महत्वपूर्ण ये है कि हाथ "किसका" काटा गया है… उसके अनुसार कार्रवाई होगी… … Communist NDF Relations Kerala Secularism

अपनी पिछली पोस्ट (केरल में तालिबान पहुँचे, प्रोफ़ेसर का हाथ काटा) में मैंने वामपंथियों के दोहरे चरित्र और व्यवहार के बारे में विवेचना की थी… इस केस के फ़ॉलो-अप के रूप में आगे पढ़िये…

बात शुरु करने से पहले NDF के बारे में संक्षेप में जान लीजिये –

1) केरल के जज थॉमस पी जोसफ़ आयोग ने अपनी विस्तृत जाँच के बाद अपनी रिपोर्ट में “मराड नरसंहार” (यहाँ पढ़िये http://en.wikipedia.org/wiki/Marad_massacre) के मामले में NDF और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को दोषी पाया है। इसी रिपोर्ट में उन्होंने उदारवादी और शांतिप्रिय मुस्लिमों पर भी NDF के हमले की पुष्टि की है और कहा है कि यह एक चरमपंथी संगठन है।

2) भाजपा तो शुरु से आरोप लगाती रही है कि NDF के रिश्ते पाकिस्तान की ISI से हैं, लेकिन खुद कांग्रेस के कई पदाधिकारियों ने NDF की गतिविधियों को संदिग्ध मानकर रिपोर्ट की है। 31 अक्टूबर 2006 को कांग्रेस ने मलप्पुरम जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान की शुरुआत की और वाम दलों, PDP (पापुलर डेमोक्रेटिक पार्टी) और NDF पर कई गम्भीर आरोप लगाये।

3) बरेली में पदस्थ रह चुकीं वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नीरा रावत ने जोसफ़ आयोग के सामने अपने बयान में कहा है कि उनकी जाँच के मुताबिक NDF के सम्बन्ध पाकिस्तान के ISI  और ईरान से हैं, जहाँ से इसे भारी मात्रा में पैसा मिलता है। इसी प्रकार एर्नाकुलम के ACP एवी जॉर्ज ने अदालत में अपने बयान में कहा है कि NDF को विदेश से करोड़ों रुपया मिलता है जिससे इनके “ट्रेनिंग प्रोग्राम”(?) चलाये जाते हैं। NDF के कार्यकर्ताओं को मजदूर, कारीगर इत्यादि बनाकर फ़र्जी तरीके से खाड़ी देशों में भेजा जाता है, और यह सिलसिला कई वर्ष से चल रहा है। (यहाँ देखें… http://www.indianexpress.com/oldStory/70524/)

4) 23 मार्च 2007 को कोटक्कल के पुलिस थाने पर हुए हमले में भी NDF के 27 कार्यकर्ता दोषी पाये गये थे।

5) NDF के कार्यकर्ताओं के पास से बाबरी मस्जिद और गुजरात दंगों की सीडी और पर्चे बरामद होते रहते हैं, जिनका उपयोग करके ये औरों को भड़काते हैं।

6) 29 अप्रैल 2007 को पाकिस्तान के सांसद मोहम्मद ताहा ने NDF और अन्य मुस्लिम संगठनों के कार्यक्रम में भाग लिया और गुप्त मुलाकातें की। (यहाँ देखें… http://www.hindu.com/2007/04/29/stories/2007042900971100.htm)

7) यह संगठन “शरीयत कानून” लागू करवाने के पक्ष में है और एक-दो मामले ऐसे भी सामने आये हैं जिसमें इस संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुसलमानों की भी हत्या इसलिये कर दी क्योंकि वे लोग “इस्लाम” के सिद्धान्तों(??) के खिलाफ़ चल रहे थे। पल्लानूर में एक मुस्लिम की हत्या इसलिये की गई क्योंकि उसने रमज़ान के माह में रोज़ा नहीं रखा था।

वामपंथियों द्वारा पाले-पोसे गये इस “महान देशभक्त” संगठन के बारे में जानने के बाद आईये इस केस पर वापस लौटें…

प्रोफ़ेसर टीजे जोसफ़ पर हुए हमले ने केरल पुलिस को मानो नींद से हड़बड़ाकर जगा दिया है और इस हमले के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए केरल पुलिस ने 9 जुलाई को पापुलर फ़्रण्ट के एक कार्यकर्ता(?) कुंजूमोन को आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किया, कुंजूमोन के घर से बरामद की गई कार में तालिबान और अल-कायदा के प्रचार से सम्बन्धित सीडी और लश्कर-ए-तोईबा से सम्बन्धित दस्तावेज लैपटॉप से बरामद किये गये। राज्य पुलिस ने कहा है कि प्रोफ़ेसर के हाथ काटने वाले दोनों मुख्य आरोपियों जफ़र और अशरफ़ से कुंजूमोन के सम्बन्ध पहले ही स्थापित हो चुके हैं। इसी प्रकार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए NDF के ही एक और प्रमुख नेता अय्यूब को अलुवा के पास से 10 जुलाई को गिरफ़्तार कर लिया है और उसके पास से भी हथियार और NDF का अलगाववादी साहित्य बरामद किया है।

http://www.asianetindia.com/news/pfi-leader-kunhumon-booked-antiterror-laws_171699.html

पाठक सोच रहे होंगे, वाह… वाह… क्या बात है, केरल की पुलिस और वामपंथी सरकार अपने कर्तव्यों के प्रति कितने तत्पर और मुस्तैद हैं। प्रोफ़ेसर पर हमला होने के चन्द दिनों में ही मुख्य आरोपी और उन्हें “वैचारिक खुराक” देने वाले दोनों नेताओं को गिरफ़्तार भी कर लिया… गजब की पुलिस है भई!!! लेकिन थोड़ा ठहरिये साहब… जरा इन दो घटनाओं को भी पढ़ लीजिये…

1) अप्रैल 2008 में रा स्व संघ  के एक कार्यकर्ता बिजू को NDF के कार्यकर्ताओं ने दिनदहाड़े त्रिचूर के बाजार में मार डाला था। कन्नूर, पावारत्ती आदि इलाकों में RSS और NDF के कार्यकर्ताओं में अक्सर झड़पें होती रहती हैं, लेकिन वामपंथी सरकार के मूक समर्थन की वजह से अक्सर NDF के कार्यकर्ता RSS के स्वयंसेवकों को हताहत कर जाते हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

2) कन्नूर जिले के संघ के बौद्धिक प्रमुख श्री टी अश्विनी कुमार जो कि सतत देशद्रोही तत्वों के खिलाफ़ अभियान चलाये रहते थे, उन्हें भी NDF के चरमपंथियों ने कुछ साल पहले सरे-बाज़ार तलवारों से मारा था और जो लोग अश्विनी की मृतदेह उठाने आये उन पर भी हमला किया गया। उस समय तत्कालीन वाजपेयी सरकार और गृह मंत्रालय ने केरल में NDF की संदिग्ध गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट केन्द्र को सौंपने को कहा था, लेकिन वामपंथी सरकार ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया, क्योंकि उन्हें चुनाव जीतने के लिये NDF और मुस्लिम लीग की आवश्यकता पड़ती रहती है।

जैसा कि पहले भी कहा गया है माकपा को मुस्लिम वोटों की भारी चिंता रहती है, हाल ही में माकपा ने अपनी राज्य कांग्रेस की बैठक मलप्पुरम  में रखी थी जो कि 80% मुस्लिम बहुलता वाला इलाका है। माकपा के राज्य सचिव अक्सर मुस्लिमों के धार्मिक कार्यक्रमों में देखे जाते हैं (फ़िर भी इस बात की रट लगाये रहते हैं कि कम्युनिस्ट धर्म के खिलाफ़ हैं, यानी कि “धर्म अफ़ीम है” जैसे उदघोष से उनका मतलब सिर्फ़ “हिन्दू धर्म” होता है, बाकी से नहीं), तो फ़िर अचानक केरल पुलिस इतनी सक्रिय क्यों हो गई है? जवाब है “हाथ किसका काटा गया है, उसके अनुसार कार्रवाई होगी…” पहले तो संघ कार्यकर्ताओं के हाथ काटे जाते थे या हत्याएं की जा रही थीं, लेकिन अब तो “तालिबानियों” ने सीधे चर्च को ही चुनौती दे डाली है। पहले तो वे “लव जेहाद” ही करते थे और ईसाई लड़कियाँ भगाते थे, पर अब खुल्लमखुल्ला एक ईसाई प्रोफ़ेसर का हाथ काट दिया, सो केरल पुलिस का चिन्तित होना स्वाभाविक है। मैं आपको सोचने के लिये विकल्प देता हूं कि पुलिस की इस तत्परता के कारण क्या-क्या हो सकते हैं –

1) केरल पुलिस के अधिकतर उच्च अधिकारी ईसाई हैं, इसलिये? या…

2) एक अल्पसंख्यक(?) ने दूसरे अल्पसंख्यक(?) पर हमला किया, इसलिये? या…

3) एक “अल्पसंख्यक” मनमोहन सिंह का प्यारा है (यानी “देश के संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का है…” वाला ब्राण्ड) और जिसका हाथ काटा गया वह “अल्पसंख्यक”, सोनिया आंटी के समुदाय का है (एण्डरसन, क्वात्रोची ब्राण्ड), इसलिये? या…

4) कहीं करोड़ों का चन्दा देने वाले, “चर्च” ने माकपा को यह धमकी तो नहीं दे दी, कि अगले चुनाव में फ़ूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी… इसलिये?

बहरहाल, जो भी कारण हों, प्रोफ़ेसर टी जोसफ़ के मामले में त्वरित कार्रवाई हो रही है, खुद राज्य के DGP जोसफ़ के घर सांत्वना जताने पहुँच चुके हैं, गिरफ़्तारियाँ हो रही हैं… अब्दुल नासिर मदनी के साथ दाँत निपोरते हुए फ़ोटो खिंचवाने वाले माकपा नेता पिनरई विजयन अब कह रहे हैं कि NDF एक साम्प्रदायिक संगठन है, माकपा इस मामले को गम्भीरता से ले रही है और इसकी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेजी जा रही है… तात्पर्य यह है कि जोसफ़ का हाथ काटने के बाद बहुत तेजी से “काम” हो रहा है।

जिस “तालिबानी” NDF कार्यकर्ता कुंजूमान को केरल पुलिस ने अब आतंकवादी कहकर गिरफ़्तार किया है, इसी कुंजूमान पर RSS के कार्यकर्ता कलाधरन के हाथ काटने के आरोप में केस चल रहा है… चल रहा है और चलता ही रहेगा… क्योंकि कार्रवाई यह देखकर तय की जाती है कि “हाथ किसका काटा गया है…”…

यह है “वामपंथ” और “धर्मनिरपेक्षता” (सॉरी… बेशर्मनिरपेक्षता) की असलियत!!!!!!

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19 Comments

  1. July 12, 2010 at 7:58 am

    जब गुजरात में यह हालत है http://www.tarakash.com/2/news/india/3094-conversions-in-gujarat-will-be-in-restraints.htmlतो समझा जा सकता है शेष भारत की हालत क्या होगी.

  2. July 12, 2010 at 8:02 am

    यहीच तो बात है भाऊ…हमारे प्यारे भारत देश में अब अपराध व आतंकवाद की परिभाषा धर्म से परिभाषित होती है. कश्मीर में पूरी तरह हिन्दुओं का सफाया हो गया लेकिन किसी भी मानवाधिकारवादी एवं सरकार के कान पर जूं त नहीं रेंगी, इसका कारण तो साफ ही है. हां, फिलिस्तीन के मुस्लिम दर्द को हमारी सरकार बहुत अच्छे से समझती है. त्रिपुरा में RSS के चार प्रचारकों को लंबे समय तक बंधक बनाया गया, बाद में उनका कोई अता-पता नहीं चला, और अता-पता करने की कोशिश भी नहीं हुई, क्युंकि वे हिन्दू संगठन से जुड़े थे. आप जो भी बता रहे हैं ना, वो किसी से भी छुपा थोड़े ही है, हां सब इन बातों को जान-समझकर भी अंधे बने हुए हैं.ये देश कहने को ही हिन्दूस्थान है, वास्तव में यह मुल्ला-पादरीस्थान हो चुका है. किससे आशा की जाए…सब तो शर्मनिरपेक्षता के झंडाबरदार ही है….यदि ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब शान्तिप्रिय हिन्दुओं के बच्चे भी हथियार उठाने को मजबूर हो जाएं…

  3. July 12, 2010 at 12:34 pm

    सुरेश जी नमस्तेजब केरल में संघ क़े स्वयं सेवको क़े ऊपर हमला होता था तब सभी सेकुलर फोर्सेज इशाई सभी हिन्दुओ क ही दोस देते थे लेकिन जिसकी आदत ही आतंकी है उसे शांति क़ा दूत कहना ही मुर्खता है मुसलमान तो केवल और केवल आतंकबादी बिचार क़ा होता है सारा जगत इसको प्रत्यक्ष देख रहा है.

  4. Anonymous said,

    July 12, 2010 at 1:20 pm

    15 लाख हिंदू छोड़ना चाहते हैं पाकिस्तानपाकिस्तान में आर्थिक, धार्मिक और सामाजिक प्रताड़ना के शिकार पाकिस्तानी हिंदू और सिख समुदाय के तकरीबन 15 से बीस लाख लोग निहायत बेगानगी में जी रहे हैं और बँटवारे के वक्त जिस घरबार के लालच में वहीं बस गए थे अब उसी को छोड़कर भारत लौट आना चाहते हैं।पाकिस्तान से हिंदुओं और सिखों का पलायन पहले भी होता रहा है। वहाँ से बड़ी संख्या में आए ये लोग गुजरात, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, दिल्ली और अन्य राज्यों में अपने-अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं।जालंधर में ऐसे तकरीबन दो सौ परिवार रहते हैं। उन्हें यहाँ रहते दस से पंद्रह साल हो गए हैं। वह भारत की नागरिकता दिए जाने की माँग कर रहे हैं। हालाँकि उनका आरोप है कि भारत सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही।

  5. Anonymous said,

    July 12, 2010 at 1:20 pm

    स्यालकोट से यहाँ आए ठक्कर सपाल ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि हम अपने परिजन का अंतिम संस्कार कर रहे थे। इसी बीच कुछ लोग मौके पर पहुँचे और ईट तथा पत्थर मारकर चिता को बुझा दिया और अधजले शव को निकाल कर घसीटते हुए ले गए तथा उसे नाले में फेंक दिया।सपाल ने कहा कि हिंदुओं और सिखों के लिए वहाँ श्मशान नहीं है। जो हैं भी वह तकरीबन तीन से चार सौ किलोमीटर दूर।वह कहते हैं कि हिंदुओं को तो छोड़िए जितनी आजादी हिंदुस्तान में मुसलमानों को हैं उतनी आजादी वहाँ (पाक में) के मुसलमानों को भी नहीं है।स्यालकोट से ही आए बुआदित्ता मल ने कहा कि स्थानीय लोग हमारे धार्मिक आयोजनों में खलल डालते हैं और हमारा मजाक उड़ाते हैं। वह हमारे आराध्य देवों की मूर्तियाँ फेंक देते हैं। धमकाते हैं कि आइंदा ऐसा नहीं होना चाहिए। विरोध करने पर मार पीट करते हैं।मुल्कराज ने कहा कि हमारा मुल्क अब हिंदुस्तान है। हम पाक दूतावास में पासपोर्ट के नवीकरण के लिए जाते हैं तो वह कहते हैं कि पहले पाकिस्तान जाओ और परिचय पत्र लेकर आओ। पाक जाने पर उन्हें जब इसकी जानकारी होती है कि यह भारत से आया है तो परिचय पत्र नहीं दिया जाता है। इससे हमें परेशानी हो रही है।इस मौके पर मौजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहिंदर भगत कहते हैं कि हम इनकी गारंटी लेने को तैयार हैं और केन्द्र सरकार से इन सबको तत्काल नागरिकता देने की माँग करते हैं।पाक से आए लोगों के साथ मौजूद एक अन्य भाजपा नेता भगत मनोहर लाल ने कहा कि नियम के अनुसार पाँच साल तक यहाँ रहने वालों को नागरिकता मिलनी चाहिए और ये लोग तो पिछले बीस साल से यहाँ रह रहे हैं। हमारी पार्टी इनके लिए नागरिकता अथवा दोहरी नागरिकता की माँग करती है।

  6. July 12, 2010 at 4:12 pm

    पुलिस की इस तत्परता के कारण —पहला कारण –करोड़ों का चन्दा देने वाले, "चर्च" ने माकपा को यह धमकी निश्चित तौर पर दी होगी, कि अगले चुनाव में फ़ूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी. क्योंकि ये माकपा के कुत्ते यहाँ की जनता का खून चूसते और विदेशी टुकडो पर ही पलते आ रहे हैं. और दूसरा कारण –सोनिया अन्धेर नगरी चौपट राजा

  7. July 12, 2010 at 5:27 pm

    बात बिलकुल साफ़ है … हिन्दू को मारो-काटो हिन्दू को भी फर्क नहीं पड़ता … एक भी अल्पसंख्यक को खरोच क्या लगा, हिन्दू ही विलाप करने बैठ जाता हैं.

  8. Jeet said,

    July 12, 2010 at 5:42 pm

    कॉंग्रेस का हाथ हमेशा ही जेहादियो के साथ रहा है, और एक ना एक दिन यही जेहादी कॉंग्रेस का हाथ और गर्दन दोनो ले लेंगे.

  9. Jeet said,

    July 12, 2010 at 6:00 pm

    बेचारी कॉंग्रेस और कौमनष्टो के सामने बडा धर्म संकट है- किसका साथ दे? जेहादियो का क्रुसेदारो का?? मिशानारियो को या मुल्लो को? आगे कुआ तो पीछे खाई. पूरे प्रकरण से एक बात सामने आती है कि दो अतिवादी पंथ (इस्लाम और ईसाइयत) कभी एक साथ नही रह सकते. अब तक तो सहनशील-सदभावी-शांतीप्रिय हिन्दुओ ने इन दोनो अतिवादियो को झेल लिया. लेकीन अब ये दोनो ही आमने-सामने है. क्योंकी दोनो को अपना विस्तार करना है. अपना साम्राज्य बढाना है. (साम्राज्यवादियो के कथित विरोध में गला फाडनेवाले कौम नष्ट सुन ले)एक तरफ तो 'लव-जेहाद' के जरिये और दर्जनो बच्चे पैदा करके मुस्लिम युद्ध स्तर पार अपनी आबादी बढा रहे है. तो दुसरी तरफ सेवा की दुकानदारी के जरिये धर्मांतरण करके ईसाई अपनी आबादी बढा रहे है, ताकि इस्लाम के 'Counter -Attack ' के लिये फौज तैयार हो सके. और असली ईसाइयो को बचाने के लिये नकली (धर्मांतरित) ईसाइयो की गर्दनो (हाथो का भी) इस्तेमाल किये जा सके. वैश्विक रूप से फैले इस नव साम्राज्यवाद (जो धर्म के नाम पर चल रहा है) का कुत्सित नमुना केरल में देखने मिलता है. अगले विश्व युद्ध में यही नकली मुस्लिम और नकली ईसाई (यांनी धर्मांतरित) इस्लाम और ईसाइयत की रक्षा के लिये अपने गले-हाथ कटवायेंगे और अरब तथा वेटीकन में बैठे इनके आका (असली मुस्लिम और ईसाई) मस्ती से महफूज रहते हुये गुल छर्रे उडायेंगे.

  10. man said,

    July 13, 2010 at 5:44 am

    सदर वन्दे सर ,मा. क. पा जैसी देश दरोही व् हिन्दू दरोही पार्टी जंहा भी बहुमत में हो गी वंहा ऐसी ही गुंडागर्दी से राज करेगी ,जिनका कोई धरम ही नहीं ,वो जंगली कुते केवल अपने हित के लिए ,उन्हीके सामने दूम हिलाएंगे जो उन्हें कच्चे मांस की बोटी डालते हो |बाकी पालतू कुतो से भी क्या आशा ,उन्ही का धरम भी तो अपनी मालकिन के साथ हे |अब तो जेसा की दिवाकर जी ने कहा हे हथियार उठाना ही एक मात्र उपाय हे ,जिस से की दोनों तरह के gandko की नसबंदी की जा सके |फिर गडकरी ने एक की नसबंदी वाली जगह को छेड़ दियाहे ,ओरंगजेब की ओलाद बता के ,यदि कुछ लक्स्न दिखे तो उन्होंने बता दिया ?गलत कुछ नहीं कहा |

  11. Anonymous said,

    July 13, 2010 at 5:51 am

    AAJ NEWSPAPER MAI PADA THA KI PAKISTHAN ME EK BACHE NA MASJID KA BAHAR WATER COOLER SE PANI PEEYA TO PAHLE USKI PEETAI KI GAYI. BAAD ME USKE PARIWAAR AUR DUSRAI HINDUO PAR HAMLA KIYA GAYA

  12. Anonymous said,

    July 13, 2010 at 5:59 am

    Read herehttp://www.amarujala.com/today/int.asp

  13. Mahak said,

    July 13, 2010 at 9:43 am

    Part 1of 4बहुत दिनों से एक विचार मेरे मन की गहराइयों में हिलोरे खा रहा था लेकिन उसे मूर्त रूप प्रदान करने के लिए आप सबका सहयोग चाहिए इसलिए उसे आप सबके समक्ष रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था की पता नहीं कहीं वो असफल और अस्वीकार ना हो जाए लेकिन तभी ये विचार भी आया की बिना बताये तो स्वीकार होने से रहा इसलिए बताना ही सही होगा .दरअसल जब भी मैं इस देश की गलत व्यवस्था के बारे में कोई भी लेख पढता हूँ, स्वयं लिखता हूँ अथवा किसी से भी चर्चा होती है तो एक अफ़सोस मन में होता है बार-2 की सिर्फ इसके विरुद्ध बोल देने से या लिख देने से क्या ये गलत व्यवस्थाएं हट जायेंगी , अगर ऐसा होना होता तो कब का हो चुका होता , हम में से हर कोई वर्तमान भ्रष्ट system से दुखी है लेकिन कोई भी इससे बेहतर सिस्टम मतलब की इसका बेहतर विकल्प नहीं सुझाता ,बस आलोचना आलोचना और आलोचना और हमारा काम ख़त्म , फिर किया क्या जाए ,क्या राजनीति ज्वाइन कर ली जाए इसे ठीक करने के लिए ,इस पर आप में से ज़्यादातर का reaction होगा राजनीति !!! ना बाबा ना !(वैसे ही प्रकाश झा की फिल्म राजनीति ने जान का डर पैदा कर दिया है राजनीति में कदम रखने वालों के लिए ) वो तो बहुत बुरी जगहं है और बुरे लोगों के लिए ही बनी है , उसमें जाकर तो अच्छे लोग भी बुरे बन जाते हैं आदि आदि ,इस पर मेरा reaction कुछ और है आपको बाद में बताऊंगा लेकिन फिलहाल तो मैं आपको ऐसा कुछ भी करने को नहीं कह रहा हूँ जिसे की आप अपनी पारिवारिक या फिर अन्य किसी मजबूरी की वजह से ना कर पाएं, मैं सिर्फ अब केवल आलोचना करने की ब्लॉग्गिंग करने से एक step और आगे जाने की बात कर रहा हूँ आप सबसे

  14. Mahak said,

    July 13, 2010 at 9:44 am

    आप सोच रहे होंगे वो कैसे ,तो वो ऐसे जनाब की मैं एक साझा ब्लॉग (Common Blog ) create करना चाहता हूँ जिसका की मकसद होगा एक ऐसा मंच तैयार करना जिसपे की हम सब हमारे देश के वर्तमान सिस्टम की खामियों की सिर्फ आलोचना करने के साथ-२ उसका एक तार्किक और बढ़िया हल भी प्रस्तुत करें और उसे बाकायदा एक बिल के रूप में पास करें आपसी बहस और वोटिंग के द्वारा इस पर आपका कहना होगा की क्या सिर्फ ब्लॉग जगत के द्वारा देश के लिए नए और बेहतर कानून और सिस्टम बनाने से और वो भी सिर्फ ब्लॉग पर पास कर देने से देश का गलत सिस्टम और भ्रष्ट व्यवस्था बदल जायेगी ? तो श्रीमान आपसे कहना चाहूँगा की ये मैं भी जानता हूँ की ऐसा नहीं होने वाला लेकिन ज़रा एक बात सोचिये की जब भी हममें से कोई इस भ्रष्ट और गलत व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाता है या भविष्य में भी कभी उठाएगा तो जब इस गलत व्यवस्था के समर्थक हमसे पूछेंगे की -" क्या तुम्हारे पास इससे बेहतर व्यवस्था का प्लान है ?,अगर है तो दिखाओ " , तो क्या आपको नहीं लगता की हमारे पास पहले से वो सही सिस्टम होना तो चाहिए जो उस समय हम उनके सामने पेश कर सकें ,एक बार हम एक सही व्यवस्था का खाका तैयार करने में कामयाब हो गए तो वो दिन दूर नहीं होगा जब हम इसे पूरे देश के सामने भी पेश करेंगे और देश हमारा साथ देगा और इस पर मोहर लगाएगा .इसीलिए मेरी आप सबसे प्रार्थना है की इसमें सहयोग करें , मैं आपसे आर्थिक सहयाग मतलब रुपया ,पैसे का सहयोग नहीं मांग रहा बल्कि आपसे बोद्धिक सहयोग चाह रहा हूँ ,हमारे इस common BLOG का नाम होगा"BLOG Parliament – Search for a right system & laws for the country "http://blog-parliament.blogspot.com/इसके मुख्यतः 3 चरण होंगे1 . अपने बिल अथवा प्रस्ताव की प्रस्तुति और उसपे बहस2 . उस प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में वोटिंग3 . Majority वोटिंग के हक में प्रस्ताव का पास होना अथवा reject होना

  15. Mahak said,

    July 13, 2010 at 9:45 am

    आप सबसे यही सहयोग चाहिए की आप सब इसके मेम्बर बनें,इसे follow करें और प्रत्येक प्रस्ताव के हक में या फिर उसके विरोध में अपने तर्क प्रस्तुत करें और अपना vote देंजो भी लोग इसके member बनेंगे केवल वे ही इस पर अपना प्रस्ताव पोस्ट के रूप में publish कर सकते हैं जबकि वोटिंग members और followers दोनों के द्वारा की जा सकती है . आप सबको एक बात और बताना चाहूँगा की किसी भी common blog में members अधिक से अधिक सिर्फ 100 व्यक्ति ही बन सकते हैं ,हाँ followers कितने भी बन सकते हैंतो ये था वो सहयोग जो की मुझे आपसे चाहिए ,मैं ये बिलकुल नहीं कह रहा हूँ की इसके बदले आप अपने-२ ब्लोग्स लिखना छोड़ दें और सिर्फ इस पर ही अपनी पोस्ट डालें , अपने-2 ब्लोग्स लिखना आप बिलकुल जारी रखें , मैं तो सिर्फ आपसे आपका थोडा सा समय और बौद्धिक शक्ति मांग रहा हूँ हमारे देश के लिए एक बेहतर सिस्टम और न्याय व्यवस्था का खाका तैयार करने के लिए 1. डॉ. अनवर जमाल जी2. सुरेश चिपलूनकर जी3. सतीश सक्सेना जी4. डॉ .अयाज़ अहमद जी5. प्रवीण शाह जी6. शाहनवाज़ भाई7. जीशान जैदी जी8. पी.सी.गोदियाल जी9. जय कुमार झा जी10.मोहम्मद उमर कैरान्वी जी11.असलम कासमी जी12.राजीव तनेजा जी13.देव सूफी राम कुमार बंसल जी14.साजिद भाई15.महफूज़ अली जी16.नवीन प्रकाश जी17.रवि रतलामी जी18.फिरदौस खान जी19.दिव्या जी20.राजेंद्र जी 21.गौरव अग्रवाल जी22.अमित शर्मा जी23.तारकेश्वर गिरी जी( और भी कोई नाम अगर हो ओर मैं भूल गया हों तो मुझे please शमां करें ओर याद दिलाएं ) मैं इस ब्लॉग जगत में नया हूँ और अभी सिर्फ इन bloggers को ही ठीक तरह से जानता हूँ ,हालांकि इनमें से भी बहुत से ऐसे होंगे जो की मुझे अच्छे से नहीं जानते लेकिन फिर भी मैं इन सबके पास अपना ये common blog का प्रस्ताव भेजूंगाcommon blog शुरू करने के लिए और आपको उसका member बनाने के लिए मुझे आप सबकी e -mail id चाहिए जिसे की ब्लॉग की settings में डालने के बाद आपकी e -mail ids पर इस common blog के member बनने सम्बन्धी एक verification message आएगा जिसे की yes करते ही आप इसके member बन जायेंगेप्रत्येक व्यक्ति member बनने के बाद इसका follower भी अवश्य बने ताकि किसी member के अपना प्रस्ताव इस पर डालते ही वो सभी members तक blog update के through पहुँच जाए ,अपनी हाँ अथवा ना बताने के लिए मुझे please जल्दी से जल्दी मेरी e -mail id पर मेल करेंmahakbhawani@gmail.com

  16. Mahak said,

    July 13, 2010 at 9:47 am

    हमारे इस common blog में प्रत्येक प्रस्ताव एक हफ्ते के अंदर अंदर पास किया जायेगा , Monday को मैं या आप में से इच्छुक व्यक्ति अपना प्रस्ताव पोस्ट के रूप में डाले ,Thursday तक उसके Plus और Minus points पर debate होगी, Friday को वोटिंग होगी और फिर Satuday को votes की गणना और प्रस्ताव को पास या फिर reject किया जाएगा वोटिंग के जरिये आये हुए नतीजों सेआप सब गणमान्य ब्लोग्गेर्स को अगर लगता है की ऐसे कई और ब्लोग्गेर्स हैं जिनके बौधिक कौशल और तर्कों की हमारे common ब्लॉग को बहुत आवश्यकता पड़ेगी तो मुझे उनका नाम और उनका ब्लॉग adress भी अवश्य मेल करें ,मैं इस प्रस्ताव को उनके पास भी अवश्य भेजूंगा .तो इसलिए आप सबसे एक बार फिर निवेदन है इसमें सहयोग करने के लिए ताकि आलोचना से आगे भी कुछ किया जा सके जो की हम सबको और ज्यादा आत्मिक शान्ति प्रदान करेइन्ही शब्दों के साथ विदा लेता हूँजय हिंदमहक

  17. July 14, 2010 at 4:36 pm

    @महक सार्थक सोच है किन्तु आरम्भ ही आपने ऐसे नाम के साथ किया है कि आश्चर्य भी होता है. जिस संसद में अनवर जमाल ,उमर कैरानवी जैसे लोग होंगे क्या वहां सत्य और न्याय हो सकता है, सच में आपने तो कमाल ही कर दिया.इन जैसे लोगो को साथ लेकर चलने से ही इस देश का बेडागर्क हो चुका है फिर भी लोगो की समझ नहीं आता तो क्या होगा इस देश का भविष्य.शायद छद्म सेकुलरता के लबादे का सभी हिंदुओं को अत्यधिक शौक है. आपने नाम रखा है इसका BLOG Parliament – Search for a right system और उसमें सबसे ऊपर नाम भी अनवर जमाल का रखा है जो पानी पी-पी कर हिन्दू धर्म को अतार्किकता के साथ धुर्तता से कोसता है और चालाकी से देश-द्रोहिता की बात करता है . वाह सच में बड़ा ही अनुपम प्रयास किया है बाकी सब छोडो आपने जो उमर कैरानवी जैसो को भी शामिल करके आपने सिद्ध कर दिया है बड़े ही तार्किक और बौद्धिक विचारवानो को आपने सदस्य बनाने की बात की है तो निश्चित ही आपको परिणाम भी देखने को मिलेंगे. अनवर जमाल और उमर कैरानवी जैसे महा धूर्तों को आपने ब्लॉग में जगह दी है तो इसका नाम कुछ ऐसा रखना चाहिये – BLOG Jehaad – Search for a right systemखैर हमारी दुआयें आपके साथ हैं.

  18. July 15, 2010 at 7:51 am

    जय भीम इस देश में धर्म के नाम पर अत्याचार प्राचीनकाल से होते चले आ रहे है जिसका प्रमाण हम स्वयं दलित है उत्पीड़न करना इस देश की प्राचीन परम्परा है

  19. October 14, 2010 at 5:29 pm

    >SURESH JIhindu ishi durbalta ke sath jine ka aadi ho gya hai… lekin ab use jagna padega nahito kuch log hinduo ka gala katvakar bhi khush honge


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