कश्मीर से आजमगढ़ और असम-कोलकाता तक "मासूम" और "गुमराह" युवकों की भारी बाढ़ आई है भारत में… Kashmir Stone Pelting Assam Pakistani Flag

मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में पुलिस ने एक सूचना के आधार पर 13 संदिग्ध लोगों को पकड़ा है, और उनसे 25 मोबाइल और ढेर सारे सिम कार्ड बरामद किये। इन मोबाइलों में भड़काऊ साम्प्रदायिक भाषण और वीडियो क्लिपिंग पाई गई है। यह 13 लोग उत्तरप्रदेश के बागपत जिले से हैं और सभी की आयु 16 वर्ष से 45 वर्ष के बीच है। ये लोग एक मारुति वैन में कपड़े और कम्बल बेचने के बहाने गाँव-गाँव भ्रमण कर रहे थे तथा रात को मस्जिद में रुकते थे। इन लोगों के मोबाइल से सिमी के भड़काऊ भाषणों की क्लिप्स और बाबरी मस्जिद दंगों के दौरान मुस्लिम नेताओं द्वारा किये गये भाषणों की ऑडियो/वीडियो क्लिप्स बरामद हुई हैं। इनके पास से पश्चिमी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों के कई गाँवों के नक्शे भी बरामद हुए हैं, जिसमें कुछ खास जगहों पर लाल रंग से निशानदेही भी की गई है। यदि आप सामाजिक रुप से जागरुक हैं (यहाँ देखें…) तो अपने आसपास की घटनाओं और लोगों पर निगाह रखें…)। फ़िलहाल इन्दौर ATS और शाजापुर तथा उज्जैन की पुलिस इन सभी से पूछताछ कर रही है। ये लोग एक-दो वैन लेकर ग्रामीण भागों में कम्बल बेचने जाते थे और मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काने का खेल करते थे। (यहाँ देखें…)

उल्लेखनीय है कि पूरा पश्चिमी मध्यप्रदेश सिमी (Students Islamic Movement of India) का गढ़ माना जाता है, उज्जैन, इन्दौर, शाजापुर, मक्सी, महिदपुर, उन्हेल, नागदा, खाचरौद आदि नगरों-कस्बों में सिमी का जाल बिछा हुआ है। कुछ माह पहले सिमी के सफ़दर नागौरी को इन्दौर पुलिस ने इन्दौर से ही पकड़ा था, जबकि उन्हेल के एक अन्य “मासूम” सोहराबुद्दीन को गुजरात पुलिस ने एनकाउंटर में मारा था, सोहराबुद्दीन इतना “मासूम” था, कि इसे पता ही नहीं था कि उसके घर के कुँए में AK-56 पड़ी हुई है। ऐसे संवेदनशील इलाके में उत्तरप्रदेश से आये हुए यह संदिग्ध लोग क्या कर रहे थे और इनके इरादे क्या थे… यह समझने के लिये कोई बड़ी विद्वत्ता की आवश्यकता नहीं है, बशर्ते आप सेकुलर और कांग्रेसी ना हों। हालांकि हो सकता है कि ये सभी लोग बाद में न्यायालय में “मासूम” और “गुमराह” सिद्ध हो जायें, क्योंकि इन्हें कोई न कोई “राष्ट्रभक्त वकील” मिल ही जायेगा, और न्यायालय के बाहर तो सीतलवाडों, आजमियों, महेश भट्टों की कोई कमी है ही नहीं।

उधर कश्मीर में “मासूम” और “गुमराह” लड़के CRPF के जवानों को सड़क पर घेरकर मार भी रहे हैं, और पत्थर फ़ेंकने में भी पैसा कमा रहे हैं (यहाँ देखें…)। आजमगढ़ के “मासूम” तो खैर विश्वप्रसिद्ध हैं ही, बाटला हाउस के “गुमराह” भी उनके साथ विश्वप्रसिद्ध हो लिये। उधर कोलकाता में भी “मासूम” लोग कभी बुरका पहनने के लिये दबाव बना रहे हैं (यहाँ देखें…), तो कभी “गुमराह” लड़के हिन्दू लड़कियों को छेड़छाड़ और मारपीट कर देते हैं (यहाँ देखें…)। असम में तो बेचारे इतने “मासूम मुस्लिम” हैं कि उन्हें यही नहीं पता होता कि, जो झण्डा वे फ़हरा रहे हैं वह भारत का है या पाकिस्तान का?

ऐसे “मासूम”, “गुमराह”, “बेगुनाह”, “बेकसूर”, “मज़लूम”, “सताये हुए”, “पीड़ित” (कुछ छूट गया हो तो अपनी तरफ़ से जोड़ लीजियेगा) कांग्रेस-सपा-बसपा के प्यारे-प्यारे बच्चों और युवाओं को हमें स्कॉलरशिप देना चाहिये, उत्साहवर्धन करना चाहिये, आर्थिक पैकेज देना चाहिये… और भी जो कुछ बन पड़े वह करना चाहिये, उन्हें कोई दुख नहीं पहुँचना चाहिये।

बारिश के दिनों में अक्सर भारत की नदियों से पाकिस्तान और बांग्लादेश में बाढ़ आती है, लेकिन “मासूमों” और “गुमराहों” की बाढ़ साल भर उल्टी दिशा में बहती है यानी पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत की तरफ़ को। इसलिये आप ध्यान रखें कि जैसे ही कोई मुस्लिम युवक किसी लव जेहाद या आतंकवादी या भड़काऊ भाषण, या पत्थरबाजी, या छेड़छाड़ जैसी घटना में पकड़ाये, तो तड़ से समझ जाईये और मान भी लीजिये कि वह “मासूम” और “गुमराह” ही है। ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं…… बल्कि तीस्ता आंटी, जावेद अंकल, महेश मामा, मनीष तिवारी चाचा, बुरका (सॉरी बरखा) दत्त चाची, और मीडिया में बैठे बुद्धिजीवी लोग आपसे आग्रह कर रहे हैं… तात्पर्य यह है कि समूचे भारत में “मासूमों” और “गुमराहों” की बाढ़ आई हुई है, और इसे रोकना बड़ा मुश्किल है…। और तो और अब “मासूमियत की सुनामी”, शीला दीक्षित सरकार की दहलीज और राष्ट्रपति भवन के अहाते तक पहुँच गई है, क्योंकि मासूमों के शहंशाह “अफ़ज़ल गुरु” को बचाने में पूरा जोर लगाया जा रहा है, जबकि उधर मुम्बई में “गुमराहों का बादशाह” अजमल कसाब चिकन उड़ा रहा है, इत्र लगा रहा है…।

ऐसा भी नहीं कि मासूम और गुमराह सिर्फ़ भारत में ही पाये जाते हैं, उधर अमेरिका में भी पढ़े-लिखे, दिमागदार, अच्छी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले शहजाद जैसे युवा और अबू निदाल मलिक जैसे अमेरिका के नागरिक भी मासूमियत और गुमराहियत की गंगा में डुबकी लगाते रहते हैं… (यहाँ देखें…) अन्तर सिर्फ़ इतना है उधर भारत की तरह “रबर स्टाम्प” राष्ट्रपति नहीं होता बल्कि “पिछवाड़ा गरम करने वाली” ग्वान्तानामो बे जैसी जेलें होती हैं…
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चलते-चलते : अन्त में एक आसान सा “मासूम” सवाल (जिसका जवाब सभी को पता है) पूछने को जी चाहता है, कि क्या “गुमराह” और “मासूम” होने का ठेका सिर्फ़ कट्टर मुस्लिमों को ही मिला है? “मुस्लिमों”??? सॉरी अल्पसंख्यकों… सॉरी मुस्लिमों… ओह सॉरी अल्पसंख्यकों… अरे!! फ़िर सॉरी…। छोड़ो… जाने भी दो यारों… दोनों शब्दों का मतलब एक ही होता है… जिसका नया पर्यायवाची है “मासूम और गुमराह”

क्यों उमर अब्दुल्ला साहब, आपका क्या विचार है???

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29 Comments

  1. July 5, 2010 at 8:32 am

    बिल्कुल सही, और हमेशा गुपचुप रुप से मालवा इन लोगों की कर्मभूमि रहा है, इस बाढ़ का प्रबंधन भी हमें अच्छॆ से करना चाहिये अपने यहाँ जो लोग इनका सपोर्ट करते हैं, उनको बांधकर, तभी कुछ ठीक होगा, वैसे रही बात मुस्लिम सॉरी अल्पसंख्यकों सॉरी….. की तो वो अब स्थिती कुछ ऐसी होगी हिन्दू सॉरी बहुसंख्यक सॉरी अल्पसंख्यक….

  2. Anonymous said,

    July 5, 2010 at 9:13 am

    aaj inhi gumarah aur massoom yuvakon ne ek lecturer ka hath kat diya, inake mutabik lecturer ne jo paper set kiya usase masoomon ki bhavnayen aahat hoti hain.http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/6129891.cms

  3. July 5, 2010 at 10:30 am

    सुरेशजी,आपकी बातों से 100 % सहमत हूँ.. आपने आसाम, कोलकाता, और उत्तरप्रदेश के "संवेदनशील" इलाकों के बारे में जो चिंता व्यक्त कि है वो बहुत हद तक सही है. .. पर "सिमी" ने अब अपनी कर्मभूमि बदल ली है.. आप शायद जानते नहीं है.. कर्णाटक राज्य के आधिकांश इलाकों में जिनमे "हुबली, धारवाड़' बेलगाम" जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में "सिमी" ने इस हद तक अपनी जड़े जमा ली है.. हर एक नगर में इनकी स्लीपर सैल फैली हुई है.. आने वाले समय में "विशेषकर चुनावों" के समय में ये "मासूम" लोग कितने "हिन्दू गुनाहगारों" का खून बहायेंगे.. ये शायद इनके खुदा को भी पता नहीं है… "कर्णाटक" के बाद "केरल" इनकी नहीं "आश्रयस्थली" बनेगा.. और ऐसा बहुत ही जल्द होगा…"राजस्थान" के रास्ते होने वाली घुसपैठ पर मेने भी एक लेख लिखा है, आपसे निवेदन है कि आप इस पर अपनी राय जरूर दे…साधुवाद–hinduraaj.blospot.com

  4. July 5, 2010 at 10:32 am

    सबको सत्ता चाहिए. क्या काग्रेस, सपा, बसपा और भाजपा भी ? जब तक लोग अनपढ़ रहेंगे और धर्म को देश से ऊपर समझेंगे तब तक ऐसे ही जानवरों से भी बदतर जिंदगी जियेंगे और मुगालते में रहेंगे की वो एक इंसान की जिंदगी जी रहे है. ये शापित नेता जो चपरासी पद के लिए भी योग्य नहीं है, वो सब धर्म के नाम पर वोट बटोरने के चक्कर में सांप बन कर इस देश को डस रहे है. अपराधी का कभी कोई इमान या धर्म नहीं होता वो कोई मुस्लिम या हिंदू नहीं होता बल्कि वो हर रूप में देश का गद्दार और जनता का अपराधी होता है.

  5. July 5, 2010 at 11:40 am

    ब्लॉगिंग में ही देख सकते हैं की मुस्लिम अधिकतर मुस्लिम (जाकिर नाइक के चेलों) ब्लोगरों में 'मुशरिकों' के खिलाफ कितना ज़हर भरा हुआ है. जबकि ये लोग थोड़े पढ़े लिखे भी हैं. अगर शिक्षित होकर भी इनमे भारत और काफिरों के खिलाफ इतनी नफरत भरी है तो निम्नवर्गीय और कम शिक्षित मुसलमान की मानसिकता का अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं है. ऐसी मानसिकता के लोग काफिरों को नेस्तनाबूत नहीं करना चाहेंगे तो और क्या करेंगे?

  6. man said,

    July 5, 2010 at 12:45 pm

    सादर वन्दे सर ,चारो तरफ से बाढ़ आयी हुई हे ,और वो भी मासूमो की .ये मासूम कितने मासूम हे आप खुद देख लीजिये …….सेकुलर और मानवाधिकार के भडवे फिर बेनकाब …..२००४ में गुजरात .इशरत बानो मुठभेड़ कांड सही था .अमेरिका के शिकांगों शहर में इंडियन nia .टीम के मेम्बरों को हेडली ने जानकारी दी की की वो लशकर ए तेयाब्बा की स्पेशल सेल """मूज्मील "" में खूबसूरत आतंक वाद में शामिल थी |

  7. man said,

    July 5, 2010 at 12:50 pm

    रिलेटेड आर्टिकल'इशरत जहां एक फिदायीन थी'इशरत जहां मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई शुरूइशरत एनकाउंटर भी संदेह के घेरे मेंनई दिल्‍ली: मुंबई हमले का आरोपी डेविड कोलमैन हेडली गुजरात सरकार के लिए मददगार साबित हो सकता है। उसके बयान से गुजरात सरकार को इशरत जहां मुठभेड़ कांड में राहत मिल सकती है।अमेरिका में गिरफ्तार पाकिस्‍तानी मूल के आंतकी हेडली ने भारत में आतंक फैलाने के लिए हुस्‍न के इस्‍तेमाल की लश्‍कर की नीति का खुलासा किया है। उसने भारत की राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बताया है कि 2004 में पुलिस मुठभेड़ में मारी गई इशरत जहां लश्‍कर की आत्‍मघाती हमलावर थी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों शिकागो (अमेरिका) जाकर हेडली से पूछताछ करने वाले एनआईए अधिकारियों की टीम को हेडली ने इशरत के आत्‍मघाती हमलावर होने के बारे में जानकारी दी। यह जानकारी गुजरात सरकार के रुख का समर्थन करती है। सूत्रों के मुताबिक हेडली ने बताया कि इशरत को लश्‍कर में मुजम्मिल ने भर्ती किया था। मुजम्मिल 2007 में भारत में लश्‍कर का कामकाज देखता था।गुजरात सरकार का रुख 15 जून, 2004 को अहमदाबाद के पास इशरत की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। उसके साथ जावेद शेख, प्राणेश पिल्‍लई और दो पाकिस्‍तानी नागरिक – अमजद अली और जिशान जौहर अब्‍दुल गनी – भी मारे गए थे। गुजरात पुलिस के मुताबिक उसे लश्‍कर ने गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कुछ वीआईपी लोगों को मारने के अभियान पर भेजा था। मुंबई की इशरत के घरवालों का कहना था कि उसका आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं था। वह शेख के परफ्यूम कारोबार से जुड़ी थी और सेल्‍सगर्ल का काम करती थी। उसकी मौत पर काफी विवाद हुआ और अभी भी मामला अदालत में है। गुजरात सरकार पर आरोप लगाया गया कि मुस्लिम होने के चलते इशरत को फर्जी मुठभेड़ में मौत के घाट उतार दिया गया। भारत के लिए नया है हुस्‍न और आतंक का मेललश्‍कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन भारत में आतंक फैलाने के लिए महिला आत्‍मघाती हमलावरों का सहारा लेने लगे हैं। हेडली के बयान से साफ है कि लश्‍कर ने छह साल पहले ही इस नीति पर काम शुरू कर दिया था।पिछले साल भारतीय खुफिया एजेंसियों को भी जानकारी मिली कि लश्‍कर सीमा पर महिला आत्‍मघाती हमलावर तैयार कर उन्‍हें कश्‍मीर भेजने की तैयारी में है। तत्‍कालीन सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने भी इस बारे में सार्वजनिक रूप से टिप्‍पणी की थी। बीते साल अप्रैल में उन्‍होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि भारत के सामने अब महिला आतंकियों से निपटने की चुनौती भी उभर रही है।भारत के लिए महिला आत्‍मघाती हमलावर नई बात है। श्रीलंका, इराक, गजा, चेचन्‍या जैसी जगहों पर तो अक्‍सर महिला आत्‍मघाती हमलावर आतंकी वारदात अंजाम देती रहती हैं, पर भारत में ऐसा एक ही बार हुआ है। 1991 में धनु नाम की एक महिला ने मानव बम बन कर राजीव गांधी की जान ली थी।

  8. July 5, 2010 at 2:12 pm

    एक खबर : "पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली ने भारत की जाँच एजेंसी एनआईए को कहा है कि 2004 में गुजरात पुलिस के हाथों मारी गई इशरत जहां, वास्तव में लश्कर-ए-तैयबा की फिदायीन थी"हाय – बे-चारा इशरत जहां; एकदम मासूम थी |सारे के सारे सेक्युलर लोगों के उसे मासूम कहते कहते गले सूख के छिल गए |ये हेडली तो लगता है कि भारत की जाँच एजेंसी एनआईए को बेवकूफ बना रहा है |भैय्या – अपने सेक्युलरों की बात मानोगे कि बेईमानों (पाकिस्तानी मूल के) की ?

  9. July 5, 2010 at 3:37 pm

    अच्छी खोजपरक रिपोर्ट। आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

  10. Divya said,

    July 5, 2010 at 5:07 pm

    Sab soye pade hain. Sab mare to mare, inka kya`jata hai?Mutthi bhar yuvakon ko pakadne ka bhi sahas nahi?…paisaa kha ke baithe honge.

  11. Pratik Jain said,

    July 5, 2010 at 5:43 pm

    दुख की बात तो यह है कि ऐसी खबरें समाचार पत्रों में या तो छपती ही नहीं या फिर किसी कोने में उपेक्शित सी छपती हैं और लोगों का ध्यान ही नहीं जा पाता है इन खबरों पर।

  12. July 5, 2010 at 7:31 pm

    भाई जी ये लोग मासूम हैं या और कुछ सब जानते हैं सिवाय सेक्यूलर जमात के अलावा… वे अभी भी इशरत जहां को मासूम ही मानेंगे। और हां एक पहलवान तो मेरे ब्लॉग पर आए और अपने लम्बे चौड़े कंमेट में अफजल जैसे खंूखार आतंकवादी की फांसी का विरोध करने लगे। तमाम ऊल-जलूल बकवास करने लगे। जिस दिन कोई आतंकी इनके घर को निशाना बनाएगा उस दिन इन्हें इन मासूमों की मासूमियत दिखेगी। खैर ये देश को तो अपना घर भी नहीं मानते और शायद देश को देश भी नहीं मानते ये महान लोग हैं जिनकी सोच देश से ऊपर होती है….

  13. July 5, 2010 at 7:31 pm

    मैं आपसे क्या बोलूँ? आपने बिलकुल वही लिखा है जो मैं सोच रहा था… अब ऐसे मासूमों और गुमराहों का क्या किया जाए…. यह कांग्रेस ही बेहतर बता सकती है…. मैंने आपकी इस पोस्ट को याहू बज़ में डाला है… मैं क्या बोलूँ…. इस पोस्ट की तारीफ में …. मेरे ऊपर तो वैसे भी सुरेश चिपलूनकर के चमचे होने का ठप्पा लगा हुआ है… सम विचारों के मैदान में आपका चमचा कहलाना भी प्राउड की बात है…

  14. July 6, 2010 at 3:03 am

    आज ज़रूरत यह है कि इनकी चन्द मासूम किताबों को जिनमें हूरों से लेकर क़ाफिरों तक की बाते हैं सबके सामने जनभाषा में सामने लाया जाय ताकि इनकी मासूम मक्कारी की पोल खुले।हर्फ-ए-ग़लत नाम का एक ब्लॉग इस दिशा में बेहतर काम कर रहा है।

  15. July 6, 2010 at 5:34 am

    मतलब इस महादेश में फिर से पाकिस्तान का बनना या बनाना आसान है. क्योंकि सेकुलर राज है.

  16. July 6, 2010 at 6:09 am

    बहुत ही मासूम लिखा है 🙂

  17. July 6, 2010 at 6:40 am

    test comment, for error tracking

  18. jitu said,

    July 6, 2010 at 6:49 am

    test comment

  19. July 6, 2010 at 9:24 am

    बेचारे मासूमों पर कलंक लगा रहे हैं आप…

  20. July 6, 2010 at 10:22 am

    ek aur gumraha behan chut hi gai hai.ISHRAT JHANek aur masum ko tapka diya gaya.www.parshuram27@blog.com

  21. July 6, 2010 at 2:30 pm

    You are 100% right

  22. rohit said,

    July 6, 2010 at 4:32 pm

    सुरेश भाऊ क्यों इन मासूम लोगो के पीछे पड़े हो सोहराबुद्दीन कितना मासूम था यह सभी जानते है कितने लोगो को उसने अपनी मासूमियत के चलते मारा था च च च ..उसे मार कर गुजरात सरकार ने कितना गलत किया बिचारे को सांसद बनने से पहले ही जन्नत दिला दी. क्यों कुछ गलत कहा क्या मैंने भाई इस देश में चाहे उत्तरप्रदेश के मुख़्तार अंसारी हो या पहलवान यह सारे मासूम लोग ही तो है.कसब की किस्मत से आपको रश्क हुआ लगता है की वोह चिकन खा रहा है और आप महगाई के विरोध में बंद. हाय उस जालिम कसाब को महगाई क्या होती है इतना भी नहीं मालूम वोह तो मजे में है. और सुरेश भाऊ उंगलियाँ दुखा रहे हैअब कश्मीर में ही देख लो वोह अपने उमर अब्दुल्ला कितनी मेहनत कर रहे है इन मासूम लोगो के लिए वोह तो नाश पिटे सुरक्षा बल बाले है जो अपना घर बार बाल बच्चे छोड़ कर वहां दहशत गर्दी फैला रहे है वहां के मासूम बच्चे तो सिर्फ automatic klasnikov 1947 से खेल रहे है क्या खेलना भी गुनाह है.अब रही बात अपने प्रदेश की तो भाई अब कुआ से automatic klasnikov 1947 निकल रही है तो उसमे इन लोगो की क्या गलती है यह तो पानी निकलने गए थे रायफल निकल आई तो यह क्या करे. बुरहान पुर में एक stf के दिलेर सिपाही को मार दिया जाता है जिसने सिमी के नेटवर्क को तोडा था तो इसमे क्या गलत किया सिमी बाले विचारे मासूमियत ही तो फैला रहे है.आप नाहक ही परेशां हो रहे है हिन्दू राजाओ की इतिहास देख लो साले सब नपुंसक खड़े खड़े मर गए लेकिन गजनवी को नहीं रोक पाए.प्रथ्वीराज मरे तो जयचंद का क्या जाता है महोवा के आल्हा उदल को देश से जयादा अपनी आन प्यारी थी आपस में लड़ना जरुरी था.रघोवा को अंग्रेज ज्यादा प्यारे थे न की पेशवा.सब साले अपनी अपनी जुगाड़ में लगे रहे. जब इतिहास ऐसा था तो वर्तमान कोन सा इससे जुदा होगा.खेर लगे रहिये

  23. impact said,

    July 6, 2010 at 4:54 pm

    ज़ोरदार! क्या अस्तुरा चलाया है.

  24. Mahak said,

    July 7, 2010 at 4:45 am

    हमारी भारत सरकार के लिए डूब मरने वाली बात है , इन तथाकथित भटके हुए,"मासूम", "गुमराह", "बेगुनाह", "बेकसूर", "मज़लूम", "सताये हुए", "पीड़ित" (कुछ छूट गया हो तो अपनी तरफ़ से जोड़ लीजियेगा) नौजवानों को सीधे रास्ते पे लाने का एक ही तरीका है की हमारे जवानों को वहां पर free hand दे दिया जाए , फिर इन लश्कर-इ-तैयेबा के इशारों पर नाच रहे गुंडों को पता चलेगा की हिन्दुस्तान पर आँख उठाने का क्या अंजाम होगा और इन बेशर्म नेताओं ( जो की हमारे जवानों के हाथ बांधें रखते हैं ऐसे तत्वों के खिलाफ मूंह तोड़ करवाई करने में ) को सीधे रास्ते पे लाने का ये तरीका है की एक कानून बना दिया जाए की जो भी नेतागिरी करेगा उसे अपनी एक संतान भारतीय सेना में कश्मीर पोस्टिंग पर देश के लिए देनी होगी ,फिर देखिएगा की कैसे हमारा एक भी जवान शहीद होता है , फिर ये नेता लोग ना हथियारों की कमी होने देंगे सेना में और ना ही जवाबी करवाई की क्योंकि पता है की अपने बच्चे की जान को खतरा हैइस पोस्ट के ज़रिये इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने के लिए सुरेश जी आपको भी आभार एवं धन्यवादजय हिंदमहक

  25. July 7, 2010 at 3:53 pm

    आज के सेकुलर हिन्दू के लिये ये गर्व की बात है कि वो न केवल इन मासूम लोगो के साथ रहते हैं बल्कि इनको पूरा-२ सम्मान दिया जाता है. तभी तो देश मासूमों की मासूम कांग्रेस पार्टी को सौंप दिया. देश का प्रधान मन्त्री तो मासूमों का देवता है और सोनिया तो इतनी मासूम और त्यागी है कि उसका तो सच में यहाँ की जनता को अब तक मन्दिर बना देना चाहिये था. चलो कोई बात नहीं यहाँ की जनता निश्चित तौर पर एक दिन मासूम सोनिया देवी का मन्दिर बनाएगी. यहाँ की हिन्दू जनता सभी में भगवान देखती है तो इन मासूमों ,सोनिया और मनमोहन आदि में भी वो भगवान ही देख कर अपने तथाकथित धर्म का पालन कर रही है. वैसे भी यहाँ पर भगवान की मार्केटिंग बहुत ही अच्छी होती है जैसे कि अभी हाल के ५-७ सालो में एक नए ईश्वर साईं बाबा का प्रचार इतना जबरदस्त हुआ है कि लोगो ने यह भी जानने का प्रयास नहीं किया कि वो हाथ की सफाई जान ने वाला मस्जिद की सीढियों पर बसर करने वाला एक आम मुस्लिम आदमी था. यहाँ यह कहने का मतलब केवल इतना है कि यहाँ की पढ़ी-लिखी जनता भी एक भिखारी को ईश्वर की पदवी दे देती है, इतिहास में भरे पड़े ऐसे ही मासूमों की कब्रों को ईश्वर मानकर पूजती है तो उससे क्या उम्मीद करें समझ नहीं आता. गहराई से विश्लेषण करें और समस्या के मूल में जाएँ तो कायर होने और बुद्धि भ्रष्ट होने का यह एक महत्त्वपूर्ण कारण है.

  26. July 7, 2010 at 9:11 pm

    "गुमराह" और "मासूम" jinka ullekh apne kiya unke guru afzal ke bhi guru hain vo jinse aap puchh rahe hain ki kya vichar hai? vo maha masoom bechare kya vichar batayen? Shaikh abdulla, Farukh abdulla, umar abdulla pura khandan maha masoom hai, aap rashtravadion sorry sampradayik logon ko kuchh aur kam nahin hai kya?Ek uttam lekh ke liye bahut bahut badhai

  27. July 9, 2010 at 10:02 am

    आप जैसे लोग ही "इस देश के संसाधनों पर पहले हक वाले", मासूम, सताए हुए लोगों के उनके परम पवित्र कार्य में सबसे बड़े बाधक हैं. अरे ये तो वे लोग हैं, जिन्हे पूरी दुनिया भले ही असभ्य, बर्बर, मध्यकालीन मानसिकता का वाहक कहती रहती है, लेकिन वे इस बात की परवाह किए बिना अपनी तलवार, टोपी, बकरा-दाढ़ी के द्वारा पूरी दुनिया को अमन का सन्देश देने के लिए दारुल-इस्लाम बनाना चाहते हैं.

  28. July 12, 2010 at 12:23 pm

    गुरु मै आप से 100 % सहमत हूँ मै चाहता हु कि आप अपने विचार किताबो के माध्यम से व्यक्त करे

  29. balkishan said,

    March 8, 2011 at 12:11 pm

    >is lekh me dam hi suresh bhai


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