>कमाल है !! ब्लॉग जगत में भी महारथी दुष्टों के द्वारा द्रौपदी के अपमान को चुपचाप देखते रहते हैं – Blindness & Impotency in the world of blogging

>

जी हाँ पढके चौंकिये मत, ये सच है और मैं भी इस सच को जानने और देखने के बाद उतना ही हैरान हुआ था जितना की आप इस शीर्षक को देखकर हो रहें हैं

अभी हाल ही में एक महिला ब्लॉगर को एक बहुत ही वरिष्ठ पुरुष ब्लॉगर द्वारा ” कटही कुतिया “ के अति-सुन्दर शब्दों से सुशोभित किया गया है और वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने उनके एक प्रिय ब्लॉगर रुपी भेडिये की काली करतूतों को सबूतों सहित उजागर कर दिया था , वो भेडिया काफी समय से उस महिला ब्लॉगर को तंग कर रहा था ,कभी उसकी पोस्ट्स पर अपने कमेंट्स करके तो कभी उसे mail के ज़रिये वासनामयी प्रेम-पत्र लिखके और वो ये सब बेशर्मी ये जानते भी जारी रखे हुए था की वो महिला ब्लॉगर शादीशुदा है ( वैसे तो इन हरकतों को कुंवारी कन्या के साथ भी उचित नहीं कह सकते लेकिन ये जानने के बाद की महिला या पुरुष शादीशुदा है उसे उस नज़र से देखना तो नीचता का परिचायक है )

उस महिला ब्लॉगर को पहले तो लगा की वो भेडिया नादान है और ये सब अनजाने में कर रहा है, उसने उसे प्रेमपूर्वक समझाने का प्रयत्न किया की अब मैं किसी की अर्धांग्नी हूँ ,तुम्हे ऐसे पेश नहीं आना चाहिए ,एक मित्र अथवा भाई के रूप में ही तुम मुझे स्वीकार्य हो पर उन भाई साहब को प्यार से समझ आये तब ना ( कहते भी हैं की लातों के भूत बातों से नहीं मानते ),सो उनका ये मजनुपना जारी रहा ,महिला ब्लॉगर को लगा की यह कोई मानसिक रोगी है और इसे कोई मानसिक प्रॉब्लम है धीरे-२ समझ जाएगा लेकिन जिस प्रकार कुत्ते की दुम टेढ़ी ही रहती है यहाँ भी वही हुआ ,उसकी बेशर्म हरकतें और वासना में डूबे हुए पत्रों का आना जारी रही ,

जब पानी सर से ऊपर चला गया तो उन महिला ब्लॉगर ने उसकी हरकतों को सबूतों के साथ अपने ब्लॉग पर रखा ताकि समाज के आगे शरीफ बने हुए उस ब्लॉगर के ढोंग का पर्दाफाश हो सके लेकिन यहाँ तो एक नया ही मंज़र देखने को मिला , ब्लॉग समाज ने उस पुरुष ब्लॉगर को तो क्लीन चिट् दे दी और उस महिला ब्लॉगर पर ही आक्षेप लगाने शुरू कर दिए ,और तो और एक और अति-लोकप्रिय महिला ब्लॉगर ने उस पुरुष ब्लॉगर की हरकतों का बचाव करते हुए इसे निजता का हनन बताया और कहा की उस मरीज की ये बातें आपको सार्वजनिक करने का कोई अधिकार नहीं ( अब इस बात में पूरा नहीं तो थोड़ा तो दम लगता है की एक औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन है )

जी हाँ अधिकार तो सारे के सारे उस ब्लॉगर को ही हैं जो की बार-२ समझाने पर भी समझ नहीं रहा और अपनी ओछी हरकतें निरंतर जारी रखे हुए है , ये कुछ इस प्रकार से नहीं लगता की जब आतंकवादियों और खूंखार अपराधियों का मुठभेड़ में encounter हो जाए तो ये मानवाधिकार वाले बहुत शोर मचाते हैं लेकिन जब ये आतंकवादी निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतारते हैं तो उस समय इन्हें सांप सूंघ जाता है ,भई ऐसा हो भी क्यों ना , निर्दोषों और अपनी duty पूरा करने वालों के थोड़े ही मानवाधिकार होते हैं

ऐसे में अगर कोई victim अन्य लोगों को उससे सचेत और सावधान करने का प्रयास करे तो फिर बुरा तो वही कहलाया जायेगा ,जैसे कोई चैनल स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिये कुछ लोगों का भ्रष्ट चेहरा बेनकाब करे तो गलती उस चैनल की ही है , इसे कहते हैं कर भला हो बुरा ,तो यहाँ भी हो गया ,तत्काल ब्लोग्गरों की गुटबंदी शुरू हो गई और एक के बाद एक उस पुरुष ब्लॉगर को बचाने और उस महिला ब्लॉगर को सच्चाई उजागर करने के कारण सबक सिखाने की योजना बनायी गई और शुरू हो गया उस महिला ब्लॉगर के खिलाफ पोस्ट्स पे पोस्ट्स और उन पर प्रंशसा भरे कमेंट्स आने का सिलसिला , एक नकली शांतिदूत ने उस महिला ब्लॉगर से उस भेडिये की सच्चाई उजागर करती पोस्ट को डिलीट करने को कहा ,अब चारों और से हो रहे इस हमले को एक व्यक्ति कब तक सहन कर सकता है , मजबूरन भारी दबाव के कारण उस महिला ब्लॉगर को अपनी पोस्ट डिलीट करनी पड़ी

ब्लॉग जगत के बड़े-२ दिग्गज और महारथी इस अन्याय को होते देखते रहे, कुछ लोग politically correct होकर चलते बने ,कुछ एक लोगों को छोड़ दें तो किसी के मुंह से भी सहानुभूति के दो शब्द तक नहीं निकले और किसी ने भी इसके खिलाफ अपनी आवाज़ नहीं उठाई ,कहते हैं न इतिहास खुद को दोहराता है , पितामह भीष्म ,द्रोणाचार्य ,कृपाचार्य आदि अनेक बड़े-२ महारथी और शूरवीर योद्धा उस सभा में मौजूद थे जिनकी मौजूदगी में द्रौपदी के चीर-हरण का प्रयास किया गया था लेकिन किसी ने भी वासना और मदिरा के नशे में चूर उन कौरवों को दो थप्पड़ रसीद नहीं किये की जो तुम कर रहे हो वो कल को तुम्हारी माँ ,बहन और बेटी के साथ भी हो सकता है ,यहाँ भी यही हुआ बल्कि यहाँ तो उससे दो कदम ज्यादा हुआ ,यहाँ तो ब्लॉग जगत के पितामाह भीष्म के दर्जे के सामान के वरिष्ट ब्लॉगर ने पीडिता को ही ” कटही कुतिया “ बोल दिया, उनके वक्तव्य में धृतराष्ट के पुत्र-मोह की भी झलक दिखती है

और उन वरिष्ट ब्लॉगर की चतुरता देखिये ,अपने और उस दुष्ट ब्लॉगर के कृत्यों को ढकने के लिए एक पोस्ट और डालकर खुद को राम और उस महिला ब्लॉगर को शूर्पनखा दर्शाने का प्रयास किया गया और इस पर भी उन्हें खूब वाह-वाही मिली ,ये सब उस अत्यंत वरिष्ठ ब्लॉगर के रसूख का ही परिणाम था की किसी भी ब्लॉगर ने उससे इस पर कोई स्पष्टीकरण तक मांगने की हिम्मत नहीं की कि आपने एक नारी को ये गाली और अपशब्द क्यों कहे , जब मैंने उनसे उनके इस निंदनीय व्यवहार का कारण जानने के लिए संवाद करना चाहा तो संवाद तो दूर की बात मेरा कमेन्ट तक डिलीट कर दिया ,पता नहीं क्यों लेकिन इस सारे प्रकरण से रुचिका गिर्होत्रा और राठोड वाले प्रकरण की भी यादें ताज़ा हो जाती हैं जिसमें सारा system उस भ्रष्ट और ताकतवर राठोड के आगे नतमस्तक था और उसे बचाने में लगा हुआ था  

धीरे-२ सभी भँवरे उस कलि का साथ छोड़ने लगे जो कल तक उसके आसपास मंडराया करते थे ,इनमें सबसे ज्यादा आश्चर्य तो मुझे उन भाई साहब का है जो कल तक दीदी दीदी कहके उन महिला ब्लॉगर से सारी उम्र हमें संग रहना है का गीत गाया करते थे , लेकिन अपनी बहन को संकट में छोड़ कर उन्ही लोगों की चाकरी करते हुए फिर रहे हैं , इस पर एक शेर याद आ रहा है –

“मुसीबत में कायम रहता है जो रिश्ता वो खास होता है
हर एक बनता है रिश्तेदार जब कुछ पास होता है ”

कई ब्लॉगर उस ” कटही कुतिया “ का कमेन्ट करने वाले ब्लॉगर को ब्लॉग जगत में अपना गुरु मानते हैं इसलिए शायद वे गुरुदेव के विरुद्ध बोलने से डरते हैं की कहीं अपना ज्ञान देना बंद ना कर दें ( या हमारी पोस्ट्स पर टिप्पणियां करना ) , लेकिन क्या ये परम्परा सही है ??, अब इस ब्लॉग जगत में दो लोगों को अपना गुरु तो मैं भी मानता हूँ ,वो हैं अनवर जमाल जी और सुरेश चिपलूनकर जी ,क्योंकि इनके ब्लोग्स पढ़-पढकर ही मुझे भी ब्लोग्गिं में आने की इच्छा हुई और दोनों से ही काफी कुछ सीखने को मिला लेकिन इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है की अगर इनके द्वारा कोई गलत बात कही जाए तो मैं इनका साथ दूं सिर्फ इसलिए की ये मेरे गुरु हैं या फिर मेरी किसी गलत बात पर ये सिर्फ इसलिए मूक हो जाएँ क्योंकि ये बात मैं कह रहा हूँ ,और ऐसा कई बार हुआ भी है जब हमारे कुछ विचार आपस में टकराए हैं लेकिन स्वस्थ संवाद की परंपरा हमेशा कायम रही है

कोई बोले ना बोले लेकिन मैं पाप और पुण्य के इस युद्ध में पाप को जीतते हुए नहीं देख सकता और मैं ऐसे लोगों के कृत्यों की खुले तौर पर घोर निंदा और भर्त्सना करता हूँ, मैं जानता हूँ की ये पोस्ट इस संसद के ध्येय से थोड़ी अलग ज़रूर है लेकिन इसे इस प्रकार से समझिए की मैं संसद में आप सबके समक्ष अभी हाल ही में हुए एक अन्याय का मुद्दा उठा रहा हूँ, क्या आप साथ देने की हिम्मत करेंगे ??( या फिर आप भी पतली गली से निकल लेंगे )

उस काल में तो योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण ने आकर द्रौपदी कि लाज कि रक्षा की थी और दुष्टों का अंत किया था और करवाया था लेकिन क्या इस कलियुग में भी कोई आभासी कृष्ण आगे आकर इस अन्याय के विरुद्ध शंखनाद करेगा  ?? 

महक

106 Comments

  1. September 5, 2010 at 7:08 am

    >मैंने कल इन महानुभाव को आईना दिखाया था, लेकिन इतने घबराये कि कमेण्ट ही पब्लिश नहीं किया, और तो और मुझे तथा आपको "गधे" की संज्ञा से भी नवाज़ा है… हालांकि वे कहते तो खुद को "वैज्ञानिक" हैं, लेकिन उनका स्तर कटही कुतिया और शूर्पनखा नकटी से ही ज़ाहिर हो जाता है… अब उनके ब्लाग पर कमेण्ट करके कोई फ़ायदा तो था नहीं, इसलिये अब जो भी जवाब देना होगा, इधर ही दिया जायेगा…

  2. Shah Nawaz said,

    September 5, 2010 at 7:12 am

    >आजकल अस्वस्थता के कारण अधिक समय ब्लॉग जगत पर नहीं दे पा रहा हूँ, इसलिए उपरोक्त बातों से अनजान ही रहा. आपकी बात को पढ़कर ही कमेन्ट दे सकता हूँ. अगर बात वही है जो आपने कही, तो वाकई यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है.

  3. रचना said,

    September 5, 2010 at 7:12 am

    >http://mypoeticresponse.blogspot.com/2009/05/blog-post_5691.html#commentsis post par aap padh saktey haen comments mae aur aap samajh unki maansiktaa is blog jagat mae log ladkiyon ko force kar kae unko post hataane kae liyae vivash kartey haen lekin in par koi kuch nahin kartaa

  4. September 5, 2010 at 7:14 am

    >मैं इन सबसे जरा दूर ही रहता हूँ पर आँखों देखि मक्खी नहीं निगली जाएगीआप यहाँ लिंक ना देना चाहें तो क्या मुझे मेल से दोनों ब्लॉग के लिंक भेज सकते हैं शायद मैं कुछ कर सकूँ

  5. September 5, 2010 at 7:19 am

    >आपने जो भी लिखा वह सब पर्दा पर्दा ही है जरा खुल कर उस शरीफ़ आदमी के बारे में निजी तौर पर हमें मेल करके सूचित करें ताकि हम बुरे लोग उसको तुर्की ब तुर्की जवाब दे सकें। हमें भला आदमी कहलाने की ललक नहीं है। इससे पहले भी मैं ऐसे ही एक ठरकी राजसिंह को रगेद चुका हूं जो कि पुणे की एक महिला ब्लॉगर को अपने ब्लॉग पर इतना बदनाम कर चुका था कि बेचारी टूट कर रह गयी थी। हमारे लिये दीदी सिर्फ़ संबोधन नहीं बल्कि रिश्ता है जिसे हमने घर तक निभाया है। हम भले ही सड़कछाप गंवार मजदूर और जाहिल किस्म के लोग हों लेकिन जिनसे रिश्ता मानते हैं तो उसे ऑफ़लाइन भी निभाते हैं हमारे लिये रिश्ते वर्चुअल नहीं है। मेरा ई-पता : aayushved@gmail.comमोबाइल : 9224496555

  6. September 5, 2010 at 7:50 am

    >रुपेश जी, शरीफ़ आदमी का नाम है श्री अरविन्द मिश्रा, लिंक है ये… http://mishraarvind.blogspot.com/2010/09/blog-post_03.html इनके पुराने पोस्ट देखेंगे तो आपको महिला ब्लॉगर्स के लिये "कटही कुतिया", "शूर्पनखा", "नकटी", "खूनी मछली" जैसे सम्बोधन मिलेंगे… वैसे आपने सही कहा है कि यदि "भड़ासी" इसके पीछे पड़ गये तो यह साहब अपना वैज्ञानिक होना भूल जायेंगे…🙂🙂 जय-जय भड़ास…

  7. September 5, 2010 at 8:05 am

    >भाई महक जी, आपने देखा होगा कि इन सज्जन के ब्लॉग पर जो कमेण्ट्स आये हैं, वह भी अधिकतर गुलू-गुलू… मुलू-मुलू भाषा में हैं, सीधे मुद्दे की बात कहने में बड़े शरमाते हैं कई "भलेमानुष" टिप्पणीकार…। जान सभी रहे हैं, समझ सभी रहे हैं कि किसे कुतिया कहा जा रहा है और किसे नकटी… लेकिन टिप्पणी की भाषा गोल-मोल, चाशनी में पगी हुई… कि कहीं "बिगाड़" न हो जाये, कहीं कमेण्ट डिलीट न हो जाये…। बड़ा आतंक है वैज्ञानिक "गिरोह" का… सही बात को सही और गलत बात को गलत कहने में जो शरमाता है, शायद उसी को बुद्धिजीवी कहते हैं…

  8. September 5, 2010 at 8:30 am

    >चिपलूनकर तुमने फिरका परस्तों की अच्छी भीड़ जुटा ली है ..भडासी जो उखाड़ना चाहें उखाड़ लें -दो कौड़ी के लोगों से बात करना मैं समय की बर्बादी मानता हूँ …..

  9. September 5, 2010 at 8:31 am

    >शर्मनाक । किसी की निजता का उल्लंघन अभी तक कुछ विशिष्ट लोग ही करते थे, अगर लेखक और वैज्ञानिक भी इसमें शामिल हो गए तो भगवान मालिक है , इसका जमकर विरोध होना चाहिए ।

  10. September 5, 2010 at 8:32 am

    >वाह क्या शब्द विन्यास है !! .भडासी जो उखाड़ना चाहें उखाड़ लें -दो कौड़ी के लोगों से बात करना मैं समय की बर्बादी मानता हूँ .

  11. September 5, 2010 at 8:38 am

    >ये एक अफ़सोसजनक वाक़या है ….

  12. September 5, 2010 at 8:40 am

    >मैं तुम्हारे पूरे सपोर्ट में हूँ…. हल्का सा कनफ्लिक्टहै लेकिन… अगर तुम मुझसे एक वादा करो… कि मैं कुछ कहूँगा तो तुम मुझसे अपनी दोस्ती नहीं तोड़ोगे… और मेरी बातों को बहुत हेल्दी वे में लोगे ….तो मैं कुछ कहूँ…. क्यूंकि मैं थोडा सा कनफ्लिक्ट लिखूंगा… पर लौजिकल होगा … ऐसा मेरा मानना है….

  13. September 5, 2010 at 9:02 am

    >वाह-वाह क्या कहने मिश्रा जी…फ़िरकापरस्तों की भीड़(?)… ये कहाँ है? दो कौड़ी के लोग… ये कौन हुआ? रुपेश श्रीवास्तव या मैं…? जरा साफ़-साफ़ बताईये ना वैज्ञानिक महोदय… और अभी तक आपने इस बात का तो जवाब ही नहीं दिया है कि आपके ब्लॉग पर मेरी टिप्पणी में ऐसा क्या था कि आपने उसे न सिर्फ़ डिलीट कर दिया, बल्कि मुझे "गधा" शब्द से भी नवाज़ा…? आप नहीं बतायेंगे… मैं बताता हूं… आपने तो कई उल्लेखनीय शब्द लिए, लेकिन एक और शब्द है "मिर्ची"… जिसे आप सहन नहीं कर पा रहे हैं…🙂🙂 जिन फ़र्जी और तथाकथित असोसियेशन में आपके धर्मनिरपेक्ष(?) दोस्त और चाहने वाले लोग हैं वे ही आपको बतायेंगे कि "फ़िरकापरस्ती" क्या होती है…। क्या वे लोग भी आपके स्तर के ही वैज्ञानिक हैं?

  14. anshumala said,

    September 5, 2010 at 9:36 am

    >किसी क्लास में कई तरह के बच्चे होते है कुछ गलती से शरारत कर देते है टीचर उन्हें डाटती है तो वो माफ़ी मंगाते है और दुबारा नहीं करते है कुछ माफ़ी नहीं मागते पर शरारत नहीं करते है पर कुछ बच्चे ऐसे होते है की उन्हें जितना मना किया जाये समझाया जाये वो और शरारत करते है उदंड बन जाते है ऐसे बच्चे मना करने पर जान बुझ कर सभी को खिजाने का काम करते है ये साम दाम दंड से नहीं समझते है इनके साथ भेद की निति अपनानी चाहिए | इन्हे अनदेखा कीजिए क्योकि ये कई बार अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए भी ऐसा करते है | हा कई बार दुसरे टीचर उनके माँ बाप से संम्बंधो के कारण उसे कुछ नहीं कहते है पर उसकी असलियत जानते सब है | इंतजार कीजिए ये उदंड बच्चा एक दिन सभी अध्यापको के साथ उदंडता करने लगेगा और अंत में स्कुल के प्रिंसपल और प्रशासन के साथ भी उसी दिन उसका स्कुल में आखरी दिन होगा उस दिन वो स्कुल से डिलीट कर दिया जायेगा |

  15. September 5, 2010 at 9:46 am

    >मेरे कुछ सवाल…१. आखिर ऐसा क्या हुआ दिव्या का मिश्रजी के साथ…. कि इतना कुछ लिखना पढ़ा… अगर अरविन्द जी से इतनी ही दुश्मनी थी तो उन्हें इतना बढ़ावा ही क्यूँ दिया…. ? अब किसी मर्द को कोई लड़की निकनेम 'अवि" देगी… तो वो किसी लगाव के तहत ही देगी…२. अरविन्द मिश्र खराब ही सही… लेकिन जब तुम्हे मालूम था कि यह इंसान खराब है… तो उससे लविंग चैट ही क्यूँ करना? (मैं अरविन्द मिश्र जी का पक्ष नहीं ले रहा… यह ध्यान दिया जाए)३. अगर मिश्र जी ने कटही कुतिया कहा तो वो चैट में कहा था… उसे पब्लिक दिव्या ने किया… लेकिन मिश्र जी की पूरी चैट किसी ने नहीं देखि कि किस बातों के तहत उन्होंने कहा… सिर्फ एक शब्द उठा लिया… और उसे अपने अंदाज़ में पेश कर दिया… अरविन्द मिश्र गलत है… कटही कुतिया कह के… लेकिन दिव्या भी उतनी गलत है… किसी महिला को कटही कुतिया नहीं कहना चाहिए. .. यह सभ्यता के खिलाफ है… लेकिन फिर एक सवाल… कि दो दोस्तों में झगडा होता ही है… और वो एक प्राइवेट चैट थी… उसे वहीँ सुलझा लेना चाहिए था.. उसे पोस्ट बना कर नहीं डालना चाहिए था… सारी गलती यहीं ही हुई… पोस्ट बना कर डाला गया… तो सारी छिचचालेदर हो गयी… ४. क्यूँ दिव्या ने पहले इतना नहीं बताया… जब झगडा हुआ तभी क्यूँ बताया… और अगर झगडा हुआ तो उसे इस प्लेटफॉर्म पर क्यूँ लाया…? अगर अरविन्द मिश्र का रियल चेहरा ही दिखाना था… तो उसे इतने महीनों के बाद क्यूँ दिखाया गया…?५. सबसे बड़ी गलती अमरेन्द्र के साथ…. हम लोग अमरेन्द्र को बहुत अच्छे से जानते हैं… वो इतना सीधा है कि सीधा वर्ड भी उसके आगे बहुत टेढ़ा है… ६. अमरेन्द्र को ऐसे पॉइंट पर लाया गया कि वो दिव्या के प्यार में पडा… नहीं तो दुनिया का कोई भी लड़का…ऐसा प्रेम-पत्र इमोशंस के साथ किसी को नहीं लिख सकता…क्यूं किसी कम उम्र के लड़के को इस पॉइंट पर लाना कि वो यह सब लिखे…? आखिर दिव्या ने भी तो उसे कुछ ऐसे ही सिग्नल्स दिए होंगे … क्यूंकि यह हो ही नहीं सकता … कि कोई लड़का किसी लड़की को ऐसे प्रेमपत्र लिखे? ७. फिर वो प्रेमपत्रों को छः महीने के बाद ही क्यूँ डिस्क्लोज़ करना? वो पहले भी किया जा सकता था… ८. मैं यह नहीं कहता कि शादी शुदा को प्यार करने का कोई हक नहीं है… कई बार हमें शादी के बाद भी प्यार हो जाता है… और एक इमोशनल नीड होती है… और अगर दिव्या के साथ ऐसा था… तो क्यूँ अमरेन्द्र को बढ़ावा दिया? और यह भी कोई गलत बात नहीं है कि कोई लड़का किसी शादी-शुदा से प्यार करे… तब जब उम्र में कोई ख़ास डिफ़रेंस न हो… ९ अमरेन्द्र ने तो अपने सम्बन्ध कहीं किसी से भी नहीं बताया… यह दिव्या ने ही बताया… कोई तो ऐसा पॉइंट रहा होगा …कि अमरेन्द्र ने ऐसा लिखा… वो प्रेम पत्र बिलकुल भी वन साइडेड नहीं लगता… तो दिव्या ने क्यूँ अमरेन्द्र को ऐसे पॉइंट पर लायी? १०. ताली हमेशा दोनों हाथों से बजती है… अगर अमरेन्द्र साइको पेशेंट था… तो उसक साइकोलौजिकाली ट्रीट करतीं… अमरेन्द्र के पास ऐसे बहुत सारे सबूत हैं… जिनको मैंने देखा भी है… To…be…contd…

  16. September 5, 2010 at 9:47 am

    >११. अगर दिव्या अमरेन्द्र को एज अ पेशेंट ट्रीट कर रही थी… तो उसकी बातों को डिस्क्लोज़ नहीं करना चाहिए था… तो ऐसा क्यूँ किया गया? १२. यह कितनी गलत बात है कि किसी के इमोशंस को आप इस तरह सरे-आम बदनाम करें… १३.अगर दिव्या डॉक्टर है… और बी.एच.यू. से पढ़ी है… तो उसका मेंटल लेवल क्यूँ डाउन हो गया… ? क्यूँ उसने लव चैट अमरेन्द्र से की? हमारे स्कूलिंग, और कौलेजिंग का हमारी पर्सनैल्टी पर बहुत बड़ा असर पड़ता है… तो वो चीज़ क्यूँ नहीं दिव्या के पर्सनैल्टी में दिखाई दी..? १४. क्या सारी गलती अमरेन्द्र की ही है? क्या सारी गलती अरविन्द मिश्र की ही है? अरविन्द मिश्र जी गलत हैं… बिलकुल गलत हैं… उन्हें कई ऐसे शब्द जो prohibited हैं…. उनका यूज़ नहीं करना चाहिए… इसकी भर्त्सना तो मैं भी करता हूँ… लेकिन दिव्या के स्टैंड पॉइंट पर … उन्हें पूरा गलत कहना गलत होगा…१५. अदाजी ने दिव्या को गलत नहीं कहा… उन्होंने तो यह कहा कि अगर आप किसी को ऐज़ अ पेशेंट ट्रीट कर रही हैं… तो उसकी प्राइवेसी तो मेंटेन करना एक डॉक्टर का एथिक होता है… अमरेन्द्र का बचाव इसलिए सब लोग कर रहे हैं… क्यूंकि अमरेन्द्र को ज़्यादातर लोग पर्सनली जानते हैं… अमरेन्द्र ने कोई ऐसा काम ही नहीं किया है कि उसे क्लीन शीट दिया जाये… अदाजी के लेख को दूसरा डाइरेक्शन देने की कोशिश दिव्या ने की है… १६. लोग इसलिए दिव्या से भड़के क्यूंकि उसने अमरेन्द्र के साथ गलत किया था… और वैसे भी जितनी गलती अमरेन्द्र की थी… उतनी ही गलती दिव्या की भी थी… छः महीने बाद ख्याल आया… कि उसने लव लेटर लिखा है… आखिर उसे इस पॉइंट पर लाने वाला कौन है? कोई भी लड़का तब तक के आगे नहीं बढ़ता …जब तक के लड़की उसे वैसे इंडिकेशन न दे… यह मेरा २१ साल का तजुर्बा भी कहता है… और सोशिओलौजी भी… १७. मैं भी तो यहाँ कई महिलाओं को आई लव यू कह कर छेड़ता हूँ… कईयों को कितना परेशां करता हूँ… लेकिन कभी ऐसा क्यूँ नहीं हुआ कि किसी महिला ने यह कहा कि मैं बदतमीज़ हूँ… ? क्यूंकि सब जानते हैं मेरे बारे मैं… चाहे वो …महिला हो या पुरुष… इसलिए कभी किसी ने कुछ नहीं कहा… मुझे ऐसा करते हुए डेढ़ साल हो गए हैं… १८. मैं देखने में भी हैंडसम हूँ… और बाकी चीज़ों में भी… लेकिन क्यूँ कभी किसी महिला ने मुझे ऐसा कोई इंडिकेशन नहीं दिया? या क्यूँ मैं किसी महिला के चक्कर में नहीं पड़ा…? आखिर क्यूँ.. दिव्या ने अमरेन्द्र को इतना मजबूर किया…. कि वो उसके प्यार में पड़े? कोई तो लैक्युने होगा कहीं न कहीं तो… १९. और वैसे भी जब प्यार होता है न…या अच्छी दोस्ती ही होती है… तो आप उसको ऐसे यहाँ वहां बदनाम नहीं करते… २०. दिव्या की बेईज़ती तभी हुई… जब अमरेन्द्र के ऊपर पोस्ट लगायी गयी.. वो सात महीने पुराने प्रेम-पत्र… २१. वो सारे सबूत जो अमरेन्द्र ने मुझे दिखाए हैं… अगर वो सामने आ जाएँ…. तो और भी खराब होगा… मैं दिव्या के पूरे सपोर्ट में हूँ… लेकिन गलत चीज़ों में नहीं… २२. सारी गलती अमरेन्द्र की भी तो नहीं दे सकते न… To… be… contd….

  17. September 5, 2010 at 9:56 am

    >महफ़ूज़ भाई, मुझे उन तीनों के आपसी और पर्सनल मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है…। उसमें भी अरविन्द मिश्रा जी की भाषा तो बहुत भद्दी है ही…मेरा मुद्दा तो सिर्फ़ यह है कि मेरा कमेण्ट बिना किसी कारण के न सिर्फ़ डिलीट किया गया है, बल्कि मुझे गधा, फ़िरकापरस्त और दो कौड़ी का भी कहा गया है… मिश्रा जी को इसका जवाब तो देना ही चाहिये… यदि वाकई वे वैज्ञानिक हैं और उनके गिरोह में सभी लोग "धर्मनिरपेक्ष" हैं…🙂🙂

  18. September 5, 2010 at 9:59 am

    >सुरेश जी… मैं आपके साथ हूँ इस मुद्दे पर…

  19. September 5, 2010 at 10:00 am

    >यह मुझे भी ख़राब लगा…

  20. September 5, 2010 at 10:02 am

    >मैं भी यहाँ किसी के साथ नहीं हूँ इस मुद्दे पर… पर यह है कि amrendra बहुत ज़्यादा पिस गया है… और सच्चाई किसी को मालूम नहीं… इसलिए मैं इम्पार्शियल हो कर बोल रहा हूँ… मैं तो दिव्या के साथ भी हूँ कई पॉइंट्स पर…

  21. September 5, 2010 at 10:18 am

    >ओह ! ब्लॉग जगत में भी इस तरह की मानवीय (पाशविक) बुराईयाँ पनप गयीं हैं | जान कर बहुत हैरानी हुयी | ऐसी ओछी हरकतें कर के कोई भी वैज्ञानिक हो या साधारण आदमी या कोई भी, क्या दर्शाना चाहता है | ये वास्तव में हमारी शिक्षा में खोट है जो पढ़े लिखे लोग ही ऐसा कर रहे हैं | "जो" भारतीय मान्यताओं, परम्पराओं, रिश्ते-नातों पर संस्कृति पर विश्वास रखता होगा वह ऐसा नहीं कर सकता | हाँ ; कुछ लोगों को हमारे इन सब नैतिक गुणों में फिरकापरस्ती नजर आती है जो गलत है |उनके लिए ये सब ढकोसला है |

  22. Mahak said,

    September 5, 2010 at 10:49 am

    >@सुरेश जी ,@शाहनवाज़ जी ,@दिगम्बर नासवा जी @रचना जी ,@डॉ .रूपेश श्रीवास्तव जी और @शंकर फुलारा जी बहुत-२ आभार आप सबका इस पर निर्भयतापूर्वक अपने विचार रखने के लिए

  23. रचना said,

    September 5, 2010 at 10:50 am

    >mehfoojaap kae naari kae prati kitnae udaar vichhar haen sab jaantey haen

  24. रचना said,

    September 5, 2010 at 10:51 am

    >mehfoojun udaar vichharo mae aapne mother terisa jaesi maa kae liyae bhi apshabd kahey haen aap sae aesae kmaents kae allwa kayaa umeed ki jaa saktee haen

  25. Mahak said,

    September 5, 2010 at 10:52 am

    >@आदरणीय एवं गुरुतुल्य सुरेश जी आपने सर्वप्रथम उन सज्जन ( या दुर्जन ) को बखूबी पहचाना है ,आप बधाई के पात्र हैं महक

  26. September 5, 2010 at 10:53 am

    >आज फिर एक बहन ने, एक बेटी ने पुकारा है | अब यह हर भाई ,हर पिता , हर बहन और हर माँ का कर्तव्य हो गया है कि आगे बढ़ें और अन्याय एवं अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ उठायें | मैं इस माध्यम से विश्व के तमाम लोगों से प्रार्थना करता हूँ कि नैतिकता से गिरे लोगों के विरुद्ध आगे बढें | इस विषय में आप जो भी क़दम उठायेंगे मुझे अपने करीब पायेंगे |डॉ. ग़ुलाम मुर्तजा शरीफ अमेरिका

  27. रचना said,

    September 5, 2010 at 10:53 am

    >mehfooj aap ne khud ek blog par kehaa haen 300 mahila sae aapke sambandh haen ab yahaan aap kuch aur keh rahey haen

  28. Mahak said,

    September 5, 2010 at 10:55 am

    >@डॉ महेश सिन्हा जी आपके कमेंट्स का आशय समझ नहीं पाया हूँ ,कृपया साफ-२ और सरल शब्दों में बताएं आप क्या कहना चाहते हैं ??

  29. Mahak said,

    September 5, 2010 at 10:56 am

    >@anshumala जी सवाल तो यही है की आखिर वो दिन कब आएगा ??

  30. September 5, 2010 at 10:58 am

    >रचना जी… मैं कभी नारी के बारे में कभी कोई खराब विचार नहीं रखता हूँ… ना ही मैंने कभी किसी नारी के बारे में कभी कोई खराब लिखा है… और जो लिखा है… वो किस टेम्परामेंट में लिखा है यह आप भी जानतीं हैं… और उसकी मैं आपसे खुले-आम माफ़ी भी मांग चुका हूँ… और आप अगर कहेंगीं… तो दोबारा माफ़ी मांग लूँगा… और फिर आपसे माफ़ी मांग रहा हूँ… और मैंने अभी यहाँ कुछ नारी के बारे में नहीं लिखा है… सिर्फ एक इम्पार्शियल सोशल एनालिसिस किया है… जी कि साइकोलॉजिकल भी है.. अगर मैं नारी-विरोधी होता…तो मेरी ज़िन्दगी में इतनी नारियां कभी माँ, बहन, दोस्त, प्रेमिका और दोस्त के रूप में नहीं होतीं… मैंने यहाँ गलत को गलत कहा है… चाहे वो कोई भी हो…

  31. रचना said,

    September 5, 2010 at 10:58 am

    >Mahfooz Ali said… कहाँ आप भी फँस जाती हैं….. सुपर frustrated लोगों के बीच ….. यह नारी मुक्ति से घर ही टूटेंगे …. आप अपना घर , पति और बच्चे बचाइए…. जब भी औरत नारी मुक्ति कि बात करती है ….लात खाती है… घर में भी और बाहर भी…. सुपर वाली…. इसलिए…. नारी मुक्ति छोडिये… प्यार करिए और प्यार बांटिये…. (नोट: यहाँ प्यार से मतलब… अच्छा वाला प्यार है… अन्यथा वाला नहीं… ) ….. http://swapnamanjusha.blogspot.com/2009/11/blog-post_4862.html?showComment=1259256204852#c5281546639616185503

  32. September 5, 2010 at 11:00 am

    >चोर जिसने कभी मजबूरी में चोरी की हो… तो उसे हम कभी चोर नहीं कह सकते… इसलिए कुछ जो पहले लिखा गया … उसे बार-बार आप कमज़ोरी नहीं बना सकते… यहाँ दिव्या भी गलत है… तो है.. .. थोडा साइको-एनालिस जजमेंट भी होना चाहिए…

  33. September 5, 2010 at 11:02 am

    >अब इसमें क्या गलत लिखा था… ? इसमें गलती भी बता दीजिये… प्लीज़…

  34. रचना said,

    September 5, 2010 at 11:03 am

    >महफूज़ अली said… @ Anonymous….. Anonymous…..भाई….. एक बार अटल बिहारी बाजपाई ने कहा था कानपूर कि सभा में….. कि मैं कुंवारा ज़रूर हूँ……… लेकिन ब्रह्मचारी नहीं….. यही बात MOTHER TERESA पर भी लागू होती है….. एक बात और ब्रह्मचारी का जीवन बहुत थोडा होता है….. वो कम उम्र में ही टें बोल जाता है…. जैसा कि स्वामी विवेकानंद जी ….. December 5, 2009 4:39 PM http://swapnamanjusha.blogspot.com/2009/12/blog-post_04.html?showComment=1260011393171#c3691267804340647187

  35. September 5, 2010 at 11:03 am

    >अब आप मेरी बहस को रौंग डाइरेक्शन दे रही है… यहाँ बहस अमरेन्द्र और दिव्या की है…

  36. September 5, 2010 at 11:04 am

    >दूसरा कमेन्ट भी गलत नहीं है… और इस बात को साइंस भी मानती है…

  37. रचना said,

    September 5, 2010 at 11:04 am

    >aap kabhie galat ho hi nahin saktey maen aap ko galt kab kehaa haen

  38. September 5, 2010 at 11:05 am

    >साइंस में पैन-स्पेर्मिया सब्जेक्ट में यह साफ़-साफ़ लिखा भी है… पैन-स्पेर्मिया इस ए नियु ब्रांच ऑफ़ रिप्रोडक्शन…

  39. रचना said,

    September 5, 2010 at 11:06 am

    >mae sirf yae kaeh rahee hun vichaar nahin badaltey अगर मेरी बेटी होगी …. और वो मुझे आ कर बताएगी कि उसे प्यार है…. तो मैं उसकी शादी कर दूंगा….. लेकिन अगर वो गर्भवती हो कर आएगी …. तो उसको मैं कुत्ते से भी खराब मौत दूंगा…. एक ऐसी मौत जिससे मौत भी घबरा जाये….. लेकिन …. अगर मेरी बेटी ऐसा करेगी …. तो इसका मतलब यही होगा कि मैंने ही उसको अच्छे संस्कार नहीं दिए हैं…. इसमें पूरी गलती मेरी ही होगी…. कोई भी मर्द यह कभी नहीं बर्दाश्त करेगा कि उसकी बहन / बेटी…. गर्भवती हो कर आये….http://vanigyan.blogspot.com/2010/05/blog-post.html?showComment=1273208403702#c2541522822419924532

  40. September 5, 2010 at 11:07 am

    >आप यहाँ बात दिव्या और अमरेन्द्र की करिये ना…. ऊपर जो बाईस पॉइंट लिखे हैं…उनका भी तो कोई सही जवाब दे… सिर्फ इसीलिए कि दिव्या महिला है… तो वो गलत नहीं हो सकती… ?

  41. September 5, 2010 at 11:08 am

    >मैं जहाँ गलत होता हूँ…. तो पैरों में लोट कर माफ़ी भी मांग लेता हूँ… आपसे भी मांगी है… मैं आपके भी सेंटीमेंट्स को हर्ट नहीं कर सकता…

  42. रचना said,

    September 5, 2010 at 11:08 am

    >mahak the need put these comments is to show the attitude you can please dlete them if they are diverting the topic

  43. September 5, 2010 at 11:12 am

    >रौंग डाइरेक्शन में मत मोड़िये….. चीज़ों को… जो पोस्ट है उस पर बात करिए… आपके मेरे कमेंट्स को छाप कर मेरा कुछ नहीं होना है… ऐसा भी नहीं है… कि सारी महिलाएं मुझे गाली देंगीं… ? वोटिंग करा लीजिये…अगर ब्लॉग जगत की एक भी महिला अगर यह कह देगी कि मैं बदतमीज़ हूँ… तो ब्लॉग्गिंग छोड़ दूंगा… इट'स ए प्रॉमिस…

  44. Mahak said,

    September 5, 2010 at 11:13 am

    >@महफूज़ भाई ये अच्छी बात है कि आपने बिना कोई पक्ष लिए एक महिला को इस तरह से पुकारे जाने और उसके अपमान की भर्त्सना की लेकिन आपसे एक बात जानना चाहूँगा की ये सब बातें जो आपने रखी हैं वो जिन्हें रखनी चाहिए वो तो हमें गधा बोलकर चुपचाप पतली गली से निकल लिए और इन्हें आप रख रहें हैं ,इसका कोई विशेष कारण ??हो सकता है जो बातें आपने उठायी हैं उनमें कुछ सच्चाई हो लेकिन अगर आपने अमरेन्द्र का दिव्या जी को भेजा हुआ वो e-mail ध्यान से पढ़ा हो तो उसमें वो बार-२ एक बात कह रहा था,exact lines मुझे याद नहीं हैं लेकिन वे कुछ इस प्रकार की थी कि मैं तो दिन रात तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूँ और तुम हो कि मुझसे बात तक नहीं करती ,इतनी बेरूखी क्यों ?? और उसके बाद कि भाषा लिखने योग्य नहीं है,इससे साफ़ पता चलता है की वो उसे avoid कर रही थी ,अब जब वो उसे avoid कर रहीं हैं तो यहाँ पर दिव्या जी के द्वारा उसे बढ़ावा देने का प्रश्न कहाँ से पैदा होता है ?? और सबसे अफसोसजनक पहलु ये है की भारी दबाव के चलते दिव्या जी ने वो mail वाली पोस्ट डिलीट कर दी ,मैं तो कहूँगा दोनों और के लोग अपने-२ evidences जो भी उनके पास हैं ,सामने लायें ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और फिर किसी शक या साजिश की गुंजाइश ही ना रहेबाकी मैं किसी भी पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कुछ नहीं लिखना चाहता ,आपकी बातों का और बेहतर जवाब दिव्या जी ही दे सकती हैं महक

  45. September 5, 2010 at 11:13 am

    >टॉपिक मैं नहीं डाइवर्ट कर रहा हूँ…. उन बातों का भी जवाब…. मिलना ज़रूरी है… अकेले अमरेन्द्र कैसे गलत हो सकता है…

  46. September 5, 2010 at 11:16 am

    >महक मुझे बहुत अच्छा लगा.. किमेरे पहले कमेन्ट का मान रखा… दरअसल पूरी मेल किसी ने देखी ही नहीं है… दिव्या ने वही दिखाया जो उसने चाहा… दोनों में किसी बात को लेकर झगडा हुआ होगा… तो मरेन्द्र मना रहा था …बस इससे ज़्यादा और कुछ नहीं था…

  47. September 5, 2010 at 11:17 am

    >हाँ वही तो मैं कह रहा हूँ कि मेरी बातों का जवाब दिव्या ही दे सकती है…

  48. September 5, 2010 at 11:19 am

    >पर यह भी तो है कि अगर एविडेंस सामने आ जाये तो कितनी छिछालेदर होगी…

  49. September 5, 2010 at 11:21 am

    >मैं अरविन्द मिश्र जी का सपोर्ट बिलकुल नहीं कर रहा हूँ… उनके अपशब्द कहने पर… मैं तो उन्हें इसलिए रखा…. कि उनकी भी पूरी गलती नहीं है…. कहीं तो कुछ लैक्युने है… उनके अपशब्द की मैं भी निंदा कर रहा हूँ… यहाँ मैं पार्शियल भी तो नहीं हो सकता ना…

  50. September 5, 2010 at 11:23 am

    >अगर वो दिव्या की मेल देखी जाए… तो अमरेन्द्र ने कुछ गलत नहीं लिखा था…. प्यार में इन्सान वैसा ही लिखेगा… और वो तभी लिखेगा जब दोनों ओर से कुछ हो…

  51. September 5, 2010 at 11:25 am

    >महक जी ये ब्लॉग संसद से नाम वापिस लेने (सदस्यता रद्द) का क्या तरीका है ?

  52. September 5, 2010 at 11:25 am

    >आता हूँ… ज़रा चाय लेके…

  53. September 5, 2010 at 11:41 am

    >भाई साहब हम तो यही कहेंगे कि ग़लती न तो मिश्र जी की है और न ही बहन दिव्या जी की . हमारे शरीर में होते हैं हारमोंस और अगर दो अजनबी औरत मर्द आपस में बात करते हुए इस्लामी उसूलों की पाबन्दी न करें तो हारमोंस में आ जाता है उछाल और फिर फैलता है वबाल . सो इस्लामी उसूलों को अपनाओ और अपनी अपनी लाज बचाओ . आप सभी मेरी नई रचना देखने के लिए सादर आमंत्रित हैं .http://vedquran.blogspot.com/2010/09/real-sense-of-worship-anwer-jamal.html

  54. September 5, 2010 at 11:52 am

    >अरे भाई महफूज़ ! क्यों तुमने आज रोज़ा नहीं रखा और क्यों किसी जवान के किसी ब्याहता की तरफ लपकने के बाद भी उसे ग़लत नहीं कह रहे हो . खुद भी गुमराह हो रहे हो और दूसरे बालकों को भी बहका रहे हो . ब्याहताओं को जीने दो और कुंवारियों को जायज़ तरीके से प्रपोज़ करो . तुम भी खुश वे भी खुश और दोनों के घराती बाराती भी खुश . शादी जायज़ और ऐब हराम है , हिन्दू मुस्लिम धर्म गुरुओं का यह संयुक्त फतवा है .

  55. September 5, 2010 at 12:12 pm

    >जमाल भाई …. मेरी तबियत खराब है… और दवाई चल रही है… TDS खाना पड़ता है दवाई…. और भई…. वो जवान…. अपने आप नहीं लपका है… उसे लपकने के लिए डाली पकड़ाई गई है… हमने कभी ब्याहताओं को तंग नहीं किया… और कुंवारियों के पीछे कभी पड़ा नहीं… ना ही कभी किसी को प्रोपोज़ किया… टाइम ही नहीं है इतना… और कोई ऐब मुझमें है नहीं… सिर्फ एक ऐब है… वो भी चाय पीने का… ही ही ही …

  56. September 5, 2010 at 12:35 pm

    >अरे भाई महफूज़ ! भाई चाय पियें आप शौक़ से लेकिन एक अदद चाय पकाने वाली भी ले आयें . माँ बहनों को थकाना सताना ठीक नहीं और वह भी जवान हो जाने के बाद , लेकिन यहाँ मैं आपकी नहीं "उन" साहब की बात कर रहे थे जिनके सामने सीधा लफ्ज़ भी "टेढ़ा" पढ़ जाता है .

  57. September 5, 2010 at 1:05 pm

    >अरे कोई उन बाईस पॉइंट्स का जवाब दो भई…

  58. September 5, 2010 at 1:06 pm

    >एक सवाल और… दिव्या को अगर अमरेन्द्र से इतना ही प्रॉब्लम था तो उसने उसे ब्लाक क्यों नहीं कर दिया ईमेल पर …वो क्यूँ उसके साथ वोयस चैट करती रही…याहू की आई.डी. तो दिव्या ने ही बनाया था… बेचारे अमरेन्द्र को आज भी टाइपिंग करने में कीबोर्ड में एल्फाबेट्स यहाँ वहां देखने पड़ते हैं… कोई लड़का लाख प्रेम पत्र लिखे अगर औरत न चाहे तो वो उसे आराम से इग्नोर कर सकती है…..क्यों वो आज तक उसके ईमेल रिसीव कर रही है…?और सबसे क्लासिक है अरविन्द मिश्र को 'अवि' बुलाना…किसी ने शायद ही उन्हें आज तक इस नाम से बुलाया होगा….साथ ही जब तक संबंधों में इतनी घनिष्टता न आ जाए कोई भी किसी भी महिला को 'कुतिया' जैसे शब्दों से नवाजने कि हिम्मत नहीं कर सकता …चाहे वो चैट पर ही क्यों न हो…इन बातों से ही पता चलता है कि सम्बन्ध बहुत घनिष्ठ थे… और दिव्या ने फॉल्स सिम्पैथी गेन करने की कोशिश की है…

  59. September 5, 2010 at 1:07 pm

    >अब जब उन बाईस पॉइंट्स के जवाब आ जायेंगे… तो भई… कोई मुझे फोन करके बता देना… अब चलता हूँ…

  60. Devesh Arya said,

    September 5, 2010 at 1:09 pm

    >किसी महिला को कटही कुतिया का विशेषण कोई असभ्य संस्कारहीन मूर्ख ही दे सकता है..

  61. रचना said,

    September 5, 2010 at 1:23 pm

    >कोई भी कुछ भी करे वो उसको करने और उसके परिणाम भोगने के लिये तैयार रहे । बात बड़ी मामूली सी हैं , कोई लड़की उसके साथ जो भी होता हैं सार्वजनिक करती हैं तो इसमे किसी को क्या आपत्ति हैं या होनी चाहिये ये उसका अधिकार हैं । वो सही हैं या गलत हैं वो जाने क्युकी वो २५ वर्ष से ऊपर हैं और इतना पढी लिखी हैं कि जो कर रही हैं वो समझा रही हैं । हर जगह जिरह के/ से जवाब क्यूँ दे । हम २०१० मै जी रहे हैं जहां हम पुरुष हैं स्त्री एक उम्र के बाद स्वतंत्र हैं अपना भला बुरा समझने के लिये ।

  62. September 5, 2010 at 2:10 pm

    >महफ़ूज़ भाई, आपके सवालों की तरह अभी तक मेरा सवाल भी अनुत्तरित है… जिसका जवाब सिर्फ़ डॉ(?) अरविन्द मिश्र ही दे सकते हैं… महफ़ूज़ भाई, लीजिये जमाल साहब अपनी मुर्गे की एक ऊंची टांग लेकर आ गये, इन्हें हर जगह, हर बात में, सोते-उठते-खाते-पीते-*&^% इस्लाम ही इस्लाम नज़र आता है। आज आपसे रोज़ा नहीं रखने के बारे में पूछ रहे हैं, और महिलाओं को इस्लामी उसूलों (यानी शायद बुरका) के बारे में लेक्चर देने की कोशिश कर रहे हैं…। सारी समस्याओं का हल "बुरका", दुनिया में हर मुश्किल का आसान हल "इस्लामी उसूल"… इसके अलावा इन्हें कुछ और आता भी नहीं…। मैं उत्सुक हूं यह जानने के लिये कि जमाल साहब अरविन्द मिश्र को कौन सी इस्लामी सलाह देने वाले हैं… क्योंकि यहाँ मुद्दा तो वही हैं…। शायद जमाल साहब अरविन्द मिश्र को ऊँची मोहरी का पायजामा पहनने की सलाह दें ताकि हवा का आवागमन सही बना रहे। वैसे भी एक जेहादी की वजह से लखनऊ ब्लॉगर असोसियेशन से शायद मिश्र जी खुद ही कूच कर गये थे… और उलटा मुझे फ़िरकापरस्त कह रहे हैं। महक भाई,दर्शन के सवाल का जवाब भी दें… कि ब्लॉग संसद से सदस्यता वापस लेने का तरीका क्या है… अरविन्द मिश्र जी सुन रहे हैं क्या? एक दो कौड़ी का, फ़िरकापरस्त, गधा आपके जवाब का इंतज़ार कर रहा है… आपकी वजह से मेरा पूरा दिन खराब हो गया और जिस पोस्ट पर मैं लिख रहा था वह अधूरी ही रह गई… इसका मुआवज़ा कौन चुकाएगा?🙂🙂🙂 मुझे तो सरकारी ग्राण्ट भी नहीं मिलती डकारने के लिये…🙂

  63. September 5, 2010 at 2:14 pm

    >महफूज ,जितने प्रभावी ढंग और ईमानदारी से आप इस मुद्दे पर बात रख रहे हैं मन हैट्स ऑफ करने को कहता है -ऐसा तो मैं भी नहीं कर सकता था -आपने मेरी भावनाओं को भी सहज तरीके सामने रख दिया है -आज से मैं आपको अपना प्रवक्ता घोषित करता हूँ -इसलिए ही आप महफूज है🙂 हैट्स आफ अगेन !महक मैं आपसे कुछ नहीं कहना चाहता -आप भोले इंसान हैं :)चिपलूनकर ,आपके लिए गधा शब्द नहीं था -कम से कम १३ या १४ गधों के कमेंट्स डिलीट किये जो मेरे मित्र गन हैं -प्यार से गधा बोलना गुनाह है क्या ?आप कभी मेरे ब्लॉग पर नहीं आते ..चूंकि आप स्वप्रेरणा से नहीं बल्कि किसी के उकसाने पर आये थे अतः आपका कमेन्ट प्रकाशित नहीं किया और यह अधिकार ब्लॉग स्वामी को है ….मेरा मन मशीन का है और खाल गैंडे की ….कोई फर्क नहीं पड़ता -और मैं अपनी अच्छाई गलती सदैव स्वीकार कर माफी मांगने को तत्पर रहता हूँ ….आपको मेरे किसे उपक्रम /भंगिमा से दिख पहुंचा तो क्षमाप्रार्थी हूँ -आप अपनी नजर में खुद अपना आकलन कीजिये …अमरेन्द्र ने अपना ब्लॉग मिटा दिया -मैंने वहां डॉ .दिव्या श्रीवास्तव से भी क्षमा मांग ली थी ..जितना संतप्त वे हैं उससे कुछ कम मैं नहीं ..उन्हें या किसी भी महिला को कभी भी सार्वजानिक तौर पर कटही कुतिया कहने का प्रश्न नहीं है -एक गुप्त चैट में उन्होंने मुझे आस्तीन का सांप कहा मैंने उन्हें कटही कुतिया -यह एक सहज बुद्धि की बात है की मेरा वह सचंमच अभिप्राय नहीं था …आयी दीद नात मीन दैट ….निजी गोपन बातों को उजागर कर जग हंसाई नहीं करना चहिये ..वे एक प्रतिभाशाली महिला हैं और इतना सबके बावजूद मैं उनका सम्मान करता हूँ और आप सभी से विनम्र अपील करताकी उन्हें अपनी उर्जा सृजन में लगाने का समय दें ..भड़ासियों से भी कटु वचन के लिए क्षमा मांगता हूँ ..चिपलूनकर जी आप कब से खलीफाई करने लगे ….कुछ ठोस करिए ….

  64. September 5, 2010 at 3:20 pm

    >मिश्रा जी, अभी आपकी लैंग्वेज थोड़ी ठीक लग रही है… चिपलूनकर के साथ "जी" भी लगा दिया अबकी बार तो…। आप "प्यार" जरुरत से ज्यादा ही करते हैं, कभी प्यार से गधा बोलते हैं, कभी प्यार से फ़िरकापरस्त बोलते हैं तो कभी "दो कौड़ी का"…।1) आप यदि दिल से कह रहे हैं तो इसे चलिये हम इसे "खेद प्रकाशन" माने लेते हैं… लेकिन बड़ी देर की मेहरबाँ आते-आते… 2) भाई जी, खलीफ़ाई का शौक तो उन्हें होता है जो सरकारी सम्पर्कों के जरिये अपना नेटवर्क मजबूत बनाने के लिये भी ब्लॉगिंग का सहारा लेते हैं। मैं तो सरकारी दामाद हूं नहीं, इसलिये चन्दे के पैसों पर और अपना घर फ़ूंक कर "ठोस काम" बहुत कुछ कर रहे हैं पिछले 3-4 साल से। जैसे मुझे फ़ुर्सत नहीं मिलती आपके यहाँ कमेण्ट करने की वैसे ही शायद आपको भी मेरी "विचारधारा" की कोई एलर्जी है शायद… वरना आपको मेरा "ठोस" काम दिख जाता…।सिर्फ़ जुगाड़ से किताबें छपवाने, आर्टिकल्स प्रकाशित करवाने या सम्मेलन-फ़म्मेलन, और कार्यशाला आयोजित करने को ही ठोस काम नहीं कहते भाई जी… यदि आपके दिल में कोई मलाल नहीं है और "स्वप्रेरणा से" खेद व्यक्त कर रहे हैं तब मेरी तरफ़ से भी "फ़िलहाल" मामला खत्म मान लीजिये…। जी हाँ "फ़िलहाल"…

  65. debu said,

    September 5, 2010 at 3:37 pm

    >मुझे विश्वास नहीं हो रहा है ये वही है ना जो कल तक सभी नारियो को भला बुरा कह रहे थे दूसरो के ब्लॉग पर भी महिलाओ के लिए भद्दी गलिया लिख रहे थे कल तक तो जमे थे अपनी बात पर आज अचानक क्या हो गया | ये ब्लॉग और उसकी टिप्पणिया देख कर समझ में आ गया की नारियो के सामने अपनी मर्दानगी दिखाने वाले ने आज मर्दों से पंगा ले लिया है | तभी तो सुबह से साम में ही इनकी बोली बदल गई अब कहा गई इनकी हिम्मत | एक बात अब भी तय है की ये दबाव में माफ़ी जरुर मांग रहे है पर इनकी सोच अब भी वही है

  66. RAJAN said,

    September 5, 2010 at 3:42 pm

    >jo anshumala ji kah rahi hai use ek vikalp (antim vikalp nahi )ke taur par dekhkar is par bhi vichaar kiya ja sakta hai.

  67. September 5, 2010 at 4:52 pm

    >अरविन्‍द जी ने गर क्षमा याचना कर ही ली है तो क्‍यूँ न ये मुद्दा यहीं पर समाप्‍त ही कर दिया जाए ।आप फिर कुछ कहेंगे , उन्‍हे बुरा लगेगा और फिर वही बहस शुरू ।यदि हमें कोई बात बुरी लगती है तो बिल्‍कुल जायज है कि वो बात औरों को भी बुरी लगती होगी ।इस पूरे प्रकरण से मैं बिल्‍कुल ही अनजान हूँ इसीलिये कोई टिप्‍पणी नहीं करना चाहता , बस एक प्रार्थना है, वैसे भी हमारा ब्‍लाग जगत प्राय: हिन्‍दू-मुसलमान, वेद-कुरान आदि मुद्दों पर आपस में लडता रहता है, और यहाँ केवल अपने विषय विशेष पर ही लोग इकट्ठा होते हैं ,गन्‍दे कमेन्‍ट्स देते हैं , और इस तरह गृहयुद्ध चलता ही रहता है ।अत: मैं केवल यह विनम्र प्रार्थना करता हूँ आप सभी से कि कृपया यह गृहयुद्धविराम करें और अपनी रचनाशीलता को भारत के निर्माण में लगायें ।इस ब्‍लागसंसद का एक सदस्‍य होने के कारण मैं बिना खुद के किसी अपराध के भी उन सभी माताओं और बहनों से क्षमा चाहता हूँ जिनका अपमान किया गया है, और श्री अरविन्‍द जी से निवेदन करता हूँ कि कृपया हिन्‍दी ब्‍लाग परिवार के वरिष्‍ठ नागरिक होने के कारण इस परिवार के सम्‍मान और अपमान को अपना समझें और सौहार्द बनाये रखें । एक और बात हाँथ जोड कर कहना चाहता हूँ कि अब इस मुद्दे पर और बहस न किया जाए । मैं उन बहनों से भी हाँथ जोडकर प्रार्थना करता हूँ कि कृपया अरविन्‍द जी को क्षमा करते हुए यह बहस यहीं समाप्‍त कर दें ।आप सब का ऋणी रहूँगा ।आपका छोटा भाई – आनन्‍द

  68. September 5, 2010 at 5:10 pm

    >इस सब के बारे में कुछ नहीं जनता इस लिए कोई टिपण्णी नहीं, वैसे चित्र अच्छा लगाया है …..(आजकल तो मौत भी झूट बोलती है ….)http://oshotheone.blogspot.com

  69. September 5, 2010 at 5:51 pm

    >या इलाही ये माजरा क्या है?–मेरे पल्ले तो कुछ भी नही पड़ा!–भारत के पूर्व राष्ट्रपतिडॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिनशिक्षकदिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

  70. September 5, 2010 at 7:39 pm

    >महफ़ूज़ अली के सवालों का ज़वाब दिए बिना मामला खतम?बढ़िया है!

  71. Divya said,

    September 6, 2010 at 2:49 am

    >.महक जी,धन्यवाद । आपने समाज में जो गलत हो रहा है उसके खिलाफ आवाज़ उठाई।अरविन्द मिश्र जी ,आपने माफ़ी मांग ली है , तो मेरे दिल में भी आपके खिलाफ कोई मैल नहीं है।रचना जी,आप नारी के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर ध्यान देती हैं, तो कृपया अदा जी के ब्लॉग पर देखिये, की किसी के बारे में जाने-बूझे बिना , कैसे तोहमत लगा दी। अनूप जी,आपने मुझसे कठिन वक़्त में बात की और पत्र लिखा, और मेरी पोस्ट हटवा दी , आपका सम्मान करती थी , जिसके चलते मैंने वो पोस्ट हटा दी , जिसका मुझे जीवन भर अफ़सोस रहेगा। Continued…

  72. Divya said,

    September 6, 2010 at 2:51 am

    >.अमरेंद्र मुझे प्यार करता था, इसमें कोई बुराई नहीं, क्यूंकि अक्सर हम अपने से स्ट्रोंग लोगों से उनकी सच्चाई और इमानदारी से आकर्षित होकर प्यार करने लगते हैं। लेकिन अगर मैं उसके प्यार को बढ़ावा देती तो मुझसे गिरा हुआ शायद ही कोई होता। मैंने अपने छोटे भाई सदृश अमरेन्द्र की जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकती थी इसलिए उससे दूरी बना ली, इस दूरी को अमरेन्द्र बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था , और नाराजगी के चलते हर पोस्ट पर जो मेरे खिलाफ होती थी , वहां पर टिपण्णी करने लगा। उसने यहाँ तक लिख दिया की , दिव्या डॉक्टर के नामपर कलंक है। मेरे भी बर्दाश्त की एक सीमा है। इसलिए अमरेन्द्र को एक्सपोज़ करना पड़ा। प्यार करने में बुराई नहीं लेकिन , प्यार न मिल पाने पर , किसी को बर्बाद नहीं कर देना चाहिए। मैं अमरेन्द्र को बहुत पहले ही माफ़ कर चुकी हूँ, और उसके प्रति अभी भी सहानुभूति रखती हूँ। मेरी इश्वर से यही प्रार्थना है की अमरेन्द्र जहाँ भी रहे खुश रहे और तरक्की करे।यहाँ पर कुछ लोग जो मुझे जानते भी नहीं , उनकी टिप्पणियों में उनके सुसंस्कृत, निर्भीक एवं इमानदार होने का परिचय मिलता है । ऐसे लोगों को सही गलत की भरपूर पहचान होती है। ऐसे लोगों को मेरा नमन।महफूज़ जैसे सड़क-छाप रोमिओ को भूँकने दो, हाथी चला अपनी चाल।आभार ।….

  73. Divya said,

    September 6, 2010 at 3:28 am

    >.

  74. September 6, 2010 at 3:35 am

    >मैंने तो तो बहुत ही सभ्य तरीके से बात कही है…

  75. रचना said,

    September 6, 2010 at 3:54 am

    >रचना जी,आप नारी के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर ध्यान देती हैं, तो कृपया अदा जी के ब्लॉग पर देखिये, की किसी के बारे में जाने-बूझे बिना , कैसे तोहमत लगा दी।——————————–दिव्यासब को अपनी लड़ाई खुद लडनी चाहिये । हम जो भी करे उसके परिणाम भी हम ही उठाये । खोज अगर हमारी अस्मिता कि हैं तो हमे खुद करनी हैं । मै केवल और केवल महिला के समान अधिकारों कि बात करती हूँ और ये कहती हूँ कि जब भी महिला पुरुष मै तर्क होता हैं बात महिला के आचरण कपड़ो और शरीर पर ख़तम होती हैं । महिला और पुरुष को अपनी बात अपनी तरह से रखने का समान अधिकार हैं । तर्क कि लडाई मे विजय तर्क कि होनी चाहिये महिला और पुरुष कि नहीं । महफूज़ के कमेन्ट यहाँ रखने का मतलब सिर्फ इतना हैं कि उनकी सोच मे महिला का क्या स्थान हैं ।महिला पर अत्याचार उसकी अपनी कमजोरी से होता हैं । मै हमेशा कोशिश करती हूँ कि किसी भी महिला के खिलाफ कुछ भी ना लिखू । अदा और आप के बीच कि बात मे मैने अपना नजरिया आप को बता ही दिया अगर उनकी पोस्ट से आप को आपत्ति हैं तो आप को डॉक्टर होने के नाते "ओथ" को कब और क्यूँ तोड़ा जा सकता हैं इस विषय पर तर्क पूर्ण पोस्ट दे कर हम सब का ज्ञान वर्धन करना चाहिये । अदा को जो सही लगा उसने लिखा आप अपने तर्क से उसको अगर ख़ारिज करेगी तो आप का आक्रोश भी कम होगा और इस सब को एक नयी दिशा भी मिलेगी

  76. Mahak said,

    September 6, 2010 at 5:08 am

    >@दिव्या जी यह मेरा फ़र्ज़ था ,आपको बहन बोला था लेकिन शायद मैं ही अपना भाई होने का फ़र्ज़ ठीक से नहीं निभा पाया जिसका की मुझे अफ़सोस हैआपने अपनी बात रखी इसके लिए आपका शुक्रिया महक

  77. Mahak said,

    September 6, 2010 at 5:16 am

    >आप सभी का इस मुद्दे पर अपनी-२ राय रखने के लिए बहुत-२ आभार ,अब जब अरविन्द मिश्रा जी ने अपनी स्तिथि स्पष्ट करते हुए माफ़ी मांग ली है और दिव्या जी ने भी बिना कोई मैल मन में रखे उन्हें माफ भी कर दिया है तो अब इसे यहीं पर समाप्त करना उचित होगा और हमें कोशिश करनी चाहिए की फिर से ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो ,इसलिए अब इस पोस्ट पर इस पूरी बहस को समाप्त किया जाता है ,इसी कारण और भी बहुत सारे कमेंट्स को पब्लिश नहीं किया जा रहा है क्योंकि उन्हें पब्लिश करना आग में घी डालने वाली बात होगी और फिर दोनों और से ये सिलसिला जारी रहेगा जिससे की ये एक अंतहीन चर्चा बन जायेगी, आप सभी ने अपना कीमती समय दिया , उसके लिए आप सबका बहुत-२ शुक्रिया महक

  78. Shah Nawaz said,

    September 7, 2010 at 6:04 am

    >दिव्व्य जी आपकी बात, अपनी जगह ठीक है. लेकिन केवल इतने मात्र से की महफूज़ ने आपका पक्ष नहीं लिया, तो उसे सड़क छाप रोमियो कहना उचित नहीं है. हर मनुष्य को बात को समझ कर अपनी सोच रखने का हक है. मुझे लगता है कि आपने ठीक किया और उन्हें लगता है कि आपने गलत किया. हम दोनों को ही हक है अपनी राय बनाने का.

  79. Shah Nawaz said,

    September 7, 2010 at 6:04 am

    >जहाँ तक अनवर जमाल और सुरेश चिपलूनकर की बातें हैं, तो इन दोनों ने भी अपने-अपने स्वभाव के अनुसार ही लिखा है.

  80. Shah Nawaz said,

    September 7, 2010 at 6:06 am

    >रही बात अरविन्द मिश्र जी की. तो उनका अपने शब्द को कहना का अपना तर्क हो सकता है. लेकिन कोई भी तर्क किसी अपशब्द को कहने की इजाज़त नहीं देता है. जिस शब्द का प्रयोग उन्होंने किया वह बहुत ही घटिया है, हो सकता है उन्होंने उकसाने वाले शब्दों के जवाब में बोला हो, अगर यह बात सच भी है तब भी ऐसे घटिया शब्दों का प्रयोग बहुत ही घटिया बात है.

  81. ZEAL said,

    September 7, 2010 at 6:16 am

    >@- shahnawaaz -I will reply to you on my own post , on my blog. wait for my next post…You will get all answers there. ZEAL

  82. ZEAL said,

    September 7, 2010 at 7:03 am

    >रविवार की सुबह , महक जी ने मुझसे बार बार कहा की मैंने वो पोस्ट डिलीट करके गलती की, तथा उसे दुबारा लगा दूँ।मैंने कहा दुबारा नहीं लगाउंगी ।तब महक जी ने कहा की वो ब्लॉग संसद पर अरविन्द मिश्र के खिलाफ पोस्ट लगायेंगे और मेरे मना करने के बावजूद भी महक ने ये पोस्ट जबरदस्ती लगाई। सोमवार को जब हमारा परिवार पटाया से वापस आया तो मुझे इस पोस्ट , और उसपर आये कमेंट्स को देख-कर बहुत क्षोभ हुआ।मैंने महक से कहा की मोडरेशन भी नहीं लगाया?…हर ऐरे गिरे को थूकने के लिए मेरे नाम पर पोस्ट लगा दी ?….महक ने कहा मोडरेशन नहीं लगेगा।महक ने खुद सुपर हिट हीरो तो बना लिया , लेकिन किसी स्त्री को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ , उस पर पोस्ट लगाकर हर गली के आवारा कुत्तों को भूँकने के लिए आमंत्रित कर लिया।आवारा कुत्तों को जवाब देने के लिए मेरे पास वक़्त नहीं है।जो लोग इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं , वो जो चाहे अपनी राय बना सकते हैं। यदि आपको लगता है की दिव्या गलत है। तो आप लोग भी मुझे गालियाँ देने के लिए स्वतंत्र हैं।महक जी ने ये पोस्ट ही लगाई है मुझे गालियाँ खिलवाने के लिए।महक को मना किया था ये पोस्ट लगाने के लिए, उसने मेरी मर्ज़ी के खिलाफ लगाई।महक को कहा मोडरेशन लगाइए, उन्होंने वो भी नहीं किया.।महक की इस शर्मनाक हरकत के लिए इन्हें कभी क्षमा नहीं करुँगी।इस ब्लॉग संसद से सदा के लिए विदा लेती हूँ।और हाँ , इस जाहिल समाज का कोई भी कुत्ता भूँकने के बाद मुझसे जवाब की आशा नहीं रखे।

  83. Mahak said,

    September 7, 2010 at 2:50 pm

    >लगता है अरविन्द मिश्र से समझौता हो गया है ,बहुत-२ बधाई एवं भविष्य के लिए शुभकामनायें और इस संसद से विदा लेने की असीम कृपा करने के लिए बहुत-२ धन्यवाद

  84. RAJAN said,

    September 9, 2010 at 9:30 am

    >kamaal karte hai mahak ji aap bhi,ek to divya ji ke manaa karne par bhi post laga daali aur ab moderate kiye hue comment ko phir se publish kar diya. main apne cmnt. ko delete kar sakta hun par nahi karunga warna kai logo ko lagega ki maine sachmuch koi aag lagane wali baat kah di hai.jabki is cmnt. me sirf itna kaha gaya hai ki mishra ji ko bhi wo post delete kar deni chahiye.isse we chote nahi ho jayenge.lekin yadi divya ji ne bina man me mail rakhe unhe maaf kar diya hai to mere ye kahne ka adhikaar hi nahi rah jata.yadi mujhe pata hota ki ye post zeal ji ki marji bina lagaai gai hai to koi cmnt. karta hi nahi. apko unki ichcha ka samman karna chahiye tha.

  85. RAJAN said,

    September 9, 2010 at 9:33 am

    >ek baat aur abhi to aap divya ji dwara mishra ji ko di gai maafi par khush ho rahe the aur ab ise 'samjhita' kah kar kataksh kar rahe hai.waah!

  86. Mahak said,

    September 9, 2010 at 2:25 pm

    >@राजन जीवैसे तो मैं moderation के खिलाफ हूँ लेकिन दिव्या जी के बहुत अधिक कहने पर अंत में मैंने इस पोस्ट पर moderation लगाई , लेकिन ब्लॉग संसद पर इस पोस्ट के बाद नई पोस्ट के पब्लिश होते ही मैंने ब्लॉग पर से moderation हटा लिया था और वे 12 moderated कमेन्ट मेरे ब्लॉग के dashboard पर ही थे लेकिन मैं स्वयम हैरान हूँ की ये कैसे हुआ ,मैं अभी-२ शाम के करीब छह बजे घर आया हूँ ,और ब्लॉग खोलकर देखा तो वे कमेंट्स पब्लिश हुए पड़े हैं जिन्हें की नहीं होना चाहिए था ,मैं शपथ खा के कहता हूँ मैंने ऐसा नहीं किया और मैं उन्हें अभी के अभी डिलीट कर रहा हूँऔर रही बात मिश्रा जी के पोस्ट ना हटाने की तो आप भी वही बेवकूफी कर रहें हैं जो मैं कर गया ,जब तक हमें पूरी बात का ना पता हो judgemental बिलकुल नहीं होना चाहिए ,मुझे खुद को बहुत अफ़सोस है की पूरी बात जाने बिना emotional होके मैंने वो पोस्ट डाल दी जबकि सच्चाई कुछ और है ,मुझे बाद में पता चला की दिव्या जी ने पोस्ट दबाव में आकर नहीं बल्कि इस शर्त पर हटाई थी की मिश्रा जी उनके और दिव्या के बीच में हुई चैटिंग वाली पोस्ट हटा लेंगे जिससे की दूध का दूध और पानी का पानी हो रहा था ,तब जाकर दोनों ने ही एक-२ पोस्ट डिलीट कर दी ,और इसी कारण आप और मैं वो चैटिंग वाली पोस्ट नहीं पढ़ पाए ,लेकिन दोनों ने ही उसके बाद भी एक दूसरे के खिलाफ एक-२ नई पोस्ट और डाल दी जिसे पढकर मैं ज़ल्दबाज़ी में ही गलत निष्कर्ष पर पहुँच गया और ये मूर्खता कर बैठा ,खैर हमें अपनी गलतियों से सीखना चाहिएअभी भी मेरे पास बताने को बहुत कुछ है लेकिन मैं इस बवाल को और नहीं बढ़ाना चाहता,मुझे बिना पूरी बात जाने पोस्ट डालने का अत्यंत अफ़सोस है और ये मैं दिव्या जी को भी कह चुका हूँ ,लेकिन उन्हें पोस्ट डालने का नहीं किसी और चीज़ का अफ़सोस है जो की जब ईश्वर की इच्छा होगी तो सभी को पता चलेगीमहक

  87. RAJAN said,

    September 9, 2010 at 2:53 pm

    >mehak ji, jitni chat ujagar hui thee usse to bilkul nahi lag raha tha ki galti divya ji ki hai.maine mishra ji ka virodh isliye kiya kyoki wo us post par bhi apni harkat ke liye sharminda hone ke bajaay galiyon par gaaliyaan diye ja rahe the.kabhi kathee…to kabhi shurpnakha.aur ye koi unhone pahli baar nahi kiya.ek mahila yadi apko chahe jitna uksaye phir bhi. use is tarah ki gaali dena sahi nahi hai.lekin ab yadi maamla hi khatm ho chuka hai to is baat ko badhaya kyo jaye? aur mehfooj ke comments ke bare me to kya kahun aapne inhe kyo saja rakha hai? mujhe lagta hai in mahashaya ko bhi jawaab dena jaruri ho gaya hai.

  88. Mahak said,

    September 9, 2010 at 3:33 pm

    >@राजन जीआपसे फिर से अनुरोध है या सलाह है की मुझे ना उकसाएं चीज़ों को reveal करने के लिए ,इसके लिए बहुत अधिक समय चाहिए क्योंकि मेरे द्वारा reveal करने पर दूसरी और से भी प्रतिक्रिया होगी और फिर एक नई fight और controversy शुरू हो जायेगी, इससे आग बुझने की जगह बढ़ेगी और विद्यार्थी जीवन में होने के कारण मेरे पास समय की अत्यधिक कमी है ,ये पोस्ट भी भावनाओं के वेग में आकर लिख दी लेकिन सच पता लगने पर अपने आप पर अत्यंत अफ़सोस हुआ और अपनी मूर्खता पर अत्यंत क्रोध भी आया ,जब तक पूरी बात ना पता हो हमें किसी भी judgement पर नहीं जाना चाहिए ,आपको और बहुत से लोगों को अभी परदे के पीछे की कहानी पता नहीं है ,और जब आपको वो कहानी पता लगेगी तब आपके पास मेरी तरह अफ़सोस और पश्चाताप के सिवा कुछ नहीं बचेगा ,इसलिए पुन्ह प्रार्थना की अब इस विवाद को खत्म करेंदरिया वफाओं का रुकता नहीं ,मोहब्बत में डूबा हुआ इंसान झुकता नहीं,हम चुप हैं किसी की खुशी की खातिर ,और वो सोचते हैं हमारा दिल दुखता नहीं महक

  89. RAJAN said,

    September 9, 2010 at 3:34 pm

    >Chaliye jane dijiye main bhi ye hi chahta hun ki vivaad khatam ho.mujhe laga ki aapne jaanbujhkar cmnt. publish kiye hai.

  90. Mahak said,

    September 9, 2010 at 3:35 pm

    >बहुत-२ धन्यवाद आपका

  91. ZEAL said,

    September 9, 2010 at 3:49 pm

    >Mahak, You are a bastard. Even God will not forgive you.

  92. Mahak said,

    September 9, 2010 at 4:11 pm

    >Mrs.DivyaNow I can understand why Arvind Mishra called you that word,And don't talk about GOD, he is watching you, me & everyone and you have to answer so much to him about all your dirty actions, there you will not get the option of deleting evidences and hiding reality of your double faceMahak

  93. ZEAL said,

    September 9, 2010 at 4:25 pm

    >Mahak, Few months ago, Arvind was also a virtual brother like you, who ended up calling me Bitch. Now you are just another sick virtual brother who is repeating history. You are Shame in the name of humanity.You kept a post to get comments. Many are doing comment-business in name of Divya. You are no exception. The post has served the purpose very well. But you are exposed fully. You are trying to paint me in black but sensible people have brains to read you in and out. You are stigma in the name of brother and shame in the name of humanity.One day you will realize your mistake, but then it will be too late by then. Sensible people do not mock their sisters in public. .

  94. Mahak said,

    September 9, 2010 at 4:45 pm

    >Divyawhattttttttttttt………..really !!!, was arvind like a brother or your blog mentor or a father like figure or a chatting friend ?? really i am very-2 confused ,lets clear it firstAbout realising mistake , I have already realised it 3 days ago when I beleived on the lady like you and decided to stand with you, really because of men & women like you, people don't want to get into a controvercy & help others because they know that both are dirty And I am regretting that I considered a double faced cowardly lady my sister, my sister can never be a coward & a manipulative lady like you who just want to see comments in favour of her & can't tolerate & give logical answers of opponent's comments just because they are exposing your inside dirtynessEveryone will realise the mistake of standing with you soon when he will watch the proofs of this dirty side of yours with his own eyesmahak

  95. Mahak said,

    September 9, 2010 at 4:54 pm

    >Divyathose stupids who are helping you in the sick activities of yours,they will realise their foolishness soon like meMAHAK

  96. September 9, 2010 at 5:22 pm

    >खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे….

  97. September 9, 2010 at 5:26 pm

    >An old dictum….A face is the index of mind…New dictum…Whatever we/you write is the index of mind…Both are true…

  98. Mahak said,

    September 9, 2010 at 5:29 pm

    >महफूज़ भाई ,I am fully agree with you, thanx for showing the true face of this lady

  99. RAJAN said,

    September 10, 2010 at 12:31 am

    >mahak ji,jab divya ji ne is blog se naam hi wapaps le liya hai,jab mishra ji ne maafi maang lee hai,jab aap khud vivaad ko badhaava nahi dena chahte to kya hi achcha ho ki aap ye post hi yahan se hata le takee baat aur na badhe.ye meri request hai aapse.plz.

  100. RAJAN said,

    September 10, 2010 at 1:48 am

    >meri divya ji se bhi haath jodkar ye vintee hai ki we sanyam se kaam le aur bhavavesh me koi pratikriya na de.main to kewal request hi kar sakta hun.

  101. ZEAL said,

    September 10, 2010 at 1:58 am

    >Rajan, Do not suggest anyone to delete the post. This post is a proof of many so called brothers. These men are stigma in the name of men. They are trying to paint a lady in black. I am a total stranger to Mahak and Mehfooz, but still they are showing too much interest in me. By abusing and criticizing me, they won't gain anything.They think all women are emotional fools and can easily be trapped. But they are grossly mistaken here . Mahak was trying to be a saviour of women. He thought he will become a saint by putting this post. But my advocate Mahak had an internal agreement with Mehfooz kind of miscreants. [ Match fixing ]Mahak was counting the number of comments on this post , he was not at all worried about a lady who was being abused by all Tom , dick and Harrys. Mahak took a bold step by posting this post , but he ran away from the battle. Cowards like Mahak can be anything but never a brother of a woman.I am tired of this fake brotherhood online. I declare here- I am not a sister of anyone here online. I am just Divya. Let this post be here for the benefit of innocent readers , irrespective of gender.regards,

  102. Mahak said,

    September 10, 2010 at 5:06 am

    >DivyaDon't worry, this post will never be deleted, I am not a coward or selfish like you who can delete a post by putting condition of quad-pro-quo i.e something in returnI,Mehfooz & no one else need to paint a guy in black who is already black, it is just GOD's rain comes who wash the white colour of your & showing some of us your true colours,many are still trapped in this false goody goody image of yours but as I said naa they will realise their mistake soon as GOD still existAnd who ran away from the battle ?? who ran way from the questions of mehfooz, you do not deserve to say this to me,you have to answer a lot to yourself,to your soul(which I think is very-2 unconsious),I took this bold step which I am regretting and will always regret for the rest of my life that I did it for the cowardly lady like you who have no guts to give logical answers to your opponents questions and just want to listen which is benefiiting her I did what I can did and I told you in the telephone conversation too that until unless you will not give me the full details ,I can't do anything,give answers of questions raised by mehfooz yourself or I can take on Mehfooz if you will send me the full chat which mehfooz was referring to, but you know it that sending that chat will expose this innocent & fairy image of yours completelyAfter this incident, I am not that fool anymore who will now easily beleive & become emotional from the false sentiments shown by anybody,now I have learned some important lessons from this whole controvercy that becoming emotionaly blind & judgemental for anyone without knowing the full facts is one of the biggest foolishness & stupidityAnd you are right that let this post be here for the benefit of innocent readers,irrespective of gender,I am assuring you Mrs.Divya that this post will definitely remain here for the sake of innocent readersAnd now lets end this act of Provocation here because I am not going to give you any breaking news which you can highlight & gain furthermore sympathy of innocent men & women who do not know what the facts really areMahak

  103. Mahak said,

    September 10, 2010 at 5:21 am

    >Rajan JiI told you in mail too that the best way to stop the reaction is to 1st stop the action,as Mrs.Divya said we should keep this post for the benefit of innocent readers & I also feel the same thingbut what we can do is to bury the matter here as who have this much time to produce another chain reaction especially I don't have, Mrs.Divya is trying to provoke me so that I can give some breaking news to her through which she can gain furthermore sympathy but as I said in my above comment that I will not going to give her any breaking news, so it depends entirely on her whether to keep the matter on and on and on or to end itI am sure she will choose to keep it on and on and on,and therefore I can't do anythinghope you will understandMahak

  104. ZEAL said,

    September 10, 2010 at 5:28 am

    >.Mahak, Now stop trying to chat with me, You will never get a response there. I do not trust you. All your messages I am giving to a friend , as a witness. Talk in public or just get lost !.

  105. Mahak said,

    September 10, 2010 at 5:35 am

    >DivyaI can understand your cowardness for not to debate as was revealed too earlier,And regarding of messages giving to friend as a witness, I have no problem with that,you can give it to as many you can, Until unless I did anything wrong I do not have any fearMahak

  106. September 10, 2010 at 11:35 am

    >ब्लॉग सांसद को अगर सामाजिक , राजनैतिक और मनोवैज्ञानिक विषयों पर विचार करने के लिए मंच बनाये रखें तो इसकी मर्यादा कायम रह सकती है. किसी के भी निजी मामले को निजता के लिए हितकारी लगने तक तो हम खुद जियें और और आक्षेपक लगते ही सार्वजनिक करके राय मांगे या फिर दूसरों कि दृष्टि में गलत छवि बनाने का प्रयास करें तो ऐसे मुद्दों के लिए ब्लॉग सांसद का प्रयोग बिल्कुल न किया जाय. एक स्वस्थ विचार मंच रहने दीजिये. भविष्य में ऐसा न करें तो ब्लॉग जगत के लिए हिt में होगा.


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