>एकतंत्र के रास्ते लोकतंत्र / प्राक्कथन

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अपने देश में एक स्वस्थ, सबल और टिकाऊ लोकतंत्र की स्थापना के लिये कम-से-कम दस वर्षों का एकच्छत्रीय शासन (डिक्टेटरशिप) जरुरी हो गया है. आज की तारीख में भारतीय लोकतंत्र की जो स्थिति है, उसमें हम यह आशा नहीं रख सकते हैं कि वह खुद अपने ऊपर चीरा लगाकर कैन्सर की चार गाँठों- भ्रष्ट राजनेता, भ्रष्ट उच्चाधिकारी, भ्रष्ट पूँजीपति और माफिया सरगना- को निकाल बाहर कर सकेगा. लोकतंत्र को दस वर्षों के लिये बेहोश करके एकतंत्र ही यह शल्यक्रिया कर सकता है.
तो उस भावी एकच्छत्र शासक (डिक्टेटर) की ओर से यह घोषणापत्र जारी किया जा रहा है, जिसमें देश की प्रायः सभी समस्याओं के समाधान को लगभग 400 विन्दुओं/घोषणाओं में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है. एकच्छत्र शासक द्वारा जिस प्रकार के शासन-प्रशासन की बात इसमें कही गयी है, वास्तव में वही सच्चा लोकतांत्रिक शासन है!
इस विचार से सहमत या असहमत होने से पहले कृपया एक बार इस घोषणापत्र को आद्योपान्त अवश्य पढ़ें. कहते हैं कि जब बहुत-से लोग अच्छा सोचते हैं, तब कुछ अच्छा घटित होता है, इसी आशा के साथ खुशहाल, स्वावलम्बी और शक्तिशाली भारत के निर्माण का यह घोषणापत्र जनता के हाथों अर्पित है….. 

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सम्पूर्ण घोषणापत्र के लिए : http://khushhalbharat.blogspot.com/  



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