>मेरा प्रस्ताव है की ; भारत में बड़े नोट बंद कर दिए जायं

>मैं कई दिनों से प्रतीक्षा कर रहा हूँ कि ; फिर कोई प्रस्ताव पटल पर रखा जायेगा, पर कोई प्रस्ताव नहीं रहाइसलिए ऐसा लग रहा है कि मानो भारत में कोई समस्या ही ना हो हालाँकि सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं के साथ ही अनेकों धार्मिक पारिवारिक समस्याएं ऐसी हैं कि; उन पर प्रस्ताव बन सकते हैं पर सबसे ज्वलंत समस्या है आर्थिक भ्रष्टाचार की

इसके लिए मैं एक प्रस्ताव पेश करता हूँ कि; इस आर्थिक भ्रष्टाचार से, और अर्थव्यवस्था में नकली नोटों की भरमार से निजात पाने को, बड़े नोट बंद कर दिए जायं | इनमें १००,,,,, ५००,,,, १००० के नोट बंद कर देने चाहिए

इसके पक्ष और विपक्ष में विचार आमंत्रित हैं, मैं भी अपने विचार टिप्पणी के रूप में ही दूंगा |

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यह गलती नौकरशाही की है या "विशिष्ट मानसिकता" की? (सन्दर्भ – विश्वनाथन आनन्द का अपमान)… Vishwanathan Anand Humiliation and Insult

विश्व के नम्बर एक शतरंज खिलाड़ी और भारत की शान समझे जाने वाले विश्वनाथन आनन्द क्या भारत के नागरिक नहीं हैं? बेशक हैं और हमें उन पर नाज़ भी है, लेकिन भारत की नौकरशाही और बाबूगिरी ऐसा नहीं मानती। इस IAS नौकरशाही और बाबूराज की आँखों पर भ्रष्टाचार और चाटुकारिता वाली मानसिकता की कुछ ऐसी चर्बी चढ़ी हुई है, कि उन्हें सामान्य ज्ञान, शिष्टाचार और देशप्रेम का बोध तो है ही नहीं, लेकिन उससे भी परे नेताओं के चरण चूमने की प्रतिस्पर्धा के चलते इन लोगों खाल गैण्डे से भी मोटी हो चुकी है।

विश्वनाथन आनन्द को एक अन्तर्राष्ट्रीय गणितज्ञ सम्मेलन में हैदराबाद विश्वविद्यालय द्वारा मानद उपाधि का सम्मान दिया जाना था, जिसके लिये उन्होंने अपने व्यस्त समय को दरकिनार करते हुए अपनी सहमति दी थी। लेकिन भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय ने विश्वनाथन आनन्द की “भारतीय नागरिकता” पर ही सवाल खड़े कर दिये, मंत्रालय के अधिकारियों का कहना था कि भले ही आनन्द के पास भारतीय पासपोर्ट हो, लेकिन वह अधिकतर समय स्पेन में ही रहते हैं। विश्वनाथन आनन्द की नागरिकता के सवालों(?) से उलझी हुई फ़ाइल जुलाई के पहले सप्ताह से 20 अगस्त तक विभिन्न मंत्रालयों और अधिकारियों के धक्के खाती रही। हैदराबाद विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट प्रदान करने के बारे में सारे पत्र-व्यवहार 2-2 बार फ़ैक्स किये, लेकिन नौकरशाही की कान पर जूं भी नहीं रेंगी। इन घनचक्करों के चक्कर में विश्वविद्यालय को यह सम्मान देरी से देने का निर्णय करना पड़ा, हालांकि पहले तय कार्यक्रम के अनुसार आनन्द को विश्व के श्रेष्ठ गणितज्ञों के साथ शतरंज भी खेलना था और उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी दी जाना थी। विवि के अधिकारियों और आनन्द, दोनों के सामने ही यह अपमानजनक स्थिति उत्पन्न हो गई क्योंकि उनकी नागरिकता पर ही संदेह जताया जा रहा था।

इस झमेले से निश्चित ही आनन्द ने भीतर तक अपमानित महसूस किया होगा, हालांकि वे इतने सज्जन, शर्मीले और भोले हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी अरुणा से अपने पासपोर्ट की कॉपी मंत्रालय भेजने को कहा, जिसका मंत्रालय के अघाये हुए अधिकारियों-बाबुओं ने कोई जवाब नहीं दिया। एक केन्द्रीय विवि और विश्व के सर्वोच्च खिलाड़ी के इस अपमान के मामले की शिकायत जब राष्ट्रपति प्रतिभादेवी सिंह पाटिल को की गई तब कहीं जाकर कपिल सिब्बल साहब ने खुद विश्वनाथन आनन्द को फ़ोन करके उनसे माफ़ी माँगी और उन्हें हुई “असुविधा”(?) के लिए खेद व्यक्त किया। आनन्द तो वैसे ही भोले-भण्डारी हैं, उन्होंने भी तड़ से माफ़ी देते हुए सारे मामले का पटाक्षेप कर दिया। (जबकि हकीकत में विश्वनाथन आनन्द संसद में बैठे 700 से अधिक सांसदों से कहीं अधिक भारतीय हैं, एक “परिवार विशेष” से अधिक भारतीय हैं जिसके एक मुख्य सदस्य ने विवाह के कई साल बाद तक अपना इटली का पासपोर्ट नहीं लौटाया था, और किसी नौकरशाह ने उनकी नागरिकता पर सवाल नहीं उठाया…)

पूरे मामले को गौर से और गहराई से देखें तो साफ़ नज़र आता है कि –

1) नौकरशाही ने यह बेवकूफ़ाना कदम या तो “चरण वन्दना” के लिये किसी खास व्यक्ति को खुश करने अथवा किसी के इशारे पर उठाया होगा…

2) नौकरशाही में इतनी अक्ल, समझ और राष्ट्रबोध ही नहीं है कि किस व्यक्ति के साथ कैसे पेश आना चाहिये…

3) नौकरशाही में “व्यक्ति विशेष” देखकर झुकने या लेटने की इतनी गन्दी आदत पड़ चुकी है कि देश के “सम्मानित नागरिक” क्या होते हैं यह वे भूल ही चुके हैं…

4) इस देश में 2 करोड़ से अधिक बांग्लादेशी (सरकारी आँकड़ा) अवैध रुप से रह रहे हैं, इस नौकरशाही की हिम्मत नहीं है कि उन्हें हाथ भी लगा ले, क्योंकि वह एक “समुदाय विशेष का वोट बैंक” है…। बांग्लादेश से आये हुए “सेकुलर छोटे भाईयों” को राशन कार्ड, ड्रायविंग लायसेंस और अब तो UID भी मिल जायेगा, लेकिन आनन्द से उनका पासपोर्ट भी माँगा जायेगा…

5) इस देश के कानून का सामना करने की बजाय भगोड़ा बन चुका और कतर की नागरिकता ले चुका एक चित्रकार(?) यदि आज भारत की नागरिकता चाहे तो कई सेकुलर उसके सामने “लेटने” को तैयार है… लेकिन चूंकि विश्वनाथन आनन्द एक तमिल ब्राह्मण हैं, जिस कौम से करुणानिधि धुर नफ़रत करते हैं, इसलिये उनका अपमान किया ही जायेगा। (पाकिस्तानी नोबल पुरस्कार विजेता अब्दुस सलाम का भी अपमान और असम्मान सिर्फ़ इसलिये किया गया था कि वे “अहमदिया” हैं…)

6) दाऊद इब्राहीम भी कई साल से भारत के बाहर रहा है और अबू सलेम भी रहा था, लेकिन सरकार इस बात का पूरा खयाल रखेगी कि जब वे भारत आयें तो उन्हें उचित सम्मान मिले, 5 स्टार होटल की सुविधा वाली जेल मिले और सजा तो कतई न होने पाये… इसका कारण सभी जानते हैं…

7) विश्वनाथन आनन्द की एक गलती यह भी है कि, मोहम्मद अज़हरुद्दीन “सट्टेबाज” की तरह उन्होंने यह नहीं कहा कि “मैं एक अल्पसंख्यक ब्राह्मण हूं इसलिये जानबूझकर मेरा अपमान किया जा रहा है…, न ही वे मीडिया के सामने आकर ज़ार-ज़ार रोये…” वरना उन्हें नागरिकता तो क्या, मुरादाबाद से सांसद भी बनवा दिया जाता…

8) विश्वनाथन आनन्द की एक और गलती यह भी है कि उनमें “मदर टेरेसा” और “ग्राहम स्टेंस” जैसी सेवा भावना भी नहीं है, क्योंकि उनकी नागरिकता पर भी आज तक कभी कोई सवाल नहीं उठा…

असल में भारत के लोगों को और नौकरशाही से लेकर सरकार तक को, “असली हीरे” की पहचान ही नहीं है, जो व्यक्ति स्पेन में रहकर भी भारत का नाम ऊँचा हो इसलिये “भारतीय” के रुप में शतरंज खेलता है, उसके साथ तो ऐसा दुर्व्यवहार करते हैं, लेकिन भारत और उसकी संस्कृति को गरियाने वाले वीएस नायपॉल को नागरिकता और सम्मान देने के लिये उनके सामने बिछे जाते हैं। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है, कि जहाँ विदेश में किसी भारतीय मूल के व्यक्ति ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर कुछ मुकाम हासिल किया कि मूर्खों की तरह हें हें हें हें हें हें करते हुए उसके दरवाजे पर पहुँच जायेंगे कि “ये तो भारतीय है, ये तो भारतीय है, इनके वंशज तो भारत से आये थे…”, सुनीता विलियम्स हों या बॉबी जिन्दल, उनका भारत से कोई लगाव नहीं है, लेकिन हमारे नेता और अधिकारी हैं कि उनके चरणों में लोट लगायेंगे… सानिया मिर्ज़ा शादी रचाकर पाकिस्तान चली गईं, लेकिन इधर के अधिकारी और नेता उसे कॉमनवेल्थ खेलों में “भारतीय खिलाड़ी” के रुप में शामिल करना चाहते हैं… यह सिर्फ़ चमचागिरी नहीं है, भुलाये जा चुके आत्मसम्मान की शोकांतिका है…।

स्पेन सरकार ने, विश्वनाथन आनन्द के लिये स्पेन की नागरिकता ग्रहण करने का ऑफ़र हमेशा खुला रखा हुआ है। एक और प्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी तथा आनन्द के मित्र प्रवीण ठिप्से ने बताया कि स्पेन ने विश्वनाथन आनन्द को “स्पेनिश” खिलाड़ी के रुप में विश्व शतरंज चैम्पियनशिप में खेलने के लिये “5 लाख डॉलर” का प्रस्ताव दिया था, जिसे आनन्द ने विनम्रता से ठुकरा दिया था कि “मैं भारत के लिये और भारतीय के नाम से ही खेलूंगा…” उस चैम्पियनशिप को जीतने पर विश्वनाथन आनन्द को भारत सरकार ने सिर्फ़ “5 लाख रुपये” दिये थे… जबकि दो कौड़ी के बॉलर ईशान्त शर्मा को IPL में सिर्फ़ 6 मैच खेलने पर ही 6 करोड़ रुपये मिल गये थे…

बहरहाल, आनन्द के अपमान के काफ़ी सारे “सम्भावित कारण” मैं गिना चुका हूं… अब अन्त में विश्वनाथन आनन्द के अपमान और उनके साथ हुए इस व्यवहार का एक सबसे मजबूत कारण देता हूं… नीचे चित्र देखिए और खुद ही समझ जाईये…। यदि आनन्द ने सोहराबुद्दीन, शहाबुद्दीन, पप्पू यादव, कलमाडी या पवार के साथ शतरंज खेली होती तो उनका ऐसा अपमान नहीं होता… लेकिन एक “राजनैतिक अछूत” व्यक्ति के साथ शतरंज खेलने की हिम्मत कैसे हुई आनन्द की?

भारत की “चरणचूम चापलूस-रीढ़विहीन” नौकरशाही आप सभी को मुबारक हो… जय हो।

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>एकतंत्र के रास्ते लोकतंत्र-9 / आर्थिक विभाजन

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9.1              देश के नागरिकों को तीन आयवर्गों में बाँटा जायेगा:-
क)     निम्न आयवर्ग- साठ हजार रूपये से कम वार्षिक आय/छ्ह एकड़ से कम कृषि भूमि (मैदानी भाग के हिसाब से)
ख)     मध्यम आय वर्ग- साठ हजार से दो लाख रूपये तक की वार्षिक आय/छ्ह से बीस एकड़ तक कृषि भूमि (मैदानी भाग के हिसाब से)
ग)      उच्च आय वर्ग- दो लाख रूपये से अधिक वार्षिक आय/बीस एकड़ से अधिक कृषि भूमि (मैदानी भाग के हिसाब से)
9.2              इसी प्रकार, उद्योग-धन्धों का भी वर्गीकरण किया जायेगा:-
क)     लघु उद्यम- छ्ह लाख रूपये से कम वार्षिक टर्नओवर
ख)     मध्यम उद्यम- छ्ह से बीस लाख रूपये तक का वार्षिक टर्नओवर
ग)      वृहत् उद्यम- बीस लाख रूपये से अधिक वार्षिक टर्नओवर
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सम्पूर्ण घोषणापत्र के लिए: http://khushhalbharat.blogspot.com/ 

>रच दें पुनः एक महाभारत

>रच दें पुनः धर्म युद्ध
²Éपर का महाभारत अधिकार खो देने वाले राजकुमारों के द्वारा किये गये संघर्ष की कहानी है। उस युग में धर्म ऊंघ रहा था। आज जब कलि का प्रथम चरण है। धर्म पहली नींद सोया हुआ है। विग्रहवान धर्म राम बन्दी हैं। राजसत्ता ने अखिल ब्रह्माण्ड नायक कोटि कॊटि विश्व के प्रभु राम पर कब्जा कर लिया है। न्याय तथा दुष्ट दलन के एकमेव भरोसा राम स्वयं न्याय के लिये आस लगाये बैठॆ हैं। अधर्म और अन्याय के नाश के लिये प्रकट हुये भगवान स्वय़ं न्याय के लिये अपलक आस लगाये बैठे हैं। दुष्ट दलन, के लिये अवतरित प्रभु , अशरणशरणदाता करुणामूर्ति स्वयं शरण की तलाश कर रहे हैं। इससे अधिक दुःखदायी कोई बात नहीं हो सकती है यही भारत में नये महाभारत की परिस्थिति है।
न्यायालय का निर्णय आने वाला है। कोटि कॊटि हिन्दु जन की अविचल श्रद्धा के केन्द्र राम जन्मभूमि पर मालिकाना हक का फैसला आने वाला है, यह एक ऐसा मुकदमा है जिसमें स्वयं राम वादी है। न्याय के स्रोत, विग्रहवान धर्म को भी अदालत जाना पडा है। यह कोई खराब बात नहीं है न्याय की तुला पर सब समान है इसका इससे श्रेष्ठ उदाहरण भी नहीं हो सकता। पर प्रश्न यह है कि क्या राम को न्याय मिलेगा। क्या अशरण-शरण, त्रैलोक्य नायक सर्वदुःखभंजक असुर-दलदलन-तत्पर मर्यादा पुरुषोत्तम को शरण मिलेगी।
राम को राम का ही न्याय चाहिये। रामराज्य का न्याय चाहिये। सुकरात को मिले पश्चिमी लोकतन्त्रवादी न्यायालय का न्याय नहीं। तर्क से ,जिरह से , युक्ति से और अभियुक्ति से न्याय नहीं निर्णय मिलता है। ध्यान रहे निर्णय न्याय हो यह जरूरी नहीं है। व्यक्ति न्याय तभी दे सकता है जब वह व्यक्ति की परिधि से उपर उठ कर स्वयं विग्रहवान न्याय बन जाता है, न्यायमूर्ति हो जाता है। इसीलिये राम को विग्रहवान धर्म कह गया है वे सब के साथ न्याय करते हैं। कैकेयी, ताडका, सूपर्णखा , मारिच खर-दुषण त्रिसिरा सहित सभी असुरो साथ तो करते ही हैं, कुत्ते और गिलहरी को भी न्याय देते हैं। पर जब स्वयं न्यायमूर्ति, धर्मविग्रह न्यायालय में हो तो उसे न्याय कौन देगा। यह प्रश्न विकट है सकल विश्व के जन्म मरण के समय और स्थान एवं स्वरूपका निश्चय करने वाले प्रभु भी अपनी इस मायिक लीला के विस्तार के चक्कर में फंस गये हैं। उनकी ही रचना उनके स्वरुप और स्थान को संशययुक्त कर रही है।
यही धर्म के क्षरण का काल खण्ड है। जब स्वयं धर्म ही प्रश्नों के दायरे में है। ज्योतिपुंज को दीपक की रोशनी में देखने का प्रयास हो रहा है। इससे अधिक कठिन दिन क्या होगा कि ईश्वर से उसके होने का प्रमाण मांगा जाय। अतः इस विकट स्थिति में जन जन के प्राण धर्म के विग्रह राष्ट्र के आराध्य राम को न्याय मिले, ज्योतिपुंज से काले बादल छंटे धर्मोष्मा से धरती उष्म धर्मा हो, प्रशीतित न्याय प्रवाहित हो, इसके लिये प्रिय अप्रिय किसी को भी धर्मार्थ दण्डित करने का साहस हर हृदय में जगाना होगा।
न्याय कभी भी मात्र याचना से नहीं मिलता है, याचना से तो मात्र निर्णय मिलता है। पराक्रम न्याय की कसौटी है। अतः समाज को अपना पराक्रम दिखाना होगा। फिर एक बार हूंकार भरनी होगी। राम के देश में राम जन्म भूमि पर विवाद हो यह पराक्रम को चुनौती है। प्रत्येक भारतवासी की अस्मिता पर उठा प्रश्न है।
यही अवसर है अपनी अस्मिता की पहचान को स्थायी करने का। आइये अनादि इतिहास से चल रही धर्म रक्षण की अपनी गौरव गाथा को एक बार पुनः दुहरायें, नये शब्दों में नयी भाषा में अपने राममय इतिहास का पुनर्लेखन करॆं।

>संस्‍कृतलेखनप्रशिक्षणकक्ष्‍या – प्रथमो अभ्‍यास:

>

प्रिय मित्रों

जैसा कि मैने आप सब से वादा किया था संस्‍कृत में लिखने का प्रशिक्षण प्रारम्‍भ करने का
तो आपके समक्ष प्रस्‍तुत कर रहा हूँ इस कक्ष्‍या का प्रथम संस्‍करण ।
इस पाठ्यक्रम को पूरी मेहनत से और इस तरीके से बनाया गया है जिससे आप संस्‍कृत लेखन में शीघ्र ही सफल हो सकें ।
मेरा दावा है कि इसके पूरे संस्करण पढने व याद कर लेने के बाद आप बहुत ही आराम से संस्‍कृत में लिख सकेंगे और अधिकाधिक समझ भी सकेंगे ।

संस्‍कृतलेखनप्रशिक्षण्‍कक्ष्‍या – प्रथम: अभ्‍यास:


उपरोक्‍त लिंक पर बलाघात करें ।
एक बात और कहनी थी आप सब से , इस ब्‍लागजगत में कई लोग ऐसे भी हैं जो संस्‍कृत में लिखना जानते हैं । उन्हे इस ब्‍लाग पर लिखने के लिये आमन्त्रित कर रहा हूँ, इच्‍छुक लोग मुझे ईमेल करें ।
और कई सारे लोग ऐसे भी हैं जो संस्‍कृत सीखने के इच्‍छुक हैं पर इस कक्ष्‍या की जानकारी न होने के कारण लाभ नहीं उठा पा रहे हैं । इसके लिये आप लोगों से अनुरोध है कि आप अपने ब्‍लाग के साइड में संस्कृतं-भारतस्‍य जीवनम् ब्‍लाग का लोगो लगा लें जिसका कोड आप इस ब्‍लाग के साइडबार से प्राप्‍त कर सकते हैं ।

इतने सब के बाद अब थोडी कमाई की बात कर ली जाए ।
हमने अपने ब्‍लाग पर एक बैनर लगाया है, कमाई करने वाला । ये ब्‍लाग में सबसे उपर ही है, बस आपको करना ये है कि जाते जाते एक बार इस पर क्लिक कर दीजियेगा ।
इससे शायद मेरी कुछ कमाई हो जाए । और अगर आप भी कमाई करना चाहें तो इसपर रजिस्‍टर कर सकते हैं ।
अब अगर आप का कुछ घाटा भी न हो और हमारी कुछ कमाई हो जाए तो मुझे नहीं लगता आपको कोई ऐतराज होगा ।

।। धन्‍यवाद ।।

भवदीय: – आनन्‍द:

>क्या वोटिंग मशीन धोखाधड़ी के उजागर होने से कांग्रेस सरकार भयभीत है?… EVM Hacking, Hari Prasad Arrested, Vulnerable Voting Machines

>हैदराबाद के निवासी श्री हरिप्रसाद, जिन्होंने भारतीय इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों में हैकिंग कैसे की जा सकती है और वोटिंग मशीनें सुरक्षित नहीं हैं इस बारे में विस्तृत अध्ययन किया है और उसका प्रदर्शन भी किया है… को मुम्बई पुलिस ने उनके हैदराबाद स्थित निवास से गिरफ़्तार कर लिया है। पुलिस ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने EVM की चोरी की है और चोरी की EVM से ही वे एक तेलुगू चैनल पर अपना प्रदर्शन कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि श्री हरिप्रसाद VETA (Citizens for Verifiability, Transparency and Accountability in Elections), के तकनीकी सलाहकार और शोधकर्ता हैं। हरिप्रसाद ने कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और यू-ट्यूब पर बाकायदा इस बात का खुलासा किया है कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों को किसी एक खास पार्टी के पक्ष में “हैक” और “क्रैक” किया जा सकता है। हरिप्रसाद के साथ तकनीकी टीम में अमेरिकी विश्वविद्यालय के दो प्रोफ़ेसर और “एथिकल हैकर” शामिल हैं तथा इस बारे में चुनाव विशेषज्ञ (Safologist) श्री राव ने एक पूरी पुस्तक लिखी है (यहाँ देखें…)। इन खुलासों के बाद लगता है कि कांग्रेस सरकार जो कि युवराज की ताजपोशी की तैयारियों में लगी है, घबरा गई है… और उसने समस्या का सही और उचित निराकरण करने की बजाय एक निरीह तकनीकी व्यक्ति को डराने के लिये उसे चोरी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है।

मामले की शुरुआत तब हुई, जब तेलुगू चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान जब एक दर्शक ने उनके द्वारा प्रयोग करके दिखाई जा रही मशीन की वैधता पर सवाल किया तब उन्होंने उस मशीन का सीरियल नम्बर बता दिया। अब तक पिछले कुछ चुनावों में देश भर में लगभग 100 वोटिंग मशीनें चोरी हो चुकी हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने कभी इतनी फ़ुर्ती से काम नहीं किया जितना हरिप्रसाद के मामले में किया। चुनाव आयोग ने तत्काल मुम्बई सम्पर्क करके उस सीरियल नम्बर की मशीन के बारे में पूछताछ की और पाया कि यह मशीन चोरी गई मशीनों में से एक है, तत्काल आंध्रप्रदेश पुलिस के सहयोग से मुम्बई पुलिस ने हरिप्रसाद को EVM चोरी के आरोप में उनके घर से उठा लिया। चुनाव आयोग सन् 2008 से ही हरिप्रसाद से खुन्नस खाये बैठा है, जब उन्होंने EVM के फ़ुलप्रूफ़ न होने तथा उसमे छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की बातें सार्वजनिक रुप से प्रयोग करके दिखाना शुरु किया।

1) चुनाव आयोग ने पहले तो लगातार इस बात से इंकार किया कि ऐसा कुछ हो भी सकता है

2) फ़िर जब हरिप्रसाद की मुहिम आगे बढ़ी तो आयोग ने कहा कि हरिप्रसाद जो हैकिंग के करतब दिखा रहे हैं वह मशीनें विदेशी हैं

3) हरिप्रसाद ने चुनाव आयोग को चैलेंज किया कि उन्हें भारत की वोटिंग मशीनें उपलब्ध करवाई जायें तो वे उसमें भी गड़बड़ी करके दिखा सकते हैं

4) चुनाव आयोग ने भारतीय ब्यूरोक्रेसी का अनुपम उदाहरण देते हुए उनसे कहा कि वोटिंग मशीनें उन्हें नहीं दी जा सकती, क्योंकि वह गोपनीयता का उल्लंघन है, और (बिना किसी विशेषज्ञ समिति के) घोषणा की, कि चुनाव आयोग को भरोसा है कि भारतीय वोटिंग मशीनें पूरी तरह सुरक्षित हैं

5) और आज जब हरिप्रसाद ने किसी बेनामी सूत्रों के हवाले से एक भारतीय वोटिंग मशीन प्राप्त करके उसका भी सफ़लतापूर्वक हैकिंग कर दिखाया है तो चुनाव आयोग ने उन्हें मशीन चोरी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है (ये तो वही बात हुई कि भ्रष्टाचार उजागर करने वाले किसी स्टिंग ऑपरेशन के लिये, उस पत्रकार को ही जेल में ठूंस दिया जाये, जिसने उसे उजागर किया)।

हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी चुनाव आयोग के उपायुक्त अशोक शुक्ला और EVM की गड़बड़ी जाँचने के लिये बनी समिति के चेयरमैन पीवी इन्द्रसेन के आश्वासन के बावजूद हुई। यह दोनों सज्जन वॉशिंगटन में आयोजित EVM टेक्नोलॉजी और इसकी विश्वसनीयता पर आधारित सेमिनार में 9 अगस्त को उपस्थित थे, जहाँ श्री हरिप्रसाद के साथ प्रोफ़ेसर एलेक्स हाल्डरमैन भी थे और उस सेमिनार में वोटिंग मशीनों की हैकिंग के प्रदर्शन के बाद इन्होंने कहा था कि वे इस बात की जाँच करवायेंगे कि इन मशीनों में क्या गड़बड़ी है, लेकिन इस आश्वासन के बावजूद हरिप्रसाद को गिरफ़्तार कर लिया गया। इस सेमिनार में हारवर्ड, प्रिंसटन, स्टेनफ़ोर्ड विश्वविद्यालयों के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ ही माइक्रोसॉफ़्ट के अधिकारी भी मौजूद थे, और लगभग सभी इस बात पर सहमत थे कि इन मशीनों में गड़बड़ी और धोखाधड़ी की जा सकती है। (यहाँ देखें…) और (यहाँ भी देखें…)
(चित्र में हरिप्रसाद, एलेक्स हाल्डरमैन और रॉप गोन्ग्रिप…) (चित्र सौजन्य – गूगल)

हैदराबाद से मुम्बई ले जाये जाते समय श्री हरिप्रसाद ने अपने मोबाइल से जो संदेश दिया वह यह है –

श्री हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी के समय का वीडियो…

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा है कि – “मैं यह अपने मोबाइल से लिख रहा हूं, पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार किया है और पुलिस पर भारी ऊपरी दबाव है। हालांकि नये मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस पूरे मामले को देखने का आश्वासन दिया है, लेकिन फ़िर भी मैं उस व्यक्ति का नाम ज़ाहिर नहीं कर सकता जिसने पूरे विश्वास से मुझे EVM मशीन सौंपी थी। मुझे अपने काम से पूरी सन्तुष्टि है और विश्वास है कि यह देशहित में है, मैं अपने देश से प्यार करता हूं और लोकतन्त्र को मजबूत करने के लिये जो भी किया जा सकता है, वह किया जाना चाहिये…”

डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी ने खुलेआम सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 2009 के आम चुनाव में विदेशी हैकर्स को भारी पैसा देकर अनुबन्धित किया, जो दिल्ली के पाँच सितारा होटलों में बड़े-बड़े तकनीकी उपकरणों के साथ ठहरे थे, और इसकी गहन जाँच होनी चाहिये…। उल्लेखनीय है कि जब पुलिस ने हरिप्रसाद को गिरफ़्तार किया उस समय न तो उन्हें आरोप बताये गये और न ही कोई केस दर्ज किया गया। श्री हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी 21 अगस्त को हुई थी और मैंने किसी बड़े मीडिया समूह या चैनलों पर इस खबर को प्रमुखता से नहीं देखा, आपने देखा हो तो बतायें। आखिर मीडिया सरकार से इतना क्यों डरता है? यह डर है या कुछ और? तथा ऐसे में एक आम आदमी जो कुशासन, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से लड़ने की कोशिश कर रहा हो, क्या उसकी हिम्मत नहीं टूटेगी? यह बात जरूर है कि हरिप्रसाद ने जिस अज्ञात व्यक्ति से सरकारी वोटिंग मशीन प्राप्त की है, वह एक अपराध की श्रेणी में आता है, क्योंकि वह निश्चित रुप से गोपनीयता कानून का उल्लंघन है, लेकिन चूंकि हरिप्रसाद की मंशा सच्ची है और वह लोकतन्त्र की मजबूती के पक्ष में है तो इसे माफ़ किया जा सकता है। एक बड़ा घोटाला उजागर करने के लिये यदि हरिप्रसाद ने छोटा-मोटा गुनाह किया भी है तो उसे नज़रअंदाज़ करके असली समस्या की तरफ़ देखना चाहिये, लेकिन सरकार “बाल की खाल” और खुन्नस निकालने की तर्ज़ पर काम कर रही है, और इससे शक और मजबूत हो जाता है। नीचे जो चित्र है, उसमें देखिये EVM एक सरकारी जीप में कैसे बिना किसी सुरक्षाकर्मी के रखी हुई हैं और इसे आसानी से कोई भी चुरा सकता है… लेकिन सरकार हरिप्रसाद जी के पीछे पड़ गई है…

जब चुनाव आयोग कह रहा है कि वह कुछ भी छिपाना नहीं चाहता, तब सरकार को हरिप्रसाद, हैकर्स और अन्य सॉफ़्टवेयर तकनीकी लोगों को एक साथ बैठाकर संशय के बादल दूर करना चाहिये, या किसी बेगुनाह शोधकर्ता को इस प्रकार परेशान करना चाहिये? आखिर चुनाव आयोग ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है? इन मशीनों को हरिप्रसाद ने सफ़लतापूर्वक चन्द्रबाबू नायडू, लालकृष्ण आडवाणी, ममता बनर्जी आदि नेताओं के सामने भी हैक करके दिखाया है, फ़िर भी विपक्ष की चुप्पी संदेह पैदा करने वाली है, कहीं विपक्षी नेता “कभी तो अपनी भी जुगाड़ लगेगी…” के चक्कर में चुप्पी साधे हुए हैं, यह भी हो सकता है कि उनकी भी ऐसी “जुगाड़” कुछ राज्यों के चुनाव में पहले से लग चुकी है? लेकिन लोकतन्त्र पर मंडराते खतरे का क्या? आम जनता जो वोटिंग के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त करती है उसका क्या? पिछले 1 साल से जो तटस्थ गैर-राजनैतिक लोग वोटिंग मशीनों में हेराफ़ेरी और धोखाधड़ी की बात को सिरे से खारिज करते आ रहे थे, अब वे भी सोच में पड़ गये हैं।

सन्दर्भ –
http://www.thestatesman.net/index.php?id=338823&option=com_content&catid=35

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>कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये है

>अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगने के लिये है
स्व. मुकेश जी को पुण्य तिथी पर हार्दिक श्रद्धान्जली। आज मैं आपको मुकेशजी की गाई एक नायाब गैर फिल्मी गज़ल सुना रहा हूँ। इस गज़ल को लिखा है जानिंसार अख्तर ने और संगीत दिया है खैयाम साहब ने।
आईये सुनते हैं।
http://www.divshare.com/flash/playlist?myId=12388612-c94

अशआर मेरे यूं तो ज़माने के लिये है
कुछ शेर फ़कत उनको सुनने के लिये है

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये है

आँखो में जो भर लोगे तो काँटो से चुभेंगे
ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिये है

देखुं जो तेरे हाथों को लगता है तेरे हाथ
मन्दिर में फ़कत दीप जलने के लिये है

सोचो तो बड़ी चीज़ है तहज़ीब बदन की
वर्ना तो बदन आग बुझाने के लिये है

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>एकतंत्र के रास्ते लोकतंत्र- 8 / कराधान

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8.1              साठ हजार से दो लाख रूपये तक की वार्षिक आय पर क्रमशः 1 से 15 प्रतिशत का व्यक्तिगत आयकर लिया जायेगा (जैसे- साठ हजार पर 1 प्रतिशत, सत्तर हजार पर 2 प्रतिशत, अस्सी हजार पर 3 प्रतिशत……. इसी प्रकार); जबकि दो लाख रूपये से अधिक की वार्षिक आय पर 15 प्रतिशत का आयकर स्थिर कर दिया जायेगा.
8.2              इसी प्रकार, छ्ह लाख से बीस लाख रूपये तक के वार्षिक लाभ पर क्रमशः 1 से 15 प्रतिशत का कम्पनी/निगम कर लिया जायेगा और बीस लाख रूपये से अधिक के वार्षिक लाभ पर 15 प्रतिशत का कम्पनी/निगम कर स्थिर कर दिया जायेगा.
8.3              शेयरों की खरीद-बिक्री पर 0.25 प्रतिशत, तथा कम्पनियों के टर्नओवर पर 0.001 प्रतिशत के- दो नये कर लगाये जायेंगे.
8.4              एक करोड़ और इससे अधिक की चल-अचल सम्पत्ति पर 1 प्रतिशत पँचवार्षिक (यानि पाँच वर्षों में एक बार) सम्पत्ति कर लिया जायेगा.
8.5              जोतों के उपजाऊपन के आधार पर 1 से 5 रुपये प्रति एकड़ की दर से वार्षिक भू-लगान निर्धारित किया जायेगा और एक एकड़ से छोटी जोत को लगान मुक्त रखा जायेगा. (कृषि भूमि के वर्गीकरण आदि का जिक्र कृषि के अन्तर्गत किया जा रहा है.)
8.6              छ्ह एकड़ से बड़ी जोत को सम्पत्तिकर के दायरे में तथा इससे होने वाली कृषि आय को आयकर के दायरे में लाया जायेगा.
8.7              आयकर, सम्पत्तिकर तथा भू-लगान के मामलों में एक ओर संयुक्त परिवारों को छूट दी जायेगी, तो दूसरी तरफ सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, कल्याणकारी संस्थाओं, ट्रस्टों इत्यादि को इनके दायरे मे लाया जायेगा.
8.8              आयकर, कम्पनी/निगम कर तथा सम्पत्तिकर के रुप में सरकार को (बिना किसी वंचना के) सर्वाधिक कर देने वाले एक सौ एक व्यक्ति/कम्पनी/निगमों को कुबेरश्री की उपाधि प्रदान की जायेगी, इनकी बाकायदे एक संस्था बनायी जायेगी, जिससे जरुरत पड़ने पर सरकार आर्थिक मदद भी लेगी; मगर साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय को यह अधिकार दिया जायेगा कि जैसे ही वह यह महसूस करे कि यह संस्था सरकार की नीतियों को प्रभावित कर रही है- वह इस संस्था को भंग कर दे.
8.9              प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाईयों पर, प्रदूषण फैलाने वाले उपकरणों के निर्माण पर और प्रदूषण फैलाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर प्रदूषण शुल्क लगाया जायेगा. (हालाँकि उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण तथा प्रदूषण फैलाने वाली वस्तुओं के बदले प्रकृतिमित्र विकल्पों की व्यवस्था का जिक्र आगे किया जा रहा है.)
राष्ट्रीय बैंक
8.10          राष्ट्रीय सरकार एक राष्ट्रीय बैंक का गठन करेगी, जिसकी विशेषता निम्नलिखित होगी-
            क) यह मुनाफे के स्थान पर देश के सामाजार्थिक उत्थान को प्राथमिकता देगी.
ख) इसकी छोटी शाखाएँ प्रत्येक पँचायत और वार्ड में; मँझली शाखाएँ प्रखण्ड, नगर और उपमहानगर में, और बड़ी शाखाएँ जिला और महानगर में होंगी. (अध्याय 14 द्रष्टव्य)
ग) इसके प्रशासनिक कार्यालय राज्य, अँचल और राष्ट्रीय स्तर पर होंगे.
घ) यहाँ जमा राशि पर निम्न वार्षिक दर से ब्याज दिया जायेगा: 1 हजार से कम पर 15 प्रतिशत, 10 हजार से कम पर 12 प्रतिशत, 1 लाख से कम पर 9 प्रतिशत, 10 लाख से कम पर 6 प्रतिशत, 1 करोड़ से कम पर 3 प्रतिशत और 10 करोड़ से कम पर 1 प्रतिशत.
ङ) 10 करोड़ से अधिक की जमा राशि पर कोई ब्याज नहीं दिया जायेगा, जबकि 100 करोड़ से अधिक की जमा राशि पर ब्याज देने के बजाय ब्याज लेने पर विचार किया जायेगा.
च) यहाँ से निम्न वार्षिक ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराये जायेंगे- 10 हजार से कम राशि पर 1 प्रतिशत (छोटी शाखाओं द्वारा), 1 लाख से कम राशि पर 3 प्रतिशत (मँझली शाखाओं द्वारा), 10 लाख से कम राशि पर 6 प्रतिशत (बड़ी शाखाओं द्वारा), 1 करोड़ से कम राशि पर 9 प्रतिशत (राज्य प्रशासनिक कार्यालय द्वारा), 10 करोड़ से कम राशि पर 12 प्रतिशत (अँचल प्रशासनिक कार्यालय द्वारा) और इससे बड़ी राशि पर 15 प्रतिशत (राष्ट्रीय प्रशासनिक कार्यालय द्वारा).
छ) 1 हजार से कम के ऋण पर कोई ब्याज नहीं लिया जायेगा; या, ग्राहक अपने खाते से जाने-अनजाने में 999/- तक की राशि निकाल कर बाद में वापस जमा कर सकेंगे, जिसपर कोई शुल्क नहीं लगेगा.      
ज) इस बैंक में अलग से खाता संख्या नहीं दी जायेगी, बल्कि नागरिक पहचानपत्र (अध्याय: 44) की संख्या को ही खाता संख्या माना जायेगा.
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क्या वोटिंग मशीन धोखाधड़ी के उजागर होने से कांग्रेस सरकार भयभीत है?… EVM Hacking, Hari Prasad Arrested, Vulnerable Voting Machines

हैदराबाद के निवासी श्री हरिप्रसाद, जिन्होंने भारतीय इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों में हैकिंग कैसे की जा सकती है और वोटिंग मशीनें सुरक्षित नहीं हैं इस बारे में विस्तृत अध्ययन किया है और उसका प्रदर्शन भी किया है… को मुम्बई पुलिस ने उनके हैदराबाद स्थित निवास से गिरफ़्तार कर लिया है। पुलिस ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने EVM की चोरी की है और चोरी की EVM से ही वे एक तेलुगू चैनल पर अपना प्रदर्शन कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि श्री हरिप्रसाद VETA (Citizens for Verifiability, Transparency and Accountability in Elections), के तकनीकी सलाहकार और शोधकर्ता हैं। हरिप्रसाद ने कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और यू-ट्यूब पर बाकायदा इस बात का खुलासा किया है कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों को किसी एक खास पार्टी के पक्ष में “हैक” और “क्रैक” किया जा सकता है। हरिप्रसाद के साथ तकनीकी टीम में अमेरिकी विश्वविद्यालय के दो प्रोफ़ेसर और “एथिकल हैकर” शामिल हैं तथा इस बारे में चुनाव विशेषज्ञ (Safologist) श्री राव ने एक पूरी पुस्तक लिखी है (यहाँ देखें…)। इन खुलासों के बाद लगता है कि कांग्रेस सरकार जो कि युवराज की ताजपोशी की तैयारियों में लगी है, घबरा गई है… और उसने समस्या का सही और उचित निराकरण करने की बजाय एक निरीह तकनीकी व्यक्ति को डराने के लिये उसे चोरी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है।

मामले की शुरुआत तब हुई, जब तेलुगू चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान जब एक दर्शक ने उनके द्वारा प्रयोग करके दिखाई जा रही मशीन की वैधता पर सवाल किया तब उन्होंने उस मशीन का सीरियल नम्बर बता दिया। अब तक पिछले कुछ चुनावों में देश भर में लगभग 100 वोटिंग मशीनें चोरी हो चुकी हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने कभी इतनी फ़ुर्ती से काम नहीं किया जितना हरिप्रसाद के मामले में किया। चुनाव आयोग ने तत्काल मुम्बई सम्पर्क करके उस सीरियल नम्बर की मशीन के बारे में पूछताछ की और पाया कि यह मशीन चोरी गई मशीनों में से एक है, तत्काल आंध्रप्रदेश पुलिस के सहयोग से मुम्बई पुलिस ने हरिप्रसाद को EVM चोरी के आरोप में उनके घर से उठा लिया। चुनाव आयोग सन् 2008 से ही हरिप्रसाद से खुन्नस खाये बैठा है, जब उन्होंने EVM के फ़ुलप्रूफ़ न होने तथा उसमे छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की बातें सार्वजनिक रुप से प्रयोग करके दिखाना शुरु किया।

1) चुनाव आयोग ने पहले तो लगातार इस बात से इंकार किया कि ऐसा कुछ हो भी सकता है

2) फ़िर जब हरिप्रसाद की मुहिम आगे बढ़ी तो आयोग ने कहा कि हरिप्रसाद जो हैकिंग के करतब दिखा रहे हैं वह मशीनें विदेशी हैं

3) हरिप्रसाद ने चुनाव आयोग को चैलेंज किया कि उन्हें भारत की वोटिंग मशीनें उपलब्ध करवाई जायें तो वे उसमें भी गड़बड़ी करके दिखा सकते हैं

4) चुनाव आयोग ने भारतीय ब्यूरोक्रेसी का अनुपम उदाहरण देते हुए उनसे कहा कि वोटिंग मशीनें उन्हें नहीं दी जा सकती, क्योंकि वह गोपनीयता का उल्लंघन है, और (बिना किसी विशेषज्ञ समिति के) घोषणा की, कि चुनाव आयोग को भरोसा है कि भारतीय वोटिंग मशीनें पूरी तरह सुरक्षित हैं

5) और आज जब हरिप्रसाद ने किसी बेनामी सूत्रों के हवाले से एक भारतीय वोटिंग मशीन प्राप्त करके उसका भी सफ़लतापूर्वक हैकिंग कर दिखाया है तो चुनाव आयोग ने उन्हें मशीन चोरी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है (ये तो वही बात हुई कि भ्रष्टाचार उजागर करने वाले किसी स्टिंग ऑपरेशन के लिये, उस पत्रकार को ही जेल में ठूंस दिया जाये, जिसने उसे उजागर किया)।

हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी चुनाव आयोग के उपायुक्त अशोक शुक्ला और EVM की गड़बड़ी जाँचने के लिये बनी समिति के चेयरमैन पीवी इन्द्रसेन के आश्वासन के बावजूद हुई। यह दोनों सज्जन वॉशिंगटन में आयोजित EVM टेक्नोलॉजी और इसकी विश्वसनीयता पर आधारित सेमिनार में 9 अगस्त को उपस्थित थे, जहाँ श्री हरिप्रसाद के साथ प्रोफ़ेसर एलेक्स हाल्डरमैन भी थे और उस सेमिनार में वोटिंग मशीनों की हैकिंग के प्रदर्शन के बाद इन्होंने कहा था कि वे इस बात की जाँच करवायेंगे कि इन मशीनों में क्या गड़बड़ी है, लेकिन इस आश्वासन के बावजूद हरिप्रसाद को गिरफ़्तार कर लिया गया। इस सेमिनार में हारवर्ड, प्रिंसटन, स्टेनफ़ोर्ड विश्वविद्यालयों के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ ही माइक्रोसॉफ़्ट के अधिकारी भी मौजूद थे, और लगभग सभी इस बात पर सहमत थे कि इन मशीनों में गड़बड़ी और धोखाधड़ी की जा सकती है। (यहाँ देखें…) और (यहाँ भी देखें…)
(चित्र में हरिप्रसाद, एलेक्स हाल्डरमैन और रॉप गोन्ग्रिप…) (चित्र सौजन्य – गूगल)

हैदराबाद से मुम्बई ले जाये जाते समय श्री हरिप्रसाद ने अपने मोबाइल से जो संदेश दिया वह यह है –

श्री हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी के समय का वीडियो…

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा है कि – “मैं यह अपने मोबाइल से लिख रहा हूं, पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार किया है और पुलिस पर भारी ऊपरी दबाव है। हालांकि नये मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस पूरे मामले को देखने का आश्वासन दिया है, लेकिन फ़िर भी मैं उस व्यक्ति का नाम ज़ाहिर नहीं कर सकता जिसने पूरे विश्वास से मुझे EVM मशीन सौंपी थी। मुझे अपने काम से पूरी सन्तुष्टि है और विश्वास है कि यह देशहित में है, मैं अपने देश से प्यार करता हूं और लोकतन्त्र को मजबूत करने के लिये जो भी किया जा सकता है, वह किया जाना चाहिये…”

डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी ने खुलेआम सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 2009 के आम चुनाव में विदेशी हैकर्स को भारी पैसा देकर अनुबन्धित किया, जो दिल्ली के पाँच सितारा होटलों में बड़े-बड़े तकनीकी उपकरणों के साथ ठहरे थे, और इसकी गहन जाँच होनी चाहिये…। उल्लेखनीय है कि जब पुलिस ने हरिप्रसाद को गिरफ़्तार किया उस समय न तो उन्हें आरोप बताये गये और न ही कोई केस दर्ज किया गया। श्री हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी 21 अगस्त को हुई थी और मैंने किसी बड़े मीडिया समूह या चैनलों पर इस खबर को प्रमुखता से नहीं देखा, आपने देखा हो तो बतायें। आखिर मीडिया सरकार से इतना क्यों डरता है? यह डर है या कुछ और? तथा ऐसे में एक आम आदमी जो कुशासन, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से लड़ने की कोशिश कर रहा हो, क्या उसकी हिम्मत नहीं टूटेगी? यह बात जरूर है कि हरिप्रसाद ने जिस अज्ञात व्यक्ति से सरकारी वोटिंग मशीन प्राप्त की है, वह एक अपराध की श्रेणी में आता है, क्योंकि वह निश्चित रुप से गोपनीयता कानून का उल्लंघन है, लेकिन चूंकि हरिप्रसाद की मंशा सच्ची है और वह लोकतन्त्र की मजबूती के पक्ष में है तो इसे माफ़ किया जा सकता है। एक बड़ा घोटाला उजागर करने के लिये यदि हरिप्रसाद ने छोटा-मोटा गुनाह किया भी है तो उसे नज़रअंदाज़ करके असली समस्या की तरफ़ देखना चाहिये, लेकिन सरकार “बाल की खाल” और खुन्नस निकालने की तर्ज़ पर काम कर रही है, और इससे शक और मजबूत हो जाता है। नीचे जो चित्र है, उसमें देखिये EVM एक सरकारी जीप में कैसे बिना किसी सुरक्षाकर्मी के रखी हुई हैं और इसे आसानी से कोई भी चुरा सकता है… लेकिन सरकार हरिप्रसाद जी के पीछे पड़ गई है…

जब चुनाव आयोग कह रहा है कि वह कुछ भी छिपाना नहीं चाहता, तब सरकार को हरिप्रसाद, हैकर्स और अन्य सॉफ़्टवेयर तकनीकी लोगों को एक साथ बैठाकर संशय के बादल दूर करना चाहिये, या किसी बेगुनाह शोधकर्ता को इस प्रकार परेशान करना चाहिये? आखिर चुनाव आयोग ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है? इन मशीनों को हरिप्रसाद ने सफ़लतापूर्वक चन्द्रबाबू नायडू, लालकृष्ण आडवाणी, ममता बनर्जी आदि नेताओं के सामने भी हैक करके दिखाया है, फ़िर भी विपक्ष की चुप्पी संदेह पैदा करने वाली है, कहीं विपक्षी नेता “कभी तो अपनी भी जुगाड़ लगेगी…” के चक्कर में चुप्पी साधे हुए हैं, यह भी हो सकता है कि उनकी भी ऐसी “जुगाड़” कुछ राज्यों के चुनाव में पहले से लग चुकी है? लेकिन लोकतन्त्र पर मंडराते खतरे का क्या? आम जनता जो वोटिंग के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त करती है उसका क्या? पिछले 1 साल से जो तटस्थ गैर-राजनैतिक लोग वोटिंग मशीनों में हेराफ़ेरी और धोखाधड़ी की बात को सिरे से खारिज करते आ रहे थे, अब वे भी सोच में पड़ गये हैं।

सन्दर्भ –
http://www.thestatesman.net/index.php?id=338823&option=com_content&catid=35

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>एकतंत्र के रास्ते लोकतंत्र- 7 / काला धन

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7.1              चरणबद्ध तरीके से देश के प्रत्येक नागरिक (राष्ट्रपति महोदय से लेकर किसी आश्रम के महन्त तक) से उनकी आय, आय के स्रोत तथा उनकी व्यक्तिगत चल-अचल सम्पत्ति की घोषणा करवाई जायेगी और इस दौरान पायी गयी गैर-आनुपातिक तथा बेनामी सम्पत्तियों को जब्त किया जायेगा. (जब्त धन का उपयोग देश का कर्ज चुकाने में किया जायेगा- 20.11)
7.2              सरकारी खजाने की लूट से सम्बन्धित नये-पुराने सभी मामलों को विशेष अदालतों के माध्यम से तीव्रता से निपटाया जायेगा और दोषियों की सम्पत्ति जब्त/नीलाम कर लूटी/बर्बाद की गयी राशि की पाई-पाई वसूली जायेगी.
7.3              (उपरोक्त मामलों में) सुनवाई शुरु होते ही दोष स्वीकार कर लेने वालों से सिर्फ राशि वसूली जायेगी- जेल की सजा उन्हें नहीं दी जायेगी.
7.4              बकाया आयकर की सख्ती से वसूली की जायेगी; जबकि पुराने ऋण या बिजली बिल- जैसे मामलों में निम्न आयवर्ग से 5 प्रतिशत, मध्यम आयवर्ग से 50 प्रतिशत और उच्च आयवर्ग से शत-प्रतिशत वसूली कर मामलों को निपटाया जायेगा. (आयवर्ग: क्रमांक 9.1)
7.5              नये किस्म के नोट छपवा कर प्रचलित नोटों को रद्द किया जायेगा और कम-से-कम समय के अन्दर इन नोटों की अदला-बदली की जायेगी.
7.6              अदला-बदली के दौरान एक हजार रुपये से कम की राशि को डाकघर की शाखाओं में तथा पाँच हजार रुपये से कम की राशि को बैंकों की शाखाओं में हाथों-हाथ बदला जायेगा.
7.7              पाँच हजार रुपये तथा इससे बड़ी राशि को पास बुक के माध्यम से बदला जायेगा- यानि, पुराने नोटों को जमा करके नये नोटों का भुगतान लेना पड़ेगा.
7.8              पचास हजार रुपये से अधिक की राशि को बदलने के लिये आयकर विभाग की मंजूरी अनिवार्य होगी.
7.9              भविष्य में प्रत्येक बीस वर्ष में एक बार विमुद्रीकरण की इस प्रक्रिया को दुहराने की व्यवस्था की जायेगी.
7.10          बैंक और बैंक- जैसी संस्थाओं में लॉकर की व्यवस्था समाप्त की जायेगी, या फिर, इसकी गोपनीयता समाप्त कर दी जायेगी.
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सम्पूर्ण घोषणापत्र के लिए : http://khushhalbharat.blogspot.com/  

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