बन्द करो भोपाल-भोपाल-भोपाल की चिल्लाचोट? कभी खुद के गिरेबान में झाँककर देखा है?…… Bhopal Gas Tragedy, Bhopal Judgement, Congress

“आज तक” पर देर रात एक बहस में देख रहा था कि किस तरह से गाँधी परिवार के “वफ़ादार” श्री आरके धवन, राजीव गाँधी का बचाव कर रहे थे। जैसे ही दिग्विजय सिंह ने केन्द्र का नाम लिया, मानो आग सी लग गई। कांग्रेसियों में होड़ लगने लगी कि, मैडम की नज़रों में चढ़ने के लिये कौन, कितना अधिक जोर से बोल सकता है। सत्यव्रत चतुर्वेदी आये और अर्जुन सिंह पर बरसे (क्योंकि उन्हें उनसे पुराना हिसाब-किताब चुकता करना है), वसन्त साठे (जो खुद केन्द्रीय मंत्री थे) ने भी अर्जुन सिंह पर सवाल उठाये, सारे चैनल और अधिकतर अखबार भी “बलिदानी परिवार” का नाम सीधे तौर पर लेने से बच रहे हैं, कि कहीं उधर से मिलने वाला “पैसा” बन्द हो जाये

कुछ टीवी चैनल और अखबार तो “पेशाब में आये झाग” की तरह एक दिन का उबाल खाने के बाद वापस कैटरीना-करीना-सलमान की खबरें, नरेन्द्र मोदी, विश्व कप फ़ुटबॉल दिखाने में व्यस्त हो गये हैं। तात्पर्य यही है कि जल्दी ही एक “बलि का बकरा” खोजा जायेगा, जो कि या तो अर्जुन सिंह होंगे अथवा उस समय का कोई तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री या गृह मंत्रालय का बड़ा अफ़सर (अधिक सुविधाजनक तो यही होगा कि, ऐसे आदमी का नाम सामने कर दिया जाये, जो मर चुका हो… लेकिन “त्यागमयी परिवार” के दुर्भाग्य से 25 साल बाद भी अधिकतर लोग जीवित ही हैं), प्रणब मुखर्जी भी अर्जुन के माथे ठीकरा फ़ोड़ने के मूड में हैं, उधर नरेन्द्र मोदी ने सोनिया गाँधी का नाम लिया तो मुँह में मिर्ची भरे जयन्ती नटराजन, आनन्द शर्मा, राजीव शुक्ला, मनीष तिवारी सहित सारे चमचे-काँटे-छुरी-कड़छे-कटोरी सब अपने खोल से बाहर आ गये। अब मंत्रियों का समूह गठित किया गया है जो ये पता लगायेगा कि असली दोषी कौन है? यानी कि कोशिश पूरी है कि देश के सबसे पवित्र, सबसे महान, सबसे त्यागवान, सबसे बलिदानी “परिवार” पर कोई आँच न आने पाये…

खैर कांग्रेस जो करना था कर चुकी, अब आगे जो करना है वही करेगी… उन्हें देखकर घिन आती हो तो आती रहे…।

अपन तो अब अपनी बात करें…

भोपाल का फ़ैसला वही आया जो कि कानून के मुताबिक अदालत के सामने रखा गया था, यह फ़ैसला आने के बाद से चारों तरफ़ भोपाल-भोपाल-भोपाल की रट लगी हुई है, लोगबाग धड़ाधड़ लेख लिख रहे हैं, सरकारों को कोस रहे हैं, व्यवस्था को गालियाँ दे रहे हैं… लेकिन खुद अपने भीतर झाँककर नहीं देखेंगे कि –

– हम खुद कितने भ्रष्ट हैं?

(सोचकर देखना आज तक कितनी रिश्वत ली है, या कितनी दी है?)

– हम खुद कितने अनुशासनहीन हैं?

(सोचना कि कितने बच्चे पैदा किये, कितने पेड़ काटे, कितनी बार ट्रेफ़िक नियम तोड़े, कितना पानी बेकार बहाया, कितनी नदियाँ प्रदूषित कीं… आदि)

– हम खुद कितने अनैतिक हैं?

(सोचना कि कितनी महिलाओं को बुरी नज़र से देखा, कितनी लड़कियों को गलत तरीके से अपने बस में करने की कोशिश की, कितनी बार लड़कियों को छेड़ा जाता देखकर, पतली गली से कट लिये…)

– हम खुद कितने नालायक हैं?

(सोचना कि औकात न होते हुए भी किस नौकरी पर काबिज हो, किस-किस का हक मारकर कौन सी कुर्सी पर कुण्डली मारे बैठे हो?)

– हम पढ़े-लिखे होने के बावजूद कितनी बार वोट देने गये हैं?

(सोचना कि कितनी बार ईमानदारी से वोटिंग लिस्ट में नाम जुड़वाया? संसद-विधानसभा-नगर निगम के चुनावों में कितनी बार वोट देने गये?)

– हम खुद कितनी बार किसी सामाजिक-राजनैतिक बहस या आन्दोलन में सक्रिय रहे या परदे के पीछे से समर्थन किया है?

(सोचना कि जब कोई राजनैतिक आंदोलन हो रहा था, तब कितनी बार बीवी की साड़ी के पीछे छिपे बैठे थे कि “मुझे क्या करना है?”)

– सारी जिन्दगी सिर्फ़ “हाय पैसा-हाय पैसा” करते-करते ही मर गये, अब व्यवस्था को दोष क्यों देते हो?

(सारे गलत-सलत धंधे करके ढेर सा पैसा कमा लिया, भर लिया अपने पिछवाड़े में, देश जाये भाड़ में… तो अब क्यों चिल्ला रहा है बे?)

– जिस “परिवार” और जिस पार्टी को सालोंसाल बगैर सोचे-समझे वोट देते आये हो, तो अब उसे भुगतने में नानी क्यों मर रही है?

(सोचना कि किस तरह से “परिवार” की चमचागिरी करके, तेल लगा-लगा कर अपनी पसन्द के काम करवा लिये, ट्रांसफ़र रुकवा लिये, ठेके हथिया लिये?)

देश के नागरिकों का “चरित्र” ऐसे ही तैयार नहीं होता, इसके लिये देशभक्ति और राष्ट्रवाद की लौ दिल में होना चाहिये…। जो पाखण्डी भीड़ कंधार विमान अपहरण के समय वाजपेयी के घर के सामने छाती पीट-पीटकर “आतंकवादियों को छोड़ दो, हमारे परिजन हमें लौटा दो…” की रुदालियाँ गा रही थी… वही देश का असली चेहरा है…नपुंसक और डरपोक।  कोई अफ़सर या नेता हमें झुकने के लिये कहता है तो हम लेट जाते हैं

– आज कई खोजी पत्रकार घूम रहे हैं, सब उस समय कहाँ मर गये थे, जब केस को कमजोर किया जा रहा था? क्या पूरे 25 साल में कभी भी अर्जुनसिंह या राजीव गाँधी से कभी पूछा, कि एण्डरसन देश से बाहर निकला कैसे?

– जो कलेक्टर और एसपी आज टीवी पर बाईट्स दे रहे हैं, उस समय शर्म के मारे मर क्यों नहीं गये थे या नौकरी क्यों नहीं छोड़ गये?

– पीसी अलेक्जेण्डर आज बुढ़ापे में बयान दाग रहे हैं, 25 साल पहले मीडिया में यह बताने क्यों नहीं आये? क्यों कुर्सी से चिपके रहे?

– मोईली न्याय व्यवस्था को दोष दे रहे हैं… कानून मंत्री बनकर कौन से झण्डे गाड़े हैं, ये तो बतायें जरा?

इसलिये बन्द करो ये भोपाल-भोपाल-भोपाल की नौटंकी… कुल मिलाकर यह है कि, हम सभी ढोंगी हैं, पाखण्डी हैं, कामचोर हैं, निकम्मे हैं, स्वार्थी हैं, निठल्ले हैं, हरामखोर हैं, भ्रष्ट हैं, नीच हैं, कमीने हैं… और भी बहुत कुछ हैं… लेकिन फ़िर भी भोपाल-भोपाल चिल्ला रहे हैं…। हम पर राज करने वाली “महारानी” और “भोंदू युवराज” अपने महल में आराम फ़रमा रहे हैं, उनकी तरफ़ से कोई बयान नहीं, कोई चिन्ता नहीं… क्योंकि उनके महल के बाहर उनके कई “वफ़ादार कुत्ते” खुलेआम घूम रहे हैं…। कोई ये बताने को तैयार नहीं है कि यदि अर्जुन सिंह ने एण्डरसन को भोपाल से दिल्ली पहुँचाया, लेकिन दिल्ली से अमेरिका किसने पहुँचाया?

वारेन एण्डरसन तो विदेशी था, कितने पाठकों को विश्वास है कि यदि मुकेश अम्बानी की किसी भारतीय कम्पनी में ऐसा ही हादसा हो जाये तो हम उसका भी कुछ बिगाड़ पायेंगे…? जब ऊपर से नीचे तक सब कुछ सड़ चुका हो, हर व्यक्ति सिर्फ़ पैसों के पीछे भाग रहा हो, राष्ट्र और राष्ट्रवाद नाम की चीज़ सिर्फ़ जुगाली करने के लिये बची हों, तब और क्या होगा…। “कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए एण्डरसन को भगाया गया…” इतना बकवास और घटिया बयान देने में प्रणब मुखर्जी साहब को बुढ़ापे में भी शर्म नहीं आ रही, और ये स्वाभाविक भी है, क्योंकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़ने पाये, शायद इसीलिये तो अफ़ज़ल को जिन्दा रखा है अब तक…।

जनता के लिये संदेश साफ़ है – अगर “एकजुट, समझदार, देशभक्त और ईमानदार” नहीं हो, तब तो जूते खाने लायक ही हो…। किसी जमाने में मुगलों ने मारे, फ़िर अंग्रेजों ने मारे और अब 60 साल से एक “परिवार” मार रहा है, क्या उखाड़ लोगे… बताओ तो जरा? पहले खुद तो सुधरो, फ़िर बोलना…। सच तो यही है कि, हम लोगों के सिर पर एक “हिटलर” ही चाहिये, जो शीशम की छड़ी लेकर सोते-जागते-उठते-बैठते “पिछवाड़ा” गरम करता रहे… तभी सुधरेंगे हम…… लोकतन्त्र वगैरह की औकात ही नहीं है हमारी… 
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अपने मित्रों को इस लेख की लिंक भेजें…क्योंकि हम “चाबुक” खाने और बावजूद उसके न जागने के आदी हो चुके हैं… फ़िर भी एक चाबुक लगाने में कोई हर्ज नहीं है…

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66 Comments

  1. June 14, 2010 at 6:52 am

    आपको बता दूँ, महज 50 लाख कश्मीरी मुसलमानों के भय से 120 करोड़ का देश एक देशद्रोही को फाँसी नहीं दे रहा है. सोच लो कैसे डरपोक देश के नागरीक हैं हम. हमने क्या बना दिया है भारत को.

  2. June 14, 2010 at 7:05 am

    सच कह रहे हैं आप….यहाँ ब्लॉग में भी ढकोसले बाज़ी बहुत है….. ऐसे ऐसे नालायक हैं…यहाँ …..बिना चीज़ों को जाने समझे तह तक गए….. लिखना चालू कर देते हैं…… आपके हर प्रशन का जव्वाब यहाँ किसी के पास नहीं होगा….. सब इसी व्यवस्था में रहते हुए….. इसी को फिर गाली भी देंगे…. आपके ज्वलंत लेख और मुद्दे….. खून…. में एक उबाल पैदा कर देते हैं….

  3. June 14, 2010 at 7:06 am

    सहमत हूँ इस कथन से कि "जब ऊपर से नीचे तक सब कुछ सड़ चुका हो, हर व्यक्ति सिर्फ़ पैसों के पीछे भाग रहा हो, राष्ट्र और राष्ट्रवाद नाम की चीज़ सिर्फ़ जुगाली करने के लिये बची हों, तब और क्या होगा." हम चाहे कितना ही क्यों न चिल्ला ले, ये पूर्णत सत्य है की हमारा ये तंत्र पूरी तरह से ने केवल खोखला और निष्क्रिय हो गया है बल्कि ये पूरी तरह से सड़ चूका है जिसकी दुर्गन्ध आज हर जगह व्याप्त है. आज कोई भी सरकारी चपरासी से लेकर अफसर तक केवल हरामखोरी करते है, काम नहीं करने के पैसे लेते है और लोग इन सब चीजों के आदि हो गए है. क्या करे जहाँ नज़र दौड़ते है वहां कोई भ्रष्ट ही नज़र आता है. कितनी भी बड़ी दुर्घटना हो जाए जनता चंद दिनों में सब भूल कर खुद के अपना उल्लू सीधा कर के खुद के रोटी पानी के जुगाड़ में लग जाती है और चुनाव के वक़्त फिर इन दरिंदो को सत्ता की चाबी सौंप दी जाती है.

  4. Anonymous said,

    June 14, 2010 at 7:17 am

    ये ब्लॉग-ब्लॉग खेल के खुद को बहुत बड़ा राष्ट्रवादी समझ रहा है क्या? बेटे इनसे कुछ होने वाला नहीं है. एक पत्ता भी इस सिस्टम का उखाड़ लो तो बताना. अगर इतनी ही परेशानी है तो क्यूँ न एक गुप्त-क्रांतिकारी-दल बना के काम किया जाये. लेकिन तेरे बस की ये नहीं है, बेटे. तेरी औकात बस इतनी है कि तू बस ब्लॉग पे मूंह फाड़ सकता है. सबसे बड़ा नपुंसक तो तू है, जो समस्या की जड़ को जानते हुए भी, बस ब्लॉग-ब्लॉग खेल के अपने कर्त्तव्य की इतिश्री समझ रहा है. तेरे जवाब का इंतज़ार रहेगा.पिताजी

  5. June 14, 2010 at 7:29 am

    "बेनामी हिजड़े" का कमेण्ट जानबूझकर प्रकाशित किया गया है… ताकि लोग जान सकें कि जो लोग अपनी पहचान छिपाकर, सामने आने से भी डरते हैं… ऐसे लोग भारत को बदलेंगे? कम से कम मैं खतरा उठाकर कुछ लिख तो रहा हूं, 100-200 लोग तो पढ़ेंगे, 2-4 सुधरेंगे भी…। लेकिन यह Anonymous सारी जिन्दगी, कीड़े-मकोड़े की तरह रेंगता ही रहेगा। लगता है कि यह गाँधी परिवार का कोई "कड़छा" है…

  6. June 14, 2010 at 7:37 am

    भोपाल से एक महीनें पहले के ८४ कांड मे जब उनका कुछ नही बिगड़ा तो भोपाल कांड मे क्या बिगड़ेगा। विपक्ष बेजान हो चुका है…..वैसे भी किसी भी पार्टी ने कब कोई झंडे गाड़े हैं….किसी भी पार्टी ने निष्पक्ष फैसला कब किया है?रही बात वोट देने वालों की तो जनता क्या कर सकती है जब देश में मूर्खो की संख्या ज्यादा हो।

  7. man said,

    June 14, 2010 at 7:54 am

    देश की जनता का ही रास्ट्रीय चरित्र इतना गिर चूका हे ,की वो उसी को खाने में लगा हे | ये तो कोई संतो और देव्तावो की शक्ती और आशीर्वाद से हिन्दू समाज बचा हुवाहे ,और सेना और कुछ नागरिको की वजह से देश बचा हुवा हे ,वर्ना सभी मटिया मेट ,सभी कुछ अवल दर्जे तक गिरा हुवा ,कुछ को पीड़ा होती हे लकिन पीड़ा ही पीड़ा में प्यारे हो जाते हे |चाइना और भारत के नागरिको के रास्ट्रीय चरित्र में कोई भी अंतर नहीं हे .लकिन वंहा डंडा होने में देर नहीं लगती हे ,यंहा डंडा करवाने वाले के डंडा हो जाता हे ?ऐसे ही सख्त और disiplan वाले रूल की जरूरत हे यंहा .जेसे अंग्रेज पहले गंदे नालो में छोड़ के दोनों तरफ कूते छोड़ देते थे ,वेसे ही ? व्यवस्था ने सभीको घटिया लेवल का बना दिया हे ,सभी जगह चोर दरवाजे छोड़ दिए गए हे ,कुछ भी सम्भव हे ?इन्ही बातो से सभी नागरिको के चरित्र और इमानदारी का कुछ पिला के या बहला फुसला के होने वाले rape की तरह rape हो रहा हे ?घुसे जा रहे हे गंदगी में ?आत्मा से कर रहे हैं समझोता ? जेसे जबरदस्ती करने के बाद समझोते में मिले धन की तरह ?क्या होगा कुछ नहीं जानते हे ?

  8. June 14, 2010 at 7:59 am

    बेनामी क्या जाने कौन कहाँ क्या काम करने में लगा हुआ है. वैसे अच्छा है बेनामी सही खून तो खौलता है.

  9. Anonymous said,

    June 14, 2010 at 8:40 am

    satya vachan proboo

  10. RAJAN said,

    June 14, 2010 at 8:44 am

    suresh bhau apko anonymous jaiso ki giri hui harkaton se nirash nahi hona cgahiye.ye log apni baukhlahat ko nahi chupa pa q rahe hai.

  11. aarya said,

    June 14, 2010 at 9:10 am

    सादर वन्दे |सुरेश जी आपने सही आईना दिखाया | हमें यह समझना होगा की समस्याओं की जड़ में हमारी अपनी नपुंसकता ही है बाकी तो प्रतिफल मात्र है |रही बात इन बेनामी टाइप के कमीनों की तो ये दोगली प्रजाति के कुत्ते भोकते रहेंगे, इनकी नश्ल ही गद्दारी से शुरू हुयी है | ये हरामखोर इतनी हिम्मत नहीं रखते की सामने आयें | अपनी बीबी की ……….घुसे रहने वाले ये हरामी जो अब धीरे धीरे पहचान में भी आने लगे हैं जिस तरह कुत्ते की भाषा बोल रहे हैं उसी तरह सड सड के कुत्ते की मौत ही मरेंगे क्योंकि इंसानी मौत तो इनकी कब की हो चुकी है |रत्नेश त्रिपाठी

  12. June 14, 2010 at 9:35 am

    संजय बेंगाणी जी और महफूज जी टिप्पणी से सहमत. 😦

  13. June 14, 2010 at 9:39 am

    यह बेनामी कैरान्वी है – जो कभी बेनामी तो कभी फर्जी नामो का बुरका पहनकर आता है-

  14. June 14, 2010 at 9:42 am

    संजय बेंगाणी जी सही कहते हो. महफूज भी मान रहा है कि- खून में एक उबाल पैदा कर देते हैं

  15. Rajesh said,

    June 14, 2010 at 9:48 am

    Nameste Sureshji,Apne kamal ka post likha hai. Apne sahi bataya hai kee bharat desh bharast desh hai. Yaha ki janta itni bharast ho chuki hai kee her cheez mein apna phayda dundhti hai. Bhad mein jay duniya dari. Bas apna phayda hona chahiye. Dhikkar hai esi Janta par.

  16. RAJAN said,

    June 14, 2010 at 9:50 am

    sanjay bhai ne jo kaha hai uske bade gahre arth lag rahe hai.par unhone bhi sirf sanket hi diya hai

  17. June 14, 2010 at 9:52 am

    जिस देश में नागरिक की हैसियत इतनी रहे कि वो रोटी, कपडा और मकान के बाद भी राष्ट्रवाद का चिराग न जला सके तब तो उस देश को गुलाम होना तय है. या फिर सत्ता के चालाक राक्षसों द्वारा नियमित लूट खसोट होगा. और यही हो रहा है.रूसी प्रधानमन्त्री के उस फैसले को याद रखना चाहिए जिसमे एक स्कूल में छुपे आतंकवादियों से लड़ने के लिए कुछ बच्चों की जान तक कुर्बान की गयी.

  18. June 14, 2010 at 10:59 am

    सुरेश जी, सदर नमस्कार, और धन्यवाद. मेरे विचार भी कुछ आप ही की तरह के है. आपने बिल्कुल सही नब्ज़ पकड़ी है समाज की इसलिए ही कुछ लोग बौखला गये है. क्योंकि इन लोगो ने अपने जीवन मे कुछ किया नही है. पर इनमे भी कुछ तड़प है जिसे वह सही दिशा नही दे पा रहे है. हम केवल अपने गौरवशाली अतीत की ही वंदना करते रहते है और आज कुछ ना कर पाने के बहाने निकल ही लेते है. मुझे नही लगता की यह मंच अपनी अभद्र, अनियंत्रित भाषा व उसके व्याकरण मे परंगतता को दर्शाने लिए है वरण समाज के ज्वलंत विषयो पर रोचक, सार्थक व सटीक विश्लेषण के लिए है.श्रीकांत

  19. June 14, 2010 at 11:09 am

    सुरेश जी, सदर नमस्कार, और धन्यवाद. मेरे विचार भी कुछ आप ही की तरह के है. आपने बिल्कुल सही नब्ज़ पकड़ी है समाज की इसलिए ही कुछ लोग बौखला गये है. क्योंकि इन लोगो ने अपने जीवन मे कुछ किया नही है. पर इनमे भी कुछ तड़प है जिसे वह सही दिशा नही दे पा रहे है. हम केवल अपने गौरवशाली अतीत की ही वंदना करते रहते है और आज कुछ ना कर पाने के बहाने निकल ही लेते है. मुझे नही लगता की यह मंच अपनी अभद्र, अनियंत्रित भाषा व उसके व्याकरण मे परंगतता को दर्शाने लिए है वरण समाज के ज्वलंत विषयो पर रोचक, सार्थक व सटीक विश्लेषण के लिए है.श्रीकांत

  20. June 14, 2010 at 11:15 am

    We Salute You SURESHJI,- – FIR EK HILA DENE WALA LEKH – Sureshji, Mujhe ek baat samajh me nahi aati hai, jitna sochata hun utna hi ulajh jata hun,1) Sab Jante hai ki Congress se Badi Ghatiya party Iss poori duniya me nahi, Aur na hi Congressi Netao se badakar Chaploos aur Harami neta iss duniya ki kisi party me hai..Hum Sabko malloom hai MAINO BARND Ne aaj tak Hindustan ko apna desh nahi mana hai aur Din Raat iss desh ko tode ja rahi hai, Khaye ja rahi hai..Fir bhi Sali iss desh ki Andhi PUBLIC Usse Ukhar ke kyun nahi Faikati..????2) GUJARAT,, MADHYA PRDSEH me kuch bhi Vikas ho Ye NAVBHARAT TIMES Jaise Congress ke Dalali khane wala Media kabhi Vikaas ki baat nahi karta Lekin Agar Narendara Modi ji Kahi Raste moot de to ye CHILLA CHILLA Ke bolte hai Modi ne kannoon toda hai.. Fir Chahe “5M” Ka kitna hi MOOT Iss NBT/TAHALA/NDTV etc. ko Pina pade ye uff tak nahi karata hai. Kya media Itna bikawoo ho sakta hai kya..???Kya hamesha hi ye sanb Chalega …? ? Kabhi Badlaw nahi aayega ..??Fir VIRENDRA JAIN Jaise “”JAYCHAND” Kabhi apni Matrabhakti (MAINO-Bhakti) pe aanch nahi aane dene wale Hindutava ke bare me kab Sochenge ..???Jo BHI Ho, Par aap apna karam karate rahiye, Bhagawan kare aapko ek din aap ke Prayas me safalta jaroor mile.Jayhind.Jay Hindu.

  21. June 14, 2010 at 11:16 am

    We Salute You SURESHJI,- – FIR EK HILA DENE WALA LEKH – Sureshji, Mujhe ek baat samajh me nahi aati hai, jitna sochata hun utna hi ulajh jata hun,1) Sab Jante hai ki Congress se Badi Ghatiya party Iss poori duniya me nahi, Aur na hi Congressi Netao se badakar Chaploos aur Harami neta iss duniya ki kisi party me hai..Hum Sabko malloom hai MAINO BARND Ne aaj tak Hindustan ko apna desh nahi mana hai aur Din Raat iss desh ko tode ja rahi hai, Khaye ja rahi hai..Fir bhi Sali iss desh ki Andhi PUBLIC Usse Ukhar ke kyun nahi Faikati..????2) GUJARAT,, MADHYA PRDSEH me kuch bhi Vikas ho Ye NAVBHARAT TIMES Jaise Congress ke Dalali khane wala Media kabhi Vikaas ki baat nahi karta Lekin Agar Narendara Modi ji Kahi Raste moot de to ye CHILLA CHILLA Ke bolte hai Modi ne kannoon toda hai.. Fir Chahe “5M” Ka kitna hi MOOT Iss NBT/TAHALA/NDTV etc. ko Pina pade ye uff tak nahi karata hai. Kya media Itna bikawoo ho sakta hai kya..???Kya hamesha hi ye sanb Chalega …? ? Kabhi Badlaw nahi aayega ..??Fir VIRENDRA JAIN Jaise “”JAYCHAND” Kabhi apni Matrabhakti (MAINO-Bhakti) pe aanch nahi aane dene wale Hindutava ke bare me kab Sochenge ..???Jo BHI Ho, Par aap apna karam karate rahiye, Bhagawan kare aapko ek din aap ke Prayas me safalta jaroor mile.Jayhind.Jay Hindu.

  22. June 14, 2010 at 11:16 am

    We Salute You SURESHJI,- – FIR EK HILA DENE WALA LEKH – Sureshji, Mujhe ek baat samajh me nahi aati hai, jitna sochata hun utna hi ulajh jata hun,1) Sab Jante hai ki Congress se Badi Ghatiya party Iss poori duniya me nahi, Aur na hi Congressi Netao se badakar Chaploos aur Harami neta iss duniya ki kisi party me hai..Hum Sabko malloom hai MAINO BARND Ne aaj tak Hindustan ko apna desh nahi mana hai aur Din Raat iss desh ko tode ja rahi hai, Khaye ja rahi hai..Fir bhi Sali iss desh ki Andhi PUBLIC Usse Ukhar ke kyun nahi Faikati..????2) GUJARAT,, MADHYA PRDSEH me kuch bhi Vikas ho Ye NAVBHARAT TIMES Jaise Congress ke Dalali khane wala Media kabhi Vikaas ki baat nahi karta Lekin Agar Narendara Modi ji Kahi Raste moot de to ye CHILLA CHILLA Ke bolte hai Modi ne kannoon toda hai.. Fir Chahe “5M” Ka kitna hi MOOT Iss NBT/TAHALA/NDTV etc. ko Pina pade ye uff tak nahi karata hai. Kya media Itna bikawoo ho sakta hai kya..???Kya hamesha hi ye sanb Chalega …? ? Kabhi Badlaw nahi aayega ..??Fir VIRENDRA JAIN Jaise “”JAYCHAND” Kabhi apni Matrabhakti (MAINO-Bhakti) pe aanch nahi aane dene wale Hindutava ke bare me kab Sochenge ..???Jo BHI Ho, Par aap apna karam karate rahiye, Bhagawan kare aapko ek din aap ke Prayas me safalta jaroor mile.Jayhind.Jay Hindu.

  23. June 14, 2010 at 11:18 am

    अगर यह अधिकारी उस समय कुछ कहते तो आज पेंशन भी नहीं मिल पाती… एक ईमानदार की जगह लेने के लिये सौ बेईमान बैठे हुये हैं. यदि ऊपर लोग सुधरे होंगे तो नीचे खुद-ब-खुद सुधर जायेंगे. रही बात स्व-अनुशासन की, तो कांग्रेसी संस्कृति ने वह सिखाया ही नहीं.. और नियम-कानून, व्यवस्था और अनुशासन बनाने के लिये ही अधिकारियों की फौज खड़ी की जाती है.. किस अधिकारी के लिये बंगला-गाड़ी नहीं चाहिये.. मंहगाई, भ्रष्टाचार, बढ़ती जनसंख्या सब एक ही आटो के तीन पहिये हैं…

  24. June 14, 2010 at 11:26 am

    सुरेश जी, सदर नमस्कार, और धन्यवाद. मेरे विचार भी कुछ आप ही की तरह के है. आपने बिल्कुल सही नब्ज़ पकड़ी है समाज की इसलिए ही कुछ लोग बौखला गये है. क्योंकि इन लोगो ने अपने जीवन मे कुछ किया नही है. पर इनमे भी कुछ तड़प है जिसे वह सही दिशा नही दे पा रहे है. हम केवल अपने गौरवशाली अतीत की ही वंदना करते रहते है और आज कुछ ना कर पाने के बहाने निकल ही लेते है. मुझे नही लगता की यह मंच अपनी अभद्र, अनियंत्रित भाषा व उसके व्याकरण मे परंगतता को दर्शाने लिए है वरण समाज के ज्वलंत विषयो पर रोचक, सार्थक व सटीक विश्लेषण के लिए है.श्रीकांत

  25. June 14, 2010 at 11:26 am

    सुरेश जी, सदर नमस्कार, और धन्यवाद. मेरे विचार भी कुछ आप ही की तरह के है. आपने बिल्कुल सही नब्ज़ पकड़ी है समाज की इसलिए ही कुछ लोग बौखला गये है. क्योंकि इन लोगो ने अपने जीवन मे कुछ किया नही है. पर इनमे भी कुछ तड़प है जिसे वह सही दिशा नही दे पा रहे है. हम केवल अपने गौरवशाली अतीत की ही वंदना करते रहते है और आज कुछ ना कर पाने के बहाने निकल ही लेते है. मुझे नही लगता की यह मंच अपनी अभद्र, अनियंत्रित भाषा व उसके व्याकरण मे परंगतता को दर्शाने लिए है वरण समाज के ज्वलंत विषयो पर रोचक, सार्थक व सटीक विश्लेषण के लिए है.श्रीकांत

  26. June 14, 2010 at 11:49 am

    सुरेश बेटा,आओ चलो सोचते हैं कि तुम्हारे इस ब्लॉग-ब्लॉग के खेल से देश कितना लाभान्वित हुआ.मानो कि तुम्हारे ब्लॉग को एक हज़ार लोगों ने पढ़ा. उनमे से पांच सौ ऐसे हैं जो कि तुम्हारी कहे से इत्तेफाक नहीं रखते, या कह लो कि मूर्ख हैं, नपुंसक हैं, और शुतुरमुर्ग हैं कि सच को सच मानने को भी तैयार नहीं हैं. अब बचे पांच सौ में से तीन सौ ऐसे होंगे जो कि तुम्हारी बात को सच मानते हैं और तुम्हारे द्वारा दिए गए तत्थ्यों और तर्कों पर यकीन करते हैं….बस यकीन करते है…और कुछ नहीं…पढ़ने के बाद फिर से अपने भ्रष्ट और निकृष्ट जीवन में खो जाते है…कोई सीख नहीं लेते… ठीक है?अब उन पांच सौ में से सौ लोग तुम्हे कमेन्ट बेक करते हैं कहते हुए "वाह सा'ब क्या बात कही है ".जो लोग तुम्हारी बातों को दूसरों को फैलाते हैं, ईमेल करके, ट्विट्टर वगैरह से वो पच्चीस – तीस से ज्यादा नहीं होंगे!! ….कुल मिलाकर देखें तो जीवन भर में तुम अगर तुम पांच लोगों को भी राष्ट्रवादी बना दो न, तो तुम तो सोचोगे कि "yeah!! i have kicked a big ass for my nation ". लेकिन वास्तव में हमारा देश कि स्थिति पर किंचित मात्र भी फ़र्क नहीं पड़ेगा.तो ऐसे में मेरा कहना ये है कि इस ब्लॉग-ब्लॉग के खेल को बन्द करके कुछ ऐसा किया जाये जो कि एक दम नया हो और वास्तव में देश की कायापलट कर दे.और जैसा कि मैंने अपने पिछले कमेन्ट में बताया कि एक रास्ता ये है कि गुप्त क्रांति दल बनाया जाए. या फिर खुद के बर्बाद होने की चिन्ता करे बगैर, अपनी राजनैतिक पार्टी बनाई जाये जो इन बकचोदों की (कांग्रेस, सपा, बसपा, भाजपा, कमीनिस्ट)की बजा के रख दे.मतलब ये कि कुछ सार्थक करना होगा. ये कहावत कि "बन्दूक से ताकतवर कलम है", भारत के सन्दर्भ में फिट नहीं है. साठ साल बाद भी जब हमारी आबादी का एक-तिहाई हिस्सा अपना नाम लिखना नहीं जानता (वास्तव में बचे दो-तिहाई में से आधे ऐसे होंगे जिन्होंने अपने नाम के अक्षरों को चित्र के रूप में याद किया होगा ), ऐसे में ब्लॉग तक पहुँच कितने लोगों कि होगी, ये स्वयं ही अन्दाज़ा लगा लो. बेटा… मैं तेरे लेख काफी समय से पढ़ रहा हूँ, और तेरी कही हर बात सच है, ये मैं दिल से महसूस करता हूँ. लेकिन इन सभी समस्याओं का निदान ये नहीं है कि मात्र उनके कारण की पड़ताल कर ली जाये. और चूंकि समस्या से सबसे अधिक वाकिफ तुम हो…(मैंने तुम जैसा बेबाक और स्पष्टवादी लेखक आज तक नहीं देखा), तो तुम्हारा सबसे अधिक फ़र्ज़ बनता है कि तुम ही इनका निदान करो.अन्त में,ये चीज़ बिलकुल मायने नहीं रखती कि बात बेनामी हिंजड़े ने कही है या कि नामधारी पाखंडी ने. वास्तव में फ़र्क तो सिर्फ इससे पड़ता है कि "क्या कहा गया" है. तुम्हारे उत्तर की प्रतीक्षा में पिताजी

  27. vikas mehta said,

    June 14, 2010 at 12:32 pm

    suresh ji apka lekh badhiya hai aaj or kal hamesha se hi bhart ke log videshiyo ke jute khate aaye hai kaarn paisaa or swaarth ese me rashtr ki sthiti yhi honi thi jo ho rahi hai

  28. Anonymous said,

    June 14, 2010 at 12:41 pm

    aapney ekdam sahi baat kahi hai. apni kamjoriyon ko pehchanna aur maana hi sudhar ki taraf pehla kadam hai. Kyon nahin hum sab log milkar kahdey hon aur aaj ke sabhi sadey galey (jo ki lagbhag sabhi hain) rajnitik dalo ko ukhad fenkar khud satta mein pahuchkar in sab kuch saaf karen. kyon nahin is blog ko padheny valey ye kasam kha le ki aaj se hum kabhi rishvat nahin denge aur na hi lenge. koi bhi galti honey par poora fine bharengey par rishvat nahin denge…ek baat aur sabhi benami ek se nahin hotey. 😉

  29. SHIVLOK said,

    June 14, 2010 at 1:21 pm

    पूर्ण सत्य है आपका आक्रोश हम सभी देशवासी वास्तव में आलसी, कामचोर, निकम्मे, कामीने, धूर्त, चालक, हरंखोर, झूठे, बेईमान, भ्रष्ट, डरपोक, डब्बू , चरिट्रहीन, स्वार्थी, ईर्षालु, सदेगले चरित्र वाले, घटिया व्यक्तित्व, वाले लोग हैं|सच कहा सुरेश भाई आपने एकदम सच कहा |सच में देश में एक बड़ी क्रांति की ज़रूरत है |यह क्रांति स्वतंत्रता के आंदोलन से भी ज़्यादा विशाल और बड़ी होगी| क्रांति होगी ज़रूर , हालत भयावह हो चुके हैं |देख लेना मैं कह रहा हूँ क्रांति ज़रूर होगी|क्रांति के लिए " सिरफिरे फकिरों की सख़्त ज़रूरत है" ये आलेख पढ़ें मेरे ब्लॉग पर|www.shivlok.blogspot.com

  30. June 14, 2010 at 1:30 pm

    सुरेशजीपोस्ट के दूसरे हिस्से की आत्मालोचना के लिए बधाई दुष्यंत कुमार के शब्दों में से चुनकर कहें तो "इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके जुर्म हैं"किंतुइन दो हिस्सों को जोड़ने का औचित्य क्या है? क्या आप कोई बात स्वतंत रूप से नहीं कह सकते? जब कोई फैसला आया तो उससे सम्बन्धित सवाल तो उठेंगे ही यह बात मैं भी मानता हूं कि एंडरसन के प्रत्यार्पण का सवाल फैसले से अलग है और उसे फैसले से जोड़ा जाना केवल राजनीति है, व इसे पिछले पच्चीस सालों में कभी भी उठाया जा सकता था।2- ये आपको हर बात में पैसा कहाँ से और क्यों नज़र आ जाता है । यह वायवीय आरोप तर्के के कमजोर होने के हीनता बोध को दर्शाता है। भावना भी कोई चीज होती है। दक्षिण में अपने नेता के मरने पर जो इतने लोग आत्महत्या कर लेते हैं क्या वो पैसे के लिए करते हैं या अयोध्या में बाबरी मस्ज़िद तोड़ने जो लोग जान पर खेल कर गये थे क्या वो पैसे के लिए गये थे? इतने इस्लामिक उग्रवादी हों या उग्रबामपंथी क्या वो पैसे के लिए जान की बाजी लगाते हैं। पैसे के आरोप ठोस सबूतों के आधार पर ही लगाये जाना चाहिये।

  31. June 14, 2010 at 2:03 pm

    बिलकुल सही बात कही है आपने | वास्तव में हमें स्वयं, और इन रोटी सेंकने वालों को जो आज गला फाड़-फाड़ कर चिल्ला रहे हैं, चाहे नेता हों या विवादों से कमाई करने वाले समाचार चैनल, सभी को अपने गिरहबान में झाँकने की जरुरत है |

  32. June 14, 2010 at 2:03 pm

    आदरणीय वीरेन्द्र जैन साहब,मैं आपकी बात ठीक से समझ नहीं पाया, 1) क्या दिल्ली-भोपाल के अखबारों / चैनलों को पैसा नहीं मिलता है? 2) क्या अर्जुन सिंह और राजीव गाँधी ने भावना के तहत एण्डरसन को भगाया? दूसरे भाग में – क्या आज की तारीख में प्रत्येक व्यक्ति पैसे के पीछे नहीं भाग रहा है? समाज और देशहित की बातों को फ़िजूल की मानना "फ़ैशन" नहीं बन गया है? कृपया थोड़ा खुलकर मुझे समझायें कि इस पोस्ट की विषयवस्तु में "पैसे और भावना" का तालमेल आपने कैसे फ़िट किया? मैं वाकई गम्भीरता से यह बात कह रहा हूं क्योंकि मैं आपकी टिप्पणी को समझ ही नहीं पाया…

  33. SHIVLOK said,

    June 14, 2010 at 2:05 pm

    @@@@पिता जी , यार तुम जो भी कोई हो , बात तो तुम्हारी सही है |लेकिन पिता जी आज का जमाना राम की नीति से चलने का नहीं है |कृष्ण की नीति से चलना पड़ेगा|सुरेश भाई हड़बड़ाहट में कोई बड़ा कदम न उठा लें |बड़ा कदम उठना तो है लेकिन थोड़ा सावधानी से|तब तक ब्लॉग ब्लॉग खेलना ही अच्छा है |सही समय का इंतजार करते रहें और तब तक ब्लॉग ब्लॉग खेलते रहें| "सिरफिरे फकिरों की सख़्त ज़रूरत है" ये आलेख पढ़ें मेरे ब्लॉग पर|www.shivlok.blogspot.comपिता जी की बात सही है , लेकिन सावधानी की भी ज़रूरत है |

  34. June 14, 2010 at 2:07 pm

    Shri Shri Anonymous / Pitaji, Why are you getting personal. I can understand your anguish, still there is no need to be personal and use abusive language. Your's and Suresh ji's worries are same the only difference is at the approach for the solution of the problem. You must appreciate one thing that Suresh Ji has at least taken initiative to surface such issues. Out of 1 billion population at list he is the one who is not sitting idle but putting his efforts. Its separate point of discussion that how effective it is. You are missing one thing which Suresh ji is doing selflessly and boldly i.e. he is making true Indian nationals to feel that there is problem. Dont hide your face in the ground like Shaturmurg and say there is no problem. Acceptance is the first step towards finding out solution of the problem. I appreciate Suresh ji for making every one to look into there own dan. The blog is awakening. Plese correct your own place first and then teach it to others. We were great because we were having plenty to give it to others e.g. knowledge, wealth, peace, health, social system, morality, humanity, civic sense, respect countless attributes. But where we are now. All the above attributes are in scaracity in present Indian culture. We need to correct ourselves first.

  35. June 14, 2010 at 2:13 pm

    ए वीरेंद्र जैन. (काले कौव्वे),बंद कर अपनी सोनिया मातृभक्ति. साले तेरे जैसे खूसट लोगो ने ही इश्स देश की लुटिया डुबाइ है. खुद तो कुछ करते नही और ना ही साले दूसरों को करने देते है. तेरी मातृभक्ति (माइनो भक्ती)को मैं अच्छे से जनता हूँ." 5M" के लिए तेरे जैसे लोग अपना ईमान भी बेच सकते है.. चल तूने क्या किया है.भोपाल के भिंडी बाजार की गली मे बैठकर तू सिर्फ़ गौत्रा मिला या फिर हिंदुओं पर अपने नास्तर चला. सठिया गया है तू इस लिए तेरे को एक भी बात समझ मे नही आती है. हर एक लेख मैं तुझे तेरी माइनो मेडम के खिलाफ साजिश की बू आती है.. तेरे को पहले भी मैं एक राय दे चुका हूँ की अब तेरी उमर चमचगिरी "कराछगिरी" करने की नही रही. जा के तीर्थ कर तेरा भूढ़ापा सफल होगा. और गगर कुछ नही कर सकता तो प्लीज़ अपनी चोंच बंद रखा कर.तुम जैसे "जयचंदों" ने इश्स देश की माँ -बहन कर के रख दी.तो प्लीज़ आयेज से इस ब्लॉग पर कुछ भी जला हुआ मत लिखना क्यूंकी ये हिंदुओं का हिन्दुतव वादियों का ब्लॉग है.जे हिंद.

  36. June 14, 2010 at 2:17 pm

    मेरे दिल की बात कह दी सुरेश जी आपने !@ पिताजी , हम और आप जैसे कायर हिन्दुस्तानी बस बोलना जानता है , उम्मीद करते है की कोई भगतसिंह भी बने लेकिन हमारा लड़का तो या तो मंत्री बने या फिर आला अफसर ! जिस नेक काम की सलाह आप सुरेश जी को दे रहे है, खुद क्यों नहीं करते , आप शुरू कीजिये कारवां अपने आप बढेगा , लेकिन सिर्फ दूसरों को ही नेक शिक्षा क्यों? चाहे वह १० लोगो के मन ही में सही लेकिन सुरेश जी ने लिखकर उबाल तो ला दिया ! हम लोग तो @ वीरेन्द्र जैन जी की तरह बस कौंग्रेस के ताते चूमने मिओं ही भरोसा रखते है ! राहुल भैया को प्रधानमंत्री बनाने की पैरवी ये वीरेन्द्र जैन जैसे लोग करते है, इस तर्क के साथ की एक प्रधानमंत्री का बेटा प्रधानमंत्री ही बनेगा, मगर साथ में यह अपने अन्दर छुपी गुलामियत की वजह से यह जोड़ना भूल जाते है कि एक धोखेबाज प्रधान मंत्री का बेटा भी धोखे बाज हो सकता है !

  37. SHIVLOK said,

    June 14, 2010 at 2:38 pm

    गोदियल जी से सहमत , पूर्ण सहमत|लगता है पिता जी को सही जवाब मिल गया है|

  38. Mahak said,

    June 14, 2010 at 2:43 pm

    @सुरेश जीसच में हम सभी को आएना दिखाने वाली पोस्ट लिखी है आपने , बहुत-२ आभार इतनी सच्ची पोस्ट लिखे के लिए,आपकी इस पोस्ट के प्रति सच्चा फ़र्ज़ तो हम सभी तभी निभा पायेंगे जब हम सब अपने में परिवर्तन लाकर खुद अपनी आत्मा को गर्व और सर उठाकर कह सकें की सुरेश जी के उठाये हुए प्रश्न हमारे चरित्र के तो आसपास भी नहीं हैं लेकिन अभी के लिए जो एक फ़र्ज़ हम बिलकुल अभी निभा सकते हैं वो है इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना ताकि 100 में से कम से कम 10 तो सुधरें .मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की .और प्रणब मुखेर्जी को इस बात का जवाब देना चाहिए की उस anderson से ज्यादा गुस्सा पूरे देश में आज कसाब को लेकर है, तो क्यों नहीं उसे भी वापस पाकिस्तान भेज दिया जाए ? आप इस बेनामी की बातों की और ध्यान ना दें .ऐसे दुष्ट और कमीने लोग खुद तो कुछ करते नहीं हैं और कोई अगर कुछ करे या लिखे इस गलत और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ तो उसका होंसला बढाने की बजाये होंसला तोड़ने का काम करते हैं , खुद का नाम तक लिखने की हिम्मत नहीं और चला है एक सच्चे , ईमानदार और महान ब्लॉगर का होंसला गिराने .आप लेखन जारी रखें ,हम सब आपके साथ हैं@पिता जी की बात जोश में होश खोने वाली है, हर चीज़ का एक सही समय होता है, बिना तैयारी के युद्ध के मैदान में उतरना बहादुरी नहीं बेवकूफी होती है , इस समय अगर हम अपनी पारिवारिक या अन्य किसी जिम्मेदारियों और मजबूरियों के कारण स्वयं इस मैदान में ना आ पा रहें हो तो जो अच्छे लोग इसमें हैं जैसे की नरेन्द्र मोदी जी और स्वामी रामदेव जी तो हमें उनका तन-मन-धन से साथ देना चाहिए , उनके हाथ मजबूत करने चाहियें ,यकीन मानिए ये भी कोई छोटा काम नहीं है देश की भलाई के लिए .आपको एक बार फिर से बहुत -२ आभार एवं धन्यवाद ,महक

  39. rohit said,

    June 14, 2010 at 2:51 pm

    बंधू लिखा तो बहुत अच्छा है और सच्चाई कड़वी होती है यह हमने बेनामी के कमेंट्स से जान लिया. लेकिन क्या हमारे सिर्फ एक ब्लॉग को पढ़ लेने से या उस पर एक कमेन्ट लिख देने भर से यह देश बदल जायेगा यह समाज बदल जायेगा. नहीं कभी नहीं.हम उस समाज में रहते है जहाँ लड़की का बाप लड़के से यह जानना चाहता है की बेटा तेरी उपरी इनकाम कितनी है उस ही हिसाब से अपनी लड़की की शादी करता है. जिस समाज में उपरी आमदनी को ही प्रतिस्ठा का एक मानक मान लिया जाता है क्या आप सोच सकते है की वो समाज इन ब्लॉग से सुधरेगा कभी नहीं.झूठी शान को ही यहाँ सबसे ज्यादा मान्यता मिले वोह समाज कभी बदल नहीं सकता. जिस समाज में मक्कारों ,झूठे लोगो, अपराधियों को सम्मान मिले वहां सुधार की कोई गुन्जायिश कतई नहीं है . आखिर हम किसे जगा रहे है सोते हुए को या सोये होने का नाटक करने वाले को .

  40. man said,

    June 14, 2010 at 3:31 pm

    पिताजी , currntly क्रांति का स्वरुप चेंज हो गया हे ,अब हथयार उठाने की जरूरत कम ही पड़ती हे ….सर वैचारिक क्रांती फला रहे हे वो कम नहीहे |आज सोसिअल नेटवर्क साईट के शेयर से केरेबिआइ दीप में भारतीय मूल की महिला रास्ट्र पर्मुख बन गयी हे |ये कोई कम बात नहीं हे ,रास्ट्र वादी profilo पर जबर्स्दत जोइनिंग हो रही हे ,ये भोतिक रूप से नहीं तो वैचारिक रूप से तो परिपक्व हो रहे हे ,आज जमाना ही vertuallity हे, आने वाले समय में आने दायरा जबरदस्त रूप से बढेगा ,आज का युवा सूचना के लिए मेकाले की शिक्षा padtee का गुलाम नहीं हे ,या नेहरु और आज के चूतियों की हकीकत से नावाफिक नहीं हे |सब देख रहा हे |केवल internat पर ही |में कहता हूँ की ३ सालो में आधे पढ़े लिखे युवा inernate की सूचना से वाफीक होंगे ,ये क्रांती कम नहीं होगी |सर की मेहनत रंग लाने लगी हे लोग हकीकत को पहचान ने लगे हे.युवा वर्ग में सब कुछ होते हुवे रोष बढ़ता जा रहा हे ,जो एक अछा संकेत हे |कल पटना में नरेन्द्र मोदी के लिए युवावो का क्रेज . देख के बहुत खुशी हुई …………….http://www.bhaskar.com/2010/02/18/100218202246_narendra_modi_bjp_national_council_in_indore.html

  41. man said,

    June 14, 2010 at 3:35 pm

    कांग्रेस का notification जारी …..फीफा वर्ड कप में ittaly को support करेंगे ? ननिहाल जो ठहरा ?हा हा हा हा

  42. Anonymous said,

    June 14, 2010 at 4:36 pm

    mujhe bohot bura laga ki ye bat 60 saloke bad aab aapake samaj me aaehai………..aap aapane sar pe hath rakh ke kasam khaeye or boliye aapane aapana ullu sidha karne ke liye kisiko rishvat nahi di hai …….aapane jo likha hai vah bilkul sahi hai lekin ye aagar vastav me lana hai to hame hathiyar uthakar samne aana hoga ….aese biog ,blog khelkar kuch nahi hoga ……….mera maksad aap ka dil dukhana nahi tha lekin ye sachai hai ….!!!

  43. June 14, 2010 at 5:13 pm

    @पुत्र शिवलोक ज़रा बताना तो कि सुरेश कृष्ण की नीतियों पर किस प्रकार चल रहा है ? और क्या कहना चाहते हो, सुरेश में अक्ल की कमी है जो कि ये हडबडाहट में कोई कदम उठा लेगा. मुझे नहीं लगता कि सुरेश से ज्यादा राजनीति की समझ इस सम्पूर्ण हिन्दी-ब्लॉग-जगत में किसी को है. और तुझे कब लगेगा कि सही समय अब आ गया है, अब बड़ा कदम उठाया जाये!! क्या इससे भी बुरे समय का इन्तेज़ार कर रहा है.दूसरी बात, पिछला कमेन्ट मैंने तुझे सम्बोधित करके तो लिखा नहीं कि तू इसका जवाब देने चला आया. मैंने वो सलाह सुरेश को दी क्यूंकि सुरेश ही इस लायक है कि कुछ कर सके. @Son Shreekant AthawaleTell me, where I have used abusive language in my previous comment?And for your kind information, I have been following my qualified son Suresh's blog for over a long time and I see only him to be eligible enough to do something "concrete" enough for the betterment of this country. Same thing, as I told Shivlok that I did't address you. So being personal or formal with my eligible and qualified son Suresh should not cause itching in your ass.@पुत्र पी सी गोदियाल तुमने वही बात कर दी जिसका कि मैं अपने दूसरे कमेन्ट में जवाब दे चूका हूँ. मेरे कुछ करने या मेरे द्वारा कारवां शुरू किये जाने का इन्तेज़ार तुम क्यूँ कर रहे हो. अगर कल को मैं ये सलाह देना छोड़ दूं और इसकी उल्टी सलाह देना शुरू कर दूं कि तुम भी जाओ और कांग्रेस और कमीनिस्टो की चरण वन्दना करना शुरू कर दो तो क्या मेरा पिछला कहा अप्रासंगिक हो जायेगा? मेरे कहे को तो तुम एक विचार की तरह लो जो कि तुम्हारे दिमाग में आ गया हो. क्यों इस बात को इस तरह ले रहे हो कि ये बात किसी जीते-जागते सचमुच के आदमी ने तुमसे कही है? दोहराता हूँ, मैं जो भी कह रहा हूँ, वो इन सभी लेखों के विचारों से सहमत होने के पश्चात, उनकी प्राकृतिक परिणिती (natural and obvious) है.@पुत्र महक उर्फ "लोकप्रियता के भूखे गिद्ध" पहली बात तो ये कि "सही समय न तो कभी आता है, और न कभी आएगा". आर्यों से लेकर महमूद तक और मुगलों से लेकर सोनिया गांधी तक कोई समय ऐसा नहीं जिसे तुझ जैसे फोकटिये और फर्ज़ी बौद्धिक चिरोरी काटने वाले आदर्श कह सकें. दूसरी बात ये, कि अगर वाकई तेरा कोई इरादा है कुछ "सच" में करने का तो ऐसा तेरे उस फर्ज़ी और उटपटांग ब्लॉग से बिलकुल ज़ाहिर नहीं होता.तीसरी बात, मुझे फर्ज़ी बताने से पहले अपना खुद का प्रोफाइल देख, नरेन्द्र मोदी का फोटू चिपका के खुद को असली बता रहा है और मुझे फर्ज़ी बता रहा है. मेरी शकल और नाम देख के जो मैंने कहा है वो बदलेगा नहीं. अन्त में जो मैंने पुत्र पी सी गोदियाल को लिखा है वो भी तू अपने ऊपर लागू कर ले.@बेटा मानबेटा ऐसी हिन्दी कौन से विद्यालय में सीखी? ज़रा पापा को भी पता चले!! तूने तो महावीर प्रसाद द्विवेदी और प्रेमचन्द्र के बाद हिन्दी-साहित्य में दूसरी क्रांति ला दी!कैरिबिया के किसी द्वीप में कोई व्यक्ति ट्विटर वगैरह से राष्ट्रध्यक्ष बन भी जाता है तो ये कोई बड़ी बात नहीं है क्यूंकि वहाँ लोगों की पहुँच शिक्षा तक ज़्यादा है और उनकी आबादी हमारी तुलना में चींटी बराबर भी नहीं है.@पुत्र सुरेश इन सभी में तुम ही मेरे सबसे लायक पुत्र हो जो कि वाकई में कुछ कर सकने की क्षमता रखता है. तुम ही इस देश का भविष्य बदल सकते हो.बस ये कहूँगा कि बस अब बहुत हो चूका ब्लॉग-ब्लॉग का खेल. कुछ ज़ोरदार किया जाये जो हमारी-तुम्हारी ज़िन्दगी में "वाकई" का और सच्चा बदलाव लाए.

  44. June 14, 2010 at 5:55 pm

    मुझे लगता है अपने देश में लगभग हर ओर बेशर्मी की हद पार कर दी है | नेताओं, ख़ास कर कोंग्रेसी (वैसे बाकी पार्टी भी दूध की धुले नहीं है) नेताओं, की कोई जमीर बचा नहीं … गाँधी परिवार की चमचागिरी में ये ऐसे डूब गए हैं की इन कोंग्रेसी चमचों का भगवान् सिर्फ और सिर्फ गाँधी परिवार है |लेकिन हमारी जनता भी कम नहीं है … सब कुछ जानती है फिर भी ऐसे लोगों की कमी (शिक्षित और अनपढ़ दोनों) नहीं जो गाँधी परिवार को भगवान् का दर्जा देते हैं |वीरेंदर जैन जैसे पत्राकारों का भी एक ही उद्देश्य है — गाँधी परिवार की दराबारिगिरी वास्तव में लोकतंत्र भारत में एक भद्दा मजाक बन गया है |

  45. June 14, 2010 at 6:09 pm

    सुरेश भाई क्या समझ में नहीं आया? आप तो गोदियाल जैसी बात करने लगे। अगर कोई अखबार आपकी भाषा नहीं बोले तो वो बिका हुआ या पैसा खाने वाला कैसे हो गया। यदि बंगारू नोटों की गिड्डियाँ दराज में डालते पकड़ा गया तो भाजपा के सारे अध्यक्ष क्या रिश्वतखोर मान लिये जायेंगे । जो अनुमान हैं उन्हें खबर नहीं बनाया जा सकता। राजीव गान्धी की समझ के बारे में तत्कालीन राष्ट्रपति वैंकटरमण की किताब माय प्रैसेंडियल डेज पढना जरूरी है। कांग्रेस का नेहरू-गान्धी परिवार पर निर्भर हो जाना इस इकलौती राष्ट्रव्यापी पार्टी की विवशता है जिसके बिना यह पार्टी टुकड़ों टुकड़ों में बँट जायेगी और दूसरी किसी राष्ट्रव्यापी पार्टी के न होने से देश भी इसी दशा को पहुँचेगा। इसके लिए उन्हें कोई नेहरू गान्धी चाहिये। और कांग्रेस को ही क्यों भाजपा भी इसी परिवार के चरणों में जूते चाटती है। सोनिया और राहुल की योग्यता और चरित्र की तुलना भाजपा के आराध्य मनेका और वरुण से कर के देखिये और सच्चे मन से निष्कर्ष बताइए। इस परिवार के प्रति लोग भावुक भी हैं अन्यथा सोनिया गान्धी में जिन्हें हिन्दी भी नहीं आती थी और भारतीय राजनीति की राई रत्ती भी पता नहीं थी, सिर पर बैठाने की कांग्रेस की क्या मजबूरी? जो मूर्खातापूर्ण भावुकता नरेन्द्र मोदी और राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री चुन सकती है वही सोनिया राहुल और ज्योतिरादित्य, यशोधरा राजे, वसुन्धरा राजे आदि को भी चुनती है। देश को लोकतांत्रिक होने में अभी वर्षों लगेंगे। भाजपा इसी कमजोरी को जानती है इसलिए उसके निशाने पर कांग्रेस नहीं केवल सोनिया और राहुल होते हैं क्योंकि कांग्रेस की जान उसी तोते में बसती है।2- एंडरसन के भाग जाने में तत्कालीन राजनेताओं की गलत समझ, अमेरिकापरस्ती और दूर दृष्टि का अभाव झलकता है। यदि यह जाना समझा प्रयोग नहीं था तो दुर्घटना वाली धारा लगना स्वाभाविक था जिसकी परिणति ऐसे ही होना थी।

  46. June 14, 2010 at 6:25 pm

    ये बात अक्षरशः सत्य है कि हम लोगो का बहुत अधिक चरित्र-पतन हो चुका है और नशा भारत की युवा-पीडी को निगल रहा है. हम लोग इस सिस्टम के गुलाम हो चुके हैं. इस चक्रव्यूह को भेदना अत्यन्त आवश्यक है. यह बात अंतरात्मा बार-२ कहती है और धिक्कारती है फिर भी हम लोग साहस नहीं जुटा पा रहे हैं इस झूठे आवरण को उतार फैकने का. इसका कारण भी यह सिस्टम ही है जैसा कि मैंने अभी कहा है यह चक्रव्यूह है जिस में बुरी तरह फसें हुए हैं. मन के गुलाम हो चुके हैं न चाहते हुए भी वो करते हैं जो नहीं करना चाहते हैं. देखते हैं कब ये आवरण उतारने का साहस हम कर पाएंगे या यूँ ही कायरो और आलसियों की मौत मर जायेंगे.कम-से कम राष्ट्रवादी लोगो को अपनी ओलादों को राष्ट्रवादी विचारों से ओत-प्रोत करके राजनीति में लाना चाहिये. ईश्वर की कृपा रही तो मैं तो कम-से कम इतना प्रयास तो अवश्य करूँगा ही.सच में अन्तरआत्मा कचोटती रहती है यह सब देखकर फिर भी असहायों की तरह मूक-दर्शक बने कुछ भी नहीं कर पा रहें हैं.

  47. Common Hindu said,

    June 14, 2010 at 6:29 pm

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  48. Indli said,

    June 14, 2010 at 8:34 pm

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

  49. Mahak said,

    June 14, 2010 at 8:45 pm

    @ Mr.Anonymousतुम खुद ही इसकी शुरुआत क्यों नहीं करते ? , आ जाओ हथियार उठाकर सामने और बुला लो एक प्रेस कांफेरेंस जिसमें अपने methods बताओ की तुम इसे कैसे करना चाहते हो ,अगर तुम्हारे तरीके सही हुए, हम सबको जंचे और देशहित में हुए तो मेरा वादा है हम सब साथ देने को तैयार हैं , लेकिन अगर खुद ऐसा करने की हिम्मत नहीं है तो फिर तुम्हे कोई हक नहीं बनता सुरेश जी जैसे ब्लॉगर को हतोत्साहित करने का महक

  50. rakesh ravi said,

    June 14, 2010 at 10:12 pm

    जो हो रहा है वह उससे गुस्सा होता है, हम अपने को अशक्त और लाचार मह्शूश करते हैं। आपका लेख इसी भाव को दिखाता है। यह कई लोगों के मन की बात है। शायद कुछ हो कभी न कभी । आपका मन दुखी है, इससे मुझे भी दुःख है, और संतोष भी की और भी लोग नाराज़ हैं।

  51. June 15, 2010 at 5:37 am

    JAI HO

  52. June 15, 2010 at 6:24 am

    सुरेश जी के लेख से सहमति रखता हूँ , उनके कमेन्ट से नहीं.उनके लेख पर अनाम द्वारा कमेन्ट को सार्थक और जोरदार मानता हूँ .आप सब महानुभाव ब्लॉग जगत के स्टार ,अनाम से बौखालाइये नहीं , क्या कर लेंगे नाम जानकार ?माला पहनायेगे या गोली मार देगे ? आप नाम से रसभरी ,विष भरी बातें उगलते हो .वो बेनामी सिर्फ रसभरी बातें करता है. दम है उस वन्दे में , सुरेश जी के लेख से कहीं ज्यादा >

  53. June 15, 2010 at 6:32 am

    Who is this "Virendra Jain" & "PITAJI"They all are Right hand( Chamche)of Congreesss/Sureshji, Please come to my blog & bless me.i am waiting ur Feedback/

  54. Mahak said,

    June 15, 2010 at 6:47 am

    @पिताजी उर्फ़ कांग्रेसी कुत्तेज़रा ये बता की कितने पैसे दे रही है कांग्रेस तुझे तलवे चाटने के लिए और सुरेश जी की इस पोस्ट का महत्व कम करने के लिए ?और रही बात मेरे ब्लॉग की तो वो तुझ जैसे कांग्रेस के पालतू कुत्तों को फर्जी और उटपटांग ही लगेगा क्योंकि वहां पर राष्ट्रवाद है ,तेरी तरह कांग्रेसवाद नहींखुद कुछ करने की हिम्मत नहीं बल्कि खुद का नाम तक लिखने की हिम्मत नहीं और चला है दूसरों को ताना मारने , जिस चीज़ में तू यकीन रखता है क्यों नहीं उसकी शुरुआत खुद करता , सुरेश जी या किसी और से क्यों उम्मीद रखता है की वो आगे आयें ,वो अपने ब्लॉग के ज़रिये सत्ताधारी पार्टी की जो एक-२ पोल खोल रहें हैं वो क्या कम है , अरे हाँ मैं तो भूल ही गया था, तू शुरुआत कर भी कैसे सकता है, तू तो भौं -भौं करने के सिवा कुछ नहीं कर सकता , चलो लगे रहो बेटा, carry on ,हर कुत्ते का दिन आता है एक दिन तुम्हारा भी ज़रूर आएगा ,मैं इश्वेर से प्रार्थना करूंगा की वो दिन जल्दी आयेतब तक के लिए best of luckमहक

  55. रचना said,

    June 15, 2010 at 7:18 am

    Post achchi lagii

  56. Anonymous said,

    June 15, 2010 at 9:06 am

    Beginer………….. Sabhi Budhijeevion ko sadar Pranam

  57. June 15, 2010 at 9:55 am

    @Anonymous, You claim in your post referred to me that you are not getting personal or using abusive language. Please read it again. I am sorry that i am not qualified enough to reply in same language to you. Earlier i thought that you are honest and true nationalist but agitated person who is distrubed by the system and want to do something for improvement but i was wrong. You are having definite ill intentions to disrupt and right thinking of the society. Or immature to understand gravity of the problem. You just want to make feel your presence somehow. You are finding blogingn is the easiest and cheapest medium to vent out your inner frustation.@Other blog members, I feel that Mr or Ms or Mrs. or ….. Anonymous has hijacked the discussion and every one is getting diverted replying to his mostly absurd, filthy and useless comments. Just ignore this fellow. On the other note i just want to comment that we got distracted by the partision comment from some of our friends having their ideology linking to a paricular political party. Suresh ji has raised a very important social issue to correct ourselves and raise our voice against injustice. Its not the subject where we need to show our loyalty with a particular political party. The subject is related with our own conduct in the society as a citizen of India and human.

  58. man said,

    June 15, 2010 at 10:52 am

    """सम्पर्दायिक व् रासायनिक पर्दूषित नरेन्द्र मोदी भोपाल गैस कांड की बात ना करे""" —जयंती नट राजन ,,कांग्रेस अभिनेत्री तो मैडम अनुवांशिक और सांस्क्रतिक पर्दूषित गाँधी परिवार भी तो कुछ तो बोले …या केवल मलाई पर ही नजर रहती हे |

  59. June 15, 2010 at 10:55 am

    Guys, why we are going around and cursing or blaming any political organisation. We may find easiest way to curse one party and praise other. Actually we are trained by our culture to see the life in two way only and i.e. one side is Ram or Krishna and other side is Ravan or Kansa. In other words we need a demon to curse and one god to praise and this gives "itishree" of our life. Does we have guts to slap a cop if he is asking bribe. We talk big about Kashmir and curse the system but do we have guts and honesty to stand against the shoppers who encroch the road and make our life miserable. We are ready to throw damn on Arjun Singh and Rahul Gandhi, but do we have guts to stop the mob to destroy public property in during any agitation, because we have contributed through our tax (hard earned money) to built that public property. Can any one of us lodge a case against our local muncipality for damage to our property because of bad road condition. Can we lodge a case against a court because it has delayed to pronounce judgement which has given you immense harassement and mental disturbance. What is our contribution to the society other than being a born corrupt Indian citizen and giving birth to another currupt Indian citizen. Have we registered our logical protest in a constructive way for any noble cause.Let's make a list of possible suggestion to change our system. Let's see what constructive contribute we can offer to our society. My suggestion i will be putting in separate post.

  60. SHIVLOK said,

    June 15, 2010 at 3:10 pm

    @@@@ पिता जीसुरेश जी ज़्यादा लायक मै कम लायक या मैं लायक नहीं | ये सब तो अलग तरह की बात है|लेकिन हे तथाकथित पिता जी या स्वयम् भू पिता जी आप निश्चित ही नालायक हैं आप इतनी सी बात नहीं समझ सके की सही समय कब आएगा ?मुझे तरस आ रहा है आपकी समझ पर , चलो आपको मैं समझा देता हूँ की सही समय कब आएगा ………………….सही समय तब आएगा जब आप जैसे पिता जी निस्वार्थ भाव से, निर्भय होकर, पूर्ण बहादुरी से, अपनी और अपने परिवार की चिंता किए बगैर , सारे लोभ लालच त्यागकर, समर्पण भाव से देश सेवा के लिए अपने सभी संबंधों की परवाह किए बिना देश हित में खुलकर आगे आएँगे |और हाँ कहीं आप इंदौर वाले पिता जी तो नहीं है?????????????आप जैसे पिताओं के कारण ही देश का ये हाल हुआ है|

  61. Anonymous said,

    June 15, 2010 at 5:57 pm

    + वीरेन्द्र जैन, पत्रकार होनें और भाड़ होंने में अन्तर होता है। यह मानते हुए भी कि पत्रकार की चाकरीगत कुछ सीमाए होती हैं कभी सच के आईनें में भी देख लेने से आदमियत कितनी बची है इसक पता लगता है। टाइम्स नाऊ के मालिक जैन साहब नें क्या वीरप्पा मोईली की नापसंदगी के चलते टी वी मीड़िया के सशक्त पत्रकार """ अर्णव गोस्वामी"’ को कांग्रेस के दबाव पर निकाल दिया है? जैनों को अल्पसंख्यक घोसित करनें के ऎवज में??

  62. Mahak said,

    June 15, 2010 at 7:45 pm

    शिवलोक जी से पूरी तरह सहमत ,@पिताजी अपने पिताजी से भी कुछ सीख लें की कैसे शालीनता से अपनी बात रखी जाती है बजाये की दूसरों को भी मजबूर किया जाए अपना मूंह गन्दा करने के लिए और आप जैसों को ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए .महक

  63. June 16, 2010 at 5:52 am

    Bhai Suresh aap ko bahut saari shubhkamnayen. aap bahut gambhirta se nishane par patthar phenk rahe hain. log aap ke abhiyan men shamil bhi ho rahe hai. main bhi aap ke saath hun. main apne middayer men ek blogchintan stambh deta hun. is shanivar ko aap ka blog bhi usmen shamil karunga.

  64. June 16, 2010 at 12:54 pm

    @ श्री विरेन्द्र, (जो मूर्खातापूर्ण भावुकता नरेन्द्र मोदी और राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री चुन सकती है…) आप करोडों लोगों की ईच्छा को मूर्खता किस आधार पर बता रहे हैं? जो आपसे सहमत ना हो वह मूर्ख?

  65. June 17, 2010 at 4:40 pm

    nice post, i think u must try this website to increase traffic. have a nice day !!!


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