>ममता बैनर्जी का रेल्वे सेकुलरिज़्म और 24 परगना जिले के दंगे… … Deganga Riots, Trinamool, CPM and Muslim Vote Bank

>विगत 5 सितम्बर की शाम से पश्चिम बंगाल के उत्तरी चौबीस परगना जिले के अल्पसंख्यक हिन्दू परिवार भय, असुरक्षा और आतंक के साये में रह रहे हैं। ये अल्पसंख्यक हिन्दू परिवार पिछले कुछ वर्षों से इस प्रकार की स्थिति लगातार झेल रहे हैं, लेकिन इस बार की स्थिति अत्यंत गम्भीर है। सन् 2001 की जनगणना के मुताबिक देगंगा ब्लॉक में मुस्लिम जनसंख्या 69% थी (जो अब पता नहीं कितनी बढ़ चुकी होगी)। पश्चिम बंगाल का यह इलाका, बांग्लादेश से बहुत पास पड़ता है। यहाँ जितने हिन्दू परिवार बसे हैं उनमें से अधिकतर या तो बहुत पुराने रहवासी हैं या बांग्लादेश में मुस्लिमों द्वारा किये गये अत्याचार से भागकर यहाँ आ बसे हैं। उत्तरी 24 परगना से वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस से हाजी नूर-उल-इस्लाम सांसद है, और तृणमूल कांग्रेस से ही ज्योतिप्रिया मलिक विधायक है। 24 परगना जिले में भारत विभाजन के समय से ही विस्थापित हिन्दुओं को बसाया गया था, लेकिन पिछले 60-65 साल में इस जिले के 8 ब्लॉक में मुस्लिम जनसंख्या 75% से ऊपर, जबकि अन्य में लगभग 40 से 60 प्रतिशत हो चुकी है, जिसमें से अधिकतर बांग्लादेशी हैं और तृणमूल और माकपा के वोटबैंक हैं।

5 तारीख (सितम्बर) को देगंगा के काली मन्दिर के पास खुली ज़मीन, जिस पर दुर्गा पूजा का पंडाल विगत 40 वर्ष से लग रहा है, को लेकर जेहादियों ने आपत्ति उठाना शुरु किया और उस ज़मीन की खुदाई करके एक नहर निकालने की बात करने लगे ताकि पूजा पाण्डाल और गाँव का सम्पर्क टूट जाये जिससे उस ज़मीन पर अवैध कब्जे में आसानी हो, उस वक्त स्थानीय पुलिस ने उस समूह को समझा-बुझाकर वापस भेज दिया। 6 सितम्बर की शाम को इफ़्तार के बाद अचानक एक उग्र भीड़ ने मन्दिर और आसपास की दुकानों पर हमला बोल दिया। (चित्र – खाली पड़ी सरकारी भूमि जहाँ से विवाद शुरु किया गया)

माँ काली की प्रतिमा तोड़ दी गई, कई दुकानों को चुन-चुनकर लूटा गया और धारदार हथियारों से लोगों पर हमला किया गया। चार बसें जलाई गईं और बेराछापा से लेकर कदमगाछी तक की सड़क ब्लॉक कर दी गई। भीड़ बढ़ती ही गई और उसने कार्तिकपुर के शनि मन्दिर और देगंगा की विप्लबी कालोनी के मन्दिरों में भारी तोड़फ़ोड़ की। 

देगंगा पुलिस थाने के मुख्य प्रभारी अरुप घोष इस हमले में बुरी तरह घायल हुए और उनके सिर पर चोट तथा हाथों में फ़्रेक्चर हुआ है (चित्र – जलाये गये मकान और हिन्दू संतों की तस्वीरें)। जमकर हुए बेकाबू दंगे में 6 सितम्बर को 25 लोग घायल हुए। 7 सितम्बर को भी जब हालात काबू में नहीं आये तब रैपिड एक्शन फ़ोर्स और सेना के जवानों को लगाना पड़ा, उसमें भी तृणमूल कांग्रेस की नेता रत्ना चौधरी ने पुलिस पर दबाव बनाया कि वह मुस्लिम दंगाईयों पर कोई कठोर कार्रवाई न करे, क्योंकि रमज़ान का महीना चल रहा है, जबकि सांसद हाजी नूर-उल-इस्लाम भीड़ को नियंत्रित करने की बजाय उसे उकसाने में लगा रहा।

बेलियाघाट के बाज़ार में RAF के 6-7 जवानों को दंगाईयों की भीड़ ने एक दुकान में घेर लिया और बाहर से शटर गिराकर पेट्रोल से आग लगाने की कोशिश की, हालांकि अन्य जवानों के वहाँ आने से उनकी जान बच गई (चित्र – सांसद नूरुल इस्लाम)। 7 सितम्बर की शाम तक दंगाई बेलगाम तरीके से लूटपाट, छेड़छाड़ और हमले करते रहे, कुल मिलाकर 245 दुकानें लूटी गईं और 120 से अधिक व्यक्ति घायल हुए। प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर माना कि 65 हिन्दू परिवार पूरी तरह बरबाद हो चुके हैं और उन्हें उचित मुआवज़ा दिया जायेगा।

जैसी कि आशंका पहले ही जताई जा रही थी कि बंगाल के आगामी चुनावों को देखते हुए माकपा और तृणमूल कांग्रेस में मुस्लिम वोट बैंक हथियाने की होड़ और तेज़ होगी, और ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी होना तय है। घटना के तीन दिन बाद तक भाजपा के एक प्रतिनिधिमण्डल को छोड़कर अन्य किसी भी पार्टी के कार्यकर्ता या नेता ने वहाँ जाना उचित नहीं समझा, क्योंकि सभी को अपने वोटबैंक की चिंता थी। राष्ट्रीय अखबारों में सिर्फ़ पायनियर और स्टेट्समैन ने इन खबरों को प्रमुखता से छापा, जबकि “राष्ट्रीय” कहे जाने वाले भाण्ड चैनल दिल्ली की फ़र्जी बाढ़, तथा दबंग और मुन्नी की दलाली (यानी प्रमोशन) के पुनीत कार्य में लगे हुए थे। यहाँ तक कि पश्चिम बंगाल में भी स्टार आनन्द जैसे प्रमुख बांग्ला चैनल ने पूरे मामले पर चुप्पी साधे रखी।

राष्ट्रीय मीडिया की ऐसी ही “घृणित और नपुंसक चुप्पी” हमने बरेली के दंगों के समय भी देखी थी, जहाँ लगातार 15 दिनों तक भीषण दंगे चले थे और हेलीकॉप्टर से सुरक्षा बलों को उतारना पड़ा था। उस वक्त भी “तथाकथित राष्ट्रीय अखबारों” और “फ़र्जी सबसे तेज़” चैनलों ने पूरी खबर को ब्लैक आउट कर दिया था…। यहाँ सेना के फ़्लैग मार्च और RAF की त्वरित कार्रवाई के बावजूद आज एक सप्ताह बाद भी मीडिया ने इस खबर को पूरी तरह से दबा रखा है। 24 सितम्बर को आने वाले अयोध्या के निर्णय की वजह से मीडिया को अपना “सेकुलर” रोल निभाने के कितने करोड़ रुपये मिले हैं यह तो पता नहीं, अलबत्ता “आज तक” ने संतों के स्टिंग ऑपरेशन को “हे राम” नाम का शीर्षक देकर अपने “विदेश में बैठे असली मालिकों” को खुश करने की भरपूर कोशिश की है।

ऐसी ही एक और भद्दी लेकिन “सेकुलर” कोशिश ममता बैनर्जी ने भी की है जब उन्होंने हिज़ाब में नमाज़ पढ़ते हुए अपनी फ़ोटो, रेल्वे की एक परियोजना के उदघाटन समारोह के विज्ञापन हमारे टैक्स के पैसों पर छपवाई है और पश्चिम बंगाल के मुसलमानों से अघोषित वादा किया है कि “यह रेल तुम्हारी है, रेल सम्पत्ति तुम्हारी है, मैं नमाज़ पढ़ रही हूं, मुझे ही वोट देना, माकपा को नहीं…”। फ़िर बेचारी अकेली ममता को ही दोष क्यों देना, जब वामपंथी बरसों से केरल और बंगाल में यही गंदा खेल जारी रखे हुए हैं और मनमोहन सिंह खुद कह चुके हैं कि “देश के संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का है…”, तब भला 24 परगना स्थित देगंगा ब्लॉक के गरीब हिन्दुओं की सुनवाई कौन और कैसे करेगा? उन्हें तो मरना और पिटना ही है…।

जिस प्रकार सोनिया अम्मा कह चुकी हैं कि भोपाल गैस काण्ड और एण्डरसन पर चर्चा न करें (क्योंकि उससे राजीव गाँधी का निकम्मापन उजागर होता है), तथा गुजरात के दंगों को अवश्य याद रखिए (क्योंकि भारत के इतिहास में अब तक सिर्फ़ एक ही दंगा हुआ है)… ठीक इसी प्रकार मनमोहन सिंह, दिग्विजय सिंह, ममता बनर्जी, वामपंथी सब मिलकर आपसे कह रहे हैं कि, बाकी सब भूल जाईये, आपको सिर्फ़ यह याद रखना है कि हिन्दुओं को एकजुट करने की कोशिश को ही “साम्प्रदायिकता” कहते है…

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37 Comments

  1. man said,

    September 13, 2010 at 8:41 am

    >सादर वन्दे सर ,मीडियाई भांडों और नपुसंक सेकुलर जोकरों की हिन्ज्ड्डी फोज से इस से बढ़ कर क्या उम्मीद की जा सकती हे ?साले बिछने को तेयार रहते हे ,केवल सत्ता और सुविधावो केलिए ?आप इन्ही बिछी हुई स्थितियों को लोगो बता देते हो ?आज तक को विदेशी और देशी मालिको को खुश करने के लिए "'हे राम ""रिपोर्ट बना के ये जतला दिया हे की इस भांड को करोडो रूपये मिले होंगे गाने बजने के बाद '''सेज संग"" होने के ?और ममता बनर्जी की तो कहने ही क्या ?NEXLITO से हमदर्दी से ले कर रेलवे की अरबो रुपियो की सम्पति नुक्सान करवा कर हजारो इंसानों की रेलवे से मोत की जिमेदार ये ""शेत्रिक कू नेत्री"" अब बंगाल के कुछ जिलो में अल्प शंख्योके(हिन्दूवो ) के लिए खोप बनने जा रही हे |

  2. September 13, 2010 at 10:01 am

    >न्यूज चैनलों को तो "दबंग" सलमान खान और दिल्ली की फर्जी बाढ से ही फुर्सत नहीं मिल रही है जी।कहां आप ये छोटी-मोटी खबरें लाकर मीडिया को कोसने लगते हैं।65 हिन्दूओं के परिवार बर्बाद हो गये, हिन्दुओं की दुकानें जला दी गई, हिन्दु मारे गये, मन्दिरों में तोडफोड" भला ये भी कोई खबरें होती हैं जीऔर वो सरकारी जमीन पर नहर खुदवायें या कुछ भी करें, जब महारानी ने कह दिया कि पहला हक तो उनका ही बनता है नाप्रणाम स्वीकार करें

  3. September 13, 2010 at 10:26 am

    >bahut achi jankari di he aap ne.. is news ko print media me bhi bheje….kyuki aap ke ye sare vichar sabhi hinduo ki pass pahuche….jai hind

  4. Kautilya said,

    September 13, 2010 at 10:48 am

    >उत्कृष्ट आलेख

  5. September 13, 2010 at 11:14 am

    >कभी कभार सोचता हूँ कि भगवान् करे यही स्थिति जल्दी ही पूरे देश में आ जाए ताकि इन हिन्दुओ को इनके सेक्युलारिस्म का इनाम मिले !

  6. September 13, 2010 at 11:45 am

    >agree with godial ji…

  7. September 13, 2010 at 11:57 am

    >कह दो अब भी हिटलर नहीं चाहिए….जितना गुलामी में खोया उससे ज्यादा आजादी के बाद खोया है. आत्मविश्वास. कोई फिर से जन्म नहीं लेता, अतः सुभाष, सावरकर पैदा करने ही होंगे. हम इस हद तक धर्मनिपेक्षता के हिस्टिरियाग्रस्त हो गए है कि एक हिन्दू दुसरे जैन को "ईद मुबारक" के संदेश भेजता है. 🙂

  8. September 13, 2010 at 2:37 pm

    >(तृणमूल कांग्रेस की नेता रत्ना चौधरी ने पुलिस पर दबाव बनाया कि वह मुस्लिम दंगाईयों पर कोई कठोर कार्रवाई न करे, क्योंकि रमज़ान का महीना चल रहा है,) इस मैडम को नहीं पता था कि जब मुस्लिम कटुये साले हिन्दुओ को लुट कर बरबाद कर रहे थे तब रमजान का महीना नहीं था, (मुस्लिमो को यही इस्लाम सिखाता है, सच्चाई शायद यही है) मोहतरमा सिफारिस कर रही है की दंगायियो से कोमलता से मिले| जो लोग दंगा किये, उसके साथ नरमी ? क्या विडम्बना है !वोट क्या-क्या नहीं करा दे रहा है| ये सब भ्रष्ट है , क्या देस की सेवा करेंगे जिनकी नीव ही खोखली और छलावा भरा है| ऐसे लोगो को बीच चौराहे पर गोलियों से ……. तभी समझेंगे की क्या होता हिन्दुओ का खून और रमजान का महीना|ऐ हिन्दुओ का चोला पहने वाले कस्साई मुसलमानों (रत्ना चौधरी जैसे लोगो) अभी समय है संभल जाओ नहीं तो मरने के बाद चिल कौवे भी तुझे नहीं पूछेंगे|जानकारी और शारीर में खून का रफ़्तार तेज करने के लिए धन्यबाद !

  9. Meenu Khare said,

    September 13, 2010 at 4:49 pm

    >"कभी कभार सोचता हूँ कि भगवान् करे यही स्थिति जल्दी ही पूरे देश में आ जाए ताकि इन हिन्दुओ को इनके सेक्युलारिस्म का इनाम मिले !"गोदियाल साहब से सहमत."कह दो अब भी हिटलर नहीं चाहिए…."संजय बेगानी से सहमत.पूरा विश्वास है कि एक हिटलर भारत में भी आएगा जो सच्चा राष्ट्रवादी होगा.

  10. anusoni said,

    September 13, 2010 at 5:32 pm

    >"आज तक" ने संतों के स्टिंग ऑपरेशन को "हे राम" नाम का शीर्षक देकर अपने "विदेश में बैठे असली मालिकों" को खुश करने की भरपूर कोशिश की है। "घृणित और नपुंसक चुप्पी" मीडिया की नही हम हिन्दुओ की हे हम कश्मीर के मुद्दे पर भी चुप रहते हे , हम राम सेतु को भी नही बचा सकते ,हम चाइना को भारत में गुसने से भी नहीं रोक सकते और नाही बिन बुलाये बंगलादेशी महमानों को हमारे घर से निकाल सकते हे वेसे भी हमारी" गाँधी गिरी " की मिसाल दुनिया में दी जाती हे आँखे खोलने वाला लेख सुरेश जी जय हो गाँधी गिरी की और जय हो राष्ट्रिय मीडिया

  11. abhishek1502 said,

    September 13, 2010 at 9:22 pm

    >ये मिडिया कितनी भ्रष्ट और और समाज को गुमराह करने वाली है की वास्तविकता से से तो कोसो दूर हो चुकी है. ये दुखद सत्य भी मुझे आप का लेख पढ़ ही पता लगा .

  12. September 14, 2010 at 4:59 am

    >चीनियों की नाजायज औलादें है ये माकपा और तृणमूल कांग्रेस वाले. और ये ममता बेनर्जी तो गिरगिट की तरह रंग बदलती और शक्ल से ही गिरगिट लगाती है. इन मार्क्सवादियों का मानवता से बहुत पुराना संघर्ष है और मानवता की हत्या के लिए चीन की नाजायज औलादें कुछ भी कर सकती है. ये हंसिया और हथौड़ा हाथ में लिए न जाने कितने "नंदीग्राम" कर चुके है. ये "सेक्युलारापन का दिखावा" इनकी एक और ऐतिहासिक भूल होगी और वो दिन दूर नहीं जब "नंदीग्राम" की शवयात्राओं की तरह इस मार्क्सवाद की भी शाव्यत्राएँ निकलेंगी. और बात करें इस बिकाऊ मीडिया की तो हकीक़त ये है की ये "भारत के इस बिकाऊ मीडिया ने तो अपने आकाओं के हाथो अपने गुर्दों तक को नीलाम कर दिया है.". अब अभी अगर अपनी कम्बल में मुह छुपाकर बैठे हुए "हिन्दू" नहीं चेते तो अपने ही देश में काफिर बनकर यूँही "लतियाते" जाते रहेंगे. –गुरुदेव शानदार लेख के लिए आपको बधाई –

  13. September 14, 2010 at 5:17 am

    >अब क्या कहें. निशब्द ! अब क्या लिखें और क्या न लिखें क्योंकि सीमा तो कब की पार हो चुकी है. कुछ कहने और लिखने का अधिक मन नहीं करता है मन वास्तव में अन्दर से खिन्न हो जाता है यह सब पढ़कर और शरीर में एक बुखार सा आजाता है बस.

  14. sunenamds said,

    September 14, 2010 at 5:51 am

    >आदरणीय सुरेश जी माफ़ी चाहुगी की आप का एक लेख आप की बिना अनुमति के मेने अपनी कोम्मुनिटी में लिख लिया हे (कॉपी किया हे) लेकिन मेने Creative Commons लिसेंसे के सभी नियमो का पालन किया हे कॉपी किये हुए लेख का नाम" नेहरू-गाँधी राजवंश (?)" हे http://www.orkut.co.in/Main#Community?cmm=१०२४९२५५५ यहाँ कॉपी किया गया हे आप की आगया होतो लेख हमेश वहा बना रहेगा

  15. September 14, 2010 at 7:53 am

    >"…………….."bhai sahab mai sachmuch dukhi hoo.. apane hi ghar me hum begane ho gaye hai.. sale in NETA LOGO KE BHANDWAYI SE"

  16. September 14, 2010 at 8:09 am

    >क्या किसी अभियान द्वारा मीडिया चैनलों को सूचना अधिकार में नहीं लाया जा सकता है? सबसे सवाल पूछने वालों से भी तो सवाल पूछनें चाहिये?

  17. raghu said,

    September 14, 2010 at 8:17 am

    >हरामी मीडिया के तेज दलाल और नपुसंक नाजायज सेकुलर हिजडे आतंकवादियोंका पिछवाडा खुलेआम चाट रहि है..और ऐसा करने मे उनको जरा भी शर्म नहि आति..मिडिया और सेक्युलर हिजडॆ खाते तो है इस देश का..लेकिन काम पाकिस्तान और इटलि के लिये करते है..और सच्चे राष्ट्रवादि ,साधुसंत, बेबस हिंदुओंको निशाना बनाकर भौकते रहते है!

  18. nitin tyagi said,

    September 14, 2010 at 10:59 am

    >आँखे खोलने वाला लेख सुरेश जी ये है गाँधी आतंकवाद, जो इस देश को खोकला कर रहा है |

  19. Anonymous said,

    September 14, 2010 at 1:40 pm

    >WHEN THEY ATTACKED HINDUS IN JAMMU AND KASHMIR , I WASNT WORRIED BECAUSE I WASNT A KASHMIRIHEN THEY ATTACKED HINDUS IN ASSAM , I WASNT WORRIED BECAUSE I WASNT A ASSAMESEHEN THEY ATTACKED HINDUS IN BENGAL , I WASNT WORRIED BECAUSE I WASNT A BENGALIWHEN THEY AATACKED ME NO WAS WORRIED BECAUSE NO HINDU WAS LEFT IN THE COUNTRY

  20. September 15, 2010 at 6:26 am

    >चिंतको, चिंतन की तलवार गढ़ों रे ऋषिओं,उद्दीपन मंत्र पढो रे योगिओं,जागो जीवन की ओर बढ़ो रे बंदूकों पर अपना अलोक मढो रे है जहाँ कही भी तेज़,हमें पाना है रण में समस्त भारत को ले जाना है पर्वतपति को आमूल डोलना होगा अब शंकर को ध्वन्षक नयन खोलना होगा

  21. Anonymous said,

    September 15, 2010 at 10:44 am

    >suresh ji pranam, ap itna behtar likh rahe hain ki isase logo me jagrukta paida ho rahi hai. apne is ko kis tarah net ke alava bhi age badaya ja sakta hai. mera sujhao hai ki apne lekho ko parche, chhoti pustikao pamflet adi ke rup me prabhavit jagaho me batavana chahiye. iske liye hum apki jis tarah hogo madad karne ko taiyar hain. haan ap apni suraksha ka visesh khayal rakhe. ho sake to apna address tatha photo isme kabhi na dale.

  22. September 15, 2010 at 5:02 pm

    >सुरेश जी मीडीया ने तो तभी दिखा दिया था कि यह बिके हुए हैं जब दांतेवाडा मे अपने वीरगति को प्राप्त हुए सेनानियों के बारे मे बताने के बजाए ये सानिया के निकाह के बारे मे दिखा रहे थे। चुंकि यह स्पष्ट हो गया है मीडीया बिका हुआ है मुझे इससे शिकायत नही (वेश्या से चरित्र के विषय मे क्या शिकायत करना) मुझे शिकायत तो जनता से है जो इन खेल तमाशा को वास्तविक मुद्दों से अधिक वजन देती है। मीनू जी और संजय जी से सहमत, हिटलर जरूरी है।

  23. September 16, 2010 at 7:38 am

    >ये कैसा हिँदुस्तान है?यहाँ बहुसंख्यक अल्प संख्यक बनने को अग्रसर है और अल्पसंख्यक दस दस बच्चे पैदा करके बहुसंख्यक बनने को अग्रसर है और गंदगी गरीबी ,बीमारी फैला रहा है.जगह जगह बूचड़ खाने खोल रहा है. गाय भैस सबको काट कर उनकी खाल का चमड़ा बना रहा है.और बूचड़खाने और टेनरियो की गंदगी गंगा मे बहाकर सारी गंगा को नाला बना दिया है. सारी भारतीय संस्क्रति को तहस नहस कर दिया है इस भारतीय मुल्ला ने.सात समंदर पार कुरान जलाने की बात पर कुत्ते की तरह भौँक भौकँ कर विरोध करता है. और कश्मीर मे भारत का झंडा जलाया जाता है तो विरोध तो छोड़ो ,मन ही मन मजा लेता है.वंदे मातरम गाने मे इसकी नानी मरती है.एक कुत्ते बाबर ने मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनायी और आज जब हिंदु उस मस्जिद को तौड़कर मंदिर बनवाना चाहता है. तो बजाय सहयोग के उसमे अपनी टांग अड़ा रहा है. और बाबर के वंशज होने का फर्ज निभा रहा है.{-पाकिस्तान मे लगभग सारे मंदिर तोड़े जा चुके है और जो गिनती भर के हिँदु बचे है उनको जबरन मुसलमान बनाया जा रहा है-} ये पढ़कर सुनकर यहाँ का मुल्ला जरा सी चू भी नही करता है. मन ही मन अपने भिखमंगे भाईयो की करतूतो पर खुश होता है.देशद्रोही अफजल को फांसी देने की बात पर रोने लगता है.तो ऐसा है भारतीय देशभक्त मुसलमान.और एक सवाल मेरे दिमाग मे आता है कि जब बटवारे के समय पाकिस्तान बना तो हिँदुस्तान के सारे मुसलमानो को पाकिस्तान क्यो नही भेजा गया? क्यो गिनती भर के मुसलमानो को ही पाकिस्तान भेजा गया?फिर इसका जबाब भी मेरे दिमाग मे आता है कि थोड़े मुसलमान पाकिस्तान गये और बाकि यही रहकर फिर तैयारी करने लगे एक और नये पाकिस्तान बनवाने की.जिसका असर आज हम अच्छी तरह से देख रहे है.

  24. September 16, 2010 at 4:37 pm

    >यद्यपि यह सच है कि बहुसंख्यक साम्प्रदायिकता के आतंक का मुकाबला करते करते पार्टियाँ अल्पसंख्यक साम्प्रदायिकता का तुष्टीकरण करने लगी हैं जबकि इसका उपाय एक बड़ी धर्मनिरपेक्ष ताकत में ही है और कहीं नहीं। किंतु–1- किस ममता बनर्जी की बात कर रहे हैं वही जो अटल बिहारी के मंत्रिमण्डल में मंत्री थी, और सीपीएम से निरंतर पराजित होने के बाद जो रिगिंग का आरोप लगाती थी और भाजपा जिसका खुले आम समर्थन करती थी। अवसरवादी चाहे कांग्रेसी हों भाजपाई हों या तृणमूली सबको ऐसे ही दिन देखने पड़ते हैं देखने पड़ेंगे।2- पर इसके बहाने आज तक ने जो एकाध सही काम किया है उसको गरियाना आपका अवसरवाद है एक आर्थिक सामाजिक अपराधी जिस पर हत्या तक के आरोप हैं का पक्ष लेने वाले की आवाज का साथ केवल उसके कीरतनिए ही देंगे। जब तक आज तक भाजपा के लिए काम करता था [और अभी भी करता है] तब ठीक था अब गलत हो गया । यह सच है सेठाश्रित मीडिया सौदे करता है किंतु इसका मतलब यह नहीं कि जब साम्प्रदायिकता के पक्ष में न हो तो बुरा हो गया। जैसे ही मध्य प्रदेश जैसी भ्रष्ट सरकार उसे करोड़ों अरबों रुपयों की काली कमाई में से कुछ टुकड़े डाल देगी तो साम्प्रदायिकता की पक्षधरता करने लगेगा।3- सैक्युलर को गाली की तरह प्रयोग करने से उसकी मानवीयता नहीं घटती अपितु गाली की तरह प्रयोग करने वाले ही घेरे में आते हैं जो हिन्दू साम्प्रदायिक होने से इंकार कर दे तो वो गाली का हकदार हो गया। गनीमत है कि ऐसे हिन्दू कुल हिन्दुओं के 85% हैं।

  25. man said,

    September 17, 2010 at 6:46 am

    >तरसआता हे "'सेकुलर जोकरों पर "' जो अपने को गर्व केसाथ "'हिन्दू "' भी नहीं कह सकते हे ?

  26. September 17, 2010 at 7:30 am

    >@वीरेन्द्र जैन:- आप लिखते हैं "यद्यपि यह सच है कि बहुसंख्यक साम्प्रदायिकता के आतंक का मुकाबला करते करते पार्टियाँ अल्पसंख्यक साम्प्रदायिकता का तुष्टीकरण करने लगी हैं" जानकारी के लिए धन्यवाद, अब कृपया "बहुसंख्यक साम्प्रदायिकता" के उद्गम काल से तनिक अवगत कराए।बहुसंख्यक साम्प्रदायिकता के संभवतः निम्न उदाहरण होगेः-१. इस्लामी राज्य के शासक (खलीफा) हेतु भारत मे आंदोलन (हिन्दुओं ने मज़्बूर किया मुस्लिमों को आंदोलन चलाने के लिये)२. खलीफा का पद समाप्त करने पर हिन्दुओं का मर्दन (हिन्दुओं ने स्वयं का कत्ल किया और मुस्लिमों पर झूठा आरोप लगाया)३. इस्लामी शासको द्वारा मंदिरो को ध्वस्त करना (हिन्दुओं ने स्वयं मंदिर तोश कर मस्जिदें बनाईं और इस्लाम को बदनाम किया)४. हिन्दु शासक (शिवाजी) द्वारा मुस्लिम शासक (औरंगजेब) की पोती को इस्लामी शिक्षा देना (यहाँ भी कोइ चाल होगी इस पर शोध करना पडेगा)५. Porkistan की माँग हेतु direct action के तहत एक ही दिन मे सिर्फ कलकत्ता मे ५००० हिन्दुओं का कत्ल कर देना (हिन्दुओं ने स्वयं का कत्ल किया और शांतिप्रिय मुस्लिम लीग वालों को बदनाम किया)६. देश के उपर धर्म को स्थान देते हुए राष्ट्र गीत वन्दे मातरम का विरोध करना (यह झूठ है, मुस्लिम तो वन्दे मातरम गाना चाहते हैं पर उन्हे कोई इसकी प्रति उपलब्ध ही नही कराता)७. अपने लिये विशेष अधिकारों की माँग करना (मुस्लिमों ने कभी अधिकार नही मांगे, हिन्दु उन्हे जबरन देते हैं)८. कश्मीर से हिन्दुओं का पलायन (गलत, मुस्लिमों ने तो उन्हे बहुत रोका, वो वापस आएं इसके लिये उनको यहाँ से सम्पत्ति भी नही ले जाने दिया, बल्कि कुछ हिन्दुओं की तो स्त्रियां भी रोक ली ताकि वो वापस आऍ, पर वो रूके ही नहीं)९. दंगों कि शुरुआत मुस्लिम गुण्डे करते हैं (इसमे क्या है, अगर शुरुआत कर भी दी तो हिन्दु अगर चुप बैठेगे तो दंगे कहां से होगे, कहावत सुनी नहि, ताली के लिये दोनो हाथ चाहिए)यह तो कुछ उदाहरण है जैन जी से अनुरोध है कि अगर उनके पास कुछ और उदाहरण हो तो प्रस्तुत करें

  27. R.K.GUPTA said,

    September 17, 2010 at 8:05 am

    >This is good story. Probably, it more important to be understood by our Union Government with respect to Pakistan & Chinese governments. Our government is hell bent to spend 2.5 crore dollars on Pakistan where as our own deported Kashmiri Pundits and families of Shaheed CRPF personnel, who laid their lives fighting Naxals are not being given any assistance. It is well known & established fact that same Pak government diverted as much a 12 crore dollars, received by it 5 years ago for earthquake victims, to defence & ISI to indulge in non-sense activates. Our government indirectly feeding terrorists by giving money to same Pak government where as its own citizens & CRPF personnel are suffering. May be, you can circulate your story and relate it to our weak government acts (and non-actions w.r.t. China). भरोसा करो लेकिन… एक व्यक्ति हमेशा अपने कामों से लोगों को परेशान करता था। लोग उससे बहुत दुखी थे। वह लोगों को परेशान करके बहुत खुश होता था। एक दिन वह बीमार हो गया। अचानक उसके व्यवहार में बदलाव आया। वह सब से ठीक से पेश आने लगा। उसके व्यवहार से सभी को आश्चर्य होने लगा लेकिन उसके रिश्तेदारों और लोगों को लगा कि शायद वह सुधर गया है। इसलिए सभी का व्यवहार धीरे-धीरे उसके प्रति बदलने लगा। एक दिन उसकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई तो उसने अपनी कालोनी वालों और रिश्तेदारों को इकट्ठा किया और कहा कि अगर आप सभी लोग चाहते हैं कि मरने के बाद मेरी आत्मा को शांति मिले तो आप सभी को मुझ से वादा करना होगा कि आप मेरी अंतिम इच्छा की पूर्ति करेंगें। लोंगो ने कहा ठीक है बताओ क्या है तुम्हारी अंतिम इच्छा? उसने कहा मैं चाहता हूं कि मेरे मरने के बाद मेरे सर में खूंटा ठोक दिया जाए । मैं चाहता हूं मुझे अपने जिन्दगी भर के गुनाहों कि सजा मिल जाए। लोगों ने उसे बहुत समझाया लेकिन वो था कि मानने को तैयार ही नहीं। उसी दिन उसकी मौत हो गई। उसके आसपास के लोग यही चाहते थे कि बेचारे की आत्मा को किसी तरह शांति मिल जाए इसलिए उन लोगों ने उसके सिर में खूंटा ठोंक दिया। अब उसके शव को शमशान ले जाने की तैयारी होने लगी। इतने मैं अचानक वहां पुलिस आई और उन लोगों से कहा कि आप लाश को नहीं ले जा सकते। सभी लोग स्तब्ध थे। उनमें से एक ने पूछा क्यों तो पुलिस ने कहा क्योंकि ये जो आदमी मरा है इसने चार दिन पहले ही रिपोर्ट लिखवाई थी कि शायद मेरी ही जान पहचान के लोग मेरे हत्या की साजिश कर रहे हैंऔर यदि मेरी अचानक मौत होती है तो इसका जिम्मेदार मेरे सभी जान पहचान वालों को माना जाए। वे सभी लोग सदमें में थे कि उस दुष्ट ने मरते हुए भी अपनी दुष्टता नहीं छोड़ी। आखिर गलती तो उन्ही की थी क्योंकि उन्होंने उस पर भरोसा किया। *********************************************** किसी भी व्यक्ति चाहे वो कैसा भी हो उसे सुधरने को मौका देना और उसे क्षमा करना ठीक है लेकिन किसी भी दुष्ट व्यक्ति पर आंख बंद करके विश्वास आपको दुख पहुचाने के साथ ही परेशानी में डाल सकता है। धोखे से बचने के लिए जरुरी है हमेशा भरोसा करें लेकिन सतर्कता के साथ क्योंकि किसी भी व्यक्ति की जो मूल प्रवृत्ति होती है वह उसे चाहकर भी नहीं छोड़ पाता। इसमें गलती उस व्यक्ति की नहीं, आपकी है।

  28. September 17, 2010 at 2:16 pm

    >किसी भे रंग की साम्प्रदायिकता का हल प्रति साम्प्रदायिकता न होकर धर्मनिरपेक्षता और कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए सरकारी तंत्र पर दबाव बनाना ही हो स्कता है।जो लड़ाई हमें सरकार के नाकारापन के खिलाफ लड़ना है वह हम अपने पड़ोस के कमजोर से लड़ने की बेबकूफी करने को बहादुरी समझते हैं। धर्म को अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने वाले चन्द शातिर लोग उस धर्म समाज के प्रतिनिधि नहीं होते।

  29. September 17, 2010 at 5:03 pm

    >@वीरेन्द्र जैनः- जो लोग वास्तविक स्थिति (यथार्थ) को झुठलाने का कार्य करते है तथ्यों को बिगाडते हैं उनके बारे मे क्या विचार है? और पडोस के कमजोर कौन हैं – कश्मीर मे धर्म परिवर्तन करने के लिये धमकी देने वाले या अफजल को फांसी चढाने पर प्रतिक्रिया की धमकी देने वाले? पहले आप वस्तविकता को स्वीकारने का साहस भरें अपने में।

  30. ZEAL said,

    September 18, 2010 at 1:34 pm

    >.हिन्दुओं में चाटुकारिता की प्रवित्ति है। अपने निजी स्वार्थ के लिए देश के गद्दारों की तेल मालिश करने से नहीं झिझकते। ममता बैनर्जी की तस्वीर शर्मसार कर रही है। निज स्वार्थ के लिए इतना ओछापन ? धिक्कार है।और ये बहुरानी ? जब तक इटली वापस नहीं जायेंगी , तब तक फर्जी-सेकुलेरीस्म का भोंडा नाच होता रहेगा। क्यूंकि वो न तो हिन्दू है, न ही इसाई…उसका न तो ये देश है, न कोई ईमान। पर अफ़सोस इतने बड़े देश को वो चला रही है। जिसका इस मुल्क पर कोई अधिकार ही नहीं। .

  31. September 19, 2010 at 10:16 pm

    >जब तक वीरेंद्र जैन जैसे लोग इस देश में हैं इस देश का कुछ भला नहीं हो सकता , इस तरह के लोग अन्धे होते हैं सामने रक्खी चीज़ भी इनको नहीं दिखाई देती.राजनेताओं, आतन्कवादियों से भी पहले वीरेंद्र जैन जैसे लोगो का वध करना होगा जो तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर मिथ्या रूप में पेश करते हैं. ये दुनिया की किस मिटटी से बने होते हैं ये समझ से बहार की बात है. ये लोग आतन्कवादियों से भी खतरनाक हैं क्योंकि ऐसे लोग ही इस घिनौनी साम्प्रदायिकता और आतन्कवादियों के पालनकर्ता और जन्मदाता हैं इनकी गर्दन सबसे पहले मरोड़ो.

  32. September 20, 2010 at 7:24 am

    >"राष्ट्रीय" कहे जाने वाले भाण्ड चैनल दिल्ली की फ़र्जी बाढ़, तथा दबंग और मुन्नी की दलाली (यानी प्रमोशन) के पुनीत कार्य में लगे हुए थेsatya kaha aapne ….Ram bharose hi hai ye desh /ya kuch aise mahan desh bhakton ke balidaan par jinka rakt abhi tak in netaon ke mansoobo ko poora nahi hone de raha hai ,jo haal netaoo ka hai us hisab se to ab tak fir se gulaam ho chuke hote hum

  33. Anonymous said,

    September 21, 2010 at 11:42 am

    >रतलाम में मुसलामानों द्वारा किये gaye दंगो पर १ और धर्मनिरपेक्ष (?) हिन्दू की टिपण्णी पढ़िए:-http://indianmuslims.in/my-visit-to-riot-affected-ratlam/#commentsइन्हें कोई दंगा प्रभावी हिन्दू क्षेत्र में कोई ले जाता तो समझ में आता. लगता है यह सिर्फ पत्रिका ही निकालते है बस टीवी वगेरह नहीं देखते ? सहारा एमपी और ई टीवी एमपी देखा नहीं क्या?लगभग २ घंटे तक मारपीट किया इन्होने. महिलाओं ओ बच्चों को भी नहीं छोड़ा. तलवार चलाई, गोलिया चलाई. बाद में पुलिस पर भी तलवार गोलिया चलाई. टी आई को बचने में १ कांस्टेबल को तलवार लगी. एसपी के पास से गोली निकल गयी. मस्जिद से मुसलमानों को उकसाया लड़ने के लिए. मस्जिद से तलवारे, बन्दुक निकले तलाशी में. १ दरगाह से तो चरस भी बरामद हुई.

  34. mngaur said,

    September 21, 2010 at 1:39 pm

    >me sochta tha ki yahan sirf muslim logo par hi zulm hota hai. lekin ab samajh me ata hai ki jahan jis ki sankhya zyada hai wo uska pura pura galat istemal karta hai. me ye sab padh kar bahut dukhi hu. hame rajnetao ka peecha chord kar khud hi samajhdari se kaam lena chahiye nahi to nafrat ki aag me na tera ghar bachega na mera.

  35. September 22, 2010 at 12:15 pm

    >@वीरेंद्र जैन. परमश्रद्धेय जैन साहब के विचारों की कोई ग़लती नहीं है। दरअसल, जीवनभर की कमाई से जो विचार इक्टठा हुए हैं वे अब किसी हाल में नहीं त्यागे जा सकते। वे उसी लकीर को सही मान बैठे हैं जो आदर्शवाद से उपजी है। व्यवहारिक धरातल पर तस्वीर कुछ और है। वैसे ये अद्भुत बात है कि वे अक्सर यहां आते हैं और बतियाकर चले जाते हैं। जैन जी, धर्मनिरपेक्षता आदर्श स्थिति है। हम भी इसके कायल हैं। किंतु अलगाववादी मानसिकता और जिहादी आतंक के सामने तर्क मायने नहीं रखते। गांधी-मोती-नेहरू-पटेल सरीखे नेताओं के होते हुए इस देश को मुस्लिमों ने बांटकर अपना हिस्सा पाकिस्तान बना लिया। जो आज दुनिया का सिरदर्द बन चुका है। तब बड़े महान नेता कुछ नहीं कर सके। आज तो हालात बदतर हो चुके हैं। दूसरी बात यह है जो हम सभी को विचारनी चाहिए। युद्ध सैकड़ों या हज़ारों लोग करते हैं। लाखों-करोड़ों की तादाद वाली जनता तलवार और बंदूकें नहीं उठाती। बड़ा वर्ग सिर्फ़ विजय या पराजय के अधीन अभिशप्त होता है। शासन आक्रांता का हो या अपने ही राजा का। वह हरेक के लिए अभिशप्त है। पंद्रह सौ साल हम अभिशप्त ही रहे हैं। मुग़लों से लेकर अंग्रेज़ों तक। आज भी परिवारवाद के शिकंजे में हैं। अमृतलाल नागर जी ने कहीं लिखा था, 'अवध के नवाब के राज को हथियाने आई फिरंगी फौज को देखने के लिए गांव-गांव से कस्बों तक सड़कों के किनारे हज़ारों लोग खडे थे। लाल सफेद पोशाकों और हथियारों से सजी इस सेना पर तमाशबीन बने लोगों ने एक एक पत्थऱ भी मार दिया होता तो वे भाग खड़े होते 'यही हाल हिन्दुओं का है। ध्यान दें.. सेकुलरिज्‍म तभी तक मुमकिन है जब तक हिन्दू बहुमत में है। हिन्दू तभी तक सुरक्षित है जब तक उसके रणबांकुरों में राष्ट्रवाद का जज़्बा है। बाक़ी बड़े वर्ग के हिन्दुओं से हमें कोई उम्मीद नहीं है। वे हम्पटी डम्पटी लारा लप्पा में ही खुश है। चाहे अकबर आए या जॉर्ज। उम्मीद आप जैसों से है।

  36. Anonymous said,

    September 22, 2010 at 5:43 pm

    >Best Hindu blogger of the century ……… he looks like biased, but compare it with Gandhi……. challenge you if you discard his facts and a meaning coming out of it

  37. Hindu WB said,

    February 2, 2011 at 8:31 pm

    >Nicely summarised!


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