>दूसरों के बेटों को मरने दो, मेरा बेटा नहीं :- कश्मीर के आज़ादी आंदोलन का पाखण्ड, खोखलापन और हकीकत… … Asiya Andarabi, Azad Kashmir, Anti-India Kashmir Voilence

>एक मोहतरमा हैं, नाम है “असिया अन्दराबी”। यह मोहतरमा कश्मीर की आज़ादी के आंदोलन की प्रमुख नेत्री मानी जाती हैं, एक कट्टरपंथी संगठन चलाती हैं जिसका नाम है “दुख्तरान-ए-मिल्लत” (धरती की बेटियाँ)। अधिकतर समय यह मोहतरमा अण्डरग्राउण्ड रहती हैं और परदे के पीछे से कश्मीर के पत्थर-फ़ेंकू गिरोह को नैतिक और आर्थिक समर्थन देती रहती हैं। सबसे तेज़ आवाज़ में कश्मीर की आज़ादी की मांग करने वाले बुज़ुर्गवार अब्दुल गनी लोन की खासुलखास सिपहसालारों में इनकी गिनती की जाती है। मुद्दे की बात पर आने से पहले ज़रा इनके बयानों की एक झलक देख लीजिये, जो उन्होंने विभिन्न इंटरव्यू  में दिये हैं- मोहतरमा फ़रमाती हैं,

1) मैं “कश्मीरियत” में विश्वास नहीं रखती, मैं राष्ट्रीयता में विश्वास करती हूं… दुनिया में सिर्फ़ दो ही राष्ट्र हैं, मुस्लिम और गैर-मुस्लिम…

(फ़िर पता नहीं क्यों आज़ादी के लिये लड़ने वाले कश्मीरी युवा इन्हें अपना आदर्श मानते हैं? या शायद कश्मीर की आज़ादी वगैरह तो बनावटी बातें हैं, उन्हें सिर्फ़ मुस्लिम और गैर-मुस्लिम की थ्योरी में भरोसा है?)

2) मैं अंदराबी हूं और हम सैयद रजवाड़ों के वंशज हैं… मैं कश्मीरी नहीं हूं मैं अरबी हूं… मेरे पूर्वज अरब से मध्य एशिया और फ़िर पाकिस्तान आये थे…

(इस बयान से तो लगता है कि वह कहना चाहती हैं, कि “मैं” तो मैं हूं बल्कि “हम और हमारा” परिवार-खानदान श्रेष्ठ और उच्च वर्ग का है, जबकि ये पाकिस्तानी-कश्मीरी वगैरह तो ऐरे-गैरे हैं…)

3) मैं खुद को पाकिस्तानी नहीं, बल्कि मुस्लिम कहती हूं…

4) दुख्तरान-ए-मिल्लत की अध्यक्ष होने के नाते मेरा ठोस विश्वास है कि पूरी दुनिया सिर्फ़ अल्लाह के हुक्म से चलने के लिये ही बनी है… इस्लामिक सिद्धांतों और इस्लामिक कानूनों की खातिर हम भारत से लड़ रहे हैं, और इंशा-अल्लाह हम एक दिन कश्मीर लेकर ही रहेंगे… हमें पूरी दुनिया में इस्लाम का परचम लहराना है…

खैर यह तो हुई इनके ज़हरीले और धुर भारत-विरोधी बयानों की बात… ताकि आप इनकी शख्सियत से अच्छी तरह परिचित हो सकें… अब आते हैं असली मुद्दे पर…

पिछले माह एक कश्मीरी अखबार को दिये अपने बयान में अन्दराबी ने कश्मीर के उन माता-पिताओं और पालकों को लताड़ लगाते हुए उनकी कड़ी आलोचना की, जिन्होंने पिछले काफ़ी समय से कश्मीर में चलने वाले प्रदर्शनों, विरोध और बन्द के कारण उनके बच्चों के स्कूल और पढ़ाई को लेकर चिंता व्यक्त की थी। 13 जुलाई के बयान में अन्दराबी ने कहा कि “कुछ ज़िंदगियाँ गँवाना, सम्पत्ति का नुकसान और बच्चों की पढ़ाई और समय की हानि तो स्वतन्त्रता-संग्राम का एक हिस्सा हैं, इसके लिये कश्मीर के लोगों को इतनी हायतौबा नहीं मचाना चाहिये… आज़ादी के आंदोलन में हमें बड़ी से बड़ी कुर्बानी के लिये तैयार रहना चाहिये…”।

यह उग्र बयान पढ़कर आपको भी लगेगा कि ओह… कश्मीर की आज़ादी के लिये कितनी समर्पित नेता हैं? लेकिन 30 अप्रैल 2010 को जम्मू-कश्मीर के उच्च न्यायालय में दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक इस फ़ायरब्राण्ड नेत्री असिया अन्दराबी के सुपुत्र मोहम्मद बिन कासिम ने पढ़ाई के लिये मलेशिया जाने हेतु आवेदन किया है और उसे “भारतीय पासपोर्ट” चाहिये… चौंक गये, हैरान हो गये न आप? जी हाँ, भारत के विरोध में लगातार ज़हर उगलने वाली अंदराबी के बेटे को “भारतीय पासपोर्ट” चाहिये… और वह भी किसलिये? बारहवीं के बाद उच्च अध्ययन हेतु…। यानी कश्मीर में जो युवा और किशोर रोज़ाना पत्थर फ़ेंक-फ़ेंक कर, अपनी जान हथेली पर लेकर 200-300 रुपये रोज कमाते हैं, उन गलीज़ों में उनका “होनहार” शामिल नहीं होना चाहता… न वह खुद चाहती है, कि कहीं वह सुरक्षा बलों के हाथों मारा न जाये…। कैसा पाखण्ड भरा आज़ादी का आंदोलन है यह? एक तरफ़ तो मई से लेकर अब तक कश्मीर के स्कूल-कॉलेज खुले नहीं हैं जिस कारण हजारों-लाखों युवा और किशोर अपनी पढ़ाई का नुकसान झेल रहे हैं, पत्थर फ़ेंक रहे हैं… और दूसरी तरफ़ यह मोहतरमा लोगों को भड़काकर, खुद के बेटे को विदेश भेजने की फ़िराक में हैं…

अब सवाल उठता है कि “भारतीय पासपोर्ट” ही क्यों? जवाब एकदम सीधा और आसान है कि यदि असिया अंदराबी के पाकिस्तानी आका उसके बेटे को पाकिस्तान का पासपोर्ट बनवा भी दें तो विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पाकिस्तानी पासपोर्ट को “एक घुसपैठिये” के पासपोर्ट की तरह शंका की निगाह और “गुप्त रोगी” की तरह से देखा जाता है, बारीकी से जाँच की जाती है, तमाम सवालात किये जाते हैं, जबकि “भारतीय पासपोर्ट” की कई देशों में काफ़ी-कुछ “इज्जत” बाकी है अभी… इसलिये अंदराबी भारत से नफ़रत(?) करने के बावजूद भारत का ही पासपोर्ट चाहती है। इसे कहते हैं धुर-पाखण्ड…

पिछले वर्ष जब मोहम्मद कासिम का चयन जम्मू की फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट टीम में हो गया तो आसिया अंदराबी ने उसे कश्मीर वापस बुला लिया, कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि “मैं अपने बेटे को “हिन्दुस्तान” की टीम के लिये कैसे खेलने दे सकती थी? जो देश हमारा दुश्मन है, उसके लिये खेलना असम्भव है…” (लेकिन तथाकथित दुश्मन देश का पासपोर्ट लिया जा सकता है…)…

आसिया अंदराबी, यासीन मलिक, अब्दुल गनी लोन जैसे लोगों की वजह से आज हजारों कश्मीरी युवा मजबूरी में कश्मीर से बाहर भारत के अन्य विश्वविद्यालयों में अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, अपने घरों और अपने परिजनों से दूर… जबकि कश्मीर से निकलने वाले उर्दू अखबार “उकाब” के सम्पादक मंज़ूर आलम ने लिखा है कि कश्मीर के उच्च वर्ग के अधिकांश लोगों ने अपने बच्चों को कश्मीर से बाहर भेज दिया है, जैसे कि एक इस्लामिक नेता और वकील मियाँ अब्दुल कय्यूम की एक बेटी दरभंगा में पढ़ रही है, जबकि दूसरी भतीजी जम्मू के डोगरा लॉ कॉलेज की छात्रा है, दो अन्य भतीजियाँ और एक भाँजी भी पुणे के दो विश्वविद्यालयों में पढ़ रही हैं…। जो लोग कश्मीर में मर रहे हैं, पत्थर फ़ेंक रहे हैं, गोलियाँ खा रहे हैं… वे या तो गरीब हैं और कश्मीर से बाहर नहीं जा सकते या फ़िर इन नेताओं की ज़हरीली लेकिन लच्छेदार धार्मिक बातों में फ़ँस चुके हैं…। अब उनकी स्थिति इधर कुँआ, उधर खाई वाली हो गई है, न तो उन्हें इस स्थिति से निकलने का कोई रास्ता सूझ रहा है, न ही अलगाववादी नेता उन्हें यह सब छोड़ने देंगे… क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो उनकी “दुकान” बन्द हो जायेगी…

आप सोच रहे होंगे कि आसिया अंदराबी का संगठन “दुख्तरान-ए-मिल्लत” करता क्या है? यह संगठन मुस्लिम महिलाओं को “इस्लामी परम्पराओं और शरीयत” के अनुसार चलने को “बाध्य” करता है। इस संगठन ने कश्मीर में लड़कियों और महिलाओं के लिये बुरका अनिवार्य कर दिया, जिस लड़की ने इनकी बात नहीं मानी उसके चेहरे पर तेज़ाब फ़ेंका गया, किसी रेस्टोरेण्ट में अविवाहित जोड़े को एक साथ देखकर उसे सरेआम पीटा गया, कश्मीर के सभी इंटरनेट कैफ़े को चेतावनी दी गई कि वे “केबिन” हटा दें और किसी भी लड़के और लड़की को एक साथ इंटरनेट उपयोग नहीं करने दें… कई होटलों और ढाबों में घुसकर इनके संगठन ने शराब की बोतलें फ़ोड़ीं (क्योंकि शराब गैर-इस्लामिक है)… तात्पर्य यह कि आसिया अंदराबी ने “इस्लाम” की भलाई के लिये बहुत से “पवित्र काम” किये हैं…।

अब आप फ़िर सोच रहे होंगे कि जो काम आसिया अंदराबी ने कश्मीर में किये, उसी से मिलते-जुलते, इक्का-दुक्का काम प्रमोद मुतालिक ने भी किये हैं… फ़िर हमारे सो कॉल्ड नेशनल मीडिया में प्रमोद मुतालिक से सम्बन्धित खबरें हिस्टीरियाई अंदाज़ में क्यों दिखाई जाती हैं, जबकि आसिया अंदराबी का कहीं नाम तक नहीं आता? कोई उसे जानता तक नहीं… कभी भी आसिया अंदराबी को “पिंक चड्डी” क्यों नहीं भेजी जाती? जवाब आपको मालूम है… न मालूम हो तो फ़िर बताता हूं, कि हमारा दो कौड़ी का नेशनल मीडिया सिर्फ़ हिन्दू-विरोधी ही नहीं है, बल्कि जहाँ “इस्लाम” की बात आती है, तुरन्त घिघियाए हुए कुत्ते की तरह इसकी दुम पिछवाड़े में दब जाती है। यही कारण है कि प्रमोद मुतालिक तो “नेशनल विलेन” है, लेकिन अंदराबी का नाम भी कईयों ने नहीं सुना होगा…।

मीडिया को अपनी जेब में रखने का ये फ़ायदा है… ताकि “भगवा आतंकवाद” की मनमानी व्याख्या भी की जा सके और किसी चैनल पर “उग्र हिन्दूवादियों की भीड़ द्वारा हमला” जैसी फ़र्जी खबरें भी गढ़ी जा सकें… जितनी पाखण्डी और ढोंगी आसिया अंदराबी अपने कश्मीर के आज़ादी आंदोलन को लेकर हैं उतना ही बड़ा पाखंडी और बिकाऊ हमारा सो कॉल्ड “सेकुलर मीडिया” है…

अक्सर आप लोगों ने मीडिया पर कुछ वामपंथी और सेकुलर बुद्धिजीवियों को कुनैन की गोलीयुक्त चेहरा लिये यह बयान चबाते हुए सुना होगा कि “कश्मीर की समस्या आर्थिक है, वहाँ गरीबी और बेरोज़गारी के कारण आतंकवाद पनप रहा है, भटके हुए नौजवान हैं, राज्य को आर्थिक पैकेज चाहिये… आदि-आदि-आदि”। अब चलते-चलते कुछ रोचक आँकड़े पेश करता हूं –

1) जम्मू-कश्मीर की प्रति व्यक्ति आय 17590 रुपये है जो बिहार, उप्र और मप्र से अधिक है)

2) कश्मीर को सबसे अधिक केन्द्रीय सहायता मिलती है, इसके बजट का 70% अर्थात 19362 करोड़ केन्द्र से (कर्ज़ नहीं) दान में मिलता है।

3) इसके बदले में ये क्या देते हैं, 2008-09 में कश्मीर में “शहरी सम्पत्ति कर” के रुप में कुल कलेक्शन कितना हुआ, सिर्फ़ एक लाख रुपये…

4) इतने कम टैक्स कलेक्शन के बावजूद जम्मू-कश्मीर राज्य पिछड़ा की श्रेणी में नहीं आता, क्योंकि यहाँ के निवासियों में से 37% का बैंक खाता है, 65% के पास रेडियो है, 41% के पास टीवी है, प्रति व्यक्ति बिजली खपत 759 किलोवाट है (बिहार, उप्र और पश्चिम बंगाल से अधिक), 81% प्रतिशत घरों में बिजली है सिर्फ़ 15% केरोसीन पर निर्भर हैं (फ़िर बिहार, उप्र, राजस्थान से आगे)। भारत के गाँवों में गरीबों को औसतन 241 ग्राम दूध उपलब्ध है, कश्मीर में यह मात्रा 353 ग्राम है, स्वास्थ्य पर खर्चा प्रति व्यक्ति 363 रुपये है (तमिलनाडु 170 रुपये, आंध्र 146 रुपये, उप्र 83 रुपये)। किसी भी मानक पर तुलना करके देख लीजिये कि जम्मू कश्मीर कहीं से भी आर्थिक या मानव सूचकांक रुप से पिछड़ा राज्य नहीं है। यदि सिर्फ़ आर्थिक पिछड़ापन, गरीबी, बेरोज़गारी ही अलगाववाद का कारण होता, तब तो सबसे पहले बिहार के भारत से अलग होने की माँग करना जायज़ होता, लेकिन ऐसा है नहीं… कारण सभी जानते हैं लेकिन भौण्डे तरीके से “पोलिटिकली करेक्ट” होने के चक्कर में सीधे-सीधे कहने से बचते हैं कि यह कश्मीरियत-वश्मीरियत कुछ नहीं है बल्कि विशुद्ध इस्लामीकरण है, और “गुमराह” “भटके हुए” या “मासूम” और कोई नहीं बल्कि धर्मान्ध लोग हैं और इनसे निपटने का तरीका भी वैसा ही होना चाहिये…बशर्ते केन्द्र में कोई प्रधानमंत्री ऐसा हो जिसकी रीढ़ की हड्डी मजबूत हो और कोई सरकार ऐसी हो जो अमेरिका को जूते की नोक पर रखने की हिम्मत रखे…

साफ़ ज़ाहिर है कि कश्मीर की समस्या विशुद्ध रुप से “धार्मिक” है, वरना लोन-मलिक जैसे लोग कश्मीरी पण्डितों को घाटी से बाहर न करते, बल्कि उन्हें साथ लेकर अलगाववाद की बातें करते। अलगाववादियों का एक ही मकसद है वहाँ पर “इस्लाम” का शासन स्थापित करना, जो लोग इस बात से आँखें मूंदकर बेतुकी आर्थिक-राजनैतिक व्याख्याएं करते फ़िरते हैं, वे निठल्ले शतुरमुर्ग हैं… और इनका बस चले तो ये आसिया अंदराबी को भी “सेकुलर” घोषित कर दें… क्योंकि ढोंग-पाखण्ड-बनावटीपन और हिन्दू विरोध तो इनकी रग-रग में भरा है… लेकिन जब केरल जैसी साँप-छछूंदर की हालत होती है तभी इन्हें अक्ल आती है…

सन्दर्भ :- http://www.thehindu.com/news/states/other-states/article574617.ece

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28 Comments

  1. nitin tyagi said,

    September 6, 2010 at 6:55 am

    >sahi likha hai कश्मीर में जो लड़ाई है, वो मजहब की लड़ाई है ,स्वतंत्रता की नहीं |अगर ये स्वतंत्रता की लड़ाई होती तो वहां से हिन्दुओं को भगाया न जाता बल्कि वो भी लड़ाई में शामिल होते |

  2. September 6, 2010 at 7:12 am

    >सबसे पहले तो एक बात कहूँगा… आज की पोस्ट बहुआयामी है. स्पष्ट तर्क पूर्ण और आईने की तरह साफ़ है.लेकिन लाख टेक का सवाल वही है जस का तस…. सबक सीखने के लिए कोई तैयार ही नहीं है इस सेकुलर देश में.

  3. September 6, 2010 at 7:15 am

    >आसिया अंदराबी का संगठन "दुख्तरान-ए-मिल्लत"?भाई इस नेक संगठन के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए शुक्रिया!!

  4. September 6, 2010 at 7:25 am

    >ये इस्लाम का भूत इस देश को ले डूबेगा. इनका इलाज है बन्दूक– इनको वापस जबरदस्ती कन्वर्ट कराओ, न माने तो यहाँ से भगाओ और न भागें तो मारो. इसके अलावा कुछ नहीं हो सकता. और देख लेना हिन्दू नहीं तो एक दिन इस काम को ये स्वयं उल्टा अंजाम दे देंगे और डंके की चोट पर इसको कहते भी हैं. देखना आने वाले १०-२० साल में ही क्लियर हो जायेगा.सुरेश जी मैंने पहले भी आपसे विनती की थी कि आप इस्लाम को धर्म की संज्ञा न दें मजहब ही बोलें और विशुद्ध धार्मिक नहीं कहें विशुद्ध इस्लामिक मजहबी मामला है. धार्मिक कहने से लोगो में अपने धर्म के बारे में भी काफी कनफ्यूजन हो जाता है आप मानो या न मानो. खैर बहुत संगीन मामले की तह तक गये हैं आप और वास्तव में हम तो इस मोहतरमा को जानते नहीं थे. वाह रे हमारा सेकुलर मीडिया.

  5. September 6, 2010 at 8:06 am

    >चिपलूनकर जी आप हमेशा इन देशविरोधी ताकतों का पर्दाफास करते रहते हैं . मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ की कश्मीर की समस्या राजनेतिक नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से धार्मिक है. पर हमारे कुछ तथाकथित सेकुलर देशवासी कश्मीर में शांति बहल कराने की सरकारी कोशिशों का मानवतावादी चोगा पहन कर विरोध करते हैं तो बड़ा गुस्सा आता है. पर क्या करें सारा गुस्सा अपने ब्लॉग पर ही निकल पाते हैं…..

  6. Meenu Khare said,

    September 6, 2010 at 8:15 am

    >अंदराबी को सेकुलर घोषित करवाने के लिए हम सबको कोशिश करनी होगी.तभी हम सच्चे सेकुलर होंगे. अंदराबी और उनके संगठन के बारे में जानकारी देने का धन्यवाद.

  7. September 6, 2010 at 11:01 am

    >कश्मीर समस्या सुद्ध द्विवराष्ट्रबाद पर आधारित है जिसे सेकुलर देश द्रोही क़े समझ नहीं सकते इसको हम अरबियन राष्ट्राबाद भी कह सकते है आखिर इन्हें कैसे समझाया जाय वास्तव में लत क़े देवता बात से नहीं मानते.

  8. Anonymous said,

    September 6, 2010 at 11:55 am

    >"angry women and restive youth are courageously defying Indian rule, is enough to put off any sensitive sympathiser. “Bhooka nanga Hindustan; Jaan se pyaara Pakistan.” (Starving and tattered India we reject; Pakistan – land of our dreams – we embrace"Javednaqvi-Dawn

  9. Manish said,

    September 6, 2010 at 12:54 pm

    >Sir ji,lagataa hai, aap ne Antim line likhane mein bhool ho gayee hai,In bhaandon ko kabhi akal nahin aaa sakati, kyun ki use to woh bechkar kab k khaa gaye hain………..

  10. रचना said,

    September 6, 2010 at 1:43 pm

    >ये खबर काफी दिन पहले अखबार मै पढी थी बेटी को मलेशिया भेजने वाली उस दिन एक सवाल मन मै उठा था हम सब जो सोनिया के आलोचक हैं वो कभी उसके कुछ पक्षों कि तारीफ़ भी कर दे ।आप का लेख हेमशा बहुत रिसर्च जकर के लिखा जाता हैं कोई किताब छप वाये

  11. September 6, 2010 at 1:45 pm

    >काँग्रेस सरकार अच्छी तरह जानती है कि कश्मीर में क्या हो रहा है और कट्टरपंथी क्या चाहते है वर्ना प्रधानमंत्री जी विपच्क्षी दल से कश्मीर को स्वायायात्ता के लिए नहीं गिडगिडाते | कांग्रेस का कोई भी सदस्य क्यों नहीं इस मोहतरमा के बारे बोलता है, क्यों नहीं देशद्रोह के केस में जेल में डालकर देशद्रोह का मुक़दमा चलते| नहीं करेंगे वोट का लालच देश से भी बड़ा है उन सबो के लिए |अति सुन्दर लेख है मै तो इस महान खलनायिका का नाम कभी भी न्यूज में नहीं सुना था | ना ही कभी देखा था ( माफ कीजियेगा बुरुका में कैद है टी देख भी नहीं ककता हू)मै चाहता हू कि आप बेनाम वाले पोस्ट को प्रदर्शित ही ना कारे तो अच्छा रहेगा|बेनाम पोस्ट भेजने वाले को कहता हू कि “ अगर दम है तो खुल के सामने आओ ताकि तुम्हे जबाब दिया जा सके, औरतो वाले बुर्के में छुपकर ना पोस्ट किया करो “

  12. September 6, 2010 at 2:10 pm

    >“Bhooka nanga Hindustan; Jaan se pyaara Pakistan.”इन गद्दारों को तो वही एयर ड्रॉप कर देना था !

  13. September 6, 2010 at 2:15 pm

    >सेकुलरिज्म के पहरुओं का एक कमाल और. जिन जोसेफ साहब का हाथ काट दिया था इस्लाम के मुहाफिजों ने, उन्हीं जोसेफ साहब को कालेज से बर्खास्त कर दिया गया धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में….यह अलग बात है कि मन जी की सुपुत्री और कई इतिहास कार राम-सीता, द्रौपदी के बारे में कुछ भी लिखें, एम०एफ०हुसैन कुछ भी बनाये तो धार्मिक भावनायें नहीं भड़कती..कहां है अब रुदालियां…

  14. September 6, 2010 at 5:15 pm

    >…सौ बात की एक बात… कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है… और चाहे कुछ भी कर्बानी या कीमत देनी पड़े…कश्मीर भारत का ही हिस्सा रहेगा…किसी भी दूसरे विकल्प के बारे में सोचना तक उन मूल्यों से दगा करने के समान है, जिनके आधार पर हमारा देश अस्तित्व मे आया है।कश्मीर भारत के लिये समस्या नहीं बल्कि इम्तहान है… यह चुनौती भी है और अवसर भी…

  15. September 6, 2010 at 5:40 pm

    >सुरेश जी,एक कड़क सैल्युट आपको इस दुर्लभ पोस्ट के लिये।काश कि ब्लौग और मिडिया में कश्मीर को लेकर अपने मुल्क के खिलाफ जहर उगलने वाले तमाम "नयनसुखों" की नजर इस पोस्ट पर पड़े…!!!o' wishful thinking!!!

  16. Mahak said,

    September 6, 2010 at 6:10 pm

    >मैं गोदियाल जी की बात से सहमत हूँ ,ऐसे लोगों को लात मारकर इनके बाप पाकिस्तान में ही भेज देना चाहिए ,ये deserve ही नहीं करते हिन्दुस्तान में मिलने वाली बेपनाह स्वंतंत्रता और लोकतंत्र की प्रणाली को महक

  17. September 6, 2010 at 6:21 pm

    >क्या खूब और सटीक लिखा है. पूर्णतः सहमत. सुरेश भाई मुझे तो आपकी चिंता होने लगी है. जिस तरह से भाजपा सरकार मप्र में चल रही है, कोई बड़ी बात नहीं कि अगले चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता में आ जाये. ऐसा हो गया तो ये कांग्रेसी सरकार आपको टाडा, पोटा, मकोका और The Madhya Pradesh Terrorism and Disruptive Activities and Control of Organised Crimes Law वगैरह वगैरह लगा कर ऐसा अंदर करेगी कि बाहर आना मुश्किल हो जायेगा. और कुछ नहीं तो सीबीआई तो है ही. उसी को पगलाए सांड की तरह पीछे लगा देगी. भैया अपने बचाव का अभी से इंतजाम करना शुरू कर दो.

  18. ZEAL said,

    September 7, 2010 at 3:33 am

    >@–जितनी पाखण्डी और ढोंगी आसिया अंदराबी अपने कश्मीर के आज़ादी आंदोलन को लेकर हैं उतना ही बड़ा पाखंडी और बिकाऊ हमारा सो कॉल्ड "सेकुलर मीडिया" है… साथ में हमारा मीडिया नपुंसक भी है।मीडिया अगर चाहे तो देश के लाखों लोगों की आवाज़ को बुलंद कर सकता है । लेकिन नहीं , वो तो खुश है , दो जून की रोटी मिल गयी , बाकी से उन्हें क्या ?आसिया अंदराबी, जैसे नेता एवं नेत्री हमारे देश में भी हैं , किस क्षण बिक जायेंगे , पता ही नहीं चलेगा ।माधवी गुप्ता जैसी महोदय! , जो देश को कई वर्षों से बेच कर खा रही हैं, देखिये तो इनका प्रकरण कितनी तेज़ी से गर्भ गृह में छुप गया।और गुंडागर्दी के सरमौर श्री राज ठाकरे , जो मराठी का झंडा लिए घूमते हैं, वो अपने सुपुत्र को , एडमिशन दिलाना चाहते हैं , अंग्रेजी विद्यालय में।धन्य हैं ऐसे डबल-स्टेंडर्ड वाली मानसिकता रखने वाले।किसी भी कीमत पर , मोहतरमा अंदराबी के सुपुत्र को भारतीय पासपोर्ट नहीं मिलना चाहिए। zealzen.blogspot.comZEAL.

  19. September 7, 2010 at 8:26 am

    >अपने इलाके के प्रति वफादार कुत्ता भौंकता व काटता भी है. अतः मीडिया को कुत्ता कहना मूर्खता है.शेष महान धर्मान्ध "लैडी" के बारे में शानदार जानकारी दी है. मैं तो मोहतरमा के दोगलेपन 'फैन' हो गया हूँ.

  20. September 7, 2010 at 10:32 am

    >"दूध मांगोगे तो खीर देँगेकश्मीर मांगोगे तो ऊपर से नीचे तक चीर देंगे ".अब कश्मीर मे सेना को सफाई अभियान चलाना चाहिये.और जो भी पाकिस्तानी समर्थक दिखायी पड़े. उसे तुरंत गोली से उड़ा देना चाहिये.दस दिन मे सब सफाई हो जायेगी.बोलोजय श्री रामजय जय श्री राम

  21. September 7, 2010 at 3:24 pm

    >ऐसी ही दोगली नीतियों ने देश का बंटाढार करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी है।

  22. RAJENDRA said,

    September 8, 2010 at 4:43 am

    >कश्मीर समस्या एक हथियार है जिसे कांग्रेस ने अपनी संजीवनी के तौर पर प्रयोग किया है दिल से सुलझाने कोशिश कभी की ही नहीं. लोग वल्लभ भाई पटेल को यों ही याद नहीं करते

  23. DEEPAK BABA said,

    September 8, 2010 at 6:08 am

    >ज्ञान चक्षु खोलने वाला लेख……..दद्दा प्रणाम.

  24. September 8, 2010 at 7:21 am

    >सुरेश भाई आज सैक्यूलर बिरादरी नहीं दिख रही यहां कमैट मारने के लिए…..कश्मीरियत तो उसी दिन मर गई थी जिस दिन पंडित वहां से निकाल दिये गये थे…..अब तो इस्लाम के लिए जिहाद ही हो रहा है.

  25. Meenu Khare said,

    September 8, 2010 at 3:54 pm

    >एक बार फिर सलाम आपकी लेखनी को.भारतवासियों की आँखें कब खुलेंगी?नाटकबाजी का सेकुलर चश्माँ कब उतरेगा?अब वक़्त चम्चेगीरी का नहीं है कुछ करना होगा वर्ना …

  26. Rajesh said,

    September 8, 2010 at 5:13 pm

    >निसन्देह अति उत्तम. सही बात सही शब्दों में कही गयी है.कटु सत्य को कहने के लिये मीठे शब्दों का प्रयोग न तो सम्भव है और न उचित है.आप की आग उगलती इस लेखनी की ज़रूरत आज सोये देश को जगाने के लिये है. तत्यों के बिना बात में प्रभाव पैदा नहीं हो सकता. आप अपनी हर बात प्रमाणों से परिपुष्ट करके प्रस्तुत करते हैं, यह बहुत ज़रूरी है. आपको साधुवाद एवं शुभकामनायें !

  27. September 9, 2010 at 12:44 am

    >mai to pehali bar aayee aapke blog par ya shayad doosari bar. Asiya Anderabi nam hee pahali bar suna. Congress ka secularism to muslim tushtikaran hai ye jahir see bat hai. Are jab Afjzal Guru aur Kasab abhee tak sarkari mehman ban kar chicken biryani kha rahe hain to ye Anderabi ji ne to kich iya hee nahee hai………..Aapka lekh jeewant aur jwalnt dono. Abhar aur salute dono.

  28. October 9, 2010 at 5:03 pm

    >lagta hai hindustan me hinduon ka rahna pap ho gaya hai


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