>दो अति-महत्वपूर्ण सूचनाएं ब्लॉग संसद के सभी सदस्यों के लिए

>

 1.
शाहनवाज़ भाई ,सतीश सक्सेना जी और सुज्ञ जी ने अनुरोध किया है की इस ब्लॉग संसद पर बेनामी यानी की anonymous के रूप में कमेन्ट करने का आप्शन बंद किया जाए और उन्होंने इसकी पुख्ता वजहें भी दी हैं इस पोस्ट पर
http://blog-parliament.blogspot.com/2010/07/blog-post_31.html

मैंने खुद भी काफी समय से विभिन्न ब्लोग्स पर इन बेनामियों के कमेंट्स को observe किया है और उनमें से अधिकाँश को गाली-गलौच और अपशब्दों का प्रयोग  करते हुए ही पाया है ,सच में ये लोग सांप्रदायिक सौहार्द और अन्य सौहार्दपूर्ण वातवरण को बिगाड़ने का प्रयास करते हैं और सभ्य लोगों के लिए फिर उस ब्लॉग पर मौजूद रहना मुश्किल हो जाता है ,इनमें से ज़्यादातर का मुख्य मकसद पोस्ट की महत्वपूर्ण बातों की ओर से पाठकों का ध्यान हटाने और उसे गलत दिशा की ओर ले जाने में होता है और कई बार तो ऐसा देखा गया है की ये अपनी हरकतों में कामयाब भी हो जाते हैं
इसलिए अब से इस ब्लॉग पर बेनामी यानी anonymous के रूप में कमेंट्स करने का आप्शन बंद किया जाता है जिसे जो भी कहना है ,अगर उसे लगता है की वो सही है तो वो सामने आकर कहे लेकिन हाँ जैसा की सत्य गौतम वाले प्रकरण के दौरान में आप सबसे पहले ही वादा कर चूका हूँ की जातिवाद या मजहबवाद का ज़हर फैलाने के किसी भी प्रयास को कम से कम मैं इस ब्लॉग पर तो सफल नहीं होने दूंगा ,साथ ही मेरी ये भी कोशिश रहेगी की गाली या अपशब्द वाले कमेंट्स भी हम सबके  इस ब्लॉग संसद पर ना रह पाएं

2.
अब एक और महत्वपूर्ण बात है जिसकी ओर मैं आप सबका ध्यान चाहूँगा , इस ब्लॉग संसद का निर्माण हमारे देश की समस्याओं और महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान ढूँढने के लिए किया गया था ना की इस प्रकार की पोस्ट्स के लिए
http://blog-parliament.blogspot.com/2010/07/blog-post_24.html
http://blog-parliament.blogspot.com/2010/07/blog-post_9440.html

बताइये इस तरह की पोस्ट भी डाली गयी हैं यहाँ जबकि इनसे एक बहुत बेहतर पोस्ट एक महत्वपूर्ण समस्या की और ध्यान आकर्षित करती हुई जो की इस ब्लॉग पर राजेन्द्र जी ने सबसे पहले डाली थी, उसे मैंने डिलीट करवा दिया था राजेन्द्र जी के ही द्वारा सिर्फ इसलिए की उसमें उन्होंने उस समस्या का हल नहीं डाला था ( राजेन्द्र जी मुझे उसका अब भी अफसोस है )

देखिये ,please एक बात समझने की कोशिश कीजिये की इस तरह की पोस्ट्स हम सब अपने-२ ब्लोग्स पर डाल सकते हैं और डालते भी हैं लेकिन यहाँ पर पोस्ट के रूप में सवाल करना, समस्या डालना और उसकी आलोचना करने भर से हमारा काम पूरा नहीं हो जाता है ,हमें उसका एक ठोस हल भी प्रस्तुत करना है जिस पर की सदस्यों द्वारा बहस और मतदान किया जा सके और फिर उसे इस ब्लॉग संसद के द्वारा majority opinion के रूप में स्वीकार अथवा अस्वीकार किया जा सके, अब तक ऐसा सिर्फ एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है जो की उपरोक्त मापदंडो पर खरा उतरता है और वो प्रस्ताव था सुज्ञ जी का ,एक प्रस्ताव राजेन्द्र जी ने भी बाद में डाला था लेकिन वो थोड़ा incomplete form में था जिसे की complete form में जल्द ही आप सबके समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा
http://blog-parliament.blogspot.com/2010/07/blog-post_19.html
http://blog-parliament.blogspot.com/2010/07/blog-post_8039.html

मैं आप सबको ऐसी पोस्ट्स डालने से मना नहीं कर रहा हूँ जैसी की जय कुमार झा जी ने एक ईमानदार व्यक्ति ब्रह्मपाल जी और उनकी सहायता सम्बन्धी एक पोस्ट डाली थी या फिर शंकर फुलारा जी ने ब्लॉग संसद के उपर एक कविता प्रस्तुत की थी या फिर शाहनवाज़ भाई ने सांप्रदायिक सौहार्द कायम करने के मकसद से अभी एक पोस्ट डाली ,
http://blog-parliament.blogspot.com/2010/07/blog-post_5207.html
http://blog-parliament.blogspot.com/2010/07/blog-post_30.html
http://blog-parliament.blogspot.com/2010/07/blog-post_31.html

इस तरह की पोस्ट्स का इस ब्लॉग पर हमेशा स्वागत है लेकिन जिन पोस्ट्स का जिक्र मैंने पहले किया है उस प्रकार की पोस्ट्स कृपया यहाँ ना डाली जाएँ


 

आशा है आप सब इस बात को समझेंगे और सहयोग करेंगे

धन्यवाद

महक

17 Comments

  1. July 31, 2010 at 7:59 pm

    >आपसे सहमत हूँ ! आभार !

  2. July 31, 2010 at 8:28 pm

    >टिप्पणी नियंत्रण भी आवश्यक है

  3. July 31, 2010 at 8:53 pm

    >धन्यवाद, महक जी

  4. July 31, 2010 at 8:59 pm

    >ब्लोग संसद में उदार विचारधाराओं का संरक्षण व सम्मान भी करना पडेगा।देखना पडेगा कि उदार विचारधाराओं को कोई हतोत्साहित करने का प्रयास न करे।

  5. July 31, 2010 at 9:11 pm

    >मॉडरेशन और इस प्रकार की व्यवस्थायें जरुरी हो गई हैं.

  6. August 1, 2010 at 4:30 am

    >बहुत ही सराहनीय व सार्थक कदम,मैं तो इस ब्लॉग संसद के सभी सदस्यों से आग्रह करता हूँ की बेनामी क्या आधी अधूरी प्रोफाइल जैसे सही फोटो का नहीं होना,इ,मेल का नहीं होना,फोन नंबर का नहीं होना इत्यादि कमियों को कम से कम ब्लॉग संसद के सभी सदस्य जरूर दूर करें | हमारा ब्लॉग लिखने का मकसद है अच्छी सोच ,अच्छा समाज और अच्छे देश का निर्माण करने में अपना सार्थक योगदान देना इसलिए हमें पूरी तरह सबके सामने आकर यह काम करना चाहिए ,हम किसी भी व्यवसाय से क्यों न जुड़ें को अच्छाई और ईमानदारी की जरूरत आज हर जगह है जिसे हमसब को अपनाना चाहिए | हमारा मकसद ऐसे पोस्ट को लिखना होना चाहिए जो बिना किसी भेद-भाव के सच्ची भावना से देश और समाज हित में एक इमादारी भरे प्रयास की प्रेरणा को जन्म दे सके और कुछ करने के लिए जज्बों को मजबूती दे सके और स्वार्थ तथा लोभ-लालच से भरे मानसिकता को इस देश व समाज से मिटाने का काम कर सके |

  7. Shah Nawaz said,

    August 1, 2010 at 6:49 am

    >आपने बिलकुल उचित कदम उठाए हैं और एकदम सही बात कही है. मेरे विचार से हमें ब्लॉग संसद में लिखने के लिए नियम इत्यादि का अवश्य ही निर्धारण करना चाहिए. जिससे कि लेखक को भी कोई दुविधा ना रहे, एक बार लेख लिखने के उपरान्त जब पता चलता है कि लेख संस्था के नियमों के अनुरूप नहीं है, तो वह क्षण थोडा दुखदाई होता है. इसी दुविधा के कारण मैंने अपना लेख प्रकाशित करने से पहले आपसे सलाह ली थी. इसलिए पहले ही सबकी सहमती से नियम तय कर लिए जाए तो ज्यादा अच्छा है. किसी भी संस्था की कामयाबी उसके सदस्यों के द्वारा नियमों पर पूर्णत: चलने पर ही निर्भर करती है. हर एक मुहीम का लक्ष्य होता है और जो मुहीम अपने लक्ष्य से हट जाती है वह कभी मंजिल पर पहुँच ही नहीं पाती है. मेरे विचार अब समय है सभी ब्लॉग और सामूहिक ब्लॉग प्रबंधकों को ऐसे कदम उठाने चाहिए.

  8. August 1, 2010 at 7:33 am

    >जय कुमार जी,कदाचित आपका ईशारा मेरी तरफ़ है,आपने मेरे व्यक्तिगत ब्लोग पर भी कहा था,और वहां मैने स्पष्ठ भी किया था। फ़िर से स्पष्ठ करता हूंसही चित्र व अपूर्ण प्रोफ़ाइल से मेरा उद्देश्य बेनामियों की तरह अंट शंट भडास निकालना नहिं है।सत्यगवेषक हूं,सत्य की खोज में ब्लोग जगत की कंई छोटी पतली दुर्गम गलियों से गुजरना होता है, इसलिये सावधान हुं,कहीं किसी के लिये वैर विद्वेश का कारण न बन जाउं। यह भयमिश्रित मानस नहिं, बल्कि वह भाव है जो सदा मैरे स्वभाव का हिस्सा रहा हैं कि लोगों को बुरे स्वभाव(क्रोध,आवेश आदि) के लिये उक्साना भी पाप है।सत्यगवेषणा में अन्जाने यह घटित होने की सम्भावनाएं तो रहती ही है।सही फोटो की जगह लगा चित्र मेरे नाम व व्यक्तित्व का प्रतीक है। इस से एक तरह का लगाव लगाव सा हो गया है।मित्र बनाना किसे अच्छा नहिं लगता, इमेल व फ़ोन के माध्यम से बढे मित्रता के भावों को व्यस्तता के बीच न्याय न कर पाऊं तो और भी गलत होगा सो यही सोचकर उन्हें प्रकाशित नहिं किया।फ़िर भी यह मेरा अन्तिम निर्णय नहिं है। उचित समय पर प्रयास करेंगे।

  9. sanu shukla said,

    August 1, 2010 at 10:32 am

    >ye to hona hi chahiye…..jise jo bhi kahna hai apni pahchan ke stha aao …khule del se swagat kiya jayega…!!

  10. August 1, 2010 at 11:52 am

    >स्वागतयोग्य कदम है …………शुभकामनाएं

  11. August 1, 2010 at 2:23 pm

    >इस मंच की सार्थकता बनाए रखने के लिए आपने जो कदम उठाया है, वो सर्वदा उपयुक्त है…..

  12. soni garg said,

    August 1, 2010 at 4:12 pm

    >आपका कहना सही है !

  13. August 3, 2010 at 1:08 pm

    >No ISSUE Mahakji, as I said to you na that This is Parliament.. !!

  14. sajid said,

    August 4, 2010 at 9:20 am

    >उचित कदम…

  15. August 5, 2010 at 11:42 am

    >I wish you all the best, sir….

  16. August 6, 2010 at 12:59 pm

    >आपने सही किया , मालिक आपसे अपनी इच्छा के अनुसार काम ले।


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