>एकतंत्र के रास्ते लोकतंत्र-3 / भ्रष्टाचार निवारण: निचले स्तर पर

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3.1              थाना स्तर पर 5-5 सतर्कता मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति की जायेगी, जो अगर चाहें, तो अपनी सहायता के लिये (क) स्थानीय गणमान्य नागरिकों को लेकर एक बारह सदस्यीय ज्यूरी तथा (ख) नौजवानों/छात्रों को लेकर एक सतर्कता बल का गठन कर सकेंगे. (ये मजिस्ट्रेट सतर्कता आयोग के अधीन रहेंगे.)
3.2              ज्यूरी, फैसला लेने में सतर्कता मजिस्ट्रेटों की मदद करेगी तथा सतर्कता बल के सदस्य अपने क्षेत्र के अन्दर से घूँसखोरी, कमीशनखोरी, जमाखोरी इत्यादि की सूचना लाकर सतर्कता अदालत में जमा करेंगे; साथ ही, आम नागरिकों को ऐसे सूचना दर्ज कराने में मदद करेंगे.
3.3              इन सतर्कता अदालतों की प्रक्रिया बहुत ही सरल होगी- यहाँ सबूतों, गवाहों, वकीलों की अनिवार्यता नहीं होगी और जरुरत पड़ने पर पाँचों मजिस्ट्रेट एक पंचायत के रुप में बैठकर सुनवाई करेंगे.
3.4              इसके सम्मनों की अवहेलना करने वालों पर अलग से जुर्माना लगाया जायेगा.
3.5              इस अदालत में पहली बार दोषी समझे गये अभियुक्तों को चेतावनी देकर छोड़ दिया जायेगा; दूसरी बार जुर्माने, और तीसरी बार दोषी पाये जाने पर जेल की सजा दी जायेगी- हालाँकि दोष की गम्भीरता को देखते हुए तथा सबूत पक्के पाये जाने पर पहली बार में ही जुर्माने या जेल की सजा दी जा सकती है.
3.6              यह अदालत जरुरी समझने पर शिकायत करने वाले को मुआवजा भी दिला सकती है.
3.7              प्राथमिकी (एफ.आई.आर.) तथा बयान दर्ज करने और पुलिस से प्राथमिकी की प्रगति जानते रहने की जिम्मेवारी भी सतर्कता मजिस्ट्रेटों के पास होगी.
3.8              सतर्कता मजिस्ट्रेट नियमित रुप से अपनी अदालत में दर्ज शिकायत व उनके निर्णय, प्राथमिकी तथा प्राथमिकी की प्रगति की जानकारी राष्ट्रीय सतर्कता आयोग के पास भेजेंगे.
3.9              किसी एक सतर्कता मजिस्ट्रेट की अनुमति, सहमति या आदेश पर ही पुलिस नागरिक या नागरिक समूह पर बल प्रयोग कर सकेगी, उन्हें गिरफ्तार कर सकेगी या हिरासत में ले सकेगी. (सिर्फ घोषित, संगठित, भूमिगत अपराधी तथा भारत विरोधी आतंकवादी इसके अपवाद होंगे. जाहिर है, आपात्कालीन परिस्थितियों में पुलिस मोबाइल फोन पर भी उक्त अनुमति, सहमति या आदेश प्राप्त कर सकती है.)
3.10          सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों को किसी भी तरह का प्रलोभन देने वाले या उनपर किसी भी प्रकार का दवाब बनाने या प्रभाव डालने वाले नागरिकों के खिलाफ शिकायत लेकर सरकारी अधिकारी/कर्मचारी भी सतर्कता अदालतों में जा सकेंगे.
3.11          पब्लिक डीलिंग वाले सभी कार्यालय (निजी हों या सरकारी) एक निश्शुल्क जन-टेलीफोन द्वारा थाना सतर्कता मजिस्ट्रेट से जुड़े होंगे- छोटी-मोटी शिकायतें नागरिक इन फोनों के माध्यम से ही दर्ज करा सकेंगे और सतर्कता मजिस्ट्रेट भी फोन पर ही सम्बन्धित कर्मचारी/अधिकारी को बुलाकर उनका पक्ष सुनकर अपना निर्णय दे सकेंगे. (इस फोन को जहाँगीरी टेलीफोन कहा जा सकता है.)
3.12          शिकायत का निराकरण न होने पर तथा शिकायत गम्भीर होने पर बेशक, इसे लिखित रुप में दर्ज कर दोनों पक्षों को सतर्कता अदालत में बुलाया जायेगा.

3.13  भविष्य में, (जब भ्रष्टाचार का बोल-बाला कम हो जयेगा और इसे नागरिकों की मौन सहमति           मिलनी बन्द हो जायेगी, तब नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाले ये सतर्कता मजिस्ट्रेट) नागरिकों को उनके कर्तव्यों की भी याद दिलायेंगे; अर्थात् नागरिक कर्तव्यों को तोड़ने वालों (मसलन, सड़क पर कचरा डालने वाले) को भी इन सतर्कता अदालतों में पेश किया जा सकेगा.

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सम्पूर्ण घोषणापत्र के लिए : http://khushhalbharat.blogspot.com/  

5 Comments

  1. August 22, 2010 at 1:36 am

    >जब भ्रष्टाचार का बोल-बाला कम हो जयेगा और इसे नागरिकों की मौन सहमति मिलनी बन्द हो जायेगी,आज की दुनिया का कटु शाश्वत वास्तविक सत्य ..

  2. Mahak said,

    August 22, 2010 at 1:43 pm

    >@जयदीप जीसबसे पहले तो ब्लॉग संसद के सदस्य के रूप में आपका हार्दिक स्वागत है आपने ये पूरा खाका अच्छा तैयार किया है और इसका point no.1.11 मुझे बेहद पसंद आया लेकिन point no.3.3 पर मुझे आपति है ,न्याय प्रक्रिया के सम्बन्ध में मेरा निजी मत है की on the spot फैसले वाली व्यवस्था होनी चाहिए और हर केस को कम से कम 3 दिन और ज्यादा से ज्यादा 1 सप्ताह के भीतर निपटाया जाना चाहिए लेकिन श्रीमान बिना सबूतों और गवाहों की अनिवार्यता के न्याय किस प्रकार से संभव है ? और मेरे विचार में दस वर्ष तक किसी एक सरकार या शासक को बिना उसकी performaince देखे टिके रहने का license प्रदान कर देना सही नहीं है ,इसके लिए पांच साल का समय ही उपयुक्त हैसाथ ही आपने ये स्पष्ट नहीं किया की ये एकच्छत्र शासक चुना किस प्रकार से जाएगा ?इन बातों को भी कृपया स्पष्ट करें और अगर इन सभी बिंदुओं को एक ही पोस्ट में संलग्नित कर दें तो और बेहतर होगा ,इससे सभी लोगों को अपनी राय और तर्क एक ही जगह पर देने और दूसरों को उन्हें पढ़ने में आसानी होगी शुभकामनायें महक

  3. August 23, 2010 at 2:27 am

    >महोदय,जय हिन्द. मैं लिंक यहाँ दे रहा हूँ: http://khushhalbharat.blogspot.com/ अगर सारा घोषणापत्र एक ही बार में ब्लॉग संसद में प्रकाशित हो जाय तो बेहतर. मैंने यही कोशिश की थी. पर 'लिंक' डालकर जब 'प्रिव्यू' देखा, तो मैटर नहीं दीखा. सो, मैंने एक-एक कर अध्याय डालना शुरु किया. ईति, आपका-जयदीप

  4. August 23, 2010 at 12:37 pm

    >एकतंत्र की बजाय गुणतंत्र पर क्यों नहीं लिखते हो?हर पार्टी ऐसे कंडीडेट को टिकट दें जो जिस विधा/क्षेत्र में निपुण/बेहतर हो उसे उसी मंत्रालय के लिये सीधे चुना जायेगा।वोट देने का अधिकार केवल कम से कम मैट्रिक पास को हो।जैसे स्वास्थय मन्त्री के लिये केवल देश के डॉक्टर्स को ही आवेदन का अधिकार हो।शिक्षामन्त्री के लिये शिक्षक का ही आवेदन स्वीकार किया जाये।राज्यवित्तमन्त्री के लिये राज्य के आर्थिक सलाहकार और अर्थशास्त्री ही आवेदन कर सकें।प्रणाम

  5. August 25, 2010 at 12:04 am

    >सोहिल जी,जय हिन्द. आगे चलकर इस घोषणापत्र में चुनाव प्रक्रिया / लोकतांत्रिक सरकार गठन आदि का भी जिक्र होगा. शुरुआत में 10 वर्षों के लिए 14-सदस्यीय "चाणक्य सभा" का जिक्र 1.1 से 1.3 में है. ईति, धन्यवाद.


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