले।

  39. man said,

    May 7, 2010 at 9:40 am

    स्वामी विवेकानन्दऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है । कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३ गुरु नानक देव जीमुसलमान सैय्यद , शेख , मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए हैं । जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया जाता था । नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ ८० महर्षि दयानन्द सरस्वतीइस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं । इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।। सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१

  40. man said,

    May 7, 2010 at 9:42 am

    महर्षि अरविन्दहिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । । ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६ सरदार वल्लभ भाई पटेलमैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं । हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो । संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार । बाबा साहब भीम राव अंबेडकरहिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते । प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१

  41. man said,

    May 7, 2010 at 9:43 am

    माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर श्री गुरू जीपाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता , उनकी हत्या , लूट दंगे, आगजनी , बलात्कार , आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है , ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा । पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है । पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है । दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनउ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं । ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके । अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं । सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हें । यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगें । बंच आफ थाट्स पहला आंतरिक खतरा मुसलमान पृष्ठ १७७-१८७ गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोरईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं । ; – रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर मोहनदास करम चन्द्र गांधीमेरा अपना अनुभव है कि मुसलमान कूर और हिन्दू कायर होते हैं मोपला और नोआखली के दंगों में मुसलमानों द्वारा की गयी असंख्य हिन्दुओं की हिंसा को देखकर अहिंसा नीति से मेरा विचार बदल रहा है । गांधी जी की जीवनी, धनंजय कौर पृष्ठ ४०२ व मुस्लिम राजनीति श्री पुरूषोत्तम योग

  42. May 8, 2010 at 6:25 am

    man ने सारी बातें साफ कर दी हैं. महफूज जी, फौजिया और फिरदौस जैसे इन्सानों को छोड़कर कट्टरपंथियों के लिये अलग प्रदेश बना दिया जाये जहां उनका मजहबी शासन हो…

  43. May 8, 2010 at 6:25 am

    man ने सारी बातें साफ कर दी हैं. महफूज जी, फौजिया और फिरदौस जैसे इन्सानों को छोड़कर कट्टरपंथियों के लिये अलग प्रदेश बना दिया जाये जहां उनका मजहबी शासन हो…

  44. May 8, 2010 at 10:52 am

    सुरेश जी ,आप में विलक्षण लेखन क्षमता है. अगर आप उचित समझें तो कृपा कर कभी अपनी लेखनी इस विषय पर भी चलाइये " मुस्लिम लोगो के वोटिंग अधिकार ख़तम करने के ३ साल बाद भारत की तस्वीर" मेरा पूरा विशवास है की यह ही एक मात्र रास्ता है भारत की ९५ % समस्याओं से निकलनेका.

  45. May 8, 2010 at 1:42 pm

    जमाल, असलम, सलीम अयाज, सहाफत, इदरीसी, जीशान सब हराम की औलाद हैं, इनको अपने बाप के नाम का तो पता नहीं, दूसरों को भाषण देते फिरते हैं. सा———ला हराम औलाद है. इन लोगों का मजहब इतना गंदा है- हर महिला को नंगा करते फिरते हैं. सर्वप्रथम अपनी मां को … हुए पैदा होते हैं, बड़े होकर बहन की इज्जत उतारते है, बेटी पैदा होती है तो सोचते हैं कब बड़ी हो और कब ये उसके साथ भी मुंह काला करें. जमाल, असलम, सलीम अयाज, सहाफत, इदरीसी, जीशान सब हराम की औलाद हैं, इनको अपने बाप के नाम का तो पता नहीं, दूसरों को भाषण देते फिरते हैं.

  46. May 9, 2010 at 6:07 pm

    इस आलेख में उठाये गये प्रश्नों का जबाव ना देकर कुछ लोग बेमतलब के फंतासी युक्त सवालों का उत्तर मांग रहे हैं . हंसी आती है इन लोगों पर जो ऐसे कलम चलाते हैं ! यहाँ सवाल उठाया गया कि नरेन्द्र मोदी के गुजरात में मुसलमानों पर बहुत ज़ुल्म होता हैं, मोदी के गुजरात में मुस्लिम असुरक्षित हैं, डरे हुए हैं…। तो फ़िर उसी गुजरात के एक केम्प की यह तस्वीर कौन सा सच बयाँ करती है ? अब ये ना कहियेगा कि खबर मनगढ़ंत है क्योंकि ये उसी अखबार में छपी है जिसे सेक्युलर माना जाता है ! लेकिन ब्लॉग पर सक्रीय चंद बेअक्ल तथाकथित मुसलमान , तथाकथित इसलिए कि वो इस्लाम के मुताबिक मुसलमान नहीं है खुद जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे संस्थान के इस्लामिक विद्वान इन जाकिर नायक के चेलों और इनके गुरु को सच्चा मुसलमान मानने से इनकार करते हैं . वो ऐसे किसी भी आदमी को काफिर समझते हैं जो अवतारवाद में यकीन रखता है और मुहम्मद साहब को कल्कि अवतार बताता है . अब , ये लोग पहले आपस में मशविरा करके आम राय कायम करें फ़िर ऐसे किसी सिद्धांत को ब्लॉग में फैलाएं . वैसे इससे जनता को कोई लेना-देना नहीं है . जनता अमन -चैन से अपने अपने भगवान, अपने खुदा के साथ खुश है . उनको भूखे पेट धर्म पर बहस करने की जरुरत और फुरसत दोनों नहीं है . अच्छा होगा यदि ये स्वघोषित धर्मगुरु अपने समाज में व्याप्त बेकारी, गरीबी , अशिक्षा आदि को दूर करें ताकि संसद में धर्म के आधार पर संख्या के आधार पर इनको आरक्षण की भीख ना मांगनी पड़े !

  47. impact said,

    May 10, 2010 at 6:07 am

    Indian Express se bada communal akhbaar hai koi?

  48. May 10, 2010 at 9:33 am

    yahan to aana hee bekar hai. koi islami duniya naam ka shaitan bhee apni bhadde comments ke ultiyan karta hai. mein aksar aisi baat kehta nahin hoon. lekin aaj kehta hoon. is shaitan ke saath kisi musalmaan ne kuch BURA kaam kar diya hai.

  49. May 11, 2010 at 7:25 am

    सुरेश जी,कुछ फर्जी ब्लॉग जो जिनकी भाषा बहुत खराब हो और वे फर्जीनाम जो व्यक्तिगत आक्षेप भोंडे तरीके से करते हैं, उनको टिप्पणियों में जगह देना उचित नहीं है. मेरा आशय "इस्लाम की दु.." से है.

  50. May 12, 2010 at 4:47 am

    सलीम ख़ान said… "अगर सावरकर जी का पुनर्जन्म अफ़गानिस्तान में तालिबान समर्थक में हुआ तो इस बात की गारंटी कौन लेगा कि भारत के ख़िलाफ़ किसी भी आतंकी घटना में वे लिप्त नहीं होंगे??? और अगर ऐसा हुआ तो उस राष्ट्रवाद का क्या होगा जिसे वीर सावरकर अपने कथित खून पसीने से सींचा था !!!???"वीर सावरकर का राष्ट्रवाद वैसे ही कायम रहेगा जैसे पहले था । वीर सावरकर बार बार जन्म नहीं लेते हैं । आप निश्चिंत रहिये ।

  51. ePandit said,

    May 21, 2010 at 12:30 pm

    यकीन नहीं होता, राहत शिविर में ऐसी पाबंदियाँ। राहत दे रहे हैं कि जेल में कैद कर रहे हैं? कौन रहना चाहेगा ऐसे राहत (?) शिविर में।

  52. October 8, 2010 at 6:00 pm

    >gujrat bharat ka sawarg hai….. aur MODIJI ush ke rachaita….

  53. sahdeV said,

    April 2, 2011 at 8:24 am

    >curious to know, what is narendra modijee doing about it?? Please note, question does not have any connotation, i respect the man for the developments he made. Only curious to know, what is narendra modijee doing about this whole thing??


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