3G स्पेक्ट्रम की नीलामी – द पायोनियर के कारण राजा बाबू के पेट पर लात पड़ी… (एक माइक्रो पोस्ट)… 3G Spectrum License, A Raja, Telecom Companies in India

बहुप्रतीक्षित 3G स्पेक्ट्रम की नीलामी की निविदाएं कल (19 मई को) खोली गईं। UPA की महान दिलदार, उदार सरकार ने उम्मीद की थी कि उसे लगभग 35,000 करोड़ का राजस्व मिलेगा, जबकि 22 सर्कलों की लाइसेंस बिक्री के जरिये सरकार को अभी तक 70,000 करोड़ रुपये मिल चुके हैं, तथा BSNL और MTNL की “रेवेन्यू शेयरिंग” तथा “सर्कल डिस्ट्रीब्युशन” के कारण अभी यह आँकड़ा 85,000 करोड़ रुपये को पार कर जायेगा। कुछ ही दिनों में BWA (ब्रॉडबैण्ड वायरलेस एक्सेस) की भी नीलामी होने वाली है, जिससे सरकार को और 30,000 करोड़ की आय होने की उम्मीद है और निश्चित ही उसमें भी ज्यादा ही मिलेगा।

2G के महाघोटाले के बाद सतत राजा बाबू और नीरा राडिया के कारनामों को उजागर करने वाले “एकमात्र अखबार” द पायोनियर को इस बात का श्रेय जाता है कि उसने सरकार को मजबूर कर दिया कि 3G लाइसेंस बिक्री के सूत्र राजा बाबू के हाथ न आने पायें। पायनियर द्वारा लगातार बनाये गये दबाव के कारण सरकार को मजबूरन थ्री-जी की नीलामी के लिये –

1) मंत्रियों का एक समूह बनाना पड़ा

2) जिसकी अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी ने की,

3) इसमें प्रधानमंत्री की तरफ़ से विशेषज्ञ के रूप में सैम पित्रोदा को भी शामिल किया गया

4) भारी चिल्लाचोट और कम्पनियों द्वारा छातीकूट अभियान के बावजूद नीलामी की प्रक्रिया जनवरी 2009 से शुरु की गई, जब वैश्विक मंदी कम होने के आसार दिखने लगे (वरना कम्पनियाँ मंदी का बहाना बनाकर कम पैसों में अधिक माल कूटने की फ़िराक में थीं…)

5) नीलामी रोज सुबह 9.30 से शाम 7.00 तक होती, और इसके बाद प्रत्येक कम्पनी को उस दिन शाम को अपने रेट्स केन्द्रीय सर्वर को सौंपना होते थे, जिस वजह से सरकार को अधिक से अधिक आय हुई।

6) इस सारी प्रक्रिया से बाबुओं-अफ़सरों-नौकरशाही-लॉबिंग फ़र्मों और फ़र्जी नेताओं को दूर रखा गया।

सोचिये, कि यदि अखबार ने राजा बाबू-नीरा राडिया के कारनामों को उजागर नहीं किया होता तो इसमें भी राजा बाबू कितना पैसा खाते? अर्थात यदि प्रमुख मीडिया अपनी भूमिका सही तरीके निभाये, फ़िर उसे अंग्रेजी-हिन्दी के ब्लॉगर एवं स्वतन्त्र पत्रकार आम जनता तक जल्दी-जल्दी पहुँचायें तो सरकारों पर दबाव बनाया जा सकता है। यदि सरकार द्वारा यही सारे उपाय 2G के नीलामी में ही अपना लिये जाते तो सरकार के खाते में और 60,000 करोड़ रुपये जमा हो जाते।

(दिक्कत यह है कि यदि ऐसी प्रक्रिया सभी बड़े-छोटे ठेकों में अपनाई जाने लगे, तो कांग्रेसियों को चुनाव लड़ने का पैसा निकालना मुश्किल हो जाये… दूसरी दिक्कत यह है कि सभी को मोटी मलाई चाहिये, जबकि इतने बड़े सौदों में “तपेले की तलछट” में ही इतनी मलाई होती है कि “बिना कुछ किये” अच्छा खासा पेट भर सकता है, लेकिन फ़िर भी पता नहीं क्यों इतना सारा पैसा स्विट्ज़रलैण्ड की बैंकों में सड़ाते रहते हैं ये नेता लोग…?)

बहरहाल, ऐसा भी नहीं है कि इतनी सारी प्रक्रियाएं अपनाने के बावजूद सारा मामला एकदम पाक-साफ़ ही हुआ हो, लेकिन फ़िर भी जिस तरह से राजा बाबू खुलेआम डाका डाले हुए थे उसके मुकाबले कम से कम प्रक्रिया पारदर्शी दिखाई तो दे रही है। 3G की नीलामी में राजा बाबू को पैसा खाने नहीं मिला और उनके मोटी चमड़ीदार पेट पर लात तो पड़ ही गई है, लेकिन फ़िर भी “जिस उचित जगह” पर उन्हें लात पड़नी चाहिये थी, वह अब तक नहीं पड़ी है… देखते हैं “ईमानदार बाबू” का धर्म-ईमान कब जागता है।

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22 Comments

  1. SANJEEV RANA said,

    May 20, 2010 at 9:05 am

    आज मैं पहला टिप्पणीकारइस जानकारी के लिए आपका आभार

  2. May 20, 2010 at 9:18 am

    सरकार जितना काम कंप्यूटर और इलेक्ट्रोनिक माध्यम से करने का प्रयास करेगी उतना ही नालायक और हरामखोर अफसरों के पेट पर लात पड़ेगी. इतना ही नहीं इलेक्ट्रोनिक माध्यम से दर्ज किये हुए रेकॉर्ड्स में बाबुओ द्वारा हेर फेर भी संभव नहीं होगा. अगर FIR, स्टाम्प पेपर, निविदाये, आवेदन इत्यादि को कम्पूटर के द्वारा रिकॉर्ड करना शुरू दे तो भ्रष्टाचार में काफी हद तक कमी संभव है. आपका इस घोटाले पर लेख वाकई प्रशंसनीय था.

  3. anna said,

    May 20, 2010 at 9:20 am

    uchit jagah per laat zaroor padegi raaja babu ko.. bhagwaan ke ghar der hai andher nahi

  4. May 20, 2010 at 9:24 am

    अखबार के लोग बिना बिके दबाव बनाए तो लात सही जगह पड़नी ही पड़नी है.पारदर्शिता केवल खाने-खिलाने के लिए नहीं बरती जाती वरना कोई कारण नहीं कि सब काम बिना लिये दिये हो जाए. फिर घूस देना किसे अच्छा लगता है?

  5. SANJEEV RANA said,

    May 20, 2010 at 9:49 am

    ऐसे ही पर्दाफाश करते रहे इन गद्दारों का .जय हिंद , जय भारत

  6. May 20, 2010 at 10:43 am

    "3G की नीलामी में राजा बाबू को पैसा खाने नहीं मिला और उनके मोटी चमड़ीदार पेट पर लात तो पड़ ही गई है, लेकिन फ़िर भी “जिस उचित जगह” पर उन्हें लात पड़नी चाहिये थी, वह अब तक नहीं पड़ी है",सुरेश जी , एक बार फिर से बढ़िया विषय,मेरा सवाल: कोई ये पूछेगा कि;2G Spectrum की बिक्री से सरकार को सिर्फ 10772 करोड़ रूपये मिले थे जबकि 3G से 70000 करोड़ यानी 60000 करोड़ का अंतर या यूँ कहें कि सीधा सीधा घोटाला ! थोड़ी देर को घोटाला भूल जाइए और ये देखिये कि राजा की इनकम्पीटेंसी से देश को इतना बड़ा नुकशान हुआ तो क्या इसकी सजा उस मंत्री को नहीं मिलनी चाहिए ?

  7. May 20, 2010 at 12:36 pm

    नियमित दबाव बनाए रखने की जरुरत है……. सही जगह लात पड़ने ही चाहिए, संगीन जुर्म किया है मंत्री राजा ने.

  8. May 20, 2010 at 12:45 pm

    जैसा की भावेश जी ने कहा, ये ऑनलाइन डिजिटल प्रोसेस से भ्रष्टाचार रोकने में आमूलचूल परिवर्तन लाया जा सकता है.

  9. May 20, 2010 at 3:21 pm

    मीडिया यदि कांग्रेस और सरकार की जी हजुरी छोड़ सच को छापने-दिखाने लग जाए तो अपने देश का काया कल्प हो सकता है | पर ऐसा होने लगा तो NDTV के प्रोनोय रॉय के उस मकान का क्या होगा जो हाल ही में वो सैकड़ों करोड़ में कोलकत्ता में खरीदा है ?

  10. man said,

    May 20, 2010 at 3:26 pm

    साहब ,कंहा पेट पर लात पडी हे ?हरामी कोई गरीब थोडेही हे जो पेट पर लात पड़ती ,,|सालो को अजीर्ण हो रहा हे ,,फिर भी ठूंसते जा रहे हे |खा जाना चाहते हे अभी ही सब कुछ |सब कमी नागरिक चरित्र की हे ,हमारे यंहा |चाइना में स्टील गवर्मेंट .trancpericy system हे ,अमेरिका और west में लोग टूल्स का डीबा hath में hi रखते government की ढेबरी tight . करने के लिए ….यंहा कुछ को छोड़ सभी ,चाँद परप्लाट के भाव पूछ रहे हे ?

  11. SHIVLOK said,

    May 20, 2010 at 3:42 pm

    अगर सरकार सब कार्यों में तकनीक का भरपूर उपयोग करने लगे तो भ्रष्टाचार के साथ साथ इन दुष्ट नेता लोगों की जन्मकुंडली भी सुधारने लगेगी | हो सकता है आने वाले निकट समय में देश के दुष्ट और गद्दार नेता तकनीकी साधनों का ही विरोध करने लगें क्योंकि भविष्य में ये कंप्यूटर देवता और नेट इनके मंसूबों पर पानी फेरने वाले हैं| सुरेश जी इस तरह के आपके लेखन वंदन योग्य हैं | भगवान आपकी हर तरह से रक्षा करे, मदद करे | ऐसी मेरी प्रार्थना है|

  12. May 20, 2010 at 4:02 pm

    सर्कार के इस भर्ष्टाचार को सको उजागर कर जनता का पैसा लूट से बचाने में आपका भी योगदान कोई कम नहींइस सच्चाई को सबके समाने रखने केलिए आप बधाई के पात्र हैं।जिस अखवार की आपने बात की है इसमें कोई शक नहीं कि उसने भी अच्छा काम किया पर उसकी पहुंच सिर्फ शहरों तक है जब कि आपके लेखों ने इसे हमारे जैसे गांव में बैठे लोगों तक भी पहूंचा दियाहम आपकी इस साकारतक खोजी पत्रकारिता से बहुत प्रभावित हुए।अगर वक्त लगे तो इस पर हमारा लेख जरूर पढें

  13. अवध said,

    May 20, 2010 at 4:06 pm

    raja babu kahe, bahut sare logon ka pet kat gaya.aapko badhai……

  14. aarya said,

    May 20, 2010 at 4:23 pm

    सादर वन्दे !सुरेश जी मुझे लगता है एक बार आप किसी नेता पर भरोसा कर सकते हैं लेकिन आज के पत्रकार पर नहीं, क्योंकि जो माथे का पसीना एडी तक बहा कर सबूत इकठ्ठा करता है उसे उसके (बड़े पत्रकार नाम क्या lun सभी एक से हैं ) बड़े पत्रकार उन्ही कमीनो के साथ वह सबूत शराब में डालकर पी लेते हैं,लेकिन कहते है उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए और सुधरने की शुरुआत खुद से करनी चाहिए, जो आपने bakhubi कर li है और ham pryas kara rahe हैं.ratnesh tripathi

  15. May 20, 2010 at 6:35 pm

    सटीक रपट। बधाई।

  16. May 20, 2010 at 6:38 pm

    तथ्यों पर आधारित जानकारी देती पोस्ट / उम्दा विचारणीय प्रस्तुती / सुरेश जी आज हमें सहयोग की अपेक्षा है और हम चाहते हैं की इंसानियत की मुहीम में आप भी अपना योगदान दें / पढ़ें इस पोस्ट को और हर संभव अपनी तरफ से प्रयास करें —— http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/2010/05/blog-post_20.html

  17. May 20, 2010 at 7:29 pm

    पी सी गोदियाल जी की बात में काफी दम है। बढिया मुद्दा पेश किया और बेहतरीन ढंग से। कम्बख्तों को अब तो अकल आ जानी चाहिए।

  18. May 21, 2010 at 5:01 am

    सुरेश जी,ये सेम पित्रोदा साहब कोंन हैं? कहीं हमारे( राजीव भय्या के) साले साहब तो नहीं?RegardsDikshit Ajay K

  19. May 21, 2010 at 5:37 am

    आई आब्जैक्ट…..मुंह पर लात पङी…

  20. May 21, 2010 at 7:58 am

    फिर वही बात. ये तो मजबूरी में ऐसा करना पड़ गया वरना चाहता कौन होगा….

  21. May 22, 2010 at 7:34 am

    very good

  22. May 27, 2010 at 10:40 am

    अति प्रशंसनीय सुरेश जी ।


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