>Why Do We Need Friends

>अभी थोड़ी देर पहले ही एक मेल प्राप्त हुआ ,काफी मजेदार मेल है ,मेल का शीर्षक था ” Why Do We Need Friends ” ,

आपको क्या लगता है की इसका शीर्षक क्या होना चाहिए ??        :)   🙂

19 Comments

  1. October 7, 2010 at 4:40 am

    >चोर-चोर मौसेरे भाई.. आजकल ये सिस्टम भारत में ही काम कर रहा है.. ऊपर लेकर निचे तक, मंत्री से लेकर संत्री तक सब "बिकाऊ".

  2. impact said,

    October 7, 2010 at 4:48 am

    >इस पोस्ट का शीर्षक है, 'फैसला!'

  3. October 7, 2010 at 5:23 am

    >Impact अभी भी "झटके" से उबर नहीं पाया है… अवसाद की स्थिति में है… इसकी बातों पर ध्यान न दिया जाये, जब तबियत ठीक हो जायेगी तब सोचेंगे…

  4. October 7, 2010 at 5:33 am

    >सही कहा "सुरेशजी" आपने.. हर जगह "लतियाये" जा रहे है पर क्या करें मोटी चमड़ी है आदत जाती ही नहीं इन "नकाब" वालों की…

  5. impact said,

    October 7, 2010 at 7:08 am

    >सुरेश मियाँ, तुम तो सदेव इस 'अवसाद' नामक बीमारी से ग्रस्त रहते हो. कभी कभी हमें भी इस 'बहुमूल्य' बीमारी से ग्रस्त होने का मौका दे दो न.

  6. October 7, 2010 at 7:12 am

    > IMPACT यार एक बार अपना चेहरा तो दिखा दो. डर किस बात का है तुम्हे प्यारे "केंद्र में सरकार" तुम्हारी है.

  7. October 7, 2010 at 8:15 am

    >महक जी ….आपकी पोस्ट तो वाकई मज़ेदार है .लेकिन ये जो आपने शीर्षक बताने का काम दे दिया.ये काफ़ी मुश्किल है ..फिर भी जो हिन्दुत्व और राष्ट्रवादजी ने शीर्षक दिया है ..वो मेरे हिसाब से भी बिलकुल सटीकहै ….वैसे काफ़ी दिनों बाद आपने अपने ब्लॉग पर पोस्ट लगाईं है .पिछले दिनों मेरे ब्लॉग पर आपने बड़ी उत्साह बर्धक बातें (एक गीत के सन्दर्भ में)लिखी थी उसके लिए और इस पोस्ट के लिए आपका हार्दिक आभार ……

  8. October 7, 2010 at 10:18 am

    >भाईचारा….

  9. October 7, 2010 at 10:54 am

    >जय हो।

  10. Shah Nawaz said,

    October 7, 2010 at 1:05 pm

    >:-)ऐसे नज़ारे तो अपने देश में आम है!

  11. Mahak said,

    October 7, 2010 at 3:17 pm

    >मैं हैरान हूँ अपने कुछ मित्रों की बुद्धि पर जिन्होंने इस पोस्ट को अयोध्या विवाद में आये हुए फैसले के सन्दर्भ से जोड़ लिया ,मेरे खैयाल से तो इस पोस्ट में दूर-२ तक ऐसा कुछ नहीं है जिसे अयोध्या विवाद के फैसले से जोड़कर देखा जाए,इस पोस्ट में भ्रष्ट लोगों की उपर से नीचे तक जारी मिलीभगत को दिखाया गया है, लेकिन फिर भी अगर कुछ लोगों को इससे confusion या ग़लतफहमी पैदा हो रही है तो साफ़-२ कह रहा हूँ की इस पोस्ट का उस फैसले से कोई भी लेना-देना नहीं है ,ये एक मेल के रूप में मुझे प्राप्त हुई थी जिसे की मजेदार समझते हुए मैंने आप सबके साथ बांटने का प्रयास किया ,इसे उस फैसले के साथ जोड़कर देखने की भूल ना करें महक

  12. Mahak said,

    October 7, 2010 at 3:26 pm

    >@राजेन्द्र जी ,@आदरणीय ,प्रिय एवं गुरुतुल्य सुरेश जी ,@विरेन्द्र सिंह चौहान जी ,@दर्शन लाल बावेजा जी ,@जाकिर अली रजनीश जी ,@प्रिय शाहनवाज़ भाई ,आप सभी का हार्दिक धन्यवाद पोस्ट पर अपने विचार रखने के लिए महक

  13. October 7, 2010 at 4:58 pm

    >Mazedaar aur kuch sochne par majboor karti post.

  14. October 7, 2010 at 5:20 pm

    >ये सब तो अब आम हो चला है. इस कार्टून श्रंखला का शीर्षक "चोर से चोर मिले कर कर लम्बे हाथ " कैसा रहेगा.

  15. October 8, 2010 at 3:01 am

    >मैं किस के हाथ में अपना लहू तलाश करूँ ,तमाम शहर ने पहन रखे हैं दस्तानें ||

  16. October 9, 2010 at 6:00 am

    >अच्छी जानकारी दी.या देवी सर्व भूतेषु सर्व रूपेण संस्थिता |नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||-नव-रात्रि पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं-arganikbhagyoday.blogspot.comarganikbhagyoday-jindagijindabad.blogspot.com

  17. amar jeet said,

    October 10, 2010 at 1:40 pm

    >सैया भये कोतवाल तो दर काहे का मेरे ख्याल से ये शीर्षक उपयुक्त होगा

  18. October 11, 2010 at 2:45 pm

    >bahut hi behtarin tasweer hai pasand ayadabirnews.blogspot.com

  19. October 12, 2010 at 2:24 pm

    >आपकी पोस्ट तो वाकई मज़ेदार है |


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