>काश हम सब ऐसा ही सोचें तो हमारे देश कि बहुत सी समस्याओं का समाधान तो सिर्फ इस एक सोच से ही हो सकता है

>नमस्कार मित्रों ,सबसे पहले तो मैं आप सबसे क्षमां माँगना चाहूँगा ” ब्लॉग संसद ” को अधिक समय ना देने के कारण लेकिन दोस्तों क्या करूँ ,इस समय मैं अत्यंत व्यस्त हूँ और आगे भी ये व्यस्तता काफी बढ़ने वाली है पर कोशिश यही रहती है और रहेगी भी कि अपना जितना भी योगदान हो सके दे सकूँ

मित्रों हम सब अपने-२ ब्लोग्स पर अपनी-२ पोस्ट्स डालते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है की किसी पोस्ट पर कुछ ऐसे कमेंट्स आते हैं जो की हमारा उस पोस्ट से ज्यादा ध्यान आकर्षित करते हैं

ऐसा ही एक कमेन्ट मुझे दिखा सलीम खान जी के ब्लॉग स्वच्छ सन्देश की एक पोस्ट पर जिस पर की एक सज्जन जिनका की ब्लॉग नाम ” The Broken Heart ” है ने किया ,मुझे वो कमेन्ट बेहद पसंद आया और उसने सच में मेरे दिल की बात कह दी ,मैं चाहता हूँ की आप सब भी इस पर अपने मन की बात बताएं

तो ये था उन महाशय का कमेन्ट

“Broken Heart” ने कहा…

जय हिंद: दोस्तों
आज मै पहली बार इस ब्लॉग पे आया हूँ, दोस्तों यहाँ तो हिन्दू मुसलमान की जंग चल रही है पर दोस्तों एक बात सोचो इस्लाम का उदय हुआ (c. 570 – 632) के आसपास, हिन्दुस्म आया 5500 BCE मै और मानव जीवन पृथ्वी पर 4.54 billion years से है, इन धर्मो के अस्तित्व मै आने से पहले भी मनुष्य प्रथ्वी पर था, और उसे भी किसी न किसी अल्लाह या भगवान ने ही बनाया था, तब ना तो वो हिन्दू था, न ही वो मुसलमान न ही और कोई, क्यों की ऊपर बाले ने उसे इंसान बना कर भेजा था, पर हम सब बन गए क्या सोचो …………..

दोस्तों जब बेटा पहली बार बाप के सामने दारू पी के जाता है तो बाप उसे समझाता है ये मत करो, और जब बेटा हद पार कर देता है, तो बाप बेटे के पिछवाड़े मै लात देता और बोलता है जहा मरना है वहा जा के मर, अब मै कुछ नहीं कर सकता, वैसे ही अल्लाह , भगवान , GOD,  जो भी वो है उसने बहुत कोशिश की हमें समझाने की कि हम सिर्फ इंसान है , पर हमें तो लत लग गई है , हिन्दू-मुसलमान …………….की, तो ऊपर वाला भी किसी दिन हमारे पिछवाड़े पे लात देगा और बोलेगा भाड़ मै जाओ सब के सब तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता.

अब जरा देश की बात भी कर ले साहब, तो इस ब्लोग और उसके कमेन्ट को पड़कर बड़ा ही दर्द हुआ भाई, एक साहब की बड़ी जबरजस्त कमेन्ट है-
“वन्दे मातरम को ज़बरन गंवाना क्या वास्तव में सही है? अगर कुछ ऐसा करने अथवा करवाने से किसी के अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो जाये तो क्या ये वाकई सही है. मैं तो इसे साजिशन बहुसंख्यक द्वारा मुसलमानों के अस्तित्व और नीवं पर प्रहार के बराबर मानता हूँ.”

इस पे मै कहना चाहूगा की अगर वंदे मातरम बोलने से किसी मुसलमान के अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो जाएगा तो क्या अशफाकउलाँ खान मुसलमान नहीं था या टीपू सुलतान या सेराजुदौला , इन लोगों ने हिन्दुतान की आजादी के लिए जंग लड़ी है साहब, और देश के लिए वंदे  मातरम भी बोला है,

और साहब 15 अगस्त हर हिन्दुस्तानी के लिए फक्र का दिन है, ये दिन है जब हम सम्मान करते है उन शहीदों का जो देश के लिए जान दे गए, इस मात्रभूमि का अपमान करना साहब वैसा ही है जैसे आप अपनी माँ का अपमान कर रहे हो .

अलविदा दोस्तों

११ अगस्त २०१० १:२२ पूर्वाह्न

तो मित्रों ये था वो कमेन्ट जिसने मुझे प्रेरित किया इसे आप सबके साथ भी बांटने के लिए हालांकि वंदे-मातरम वाली बात पर थोड़ा सा असहमत हूँ लेकिन पूरे कमेन्ट को देखा देखा जाए तो कितनी अच्छी ,सच्ची और सही बात कह दी भाई ने कि हम सबको हिंदू या मुस्लिम बनने कि बजाये एक अच्छा इंसान बनना चाहिए क्योंकि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है , फिर सवाल उठेगा कि ऐसा करने पर हमारी पहचान क्या होगी तो मित्रों हमारी पहचान हिंदू या मुस्लिम के रूप में ना होकर एक भारतीय के रूप में होनी चाहिए

काश हम सब ऐसा ही सोचें तो हमारे देश कि बहुत सी समस्याओं का समाधान तो सिर्फ इस एक सोच से ही हो सकता है

इसी उम्मीद के साथ ( कि एक दिन ऐसा होगा ) मुझे जाने कि इजाजत दें

धन्यवाद

महक

7 Comments

  1. August 11, 2010 at 5:51 pm

    >काश कि आपकी बात लोगो को समझ आ जाए ! शुभकामनाएं !

  2. August 11, 2010 at 8:13 pm

    >महक जी,ये समन्वय और सद्भावना की बातें कोई समझने वाला नहिंब्लोगजगत में 'हमारीवाणी' की संदिग्धता की चर्चा है,और यह तो सच है कि इसके लोगो की स्क्रिप्ट से माल्वेयर आ रहा है। अतः आप शिघ्र हमारीवाणी का लोगो हटालें।ब्लोग संसद से।

  3. arvind said,

    August 12, 2010 at 9:00 am

    >शुभकामनाएं !

  4. August 12, 2010 at 10:00 am

    >महक जी ,ब्रोकन हार्ट जी के कमेन्ट में थोड़ा सुधार करना चाहूंगा ! उन्होंने कहा "तो ऊपर वाला भी किसी दिन हमारे पिछवाड़े पे लात देगा और बोलेगा भाड़ मै जाओ सब के सब तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता"..मै कहूंगा कि ऊपर वाला बहुत पहले ही पिछवाड़े पर लात मार चुका है, अब अगर संवेदन हीन और खुदगर्ज होकर उस पडी लात को अनदेखा कर दे, और बेशर्म बनके फिर से बार-बार पिछवाडा उसकी तरफ करते रहे तो ऊपर वाला भी क्या कर सकता है? 🙂

  5. August 12, 2010 at 12:14 pm

    >पी.सी.गोदियाल जी से सहमत हूँ लोग जानबूझकर जीने की मजबूरी की खुदगर्जी और झूठी तरक्की और सुखसुविधा पाने के लिए किसी भी हद तक गिरने को तैयार हैं ,इसमें एक कारण और है की सरकार में बैठे भ्रष्ट और कुकर्मी भी ऐसे माहौल पैदा कर रहें है जिससे लोगों का इन्सान बनकर जीना दूभर हो गया है इन सालों ने गरीबों की रोटी तक को लूटने जैसा जघन्य अपराध किया है …मिडिया के भ्रष्ट लोग भी इसमें आगे हैं और सरकार में बैठे लोगों को लूटने के नए-नए तरीके सिखा रहें है ..क्या करें सब जीने की मजबूरी है …? क्या यही इंसान और इन्सान की जिन्दगी है …?

  6. August 12, 2010 at 1:44 pm

    >Mahak ji….. bada achha kiya aapne. Bahut hi achhi aur sachhi baat vaali post hai ye. Vandematram ko gaane se Muslim bhaai Muslim hi rahenge.Isliye unhe ise gaane ko leker koi aitraaj nahin hona chaayiye. kai Muslim vidhano ne ise gaane ka samarthan bhi kiya hai.VANDEMATRAM GAANA BAHUSANKHYAKHON KI SAAJISH HAI- YE bilkul hi betuki baat hai. Is trah ki niradhaar baaten karne se koi faayda nahin.

  7. August 13, 2010 at 12:05 pm

    >बहुत अच्छी टिप्पणी है , जहाँ तक वन्देमातरम मुस्लिमों के द्वारा गाने या न गाने की बात है तो मैं तो केवल ये कहना चाहूँगा किइस मातृभूमि वंदना को मुसलमान को तो गाये जाने से कोई हर्ज नहीं है और गाते भी हैं , पर विशेष मुसलमानों ( इनके नेता/मुल्ला मौलवी) को हर्ज है | उन्हें (गाने वालों को ) अपने ख़त्म होने का कोई डर भी नहीं है , हो भी क्यों ? क्या पूजा-प्रार्थना की पद्दति बदल जाने से वो इस देश के नागरिक नहीं रहे क्या इस देश के पूर्वज उनके पूर्वज नहीं है , क्या रहीम ,रसखान,अशफाकउल्लाखां,मेजर अब्दुल हमीद और भी अनगिनत मुस्लिम लोगों पर ही उन्हें नाज है ? क्या इन लोगों पर हिन्दुओं को गर्व नहीं होता ? सबकुछ सही है , फिर ; गलत कहाँ है ………………………? गलत है हमारे नेताओं (हिन्दू-मुस्लिम) के कारण | जो दोनों को बराबर नहीं मानते |


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