>ऐसे होगा खुशहाल, स्वावलम्बी और शक्तिशाली भारत का निर्माण: एक घोषणापत्र

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“ब्लॉग संसद” के माननीय सदस्यगण,  
मेरा यह मानना है कि अपने देश में एक स्वस्थ, सबल और टिकाऊ लोकतंत्र की स्थापना के लिये कम-से-कम दस वर्षों का एकच्छत्रीय शासन (डिक्टेटरशिप) जरुरी हो गया है. आज की तारीख में भारतीय लोकतंत्र की जो स्थिति है, उसमें हम यह आशा नहीं रख सकते हैं कि वह खुद अपने ऊपर चीरा लगाकर कैन्सर की चार गाँठों- भ्रष्ट राजनेता, भ्रष्ट उच्चाधिकारी, भ्रष्ट पूँजीपति और माफिया सरगना- को निकाल बाहर कर सकेगा.
लोकतंत्र को दस वर्षों के लिये बेहोश करके एकतंत्र ही यह शल्यक्रिया कर सकता है.
वह एकच्छत्र शासक किस प्रकार के शासन-प्रशासन से देश को खुशहाल, स्वावलम्बी और शक्तिशाली बनायेगा और किस प्रकार एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव रखेगा, इन सबका एक खाका (ब्लूप्रिण्ट) मैंने तैयार किया है, जो एक “घोषणापत्र” के रुप में इण्टरनेट पर निम्न पते पर उपलब्ध है:
“ब्लॉग संसद” के सभी माननीय सदस्यों से मेरा हार्दिक निवेदन है कि कृपया वे एक बार इस “घोषणापत्र” को आद्योपान्त पढ़ें और मेरे उपर्युक्त विचारों से अपनी सहमति या असहमति दर्ज करने का कष्ट उठावें.
ईति,
आभार सहित,
-जयदीप शेखर  
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2 Comments

  1. November 19, 2010 at 9:58 am

    >आपकी सोच बिल्कुल सही है, अब देश में आपात काल जैसी स्थिति आ चुकी है. शांति तो है लेकिन वह तूफान के पहले वाली शांति है. रोज ब रोज खुलते जा रहे घोटालों और आज नया स्विस बैंकों द्वारा किया गया खुलासा इस बात का प्रतीक है कि ये विदेशों में अपना काला धन जमा करके देश को खोखला बना रहे हैं. कुछ होना चाहिए ऐसे ही लोगों के साथ. एकतंत्र न सही यहाँ तो सैन्य शासन जैसी स्थिति होनी चाहिए लेकिन क्या गारंटी कि वह भी निष्पक्ष और ईमानदारी से कार्य करेगी. इसके लिए तो जिन चेहरों पर कालिख नजर आने लगे उनका वही से बहिष्कार होना चाहिए. पहले हम तो ईमानदार हो लें कि हम हर अन्याय के खिलाफ ईमानदारी के साथ लड़ेंगे. इस दिशा में जली एक ज्योति कल मशाल बन सकती है लेकिन उसके लिए हमें एकजुट होना होगा. फिर लगता है कि सब अपने गिरेबान में झांकते होंगे तभी तो ऐसे बातों और मुहिम में साथ देने वालों की संख्या बहुत कम नजर आती है. देखते हैं कि आपके इस आह्वान में कितने लोग साथ चलने के लिए तैयार हैं? तभी तो समझेंगे की हमारी सोच को कितनाबल मिल सकता है.–

  2. November 21, 2010 at 4:14 am

    >LOgon ki mansikta mein badlav ke liye aisa post hamesha karte rahen. Dhnyavad.


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