>JANOKTI : जनोक्ति

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JANOKTI : जनोक्ति


बिहार मेँ राहुल का युवा फेक्टर फुस्स !

Posted: 24 Nov 2010 10:36 AM PST

34 साल में बिहार को 17 मुख्यमंत्री देने वाली कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा आज दहाई तक भी नहीं पहुंच सका है। कांग्रेस महज 5 सीटें ही जीत सकी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 9 सीटें मिली थीं।बिहार चुनाव राहुल गांधी के इम्तहान माना जा रहा था बिहार की जनता पर पार्टी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी की रैलियों का असर भी नहीं हुआ। राहुल गांधी ने 17 और सोनिया गांधी ने 5 सीटों परसभाएं की थीं। कांग्रेस को केवल कहलगांव और किशनगंज सीट पर जीत नसीब हुई। कहलगांव से सदानंद सिंह और किशनगंज से मोहम्मद जावेद चुनाव जीते हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी महबूब अली कैसर भी सिमरी बख्तियारपुर से चुनाव हार गए हैं।

राहुल गांधी ने इन सीटों पर चुनावी रैलियां की-

केवल कहलगांव सीट पर कांग्रेस के सदानंद सिंह विजयी हुए हैं. पहले बरबीघा सीट पर कांग्रेस आगे चल रही थी लेकिन उसके उम्मीदवार अशोक चौधरी को निर्दलीय प्रत्याशी त्रिशूलधारी सिंह ने 3000वोटों से हरा दिया।

अपडेटेड – 4.30 PM

सीट /    कौन आगे है

  1. बछव़ाडा / अवधेश कुमार राय सीपीआई (कांग्रेस चौथे स्थान पर)
  2. जमालपुर / शैलेष कुमार जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस तीसरे पर)
  3. कहलगांव/ सदानंद सिंह- कांग्रेस -जीत गए।
  4. बेगुसराय/ सुरेंद्र मेहता- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस चौथे पर)
  5. सासाराम/ जवाहर प्रसाद – भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस छठें स्थान पर)
  6. औरंगाबाद/ रामाधार सिंह- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस पांचवें स्थान पर)
  7. शेखपुरा/ रणधीर कुमार सोनी- जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस की सुनिला देवी दूसरे स्थान पर रहीं)
  8. जहानाबाद/ अभिराम शर्मा- जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस के रामजतन सिन्हा तीसरे पर)
  9. बरबीघा/ अशोक चौधरी – कांग्रेस -हार गए (निर्दलीय त्रिशूलधारी सिंह 3000 वोट से जीते)
  10. हिसुआ/ अनिल सिंह- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस की नीतू कुमारी तीसरे स्थान पर)
  11. मुज़्ज़फ़रपुर/ सुरेश कुमार शर्मा – भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस चौथे स्थान पर)
  12. सीतामढ़ी/ सुनील कुमार पिंटू- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस की रूपम कुमारी पांचवें स्थान पर)
  13. समस्तीपुर/ इस्लाम सहीम – आरजेडी (कांग्रेस तीसरे स्थान पर)
  14. रामनगर/ भागीरथी देवी- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस के नरेश राम दूसरे स्थान पर)
  15. कुचईकोट/ अमरेन्द्र कुमार पांडे- जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस चौथे स्थान पर)
  16. मांझी/ गौतम सिंह – जेडीयू (कांग्रेस पांचवे स्थान पर)
  17. ओबेरा/ प्रमोद सिंह चंद्रवंशी- जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस पाचवें स्थान पर)

इन सीटों पर सोनिया गांधी ने रैलियां की-

  1. भभुआ/ डा. प्रमोद कुमार सिंह – एल जे पी  (कांग्रेस चौथा स्थान पर)
  2. बक्सर/ सुखड़ा पांडेय – बीजेपी – (कांग्रेस छठे स्थान पर)
  3. भागलपुर/अश्विनी कुमार चौबे – भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस के अजीत शर्मा दूसरे स्थान पर)
  4. बेगुसराय/ सुरेंद्र मेहता- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस चौथे पर)
  5. किशनगंज/ मोहम्मद जावेद – कांग्रेस जीत गए (बीजेपी की स्वीटी सिंह हारीं)

सिमरी बख्तियारपुर सीट से बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चौधरी महबूब अली कैसर जनता दल यूनाइटेड के डॉ. अरुण कुमार से हारे।

Source: http://eciresults.nic.in/

इसके अलावा मज़ेदार रिजल्ट यहां रहा.. केवल 31 वोटों से बीजेपी की जीत हुई.. केवटी सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एम ए फ़ातमी के बेटे को अशोक यादव ने हराया। यहां ध्रुवीकरण विश्लेषण के लायक हो सकता है।
तभी लालू कह रहे हैं- नतीजे रहस्यपूर्ण है

Bihar – Keoti
Result Declared
Candidate Party Votes
ASHOK KUMAR YADAV Bharatiya Janata Party 45791
FARAZ FATMI Rashtriya Janata Dal 45762
MD. MOHASIN Indian National Congress 5679
SADRE ALAM Independent 2833
MADHURANJAN PRASAD Bahujan Samaj Party 1985
RAMBABU SAHU Communist Party of India (Marxist-Leninist) (Liberation) 1917
BALKRISHNA JHA Independent 1546
NESAR AHMAD Independent 991
MD.MOJAHIDUL ISLAM Janata Dal (Secular) 636
WASI AHMED KHAN Samajwadi Party 606
NAZRE ALAM Independent 584
MD.JUNAID SATTAR Muslim League Kerala State Committee 415

: Neeraj Diwan

बिहार में विकास जीता,जाति हारी

Posted: 24 Nov 2010 10:24 AM PST

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं.बिहार की जनता ने जातिवादी शक्तियों को एक सिरे से नकारते हुए एनडीए के विकास की राजनीति पर मुहर लगा दी है वो भी तीन चौथाई के आशातीत बहुमत के साथ.एक बात तो तय है कि राजग को सभी जातियों और धर्मों के लोगों का वोट मिला है अन्यथा उसे इतना प्रचंड बहुमत नहीं मिलता.जो लालू फ़िर से बिहार का राजा बनने का सपना देख रहे थे उनके विपक्ष का नेता बनने के भी लाले पड़ गए हैं.८ साल तक बिहार की मुख्यमंत्री रही उनकी पत्नी और भारत के इतिहास में एकमात्र अनपढ़ मुख्यमंत्री रही श्रीमती राबड़ी देवी कथित ससुराल और मायका यानी सोनपुर और राघोपुर दोनों जगहों से हार गई हैं.यह भारत के किसी भी राज्य में किसी भी गठबंधन की सबसे बड़ी जीत है.इतनी बड़ी जीत की उम्मीद न तो एन.डी.ए. के नेताओं को थी और न ही मीडिया को.बिहार भूतकाल में भी भारत की राजनीति को दिशा देता रहा है.१९७४ का आन्दोलन इसी पवित्र भूमि से उठा था जिसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी की तानाशाही का अंत हुआ था.उसी पिछड़े और गरीब बिहार ने एक बार फ़िर देश को विकास की राजनीति अपनाने के लिए प्रेरित किया है.साथ ही पूरे
भारत में जाति-धर्म के नाम पर जनता को मूर्ख बना रहे नेताओं को अपना एजेंडा बदल लेने की चेतावनी दे दी है.कोई ज्यादा समय नहीं हुआ यही कोई ५ साल पहले बिहार और बिहारी को बांकी भारत के लोग ही दृष्टि से देखते थे.आज बिहारी शब्द गाली का नहीं गर्व की अनुभूति देता है.नीतीश कुमार भले ही ५ साल के अपने शासन में बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल नहीं करा पाए.लेकिन उन्होंने बिहार के लोगों की आँखों में विकास और विकसित बिहार के सपने जरूर पैदा कर दिया.यहाँ तक कि विपक्ष के लोग भी कहीं-न-कहीं सीमित सन्दर्भ में ही सही विकास के वादे करने के लिए बाध्य हो गए.उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि जो एक बिहारी होने के नाते मैं मानता हूँ वह रही है जंगल राज वाले राज्य में कानून के शासन की स्थापना.आधारभूत संरचना का भी बिहार में पर्याप्त विकास हुआ है.सड़कों से लेकर पुल निर्माण तक काम धरातल पर नज़र आ रहा है.बिहार की जो जनता ५ साल पहले अपने बच्चों को अपहरणकर्ता बना रही थी वही जनता अब अपने बेटे-बेटियों को डॉक्टर-इंजिनियर बनाने का सपना देखने लगी है.नीतीश सरकार ने उच्च विद्यालयों में पढनेवाले बच्चों को सरकार की तरफ से साईकिल उपलब्ध कराई जिससे लड़कियां भी दूर-दूर तक पढने के लिए जाने लगीं.हालांकि जवाब में लालू ने बच्चों को मोटरसाईकिल देने का वादा किया लेकिन लोगों ने इसे लालू का मजाक मान लिया.वैसे भी लालू इस बार के चुनाव प्रचार में भी कभी गंभीर होते नहीं दिखे.प्रत्येक जनसभा में लोगों को चुटकुले सुनाते रहे.उनकी सभाओं में लोगों की भीड़ जरूर जमा होती रही लेकिन उसका उद्देश्य लालू की हँसानेवाली बातों का मजा लेना मात्र था.कुल मिलाकर जो लोग राजग सरकार से खुश नहीं थे उनके सामने भी विकल्पहीनता की स्थिति थी.लालू को वे वोट दे नहीं सकते थे और लालू के अलावा राज्य में दूसरा कोई सशक्त विकल्प था ही नहीं.इसलिए थक-हारकर उन्होंने भी राजग को मत दे दिया.चुनाव प्रचार के समय राजग ने बड़ी ही चतुराई से लोजपा और राजद को दो परिवारों की पार्टी बताना शुरू कर दिया था.इसका परिणाम यह हुआ कि यादव और पासवान जाति के लोग भी इस बात को समझ गए कि ये लोग वोट बैंक के रूप में सिर्फ उनका इस्तेमाल कर रहे हैं.लगभग सभी चरणों में जिस तरह पिछले चुनावों से कहीं ज्यादा % मतदान हो रहा था इससे लोग कयास लगा रहे थे कि जैसा कि होता आया है इस स्थिति में जनता ने कहीं सरकार के खिलाफ तो वोट नहीं दिया है.लेकिन हुआ उल्टा.इसका सीधा मतलब यह है कि जो भी मत % बढ़ा वह मत सरकार के समर्थकों का था.हद तो यह हो गई कि राजग को मुस्लिम-यादव बहुल क्षेत्रों में भी अप्रत्याशित सफलता हाथ लगी और मई समीकरण का नामो-निशान मिट गया.चुनाव में जदयू और भाजपा दोनों को ही लगभग ३०-३० सीटों का लाभ हुआ है.अभी तक तो तमाम वैचारिक मतभेदों के बावजूद गठबंधन सफल रहा है.लेकिन जिस तरह जदयू को साधारण बहुमत से कुछ ही कम सीटें आई हैं उससे नीतीश कुमार के लिए भाजपा की जरुरत निश्चित रूप से कम हो जाएगी.इसलिए भाजपा के लिए नीतीश को संभालना अब और भी मुश्किल साबित होने जा रहा है.हालांकि इन चुनावों में राजग को मात्र ४१-४२ % जनता का वोट मिला है लेकिन इसी अल्पमत के बल पर उसने तीन चौथाई सीटें जीत ली हैं.यह शुरू से ही हमारे लोकतंत्र की बिडम्बना रही है कि देश में हमेशा अल्पमत क़ी सरकार बांटी रही है.देखना है कि सरकार जनता को किए गए वादों में से कितने को पूरा कर पाती है.प्रचार अभियान के दौरान राजग ने बिजली,रोजगार सृजन और भ्रष्टाचार सम्बन्धी नए कानून के क्रियान्वयन का वादा किया था.डगर आसान नहीं है.खासकर भ्रष्टाचार ने जिस तरह से शासन-प्रशासन के रग-रग में अपनी पैठ बना ली है.उससे ऐसा नहीं लगता कि नीतीश भ्रष्टाचारियों खासकर बड़ी मछलियों की संपत्ति पर आसानी से सरकारी कब्ज़ा कर उसमें स्कूल खोल पाएँगे जैसा कि उन्होंने अपने भाषणों में वादा किया था.पिछली बार से कहीं ज्यादा आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग राजग की तरफ से जीत कर विधानसभा में पहुंचे हैं.इन पर नियंत्रण रखना और इन पर मुकदमा चलाकर इन्हें सजा दिलवाना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगी.अगले साल बिहार में पंचायत चुनाव होनेवाले हैं.राजग सरकार इसे दलीय आधार पर करवाना चाहती है.अगर ऐसा हुआ तो निश्चित रूप से इन चुनावों में भी राजग जीतेगा और सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाएगी.राज्य में पंचायत स्तर पर और जन वितरण प्रणाली में जो व्यापक भ्रष्टाचार है वह किसी से भी छुपा हुआ नहीं है.हालांकि गांवों में शिक्षामित्रों की बहाली कर दी गई है लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक में अभी भी गुणात्मक सुधार आना बांकी है.बिहार में १५ सालों के जंगल राज में उपजी हुई और भी बहुत-सी समस्याएं हैं जिनका समाधान नीतीश को अगले पांच सालों में ढूंढ निकालना होगा.बिहार की २१वीं सदी की जनता ज्यादा दिनों तक इंतज़ार करने के मूड में नहीं है.जनता को न तो उसको रीझते और न ही खीझते देर लगती है.राजग को यह समझते हुए राज्य को समस्याविहीन राज्य बनाने की दिशा में अग्रसर करना होगा.नहीं तो राजग का भी राज्य में वही हश्र होगा जो इस चुनाव में लालू-पासवान और कांग्रेस का हुआ है.

जदयू-भाजपा गठबंधन विशाल बहुमत की ओर

Posted: 24 Nov 2010 07:17 AM PST

नीतीश कुमार ने इस चुनाव में विकास का मुद्दा क्या बनाया जातिवाद और सम्प्रदायवाद से घिरा बिहार का नजारा ही बदल गया. आज पहली बार दिखा कि बिहार की जनता ने ना तो वंशवाद को चलाने वाले को बिहार की जमीन पर टिकने दिया ना ही भाई भतीजावाद करने वाले पार्टियों को बिहार की सत्ता पर काबिज होने का मौका दिया. इस बार महिलाओ ने बिहार के कमान संभाला है. ऐसा माना जा रहा है. इस बार नए समीकरण उभरकर सामने आये है. एमएमएम अर्थात महिला-मध्यम वर्ग-मुसलमान| इससे यही साफ हो गया है कि नितीश और सुशिल मोदी की गठबंधन सरकार बिहार के जनता की उम्मीदों पर खरे उतरे है.

बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का जदयू-भाजपा गठबंधन विशाल बहुमत से वापस सत्ता में लौट रहा है.

कुल 243 में से 206 सीटों पर जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन नए रिकॉर्ड जीत कायम करना तय हो चूका है.

लालू-पासवान के साथ कोंग्रेस के युवराज को भी करारा जवाब दिया है, बिहार की जनता ने इतने बड़े मतों में अंतर से जीताकर.

परमपिता को प्रणाम

Posted: 24 Nov 2010 06:52 AM PST

परमपिता  को प्रणाम

एक राजा था ! उसके राज्य में सब प्रकार से सुख शांति थी ! किसी प्रकार का कोई वैर-विरोध नहीं था ! जनता हर प्रकार से सुखी थी ! परंतु राजा को एक बहुत बडा दुख था कि उसकी कोई संतान न थी ! उसे अपना वंश चलाने की तथा अपने उत्तराधिकारी की चिंता खाए जा रही थी ! मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारे में जाकर माथा टेका ! कई तीर्थ स्थानों की यात्रा की ! परंतु कोई लाभ न हुआ ! संतान की कमी उसे दिन ब दिन खाए जा रही थी !

बहुत सोच विचार के पश्चात उसने अपने राज्य के सभी विद्वानों, पण्डितों को बुलवाया और उनसे संतान प्राप्ति का उपाय ढूंढने को कहा ! सभी विद्वानों ने विचार विमर्श किया ! राजा की जन्म कुंडली का गहन विश्लेषण किया ! अंत में वे सभी एक मत से एक निष्कर्ष पर पहुंचे !  उन्होंने राजा से कहा कि यदि कोई ब्राह्मण का बच्चा अपनी खुशी से देवता को बलि दे तो आपको संतान की प्राप्ति हो सकती है !

राजा ने विद्वानों की बात सुनी ! उसने सारे राज्य में मुनादी करा दी कि यदि कोई ब्राह्मण का बच्चा अपनी इच्छा से खुशी-खुशी बलि दे देगा तो उसके घर वालों को बहुत सा धन दिया जायगा !

राजा के राज्य में एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण था ! कई दिन फाके में ही गुजर जाते थे ! उसके चार लडके थे ! बडे तीन लडके तो अपना काम धंधा करते थे और अपने परिवार को आर्थिक सहयोग देते थे ! परंतु जो सबसे छोटा लडका था वो कोई काम नहीं करता था ! उसका सारा ध्यान हमेशा भगवान भक्ति में लगा रहता था उसका सारा दिन सदकर्म करते हुए भगवान का सिमरण करते ही बीत जाता था ! उसके पिता ने भी मुनादी सुनी ! सोचा यह लडका निठल्ला है ! कोई काम-धंधा भी नहीं करता ! इसको बलि के लिए भेज देते है ! राजा से धन  मिल जायगा तो घर की हालत कुछ सुधर जायगी !

ब्राह्मण अपने चौथे सबसे छोटे लडके को लेकर राजा के पास पंहुचा ! राजा ने उस लडके से पूछा – “क्या तुम बिना किसी दबाव के, अपनी मर्जी से, अपनी खुशी से बलि देने को तैयार हो ?”

“जी महाराज !” लडके ने बडी विनम्रता से उत्तर दिया – “यदि मेरी बलि देने से आपको संतान की प्राप्ति होती है तो मैं खुशी से अपनी बलि देने को तैयार हूं !”

राजा उसका उत्तर सुन कर बहुत प्रसन्न हुआ ! सभी विद्वानों ने सलाह करके बलि देने के लिए शुभ मुहुर्त निकाला और राजा को बता दिया ! लडके के पिता को बहुत सारा धन आदि देकर विदा किया ! लडके को अतिथि ग्रह मे ठहराया गया ! हर प्रकार से उसका ख्याल रखा गया ! अंत में उसकी बलि देने का दिन भी आ गया !

राजा ने लडके को बुलाया और कहा – “आज तुम्हारी बलि दे दी जायगी ! अगर तुम्हारी कोई आखरी इच्छा हो तो बताओ हम उसे पूरी करेंगें !”

“मुझे कुछ भी नहीं चाहिए !” ब्राह्मण पुत्र ने कहा – ” बस मैं बलि देने से पहले नदी में स्नान करके पूजा करना चाहता हूं !”

राजा यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुआ और बोला – “ठीक है ! हम भी तुम्हारे साथ नदी तक चलेंगें !”

उस लडके ने नदी में स्नान किया ! फिर नदी किनारे की रेत को इकट्ठा किया और उसकी चार ढेरियां बना दी !  उसने चारों ढेरिओं की ओर देखा ! फिर एक ढेरी को अपने पैर से गिरा दिया ! फिर उसी प्रकार से दूसरी ढेरी को भी गिरा दिया ! फिर तीसरी ढेरी को भी गिरा दिया अब वो चौथी ढेरी के पास गया ! उसके चारों ओर तीन बार चक्कर लगाया ! हाथ जोडकर उसको माथा टेका ! उसकी वन्दना की और राजा के पास बलि देने के लिए आ गया !

राजा उसका यह सारा करतब बडे ही कौतुहल से देख रहा था ! पहले तो राजा ने सोचा कि बालक है ! रेत से खेल रहा है ! परंतु जब राजा ने देखा कि उसने चौथी ढेरी को हाथ जोड कर प्रणाम किया है तो राजा को इसका रहस्य जानने की इच्छा हुई ! राजा ने बालक से पूछा  “बालक, तुमने रेत की चार ढेरियां बनाई ! फिर उनमें से तीन को तोड दिया और चौथी को प्रणाम किया ! इसका क्या रहस्य है ?”

पहले तो बच्चे ने कोई उत्तर नहीं दिया ! परंतु राजा के दोबारा पूछ्ने पर लडके ने कहा – “राजन, आपने बलि के लिए मुझे कहा है ! मैं बलि देने के लिए तैयार हूं ! आप अपना काम कीजिए ! आपने इस बात से क्या लेना कि मैंने रेत की वो ढेरियां क्यों तोडी हैं !”

राजा को बालक से ऐसे उत्तर की आशा न थी ! राजा ने उससे कहा – “बालक, हमने तुम्हारे पिता को तुम्हारी कीमत देकर तुम्हें खरीदा है ! तुम हमारे खरीदे हुए गुलाम हो ! इसलिए हमारे हर प्रश्न का उत्तर देना और हमारी हर बात को मानना तुम्हारा धर्म बनता है !”

“हे राजन, जब आप जिद कर रहे हैं तो सुनिए !” लडके ने उत्तर दिया  – “जब कोई बच्चा पैदा होता है तो सबसे पहले उसके माता-पिता उसकी रक्षा करते है ! अगर वो आग के पास जाने लगता है तो उसको उससे बचाते हैं  ! उसकी हर प्रकार से रक्षा करने की जिम्मेवारी उनकी होती है ! लेकिन यहां तो मेरे पिता ने ही धन के लालच में मुझे बलि देने के लिए आपके पास बेच दिया ! इसलिए पहली ढेरी जो उनके नाम की बनाई थी वह मैंने ढहा दी !”

लडके ने आगे कहा – “दूसरी जिम्मेदारी राजा पर होती है अपनी प्रजा की रक्षा करने की ! आप ने मुझे अपनी संतान प्राप्ति के लिए बलि देने के लिए खरीद लिया ! तब आपसे क्या प्रार्थना करता ! इसलिए दूसरी ढेरी जो मैंने आपके नाम की बनाई थी वो भी तोड दी !”

“तीसरा भार जीवों की रक्षा करने का देवी-देवताओं का होता है !” बालक ने तीसरी ढेरी का रहस्य बताते हुए कहा – “लेकिन यहां तो देवता स्वयं ही मेरी बलि लेने को तैयार बैठा है ! तो इससे क्या प्रार्थना करनी ? इसलिए मैंने तीसरी ढेरी भी तोड दी !”

“लेकिन चौथी ढेरी का क्या रहस्य है ?” राजा ने पूछा !

“और अंत में सहारा होता है ! भगवान का ! इश्वर का !” बच्चे ने रेत की ढेरियों का रहस्य खोलते हुए कहा – “मेरी बलि दी जानी थी ! सो मैंने अंत में इश्वर से प्रार्थना की ! प्रभु की पूजा अर्चना करके उनसे रक्षा करने के प्रार्थना की ! अब वो ही मेरी रक्षा करेंगें ! वही होगा जो इश्वर को मंजूर होगा ! मैं बलि देने के लिए तैयार हूं !” इतना कहकर वो बालक राजा के पास जाकर सिर झुका कर खडा हो गया !

राजा उस छोटे से बालक की इतनी ज्ञान की बातें सुनकर सन्न रह गया !  राजा ने सोचा मैं इस बालक की बलि दे दूंगा !  ब्राह्मण हत्या भी हो जायगी ! फिर पता नहीं मुझे जो संतान प्राप्त होगी वो कैसी होगी ! प्रजा का ख्याल रखने वाली होगी या नहीं ! कहीं मेरा और वंश का नाम ही न डुबो दे ! यह बालक गुणवान है ! इश्वर भक्त है ! सब प्रकार से मेरे लायक है ! क्यों न मैं इसे ही गोद ले लूं और इसे ही अपना पुत्र बना लूं ! इतना विचार करते ही उसने उस बालक की बलि देने का कार्यक्रम रद्द कर दिया और उस बालक को गोद ले लिया ! कहते हैं उस बालक में अच्छे गुण होने के कारण उसने कई सालों तक राज्य किया और हर प्रकार से प्रजा की रक्षा की ! उसके राज्य में किसी को किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं था !

[एक सतसंग में सुनी कथा के आधार पर ]

राम कृष्ण खुराना

लालू ने दी नीतीश को बधाई

Posted: 24 Nov 2010 06:46 AM PST

अन्य राजनीतिक पार्टियां जहां जात पांत की रोटी सेंकने में व्यस्त रहीं वहीं सोशल इंजीनियरिंग के जादूगर नीतीश कुमार एक सिरे से विकास का मुद्दा लेकर चुनाव मैदान में डटे रहे। विकास के मुद्दे के साथ बिहार में व्यावहारिक और धर्मनिरपेक्ष राजनीति के अगुवा नीतीश कुमार ने एक बार फिर राजग को प्रदेश में भारी जीत दिलाई है और रिकार्ड बहुमत हासिल कर विरोधियों को धराशाई कर दिया।बहुमत के साथ जीत का करिश्मा एक बार फिर दुहराते हुए 54 वर्षीय नेता ने लालू प्रसाद के राजद और रामविलास पासवान के लोजपा गठबंधन, कांग्रेस और अन्य पार्टियों को पांच वर्ष के कार्यकाल के बाद एक बार फिर चारों खाने चित कर दिया है।

बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जद यू-भाजपा गठबंधन की जीत पर सवाल उठाते हुए राजद प्रमुख लालू प्रसाद और लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने कहा कि हम एक महीने में इस ‘जादुई परिणाम’ के रहस्य को उजागर करेंगे. विधानसभा चुनाव में अपने गठबंधन की पराजय को स्वीकार करते हुए लालू प्रसाद ने कहा, ‘हम जनता के मत को आदर के साथ स्वीकार करते हैं. हमारे मन में किसी के बारे में कोई कटुता नहीं है. लेकिन हम इस जादुई परिणाम के रहस्य का पता लगायेंगे और एक महीने में इसे उजागर करेंगे क्योंकि बिहार में कोई भी रहस्य कभी छिपा नहीं रहता है.’लालू प्रसाद ने चुनावी जीत के लिए नीतीश कुमार को तो बधाई दी लेकिन भाजपा को नहीं. उन्होंने कहा कि हम इस अप्रत्याशित पराजय से हतोत्साहित नहीं है क्योंकि बिहार की ही जनता ने हमें ऊंचाइयों तक पहुंचाया.

लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने कहा, ‘हम नीतीश कुमार सरकार के छल प्रपंच और भ्रष्टाचार को जनता के सामने रखने में विफल रहे. हम देखेंगे कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार का महल बनायेंगे या विकास का.’यह पूछे जाने पर कि क्या लालू प्रसाद बिहार की जनता की नब्ज को पहचानने में विफल रहे, राजद अध्यक्ष ने कहा, ‘किसी भी गलतफहमी में नहीं रहें, बिहार की जनता हमें समझती है और हम भी बिहार की जनता को समझते हैं.चुनाव में लालू बनाम नीतीश की बात को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि नीतीश ने बिहार की गरीबी, तरक्की, विकास की दुहाई देते हुए एक मौका और मांगा था. जनता ने नीतीश को एक और मौका दिया है. अब उन्हें जीत के उन्माद में बहने की बजाए काम करने की जरूरत है. वहीं, इस विषय पर पासवान ने कहा, ‘यह जनता है. इसी जनता ने आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी को धूल चटा दी थी लेकिन अगले ही चुनाव में उन्होंने दो तिहाई सीट प्राप्त कर वापसी की थी.’उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि हम भ्रष्टाचार के विषय पर जनता को समझा नहीं पाए या जनता इस विषय को समझ नहीं पायी. विकास के हौवे में भ्रष्टाचार का मुद्दा दब गया.’ उन्होंने कहा कि जिस कैग की रिपोर्ट को लेकर पिछले 10 दिनों से संसद में कामकाज बाधित है, उसी तरह की एक कैग रिपोर्ट नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ भी है जिसे वह खारिज कर रहे हैं. पासवान ने कहा कि अब नीतीश कुमार के समक्ष लालू, पासवान को रोड़ा बताने का कोई मौका नहीं है अब उन्हें अति पिछड़ा, महादलित, बटाईदारी जैसे मुद्दों पर रुख स्पष्ट करना होगा और काम करना होगा.

बिहार चुनाव परिणाम

Posted: 24 Nov 2010 04:30 AM PST

बिहार विधानसभा के रूझानों के बाद स्पष्ट हो गया है कि मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का गठबंधन विशाल बहुमत से वापस सत्ता में लौट रहा है .कुल 243 में से 202 सीटों पर जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन आगे है.अब तक कुल 130 सीटों के परिणाम आ चुके हैं और नीतीश गठबंधन को इनमें से 112 सीट मिले हैं. आरजेडी को अबतक 10 सीट मिले हैं.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने वर्तमान पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और विधानसभा को विघटित कर दिया गया है.संभावना है कि नए मुख्यमंत्री के तौर पर वो शुक्रवार को शपथग्रहण करेंगे.

बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-जनता दल (युनाइटेड) गठबंधन की जबर्दस्त जीत की खूशी पटना शहर की सड़कों और गलियों में देखी जा सकती है। हर जगह जश्न का माहौल है। गली से लेकर चौराहें तक में लोग पटाखे फोड़ रहे हैं। पटना शहर क्षेत्र में विधानसभा की चार सीटें दीघा, कुम्हरार, पटना साहिब तथा बांकीपुर आते हैं। इन सभी सीटों पर राजग के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। पटना स्थित भाजपा और जद (यु) कार्यालय तथा मुख्यमंत्री आवास पर तो जश्न का माहौल है ही पटना के आम लोगों में इस जीत को लेकर उत्साह का माहौल है।

क्या होगी बिहार में नीतीश कि वापसी ?

Posted: 23 Nov 2010 09:32 PM PST

किसकी बनेगी बिहार में सरकार? नीतीश मारेंगे बाजी या लालू की होगी जयजयकार? रामविलास पासवान होंगे किंग मेकर या फिर बीजेपी के इशारों पर नाचेगी सरकार? न जनता को पता है और न नेताओं को खबर।बिहार विधानसभा चुनावों की मतगणना के आरंभिक दौर के बाद मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का गठबंधन स्पष्ट बढ़त बनाता हुआ नज़र आ रहा है.कुल 243 में से 177 सीटों पर जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन आगे है.लालू प्रसाद यादव का राष्ट्रीय जनता दल और लोकजनशक्ति पार्टी का गठबंधन काफ़ी पीछे दिखाई पड़ रहा है.कांग्रेस का प्रदर्शन काफ़ी निराशाजनक नज़र आ रहा है. पिछले चुनाव में उन्हें नौ सीटें मिली थीं लेकिन इस बार अभी तक के रूझान बता रहे हैं कि उन्हें कुल चार सीटों पर ही बढ़त हासिल है.

जहाँ सीएनएन आईबीएन द वीक के चुनाव पश्चात अध्ययन ने जदयू-भाजपा गठबंधन को 185 से 201 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है, वहीं स्टार एसी नील्सन एक्जिट पोल ने नीतीश कुमार की अगुवाई वाले इस गठजोड़ को 150 सीटें दी हैं। वहीँ दूसरी तरफ सीएनएन-आईबीएन, द वीक पोस्ट पोल स्टडी के अनुसार लालू प्रसाद यादव की अगुवाई वाले राजद लोजपा गठबंधन को 22 से लेकर 32 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस को छह से बारह तक सीटें मिलने की संभावना है। वामदलों और अन्य को 9 से 19 तक सीटें मिल सकती हैं।
सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि करीब 54 प्रतिशत मतदाता नीतीश कुमार को दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाह रहे हैं, जबकि केवल 28 फीसदी मतदाताओं ने लालू और राबड़ी को पसंद किया है।

बेईमानों की भी कराई जाए जनगणना

Posted: 23 Nov 2010 09:19 PM PST

आजादी के बाद से ही यह कौतुहल का विषय रहा है कि भारत में कितने % लोग बेईमान हैं.हर आदमी के पास अपने-अपने आंकड़े हैं.लेकिन कल तो हद ही हो गई.भारत सरकार के अटोर्नी जनरल ने खुद अपने मुखारविंद से सर्वोच्च न्यायालय में भारत के लोगों पर आरोप लगाया कि भारत की शत-प्रतिशत जनता बेईमान हो गई है.इसका तो सीधा मतलब जनता ने यह निकाला कि श्री वाहनवती भी बेईमान हैं.उनके इस आरोप ने इस बहस को और भी तेज कर दिया है.साथ ही एक नई दिशा भी दे दी है.चूंकि राजीव गांधी के काल में १०% ईमानदार लोग देश में बचे हुए थे इसलिए राजीव ने संसद में स्वीकार किया था कि दिल्ली से चले पैसे का मात्र १०% ही जनता तक पहुँच पाता है.यह भी एक अनुमान ही था क्योंकि इस सम्बन्ध में सरकार के पास कोई विश्वस्त आंकड़े नहीं थे.हालांकि फ़िर भी राजीव ने मेरा भारत महान का महान नारा दिया और पहले भूतपूर्व और बाद में अभूतपूर्व हो गए.लेकिन इसके कुछ ही समय बाद यशवंत फिल्म में भी नाना पाटेकर ने इसकी पुष्टि की कि १०० में ९० भारतीय बेईमान हैं फ़िर भी मेरा भारत महान है.अब वर्तमान काल में कितना पैसा जनता तक पहुँच पा रहा है यह पता करने का सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया है और न ही प्रधानमंत्री ने लम्बे समय से इस सम्बन्ध में कोई बयान ही दिया है.अगर अटोर्नी जनरल के आरोप को सही मान लें तो फ़िर जनता तक एक भी पैसा नहीं पहुंचना चाहिए.लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा हो नहीं पा रहा है.इसलिए सरकार को यह पता लगाने के लिए कि देश में कितने लोग बेईमान और कितने लोग ईमानदार हैं बेईमानी को भी चल रही जनगणना में शामिल करना चाहिए.इससे सबसे पहले तो यही फायदा होगा कि यह अनुमान लगाने में सुविधा होगी कि योजनाओं की कितनी राशि जनता तक पहुँच पा रही है.चूंकि ईमानदारों की संख्या का % जनता तक पहुंचे धन % के समानुपाती होता है इसलिए सरकार यह मालूम हो जाने के बाद अलग से घोटाले के लिए राशि का प्रावधान कर सकेगी.इस जनगणना में मैं बेईमानों की ग्रेडिंग की अनुशंसा करता हूँ ए,बी,सी,डी आदि में.इसका भी अपना लाभ होगा.जिस पद के लिए जिस श्रेणी का बेईमान चाहिए उस पद के लिए उसी श्रेणी के बेईमान की नियुक्ति की जा सकेगी.जैसे राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों के लिए,दूरसंचार मंत्री के पद के लिए आसानी से ए ग्रेड के बेईमान ढूंढें जा सकेंगे.इसके साथ ही होशियार और मूर्ख बेईमानों की भी अलग-अलग श्रेणी बनानी पड़ेगी.होशियार बेईमानों में उन्हें शामिल किया जाना चाहिए जो घोटाला करने के बावजूद मामले को उजागर नहीं होने देने में माहिर हैं.आज देश को ऐसे बेईमानों की सख्त जरुरत है.वैसे भी इसका सबसे ज्यादा लाभ स्वयं कांग्रेस पार्टी को ही होगा क्योंकि उसके शासन में ही सबसे ज्यादा घोटाले होते हैं.वर्तमान में भी मूर्ख बेईमानों के मंत्री बन जाने के चलते मामला प्रकाश में आ जा रहा है और सरकार की किरकिरी हो रही है.वैसे तो हमारी सरकारें सत्येन्द्र दूबे,अभयानंद और किरण बेदी सरीखे ईमानदारों को पहले से ही उनकी ईमानदारी के लिए दण्डित करती रही हैं.लेकिन जनगणना के बाद ईमानदारों को और भी आसानी से चिन्हित करके दण्डित किया जा सकेगा.इसके साथ ही सरकार को उत्कृष्ट कोटि के बेईमानों के लिए बेईमान रत्न और उच्च कोटि के बेईमानों के लिए बेईमान विभूषण,बेईमान भूषण,बेईमान श्री पुरस्कार देने की व्यवस्था करनी चाहिए.इससे लाभ यह होगा कि ईमानदार अपनी ईमानदारी भरी व्यवस्था विरोधी गतिविधियों के प्रति हतोत्साहित होंगे और भारत को पूरी दुनिया में प्रथम शत-प्रतिशत बेईमान देश बनने का गौरव प्राप्त हो सकेगा.इसके साथ ही ईमानदारों के लिए कठोर कानून बनाया जाना चाहिए जिससे कोई भूलकर भी इस गलत और अपने और अपने परिवार के लिए दुखदायी मार्ग पर चलने की भूल नहीं करे.इन्हीं चंद ईमानदारों के चलते भारत प्रसन्न देशों की सूची में लगातार नीचे खिसक रहा है.लोकतंत्र बहुमत से चलता है यह तो सरकार जानती ही है.हम बेईमानों को भी अपनी जनसंख्या के अनुपात में सत्ता में भागीदारी चाहिए.जिसकी जितनी हिस्सेदारी उतनी उसकी भागेदारी.मैं अंत में सरकार को चेतावनी देता हूँ कि अगर वह हमारी बेईमानों की जनगणना की मांग को नहीं मानती है तो हम न सिर्फ संसद बल्कि पूरे देश को ठप्प कर देंगे क्योंकि देश में प्रत्येक जगह हमारा बहुमत है और सरकार भी यह बात जानती है.

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