>मेरा प्रस्ताव है की ; भारत में बड़े नोट बंद कर दिए जायं

>मैं कई दिनों से प्रतीक्षा कर रहा हूँ कि ; फिर कोई प्रस्ताव पटल पर रखा जायेगा, पर कोई प्रस्ताव नहीं रहाइसलिए ऐसा लग रहा है कि मानो भारत में कोई समस्या ही ना हो हालाँकि सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं के साथ ही अनेकों धार्मिक पारिवारिक समस्याएं ऐसी हैं कि; उन पर प्रस्ताव बन सकते हैं पर सबसे ज्वलंत समस्या है आर्थिक भ्रष्टाचार की

इसके लिए मैं एक प्रस्ताव पेश करता हूँ कि; इस आर्थिक भ्रष्टाचार से, और अर्थव्यवस्था में नकली नोटों की भरमार से निजात पाने को, बड़े नोट बंद कर दिए जायं | इनमें १००,,,,, ५००,,,, १००० के नोट बंद कर देने चाहिए

इसके पक्ष और विपक्ष में विचार आमंत्रित हैं, मैं भी अपने विचार टिप्पणी के रूप में ही दूंगा |

35 Comments

  1. August 30, 2010 at 3:06 pm

    >मैं सहमत हूँ इस प्रस्ताव से और मेरे ख्याल से सभी इमानदार और सच्चे लोगों की यही राय है |

  2. August 30, 2010 at 3:21 pm

    >इससे क्या होगा । ऐसा पहले भी किया जा चुका है ।

  3. August 30, 2010 at 3:50 pm

    >वास्तव में प्रत्येक बीस वर्ष में "विमुद्रीकरण" की इस प्रक्रिया को दुहराया जाना चाहिए- अर्थात् प्रत्येक बीस वर्ष में प्रचलित (बड़े) नोटों को रद्द कर नये किस्म के नोट चलाये जाने चाहिए. न चाहो तो हर बात असम्भव है, चाहो तो सम्भव. प्रस्ताव से सहमत.

  4. Mahak said,

    August 30, 2010 at 4:21 pm

    >मैं भी सहमत हूँ इस प्रस्ताव से, जब हमारे देश की 75 % आबादी के पास दिन में खर्चने के लिए बीस रूपये से भी कम रूपये हैं तो सरकार ये नोट आखिर छाप किसके लिए रही है ?? सिर्फ अमीर और धनाड्य वर्ग और हमारे नेताओं के लिए जो की इन्हें स्विस बैंक में डाल रहें हैं इन बड़े नोटों की वजह से अमेरिका में भी भ्रष्टाचार को काफी बढ़ावा मिलने लगा था और ये भी पाया गया की ये बड़े नोट वहाँ के माफिया जगत को भी उनका कार्य अधिक सुविधाजनक तरीके से करने में मदद कर रहे थे लेकिन हममें और उनमें यही तो फर्क है ,वो हमारी तरह सालों -साल नहीं लगाते फैसला लेने में और 1969 में इन बड़े नोटों को बंद कर दिया गया और आज अमेरिका में सिर्फ छोटी संख्या के नोट ही चल रहें हैं -$1, $2, $5, $10, $20, $50, and $100.UNITED KINGDOM में Serious Organised Crime Agency (Soca)ने भी अपनी study में पाया है की 500 euro note is at the heart of money laundering. The reason is simple: it's easier to shift. और अब UNITED KINGDOM भी इन्हें बंद करने पर विचार कर रहा है

  5. August 30, 2010 at 4:31 pm

    >$10 = Rs 470 $20 = Rs 940 $50 = Rs 2350 $100 = Rs 4700इंग्लैंड में मेरी जानकारी के अनुसार अभी भी पाउंड चल रहा है ।

  6. Mahak said,

    August 30, 2010 at 4:39 pm

    >@आदरणीय महेश सिन्हा जीdollar की ये value भारत में है वहाँ नहीं ,अमेरिका में भी $1, $2, $5, $10, $20, $50, and $100 के नोटों की वही value है जो हमारे देश में rs.1,2,5,10,20,50 और 100 रूपये के नोटों की है

  7. August 30, 2010 at 4:43 pm

    >@महक ऐसा नहीं है 1$ , 1 रुपये के बराबर नहीं होता

  8. Mahak said,

    August 30, 2010 at 4:53 pm

    >@आदरणीय महेश सिन्हा जीकृपया इसे थोड़ा विस्तारपूर्वक समझाएं की अमेरिका या किसी भी देश के अंदर उसकी अपनी मुद्रा का प्रयोग भारत की मुद्रा से किस प्रकार से भिन्न है ??महक

  9. Shah Nawaz said,

    August 31, 2010 at 2:59 am

    >बड़े नोटों को समाप्त करने से मेरे विचार से कोई हल नहीं निकलेगा. खासतौर से १०० और ५०० के नोट बहुत अधिक प्रचालन में है. अगर इन्हें बंद किया गया तो छोटी-छोटी चीज़ों के लिए भी साथ में नोटों की गद्दी लेकर चलनी पड़ा करेगी.

  10. Divya said,

    August 31, 2010 at 3:14 am

    >.आदरणीय सदस्यों,मुझे ये बात भी उचित लगती है की बड़े नोट बंद कर देने चहिये, स्वतः ही नकली कर्रेंसी कम हो जायेगी। लेकिन महेश जी के कथनानुसार , ऐसा पहले भी किया जा चूका है पर कोई हल नहीं निकला है, फिर फायदा क्या होगा? शाहनवाज़ जी का भी कथन सही है की फिर छोटे नोटों को हाथ में लिए घूमना होगा।लेकिन फिर भी मुझे ये बात ठीक लग रही है की , बड़े नोट बंद कर नकली नोटों की मुसीबत से छुटकारा पाया जा सकता है।कम से कम एक बार ट्राई तो कर ही सकते हैं।आभार । .

  11. August 31, 2010 at 7:45 am

    >@महक किसी भी मुद्रा की क्रय शक्ति क्या है उसपर उसका मान निर्भर करता है । 1$ का आजके दिन में मान करीब 47 रुपये है । भारत में भी होटल में खाने का करीब 100 रुपये बिल आएगा । अमेरिका में भी ऐसा भोजन आपको 2 से 3 $ में मिल सकता है ।

  12. August 31, 2010 at 7:59 am

    >मुद्रा ह्राष एक सतत प्रक्रिया है । पहले 1, 2 पैसे के सिक्के चलते थे आज 1 रुपया लगभग न्यूनतम सिक्का हो गया है ।किसी भी मुद्रा को चलाने के पीछे उसक्रे प्रचालन का व्यय भी होता है । इसलिए अब 10 रुपये के नोट भी बंद होने के कगार में हैं ।यहाँ जिस समस्या के संदर्भ में बात हो रही है उसमें दो अलग अलग पहलू हैं। एक ओर है काला धन और दूसरी ओर नकली मुद्रा। दोनों के मूल में लालच ही मूल रोग है लेकिन इलाज अलग अलग है ।नकली मुद्रा का खतरा आज सबसे ज्यादा विदेशों से है और इसके लिए सरकार मुद्रा में नए नए सुरक्षा प्रबंध जोड़कर करती रहती है ।काले धन से छुटकारा पाने के लिए देश की व्यवस्था जिम्मेदार है , जिसमे सबसे बड़ा अंग है सरकारी भ्रष्टाचार का। इसे दूर करने के लिए ऊपर के स्तर से महती प्रयास जरूरी है । काफी वर्ष पहले 5000 और 10000 के नोट भी प्रचलन में थे । इन नोटो का परिचालन बैंक के अधीन होता था , याने प्रत्येक नोट कहाँ से आया और कहाँ गया इसकी जानकारी बैंक के पास होती थे । इस सबके बावजूद इसका एक कालाबाजार बन गया था । आज जबकि 100 रुपया एक छोटी मुद्रा बन गयी है । इसे सबसे बड़ी मुद्रा के रोप्प में रखना अव्यवहारिक होगा। आज आवश्यकता ज्यादा बड़े नोट चलाने की है, कठिन नियंत्रण के साथ।

  13. August 31, 2010 at 8:46 am

    >डॉ महेश सिन्हा का मत ही हमारा मत माना जाय।

  14. August 31, 2010 at 12:45 pm

    >आपका विचार अच्छा विचार है …. पर दो नंबर का पैसा निकालने के लिए मेरा भी एक प्रस्ताव है … रियल एस्टेट के असली दाम खुल कर सामने आएँ अन्यथा प्रॉपर्टी जब्त हो जाए और सरकार उसे आकशन करे ….

  15. August 31, 2010 at 2:31 pm

    >मेरे ख्याल से १५००,२०००,२५००,५००० के नोट भी चलने चाहिये कारण कोई जानना चाहे तो दिए जा सकते है

  16. August 31, 2010 at 3:24 pm

    >1.बड़े नोट बंद करने के पक्ष में, सबसे पहले तो मैं डा.महेश सिन्हा के नोट और डॉलर की तुलना के विषय में अवगत करा दूं कि ; सन १९५१ तक हमारी करेंसी और अमरीकन या ब्रिटिश करेंसी का मान(वैल्यू) बराबर था | मैंने सुना है कि जब पञ्च वर्षीय योजनाएं आरम्भ करने के लिए विश्व बैंक के पास ऋण लेने गए तो उसने अमरीका और ब्रिटेन के दबाव में हमारी सरकार से रुपये के अवमूल्यन के लिए शर्त रखी जो हमारी सरकार को माननी ही थी सो ; मानी गयी, और तब से लगातार ऋण की आवश्यकता पड़ती है और रूपये का अवमूल्यन होता रहता है (ये तो शायद किसीको बताने की आवश्यकता नहीं कि विश्व बैंक पर केवल एक दो देशों का ही प्रभाव है ) अब बड़े नोट की जगह गड्डी लेकर जाने की मज़बूरी के विषय में; मैं इतना ही कहूँगा कि, जो छोटी-मोटी खरीदारी है उसके लिए हजार पांच सौ रूपये लेकर जाने की आदत या अपनी जेबें और बटुआ (पर्स) या बैग आम जनता बना लेगी | बड़े लेन – देन भी अभी तक तो बड़े पैसे वाले बैंकों से ही करते हैं तब गरीब लोगों को भी इसके लिए कुछ अभ्यास और सुविधाओं के बाद आदत पड़ जाएगी | ………

  17. August 31, 2010 at 3:26 pm

    >2.अब मैं बात करता हूँ असली मुद्दे की , पहले; वर्तमान पर नजर डालो और देखो कि जितने भी "भ्रष्ट"पकड़े जा रहे हैं उनके पास केवल पांच सौ और हजार के नोट मिल रहे हैं, नकली नोटों का कारोबार करने वालों पर भी यही बात लागू होती है | अगर छोटे नोट होते तो इतनी बड़ी मात्रा में इन्हें सँभालने के लिए बड़े गोदाम या इधर-उधर लेजाने के लिए बड़े-बड़े ट्रकों की आवश्यकता होती ; जाहिर है इनको संभालना आसान नहीं होता और सबकी दृष्टि में आ जाता | नकली नोटों की छपाई उसके मूल्य से अधिक पड़ने के कारण भी छपने बंद हो जाते | अजी साहब ! इन नकली नोटों के बंद होने से जो आतंकवादी सीमा पार से दो-चार लाख के नकली नोटों के साथ यहाँ प्रवेश कर जाते हैं, तब मुमकिन नहीं होगा | यही बात न्यूनाधिक नक्सलवाद पर भी लागू होती है | …………

  18. August 31, 2010 at 3:26 pm

    >3.अगली एक और मुख्य बात; "देश के भीतर जमा लगभग ६० लाख करोड़ रूपये काला धन" एक मुस्त बहार आ कर देश के माननीयों और भ्रष्टों की पोल तो खोलेगा ही साथ ही देश की अर्थव्यवस्था में गुणात्मक उछाल लायेगा | जिससे शायद दस गुणा तेजी से भारत अपने नागरिको के लिए सुविधाएँ उपलब्ध करा पायेगा | दस गुणा इसलिए, क्योंकि ; बड़े नोट बंद होने के कारण भ्रष्टाचार कम से कम होगा | अब रही बात कि पहले भी बड़े नोट बंद करे हैं पर सफलता नहीं मिली | मिली , कौन कहता है कि नहीं मिली ? जितने के लिए बड़े नोट बंद किये थे उतनी सफलता मिली | पर ; क्योंकि उस समय आज जितनी बैंकिंग सुविधाएँ नहीं थी और फिर भ्रष्टों का दबाव ,सरकार में स्वयं भ्रष्ट नेता, सबने मिल कर दोबारा बड़े नोट बनवा दिए | आज ऐसा नहीं है इन्हें बंद न करने पर केवल भ्रष्टों दबाव होगा, अन्य तो कोई कारण नहीं दीखता आज कदम कदम पर ए टी एम और बैंको की अन्य सुविधाएँ हैं जहाँ कम हैं वहां बधाई जा सकती हैं इस लिए मेरा तो ये सुझाव है कि सविधान में ये व्यवस्था होनी चाहिए कि अधिक से अधिक सौ रूपये से बड़ा नोट कभी न छापा जाये | मुझे लगता है और ज्यादा बड़े नोट १५००, या अधिक बड़े छापने को कहना केवल हास्य पैदा करने के लिए कहा गया है |क्योंकि ; वर्तमान परिस्थितियों में अगर आरम्भ में कुछ असुविधाएं आम जनता को होती भी हैं तो उसका लाभ भी आम जनता को सबसे अधिक होगा | और यदि हम हानि की बात करें तो कोई मुझे यह बता दे कि भ्रष्टों, "काले धन के ऊपर बैठे जहरीले नागों" और आतंकवादियों के अलावा किसको हानी होगी ?

  19. hem pandey said,

    August 31, 2010 at 3:48 pm

    >आपकी पोस्ट और उस पर आयी टिप्पणियों के आधार पर यही उचित लग रहा है कि बड़े नोट बंद किये जाएँ. एक टी वी इंटरव्यू में बाबा रामदेव का भी यही मत था. उन से काले धन और भ्रष्टाचार के सम्बन्ध में , उनके द्वारा राजनीतिक दल बनाए जाने के सन्दर्भ में यह प्रश्न किया गया था.

  20. August 31, 2010 at 4:16 pm

    >@शंकर फुलाराजब तक व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन नहीं होगा , सुधार संदिघ्ध लगता है ।अवमूल्यन को जानबूझ कर लादा गया लेकिन आज की अवस्था में उसके लिए ज्यादा कुछ कर पाना संभव नहीं है । आज भारतीय उत्पादक ही नहीं चाहते की रुपए का मूल्य बढ़े क्योंकि उनके सौदे $ में होते हैं । इसे आरबीआई और सरकार भी सपोर्ट करते है.काले धन की समस्या का मूल जमीन के कारोबार से संबन्धित है । आज आप बिना काले धन के कोई संपत्ति नहीं खरीद सकते , हाउसिंग बोर्ड जैसी संस्थाओं को छोड़कर लेकिन इनकी भी रजिस्ट्री के लिए काला धन लगता है । इस देश के केवल 10000 लोगों की संपत्ति की जांच कर ली जाए तो सब ठीक हो सकता है !!

  21. Mahak said,

    August 31, 2010 at 4:21 pm

    >मैं शंकर जी के सभी तर्कों से सहमत हूँ

  22. Mahak said,

    August 31, 2010 at 4:27 pm

    >@आदरणीय महेश सिन्हा जी शायद आप मेरा प्रश्न नहीं समझे ,इसे एक उदहारण से समझते हुए इस उदहारण के ज़रिये ही मुझे जवाब दे दें जिससे इस विषय में मेरा थोड़ा ज्ञानवर्धन हो सके अगर आज भारत में एक डोसा 45 रूपये का मिलता है तो अमेरिका के एक होटल में उतनी ही लागत से बने हुए डोसे को खरीदने के लिए एक अमेरिकी को कितना मूल्य देना पड़ेगा – 45 डॉलर या फिर 1 डॉलर ??

  23. Mahak said,

    August 31, 2010 at 4:38 pm

    >बड़े नोटों को बंद करने के विषय में एक रोचक प्रसंग आप सबके सामने रखना चाहूँगा एक बार स्वामी रामदेव जी ने बताया की इन बड़े नोटों को बंद करने का प्रस्ताव जब उन्होंने हमारे वर्तमान प्रधानमन्त्री डॉ.मनमोहन सिंह जी से मिलकर उनके सामने रखा तो उन्होंने कहा की -" स्वामी जी ,जब मैं RBI का प्रमुख था तब मैंने भी ऐसा ही करने की कोशिश की थी लेकिन उस समय किसी ने मेरा साथ नहीं दिया और मेरे इस प्रस्ताव को दबा दिया गया कुछ शक्तिशाली नेताओं और Buerocrats के द्वारा "तब स्वामी रामदेव जी ने कहा की -" अब तो आप प्रधानमन्त्री हैं ,अब तो ऐसा कर दीजिए "इस पर मनमोहन सिंह जी बिना हाँ या ना किये बस मंद-मंद मुस्कुराने लगे ,स्वामी रामदेव जी ने फिर बताया की -" मैं उनकी मुस्कराहट में छुपी हुई इस मजबूरी को समझ गया और फिर मैंने आगे कुछ भी बोलना या पूछना उचित ना समझा "

  24. August 31, 2010 at 4:49 pm

    >@महक वाल स्ट्रीट – जहाँ से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था रुपी महासंग्राम का अर्जुन अपने रथ में विवश किन्तु दृढ खडा है, और तमाम उलझनों, चढावों और उतारों से निकलकर भी चलायमान है अपने कर्म क्षेत्र में आगे बढ़ने की ललक और आशा के साथ !! कितनी विभिन्नता है, आज भी ५ डॉलर में आप लंच करके संतृप्त हो सकते हैं रेडी वाले ठेले से खाकर और दूसरी और क्रेडिट कार्ड भी कम पड़ जाए हलके से पेट को भरने में। ऊँची ऊँची अट्टालिकाओं के बीच खड़े ये ठेले वाले ९० प्रतिशत लोगो का पेट आज भी यहाँ भरते हैं ! http://meriawaaj-ramtyagi.blogspot.com/2010/08/blog-post_15.html5$ में एक व्यक्ति का दोपहर का भोजन = लगभग 250 रुपए.इतना ही एक माध्यम श्रेणी के अच्छे रैस्टौरेंट में भारत में भी लगेगा विभिन्नताएँ हमारे यहाँ भी हैं लेकिन 1 $, 1 रुपये के सममूल्य नहीं है

  25. September 1, 2010 at 3:18 am

    >बढ़े चलो – बढ़े चलो;विरोधी भी थोड़ा-थोड़ा सहमत होने लगे हैं , बेशक अभी अगर- मगर, किन्तु – परन्तु लगा रहे हैं पर झुकाव नजर आने आने लगा है | इसी सन्दर्भ में, मैं ; डा. सिन्हा जी के डॉलर और रूपये की तुलना में अवगत करा दूँ कि; भारत में भारत का एक रुपया खर्च करना और अमरीका में अमरीका का एक डॉलर खर्च करना बराबर है मतलब अपने-अपने देशों में दोनों की शक्ति बराबर है | हाँ; विदेश व्यापार करने वालों को इसमें तब तक हानि उठानी पड़ेगी जब तक हम अपने रूपये का "मान" बढ़ा न लें | और रूपये का मान तभी बढ़ेगा जब हमारी अर्थव्यवस्था में कालाधन और भ्रष्टाचार नहीं के बराबर होगा या नहीं ही होगा |और भ्रष्टाचार और कालाधन साथ ही नकली करेंसी समाप्त करने का एकमात्र और आसान उपाय यही है कि बड़े नोट बंद कर दिए जाएँ | न केवल बंद कर दिए जाएँ अपितु ऐसी व्यवस्था बनायीं जाये कि फिर कभी बड़े नोट न छापे जायं | साथ ही दस हजार लोगों की संपत्ति जाँच करने के लिए कितनी व्यवस्था करनी पड़ेगी और वह व्यवस्था भी कहीं न कहीं भ्रष्ट होगी तथा कितना व्यव होगा और समय कितना लगेगा इन सब सवालों का जवाब, मैं यह दूंगा कि हमारे यहं जो आयोग बनते हैं उनका हस्र क्या होता है उसे देख लीजिये स्वयं समाज आ जायेगा |

  26. September 1, 2010 at 4:44 am

    >bhai aap teek kehte hai per ager 500,1000 ke note nhi chape jayege to desh barbad ho jayega 10,20,50,100 note chapne ne inki keemat se jayda khercha aata hai aur wase bhi sarkar apni merji se note nhi chap sakti aur desh ki arthvastha aur RBI, world bank ke aadesh per hi chapte hai

  27. September 1, 2010 at 6:36 am

    >@शंकर फुलारादिल के बहलाने को गालिब खयाल अच्छा है । आपको अगर मेरे खाने के बारे में दिये उदाहरण के बाद भी लगता है की 1$ की कीमत 1 रुपए के बराबर है तो !!

  28. September 1, 2010 at 11:03 am

    >अरे भाई कोई डा.साहब को समझाता क्यों नहीं कि; अमरीका का डॉलर हमारे यहाँ पचास का होगा पर अपने यहाँ तो उसका एक डॉलर या एक रुपया ( हमारी भाषा में) ही है |

  29. September 1, 2010 at 11:20 am

    >शंकर जी,मुद्रा का मान उसकी क्रयशक्ति पर निर्धारित होता है, यूं समझ लिजे कि अमेरिकन 1 डालर में हमारे 46 रुपये खरीदने की शक्ति है। साथ ही उसमे पूरे 46 रूपये की सामग्री खरीदने की शक्ति है।रूपये का अवमूल्यन उसकी कम खरीद शक्ति के कारण है।यह बहस आपके प्रस्ताव से अलग है, आपका बडी मुद्रा का बंद करने का प्रयोजन इसी लिये है ना कि कालाधन व नकली मुद्रा का चलन बंद हो?तो यह बडा चलन बंद करना समुचित समाधान नहिं है।

  30. September 1, 2010 at 11:28 am

    >शंकर जी, अजीब सवाल लग रहा है मुझे| जिस आर्थिक भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के उद्देश्य से आप ऐसा कह रहे हैं क्या उसका यह समाधान है? हम अपनी मानसिकता बदल नहीं सकते, खुद को कभी संतुष्ट नहीं रख सकते और उल ज़लूल सवाल उठा कर हल निकालना चाहते हैं| यह कभी संभव नहीं है| और शायद ऐसा करना मूर्खता ही होगी|

  31. September 1, 2010 at 1:20 pm

    >I think we need to be more practical in our approach to root out the problem of fake currency and corruption. It doesn't mean that I'm against your proposal.But I doubt about its practicality. If we could get more practical way, I think that will be better. By the way 'BLOG SANSAD' turned to be a knowledge platform. I like this blog very much.I thank Mahak Ji,for your this initiative.

  32. Mahak said,

    September 1, 2010 at 6:28 pm

    >@Virendra Singh Chauhan जी आपका बहुत-२ धन्यवाद अपने विचार रखने के लिए और मेरी हौंसला अफजाई के लिए ,आप भी इस ब्लॉग के सदस्य बनने के लिए सादर आमंत्रित हैं एक निवेदन – कृपया रोमन हिंदी की बजाये सिर्फ हिंदी में ही लिखें तो आपकी टिपण्णी को पढ़ने में और सुविधा होगी हिंदी में टाइप करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें http://www.google.com/transliterate/indic/धन्यवाद महक

  33. sm said,

    September 1, 2010 at 10:34 pm

    >yes i support youi have also written about black money, how to get rid etc on my blog.Below is the link to post http://realityviews.blogspot.com/2009/04/simple-and-effective-solution-to-deal.html

  34. September 3, 2010 at 12:09 pm

    >महक जी …..हिन्दी अनुवाद के लिए लिंक देने के लिए धन्यवाद .अब मैं अपनी टिप्पड़ियाँ हिन्दी में ही देने का प्रयास करूँगा.महक जी …ब्लॉग संसद से एक तरह से मैं अभी भी जुडा हूँ .मैं आपके इस प्रयास का दिल से समर्थन करता हूँ और हर पोस्टको पढ़ने की कोशिश करता हूँ और अपने दोस्तों से आपके 'ब्लॉग संसद'को पढ़ने के लिए कहता हूँ .महक जी…..जब मुझे लगेगा कि मैं ब्लॉग संसद से जुड़ने केलिए पूरी तरह तैयार हूँ तो ज़रूर जुड़ना पसंद करूँगा. आपने मुझे इस लायक़ समझा इसके लिए आपको दिल से धन्यवाद .महक जी ..आप बड़े अच्छे तरीके से तर्क के साथ अपनी राय रखते हैं .आपकी ये बात मुझे बहुत अच्छी लगती है .मैं भगवान् से आपके सुखी और सफ़ल भविष्य की कामना करता हूँ ,और आशा करता हूँ आपकी कलम की धार हमेशा ऐसी ही बनी रहे .

  35. Sonal said,

    September 4, 2010 at 12:29 pm

    >bade note band karna samasya ka hal nahi hai…A Silent Silence : Mout humse maang rahi zindgi..(मौत हमसे मांग रही जिंदगी..)Banned Area News : Chunky Pandey's 'Raaz Pichle Janam Ka'


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