>जागो भारत

>अगर आप सुबह घुमने या रेस लगाने जाते है तो कोई भी पीपल रास्ते में जरूर आता होगा अथवा मंदिर . वहा कुछ स्त्रिया आपको पीपल प़र जल चढाते और देसी घी का दिवा जगाते दिकेंगी पुरूष भी जल चढाने जाते है लेकिन महिलाये अधिक होती है . आपके मन में जरूर आता होगा की पीपल के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है . कुछ लोग जो पश्चिमी सोच रखते है वह तो इसे अंधविश्वास कहने से भी नही चुकते होंगे . लेकिन बिना कुछ जाने और सोचे अपने ही लोग एसी बाते करे तो दिल तो दुखता ही है और आस्था हमारी श्रद्ध प़र भी चोट पहुचती है . लेकिन हम फिर भी सब कुछ सहन कर लेते है क्यों की दया , क्षमा ही हमारे संस्कार है . लेकिन उन लोगो को जरुर जान लेना चाहिए यह कोई अंधविश्वास नही है इसके पीछे मनुष्य के कल्याण की कामना है . आइये जाने

पीपल का वृक्ष ही पवित्र और पूजनीय क्यों माना गया है = हिन्दुओ की धार्मिक आस्था के अनुसार सवयम श्री हरी विष्णु पीपल के वृक्ष में निवास करते है . श्री मद्भ्ग्वत्गीता का उपदेश करते समय श्री कृष्ण जी अपने मुख से उच्चारित किये है की वृक्षो में मै पीपल हूँ . सकन्ध पुराण के अनुसार पीपल के मूल में विष्णु , तने में केशव शाखाओं में नारायण और पत्तो में भगवान हरी निवास करते है

वज्ञानिक अर्थ = पीपल ही एक एसा वृक्ष है जो चोबीसो घंटे आक्सीजन निकालता है और कार्ब्न्दैआक्साइद खिचता है .आक्सीजन जिव धारियों के लिये प्राण वायु है . इसके अलावा भी पीपल के वृक्ष में अनेक अन्य विशेषताए है जैसे सर्दी के मोसम में इसकी छाया में बैठने से गर्माहट रहती है और गर्मी के मोसम में शीतलता . एक अन्य विशेषता भी है पीपल के पत्तो से सपर्श करने से वायु में मिले संक्रामक वायरस नष्ट हो जाते है . आयुर्वेद के अनुसार इसकी छाल , पत्तो और फलो से अनेक प्रकार की दवाये बनती है .इस तरह से वज्ञानिक हो अथवा धार्मिक पीपल का वृक्ष सम्पूर्ण समाज को इसकी पूजा करनी चाहिए और अधिक से अधिक पीपल के वृक्ष लगाये ताकि पर्दुष्ण को कम किया जा सके

हम और हमारे संस्कार सम्पूर्ण पृथ्वी के कल्याण के लिये कार्यरत है लेकिन बहुत से लोग बिना कुछ सोचे समझे जाने धर्म प़र ऊँगली उठाते है . लेकिन हिन्दू धर्म प़र अगर विस्तार से शोध किये जाए और छात्र – छात्राओं को भारत की शिक्षा का कुछ भाग भी अच्छे से समझाया जाए तो पूरे विश्व में शान्ति और मानवता का विस्तार हो जाए . और प्रकृति की रक्षा भी

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