>नफ़रत सी हो गई है मोहब्बत के नाम से

>

1.
आप  गैरों  की  बातें  करते  हो ,हमने  अपनों  को  आजमाया  है ,
लोग  काँटों  से  बचके  चलते  हैं ,हमने  फूलों  से  जख्म  खाया  है .


2.
मत  पूछ  मेरे  सब्र  की  इन्तहा  कहाँ  तक  है ,
तू  सितम  कर  ले  तेरी  ताकत  जहाँ  तक  है ,
वफ़ा  की  उमीद  जिन्हें  होगी उन्हें  होगी ,
हमें  तो देखना  है की  तू  ज़ालिम  कहाँ  तक  है




3.
दर्द  में  कोई  मौसम  प्यारा  ना  हुआ ,
दिल  हुआ  प्यासा  लेकिन  पानी  से  भी  गुजरा  ना  हुआ ,
देखो  ज़रा  कोई  बेबसी  हमारी ,
हम  उसके  हो  गए  जो  हमारा  ना  हुआ


4.
लोग कहते हैं की हमें आदत है मुस्कुराने की,
पर वो क्या जानें की ये अदा है गम छुपाने की


5.
कभी  की  होगी  सूरज  ने  चाँद  से  मोहोब्बत , तभी  तो  चाँद  में  दाग  है ,
मुमकिन  है  की  चाँद  से  हुई  हो  बेवफाई , तभी  तो  सूरज  में  आग  है


6.
फैसला जो भी सुनाया जाएगा,
हमें पता है हमें ही मुजरिम बनाया जाएगा,
वक़्त ने हमें सताया है बहुत,
हमसे ना अब मुस्कुराया जाएगा




7.
दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते!
गम के आंसू न बहते तो और क्या करते!
उसने मांगी थी हमसे रौशनी की दुआ!
हम खुद को न जलाते तो और क्या करते!


8.
लोग अपनों को भी भुला देते है ,
बेवजह अपनों को भी रुला देते है ,
जो दिया रातभर रौशनी देता है,
सुबह होते ही लोग उसे भी बुझा देते है


9.
सज़ा देने वाले रज़ा पूछते हैं,
जीने की हमसे वजह पूछते हैं,
देते हैं खुद ही ज़हर हमको आकर,
फिर कितना हुआ असर पूछते हैं


10.
पी  है  शराब  हर  गली  हर  मकान से ,
एक  दोस्ती  सी  हो  गई  है  शराब  के  जाम  से ,
गुजरे  हैं  हम  कुछ  ऐसे  मुकाम  से ,
की नफ़रत  सी  हो  गई  है मोहब्बत  के  नाम  से


11.
कहाँ  कोई  ऐसा  मिला  जिसपे  दिल  लुटा  देते ,
हर एक  ने  धोखा दिया  किस किस  को  भुला  देते ,
अपने  दिल  का  दर्द  दिल  ही  में  दबाये  रखते  हैं ,
करते  बयाँ  तो  महफ़िल  को  रुला  देते

उपरोक्त किसी भी शेर को पढकर ये मत सोचियेगा की मैं शायर बन गया हूँ  ,दरअसल अभी हाल ही में मैंने उड़नतश्तरी  ब्लॉग के स्वामी समीर जी की एक बेहद उम्दा रचना पढ़ी थी ,उसकी पंक्तियाँ सच में दिल ले गई थी और दिल को छू गई थी, तब दिल में खैयाल आया की सचमुच ये शेरों-शायरी और गजलें दिल की स्तिथि और भावनाओं को जितने अच्छे और सच्चे तरीके से पेश करती हैं वैसे कई बार हमारे विचार भी नहीं कर पाते ,तो यही सोचकर मैंने भी कोशिश की पिछले कुछ समय से दिल में आये हुए विचारों के तूफ़ान और भावनाओं के वेग इस रूप में पिरोने की, लेकिन कुछ ही देर में समझ में आ गया की ये गजलें और शेर-ओ-शायरी अपने बस की बात नहीं , इसलिए वर्तमान समय और स्तिथि में दिल के बेहद करीब महसूस हुई कुछ शेरों-शायरी की पंक्तियों को विभिन्न स्थानों से इकठ्ठा करके आपके समक्ष रखी

वर्तमान में हिंदी सिनेमा के तीन गीत भी दिल के बेहद बेहद करीब महसूस हुए और सच में दिल के गम भरे ज़ज्बातों को इन्होने बखूबी बयाँ कर दिया

1. पहला गीत है दिलीप कुमार अभिनीत फिल्म ” आदमी ” से

ना आदमी का कोई भरोसा
ना दोस्ती का कोई ठिकाना
वफ़ा का बदला है बेवफाई
अजब ज़माना है ये ज़माना

2.दूसरा गीत है फिल्म ” मोहरा ” से ( मोहरा बनने की बड़ी तकलीफ है अब तक )

ऐ काश कहीं ऐसा होता के दो दिल होते सीने में
एक टूट भी जाता इश्क में तो ,तकलीफ ना होती जीने में …….तकलीफ ना होती जीने में


सच कहते हैं लोग के पीकर रंज नशा बन जाता है
कोई भी हो रोग ये दिल का ,दर्द दवा बन जाता है
आग लगी हो इस दिल में तो …………
आग लगी हो इस दिल में तो…. हर्ज है क्या फिर पीने में
ऐ काश कहीं ऐसा होता के दो दिल होते सीने में ……….




भूल नहीं सकता ये सदमा ,याद हमेशा आएगा
किसी ने ऐसा दर्द दिया जो बरसों मुझे तड़पआयेगा
भर नहीं सकते ज़ख्म ये दिल के ……………..
भर नहीं सकते ज़ख्म ये दिल के… कोई साल महीने में………..कोई साल महीने में
ऐ काश कहीं ऐसा होता के दो दिल होते सीने में ……….

3.तीसरा गीत है फिल्म ” मर्डर ” से  ( सच में रिश्ते और विश्वास का मर्डर )

जिंदगी इस तरह से लगने लगी रंग उड़ जाएँ जो दीवारों से
अब छुपाने को अपना कुछ ना रहा ,ज़ख्म दिखने लगे दरारों से


अबतलक सिर्फ तुझको देखा था
आज तू क्या है ये भी जान लिया
आज जब गौर से तुझे देखा
हम गलत थे कहीं ये मान लिया

हम गलत थे कहीं ये मान लिया ………..

तेरी हर भूल में कहीं शायद ,हम भी शामिल हैं गुनहगारों में

अब छुपाने को अपना कुछ ना रहा ,ज़ख्म दिखने लगे दरारों से






महक

42 Comments

  1. September 8, 2010 at 6:06 pm

    >चित्र, शेरो शायरी और सभी गीतों को सुनकर महक भाई मैं आपको यही राय दूंगा की आप अपना हाथ अपने दिल पर रखे और दो तीन बार दोहराएँ…"ALL IS WELL"

  2. September 8, 2010 at 6:08 pm

    >तरीका बेशक फ़िल्मी है पर इसमे निहित भावनाओं को समझे.

  3. Mahak said,

    September 8, 2010 at 6:15 pm

    >@विचारशून्य जी ,अगर "ALL IS WELL" भी काम ना करे तो फिर क्या करें ?

  4. September 8, 2010 at 6:16 pm

    >अच्छी पंक्तिया है ……….एक बार जरुर पढ़े :-(आपके पापा इंतजार कर रहे होंगे …)http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_08.html

  5. Mahak said,

    September 8, 2010 at 6:17 pm

    >I am very-2 sad & confused from some days

  6. September 8, 2010 at 6:19 pm

    >अगर "ALL IS WELL" भी काम ना करे तो फिर क्या करें ? शादी कर लो फिर🙂

  7. Mahak said,

    September 8, 2010 at 6:27 pm

    >@दर्शन लाल जी ये वो वाला "ALL IS WELL" नहीं था जिसके लिए शादी करनी पड़े :):),ये ज़रा अलग था, यूँ लगा लीजिए की जोर का झटका धीरे से लगने की बजाये जोर से ही लग गया:-(

  8. Mahak said,

    September 8, 2010 at 6:34 pm

    >हा हा ….जनाब ,आप दोनों गलत समझ गए ,ये वो वाला "ALL IS WELL" नहीं था :-(:-(

  9. September 8, 2010 at 6:34 pm

    >महक जी अपना कमेन्ट हटा लिया है . मुझे लगा की मैं कहीं मुद्दे से भटक तो नहीं गया.

  10. Mahak said,

    September 8, 2010 at 6:57 pm

    >नहीं जी ,प्रत्येक कमेन्ट का स्वागत है

  11. September 8, 2010 at 7:01 pm

    >हर शे'र अपने नायाब हैं…

  12. Mahak said,

    September 9, 2010 at 3:15 am

    >@महफूज़ भाई ,तारीफ़ के लिए शुक्रिया ,सचमुच लिखने वालों ने हर शे'र बेहद नायाब लिखा है😦

  13. September 9, 2010 at 3:46 am

    >चलो, कहीं तो असर किया…हा हा!🙂

  14. Mahak said,

    September 9, 2010 at 3:53 am

    >जनाब !! आपकी शायरी क्या कभी बेअसर हो सकती है ,कुछ ज्यादा ही असर कर गई😦

  15. September 9, 2010 at 4:25 am

    >बरसात में रेगिस्तान भी चहक जाते है ,बहारों में तो कांटे भी महक,🙂 जाते है, निर्दोष जवानी पे मत झुंझलाओ ये दोस्त !इस उम्र में अक्सर सभी बहक जाते है !!

  16. Mahak said,

    September 9, 2010 at 4:48 am

    >:):) वाह वाह !! गोदियाल जी ,क्या शे'र कहा है ,वैसे मेरे दिल के गम की वजह ये उम्र नहीं बल्कि ज़ज्बातों और भावनाओं में आकर एक की गई बेवकूफी है लेकिन फिर भी आपके इस शेर से तो मेरा भी मन कर रहा है की एक बार फिर से कोशिश करूँ कुछ अपना origional बनाने की तो अर्ज किया है- महक कभी मिटती नहीं, तस्वीर उनकी दिल से हटती नहीं,क्या बताएं क्या हाल है इस दिल का,ये उम्र उन बिन कटती नहीं अरे वाह !! ये तो कमाल हो गया ,मुझसे पहली बार कोई शे'र बन गया अब कैसा बना है ये आप पर है लेकिन इस शे'र से ये मत समझ लीजियेगा की मेरे गम की वजह ये है :l

  17. September 9, 2010 at 5:05 am

    >बहुत बढ़िया संकलन , आनंद आ गया !

  18. Mahak said,

    September 9, 2010 at 5:14 am

    >@आदरणीय सतीश जी ,पधारने के लिए बहुत-२ शुक्रिया ,लेकिन ये क्या ,ना कोई शे'र ना कोई गज़ल , हुज़ूर ऐसी नाइंसाफी तो मत कीजिये:-/

  19. arvind said,

    September 9, 2010 at 7:16 am

    >वफ़ा की उमीद जिन्हें होगी उन्हें होगी ,हमें तो देखना है की तू ज़ालिम कहाँ तक है …fir kyon n koi mohabbat se nafarat kare….bahut badhiya prastuti.

  20. September 9, 2010 at 8:47 am

    >महकजी, आज १ महीने के बाद छुट्टी से लोटा हूँ, सोचा चलो संसद में चलते है और देखते है क्या हो रहा है.. पर यहाँ तो माहौल ही बदल गया.. सभी सांसद और विधायक अब एक दुसरे पर चिल्ल – पों करने कि बजाय शेर-ओ-शायरी कर रहे है,, सच में मजा आ गया. काश मेरे देश कि संसद में कीचड़ उछालने कि बजाय सभी सांसद ऐसे ही बन जाए.. चलो एक गरमा गर्म शेर मेरी तरफ से भी हो जाए..अर्ज किया है –१.ऐ मेरे दोस्त हर तरफ आज ये मंज़र क्यूँ है.हर एक सर पे ज़ख्म हर एक हाथ में पत्थर क्यूँ है.अपना अंजाम तो मालूम है सबको,फिर भी इंसान अपनी नज़रों में सिकंदर क्यूँ है..??२.मुझे आजमाने वाले मुझे आजमा के रोये.मेरी दस्ताने हसरत सुना सुना के रोये..तेरे जुल्मों और तेरी बेवफाइयों पर,कभी सर छुपा के रोये, कभी मुंह छुपा के रोये.जो सुनाई महफ़िल में शब्-ऐ-गम कि आपबीती.कभी मुस्कराने वाले रोये और मुस्कुरा के रोये.(बाकी फिर कभी.–)राजेंद्र. –हिंदुत्व और राष्ट्रवाद

  21. September 9, 2010 at 9:14 am

    >ek jagah bahut achchhee achchhee panktiyan bahut badhiya kaam kiya aapane aur ye panktiyan bhi dil ko chhoo gayi.dhanyavad

  22. September 9, 2010 at 10:22 am

    >गजब का कलेक्शन है आपका।………….गणेशोत्सव: क्या आप तैयार हैं?

  23. anshumala said,

    September 9, 2010 at 10:50 am

    >अरे ये क्या हुआ आपको ? सावन का असर लग रहा है हो गया है बच कर रहिएगा ये असर खतरनाक होता है और जल्दी जाता नहीं |

  24. September 9, 2010 at 11:04 am

    >महक जी,क्या हुआ कुछ समझ नहीं आया ,आपको फोन भी मिलाया था अभी लेकिन दो बार पूरी घंटी बजी लेकिन कोई उठाया नहीं ,आखिर माजरा क्या है ..?

  25. September 9, 2010 at 11:49 am

    >वह जी वाह …. मज़ा आ गया … आज तो कुछ अलग हट कर है …. पर लाजवाब है ….

  26. September 9, 2010 at 12:43 pm

    >बस!बन लिये कृष्ण?प्रणाम

  27. September 9, 2010 at 12:46 pm

    >भई मज़ा आ गया……………………..(महक जी.. मैं ये पंक्ति बहुत ही उम्दा पोस्ट के लिए लिखता हूँ )आपने बहुत ही अच्छे शेरों और गानों का चयन किया है.हर शेर अपने आप मेंसम्पूर्ण हैं. गहरे अर्थ वाले हैं .गाने भी मस्त हैं .सर जी ..बहुत बढ़िया पोस्ट है .इसके लिए आपको हार्दिक धन्यवाद

  28. Mahak said,

    September 9, 2010 at 1:34 pm

    >अपना अंजाम तो मालूम है सबको,फिर भी इंसान अपनी नज़रों में सिकंदर क्यूँ है..??वाह जी वाह @हिंदुत्व एवं राष्ट्रवाद ब्लॉग स्वामी राजेन्द्र जी ,बहुत खूब ,बहुत बढ़िया शे'र सुनाये हैं आपने भी ,अगर ये मुझे पहले दिख गए होते तो इन्हें भी इस पोस्ट में डाल देता😦

  29. Mahak said,

    September 9, 2010 at 1:38 pm

    >@आदरणीय एवं प्रिय जय कुमार झा जीमाजरा दरअसल ये है की जिस समय आपने फोन किया उस समय मेरी CA-CPT की Coaching Class चल रही थी ,इसलिए आपका फोन attend नहीं कर पाया जिसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ,प्रतिदिन दोपहर के 2 बजे से शाम के 6 बजे तक ये Class होती है😦

  30. Shah Nawaz said,

    September 9, 2010 at 1:42 pm

    >भय्या सब खैरियत तो है ना??:-)

  31. Mahak said,

    September 9, 2010 at 1:49 pm

    >अन्तर सोहिल said…बस!बन लिये कृष्ण?हा हा हा ………@अंतर सोहिल जी,मैं आपकी इस व्यंगात्मक कटाक्ष रुपी टिपण्णी को भली-भाँती समझ रहा हूँ लेकिन अब छोडिये जनाब ,मैं नहीं चाहता कोई नया बवाल खड़ा करना, इस सब में पहले ही मेरे पांच दिन खराब हो चुके हैं और मेरी study पर बड़ा बुरा असर पड़ा है,जब भी सही समय आएगा उस दिन हर बात का और हर आरोप-प्रत्यारोप का जवाब दिया जाएगा,अभी तो आप भी शायरी का आनद लीजिए कहने को तो बहुत कुछ था अगर कहने पर आतेअपनी तो ये आदत है के कभी कुछ नहीं कहतेप्रणाम:-(

  32. Mahak said,

    September 9, 2010 at 1:54 pm

    >@अरविन्द जी ,@रेखा श्रीवास्तव जी, @ज़ाकिर अली रजनीश जी, @दिगम्बर नासवा जी ,@वीरेंद्र सिंह चौहान जी ,ये जानकार अत्यंत प्रसन्नता हुई की आप सबको ये संकलक यानी के collection पसंद आया ,उत्साहवर्धन के लिए आभार😦

  33. Mahak said,

    September 9, 2010 at 1:56 pm

    >@अंशुमाला जी,आपका कहना सही है ,ये असर सचमुच बड़ा खतरनाक है जाने का नाम ही नहीं ले रहा ,खैर कोशिश जारी है😦

  34. Mahak said,

    September 9, 2010 at 1:59 pm

    >@शाहनवाज़ भाई , ये गलत बात है बिना कोई गज़ल या शायरी कहे आप नहीं जा सकते ,कुछ तो पेश करें😦

  35. September 9, 2010 at 5:03 pm

    >बहुत अच्छा लगा आपको पड़ कर आपनी भावनाओं को नायाब रूप दिया आपने …..शुभकामनाए

  36. Mahak said,

    September 9, 2010 at 5:21 pm

    >@रानीविशाल जी , तारीफ के लिए बहुत -२ शुक्रिया

  37. September 9, 2010 at 6:19 pm

    >बीती पर मिट्टी डालिए और मन लगा कर पढ़ाई कीजिये, भविष्य संवारिये..

  38. RAJWANT RAJ said,

    September 9, 2010 at 6:33 pm

    >mahak ji , apni char laine likh kr aap khush hue ye hi achchhi bat hai . bhai , jo apna hota hai vhi khra sona hota hai .tadat me chahe km ho chahe jyada .koi frk nhi pdta . bs abhivykti mhtvpoorn hoti hai .

  39. Mahak said,

    September 9, 2010 at 7:05 pm

    >@रंजना जी, कोशिश यही है ,ब्लॉग पर आने और मेरे लिए इतनी अच्छी सलाह देने के लिए आपका बहुत-२ शुक्रिया

  40. Mahak said,

    September 9, 2010 at 7:08 pm

    >@RAJWANT RAJ जी, आपका भी ब्लॉग पर आना अच्छा लगा ,आगे भी आती रहें,आपका सदैव स्वागत है

  41. September 11, 2010 at 10:40 am

    >अब आपके होठों पर कुछ मुस्कुराहट दिखाई दे रही है। आशा है दिल से भी गर्द झड गई होगी।बहुत बढिया संकलना है जीइस पोस्ट के लिये हार्दिक आभार और शुभकामनायें"बारिशों के बाद सतरंगी धनक आ जायेगी,थोडा रो लोगे तो चेहरे पे चमक आ जायेगी।प्रणाम स्वीकार करें

  42. October 3, 2010 at 3:12 pm

    >are bhaai jahan pyar hoga wanhi to nafarat hogi aur jahan nafarat hogi wahan pyar bhi hoga yahi prakriti ka atal saty hai darde dil ke waste paida kiya insan ko ,barana ibadat ke liye kya fariste km the ?arganikbhagyoday.blogspot.com


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