>दहकते जम्मू-कश्मीर की हकीक़त और समस्या समाधान –

>पिछले कुछ समय से प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में जम्मू-कश्मीर के बारे में जो कुछ बताया और सुनाया जा रहा है वो वाकई हैरान और परेशान कर देने वाला है.  इलेक्ट्रोनिक मीडिया तो इस मामले में प्रिंट मीडिया से दो कदम आगे है, जो बार बार “पत्थरफेंकू” लोगों को दिखाकर ब्रेकिंग न्यूज़ बता रहा है. इस जम्मू-कश्मीर ने हमारे प्रधानमंत्री तक की नींद उड़ा के रख दी है. प्रधानमंत्रीजी में सर्वदलिये बैठक बुला कर “कश्मीर की स्वायत्तता तक सुझाव दे डाला”. (कहने का मतलब की कश्मीर को भारत से अलग कर दिया जाए). लेकिन क्या “जम्मू-कश्मीर” की समस्या वाकई इतनी बड़ी है या फिर ये एक सोची-समझी साजिश है कश्मीर को भारत से अलग करने की. आप अगर उपरी तौर पे देखेंगे तो आपको लगेगा की “जम्मू-कश्मीर” के लोग वास्तव में उग्र होकर अपनी मांगे मनवाना चाहते है, लेकिन ज़रा सा गौर फरमाएंगे तो कश्मीर  को भारत से अलग करने कि एक सोची समझी साजिश की “बू” आएगी जिसमे हमारी  “रीढविहीन सरकार और तथाकथित सेक्युलर बिकाऊ मीडिया भी शामिल है”-
जम्मू-कश्मीर में चंद मुट्ठी भर गुंडे और आतंकवादी अलगाववादी संघठन ऐसे जो अपने पाकिस्तानी हुकुमरानो के इशारे पर “आज़ादी” के लिए बदअमनी फैलाते है.  कश्मीर की हकीक़त क्या है ये आप यहाँ पढ़ सकते है…
अब बात करते है जम्मू-कश्मीर कि समस्या के स्थायी समाधान की  ताकि वहां पर शांति और अमन कायम हो सके.


1.  कश्मीर को एक निश्चित समय के लिए सेना के हवाले किया जाए और वहां पर बदअमनी फ़ैलाने वाले सारे “अलगाववादी संघठनो पर रोक लगाकर उनके नेताओं को गिरफ्तार किया जाए.


2. वहाँ पर रह रहे कश्मीरी पंडितों और हिन्दुओं को सुरक्षा प्रदान की जाए और अधिक हिन्दुओं को बसाया जाए. क्यूंकि कश्मीर अलाग्वादी और आतंकवादियों के बाप की बपौती नहीं है.


3. संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा चलाये जा रहे NGO और संस्थाओं पर लगाम लगाई जाए. क्यूंकि ये सारे के सारे अमेरिका के इशारे पर काम करते है और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने “जम्मू-कश्मीर” की सही तस्वीर नहीं आने देते..


4. पाकिस्तान का हस्तक्षेप जम्मू-कश्मीर से हटाया जाए. क्यूंकि जो अपनी गंदगी साफ़ नहीं कर सकता वो भला दुसरे को क्या सलाह देगा.


5. सबसे बड़ी बात मीडिया के “सेक्युलर भांड-राग” पर रोक लगाकर उस पर नकेल कसी जाए और उसे इस बात के लिए बाध्य किया जाए की “घाटी” के अलावा भी पूरे कश्मीर के सही हालात दुनिया के सामने लाये जाए.


6. सरकार के द्वारा एक ऐसा मजबूत संघटन बनाया जाए जिसके पास “रीढ़ हो” जो चलते चलते “सेल्युलरों और अमेरिका के सामने लेटे नहीं”; उससे जम्मू-कश्मीर की निगरानी करवाई जाए.


7.  जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग घोषित किया जाए, और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने इस बात को पूरी दृढ़ता से उठाया जाए की कश्मीर की तरफ आँख उठाने वाले को बक्शा नहीं जायेगा.


8.  जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों को प्यार से समझाया जाए और पाकिस्तानी मुसलामानो की असली तस्वीर उनके सामने पेश की जाए ताकि उनको लगे की अगर जन्नत कही है तो बस यहीं है यहीं है.


आखिर में एक बात और रखना चाहूँगा –

कश्मीर के राजौरी क्षेत्र से राजस्थान आकर वहां के दौसा संसदीय क्षेत्र से स्वतंत्र उमीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले गुर्जर नेता कमर रब्बानी   ( yahan dekhne)  का यह भी कहना है कि वहां कि सरकार और मीडिया तंत्र कि मिलीभगत ही है कि कश्मीर कि असली तस्वीर दुनिया के सामने नहीं लायी जा रही है. हम बाकि हिंदुस्तान के साथ है न की घाटी के अलगाववादियों के साथ. रब्बानी ने एक सुझाव यह भी दिया कि अगर केंद्र सरकार कश्मीर में राष्ट्रपति शाशन लागू कर दे और 6 महीने बढ़िया शाशन करने के बाद फिर से चुनाव करवाए तो उसे जमीनी हकीक़त का पता चलेगा. हाँ उसे इस लोभ से बचाना होगा कि वो अपना हाथ नेशनल कांफ्रेंस या पी.डी.पी जैसे किसी भी दल कि पीठ पर न रखे. घाटी के हर इलाके के लोगों को अपनी मर्जी का और अपने इलाके का नेता चुनने कि खुली आज़ादी हो, वोट बेख़ौफ़ डालने का इंतजाम हो तो कश्मीर में एक अलग ही निजाम कायम होगा और उसे वापिस स्वर्ग बनते देर नहीं लगेगी..

ब्लॉग संसद के सभी महानुभावों से निवेदन है की आप भी अपने सुझाव दे.. क्यूंकि ये एक ऐसा मुद्दा जिसका समाधान हमारी सरकार को लाखो-करोड़ों खर्च करके भी नहीं मिला है.

धन्यवाद –
हिंदुत्व  और राष्ट्रवाद

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21 Comments

  1. September 10, 2010 at 7:39 am

    >यदि इस देश की सरकार इतनी दम दर होती तो कारगिल के समय ही सारा लोचा समाप्त हो जाता . नेहरु जी गलतियों का भुगतान आज देश कर रहा है , समस्या जनता की नहीं बल्कि राजनीतिज्ञों की बनाई हुई है ऐसे तो समाधान तो नहीं पर नासूर जरूर बता जा रहा है और देश की अधिकांश शक्ति इसी में खर्च हो रही है . उधर से पाकिस्तान ने चीन को पी ओ के में घुसने के पुरे इंतजाम कर देये है समस्या तो तभी हल होगी जब पाकिस्तान को नेस्तनाबूद कर दिया जाये तब चीन को भी समझ आयेगा

  2. Mahak said,

    September 10, 2010 at 7:39 am

    >@राजेन्द्र जीइसमें दो बिंदु और जोड़ना चाहूँगा की एक तो ये हुर्रियत सरीखे जितने भी अलगाववादी संगठन हैं जो की खाते भारत में हैं और गुणगान पाकिस्तान का करते हैं ,तो इनको बिना देरी किये पाकिस्तान ही भेजा जाए और हिन्दुस्तान और कश्मीर से निर्वासित कर दिया जाए दूसरा की कश्मीर से Article 370 को हटाया जाए ,इस धारा 370 की वजह से ही कोई भी भारतीय कश्मीर में ज़मीन नहीं खरीद सकता है हर साल हम कश्मीर को हज़ारों करोड रुपया देते हैं और हमें क्या मिलता है भारत विरोधी नारे, हमारे जवानों पर पत्थर और आतंकवादी हमलों में उनकी लाशें ,पाकिस्तान का गुणगान और हमारे तिरंगे का जलाया जाना और हमें देख लेने की धमकी हमारे देश के सभी हिंदू और मुसलमान भाई कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हैं ,ये हमारे देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है मैं सहमत हूँ आपके इस प्रस्ताव सेमहक

  3. Mahak said,

    September 10, 2010 at 7:43 am

    >सभी मुस्लिम भाइयों को ईद की ढेरों मुबारकबाद सभी मुस्लिम भाइयों को ईद की ढेरों मुबारकबाद सभी मुस्लिम भाइयों को ईद की ढेरों मुबारकबाद सभी मुस्लिम भाइयों को ईद की ढेरों मुबारकबाद सभी मुस्लिम भाइयों को ईद की ढेरों मुबारकबाद सभी मुस्लिम भाइयों को ईद की ढेरों मुबारकबाद सभी मुस्लिम भाइयों को ईद की ढेरों मुबारकबाद सभी मुस्लिम भाइयों को ईद की ढेरों मुबारकबाद सभी मुस्लिम भाइयों को ईद की ढेरों मुबारकबाद ये ईद हम सभी के जीवन में एकता और प्रेम की नई मिसाल कायम करे महक

  4. September 10, 2010 at 8:18 am

    >@ महकजी, ARTICLE 370 को हटाने कि आपकी बात का मैं कुछ हद तक समर्थन करता हूँ. लेकिन इस मामले में मैं थोडा संकित हूँ. AARTICLE 370 में एक बात यह कि कश्मीर में कोई बाहरी आकर नहीं रह सकता है.. PDP ने पिच्छाले दिनों बंगाल्देशियों को न्योता दिया था उसके मद्देनजर AARTICLE 370 में सिर्फ कुछ बदलाव किये जाए न कि उसे पूरी तरह से हटाया जाए, क्यूंकि "आस्तीन के साँप" तो हमारी आस्तीन में ही छुपे हुए है. फिर भी बहस चलेगी कई और विचार सामने आयेंगे.. क्यूंकि ब्लॉग संसद के ज्यादातर महानुभाव बहुत ज्ञानी है..

  5. September 10, 2010 at 10:14 am

    >मैं भी इस प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ !

  6. September 10, 2010 at 11:36 am

    >यह समझिये की यह हिस्सा भी गया हाथ से क्योंकि पाकिस्तान ऩे टॉप पर चीन को बिठा दिया है, औकोपाइड कश्मीर उसे देकर ! यही इन तथाकथित सेक्युलर हिन्दुओ की डेस्टिनी है, अब तो यह सोचना शुरू कीजिए कि अब बारी किस प्रदेश और किस हिस्से की है ?

  7. September 10, 2010 at 1:18 pm

    >दरअसल कश्मीर समस्या वैसे देखा जाय तो कुछ है ही नहीं ,रही बात कश्मीरियों की तो उनको एक अच्छा शासन और प्रशासन चाहिए ,उनको रोजगार चाहिए ,उनको दो वक्त की रोटी चाहिए जो पूरे देश के लोगों को चाहिए वो वहां के लोगों को भी चाहिए | आम कश्मीरियों से बात कीजिये तो वो यह कभी नहीं कहेंगे की मैं पाकिस्तान में रहना पसंद करूंगा | लेकिन जिन कश्मीरियों के इज्जत को सेना के भ्रष्ट लोगों ने लूटा है और उनके शिकायतों पर इंसानियत के नातें भी कोई कार्यवाही नहीं हुयी वही लोग कुंठित हैं और भारत सरकार से दुखी है ,ऐसा कोई भी आम इंसान भी होगा तथा इस तरह के लोग देश के अन्य भागों में भी पाए जाते हैं जिनका दर्द अन्याय के खिलाप कार्यवाही नहीं होने से पैदा हुआ है |कश्मीर अन्य राज्यों की ही तरह है लेकिन यहाँ आतंकवाद के नाम पर सरकार में बैठे भ्रष्ट लोगों तथा सत्ता के दलालों के खेल से अड्बों रुपया सरकारी खजाने से लूटा जाता है | रक्षा सौदा कागजों में दिखाकर पैसों का बंदर बाँट किया जाता है ,इसलिए कश्मीर समस्या है नहीं बल्कि रोज इसकी पटकथा भ्रष्ट नेताओं और रक्षा मंत्रालय के अधिकारीयों द्वारा लिखी जाती है और उस पटकथा के नाम पर सरकारी खजाना लूटा जाता है | कश्मीर समस्या का समाधान कैसे होगा जब सेना के ही भ्रष्ट अधिकारी गोला.बारूद,हथियार असामाजिक तत्वों को देते हैं और अराजकता और भय को फैला कर उसके लिए फिर सुरक्षा की योजनायें बनायीं जाती है | कश्मीर समस्या नहीं बल्कि बल्कि लूट का खेल है जिसमे अंतराष्ट्रीय दलाल,मिडिया घराना,भ्रष्ट नेता,भ्रष्ट अधिकारी सब शामिल हैं |इसका समाधान सिर्फ और सिर्फ कश्मीर में सेना को किसी भी प्रशासनिक अधिकार से बंचित करने ,सेना के अधिकारीयों के संपत्ति की ईमानदारी से जाँच करने और दोषियों का सख्ती से कोर्ट मार्शल करने ,इमानदार सेना के अधिकारीयों के जिम्मे मिलिट्री इंटेलिजेंस का काम देने ,काश्मीर में देश भर से चुनकर इमानदार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारीयों की तैनाती करने ,जनता के शिकायतों का तर्कसंगत और न्यायसंगत निपटारा करने से ही हो सकता है और ऐसा होना कांग्रेस जो की दलालों की सरकार है के केंद्र में रहते मुमकिन नहीं है |इसलिए सबसे पहले जनता इस भ्रष्ट और दलाल बन चुकी सरकार के हर कार्यों की निगरानी कर सके तथा दोषियों के खिलाप चाहे वो प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के पद पर क्यों ना बैठा हो को सजा देने के उपाय करने होंगे और इसके लिए सरकार के हर गलत निर्णय के खिलाप आम लोगों को पूरे देश में आवाज को बुलंद करना होगा | ऐसा नहीं होगा तो काश्मीर जैसी समस्या पूरे देश में पैदा होगी और इस समस्या का नाम पर सरकारी खजाना लूटा जायेगा और बोझ बेचारी जनता पर उनके रोज मर्रा के चीजों जैसे रसोई गैस,पेट्रोल,डीजल,खाने पिने के सामान इत्यादि का दाम बढाकर उनसे उसूला जायेगा …बेशर्मी की हद को पार कर गए हैं हमारे देश के भ्रष्ट नेता और अधिकारी …

  8. Shah Nawaz said,

    September 11, 2010 at 2:30 am

    >मेरे विचार से जिन कश्मीरियों को पाकिस्तान पसंद है उन्हें गुलाम कश्मीर यानी पकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में ज़बरदस्ती भेज देना चाहिए. जब वहां रहेंगे तो पता चलेगा कि भारत से दूर जाकर उन्होंने क्या खोया. इसके बाद LOC को सील कर देना चाहिए, ना कोई इधर आए और ना कोई उधर जाए. जब तक दादा गिरी नहीं दिखाई जाएगी कुछ नहीं होगा. कमज़ोर दिखने वाले को हर कोई दबाता है.जहाँ तक धारा 370 की बात है तो यह तो हमारे मुल्क ने विलय के समय उनकी शर्त मानी थी, इसलिए इस पर कुछ बोलना ठीक नहीं है.जय कुमार झा की बात से सौ प्रतिशत सहमत हूँ.सभी पाठक और लेखक ईद की दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएं!

  9. September 11, 2010 at 10:34 am

    >श्री जयकुमार झा जी और शाहनवाज जी की बात में दम है। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि पहले जनता से वोटिंग करानी चाहिये कि वो भारत के साथ हैं या पाकिस्तानी होना चाहते हैं।श्रीनगर से आगे के गांवों में बहुत लोग आपको यह कहते भी मिलेंगें कि भारत से घूमने आये हो? श्रीनगर में बस वाले इस्लामाबाद-इस्लामाबाद बोलकर भी सवारियों को बुलाते हैं। समझें?श्री सुरेश चिपलूनकर जी इस मुद्दे पर ज्यादा बढिया रुख और उपाय रख पाते हैं। सेना और प्रशासन को पहले जनता के मन में विश्वास जगाना होगा।आप मानिये या मत मानिये सेना में भी बुरी मानसिकता के कु्छ लोग होते हैं, जिनकी वजह से किसी क्षेत्र विशेष में नफरत का भाव पनप गया है।प्रणाम स्वीकार करें

  10. September 11, 2010 at 1:45 pm

    >मेरा मत भी सहमती में माना जाये | साथ ही कश्मीर को १९४७ की स्थिति अगर हो सकती है तो वह लागु करके, ये बात सही है कि पाकिस्तान चाहने वालों को वहां धक्का दे देना चाहिए और भारत में रहने को तैयार लोगों "पूर्ण भारतीय" मानकर यहाँ रख कर पूरी सुरक्षा सुविधा देनी चाहिए | ३७० हटाने पर ये नेहरु के वंसजों के चमचों की सरकारें ऐसा नहीं करेंगी क्यों कि इनके महान नेताओं कीनाक नीची नहीं हो जाएगी कि वह गलती करके गए थे |

  11. September 11, 2010 at 2:07 pm

    >भारतीय नेताओं ने जब भी नारा लगाया …कश्मीर भारत का अटूट अंग है , यदि यह कहते कि कश्मीरी भारत के अटूट अंग हैं तो यह दिन ना देखना पड़ता |डॉ. ग़ुलाम मुर्तजा शरीफ अमेरिका

  12. sm said,

    September 12, 2010 at 8:22 am

    >these corrupt people will not do anything.

  13. September 13, 2010 at 2:15 pm

    >@ डॉ. ग़ुलाम मुर्तजा शरीफ जी सर………आपने बात तो बहुत अच्छी कही है.पहली नज़र में देखने में लगता है किआपकी बात में दम है . लेकिन ऐसा करने से भी कश्मीर समस्या कासमाधान हो पाता या ये दिन न देखना पड़ता.कहा नहीं जा सकता ….क्योंकि कई बारऐसा किया भी गया है . ऐसा भी नहीं कि कश्मीरीये न जानते हों.सर…. कश्मीर समस्या के कई पहलू हैं .और सभी पहलू (कश्मीर समस्या की द्रष्टि से ) महत्वपूर्ण हैं .और इस समस्या के लिए सबसे ज्यादा ज़िम्मेदारहिन्दुस्तानी सरकारों की लापरवाही और अदूरदर्शिता है .अभी भी सरकार अगर ज़िम्मेदारी और दूरदर्शिता के साथ आगेबढे, तो कोई कारण नहीं कि इस समस्या का समाधान न हों जाए.

  14. September 13, 2010 at 2:58 pm

    >इस नारे के साथ कि…… चलो हिन्दी अपनाएँआप सभी को हिन्दी दिवस पर शुभकामनाएँ

  15. abhishek1502 said,

    September 13, 2010 at 8:34 pm

    >शहनवाज भाई और जयकुमार जी की बात से पूर्णतयः सहमत

  16. September 15, 2010 at 8:07 am

    >प्रस्ताव से मेरी सहमति दर्ज करें

  17. Ejaz Ul Haq said,

    September 15, 2010 at 9:37 am

    >इस्लाम आतंक ? या आदर्श यहाँ पढ़ें

  18. September 15, 2010 at 12:38 pm

    >श्रीनगर से आगे के गांवों में बहुत लोग आपको यह कहते भी मिलेंगें कि भारत से घूमने आये हो? सब सरकार की कमजोरी है , और तुलना करते है नेहरु की कबिनेट से — सरदार पटेल से तुलना जिन्होंने देश को एक करने में बड़ी भूमिका निभाई थी ..बहुत बढ़िया प्रस्तुति …….मेरे ब्लॉग कि संभवतया अंतिम पोस्ट, अपनी राय जरुर दे :-http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_15.htmlकृपया विजेट पोल में अपनी राय अवश्य दे ….

  19. September 17, 2010 at 1:38 pm

    >बहुत बढ़िया प्रस्तुति …….

  20. anusoni said,

    September 17, 2010 at 1:52 pm

    >महक मेरी माने तो ऐसे कोई सी भी बात , या फैसला जो "आतंकवादी (मानव ) अधिकार आयोग " "अंकल सेम" (अमेरिका) ,और कांग्रेस वोट बैंक को प्रभावित करे तर्क संगत्त नही हे और यही सत्य हेदरअसल कश्मीर समस्या वैसे देखा जाय तो कुछ है ही नहीं ,रही बात कश्मीरियों की तो उनको एक अच्छा शासन और प्रशासन चाहिए ,उनको रोजगार चाहिए ,उनको दो वक्त की रोटी चाहिए जो पूरे देश के लोगों को चाहिए वो वहां के लोगों को भी चाहिए | कश्मीर समस्या पर कुछ भी बोलने से पहले हमे यह जानना जरुरी हे की वास्तव में समस्या हे क्या ? और किस कारन से हेतो वर्तमान में कश्मीर की सबसे बड़ी समस्या उग्रवाद ,अलगावाद हे नाकि आतंकवाद और उगार्वाद का सबसे बड़ा कारन कश्मीरी युवाओ की बेरोजगारी जिन्हें आई.एस .आई .ने कंटीजेंसी पर पत्थर फेकने ,आगजनी करने ,सेना पर हमला करने ,और भारत विरोद्धी नारे लगाने की लिए रख रखा हे अब यही कश्मीरी युवाओ की मज़बूरी !हमें यह चाहिए की एक ऐसे आरक्षण निति बने जाये जिस से कह्मिरी युवाओ को नया रोजगार मुहेया कराकर उन्हें भारत के दुसरे राज्यों में भेज दिया जायजिस से कश्मीर में उग्रवाद की समस्या तक काफी हद तक रोक लगे जा सकती हे और बाकि कम हमारी सेना कर ही सकती हे

  21. September 19, 2010 at 3:39 pm

    >Rajnetaon ki Nafrat bhari Sazishon ko Nakam karna padega PREM se .आ ग़ैरियत के परदे इक बार फिर उठा दे।बिछड़ों को फिर मिला दें नक्शे दूई मिटा दें।।सूनी पड़ी हुई है मुद्दत से दिल की बस्ती।आ इक नया शिवाला इस देश में बना दें।।दुनिया के तीरथों से ऊँचा हो अपना तीरथ।दामाने आसमाँ से इस का कलस मिला दें।।हर सुबह उठ के गाएं मंत्र वह मीठे मीठे।सारे पुजारियों को ‘मै‘ पीत की की पिला दें।।शक्ति भी शांति भी भक्तों के गीत में है।धरती के बासियों की मुक्ति प्रीत में है।।


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