>दो खबरें :- केरल में "रहस्यमयी" सर्वे तथा ओबामा के सामने "सेकुलरिज़्म" की गटर… Mysterious Survey in Kerala and Obama Visit Secularism

>केरल सरकार ने केन्द्र सरकार से पिछले दिनों राजधानी त्रिवेन्द्रम के कुछ खास इलाकों में टेलर-नील्सन नामक संस्था द्वारा किये गये रहस्यमयी और अजीबोगरीब सर्वे की जाँच करवाने का आग्रह किया है। अब जैसा कि सभी जानते हैं वामपंथी और कांग्रेसियों द्वारा बारी-बारी से शासित केरल राज्य में ईसाई और मुस्लिम बहुल इलाके बहुतायत में हैं, इन दोनों समुदायों की जनसंख्या भी अच्छी-खासी तादाद में है। उक्त सर्वे केरल सरकार की नाक के नीचे ब्रिटेन की संस्था टेलर-नील्सन ने किया एवं इस संस्था को आर्थिक मदद वॉशिंगटन की प्रिंसटन सर्वे रिसर्च असोसिएट्स द्वारा दिया जाता है।

इस सर्वे में मुस्लिम इलाकों में कई आपत्तिजनक सवाल पूछे गये। सर्वे प्रश्नावली में कुल 93 प्रश्न थे… कुछ की बानगी देखिये…

– बराक हुसैन ओबामा और उनके प्रशासन के बारे में क्या सोचते हैं?

– मनमोहन सिंह, पश्चिम एशिया, इसराइल और बांग्लादेशी मुसलमानों के बारे में आपके क्या विचार हैं?

– भारत की सरकार और सेना के बीच सम्बन्धों तथा सेना की भूमिका पर आपके विचार?

– भारत के अलावा किस देश में रहना पसन्द करेंगे?

ओसामा बिन लादेन के बारे में क्या सोचते हैं?

– शरीयत को भारत के संविधान का हिस्सा बनाने पर अपनी राय दीजिये।

इस प्रकार के कई आपत्तिजनक और देशद्रोही किस्म के सवाल इस सर्वे में पूछे जा रहे थे, कुछ लोगों ने इस पर अपना विरोध जताया और कम्पनी के स्टाफ़ (जिसमें चार लड़कियाँ भी शामिल थीं) को रोक दिया। इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है, और इसके तुरन्त बाद कोच्चि स्थित टेलर-नेल्सन कम्पनी का दफ़्तर बन्द पाया गया। प्रारम्भिक जाँच से पता चला है कि इस एजेंसी ने इसी प्रकार का सर्वे गुजरात को छोड़कर, देश के करीबन 20 राज्यों के 55 मुस्लिम बहुल इलाकों में करवाया है। केरल के गृहमंत्री का बयान है कि हमने केन्द्र सरकार को सूचित कर दिया है और किसी केन्द्रीय संस्था से इस संदिग्ध मामले की गहराई से पड़ताल करने को कहा है।

सवाल उठता है कि आखिर विदेशी संस्थाओं द्वारा ऐसे सर्वे करने का क्या औचित्य है और निहायत बदनीयती भरे सवाल पूछने के पीछे उनका क्या मकसद रहा होगा? यह सर्वे मुस्लिम बहुल इलाकों में ही क्यों किये गये… क्या केरल सहित अन्य सभी राज्य सरकारों का खुफ़िया तन्त्र सो रहा था? कहीं यह “सेकुलरिज़्म” के नाम पर “मुस्लिमों को खुश करो…” अभियान का हिस्सा तो नहीं था? सर्वे करने वाली एजेंसी टेलर-नेल्सन कम्पनी से पूछा जाना चाहिये कि उसे यह सर्वे करने का ठेका किसने दिया और इस प्रकार की प्रश्नावली किसने तैयार की?

“कांग्रेसी और वामपंथी छाप” सेकुलरिज़्म वैसे ही इस देश में उफ़ान पर है। जब भी, जिसे भी, जहाँ भी, जैसे भी मर्जी होती है हिन्दू नेताओं, हिन्दू धर्माचार्यों, हिन्दुत्व की बात करने वालों, संघ और विहिप जैसे संगठनों पर वैचारिक और शाब्दिक हमले कर डालता है, आजकल यह फ़ैशन सा बन गया है। “हिन्दुत्व को गरियाओ”, अभियान में जो सेकुलर शामिल होते हैं, उन्हें इस बात का पूरा-पूरा “समुचित भुगतान” भी किया जाता है। वामपंथी लोग अपने “नेटवर्क” में “सेटिंग” के जरिये किसी ऐरे-गैरे को कभी कहीं प्रोफ़ेसर बनवा देते हैं, तो कभी किसी इतिहास शोधक संस्था में मोटा पद दिलवा देते हैं तो कभी किसी तीसरे दर्जे के घटिया से शोध के नाम पर कुछ तगड़ी “ग्राण्ट” वगैरह दिलवा देते हैं… लगभग यही तरीका कांग्रेसी भी अपनाते हैं और ईनाम के तौर पर ठरकी किस्म के बुढ़ापों को विभिन्न राज्यों में राज्यपाल बनाकर भिजवा देते हैं जो अच्छी-भली चल रही गैर-कांग्रेसी राज्य सरकारों के कान में उंगली करते रहते हैं।

सेकुलरिज़्म का ऐसा ही “नंगा नाच” हमें हाल ही में ओबामा की यात्रा के दौरान भी देखने को मिल चुका है। जब ओबामा को UPA वाले गाँधी से पहले हुमायूं के मकबरे के दर्शन करने ले गये (विदेशी मेहमानों को कहाँ ले जाना है या क्या दिखाना है यह भारत सरकार की सलाह से तय होता है), कांग्रेसियों से सवाल किया जाना चाहिये कि क्या हुमायूं का मकबरा, राजघाट से भी अधिक महत्वपूर्ण है? यह बात अभी भी समझ से परे है कि लाल किला या ताजमहल को छोड़कर, बाबर की औलाद तथा एक हारे हुए योद्धा और ढीले-ढाले शासक हुमायूं के मकबरे पर ओबामा गये ही क्यों? और कांग्रेसी उन्हें हुमायूं के मकबरे पर पहले क्यों ले गये। यही सेकुलर बाजीगरी ओबामा के सम्मान में दिये गए डिनर के दौरान भी की गई। भारत में कश्मीर के विलय पर बचकाना सवाल उठाने वाले एक नाकाम और अनुभवहीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को डिनर के आमंत्रितों में शामिल किया गया, किसी और मुख्यमंत्री को नहीं।

चलो माना कि भारत के सबसे विकसित राज्य गुजरात और सबसे सफ़ल मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर कांग्रेस को हिचकियाँ आने लगती हैं सो उन्हें नहीं बुलाया, लेकिन कम से कम किसी और कांग्रेसी मुख्यमंत्री को ही डिनर पर बुला लेते? इसमें भी एक पेंच था, कांग्रेसी मुख्यमंत्री गिनेचुने ही तो बचे हैं, तो बुलाते किसे? अशोक चव्हाण को? हुड्डा को? या रोसैया को, जिसे खुद आंध्र में ही लोग मुख्यमंत्री नहीं मानते और जानते। इसलिये ओबामा और मुस्लिमों को खुश करने के लिये उमर अब्दुल्ला को बुलाया गया। ओबामा के साथ डिनर करने वाले कुछ अति-गणमान्य व्यक्तियों में आमिर खान, शबाना आज़मी और जावेद अख्तर साहब भी शामिल थे… शायद इन तीनों का भारतीय फ़िल्म उद्योग और संस्कृति में योगदान, अमिताभ बच्चन से ज्यादा होगा इसीलिये इन्हें बुलाया और अमिताभ को नहीं बुलाया… सेकुलर सोच ऐसी ही होती है। जबकि असली कारण यह है कि अमिताभ बच्चन गुजरात के ब्राण्ड एम्बेसेडर बन चुके हैं तो अब वे “अछूत” हो गये हैं और चूंकि शबाना और जावेद अख्तर सतत रात-दिन कांग्रेसी मार्का सेकुलरिज़्म के पैरोकार बने घूमते रहते हैं इसलिये वे ही ओबामा के साथ डिनर करेंगे… इतनी सी बात “हिन्दू-हिन्दू” करने वाले नहीं समझते तो उसमें सोनिया का भी क्या दोष है?

बहरहाल, ओबामा भारत के नेताओं को संयुक्त राष्ट्र की स्थाई सदस्यता की लॉलीपॉप थमाकर जा चुके हैं, अब सभी लोग मिलकर इसे चूसते रहेंगे… इस लॉलीपॉप के जरिये ओबामा भारत सरकार और कम्पनियों को कुल 500 अरब से अधिक का चूना लगा गये… तीन दिन रुकने का खर्चा अलग से।

बहरहाल, इंडियन स्टाइल “सेकुलरिज़्म” अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच चुका है, एक तरफ़ अमेरिका के पैसे से ब्रिटिश एजेंसी केरल के मुस्लिम इलाकों में गुपचुप सर्वे करती है, वहीं दूसरी तरफ़ “UPA के मुस्लिम वोट सौदागर”, एक विदेशी मेहमान के सामने भी देश के सबसे बेहतरीन मुख्यमंत्री और सबसे लोकप्रिय अभिनेता को पेश करने की बजाय अपने “घृणित सेकुलरिज़्म” का भौण्डा प्रदर्शन करने से नहीं चूकते…
===============

चलते-चलते :- जो भोले लोग इस मुगालते में हैं कि अशोक चव्हाण की कुर्सी आदर्श सोसायटी घोटाले की वजह से गई वे नीचे दी गई तस्वीर देख लें… चव्हाण की कुर्सी जाने की असली वजह यह तस्वीर है…

(सबक – नरेन्द्र मोदी वह मिर्ची है, वह आग है… जो कांग्रेस, वामपंथी, सेकुलरों और देश के गद्दारों के पिछवाड़े में बराबरी से शेयर होती है…) ये तो भाजपा वाले “मूर्ख और डरपोक” हैं जो नीतीश कुमार की बन्दर घुड़की से डर कर मोदी को बिहार के चुनाव प्रचार से दूर रखे रहे… हकीकत यही है कि भाजपा में किसी नेता की औकात, लोकप्रियता और काम नरेन्द्र मोदी के बराबर नहीं है… परन्तु ड्राइंगरुम में बैठकर सोनिया-राहुल के साथ चाय की चुस्कियाँ लेने वाले कांग्रेस से “मधुर सम्बन्ध”(?) बनाकर रखने वाले भाजपा के “हवाई नेताओं” को समझाये कौन? बाय द वे…… ओबामा के साथ डिनर हेतु जेटली और आडवाणी को आमंत्रित किया गया था, सुषमा स्वराज की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है…

Mysterious Survey in Kerala, Survey in Muslim Dominated Areas of Kerala, Barack Obama India Visit, Secularism during Obama Dinner, Obama Dinner Invitee List, Narendra Modi and Amitabh Bachchan, Humayun’s Tomb, केरल में रहस्यमयी सर्वे, मुस्लिम बहुल इलाकों में सर्वे, बराक ओबामा की भारत यात्रा, धर्मनिरपेक्षता और ओबामा, ओबामा डिनर, नरेन्द्र मोदी और अमिताभ बच्चन, Blogging, Hindi Blogging, Hindi Blog and Hindi Typing, Hindi Blog History, Help for Hindi Blogging, Hindi Typing on Computers, Hindi Blog and Unicode

Advertisements

18 Comments

  1. November 13, 2010 at 7:23 am

    >रिसीव करने के लिये भी "सलमान खुर्शीद" को भेजा गया था… निजी टीवी चैनल का एक धर्मनिरपेक्ष पत्रकार बराक ओबामा की जगह बराक "हुसैन" ओबामा एक मिनट में चार बार बोल रहा था. हुसैन बोलते समय पूरा जोर लगा रहा था. यह वही पत्रकार था जिसे "डेविड कोलमैन हेडली" का असली नाम "दाऊद गिलानी" लेते समय उलटी होने लगती है..

  2. November 13, 2010 at 7:58 am

    >भाजपा में किसी नेता की औकात, लोकप्रियता और काम नरेन्द्र मोदी के बराबर नहीं है… सही कहा जी, बल्कि "भाजपा" के बजाये "भारत" कहूंगा।आज लेख बहुत पसन्द आयाप्रणाम स्वीकार करें

  3. November 13, 2010 at 8:36 am

    >lagta hai ab narendra modi se vipax ke neta to thik lekin BJP ke neta bhi jalne lage hai nahito nitish kumar ki lok priyta matra bihar mehi hai aur nitish ki gidad dhamki se narendra modi ko bihar prachar se bahar rakhna BJP ki napunsakta bata rhi hai agar modiji ko bihar bheja gya hota to sayad BJP ko JDU ki jarurat hi nahi padti lekin BJP ke bhi kuch neta narendra modi se jalte hai aur ishi ka praman hai ki BJP ke sirsh neta nitish kumar ke aage zuk gaye……….

  4. November 13, 2010 at 8:41 am

    >बेहतरीन लेख| अब तो शर्म आने लगी है कि आखिर कब तक ये नंगा नाच चलेगा? भाजपा जैसा मुर्ख विपक्ष हो तो कौन मलाई नहीं खाएगा? इतनी सी बात इन ढक्कनों को समझ नहीं आ रही| मुद्दों की तो भरमार है भाजपा के पास, और ये मुद्दे खुद कौंग्रेस हे मुहैया करवा रही है फिर भी पता नहीं क्यों चुप बैठे हैं? पता नहीं कैसे इस कौंग्रेस नामक बीमारी से छुटकारा मिलेगा?

  5. November 13, 2010 at 9:43 am

    >4/10 बरखुदार आप बहुत बाल की खाल निकालते हैं. तरह-तरह के सर्वे होते रहते हैं. सर्वे में पूछे गए सवालों में आपत्तिजनक और देशद्रोही जैसी बात फिलहाल तो नजर नहीं आ रही है.

  6. rupeshg07 said,

    November 13, 2010 at 9:49 am

    >suresh bhai sahab pranam,mai to apke lekhni ka murid ho gaya hnoo. bus kuchh pichhli posto me shikayat hai. par koi baat nahi chaand par bhi to daag hai. aap apne lekho ko pustak ke rup me sahejiye aur market me utarne ki taiyari kijiye kai bhago me. aur ho sake to is dharmnirpeksh system ko sudharne ke tips dijiye. mere jaise log ab kuchh aisa chahte hain ki ab sudhar ki prakriya chalu ki jaani chahiye. tabhi samay rahte hum apni sanskriti bacha payenge.

  7. November 13, 2010 at 12:25 pm

    >do agree with you suresh ji. but we should avoid to be part of bjp internal politics.at last HINDU shakti vijey shree prapt karegi.regardstyagi

  8. Pratik Jain said,

    November 13, 2010 at 2:56 pm

    >आपकी कही एक-2 बात सत्य है

  9. man said,

    November 13, 2010 at 4:12 pm

    >वन्देमातरम सर ,सर सफ़ेद कच्छा तो रहने दो इन वर्णसंकरो के गुप्त अंगो पे ,साले शर्म से नहीं तो ,बड़ी मम्मी की सच्चाई से मर जायेंगे ?

  10. November 13, 2010 at 6:40 pm

    >सुरेश जी जब से आप के लेख पढ़ने शुरू किये हँ में आप का मुरीद हो गया और अब तो मेने आप के नाम पर एक कम्युनिटी भी बना डाली ऑरकुट पर

  11. November 14, 2010 at 5:44 am

    >जब मैंने टी.वी. पर यह न्यूज़ देखी थी तो मेरे मन में भी ऐसा ही ख्याल आया था… मेरे तो एक बात यह नहीं समझ में आती है कि जावेद अख्तर और शबाना आज़मी के स्टेटमेंट को पूरे कम्युनिटी का स्टेटमेंट क्यूँ मान लेते हैं… ? अभी मैं जल्द ही ऐसा इतिहास बताने जा रहा हूँ… जो कांग्रेस सेक्युलरिज्म… की पोल खोलेंगीं… पता नहीं क्यूँ हुमायूँ का मकबरा दिखाया गया… मेरे यह नहीं समझ में आया…. जितनी ज़मीन मकबरे के लिए हुमायूँ ने घेरी है… उतने में एक यूनिवर्सिटी या फिर पी.जी.आई. या फिर कोई और पब्लिक बेनेफिट प्रॉपरटी …..बन जाती… हर मुस्लिम शासक ने अपना मकबरा बनवाया है… जबकि ख़ुद इस्लाम में मकबरा बनाना बहुत बड़ा गुनाह है… कब्र को सीमेंटेड करना इस्लाम में बहुत ही बड़ा गुनाह है… और यह सब मुस्लिम शासकों ने अपना अपना मकबरा बनवाया… फिर वो किस बात के मुसलमान हुए…? आपको बताऊँ… जावेद अख्तर से मैं ख़ुद ग़ज़ल लिखना सीख रहा था… और एक कांफेरेंस में मैंने यह कह दिया उनके स्टेटमेंट पर कि यह उनका अपना पर्सनल स्टेटमेंट है… पूरे कम्युनिटी का नहीं… तो चिढ गए… हालांकि मेरी उनसे अब भी बात होती है… उनको लगता है कि चेला चेला रहे… अरे! हमने आज तक कोई गुरु नहीं पाला… तो जावेद को क्या समझेंगे… हम किसी से कम थोड़े ही हैं… और यही बात उनसे मैंने कह भी दी थी.. तो लोग जावेद अख्तर को पर्सनली जानते हैं… सब गाली ही देते हैं… चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान… कांग्रेस की पोल मैं खोलने वाला हूँ जल्दी ही… मेरे पास ऐसा इतिहास है जो कभी लिखा नहीं गया… पूरे सबूत के साथ जल्द ही हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो कर लिखूंगा…

  12. November 14, 2010 at 9:27 am

    >महफूज अली जी आपके लेख का हमें बेसब्री से इन्तजार रहेगा|और आप जिस किसी भी कारण से हॉस्पिटल में हैं भगवान् से प्रार्थना है कि आप शीघ्र ही स्वस्थ हों|

  13. abhishek1502 said,

    November 14, 2010 at 12:53 pm

    >अच्छी पोस्ट के लिए आप को धन्यवाद कांगेस हटाओ , देश बचाओ महफूज जी को जल्दी स्वास्थ होने की शुभ कामनाये उन के लेख का बेसब्री से इंतजार रहेगा

  14. November 14, 2010 at 3:12 pm

    >वाह! आप की लेखनी कमाल की है. आपके विचार राष्ट्रवादी तथा समाज को सही दिशा देने वाले है. जिनकी नज़र कमजोर है वोह आज आपकी आलोचना करेंगे क्योंकि वो पिंक चड्ढी वाले है पर जब उनकी बहिन बेटियां rape की शिकार होंगी तब ही इनको अपनी गलती का एहसास होगा. अभी यह दूसरे की बहिन को अपनी बहिन नहीं मान रहे. शायद भारत को भी अपना देश नहीं मान रहे.आप निम्नलिखित कविता को पढ़ कर प्रेरणा लेते रहे.शुद्ध हृदय की प्याली में विश्वास दीप निष्कंप जलाकरकोटि कोटि पग बढे जा रहे तिल तिल जीवन गला गला करजब तक लक्ष्य न पूरा होगा तब तक पग की गति न रुकेगीआज कहे चाहे जो दुनिया कल को झुके बिना न रहेगी.

  15. SHIVLOK said,

    November 15, 2010 at 2:06 am

    >सुरेश जी जो व्यक्ति या परिवार या समुदाय या फिर राष्ट्र अपनी सत्य बात को भी पूर्ण एकता साहस , मजबूती के साथ न रख सके उसका भविष्य अंधकारमय होता है|भयभीत सपनेहू सुख नाही |सुदर्शन ने सोनिया पर कोई बयान दिया , कांग्रेस ने उसका जवाब देशभर में हुड़दंग मचा कर दिया जवाब में भले ही आर एस एस या भाजपा हुड़दंग ना मचाए परंतु कुछ मजबूत और सख़्त बयान तो जारी किए ही जा सकते थे , जैसे :-आडवाणी : कॉंग्रेस्सियों से मेरा विनम्र निवेदन है की हुड़दंग मचाने और बदतमीज़ी करने के बजाए आरोपों का स्पष्ट और तर्कपूर्ण जवाब दें |गडकरी : मेरा सोनिया जी से विनम्र निवेदन है की पूर्णतया तर्कपूर्ण तरीके से अपने उपर लगे आरोपो का प्रतिकार करे, आरोप असत्य हैं ये देश के सामने स्पष्ट करने के लिए सभी सवालों का साफ साफ जवाब दें | नरेंद्र मोदी: सोनिया जी से मेरा हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है की अपने कार्यकर्ताओं से कहें की शब्दों का जवाब शब्दों से दें , कॉंग्रेस्सी जिस तरह से हुड़दंग कर रहे हैं , उससे ऐसा आभास होता है की शायद सुदर्शन जी सही कह रहे हैं , कृपा करके असत्य को तर्कपूर्ण तरीके से असत्य कहिए| सुषमा स्वराज : आरोप लगाने का अधिकार राहुल ,दिग्विजय या मनीष तिवारी को ही नहीं है | आरोप असत्य हैं इसे आप संपूर्ण तर्कों के साथ देश के सामने रखिए | तर्कपूर्ण बहस के बजाय हुड़दंग से तो ऐसा ही आभास होता है की शायद आरोपसही हैं |इस तरह की बातों के बजाय भयभीत बन कर प्रस्तुत हो रहे हैं |

  16. kaverpal said,

    November 15, 2010 at 9:16 am

    >Bhai sahab Suresh ji namaskar jab Sir Tamas Ro pahala aadmi England se aaya to use bhi Obama ki tarah hi ghumaya gaya tha natija 190 salon ki gulami ke rup me mila abki baar obama ko humayu ka makbara isliye dikhaya gaya ki ham bhi humayu ki tarah vilasi aur afeemchi hain aap aayen aur sukh bhogen aur ciplunkar ji hamidabano ke bairam khan se kaise sambandh the shayad aapko malom nahin hai aur humayu ki maut bhi in sakularvadi itihaskaron ne sidhiyon se girana batakar saspes me rakh di hai.bha mahfooj ali aap wo itihas batayen aur ham apse kandha milkar in sakular wolon ki wo kar ——-

  17. November 18, 2010 at 7:28 am

    >सुरेश जी इस सर्वे के आधार पर केरला सरकार अपना घोषणा पत्र जारी करेंगे ! आखिर मूल्ली सरकार जानना चाहती है की जनता क्या चाहती है !?

  18. Amit said,

    November 18, 2010 at 8:54 am

    >Dear Sir,Kya pata ye sarvey Sarkaron ki dekh raikh main hi hue hon?BJP ko apne nizi swarth se upar uth kar Modi and Varun Gandhi ji ki Lokpriyata ka fayda uthana chahiye. Modi ji next prime Minister ka dawedar bana kar Chunaw maidan main utarna chahiye. BJP Ki koi majboori nahin hai hai Nitish jaison ki Ghudkiyan sunna.


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: