>एकतंत्र के रास्ते लोकतंत्र-1 / शासन-प्रशासन

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1.1              एकच्छत्र शासक पर अंकुश रखने तथा उसके मार्गदर्शन के लिये एक 14 सदस्यीय चाणक्य सभा गठित की जायेगी, जो यह ध्यान रखेगी कि शासन-प्रशासन संविधान के नीति निदेशक तत्वों की भावनाओं और इस घोषणापत्र के अनुरुप हो.
1.2              इस घोषणापत्र को लागू करने के अलावे कोई और महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले एकच्छत्र शासक के लिए चाणक्य सभा के कम-से-कम नौ सदस्यों की सहमति लेना अनिवार्य होगा.
1.3              चाणक्य सभा के सदस्य देश के वरिष्ठ एवं सम्मानित नागरिक होंगे और उनमें से हर एक निम्नलिखित किसी एक विषय के विशेषज्ञ होंगे- पत्रकारिता, समाजसेवा, पर्यावरण, अर्थनीति, संविधान, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, नारी सशक्तिकरण, शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, खेल-कूद, किसानी और मजदूरी.
1.4              चाणक्य सभा के सदस्यगण अपना प्रतिनिधि, उत्तराधिकारी तथा अपने सहयोगी चुनने के लिये स्वतंत्र होंगे.
1.5              पुलिस, प्रशासन, सेना तथा न्यायपालिका के दागदार छवि वाले उच्चाधिकारियों को लम्बी छुट्टी पर भेजा जायेगा; जबकि ईमानदारी के कारण प्रताड़ित होने वाले अधिकारियों को प्रशासन में महत्वपूर्ण पद प्रदान किये जायेंगे. (दागदार तथा ईमानदार छवि वाले अधिकारियों की सूची सतर्कता आयोग, मानवाधिकार आयोग और नागरिक अधिकार संगठनों से मँगवायी जायेगी. नागरिक भी ऐसे अधिकारियों की सूचना इन संस्थाओं को दे सकेंगे.)
1.6              नागरिक या नागरिक समूह पर बल प्रयोग करने से पुलिस को रोक दिया जायेगा और नागरिकों की गिरफ्तारी/हिरासत से पहले न्यायपालिका की अनुमति अनिवार्य कर दी जायेगी. (सिर्फ घोषित, संगठित, भूमिगत अपराधी तथा भारत विरोधी आतंकवादी इसके अपवाद होंगे.) (क्रमांक 3.9)
1.7              नागरिक क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को वापस बैरकों में बुला लिया जायेगा.
1.8              भारतीय संविधान में आस्था रखने वाले आतंकवादी संगठनों के खिलाफ पुलिस/सैन्य कार्रवाई स्थगित की जायेगी और संविधान के दायरे में- जहाँ तक सम्भव होगा- उनकी माँगों को मान लिया जायेगा; इसके विपरीत, भारतीय संविधान में आस्था न रखने वाले आतंकवादी संगठनों से किसी कीमत पर बातचीत या सम्झौता नहीं किया जायेगा और पकड़े जाने पर ऐसे आतंकवादियों को मृत्यु पर्यन्त काल-कोठरियों में डाल दिया जायेगा. (काल-कोठरी, जहाँ सूर्य के दर्शन नहीं होंगे.)
1.9              आग्नेयास्त्रों के लाइसेन्स निलम्बित करते हुए वैध-अवैध सभी प्रकार के आग्नेयास्त्र जमा/जब्त किये जायेंगे- हालाँकि इस दौरान गिरफ्तारी नहीं की जायेगी.
1.10          दस वर्ष बाद जो आगामी चुनाव कराने की घोषणा की जायेगी, उसमें संसदीय और विधानसभाई, दोनों चुनाव एक साथ कराये जायेंगे.
1.11          राज्य सरकरों को वेतन-भत्तों-सुविधओं तथा फिजूलखर्ची में कटौती करते हुए घाटे का बजट बनाने से रोक दिया जायेगा; मगर फिर भी, लगातार तीसरे वर्ष घाटे का बजट पेश करने वाली राज्य सरकार को बर्खास्त कर वहाँ राष्ट्रीय शासन लागू कर दिया जायेगा.
1.12          राष्ट्रीय स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिये उन्हीं युवाओं का चयन किया जायेगा, जो स्नातक होने के अलावे सामाजिक कार्यों, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा साहसिक अभियानों में भाग लेते रहे हैं. (सामाजिक कार्यों के लिये क्रमांक 21.4, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिये 43.6 तथा साहसिक अभियानों के लिये भारत भ्रमण सायकिल यात्रा का अनुभव लिया जा सकता है.)
1.13          प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ और सिर्फ प्रशासन का काम देखेंगे; अर्थात् वे प्रशासनिक विभागों के मुखिया होंगे, किसी अन्य विभाग का प्रमुख उन्हें नहीं बनाया जायेगा.

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सम्पूर्ण घोषणापत्र के लिए : http://khushhalbharat.blogspot.com/  

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